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दिल्ली की दीपिका-Love.sony

दिल्ली की दीपिका-1

प्रेषिका : दीपिका

हैल्लो दोस्तो, मैं दीपिका हूँ, अन्तर्वासना काफी दिनों से पढ़ रही हूँ। सच कहूँ तो इसकी कहानियाँ हमें आपस में जोड़ती हैं। किसने अपने बदन की आग बुझाने के लिए क्या किया, यह हमें जानने को मिलता है।

मैं तो कहूँगी कि सैक्स पर हमें भी खुलकर बात करनी चाहिए, या हिस्सा लेना चाहिए क्योंकि यह ऐसी आग है कि इसे जितना भी दबाया जाएगा, यह उतनी ही भड़केगी इसलिए हमें इसे पश्चिमी देशों की तरह खुलकर स्वीकार करना चाहिए। अब समय आ गया है जब भारत को अच्छा बनाने के लिए आचार्य रजनीश की बात मानी जाए, जो साफ-साफ कहते थे कि जैसा मन में हैं वैसा कर लो, पर यह ध्यान रखो कि इसमें किसी का दिल ना दुखे।

किन्तु अफसोस हम उनकी सीधी बात का अनुसरण करने के बदले कुछ छद्दम बाबाओं की बात सुनते आ रहे हैं, ये बाबा हमें खुद तो धर्म के रास्ते चलकर सैक्स सहित सभी बुराइयों से दूर रहने की बात कहते हैं पर असलियत में सैक्स का लालच इन्हें भी नहीं छोड़ता हैं, लिहाजा उनमें कुछ का हश्र अब सबके सामने है।

अपनी कहानी की शुरूआत में आपके लिए मैंने अपने मन की बात कह दी।

अब मैं खुद से आपका परिचय कराती हूँ, मैं दिल्ली में रहती हूँ, मेरी उम्र 22 साल हैं, और दिल्ली के पॉश समझे जाने इलाके लाजपतनगर में अपनी मम्मी व पापा के साथ रहती हूँ। मैं अपने मॉम डैड की इकलौती संतान हूँ यानि मेरे भाई बहन नहीं हैं। शुरू में मुझे अपने मॉम डैड पर बहुत गुस्सा आता कि उन्होंने मेरे लिए ही सही एक भाई या बहन को क्यूं पैदा नहीं किया, जिसके साथ मैं खेल या झगड़ा कर सकती। पर बाद में मुझे पता चला कि मैं जब गर्भ में थी तब माम-डैड मसूरी गए थे, जहां एक एक्सीडेंट में मॉम बुरी तरह घायल हो गई। उस समय ही अस्पताल में डाक्टर्स ने आपरेशन कर मॉम की डिलवरी कराई, और मैंने जन्म ली। मॉम का गर्भाशय भी निकालना पड़ा, जिससे वो फिर से मां नहीं बन सकती थी। लिहाजा डैड व मॉम को अकेले मुझसे ही काम चलाना पड़ा। तो यह मेरे परिवार की बात थी, अब अपनी कहानी में मैं अब तक की सैक्स लाइफ को यानि मेरी चूत से पहली बार रज कैसे निकलाऔर अपनी चूत की सील मैंने कैसे तुड़वाई, इसे बताऊँगी। तो तैयार हैं ना आप लोग मेरी कहानी से जुड़ने के लिए...

हाँ, मैं अभी बीटेक कर रही हूँ, मेरे बदन का आकार- मेरे दूध 34 सी, कमर 27" व चूतड़ 35" के हैं। जैसा मैंने अन्तर्वासना की कहानियों में पढ़ा है वह सही है कि इस समय यानि युवावस्था में सैक्स की इच्छा बहुत होती है। हर समय चूत में कुछ घुसाने का मन होता है। शर्म के कारण हम लड़कियाँ किसी लड़के को चोदने के लिए तो नहीं कह सकती, लिहाजा अपनी सहेलियों से ही अपने चुच्चे दबवा कर मन को बहलाया करती।

मेरी सहेलियों का हाल भी मेरे जैसा ही था, इनमें से एक प्राची तो कई बार मेरे उरोज, जांघों, चूत व चूतड़ों पर हाथ फिरा लिया करती। वह बातें भी बहुत उत्तेजक करती थी।

एक बार हमारे कालेज से टूर गया जिसमें प्राची भी साथ गई। इत्तेफाक से हम लोगों को रात में सोने के लिए एक ही कमरा मिला। दिन भर घूमने और मस्ती करने के बाद रात को हम जब सोने के लिए बिस्तर पर आए तब पहल उसने ही की, वह मुझसे इस तरह चिपकी मानो मेरे भीतर ही घुस जाना चाहती हो। इधर उधर हाथ लगाने के बाद उसने मेरे होंठों पर अपने होंठ चिपकाए और चूमने लगी। अब मुझे भी इसमें मजा आने लगा, मेरी वासना भी भड़की, तब मैंने उसके स्तन व चूत सहलाकर अपनी दबी इच्छा को पूरी करने का प्रयास किया। इस रात पहली बार मेरी नंगी चूत पर किसी दूसरे ने अपना हाथ फिराया, तथा जीभ व उंगली से चूत के रज को झड़ाया। बाद में प्राची ने बताया कि उसके साथ ऐसा ही काम पहली बार उसकी भाभी ने किया था।

और बाद में और ज्यादा मजा दिलाने के लिए पहले उसके भाई का लण्ड उसे छुपाकर दिखाया व बाद में उसकी फरमाइश पर भाई से उसकी चुदाई भी करा चुकी हैं।

तो इस तरह उस रात को मेरी चूत से पहली बार रज का स्खलन मेरी सहेली के ही चूत रगड़ने व चाटने के कारण हुआ। उस दिन मुझे बहुत अच्छा लगा पर अपनी चूत की रगड़ाई व चटवाई से चुदने की इच्छा और बढ़ गई।

मेरे घर में दो नौकर भी हैं जो रसोई व ड्राइवरी का काम करते हैं। मेरी हालत इतनी खराब हो गई थी कि मैं इनसे चुदवाने की सोचने लगी, इसके लिए योजना बनाने लगी। मैंने सोचा कि बाहर कहीं जुगाड़ ना हो तो अपने रसोइए व ड्राइवर को ही अपनी चुदाई के लिए तैयार करके रख लूँ। रसोई में जानबूझकर रसोईए से टकराती और उससे रगड़कर चलती, ताकि मेरे बदन की गर्मी उसका लौड़ा खड़ा कर सके। पर वह अपनी नौकरी के डर से मेरी हरकतों को अनदेखा करता रहा। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

फिर इससे निराश होकर मैंने मम्मी से कहकर कार चलाना सीखने की जिद की, और इसके लिए ड्राइवर को कार चलाना सिखाने कहा। इसमें कार चलाने से ज्यादा मेरा ध्यान अपने ड्राइवर के लौड़े पर लगा रहता। मुझे ड्राइविंग सीट पर बिठाकर जब वह स्टेयरिंग संभालने के बारे में बताता तो मैं अपने दूध को उसके हाथों से सटाती व कमर उठाकर चूत को उसके हाथ से रगड़ती।ड्राइवर समझदार था, वह बिना मेरे बोले मेरे दूध व चूत और चूतड़ों पर भी हाथ फेर दिया करता, इससे मुझे बहुत अच्छा लगता। अपनी इस तरह हल्की फुल्की रगड़ाई मैंने जारी रखी। मुझे लगा कि ड्राइवर हल्के मजे के लिए तो ठीक है पर यह अपनी नौकरी के डर से मुझे चोद नहीं पाएगा।

तो मैंने अब अपना ध्यान बाहर की ओर लगाया। हमारे घर के पास रहने वाला एक लड़का मुझे ठीक लगा। योजना के अनुसार मैंने उसे लाइन देना शुरू किया, अब वह लड़का मेरा चक्कर काटने लगा। एक दिन मुझे रोककर उसने फूल दिया। मैंने फूल ले लिया तथा उसका उत्साह बढ़ाने के लिए थोड़ी बात भी कर ली जैसे- मसलन क्या करते हो, घर में कौन-कौन हैं आदि।

मेरे बात करने से वह फूलकर कुप्पा हो गया और मुझ पर जान देने की बात अपने दोस्तों में करने लगा। उसका नाम आपको बताना ही भूल गई, उसका नाम अभि है, वह भी मेरे ही कालेज में है। तो इससे मेरी बात और प्रेम की पींगें बढ़नी शुरु हुई।

बात करने के साथ ही वह मुझे अक्सर गिफ्ट भी लाकर देने लगा। मैंने उसे गिफ्ट के लिए मना किया, तो बड़ी ही स्टाइल से उसने कहा कि गिफ्ट देना उसका शौक है, इसलिए इसके लिए मना मत करिए।

मैं भी शांत हो गई कि लाओ गिफ्ट और कर लो अपना शौक पूरा।

इस तरह हम लोगो का प्यार पलते रहा।

हमारे घर के पास रहने वाला एक लड़का अभि मुझे ठीक लगा। योजना के अनुसार मैंने उसे लाइन देना शुरू किया, अब वह लड़का मेरा चक्कर काटने लगा। एक दिन मुझे रोककर उसने फूल दिया। मैंने फूल ले लिया तथा उसका उत्साह बढ़ाने के लिए थोड़ी बात भी कर ली जैसे- मसलन क्या करते हो, घर में कौन-कौन हैं आदि।

वह भी मेरे ही कालेज में है, वह मुझे अक्सर गिफ्ट भी लाकर देने लगा। इस तरह हम लोगों का प्यार पलता रहा।

एक बार मेरी मॉम व डैड को एक पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कोलकाता जाना पड़ा। जाते हुए उन्होंने मुझसे कहा कि हमें 3-4 दिन लग सकते हैं, तो मैं घर में रहूँ व अपना ख्याल रखूँ। उनके जाने के बाद शाम को अभि मुझसे मिलने आया। तब मैंने उसे अपने घर में ही अंदर बुला लिया। घर पर उस समय ड्राइवर डैड के बताए हुए काम पर लगा था, जबकि रसोइया रसोई में ही काम कर रहा था।

अभि को मैंने घर के हाल में बैठाया और हमने बात शुरू की। मैं उसे अपने घर की बनावट व कमरों के बारे में बता रही थी। अभि ने मेरा कमरा देखने की इच्छा जताई तो मैं उसे लेकर अपने कमरे में आई। मेरा कमरा अस्त-व्यस्त पड़ा हुआ था। वैसे भी मैं अपने कपड़े उतारकर यूं ही पलंग पर फेंक दिया करती थी। अभि को भीतर लाकर मैंने उसे पलंग पर बैठने कहा, और पलंग पर पड़े हुए कपड़ों को सरकाकर उसके बैठने की जगह बनाई।

अभि बैठा और आसपास पड़े कपड़ों को समेटने लगा। तभी उसके हाथ मेरी उतारी हुई ब्रा पर लगा, उसने ब्रा को किनारे रखने के बदले हाथ में ही रखा, पूछा- क्या साइज है आपका?

उसके हाथ में ब्रा लगने से मुझे थोड़ी शर्म आई, पर चूंकि उसने साइज पूछा था इसलिए मैं बोली- 34 !

अभि बोला- यह आ जाती है आपको?

मैं बोली- जब यह मेरे कमरे में है और मेरी है तो नेचुरली आती होगी तभी तो पहनती होऊँगी ना।

अभि बोला- यार यह गुलाबी रंग की है, और किसी दूसरे रंग की नहीं है आपके पास?

मैं बोली- ये मेरे पास दर्जन भर होंगी, और जिस-जिस रंग का लिबास है उस-उस रंग की है।

यह सुनते ही उसकी आँखों में चमक आ गई, वह बोला- अच्छा, दिखाइए तो।

मैंने अलमारी खोली व सभी ब्रा निकालकर उसके सामने डाल दी। वह एक-एककर सभी ब्रा को उठाकर देखने लगा। उसके चेहरे पर उत्तेजना देखकर मुझे भी अच्छा लगा।

वह बोला- हाँ वैसे तो सभी रंग हैं आपके पास, पर पर्पल रंग नहीं है। अबकि गिफ्ट में मैं पर्पल कलर की ब्रा ही लाऊँगा।

मैं हसते हुए बोली- तुम्हें इतना भी पता नहीं है कि आज मेरी ड्रेस पर्पल रंग की है तो मैंने अपना इनरवीयर भी इसी रंग का पहने होऊँगी।

वह बोला- यानि यह रंग भी है, पर इसे तो मैंने देखा ही नहीं, दिखाओ तो।

मैं हंसते हुए बोली- अभी पहने हुई हूँ ना, मैं तुम्हें इसे बाद में दिखा दूंगी।

अभि बोला- क्या यार, अपने घर में मेरा एक काम भी नहीं करोगी।

मैं बोली- ओह्हो समझो न। तुम्हें दिखाने के लिए मुझे इसे उतारना पड़ेगा, फिर पहनना पड़ेगा। इसलिए अभी रहने दो, कल मैं तुम्हें इसे लाकर पक्का दिखा दूँगी।

अभि बोला- मुझे समझो यार, मैं इसे देखूँगा नहीं तो मुझे बिल्कुल भी अच्छा नहीं लगेगा। इसलिए प्लीज़, भले ही तुम अपनी ब्रा को उतारो मत। शर्ट को ऊपर कर लो मैं देख लेता हूँ।

वह मुझसे ब्रा दिखाने के लिए और मिन्नतें करने लगा। उसके बार बार यह बोलने के ढ़ंग से मेरी चूत में भी खुजली उठने लगी। लिहाजा मैं बोली- ठीक है, लो दिखा देती हूँ।

यह बोलकर मैंने अपनी शर्ट उतार दी। अभि मेरे पास आया, और मेरी ब्रा के साइड बेल्ट पर उंगली घुमाने लगा। मैं महसूस कर रही थी, कि उसकी हिम्मत नहीं हो रही हैं कि वह मेरी चूची को पकड़ ले तो चिढ़कर मैं बोली- हो गया, देख लिए ना।

अभि बोला- हाँ यह तो देख लिया, पर दीपिकाजी मेरी एक रिक्वेस्ट है, उसे मान लीजिए प्लीज़।

मैं बोली- यह बात तो मान ली है ना, अब क्या है बोलो?

वह बोला- मुझे आप इन ड्रेसेज़ में बहुत अच्छी लगती हैं। आपको ये ड्रेस पहने हुए तो मैं देख चुका हूँ, पर इन ड्रेसेज़ की मैचिंग वाली ब्रा में आप कैसी दिखती हैं मैं यह देखना चाहता हूँ। प्लीज मना मत करना, सिर्फ एक बार।

इस बार उसने मुझे जमकर मस्का पालिश की, और मैं भी अपने चुदने का जुगाड़ बैठाते हुए, उसे अलग-अलग रंग की ब्रा पहनकर दिखाने को तैयार हो गई। इससे पहले मैंने उसे कहा कि मैं सब ब्रा को इकट्ठे कर रही हूँ, तब तक तुम रूम का दरवाजा बंद कर दो। कहीं रसोइया भी यहाँ चाय देने ना पहुँच जाए।

अभि जल्दी से दरवाजे तक गया और उसे बंद कर आया। मैंने सभी ब्रा उठाईं और लेकर वाशरूम की ओर बढ़ी।

तभी उसने कहा- कहाँ जा रही हो आप?

मैं बोली- आपको दूसरी ब्रा पहनकर दिखानी है, तो अंदर से बदलकर आती हूँ ना।

वह बोला- ओह्हो, रूम में केवल मैं और आप हो, फिर अलग जाने की क्या जरूरत है। मुझ पर भरोसा नहीं है क्या आपको?

मैं बोली- भरोसा तो हैं अभिजी। पर मुझे आपके सामने ब्रा उतारते हुए अच्छा नहीं लगेगा।

अभि बोला- जब आप मुझे अपने से अलग समझती हैं, तब कोई बात नहीं।

मैं बोली- मैं तुम्हें पराया बिल्कुल नहीं समझती अभि, पर मैंने अब तक किसी के सामने अपने कपड़े नहीं उतारे हैं इसलिए शर्म आ रही है।

अभि बोला- वाह पराया नहीं समझती, तो बताओ क्या आपने अपने बूब्स नहीं देखे कभी? क्या अंदर जाकर आप खुद के सामने अपने कपड़े नहीं बदलोगी? तो फिर यह मेरे सामने क्यों नहीं?

उसकी बात से प्रभावित होकर मैं बोली- ओके बाबा, लो यहीं बदल लेती हूँ।

यह बोलकर मैंने वहीं पलंग पर सभी ब्रा रखी और पहनी हुई ब्रा को खोलकर बाहर निकाली। मैंने महसूस किया कि अभि अब पलक झपकना भूल गया था, और एकटक मेरे वक्ष को देखे जा रहा था। पहनी हुई ब्रा खोलकर वहीं डालने के बाद मैं दूसरी ब्रा पहनने के लिए उठाई तो अभि मेरे पास आकर बोला- यार, आपके इनरवीयर का रंग तो बहुत ही अच्छा है। पर मुझे बोलने में डर लग रहा हैं कि यदि आप मेरी एक बात और मान जाओ तो यह समय मेरे लिए चांद पर जाने से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाएगा।

मैं बोली- अब क्या बात है?

वह बोला- आप नाराज तो नहीं होगी ना?

मैं बोली- नहीं होऊँगी, बोलो?

वह बोला- इतना तो हो ही रहा है, बस थोड़ा सा और करोगी तो मैं तुम्हारा बहुत आभारी रहूँगा।

मैं बोली- साफ-साफ बोलो ना, बात को घुमाओ मत।

अभि बोला- दीपिका खाली ब्रा नहीं, इसका सेट पहनकर दिखाओ ना। मैं जमकर उछली और बोली- यानि तुम मुझे ब्रा-पैन्टी में देखना चाहते हो।

वह बोला- मैं पहले ही इसके लिए आपसे माफी मांग चु्का हूँ, और बार-बार रिक्वेस्ट कर रहा हूँ क्योंकि आपको इस हालत में देख पाने की मेरी हिम्मत नहीं है। वो तो तुम्हारे इनरवीयर का यह जबरदस्त सैट देखकर ही मुझे लालच आया कि आज आपको इनमें देख लूँ। क्योंकि यदि आपको नहीं देख पाया तो फिर मैं अपनी पूरी जिंदगी में किसी को भी ऐसे मंहगे सेट में ऐसी जबरदस्त काया के साथ देख नहीं पाऊँगा। क्या आप अपने इस गरीब दोस्त की इतनी सी मांग को पूरा नहीं करोगी?

यह बोलते हुए उसने अपने हाथ जोड़ दिए, मुझे उस पर दया आ गई और अपने तर्कों की पिटारी बंद करके बोली- तुम भी ना, पहले कहाँ मेरी ब्रा को देखने की जिद की, फिर पहनी हुई ब्रा और अब कहाँ पैन्टी भी पहनकर दिखाने को कह रहे हो।

अभि बोला- आप हो ही इतनी सुंदर, कि बहुत चाहकर भी खुद पर कंट्रोल नहीं कर पा रहा हूँ।

मैं बोली- ठीक है, आप यहाँ बैठ जाइए, मैं सब पहनकर आपको दिखाती हूँ।

अभि तुरत पलंग के उस छोर पर एकदम शरीफ बनकर बैठ गया। अब मैं पलंग पर पड़ी सभी पैन्टियों को समेटने लगी। इन्हें रंग के अनुसार ब्रा के साथ करके रखी। अब पलंग के दूसरे किनारे स्लेटी रंग की पैन्टी को लेकर आई, उसे बोली- वाइलेट का कलर कम्बिनेशन थोड़ा गड़बड़ाएगा, क्यूंकि वाइलेट ब्रा मैं उतार चुकी हूँ।

वह तुरंत बोला- आपको आधा खुला तो मैं देख ही चुका हूँ, बस आधे की ही बात है। इससे अगले सेट की मैचिंग जम जाएगी ना।

मुझे गुस्सा आ रहा था कि यह साला मुझे नंगा किए जा रहा हैं पर अपना लौड़ा नहीं दिखा रहा है। पर यह बात मैं शर्म के कारण उससे कह नहीं पाई और पलंग के दूसरे किनारे पर ही खड़े होकर अपना स्कर्ट उतारने की तैयारी करने लगी। पर सही बोलूँ तो चुदने की इच्छा होने के बावजूद इस तरह अभि के सामने नंगी होने में मुझे बहुत शर्म आ रही थी। बहुत प्रयास करने के बाद भी जब पैन्टी उतारने की हिम्मत नहीं जुटा पाई, तो मैं दोनों हाथों से चेहरा छुपाकर वहीं पलंग पर बैठ गई।

मेरे ऐसे शरमाते ही अभि मेरे पास आया और बोला- अरे कोई बात नहीं। आप पूरे कपड़े मत उतारो। यह बोलकर उसने वहीं पड़ी एक ब्रा उठाया, और कहा- आओ, इस ब्रा को पहले मैं पहना देता हूँ इसके बाद पैन्टी पर आएंगे ना।

यह बोलकर उसने चेहरे को ढके मेरे दोनों हाथों को हटाया और ब्रा की दोनों तरफ की स्ट्रीप पर लगाया। उसका हाथ लगने से मुझे और ज्यादा शर्म आ रही थी, पर अच्छा भी लग रहा था। मैं वैसे ही बैठी रही। अभि मेरी ब्रा को पीछे करने के बाद हुक लगाने पीछे आया। हुक लगाने के बाद वह मेरे उभारों पर ही एक ओर से मुड़ गए ब्रा के कोने को ठीक करने लगा। ऐसा करते समय वह मेरे स्तनों को भी छू रहा था। ब्रा को ठीक करने के बहाने वह चूची पर उंगली अंदर निप्पल तक पहुंचाने की फिराक में था।

मैं उसकी हरकत समझ रही थी पर और मजा पाने के लिए इसे अनदेखा सा करती रही। अब यह सोचकर मुझे बहुत हंसी आती हैं कि उस दिन मुझे एक ब्रा पहनाने के लिए अभि ने कितना अधिक समय लगाया। पर उसके स्पर्श से मुझे चुदने की इच्छा बढ़ गई और उन्माद में मेरी आँखें बंद हो गई। अब ब्रा पर हाथ घुमाते हुए ही वह मेरे कंधे पर झुका और यहाँ अपने होंठ लगाकर उस पर चुम्बन लिया। उसके होंठ जैसे ही मेरे कंधे पर लगे, मुझसे सहन नहीं हुआ, और एक मेरे मुख से एक सिसकारी निकल गई।

अभि भांप गया कि उसे हरी बत्ती मिल गई है तो वह एक कंधे से शुरू अपने चुम्बन का सिलसिला गले, व फिर दूसरे कंधे तक ले आया।

मेरी हालत खराब हो रही थी, पर लाज के कारण अब भी होंठ से यह निकल नहीं रहा था कि 'अभि, बहुत हो गई नौटंकी, चल निकाल अपना लौड़ा और घुसेड़ दे मेरी चूत में !'

मैं चुप थी क्योंकि वह बढ़ तो उसी ओर रहा था। कंधे से अब उसके होंठ पीठ पर वहाँ पहुँचे, जहाँ ब्रा का हुक था। यहाँ चूमने के बाद यह पीठ पर ही और नीचे तक पहुंचा। मैं महसूस कर रही थी कि अब उसके होंठो का साथ देने जीभ भी आ गई हैं, और यह जीभ को मेरे बदन पर जिस तरीके से हिला रहा था उससे मुझे गुदगुदी सी लगने लगी। तब इसके होंठ और जीभ मेरी कमर तक आ गए। यह पैन्टी के ऊपर चाटने चाटने लगा।

मेरी हालत खराब हो रही थी, पर लाज के कारण अब भी होंठ से यह निकल नहीं रहा था कि 'अभि, बहुत हो गई नौटंकी, चल निकाल अपना लौड़ा और घुसेड़ दे मेरी चूत में !'

मैं चुप थी क्योंकि वह बढ़ तो उसी ओर रहा था। कंधे से अब उसके होंठ पीठ पर वहाँ पहुँचे, जहाँ ब्रा का हुक था। यहाँ चूमने के बाद यह पीठ पर ही और नीचे तक पहुंचा। मैं महसूस कर रही थी कि अब उसके होंठो का साथ देने जीभ भी आ गई हैं, और यह जीभ को मेरे बदन पर जिस तरीके से हिला रहा था उससे मुझे गुदगुदी सी लगने लगी। तब इसके होंठ और जीभ मेरी कमर तक आ गए। यह पैन्टी के ऊपर चाटने लगा।

तभी मैंने चिंहुक कर अपनी पीठ को ऊपर तान ली। मेरे ऐसा करते ही अभि कमर के पास से अपना मुँह घुमाकर सामने ले आया और मेरे पेट पर जीभ चलाने लगा। उसका मुँह मेरी नाभि पर टिका। यहाँ जीभ चलाने के बाद वह अपनी जीभ को रगड़कर ऊपर की ओर बढ़ा। ब्रा के एकदम नीचे जीभ को घुमाने के बाद वह मेरे दोनों बूब्स के नीचे आया। अब उत्तेजना में मेरी गर्दन पीछे हो गई और चेहरा छत की ओर था। उसके होंठ मेरे हाथ के नीचे से होते हुए गर्दन पर पहुँचे और यहाँ से फिर मेरे वक्ष के ऊपर आ गए। अब वह ब्रा में ऊपर से ही मेरे स्तनों पर जीभ घुमा रहा था।

उत्तेजना से मेरी हालत भी खराब हो रही थी। वह मेरे कप में जीभ घुमाने के बाद अब ब्रा का कप उंगली से हटाकर निप्पल तक अपनी जीभ पहुंचाने का प्रयास कर रहा था। मैं अब दोनों हाथ टेककर पीछे हो गई। इससे उसका हौसला बढ़ा और ब्रा को पूरा सरकाकर निप्पल बाहर निकाल लिया। अभि मेरे ने निप्पल को मुँह में लिया और अपनी जीभ से उसे सहलाने लगा। स्तन के दूसरे हिस्से को अपने हाथों से दबाने लगा। इससे मुझे अद्भुत आनन्द मिल रहा था।

इसके बाद उसने अपना मुँह हटाया और हाथ पीछे ले जाकर ब्रा का हुक खोल दिया। ब्रा खुली, अवि ने इसे उतार कर एक तरफ़ रख दिया। मैं पलंग के किनारे ही बैठी थी। यह नीचे उतरा मुझे खड़ा करके अपनी बाहों में ले लिया। मैं भी उससे चिपक गई। उसने अब मेरे होंठो को अपने मुँह में लेकर चूसना शुरू कर दिया। हमारे चुम्बन का यह दौर लंबा चला। तब तक उसके हाथ मेरे नंगे शरीर पर घूमते रहे।

सच बताऊँ तो इस समय मेरे पूरे बदन के रोएँ खड़े हो गए थे। उस समय मेरी हालत ऐसी गजब की थी कि आज भी उस पल को याद करके मेरी फ़ुद्दी से पानी रिसना शुरु हो जाता हैं। वह वाकया याद आते ही मुझे किसी अज्ञात विद्वान की कही यह बात याद आ रही हैं कि 'यंग जनरेशन में लड़के लड़कियों की हालत करीब-करीब एक सी ही होती हैं। रात को जब नींद नहीं आती हैं तब लड़कों के हाथ में लूल्ली व लड़कियों के हाथ में मूली होती हैं।'

सही में मैंने ना जाने कितनी मूलियाँ ऐसे ही खराब कर चुकी हूँ और अब तो काम निकालने के लिए मोमबत्ती भी लाकर रखी हुई हैं। तो अब वापस कहानी पर आती हूँ। चुम्बन करते हुए ही अभि मुझे फिर से पलंग पर बिठाया व अब मेरे निप्पल तक आया।

मुझे बहुत अच्छा लग रहा था, मैं पलंग पर ही लेट गई। इसने अपने चूमने चाटने का सिलसिला जारी रखा। साथ ही इसका हाथ अब मेरी योनि के आसपास सहलाने लगा। मेरा बदन अब कांपने लगा। बाद में मुझे पता चला कि यह कंपकंपी ठण्ड की नहीं, उत्तेजना की थी।अभि प्यार करते हुए नीचे की ओर बढ़ा और पैन्टी के ऊपर से ही मेरी चूत पर जीभ मारने लगा। मैंने अपने दोनों हाथों से उसके सिर के बाल पकड़ लिए थे। वह पैन्टी के ऊपर से अपनी जीभ हटाकर चूत के करीब ही जांघ पर ले आया और उसे चाटने लगा। ऐसा करते हुए ही उसने मेरे घुटनों तक का पूरा शरीर चाटा।

अब वह सीधा हुआ, अपने होंठों को मेरे होंठों पर टिकाया और हाथ बढ़ाकर मेरी पैन्टी उतारने लगा। फिर उसने मुझे छोड़ा व मेरी पैन्टी को खींचकर नीचे सरका दिया। मैंने भी अपने पंजों में फंसी पैन्टी को निकालकर पैर से ही निकाल कर सरका दिया। अब मैं पूर्णत: नंगी थी। अभि अब मेरे पास ही बैठकर यूं ही देखने लगा।

अब जब सब आपको बता रही हूँ तो यह भी रहस्य भी खोल देती हूँ कि मेरी चूत पूरी गीली हो गई थी, मानो इसमें पानी डाला गया हो। अभि मुझे यूं ही देखे जा रहा था और मेरी बेताबी चरम पर थी, मैंने उससे कहा- क्या मुझे नंगी देखता ही रहेगा या कुछ करेगा भी?

वह बोला- इस सुंदर शरीर को पहले जी भर कर देख तो लेने दो, फिर जो कहोगी वो करूँगा।

मैं बोली- ला दिखा तो तेरे पास क्या है?

वह बोला- क्या दिखाऊँ?

मुझे गुस्सा आया बोली- अरे लौड़ा है या नहीं?

वह बोला- हैं जान, पर अब मेरा लौड़ा देखकर क्या करोगी? उसे तो अपनी इस प्यारी प्यारी चूत में लेना, तब आपके मन को ठीक लगेगा।यह बोलकर वह मेरी चूत पर झुका और उसे चाटने लगा। मुझे यह थोड़ा अजीब लगा कि वह मेरी चूत से निकलने वाले पानी को भी चाट रहा था। पर इससे मेरी बेचैनी इतनी ज्यादा बढ़ी कि मैं उसके बालों को पकड़कर अपनी ओर खींचा। परिणाम यह हुआ कि अभि मेरे ऊपर आया, मेरे होंठों पर अपने होंठ रखकर चूमना शुरू कर दिया।

मैं अपने हाथ बढ़ाकर उसके लौड़े पर ले गई। अभि अब तक कपड़े पहने हुआ था। मेरा हाथ उसके पैंन्ट में चेन के पास पहुँचा तो एहसास हुआ कि यह जगह बहुत उठी हुई है। मैं उसकी चेन तक अपना हाथ बढ़ाने के लिए उससे छूटी। अब तक अभि को भी भीतर रखा अपना लंड़ बर्दाश्त नहीं हुआ और वह मुझसे हटकर अपने कपड़े उतारने लगा। शर्ट, बनियान, पैन्ट के बाद उसने अपनी अंडरवियर भी उतारकर फेंक दी।

मैंने उसका मस्त तना हुआ लण्ड पहली बार देखा, यह अच्छा लंबा व मोटा था। उसके गुलाबी सुपारे को देखकर मैंने सोचा कि इसे प्यार कर दूं ताकि यह मेरी चूत में अच्छे से जाकर मुझे चुदने का मजा दे दे पर मुझे अपनी चूत की आग ने ऐसा परेशान किया कि मैं इस लंड को पकड़कर अपनी जांघों के पास ही ले आई।

अभि खुद भी इसे मेरी चूत में घुसाने को बहुत उतावला था, वह मुझे ठीक से लिटाकर मेरे ऊपर आया व अपने लौड़े को मेरी चूत में लगाकर रगड़ने लगा। अब मेरे बदन में मानो किसी ने बिजली की तार छुआ दी हो, मैं तड़प कर अभि से बोली- जल्दी कर ना प्लीज। अभि ने अपने लौड़े को चूत के ऊपर रखकर अपनी कमर को झटका दिया, मुझे चूत में बहुत जोर का दर्द हुआ, चीखकर उसे बोली- बाहर निकाल, लगता है मेरी चूत फट गई है।

थोड़ी देर पहले ही उसे लिंग डालने के लिए कहने वाली मैं अब जब वह लण्ड अंदर घुसा रहा है, तब मैं उसे इसे ऐसा न करने के लिए कह रही थी। चूत में बहुत जोरों से दर्द हो रहा था, लिहाजा मैं उसे ऐसा ना करने को बोल रही थी, पर वह नहीं माना, लण्ड बाहर करने के बदले और एक झटका मारकर इसे और भीतर कर दिया।

मेरी तो मानो जान ही निकल गई, अपने हाथों से उसे धक्का देने के अलावा मैं अपने पैर भी सीधा करने का प्रयास करने लगी, पर अभि मुझे चोदने से बिल्कुल परहेज नहीं कर रहा था।इस तरह की कशमकश के बाद उसका लौड़ा मेरी चूत में पूरा घुस गया, उसने शाट लगाने शुरू कर दिए। मैं उसे रोकने का प्रयास करती रही, पर उसने अपनी धक्कमपेल जारी रखी। मुझे महसूस हो रहा था कि मेरी चूत फट गई है, और उससे खून भी आ रहा है। ऊपर से यह कमीना मुझे चोदे ही जा रहा है।

अब मैं सोचने लगी कि आगे से इस चुदाई से बिल्कुल दूर रहूँगी, इस हरामखोर से अब बात भी नहीं करूँगी।

यह सब मेरे मन में चल रहा था, तभी मुझे लगा कि अब जब इसने लण्ड भीतर घुसा ही दिया है तो क्यूँ न अभी चुदाई का ही मजा लेने की कोशिश की जाए।

मैंने महसूस की कि अब मेरा दर्द बिल्कुल काफ़ी कम हो गया है और चूत में अब बहुत मीठा अहसास होने लगा है। यूँ लगने लगा कि अब यह लण्ड और भी भीतर घुसे, और अब यह कभी बाहर ही ना निकले, इसे और अंदर करने मैं भी नीचे से उछलने लगी।

मैंने नीचे से अपने चूतड़ उछालने की स्पीड और बढ़ा दी। कुछ देर ऐसा ही चला फिर मुझे लगा कि भीतर किसी ने मानो आग में पानी डाल दिया हो।

मैंने अभि की ओर देखा तब पता चला कि उसका काम हो गया है, यानि उसका झड़ गया है जिससे वह निढाल हो मुझ पर लेट गया। मैं डर गई कि यह साला अपना काम निकालकर सो ना जाए। इसलिए नीचे से अपनी स्पीड बढ़ाकर मैं उसके लंड को और जगाने का प्रयास करने लगी।

पर आह्ह ह्ह ! मुझे लगा मानो मेरे अंदर का कोई दबा हुआ लावा बड़े विस्फोट के साथ बाहर आया है।

जी हाँ, मेरा रज भी एक फव्वारे के साथ छूट पड़ा। इससे मैंने अभि को अपने से भींच लिया।

तो दोस्तो, यह हुई मेरे चूत की महीन झिल्ली यानि मेरी सील के टूटने की बात।

इस दिन अभि ने तुरंत बाद फिर चुदाई की और फारिग होकर जाते-जाते एक बार मुझे फिर चोदा यानि पहले ही दिन मेरी चुदाई 3 बार हुई।

जब इसका लौड़ा पहली बार मेरे भीतर घुसा था, तब कहां मैं इसे गाली देते हुए सोच रही थी कि अब इससे कभी नहीं मिलूंगी और उससे जमकर चुदने के बाद अब मैं सोच रही थी कि यह मुझसे दूर ही ना हो, ताकि हमें चुदाई का और मौका मिल सके।

दोस्तो, इस कहानी में कुछ भी बनावटी नहीं हैं। जो हुआ, जैसा हुआ मैंने अपने एक बहुत अच्छे मित्र जवाहर जैन के कहने पर आप लोगो के लिए लिख दिया है। अब आप लोग बताइए कि मेरी यह कहानी आपको कैसी लगी।

हाँ अभि मुझसे दूर ना हो, इस लालच में मैंने उसे दूसरे ही दिन अपना जन्मदिन होने की बात कहते हुए निमन्त्रित किया, यह भी बोली- मम्मी पापा तो हैं नहीं, इसलिए किसी को भी बुला नहीं रही हूँ, सिर्फ़ मैं और तुम ही रहेंगे।

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Update

मैं मॉम डैड की घर से गैर मौजूदगी का पूरा लाभ लेना चाहती थी, इस कारण ही मैंने अभि को दूसरे दिन भी निचोड़ने का मन बना लिया। अभि को भेजने के बाद आज बहुत दिनों बाद मस्त नींद आई।

दूसरे दिन सुबह कामवाली बाई व रसोईए को लगाकर घर को पूरा ठीक कराया ताकि अभि के सामने यहाँ मेरे जन्मदिन का माहौल लगे। चुदाई के लिए मेरी बैचेनी का आलम यह था कि घर की सफाई के दौरान ही मैंने अभि को फोन लगाकर उसके आने के बारे में पूछा।

हाँ, यह ध्यान रखा कि मुझसे सैक्स की कोई बात ना निकले ताकि उसे यह ना लगे कि मैं भी चुदवाने को इच्छुक हूँ।

फोन पर अभि बोला- मुझे अभी भी वह सब एक सपना ही लग रहा है। आपसे मैंने वह पा लिया जो कभी जिंदगी में भी नहीं सोचा था कि ऐसे शरीर को चोदना तो दूर हाथ भी लगा पाऊँगा।

मैं बोली- अरे वो सब बातें छोड़, और बत कि शाम को कितने बजे आ रहा है? यह मेरा पहला जन्म दिन है, जिसमें अकेले तू ही मुझे विश करने यहाँ मेरे पास मौजूद रहेगा।

अभि बोला- तुम ऐसा कभी मत सोचना कि तुम्हारा मम्मी-पापा के अलावा और कोई नहीं है, मैं हूँ ना आज तुम्हारे जन्मदिन में सात रंग भरने के लिए। और तुम यह सोच रही होगी कि तुम्हारे मॉम डैड नहीं हैं इसलिए तुम्हारा जन्मदिन बोर हो जाएगा, पर नहीं, मैं अपने मम्मी पापा को लेकर तुम्हारे बर्थडे पर आज शाम को तुम्हारे घर आ रहा हूँ।

यह सुनकर मैं घबरा गई कि यह बेवकूफ अपने माँ-बाप को लेकर आएगा, सब खा पीकर निकल लेगें, फिर मेरी चूत वैसे ही प्यासी रह जाएगी। इसलिए मैंने तुरंत उसे मना किया- अरे, ऐसी गलती मत करना ! अभी मॉम डैड नहीं हैं ना। मेरे नौकर उन्हें यह बता देंगे, सो मम्मी पापा को मत लाना।

वह बोला- जब मैं आऊँगा, तब नहीं बताएंगे क्या?

मैं बोली- तू मेरे बराबरी का है, सो मेरे दोस्त आए, इसलिए कुछ कहेंगे नहीं। पर मम्मी पापा बड़े हैं ना इसलिए कह देंगे।

अभि बोला- तो फिर ठीक है, मैं अपने दोस्तों को ही लेकर आ जाऊँगा।

मैं बोली- अरे, उन सबको रहने दे ना, तू अकेले ही आना।

अभि बोला- नहीं यार, तुम्हारे बर्थडे के बारे में मुझे पता हो, और जश्न ना हो, यह हो ही नहीं सकता।

मैंने अपना सर पकड़ लिया कि यह बेवकूफ जन्मदिन पर हो-हल्ला और पार्टी करना ही जानता है। जो जन्मदिन के नाम से इसे चुदवाने बुलवा रही है, उसके बारे में नहीं सोचता।

मैं उसे बहुत देर तक यह समझाने का प्रयास करती रही, पर वह नहीं माना। मेरी परेशानी यह थी कि मैं इसे यह नहीं बता सकती थी कि अपने जन्मदिन होने का बहाना तो मैंने सिर्फ़ अपनी चुदाई के लिए बनाया था। यदि सही में मेरा बर्थडे रहता तो मेरे मॉम-डैड मुझे छोड़कर जाते ही नहीं, और मेरे घर में वैसे ही जमघट लगा रहता। पर अब अपनी चुदाई की लिए जो झूठ बोल चुकी थी, तो अब उसे ही असलियत बनकर चलाना है।

आखिर मैंने उसे किसी तरह मना लिया कि वह मेरे घर में ज्यादा लोगों को लेकर वह नहीं आएगा। पर अभि मेरा जन्मदिन यूं ही सीधे-सादे न करके अपने बहुत खास दो दोस्तों को साथ लाने की जिद पर अड़ा ही रहा, साथ ही विशेष केक वह ही लाएगा, यह भी बताया।

उससे हारकर मैंने सोचा कि चलो केक काटकर ही अपनी पहली चुदाई का जश्न मना लेती हूँ, मौका मिला तो रात को चुदा भी लूँगी, नहीं तो इसे बाद में देखा जाएगा।

यह बोलकर मैं अपनी नौअकरानी को और क्या काम करना है, यह बताती रही। शाम ढलते ही नौकरानी अपने घर चली जाती थी और रसोइया किचन के सब काम निपटाने के बाद हमारे कैंपस में ही बने क्वार्टर में रहता था।

रसोईए से मैंने कहा- मेरे एक दोस्त के किसी रिश्तेदार की मौत हो गई है इसलिए मैंने उसे अपने ही घर में केक लेकर बुला लिया है, वो अपना बर्थडे यहीं मनाएगा। उसके साथ मेरे दो दोस्त और रहेंगे बस। इसलिए आप आज चार लोगों का खाना बना लेना।

रसोईया हाँ बोलकर अपने काम में लग गया।

शाम करीब 7 बजे अभि अपने दो दोस्तों के साथ आया। मैंने इनका स्वागत किया।

अभि ने मुझसे इनका परिचय कराया। एक का नाम राहुल और दूसरे का साहिल था। दिखने में साहिल अभि की ही तरह का था, यानि खुला रंग और ऊँचा कद पर राहुल इन दोनों से कद में छोटा था, इसका रंग भी उन दोनों की तुलना में थोड़ा दबा हुआ था, इसका चेहरा बहुत कुछ एक फिल्मी कलाकार रघुवीर यादव से मिलता जुलता था।

अभि ने अपने साथ लाया केक व गिफ्ट मुझे दिया, साहिल व राहुल भी गिफ्ट लाए थे। इन्हें लेने के बाद मैंने रसोईए को आवाज दी। उसने वहाँ मेज वगैरा लाकर रखा, व कुछ स्नेक्स भी रखकर गया।

कुछ देर में केक काटने की औपचारिकता पूरी करने के बाद मैंने खाना लगाने को कहा। पर बहुत ऐतराज और मेरे मनाने के बाद उन लोगों ने खाना खाया। इस बीच हम लोगों में सामान्य बातें ही होती रही।

हाँ टेबल पर रखे खाने को लेते समय अभि मेरे पीछे था, तब उसने मेरे चूतड़ों को अपनी मुट्ठी से पकड़ लिया। मुझे उसकी यह शरारत ठीक तो लगी, पर ये दोनों यह ना देखें इस कारण मैं उससे छूटकर जल्दी से अलग हुई।

खाना खाते समय अभि ने बताया कि साहिल की गर्लफ्रेंड अब उससे शादी ना करने की जिद पकड़ ली है क्योंकि उसके घरवालों को किसी दूसरी जाति के लड़के के साथ उसकी दोस्ती अच्छी नहीं लग रही, और अब वे लड़की को अकेले कहीं जाने भी नहीं दे रहे।

साहिल ने अपनी गर्लफ्रेड से मुझे दोस्ती कर फिर उन दोनों के मेल मिलाप कराने कहा।

मैं 'देखूंगी' बोलकर बात को बदलने लगी कि राहुल भी अपनी समस्या के लिए मुझसे सहायता मांगने लगा, कि इस भरी जवानी में कोई भी लड़की उसे अब तक घास नहीं डाली है और उसकी जवानी का यह समय बिना किसी लड़की के अकेला ही बीता जा रहा है।

मैं इसे भी 'कोई मिलेगी तो आपको बताऊँगी' बोलकर टालने लगी।

अब मैं अभि को बोली- तुम तो ठीक हो ना, या आपकी भी कोई समस्या हैं तो बताइए।

साहिल और राहुल भी उससे अपने दिल की बात करने की जिद करने लगे।

अभि बोला- मेरी हालत भी इन लोगों से कुछ अलग नहीं थी। मेरी हालत तो इतनी खराब थी कि कई बार मैं आत्महत्या के लिए भी सोच चुका था। पर कल का दिन मेरे जीवन में ऐसा बदलाव लाया कि अब मुझे अपनी जिंदगी से प्यार हो गया है।

साहिल ने पूछा- ऐसा क्या हुआ जादू हुआ है कल?

अभि उठकर मेरे पास आया, और मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर बोला- कल मेरे हाथों में जादू की दीपिका लग गई, जिसका साथ पाकर मैं सारी जिंदगी के लिए उसका गुलाम हो गया।

मैं भी शर्मीली सी हंसी हंसकर उसकी बात को टालने लगी पर राहुल ने कहा- यार अभि, मैं जान रहा हूं कि तुम दोनों की दोस्ती हुए काफी समय हो गया है, फिर दीपिका ने कल कौन सा जादू किया तुम पर कि तुम अब उन पर जान तक देने को तैयार हो गए हो? अभि खुद को बहुत तीसमार खान बनते हुए मुझसे पूछा- बता दूँ दीपिका?

मेरे सामने इस समय शरम से चेहरा छुपाने के अतिरिक्त कोई उपाय नहीं बचा था, सो मैं गरदन झुकाए बैठी रही, और वह बेवकूफ

मेरी श्र्म को मेरी सहमति समझकर अपने उन दोस्तों को बताया- कल मैं और दीपिका एक हो गए हैं।

साहिल ने पूछा- एक हो गए हैं मतलब?

राहुल बोला- अबे सब कोई जो शादी के बाद करते हैं, वह इन दोनो ने कल कर लिया है।

साहिल बोला- यानि?

अभि बोला- कल हम लोग एक दूसरे में समा गए। अब तेरी भाषा में बोलूँ तो कल हम लोगों ने चुदाई कर ली है। एक दूसरे को जमकर चोदा है। यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं।

उसके यह बोलते ही दोनों उछल पड़े। राहुल मेरे पास आ गया और बोला- दीपिका, यह तो कुछ भी बोलता रहता हैं। तुम हमें सच बताओ कि क्या कल सही में तुम लोगों ने चुदाई की है?

मेरी हालत तो ऐसी थी मानो यह केक काटने वाली छुरी उठाकर खुद को मार लूँ। शर्म के कारण मेरा पूरा शरीर मानो अकड़ गया हो। जुबान में ताला लटका था। अभि मेरे पास आया और मेरे कंधे को दबाते हुए बोला- ओह सॉरी दीपिका, मुझे यह नहीं बोलना था, पर अभी बात निकली और तुम सामने थी इसलिए यह मेरे मुँह से निकल गया। मुझे यह नहीं बोलना था।

मैं महसूस कर रही थी कि उसका हाथ मेरे कंधे से नीचे सरक रहा था। इधर मेरे दिमाग में अब यह बात आ रही थी कि हो ना हो अभि ने अपने दोस्तों को मेरी चुदाई करवाने ही लाया हो। यह मुझ पर इंप्रेशन जमाने के लिए खुद शरीफ बन रहा हैं पर तीनों पहले ही सब तय कर चुके हैं। मन में यह ख्याल आने के बाद मैंने सोचा- यह भी क्या बुरा है। तीन लौड़े एक साथ लेने में और मजा आएगा।

किन्तु इन्हें पहले ही कुछ बोलना मुझे ठीक नहीं लगा। इसलिए मैं वैसे ही सिर झुकाए बैठी रही। उधर अभि मुझे इस नाजुक दौर में सांत्वना देने का ढोंग करते हुए मेरे वक्ष पर अपने हाथ फेर रहा था।

अब साहिल मेरे पास पहुँचा और बहुत नाटकीय तरीके में अपने हाथ जोड़कर कहा- दीपिका, हम लोगों को इस बात का एहसास नहीं है कि इस मौके पर हमें हमें तुमसे कैसे बात करनी चाहिए, क्या कहना चाहिए जिससे तुम्हें अच्छा लगे और तुम हमें माफ दें। इसलिए तुम एक अच्छे दोस्त की तरह हमारी माँ, हमारी बहन बनकर हमें माफ करो और इस महान दिन को इन्जाय करो।

यह बोलकर वह मेरे दूसरी तरफ के कंधे पर अपना हाथ रख दिया।

राहुल भी आकर मेरे एकदम सामने खड़ा हो गया और कहा- हमारी बात मान लीजिए दीपिका, हम तीनों की ओर से मैं तुम्हारे पैर छूकर माफी मांगता हूँ, हमें माफ कर दो।

यह बोलकर वह मेरे पैर के पास आकर बैठ गया, और मेरे पैर पड़ने के बहाने पैर के पंजे अपने हाथ में लेकर सहलाने लगा।

मुझे अहसास हो गया कि ये साले तीनों पहले से ही आज मुझ पर चढ़ने की योजना बनाकर आए हैं, अब मेरी बारी थी, मैं बोली- चलो कोई बात नहीं। अब आप लोग रिलैक्स हो जाइए। साहिल व अभि मेरे पास से हटकर पूछे- हां बोलो। आपकी आवाज से ही हमें राहत मिली हैं। पर राहुल अब तक मेरा पैर नहीं छोड़ा था।

मैंने महसूस किया कि उसका हाथ ऊपर बढ़ते हुए मेरे घुटनों तक पहुँच गया हैं, मैं राहुल से बोली- आपको मैंने माफ कर दिया है, यह

बोलने के लिए मुझे कोई और शब्द तलाशना पड़ेगा क्या?

अभि ने राहुल को पीछे सरकाया।

साहिल बोला- तो तुमने हम लोगों को माफ कर दिया ना?

मैं मुस्कुराते हुए बोली- आप लोगों ने ऐसी कोई बात ही नहीं की, जिसके लिए आपको माफी मांगनी पड़े।

अभि बोला- थैंक्स गॉड, मैं बहुत टेंशन में आ गया था। पर अब मुझे ठीक लग रहा है।

मैं उसकी ओर देखकर सोचने लगी कि कमबख्त अपना टेंशन खत्म करने के लिए ही मेरा उरोज सहला रहा था क्या? वैसे सही बोलूँ तो इन तीनों ने अपने हाथों से मेरे शरीर को सहलाकर मेरी पूसी में लौड़े की मांग को बढ़ा दिया था। पर अब उन्हें चोदने के लिए कैसे कहूँ यह सोच ही रही थी कि राहुल बोला- तुमने हमें सही में माफ कर दिया ना?

मैं बोली- हाँ बाबा !
राहुल बोला- तो मुझे तुमसे कुछ कहना है।

मैं सोचने लगी कि कहीं यह मुझसे चोदने को तो नहीं कहेगा, सो मैं बोली- किस बारे में बोलना है आपको?

राहुल बोला- अरे मुझे आज के इस खास दिन के लिए कहना है। तुम्हारे जन्मदिन के लिए कहना है।

मैंने सोचा कि यह गधा अब तक मेरे जन्मदिन पर ही अटका हुआ है पर जाहिर तौर पर बोली- हाँ बोलो ना?

राहुल बोला- बचपन से अब तक मैं अपने जितने दोस्तों की बर्थडे पार्टी में गया हूँ, सबने मुझे पार्टी के बाद रिटर्न गिफ्ट दिया है। आप नहीं देंगी हमें रिटर्न गिफ्ट?

मैं उसके इस सवाल से हड़बड़ा गई और बोली- तो क्या हुआ मुझसे भी मांग लिजिए रिटर्न गिफ्ट।

तीनों ने एक दूसरे की ओर देखा और मुझसे बोले- क्या गिफ्ट लेना है, इसके लिए हम आपस में बात करना चाहते हैं।

मैं बोली- ठीक है, कर लीजिए, आपस में बात।

मेरे इतना कहते ही तीनों एक दूसरे के पास आए और मुझसे थोड़ा दूर हटकर बात करने लगे। कुछ देर बाद वे मेरे पास आए।

साहिल बोला- दीपिका, मैं आपसे रिटर्न गिफ्ट के रूप में आपको पूरी तरह से नंगी देखना चाहता हूँ ताकि मैं कभी याद करके इस बात पर इठला सकूं कि मैंने कुदरत के सबसे हसीन तोहफे को बिना किसी आडम्बर के उसी कुदरती रूप में देखने का सुख हासिल किया है। मैंने वहीं बैठे हुए अपने सिर पर हाथ रख लिया। मैंने राहुल की ओर देख कर पूछा- तुम्हें क्या चाहिए?

राहुल बोला- साहिल की बात से मैं सहमत नहीं हूँ इसलिए हम दोनों में बहस भी हुई।

मैं सोचने लगी कि इसे मैं बेकार में ही नकारा समझ रही थी, यह तो साहिल और आदि से ज्यादा शरीफ निकला, उसकी ओर देखते हुए मैं बोली- हाँ फिर, तुमने क्या तय किया है?

राहुल बोला- जब आप इसके लिए नंगी होगी ही तो मुझे अपनी चूत का रस पिला देना। यानि मैं आपकी चूत को चाटकर उसका रस पीना चाहता हूँ।

राहुल के लिए मेरा भ्रम टूट गया, यह तो साहिल से भी एक कदम आगे निकल गया।

अब मैंने अभि की ओर देखा, अभि मुझे देखते साथ ही बोला- इन दोनों की ही डिमांड पूरी कर दीजिए बस।

मैं बोली- नहीं, नहीं अब आप भी बोल दीजिए कि आपको क्या चाहिए?

अभि बोला- मैं आपको प्यार करना चाहता हूँ बस।

मैं बोली- ठीक है।

यह बोलकर मैं अभि को बोली- ठीक है, आप लोगों का गिफ्ट मैं खुले कमरे में तो नहीं दे सकती। इसलिए जाइए पहले दरवाजे को बंद करके आइए।

साहिल दरवाजे के पास था, वह बढ़ा और दरवाजा बंद करके आ गया। तब तक अभि मेरे पास आया और मुझे अपनी बाहों में ले लिया। अब तक मैं उन दोनों की मौजूदगी से अभि के साथ सामान्य नहीं हो पाई थी, इस कारण सब कुछ वह ही कर रहा था। अभि मेरे अधरों से लग गया, मुझे चूमने लगा।

तभी राहुल मेरे पीछे आया और टीशर्ट के भीतर हाथ डालकर मेरे उरोजों को पकड़कर सहलाने लगा।

तभी साहिल का हाथ मुझे अपनी जांघ पर महसूस हुआ। अब मेरी स्थिति गजब की थी। शायद ही किसी लड़की के जीवन में ऐसा

होता हो जब तीन-तीन लड़के उसकी एक चूत पाने में लगे हों। उस समय अपने शरीर का नजारा मैं आपको बता रही हूँ।

मेरे होंठों पर अभि के होंठ जमे हुए थे, उसकी जीभ मेरी जीभ के संग मुँह के भीतर घूम रही थी। थोड़ा सा नीचे आएँ तो राहुल के हाथ मेरे वक्ष पर थे, वह मेरी चूचियाँ मसल रहा था, उससे नीचे साहिल के हाथ थे जो अब पैर, घुटनों से होते हुए मेरी योनि के पास जांघ पर थे।

समझे आप?

अब मैं आपसे अपने मन की बात भी कहना चाहूंगी कि इन तीनों की हरकत से मेरी चूत में मानो पानी का झरना बहने लगा हो, पर मन थोड़ा डर भी रहा था, कहीं कल जैसी तकलीफ हुई तो?

यह ख्याल भी आ रहा था पर अपने मन से इन ख्यालों को झटककर मैं इस समय को इन्जाय करने में लगी। सोचने लगी कि अभी

इतने दिन अपनी इसी चूत में एक लण्ड लेने के लिए मैं इतना तरसी, अपने रसोइया, ड्राइवर सहित ना जाने और कितनों को सिगनल देकर उनके लौड़े की दया मुझ पर बरसने के लिए प्रयास और मिन्नतें करते रही। और आज जब एक साथ तीन-तीन लण्ड मुझे चोदने के लिए फुदक रहे हैं, तो मैं फिर अब क्यों डर या यह सब सोच रही हूँ।

आखिर में इन विचारों के साथ मैंने इस समय का भरपूर लुत्फ़ उठाने का फैसला लिया और इनकी हरकतों में सहयोग देने लगी। मेरे शांत रहने से इन तीनों को ताकत मिली और अभि ने मेरी शर्ट को उतार दिया। यह उतरते ही राहुल ने पीछे मेरी ब्रा का हुक खोला और इन लोगों ने इसे उतारकर फेंक दिया। मेरे ऊपर का शरीर नंगा होते ही साहिल मेरे स्कर्ट का हुक खोला और उसे खोल दिया।

मेरे शरीर में अब केवल पैन्टी बची थी। इसे भी राहुल ने पागलों के जैसी हड़बड़ी में नीचे कर दिया। अब मैं मादरजात नंगी थी, मेरी चूत से निकला पानी मेरी जांघ तक को नम कर दिया था। तीनों अब मेरे बदन को चाट रहे थे। इनकी जीभ मैं अपने बूब्स चूत और जांघ में महसूस कर रही थी।

इससे मुझ पर भी उत्तेजना का खुमार चढ़ गया, खड़े होकर उनकी जीभ मेरी चूत के अंदर तक नहीं जा पा रही थी इसलिए मैं बिस्तर की ओर आ गई और यहाँ आकर लेट गई, लेटकर मैंने अपने पैरों को फैला कर अपनी जाँघे उन्हें परोस दी।

साहिल मेरी चूत में जहाँ तक।उससे संभव हुआ, वह जीभ पहुँचा रहा रहा था। एक बारगी ऐसा लगा मानो वह चूत में ही घुसना चाहता हो। अभि मेरे एक दुग्ध-कपोत को हाथों से दबा रहा था, और दूसरे पर अपने लब जमाए हुए था। राहुल साहिल के साथ ही मेरी चूत को चाटने के बाद अब मेरी गाण्ड को चाटने में लग गया था। मेरा बदन 'बाप रे बाप' यौनाग्नि में तप रहा था। यदि अभी थर्मामीटर लगाकर बदन का तापनान मापा जाता तो यकीनन वह बुखार के सभी रिकार्ड तोड़ देता।

मेरी गाण्ड के छेद चाट रहा राहुल पहले उठा और बोला- अब कंट्रोल नहीं हो रहा है यार !

यह बोलकर उसने अपने कपड़े उतारने शुरू कर दिए, जल्दी ही वह नंगा हो गया। अपना लौड़ा हाथ में लेकर वह मेरे मुँह के पास पहुँचा और मेरे होंठों में रगड़ने लगा। मेरा भी मुंह खुला और उसके लंड को चूसने लग गई। यह देखकर अभि हटा व अपने कपड़े उतारने लगा। उसे देखकर साहिल भी। इस तरह ये तीनों भी नंगे हो गए। राहुल का लौड़ा मेरे मुँह में था।

अभि भी उसके पास पहुँचा व उसका लण्ड निकलवाकर उसे पीछे किया, अब वह मेरे कान के पास आकर बोला- कल मैंने तुझे चोदा था ना, आज तू मुझे चोद।

मैंने कंपकंपाते हुए पूछा- कैसे?

वह बोला- मैं नीचे लेटता हूँ, तू मेरे ऊपर आ जा !

यह बोलकर वह मेरे बाजू में लेटा, और मुझे पकड़कर अपने ऊपर ले आया। उसके ऊपर आकर मैं अपनी चूत उसके लौड़े पर लगा रही थी, तभी साहिल का लंड मेरे मस्तक पर लगा। मैंने सिर उठाया तो वह बोला- वह तो नीचे रहेगा, मैं ऊपर ! प्लीज मुंह में ले लो ना इसे !

बिना कुछ बोले मैंने उसका लौड़ा अपने मुंह में ले लिया।

तभी अपनी गांड के छेद पर मुझे राहुल का हाथ लगा। ऐसा महसूस हुआ कि वहाँ वह कोई क्रीम या चिकनाई लगा रहा है। मैंने अपनी कमर नीचे कर अभि का लौड़ा अपने चूत में टिकाया।

तभी राहुल ने अपना लंड मेरी गांड के छेद में रखा और उसने जोर लगाया। चिकनाई के कारण उसका लंड़ मेरी गाण्ड में अंदर हुआ। उफ्फ्फ ! बाप रे ! मानो मेरी जान ही निकल गई, मैं जोर से चीखी।

पर अभि ने मेरे मुँह को हाथ से दबाकर चीख की आवाज को कम कर दिया। वह मेरे नीचे से निकलकर अब अपना लंड ताने मेरे चेहरे के पास था। उसके बदले साहिल मेरे नीचे आकर लेट गया।

राहुल बिना रूके मेरी गांड में लंड डाल रहा था, उसका दर्द अभी मैं ठीक से सह भी नहीं पाई थी, कि साहिल ने नीचे से अपनी कमर उठाकर अपना लंड मेरी चूत पर लगाया और झटका मारा जिससे उसका लिंग मेरी चूत में घुस गया। पहले मुझे भंयकर पीड़ा हुई। दर्द मेरी सहनशक्ति से ज्यादा था। पर कोई रूकने का नाम नहीं ले रहा था। मैं दर्द से चीख ना पाऊं, इसलिए अभि ने पहले मेरा मुंह बंद कर रखा था। अब उसने हाथ हटाकर अपना लण्ड मेरे मुंह में दे दिया। देखिए कल तक एक लौड़ा पाने के लिए इस लड़की के बदन के अन्दर अब तीन-तीन जवान लौड़े थे। मुझे इसे शरीर में लेने पर शुरू में तकलीफ हुई। पर बाद में मेरा शरीर इसके लिए अभयस्त सा हो गया।

राहुल का काम सबसे पहले हुआ। मेरी गांड को लहुलुहान करके अपना माल मेरी गाण्ड में ही छोड़कर वह हटा।

साहिल अपना लम्बा लोला मानो मेरे पेट तक घुसा देने के फेर में उछल-उछलकर शाट लगा रहा था। इधर अभि भी अपना पूरा लौड़ा मेरे मुंह में गले तक डाल रहा था, यह सच में मेरे हलक तक जा रहा था।

अब अभि का माल छूटा। इसने भी मेरे मुंह में ही अपना झड़ाया पर मैं उसे वहीं थूक दिया।

साहिल लगा हुआ था, जोर से उछल कर शाट मारना जारी रख्र हुए था पर कुछ ही देर में यह भी शांत होकर मुझसे चिपक गया। इनका काम निबटने के बाद मैं उठी, वाशरूम गई, वहाँ से फ्रेश होकर आने के बाद मैंने उनसे कहा- तुम तीनों की जरूरत पूरी करने के फेर में मेरी जरूरत तो बाकी ही रह गई।

अब राहुल बोला- यार इस बार मैं तुम्हारे पीछे लगा तो मैं भी पूरा मजा नहीं पा पाया।

अभि बोला- तो भोसड़ी के किसने तुझे इसकी गांड मारने कहा था?

वह बोला- यार हम तीन थे और पूदी एक, तो मुझे मालूम था कि तुम दोनों ही आगे लगते फिर मैं तो लटक ही जाता ना। कुंए के पास से प्यासा चल देना अच्छा नहीं था। पानी ना पी सको तो कोई बात नहीं किनारे बैठकर उस पर और पत्थर फेंक कर उसकी गहराई तो देखी ही जा सकती है ना।

इनकी बात और चलती तभी मैं बोली- अब जो करना है, जल्दी करो। नहीं तो रसोईया यहाँ आ जाएगा।

कौन कहाँ लगेगा, तीनों ने इसकी बात शुरू कर दी पर मैं बोली- अब बारी-बारी से तीनों ही मेरी चूत चोदना। अब कोई भी मेरी गांड या मुंह में लंड नहीं डालेगा।

"तो ठीक है, पहले मैं !" यह बोलकर राहुल पहले मुझ पर चढ़ा। अभि व साहिल मेरे पास दोनों तरफ़ बैठकर मेरे निप्पल चूसने लगे। इसका जोश मुझे अच्छा लगा। इसके बाद साहिल ने मेरी चुदाई की। इसका लंड राहुल से थोड़ा बड़ा था और स्पीड भी ठीक थी। आखरी में अभि ने चोदा।

अब मैं बहुत थक गई थी, आज की चुदाई में मेरी चूत से 5 बार रज निकला। अभि का काम होते ही मैंने इन्हें जाने कहा। सब कपड़े पहनकर तैयार हुए इन्हें छोड़ने मैं बाहर तक आई। इनके जाने के बाद बाहर का गेट बंद करते हुए रसोइए की लाइट जली देखकर ध्यान आया कि मैंने रसोईए को तो उसके कमरे तक जाते देखा ही नहीं। हमें खाना देने के बाद कहीं ये कुछ और देने या पूछने के लिए यह

अन्दर आया हो और हमें चुदाई करते हुए ना देख लिया हो?

यह ख्याल आते ही मैं उसके कमरे की ओर बढ़ी और वहाँ देखा तो सन्न रह गई। हमारा रसोईया दीपक पूरा नंगा होकर अपना लौड़ा हिला रहा है।

उसे इस हाल में देखकर मैं डर गई। मुझे यह समझ में आ गया कि इसने हमें चुदाई करते हुए देख लिया है।

यहाँ से चुपचाप मैं अपने हाल में आई, फिर सोचा कि देखा होगा तो कल देखा जाएगा, इससे बात करके देखूँगी।

यह सोचकर सब दरवाजे बंद करके मैं अपने कमरे की ओर सोने के लिए बढ़ ली।

तो दोस्तो, यह थी मेरे सैक्स जीवन में झटका लगाने वाली पहली ताबड़तोड़ चुदाई।

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