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  #451  
Old 24th September 2010
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Riya jaan Riya jaan is offline
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Riya jaan is hunted by the papparaziRiya jaan is hunted by the papparazi
nice story

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  #452  
Old 24th September 2010
raj2761 raj2761 is offline
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उसकी जवानी से मेरा लंड फिर से खड़ा हो कर कूद रहा था..

वो मेरे लंड को आगे पीछे करने के बजाए दबा रही थी, मैं गरम हो कर बोला- चाँदनी, चूस ना मेरा !
तो वो बोली- "क्या"


तो मुझे लगा कि पहले इसको समझा देना ज़रूरी होगा कि सेक्स कैसे करते हैं ताकि मज़ा आए।
मैंने उसको बताया कि सेक्स में लड़का और लड़की नंगे हो कर जो चाहे और जैसे चाहे करते हैं और कोई मना नहीं करता।

तो बोली- फिर बच्चा हो जाता होगा?


तो मैंने समझाया- हम लोग जो कर रहे हैं जैसे तुम मेरे लंड को दबा रही हो, या अगर इसको चूसोगी और मैं तुम्हारी चूची चूसूंगा या होंठ को चूमूंगा और चुसूंगा तो बच्चा नहीं होगा। यह चुदाई के पहले का खेल है जिसको "फोर-प्ले" कहते हैं।


जब लन्ड को चूत में घुसा कर असली चुदाई होती है, चुदाई करते करते जब लंड अपना पानी छोड़ता है और साथ में चूत भी पानी छोड़ती है तब बच्चा होने की संभावना होती है और अक्सर समझदार लोग चोदने के बाद झड़ने के समय लंड चूत से निकल के झाड़ते है, जैसे मैंने मुठ मार के किया। ऐसा करने से बच्चा नहीं होता और सेक्स का पूरा मज़ा आता है।

तो वो बोली- वो तो ठीक है ! पर मेरी चूची आप क्यूँ चुसोगे? वो तो छोटे बच्चे चूसते हैं और मैं आपका ये "लंड" क्यूँ चूसूंगी ?
तो मैं बोला- करके तो देखो कितना मज़ा आता है।

तो शायद वो पूरी तरह राज़ी नहीं हुई, तो मैंने एक ब्लू फिल्म की सीडी लगाई और उसको लेकर बिस्तर में लेट गया....

फिल्म में लड़की ने लड़के के झूलते हुए लौड़े को पहले निकाला फिर हाथ से खेल खेल के बड़ा किया तो वो बोली- आपका तो पहले से ही बड़ा है...

फिर फ़िल्म की लड़की उसके लंड के सुपारे को चूसने लगी लॉली-पोप जैसे और उसके लंड से खेलने लगी तो उसने भी मेरा लौड़ा पकड़ा और चूसने के लिए मुँह नीचे किया तो मैंने उसको बोला- तुम पहली बार करोगी तो रूको !

और मैंने झट से लंड की टोपी में खूब सा शहद लगाया और उसको चूसने को दिया। उसको टोपी चूसने में मज़ा आने लगा तो मैंने धीरे धीरे पूरा 6 इंच का लंड उसके मुँह में घुसाया और अब फिल्म वाले के जैसे चाँदनी का मुँह चोदने लगा..

फिल्म में वो लोग 69 करने लगे। फिर लड़का लड़की को बिस्तर में किनारे लिटा कर उसकी चूची दबाते हुवे उसकी चूत चाटने लगा तो वो मुझको बोली- आप भी ऐसे करो ना...
मैं मन ही मन सोच रहा था कि मैं पक्का खिलाड़ी इस नई चिड़िया को तो चोद चोद के रंडी बना दूँगा ...

मैंने उसकी ब्रेड के बन जैसी कुँवारी चूत के होंठ खोल कर उसमें भी शहद डाला, फिर 69 करने लगा...
मैं ऊपर चढ़ कर उसके मुँह को चोद रहा था और उसकी चूत भी चाट रहा था और वो मज़े से सिसकियाँ भर रही थी...
और फिर झर भी गई.......

अब उसका ध्यान टीवी पर गया जहाँ अब चुदाई शुरू हो गई थी, लड़की लड़के के ऊपर चढ़ कर उसको चोद रही थी और उसको बार बार अपनी चूची चुसवा रही थी ! बीच बीच में लड़के का लण्ड चूत से फिसल के निकल भी जाता था, तो वो दोबारा घुसा कर चोदने लगती।

तो वो बोली- चलो। हम भी ऐसा ही करते हैं !

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  #453  
Old 24th September 2010
raj2761 raj2761 is offline
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मैं समझ गया कि चाँदनी अब चुदने के लिए पूरी तरह तैयार है पर उसको यह नहीं अंदाज़ है कि वो फिल्म की लड़की कितना चुद चुकी है, और इसकी पहली बार चुदने वाली कसी चूत ! काफ़ी अंतर है दोनों में !

तो मैंने उसको बिस्तर के किनारे पर लिटाया, उसको उसके दोनों पैर कंधे तक मोड़ कर पकड़ने को कहा। लण्ड में एक कॉण्डम लगाया और उसको बताया कि हम जब चुदाई करंगे और अगर ग़लती से भी मैं झड़ने के समय चूत से लण्ड ना भी निकालूं तो मेरा पानी जो कि तुम्हारे ऊपर मूठ मारते समय गया था, वो इसी के अंदर रह जायगा और किसी भी हालत में बच्चा नहीं होगा।

तो वो खुशी से मुझे चूमने लगी और बोली- आप कितने समझदार हो.... प्लीज़ अब जल्दी करो ना ...
मैं सोच रहा था कि मेरी समझ तो इसको अभी पता चलेगी जब इसकी चूत फटेगी और किस्मत साथ देगी तो दस मिनट बाद इसकी गाण्ड भी मारूँगा...

मैं लण्ड के सुपारे को उसकी चूत के दाने में रगड़ने लगा, साथ साथ उँगली चूत में उंगली घुसा कर रास्ता बनाने लगा और इन सब में मैं जोकि अब तक दस के करीब चूत चोद चुका था और पिछले 14 साल से किसी ना किसी की चूत चोद रहा हूँ, भी कंट्रोल में मुश्किल से था, मैंने अब एक हाथ से लण्ड पकड़ कर उसकी चूत में सुपारे को सही जगह में बिठाया और उसको अपनी पूरी पकड़ में लेकर चूची चूसते हुए बोला- चाँदनी, अब मेरा लौड़ा तेरी चूत में घुसेगा और तुझे खूब मज़ा भी आएगा और अगर तुझे दर्द हो तो अपनी टाँगे ऊपर की तरफ उठा लेना।


तो वो बोली- ठीक है !
और मैं एक पक्के खिलाड़ी की तरह उसको जकड़ कर उसके होंठ चूसने लगा ताकि उसकी चीख मेरे मुँह में दब के रह जाए और उसकी गाण्ड के छेद में उंगली करते हुए उसको और ज़्यादा गरम किया। फिर एक करारे झटके से अपने लण्ड को उसकी चूत में आधा से ज़्यादा पेल दिया।

वो चीखी पर आवाज़ दब गई, दर्द हुआ तो टाँगें उठा ली और मैंने उसकी आँखो से अचानक हुए दर्द से निकले आँसुओं को चाटते हुए उसको पूछा- कैसी हो ...

तो वो बोली- आपने तो कसाई की तरह चाकू चला दिया, मैं तो बस मरते मरते बच गई...
मैंने बोला- तो चलो निकल लेता हूँ !
तो वो बोली- नहीं, थोड़ा रूको !


तो मैंने जितना घुसा था, उतने में ही लौड़े को आगे पीछे करना चालू कर दिया। जिससे उसको आराम लगा तो मौका देख कर दूसरे और तीसरे तेज़ झटके में में पूरा 6 इंच से भी बड़ा लौड़ा उसकी चूत के अंदर कर दिया और उसकी गान्ड की गोलाइयों को मसलते हुवे उसकी जाँघ सहलाने लगा।
तो वो बोली- निकालो-निकालो ! मैं मर जाउंगी

तो मैंने कहा- चाँदनी, जब सब हो गया तो अब निकालने का क्या मतलब, अब तो तुम वो फिल्म वाली जैसे मज़े लो !

और मैंने उठ कर उसको उसकी चूत में घुसा मेरा लौड़ा दिखाया तो उसको विश्वास नहीं हुआ कि मेरा पूरा का पूरा लौड़ा घुस चुका है।

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  #454  
Old 24th September 2010
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bahut hi ache
keep posting

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  #455  
Old 24th September 2010
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MAZE LE LO
 
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abey meri post kahan rah gayi,bahut hi achi kahani hai

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  #456  
Old 24th September 2010
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मैंने अब तक बहुत सब्र से काम लेते हुए अपने लौड़े को कुँवारी चूत में घुसाया था, पर अब मेरा सब्र साथ नहीं दे रहा था और मैंने उसकी चूत में धक्का-पेल चूदाई शुरू कर ही और उसको बाँहों में कस के जकड़ कर उसकी चूचियों को करीब करीब चबाते हुए खूब चोद डाला।


और वो दर्द और मज़े में चीखे ज़ा रही थी और मैं सिर्फ़ और सिर्फ़ चोद रहा था कह सकता हूँ कि खूब बेरहमी से चोद रहा था।उसकी कुँवारी चूत चोदने में मुझे स्वर्ग का मज़ा मिल रहा था क्यूंकि चोदा तो 10-11 चूतों को था पर इतनी जवान, इतनी कमसिन, इतनी कम उम्र और इतनी फ्रेश कोई नहीं थी। उसकी चूत फट गई थी, मुझे मालूम था कि अब रुकुंगा तो वो साथ नहीं देगी।


और बेरहम चुदाई में हालांकि उसको दर्द हुआ पर जैसे ही वो पहली बार झड़ी, उसको मज़ा आने लगा और अब तो जब मैं झरने को था तो वो 3 बार झर चुकी थी।


मैं जैसे झरने को आया, उसकी चूत में दना-दन 5-6 ज़ोर के धक्के दिए और उसके ऊपर ही लुढ़क गया, जिससे वो भी एक और बार झड़ गई।


मैंने अपना लड़ पूरा उसकी चूत में घुसाए रखा जब तक कि वो अपने आप ढीला होकर न निकल गया....
उसने मुझसे कहा- तुमने यह क्या किया?

मैंने बोला- मेरी जान चाँदनी, आज मैंने तुमको कली से फूल बना दिया ! अब इस फूल की खुशबू से तुम किसी भी भंवरे (लौड़े) को अपने काबू मे कर सकती हो !

वो शरमा कर बोली- आपके ने तो मेरी जान निकाल दी और दूसरो का कैसे काबू में होगा?
तो मैंने कहा- यही तो राज़ की बात है, अब मेरा भी तुम्हारे काबू में है...


मैंने फिर उठ कर कॉंण्डम उतारा और उसको बताया- बाहर की तरफ खून और चिकनाई है, वो उसकी चूत का पानी है, और अंदर का पानी मेरे लौड़े का है, और चिंता की बात नहीं, अब बच्चा नहीं ठहरेगा।
मैंने चाँदनी को कहा- रानी, मैंने कितनी चूत और लड़की चोदी हैं पर जो मज़ा तुमसे मिला है वो किसी में नहीं था।

और मेरी बेरहमी के लिए माफी भी माँगी तो वो बोली- आपने मुझे कली से फूल बनाया, आप तो मुझे अब मार भी डालो तो मुझे कोई शिकवा नहीं होगा। आप तो मेरे स्वामी हो ! मुझे जैसा और जितना चाहो, चोदो, जब चाहे चोदो !

इस बीच टीवी में जो सीन था वो देखकर चाँदनी फिर टीवी से चिपक गई। वहाँ एक नीग्रो एक गोरी लड़की के चूचे बेरहमी से खा रहा था और उसकी गाण्ड में लण्ड घुसाने की कोशिश कर रहा था। लड़की कुतिया की अवस्था में खड़ी थी और वो उसके गाण्ड के छेद को पहले चाटने लगा।
तो चाँदनी बोली- यह क्या करेगा अब?

तो मैंने कहा- मेरी जान, सेक्स में इतनी ज़्यादा वेराइटी है कि अगर हम लोग अलग अलग स्टाइल से करें तो दिन भर चुदाई की जा सकती है।
तो वो बोली- तो चोदिये ना मुझको सब तरीके से !

मैं बोला- रानी अभी तुम 30 मिनट से यहाँ चुद रही हो, और मुझे तो खुशी होगी कि रात भर तुमको चोदूँ पर अभी घर जाओ, कल जल्दी आ जाना तो 4-5 तरीके से चोदूंगा।
तो बोली- इसको तो देखो !

वो नीग्रो उस गोरी लड़की की गान्ड बड़ी बेरहमी से चोद रहा था और चाँदनी अब यह भी करवाना चाह रही थी, मैंने उसको कहा- कल जब शाम को खेलने निकलो तो याद रखना कि अब तुम बच्चों वाला नहीं वयस्कों वाला खेल खेलोगी, जिसके लिए आने के पहले चूत और गाण्ड अच्छे से धो लेना।
उसने खुश होकर कपड़े पहने और चली गई।

मैं खुश था कि मैंने ऐसी लड़की चोद दी जिसकी चूत में अभी तो अच्छी तरह बाल भी नहीं आए हैं और कल यह खुद से गाण्ड भी मरवाएगी।

उसके बाद तो मैंने 3 महीने तक चाँदनी को अलग अलग तरीके से चोदा, उसकी गान्ड मारी और सेक्स में संभव हर काम किया।



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  #457  
Old 26th September 2010
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मेरे लिए काम करोगे

तीन दिन पहले मेरी नौकरी छुट गई और मैं रास्ते पर आ गया। बहुत उदास था मैं।
एक दिन चौपाटी में बैठकर सोच रहा था कि अब क्या काम करूँगा?

अचानक मेरी नजर एक लड़की पर गई जो मुझसे थोड़ी दूर बैठी थी। मैंने देखा कि वो मुझे घूर रही थी। हमारी नजरें लगभग पाँच-दस सैकंड तक चार रही। मैं शर्मा गया, मैंने नजरें हटा ली और अपने मोबाईल में ताक-झांक करने लगा।

वैसे दिखने में मैं भी बुरा नहीं हूँ पर बात यह थी कि आज तक कभी किसी खूबसूरत लड़की ने मुझे इस अदा से नहीं देखा था।

अचानक उसने मुझे एक कागज का टुकड़ा मारा। मैंने खोलकर देखा तो उसमें लिखा था- हाय, मैं पूजा हूँ ! --------- यह मेरा नंबर है, मुझे मैसेज़ करो !


उसकी हिम्मत देखकर मैं दंग रह गया। मैंने उसे तुरंत जवाब भेजा- मैं राहुल हूँ !
और हम मैसेज़ से बाते करने लगे।
पूजा : क्या काम करते हो?

मैंने कहा : मेरी नौकरी छुट गई है तो अभी तो मैं कुछ भी नहीं करता।
पूजा : मेरे लिए काम करोगे?

मुझे काम चाहिए था, तो मैंने संदेश से पूछा- काम क्या है?
पूजा : मुझे खुश करना होगा !

मैंने लिखा : क्या तुम्हारा कोई दोस्त तुम्हें खुश नहीं करता ?

पूजा : मेरे बॉयफ्रेंड मुझे वो नहीं दे पाते जो मुझे चाहिए।
अब मैं समझ गया था कि उसे क्या चाहिए। तो मैंने पूछा : मुझे तनख्वाह क्या दोगी?

पूजा : वो तो काम देखने के बाद पता चलेगा।
मैंने कहा : ठीक है ! तो कब और कहाँ मिलना होगा?
उसने मुझे अपने घर का पता भेजा और कहा- आज रात को नौ बजे आ जाना।

मैं बहुत खुश था क्योंकि आज तक किसी लड़की को छुआ तक नहीं था और आज कोई मुझे चुदवाना चाहती है और मुझे इस काम के पैसे भी मिलेंगे।

ठीक नौ बजे मैं उसके बताये पते पर पहुँचा। वो दरवाजे पर ही खड़ी थी, मानो मेरा इंतजार कर रही थी।
उसने सफ़ेद रंग का टी-शर्ट और हाफ-पैंट पहनी थी जो उसे और भी ज्यादा खूबसूरत बना दे रही थी।

मुझे देखते ही आँख मारते हुए बोली : राजा तू तो बड़ा वफादार नौकर निकला !

वो मुझे घर के अन्दर ले गई जहाँ पूजा के अलावा उनकी एक दादी थी। मुझसे परिचय करवाते हुए वो बोली : दादी, यह मेरा दोस्त है, हम साथ पढ़ते हैं।

अब इम्तिहान आ रहे हैं इसलिए हम साथ साथ पढ़ेंगे। उसकी दादी को इस बात से कोई आपत्ति नहीं थी।

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  #458  
Old 26th September 2010
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फिर वो मुझे अपने कमरे में ले गई। उसने दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया। उसका घर देखकर मैं समझ गया था कि वो काफी रईस है। मेरे लिए ड्रिंक बनाते हुए वो बातें कर रही थी।


उसने कहा : मेरे माता-पिता अमरीका में रहते हैं, अरबोपति हैं, यहाँ मैं अपनी दादी के साथ रहती हूँ। मेरे एकाउंट में दो करोड़ बैलेंस है जो उनके हिसाब से अच्छी जिंदगी बिताने के लिए काफी है। मैं भारत में ही रहना चाहती हूँ।


वो अपने बारे में बता रही थी, इतने में मैं उसके पीछे पहुँच गया, पीछे से ही मैंने उनकी कमर पर हाथ लगाया। मैंने अपना पूरा शरीर उनके शरीर से चिपका दिया और दोनों हाथों से उनके दोनों स्तन दबाने लगा।


उसने कहा : चौपाटी में तुम्हें देखते ही मैंने तय कर लिया था कि मैं तुमसे जरुर सेक्स करुँगी।
मैंने कहा- क्या तुम वो महसूस करना चाहती हो जो आज तक कभी नहीं किया? मैंने कल ही एक इंग्लिश फिल्म देखी है और मैं उसके मुताबिक तुम्हें खुश करना चाहता हूँ।

वो बोली : तुम्हारी जो मर्जी !
मैंने कहा- ठीक है।
मैंने उनका टी-शर्ट निकाल दिया और अपनी थैली में से एक रस्सी निकाली और कहा- अपने हाथ मेरे हवाले कर दो !



मैंने उसके दोनों हाथ रस्सी से बांध दिए और रस्सी को दीवार के दोनों तरफ ग्रिल में बांध दिया जिससे उनके दोनों हाथ हवा में फ़ैले हुए थे। फिर मैंने उसकी आँखों पर मेरा रुमाल बांध दिया।


अब उसे न कुछ दिखाई दे रहा था और वो न कुछ कर सकती थी। अब बाजी मेरे हाथ में थी.. वो पूरी तरह से मेरे वश में थी।

मैं उसके सामने गया और उसको अपनी बाहों में ले लिया, उसके होंठों को अपने होंठों में लिया और हम एक दूसरे के होंठों का रस चूसने लगे। मैंने अपनी जीभ उनके मुँह में घुसा दी।

वो मेरी जीभ को चूसने लगी। वो मस्त होने लगी थी। मेरे दोनों हाथ उनकी कमर को सहलाने में व्यस्त थे। वो बड़ी उत्तेजित हो रही थी, शायद इस तरह से कभी नहीं किया होगा।


मैंने उसकी पैंट उतार दी और उनके कदमो में बैठ गया। उसकी चड्डी को बगल में खींच के उसकी चूत को छूने लगा। वो गीली हो चुकी थी। मैंने उसकी चड्डी उतार ली और उसकी चूत को चाटने लगा। उसके मुँह से आवाज़ आने लगी- आ........... ऊ.....ऊ.... रा....हु.......ल............... आ.आ.आ.आ.आ........ऊऊऊ........


मैं उसकी चूत को अपनी जीभ से चोदने लगा। उससे उत्तेजना बर्दाश्त नहीं हो रही थी- राहुल..... मुझे खोल दो !


पर मैं उसकी बातों पर ध्यान नहीं दे रहा था। मैंने उसकी चूत को चोदना चालू रखा। उसके दोनों हाथ बंधे हुए थे, दोनों पैर फ़ैले हुए थे। मैंने उसकी आँखों से रुमाल हटा दिया। अब वो मुझे देख रही थी, उसने कहा- मेरे हाथ खोल दो ! मैं तुम्हारे लंड को चूमना चाहती हूँ !

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  #459  
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मैंने उसके हाथ खोल दिए, उसने मेरे कपड़े उतार दिए और मेरे लण्ड को अपने मुँह में लेकर चाटने लगी। मुझसे यह ख़ुशी बर्दाश्त नहीं हो रही थी। यह मेरा पहला अनुभव था, मुझे बहुत मजा आ रहा था। हम उसके पलंग पर 69 की अवस्था में लेट गए।


मैं उसकी चूत को चाट रहा था और वो मेरे लण्ड को कुल्फी की माफिक चाट रही थी। अब उससे बर्दाश्त नहीं हुआ। मैं उसकी चूत को अपनी ऊँगली से चोदने लगा, धीरे धीरे ऊँगली डाली और उसे अन्दर-बाहर करने लगा। इस पर वो बहुत ज्यादा उत्तेजित हुई। मेरी ऊँगली के साथ वो अपनी कमर ताल मिलाते हुए हिला रही थी।


रा.....हु....ल..........अब मेरी चूत में अपना लण्ड डालो ना. ....

मैं सीधा हो गया और उसके दोनों पैर फ़ैला लिए। उसकी चूत फ़ूल गई थी। मैंने उसकी चूत में अपना लंड डाल दिया और हम दोनों मस्त हो गए।
पूजा बोल रही थी- और जोर करो, और जोर करो !

मैंने अपनी पूरी ताकत से उसे चोदा। मेरा लंड चूत में अन्दर-बाहर हो रहा था और में अपने हाथों से उसके स्तन दबा रहा था। उसे स्तन दबवाना बहुत अच्छा लगता था और मेरा तो काम ही यही था कि उसे खुश करना ! मैं वो ही करता गया जो उसे खुश कर सके !


लगभग बीस मिनट तक हम चोदते रहे, फिर वो झड़ गई। लड़कियाँ भी झड़ती हैं, यह मुझे उस दिन पहली बार पता चला था।


फिर वो मेरे पीछे आ गई और मेरे लंड को अपनी मुठ्ठी में ले कर मुठ मारने लगी। मैंने अपना सारा जिस्म उसके ऊपर डाल दिया। वो मुठ मारती गई, लगभग दो मिनट तक वो सुख भुगतने के बाद मैं झड़ गया। मेरे लंड से वीर्य की पिचकारी छुटी, उसकी एक किताब पर जा गिरी। उसने मेरा वीर्य चाटा और बोली- बहुत ही अच्छा है।

मैंने कहा- क्या तुम्हारे दोस्तों से ज्यादा मजा मैंने दिया ? या नहीं?

वो बोली- आज मुझे वो मिल गया, जो मुझे चाहिए था।
हम दोनों आधे घंटे तक नंगे ही एक दूसरे की बाहों में लेटे रहे।

मैंने कहा- आगे क्या हुक्म है सरकार?
वो बोली- राहुल, मैं तुम्हें हर महीने दस हजार रूपये दूँ तो क्या तुम रोज दो घंटे मेरे साथ सेक्स कर सकते हो?

मैं राजी हो गया। आज इस बात के तीन साल हो गए। हम रोज चोदते हैं।

कभी नहीं भी मिलते, फिर भी पूजा मुझे हर पहली तारीख को दस हजार रूपये जरुर दे देती है। हम अच्छे दोस्त हैं। मैंने कभी भी उसका या उसके रुपयों का गलत फायदा नहीं उठाया।
आशा है कि हम हमेशा ऐसे ही दोस्त बने रहेंगे।



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  #460  
Old 26th September 2010
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उफनते जजबात

मुझे एक दिन मेरे दूर के मामा की लड़की पायल का फ़ोन आया कि वो दिल्ली जॉब करने आ रही है क्योंकि उसका डॉक्टर का कोर्स ख़त्म हो गया है और मूलचंद हॉस्पिटल में उसको जॉब मिल गया है जनरल फ़ीज़िशीयन की पोस्ट के लिए। हम पूरे 5 साल बाद मिल रहे थे।

मैंने उसे रेलवे स्टेशन पर देखा तो देखता ही रह गया। साधारण सी दिखने वाली लड़की अब बहुत सुंदर और सुडौल बदन की मालकिन हो गई थी। मैं उसे देखता ही रह गया और वो आकर गले लग गई और मुझे गाल पर चूम कर मेरा हाथ पकड़ कर बोली- अब घर चलोगे या यहीं रुके रहोगे?

तब मेरी तन्द्रा टूटी और मैं उसे लेकर घर आ गया।
मैं बता दूं कि वो एक सीधी-साधी सी लड़की है बस बड़ा डॉक्टर बनाना उसका मकसद है। हम लोग पहले तो बस से ऑफिस साथ-2 जाने लगे पर इसमें समय के तालमेल की समस्या होने लगी तो मैंने पैशन बाईक खरीद ली।

क्योंकि मैं बहुत दिन बाद बाईक चला रहा था तो थोड़ा धीरे चलता था और वो हमेशा एक तरफ़ टाँगें करके बैठती थी जिससे बाईक को बैलेंस करने में परेशानी आती थी इस कारण हम रोज लेट हो जाते थे हॉस्पिटल पहुचने में।

एक दिन सुबह हम पहले ही आधा घण्टा लेट हो गए तो वो बोली- आज बाईक तेज चलाना जिससे समय पर पहुँचे !


तो मैंने उससे कहा- तुम अपनी टांगें दोनों तरफ़ करके बैठो, तभी तेज चला सकता हूँ ! बाईक बैलेंस सही होगी !
तो वो मान गई। उस दिन ठण्ड बहुत थी और जब बाईक 80 की स्पीड से चली तो और भी ठण्ड लगने लगी तो वो मुझसे थोड़ा सट कर बैठ गई और दोनों हाथो से उसने मुझे जकड़ लिया। तब पहली बार मुझे किसी लड़की के स्पर्श के जादू का अहसास हुआ।

उस दिन तो हम समय पर पहुँच गए और लगभग समय पर ही रोज पहुँचने लगे। अब वो रोज टांगें दोनों तरफ़ करके ही बैठती थी। अभी तक मेरे दिल में उसके लिए कुछ नेहं था मंगर एक महीने के अन्दर वो बहुत मुझसे खुल कर बातें करने लगी, अपने कॉलेज और हॉस्पिटल के लड़के-लड़कियों के बारे में और मैं भी उसे अपने ऑफिस में कर्मचारियों के बीच चल रहे चक्करों के बारे में बताने लगा।

एक दिन की बात है, सुबह-2 वो नहा कर आई तब सुबह के 6 बज रहे थे और मैं अभी सो रहा था। तो उसने सोचा कि मैं सो रहा हूँ तो वो वहीं खड़ी हो कर आईने में अपने बदन का जायजा लेने लगी। उसके शरीर पर शमीज और नीचे बड़ा तौलिया था। लेकिन मुझे सोया समझ कर उसने तौलिया निकाल दिया और अपने बदन को देखने लगी।


तभी मेरी नींद टूटी और मैंने रजाई में से देखा तो दंग रह गया। वो उस समय एक ताज़े गुलाब की तरह लग रही थी, दूध जैसा गोरा तराशा बदन, दो तनी चूचियाँ और मस्त फिगर ! मैं तो ऊपर से नीचे तक हिल गया और लण्ड महाराज सलामी देने लगे।

अचानक उसे लगा कि मैं जाग गया हूँ तो झट से उसने तौलिया लपेट लिया और रोज की तरह हम ऑफिस चले गए। मगर शाम को उसके अंदाज बदले-2 से लग रहे थे। आते ही वो अपने कपड़े मेरे सामने बदलने लगी तो मैं कमरे से बाहर जाने लगा।

तो वो बोली- आप बाहर क्यों जा रहे हो, ठण्ड बहुत है, आप यहीं बैठो और मुँह दूसरी तरफ कर लो ! मैं कपडे बदल लेती हूँ !

शायद वो भी मुझे अपना तराशा बदन दिखाना चाहती थी और मैं भी चोरी-2 उसे निहार लेता था। अब वो मेरे सामने ही कपड़े बदलने से शरमाती नहीं थी। कई बार मैंने उसकी काली पैंटी और सफ़ेद ब्रा के नज़ारे देखे।

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