Xossip

Go Back Xossip > Mirchi> Stories> Hindi > कोमल के साथ दिल्ली के मजे-A REAL STORY WRITTEN BY ME

Reply
 
Thread Tools Search this Thread
  #1  
Old 9th May 2013
verynaughtyniraj verynaughtyniraj is offline
 
Join Date: 19th February 2013
Posts: 3
Rep Power: 0 Points: 1
verynaughtyniraj is an unknown quantity at this point
कोमल के साथ दिल्ली के मजे-A REAL STORY WRITTEN BY ME

कोमल के साथ दिल्*ली के मजे
मैं लिख रहा हूँ कोमल के मेरे पास दिल्*ली में बिताए गए दिनों और अनेक जगहों पर उसके साथ भ्रमण के बारे में जो कि अमूल्*य उपहार है न केवल उसके लिए बल्कि उतना ही है मेरे लिए। हम दोनों का बड़ा अरमान था कि साथ में दिल्*ली रह पाते बस परिस्थितियों ने साथ दिया और बहुत हद तक कोमल ने जुगाड़ लगाया क्*योंकि इस मामले में वो ही कुछ सेटिंग कर सकती थी। जहॉं तक रिजर्वेशन आदि की बात थी तो वो मेरा काम था।
खैर, मेरी कोमल, मॉम के साथ गरीब रथ एक्*सप्रेस से आ गई। जिस वक्*त वो मेरे रूम में आई, तेज बुखार से मेरा बुरा हाल था। मेरे पास कोमल बैठी, मेरा माथा सहलाया, अकेले में प्*यार किया। वो हमेशा मेरे पास ही रहती थी। रात में कोमलइस तरह से लेटी हुई थी कि उसका सिर मेरे सिर से एक फीट की दूरी पर ही था। पर हमारे शरीर एक दूसरे के शरीर से अलग थे। उस समय मेरी स्*वीटहार्ट लाल रंग की सुंदर सी नाइटी पहने हुई थी। मैं कुछ देर मॉम और गोलू के सो जाने का इंतजार करता रहा और जब मुझे ऐसा लगा कि वो लोग सो गए तब मैंने अपनी जानू को के बाल और माथे पर हाथ सहलाना शुरू किया। कोमल जगी हुई थी। उसने भी मेरे बाल और माथे को सहलाया। मैंने उसके गाल और गर्दन को सहलाते सहलाते धीरे-धीरे अपनी मनपसंद जगह यानी कोमल की चूचियों को सहलाना, उनको दबाना, निप्*पलों पे चुटकी काटना शुरू कर दिया। अपने बेड पर से ही मैं उसके माथे के उपर से हाथ को उसके नाइटी में घुसाते हुए उसके पेट और ढोंरी पर सहलाने लगा। मैं उसके पेट को अपनी मुट्ठी में लेकर भींच रहा था और उसके ढोंरी में अंगुली डालकर घुमा रहा था। फिर मैं अपने हाथ को थोड़ा और आगे बढ़ाते हुए उसकी पैंटी में घुसाकर उसके झॉंटों से खेलने लगा। उसकी झॉंटों पर हाथ फेरा, उसमें अपनी अंगुली को गोल-गोल घुमाकर पूरी झॉंटों को उसपे लपेटा। इसके बाद अपनी रानी के रानी यानी बुर के होठों को अपनी अंगुली से सहलाया और उसमें अपनी अंगुली भी घुसाया। कोमल गनगना रही थी उस मस्*ती को महसूस कर रही थी। वो मेरे गंजी के अंदर हाथ डालकर मेरे छाती को मसल रही थी और निप्*पल को भी दबा रही थी। उसने भी अपने हाथ मेरे पाजामे के अंदर जांघिये में डाल दिया और अपने राजा के राजा यानी मेरे लंड से खेलने लगी। किंतु कमजोरी और बुखार के कारण मेरा लंड टाइट नहीं हो पा रहा था। मुझे उस समय वास्*तव में बड़ा क्रोध आ रहा था पर क्*या करता। हमलोगों ने एक दूसरे को चेहरे पर खूब चूमा। मैं थोड़ा सा उठ के उसके दाढ़ी के ठीक नीचे से उसके कंठ होते हुए उसके वक्ष स्*थल तक अपनी जीभ से आगे-पीछे कर चाट रहा था जो कि उसे भीतर तक गुदगुदा रहा था। फिर कुछ देर में हम बाथरूम से आकर सो गए। अगले दिन फिर मुझे बुखार आया। कोमल साथ में ही थी। रात में हमलोगों के सोने की व्*यवस्*था ऐसी ही थी। परंतु मेरी तबियत खराब थी। मैं पहले ही सो गया था। रात में एक समय मेरी नींद खुली तो मैंने देखा मेरी कोमल, अपना गर्दन और अपना सीना थोड़ा आगे कर के सोयी हुई थी। मैं समझ रहा था कोमल कल जैसे ही मुझसे प्*यार की आशा में ऐसे सोयी थी परंतु कमजोरी और बुखार में मैं चाहकर भी ऐसा करने में असमर्थ था। परंतु मुझे उस समय बहुत अखरा। अगले दिन मुझे डॉक्*टर से दिखलाया गया और उसी दिन पिंकू कोमल को लेने आ गया। इस तरह मेरी कोमल मेरे पास से चली गई। मन तो नहीं कर रहा था कि वो मुझसे अलग हो पर उसको भी डॉक्*टर से दिखलाना जरूरी था।

एक दो बार जानू से मेरी मोबाइल पर बात हुई। मैं उसकी कमी बहुत महसूस करने लगा था। मॉम और गोलू दोनों मेरा ख्*याल रख रहे थे। पर कोमल की जगह कौन ले सकता था। उसका हमेशा मेरे पास रहना ही मुझे बड़ा सुकून देता था जिससे मैं उस समय वंचित हो रहा था। एक बार तो फोन पर उससे बात करते करते मैं जोर-जोर से रो पड़ा था।
जब मैं अस्*पताल में था तो वो मेरे पास कम देर ही रह पाती थी। पूरे दिन भर में मुश्किल से तीन घंटे के लिए हम साथ रह पाते थे। मैं बस उसे देखता रहता था। उस बीच बात तो बहुत ही कम होती थी क्*योंकि मैं कमजोरी के कारण ज्*यादा बोलता नहीं था। हॉं उसका पास में रहना भी मुझे अच्*छा लगता था। अस्*पताल में वो अक्*सर मेरा माथा और पैर सहलाती थी जोकि बहुत सकून देता था मुझे। मेरी उंगलियॉं भी वो चटकाती रहती थी। उसका स्*पर्श मुझे भला लगता था।
हॉस्*पीटल से मैं,मॉम और कोमल साथ ही आए। वो ऑटो मिलने तक मुझे सहारा दिए हुए थी। रूम में थोड़ा अकेलापन मिलने पर मुझे वो चूमती थी और मेरे गले भी मिलती थी। उन दिनों रमेश भैया भी यहीं थे तो दीवान पलंग पे मैं एक ओर,बीच में मॉम और आखिरी में कोमल सोती थी। मैं सबके सोते ही मॉम के उपर से अपना हाथ बढ़ाकर अपनी कोमल का हाथ, कलेजा आदि का स्*पर्श सुख लेता था। कोमल रात में अपना हाथ अपने मॉम के सिर के आगे से मेरी ओर बढ़ा लेती थी या कभी मैं ऐसा कर लेता था और इस तरह हमारे हाथ जुड़े रहते थे और इलेक्*ट्रीक करेंट मस्*ट पास वाला अपना थ्*योरी लागू होता रहता था। मेरी जानू, जब अपने मंगेतर से बात करती थी उस वक्*त भी मैं उसके ऊपरी अंगों को सहलाता और दबाता रहता था। कभी उसके हाथों को दबाता,कभी सहलाते सहलाते बॉंह तक पहुँच जाता। कभी गालों को, कभी माथा को तो कभी बालों को सहलाता रहता था और वो बात करती रहती थी। कभी-कभी तो कोमल बात कर रही होती थी और मैं उसके होठों को भी अपनी अंगुलियों से सहलाने लगता था। हमको लगता था कि कोमल को अनईजी फील होता होगा पर मैं भी आदत से मजबूर था। मैं रोज सुबह में बनिया के तरह उसके रात के बात करने का हिसाब देखता था कि कितना बात की और मजाक करता था। कमजोरी थोड़ी ठीक होने पर एक दिन मैं, कोमल और मॉम कॉलोनी के पार्क में घूमने गए। कोमल मेरा हाथ कभी-कभी सहारा देने के ख्*याल से पकड़ लेती थी। हमलोग एक-दो चक्*कर पार्क का लगाए, फिर वहॉं से लौटे तो पार्क गेट से निकलते समय कोमलअंधेरे का लाभ उठाकर मेरे पीछे से मुझसे चिपक गई और मुझे चूमा भी। हमलोग वहॉं से कॉलोनी वाले मंदिर आए और प्रणाम किया। हमलोगों ने वहॉं कुछ फोटो खींचे और फिर लौट आए। दो दफा ऐसा हुआ कि रमेश भैया और गोलू दोनों साथ में रिजर्वेशन कराने और करोलबाग घूमने के लिए निकले तो मॉम दिन के समय में सोयी हुई थी। हमने भी आपस में मन मिलाया और रूम के दरवाजे और खिड़की को बंद कर दिया। कोमल दीवान पर ही मॉम के बगल में ऐसे लेट गई कि उसका सामने का हिस्*सा मेरे तरफ था। मैं दीवान के साथ एटैच्*ड खाट पर ऐसे लेटा हुआ था कि उसके बिल्*कुल पास था। हम लोग एक दूजे को चूम-चाट रहे थे। कोमल बेडशीट अपने शरीर पर ओढी हूई थी जिससे मुझे उसके साथ खूब सारी मस्*ती करने का अवसर मिल गया था। मैं कोमल की चूचीयों को न सिर्फ ऊपर से दबाया और हाथ फेरा बल्कि उसको निकाल कर खूब जी भर के हपस हपस के पीया भी। कोमल सी-सी कर रही थी यानी कि उसको भी खूब मस्*ती आ रही थी। वो मेरे पैंट में हाथ डाल कर मेरे झॉंटों को सहला रही थी, लंड को सहला रही थी जिससे खुश होकर वो भी खड़ा होने लगा था और थोड़ा-थोड़ा रिसने भी लगा था। वो तो बीच-बीच में मेरे गांड के पास से होते हुए मेरे दोनों आंडों को भी हाथ में लेकर दबा और सहला रही थी। मेरे सीने को इतने जोर से दबाती थी कि क्*या कहें। मेरे होठों पर भी उसने जोर का काट खाया था।

अगले दिन केवल हम शंकर रोड घूमने गए। मुझे एटीएम से पैसे निकालने थे और कोमल को अपने मंगेतर के लिए बर्थडे ग्रीटिंग कार्ड लेना था। पार्क से आगे बढने के साथ हम एक दूजे के हाथों में हाथ डाले आगे चल रहे थे। बड़ा अच्*छा लग रहा था। उस समय मैं उसके हाथ में लेडीज रूमाल भी नहीं पसंद कर रहा था। वहॉं पे थोड़ा घूम के ग्रीटिंग कार्ड लेकर हमलोग सिंधी स्*वीट्स में रसमलाई खाए और कोमल मिठाई यानी कलाकंद ले लिए। उधर से लौटते वक्*त सड़क पर अच्*छा खासा अंधेरा था। मैं अपने एक हाथ को उसके कंधे पर रखकर चला, कभी कमर में हाथ डालकर चला तो कभी राह चलते उसको खुद से चिपटा लेता था। रास्*ते भर हमलोग कोमल मिठाई यानी कलाकंद एक दूसरे को खाते-खिलाते चले। सच में बहुत अच्*छी अनुभूति हो रही थी। कॉलोनी के अंदर आ गए तो एक जगह थोड़ा सुनसान और पर्याप्*त अंधेरा पाकर कोमल रूक गई और मुझसे गले लग गई और खूब सारा चूमा भी। मेरा निचला होंठ तो उसके लिए नॉनवेज पीस था ही कि च्*यूंग गम, ये पक्*का नहीं कह सकता। पार्क में प्रवेश करते हमने जान-बूझकर लंबा रास्*ता चुना और अंधेरे का लाभ उठाते हुए मैंने उसकी पप्पियॉं ली और उसके गले लगा। फिर पार्क के गेट के पास भी हमलोगों का प्रेमालाप चला।
रमेश भैया के जाने के दिन ही मैंने शाम में राजौरी गार्डेन के शॉपिंग मॉल सब घूमने का प्रोग्राम बना लिया। हम चारो यानी मैं, मॉम, कोमल और गोलू घूमे वहॉं जाकर, खूब सारा फोटो कोमल ने लिया और वहॉं उसने एक इयररिंग भी खरीदा। रात में हमलोग एग रोल वगैरह घर पर ही खाए और फिर सो गए। जैसा कि मैंने पहले भी लिखा कि हमलोग जब भी जगे रहते थे, खासकर रात के समय तो किसी न किसी तरह से एक दूजे से सटे और प्*यार के गुंजाइश में लगे रहते थे। मैं तो अक्*सर जब कोमल किचन में काम करती रहती थी तो उसको जाकर दबोच लेता था, चूमने लगता था, कभी जल्*दी से उसकी चूचियों को मसल कर सहला कर चला आता था। किचन में आईना बड़े साइज का होने के कारण हमलोग अक्*सर गले लगकर और आपस में चिपक कर आइने में देखा करते थे। बड़ा मजा आता था। कभी जब गोलू कहीं बाहर गया होता था और मॉम किचन में काम कर रही होती थी उस समय हमारी प्रेम कक्षा बेड रूम में लग जाती थी। हम लोग वहीं पर कुछ न कुछ रोमांटिक करने लगते थे चाहे वो कोमल के मीठे मुह से उसकी चूचियों को दबाकर पानी खींच-खींच कर पीऊँ चाहे उसको ऐसे ही पीने का प्रैक्टिकल कर सिखलाउँ, या कि उसके जीभ पर रखा नाश्*ता प्रेमपूर्वक अपने जीभ से खींचकर खा जाउँ। ऐसी इतनी सारी प्*यारी प्*यारी घटनाऍं हुई हैं कि चाहकर भी उन सबको यहॉं लिखना संभव नहीं है। अगले दिन मैंने सोंचा और सबको बता भी दिया था कि सिनेमा देखने चलना है क्*योंकि मुझे बड़ा मन था कि अपनी जानू को दिल्*ली में मल्*टीप्*लैक्*स में ले चलता। मैंने बड़ी कोशिश की किंतु एक तो मन लायक फिल्*म नहीं था और ना ही शो टाइम सूटेबल था। कोमल ने भी मना कर दिया। रात में कोमल जब बाथरूम के लिए निकलती थी तो मेरी बड़ी कोशिश होती थी कि मैं भी जाऊँ। कई बार मैं सफल भी हुआ, फिर तो उसको या तो लैट्रिन में या बाथरूम में दबोच ही लेता था। मैं अपना लंड एक बार उसके पैंटी में ऊपर से घुसा दिया था। इस प्रकार उसके पैंटी में एक साथ लंड और बुर दोनों निवास कर रहे थे। अक्*सर मैं उसके बुर में लंड रगड़ा करता था। परंतु उस समय कमजोरी के कारण मैं बहुत थरथरा जाता था। मैं उसको बहुत परेशान किया करता था। सुबह के समय जब मॉम एक बार लैट्रिन गई थी तो मैं एक झटके के साथ उसके बदन पर छलांग लगा दिया था। और मरूआ के तरह उसको मसलने लगा था। उस समय कोमल ने बड़े ही रोमांटिक तरीके से मुझे एक चांटा मारा था जो मुझे बहुत अच्*छा लगा था। मॉम के जाते ही चूंकि गोलू तो सोया ही रहता था सुबह में तो मुझे मौका मिल जाता था कोमल के साथ लिपटने-चिपटने का सो मुझे बड़े मजा आता था।
हमलोग जहॉं रहते हैं वहॉं गुरूवार को बाजार लगता है। मैं अपनी मॉम के साथ मॉम नं.-2 यानी अपनी कोमल को घूमाने ले गया। हमलोग मंदिर में जाकर दर्शन किए, कोमल कैमरामैन अपने ड्युटी पर वहॉं लग गई और उसके बाद हमलोग बाजार घूमे। कोमल पहले ही दुकान से सामान खरीदने के हिसाब से देखने लगी, कई सारी चीजें भी उसने खरीदी जैसे सैंडिल, दुपट्टा, इत्*यादि। मॉम ने भी कुछ सामान खरीदा। हमलोग दही भल्*ले खाए और गोलगप्*पे भी। लौटते वक्*त हमलोग जलेबी भी खरीद कर रूम पे लेते आए।
हमलोगों की प्रेमलीला तो काफी हुई है पर पिछले बार गर्मियों में एक नई चीज जो हमने ट्राई किया वो था-मोबाइल से अपने दोनों की मस्*त-मस्*त और सैक्*सी-सैक्*सी तस्*वीरें निकालना। रतन भैया के मोबाइल से हमने बड़ी मस्तियॉं की थी जैसे लिपिस्*टक लगे लंड की तस्*वीर, सीने पर कोमल के लिपस्टिक लगे होठों के निशान, उसकी चूचियों के पास आम भर के तस्*वीर, हाफ पैंट पहनाकर तस्*वीर इत्*यादि। बड़ा मजा आया था हमें इन सब शरारतों और मस्*ती से। पर अफसोस कि हम इन तस्*वीरों को अपने पास संजो कर रख नहीं सकते थे क्*योंकि मोबाइल अपना नहीं था। किंतु इस बार तो मैंने लैपटॉप खरीद लिया था। मेरी तबियत के ठीक होते ही मैंने कोमल के साथ कपल फोटो लिया। अकेलापन मिलते ही हमने एक दूजे को चूमते हुए स्*नैप्*स लिए जो बड़े अच्*छे आए। जब पिंकू कोमल को ले जाने के लिए आने वाला था तो कोमल ने मुझे कहा कि आप जो एस.एम.एस. सब मेरे कहने पर लाए हैं उसे डायरी में नोट कर दीजिए। चूँकि मैं सब एस.एम.एस. पेन ड्राइव से लाया था इसलिए नोट करने के लिए लैपटॉप ऑन करना जरूरी था। काफी सारे एस.एम.एस. होने के कारण खाना खाते तक हमलोग नोट नहीं कर सके और इस तरह हमें मॉम और गोलू के सोने के बाद भी लैपटॉप के सामने बैठे रहने का सुनहरा मौका हाथ लग गया। मॉम जिस दीवान पे सोयी हुई थी,उनके मुँह के ठीक सामने हमारा लैपटॉप था। एक बेडशीट कोमल ने ओढ रखा था और एक मैंने और हमलोग लैपटॉप से एस.एम.एस. नोट करते जा रहे थे। जब तक मॉम और गोलू जगे रहे हम लोग सच में वही काम करते रहे। जब हमें लगा कि लाइन क्लियर है तो कोमल के सैक्*सी लाल रंग की नाइटी के ऊपर से उसके मस्*त दूध को हम मसलने लगे। नाइटी के ऊपर से उसके पूरे शरीर को हम सहलाने लगे। नाइटी के कॉंख वाले हिस्*से से मैंने उसके शरीर को टच करते हुए अंदर हाथ डालना शुरू किया और चूचकसना के ऊपर से भी चूचियों को सहलाना और दबाना शुरू किया। मैं चूचकसना के ऊपर से ही उसके निप्*पलों को महसूस कर रहा था। उसपर उपर से ही अंगुली फिरा रहा था। उसको अपने एक हाथ से अपनी ओर खींच कर अपने से चिपका लिया था। फिर उसके नाइटी में नीचे से हाथ डालकर टॉंगों, जांघों, नाभि, पेट और चूचकसना के अंदर से उसकी चूचियों को खूब भोगा मैंने। बहुत अदभुत लग रहा था। कोमल भी मेरे कलेजे को दबा रही थी। मेरे लंड को उसने बेडशीट के अंदर से अपने हाथों में ले रखा था और उसे उपर से नीचे और नीचे से उपर सहला रही थी। मैं भी उसके झॉंटों से खेल रहा था और उसकी बुर में मैं घचाघच अंगुली पेल रहा था। तभी मेरे मन में रोमांचक आईडिया आया कि क्*यों ना इन प्राइवेट मोमेंट्स की कुछ तस्*वीरें लैपटॉप के माध्*यम से हमेशा हमेशा के लिए संजोकर रख लूँ। मैंने अपनी जानू को इसके लिए जल्*दी ही मना लिया और वो राजी हो गई। चूँकि खतरा कोई नहीं था, सारे सो रहे थे और उनके चेहरे के सामने हमारे लैपटॉप का स्*क्रीन था इसीलिए देखे जाने का डर नहीं था। मेरी कोमल ने धीरे-धीरे कई मादक और सैक्*सी अंदाज में मेरे कहने पर स्*नैप्*स दिए। एक फोटो में उसने अपनी बॉंयी चूची का दर्शन कराया और एक में दॉंयी चूची का। एक तस्*वीर में वो अपनी दोनों चूचियों को दिखाते हूए मुस्*कुरा रही थी। उसके दोनों दूध को बारी-बारी से पीते हुए फोटों भी हमने लिए। वो मेरे निप्*पल को चूस और दबा रही थी,मेरे गाल को काट रही थी,मुझे चूम रही थी ऐसे कई फोटो लेकर हमने यादगार बना दिया। वो तस्*वीरें आज भी हैं और मैं हमेशा उन्*हें अपने पास रखना चाहूँगा ताकि हमारी यादें कभी धूंधली न पड़ सकें।
अगला दिन वो दिन था जिस दिन मेरी कोमल के जाने का कार्यक्रम था। आज दो अक्*टूबर था। आज मैंने पनीर और शिमला मिर्च की सब्*जी खुद से बनाकर कोमल को खिलाने का सोंचा था। मेरे बहुत बार मना करने पर भी कोमल किचन में मेरे साथ ही रही। कह रही थी कि इस बहाने आपसे प्*यार तो कर सकूँगी। बड़ा मजा आ रहा था। मेरे साथ कोमल किचन में थी। साथ में कुकिंग चल रही थी और प्*यार भी चल रहा था। मैंने उस समय कुक वाला एप्रन पहन रखा था। कोमल इतनी शैतानी कर रही थी कि क्*या कहें। मेरे पैंट का चेन खोल कर उसने अपना सैक्*सी खिलौना निकाल लिया था और खेलने लगी थी। एप्रन सामने होने के कारण कोई ऐसा भय भी नहीं था। वो कभी कभी मेरी छाती जोर से दबा देती थी। कभी ओंठ काट लेती थी तो कभी जोर का पप्*पी ले लेती थी। और खिलौना, वो तो था ही उसके मन बहलाने का साधन। कभी दबाती, तो कभी उपर-नीचे सहलाती। उसने इतना मेरे लंड की चमड़ी को आगे-पीछे किया कि बिल्*कुल वीर्यपात जैसा होने लगा। मजबूरन मुझे वहीं किचन के पास के बरतन धोने की जगह पर ही अपना वीर्य गिराना पड़ा। कोमल भी कम नहीं थी। उसने एक छोटे कटोरे में पानी लेकर उसमें मेरा लंड रखकर उसको स्*नान कराया और फिर अपने नाइटी से पोंछकर वापस मेरे पैंट में रख दिया। सच में बहुत रोमांटिक और सैक्*सी लग रहा था। शायद आज ही का दिन था कि मैं शेविंग कर रहा था और किचन में कोमल मुझकों अकेली मिल गई थी। मैं साबुन का झाग लगे शेविंग ब्रश को पहले तो अपने गालों पर फिराया और फिर मौका लगते उसके पैरों पर और उसके जांघों पर लगा दिया। थोड़ा पानी में रखकर और फेनाकर मैंने उसकी पैंटी को सरकाकर उसके झॉंटों और बुर पर शेविंग झाग लगाकर ठीकठाक फेना दिया था। कोमल को मजा आ रहा था और वो खूब मुँह दबाकर हँस रही थी मेरी शरारतों से गुदगुदा कर। मैं और मेरी कनिया कोमल आज सबके खाना खा चुकने के बाद साथ में खाना खाए। एक दूसरे को मुँह में रखकर खिलाए और प्*यार भी किए। खाने के बाद थोड़ा आराम किए तो फिर पिंकू आ गया।
शाम में गोलू और पिंकू जींस वगैरह खरीदने के लिए मार्केट निकल गए। मैं और कोमल बेडरूम में थे। मॉम किचन में खाना बनाने की तैयारी और बरतन धोने और पानी भरने आदि कामों में व्*यस्*त थी और रूम में उसके आने की संभावना नहीं थी। उस समय हम लोग काफी रोमांटिक समय गुजार रहे थे। मेरी रानी मुझे पप्पियॉं दे रही थी और मैं भी पप्पियॉं दे रहा था। मेरी जानू, उस वक्*त मेरे पास बैठी हुई थी। उस वक्*त टी.वी. भी चल रहा था जिस पर पार्टनर फिल्*म का गाना दिखा रहा था सोनी के नखरे सोने लगदे वे सोनी के नखरे सोने लगदे केंदी पों केंदी पों। मैं उस समय फूल मस्*ती में आ गया और कोमल के दोनों चूचियों को दोनों हाथों से पकड़ कर बैठे बैठे ही अपने साथ साथ उसको भी जोरो से हिला और झूमा कर डांस कराया और गा भी रहा था केंदी पो केंदी पो केंदी पों। मेरी रानी साहिबा, इतना खुश थी और हँस रही थी मेरी शरारतों पर कि मजा आ रहा था। मैं भी खूब जोश में था। कोमल को दीवान पे पटक कर फुर्ती से उसके जिस्*म पर चढकर अपने कमर के लंड वाले क्षेत्र से उसके बुर वाले क्षेत्र को मरूआ की तरह मसल कर उसको मस्*तिया रहा था। उसको बहुत मजा आ रहा था। एक बार तो मैं अपनी जानू को जोरों से दबोचकर उसके बदन पर चढा हुआ था और लेटे हालत में ही उसको लेके लिपटे लिपटे ही दूसरे खाट पर आ गया था। कोमलकी और हमारी खुशी, जोश और मस्*ती देखने लायक थी। उसके अगले दिन कोमल गोलू के साथ रमन भैया के यहॉं चली गई। अब उससे रात के 11 बजे के बाद फ्री वाले फोन से बात हुआ करती थी। हम उन मस्*त और रोमांटिक लम्*हों के बारे में बातें करते थे और आगे उसके आने के बारे में बातें करते थे। कभी कभी तो हम दो-तीन घंटे लगातार मस्*त बातें करते रह जाते थे।
मॉम का मन मैंने भॉंपा कि वो दिल्*ली से बाहर हरिद्वार जाना चाह रही थी। मैंने उनको घूमाने का सोंचा और यही योजना अपनी जानू को बताया तो वो बोली कि चाहे मेरा पैसा लगे पर मैं भी हरिद्वार चलूंगी। उसी हिसाब से प्रोग्राम और टिकट भी बन गया और मेरी कोमल, जिंदगी में पहली बार अकेले मेट्रो से सफर की। पहले मैंने सोंचा था कि गोलू जाकर कोमल को ले आएगा, फिर मैंने उसे खुद से लाने का सोंचा। मैं राजेंद्र प्*लेस मेट्रो स्*टेशन उसको लेने पहुँचा। इससे पहले कि मैं उसको देख पाता, उसने मुझे देख लिया। मेरी बीवी, मेरी स्*वीटहार्ट उस वक्*त ऊपर थी और मैं नीचे था। वो सीढी उतरती गई और मैं कुछ सीढीयॉं चढता गया फिर मैं उसके पास आ गया और उसके गले लगा लिया और उसके कमर और कंधे पर हाथ डालते हुए नीचे सीढीयॉं उतने लगा ठीक उसी प्रकार जैसे अक्*सर फिल्*मों, सीरियलों और दूसरों को असल में करते देखा था। हम दोनों काफी खुश थे, दिल्*ली में इस तरह अकेले बिंदास घूमकर। मैं जान-बूझ कर थोड़ी दूर पैदल उसके साथ चला उसके हाथों में अपना हाथ डाले हुए। उसके रूमाल को मैं अपने जेब में रख लिया था। उसके नरम और नाजुक हाथों को मैं हौले हौले दबाते हुए और इस फीलिंग को शेयर करते हुए हम लोग कुछ देर चले। र्इस्*ट पटेल नगर से हमने ऑटो लिया और बातें करते और हँसते हमलोग मोतीनगर पहुँचे। हमारा उ्द्धेश्*य था अपनी बीवी को अंडर गार्मेंट की शॉपिंग कराना जोकि उसकी बड़ी इच्*छा थी और मेरी भी। यकीन नहीं हो रहा था कि जिस दुकान से अब तक मैं इतनी सारी ब्रा और पैंटी अपनी रानी के लिए खरीदा था और कभी-कभी खरीदते टाइम बात कर के मैं खुश हो जाया करता था आज वहॉं पर उसी दुकान पर मैं अपनी प्रेमिका अपनी जानू अपनी रानी के साथ खड़ा था। वहॉं से तो कोमलकुछ ब्रा खरीदी ही फिर एक और दुकान से रंगीन मस्*त ब्रा पैंटी खरीदी। एक सैक्*सी गाऊन भी लिया फिर हमलोग ऑटो पकड़कर वापस लौट गए। रास्*ते में इंज्वॉय करते आए एक दूसरे के साथ को। आज ही रात में हरिद्वार जाने के लिए पुरानी दिल्*ली स्*टेशन रवाना होना था।
रात साढ़े नौ बजे हमलोग पुरानी दिल्*ली के लिए निकले और रात वहीं के विश्रामालय में गुजारने का सोंचा क्*योंकि ट्रेन सुबह 3.40 की थी। मॉम कुछ देर बात करने के बाद लेट गई और जल्*दी ही उसको नींद भी आ गई। हमलोग भी एक चादर लेकर अधलेटे से हो गए। चादर के अंदर हमारे शरारती हाथ अपना काम आखिर करने ही लगे। चूँकि विश्रामालय में भीड़ भी जरा कम ही थी और आधी रात का वक्*त हो रहा था इसीलिए ज्*यादातर लोग सो रहे थे। हम एक दूसरे से सटे एक चादर में थे। मैं उसकी चूची को सहला और मसल रहा था। उसके पेट को सहलाया और उसके पैंटी में हाथ डालकर झॉंटों से खेला और फिर उसकी बुर में अंगुली घुसाने लगा। मेरी अंगुली उसके बुर रस से गीली होने लगी। उधर मेरी रानी भी मेरे लंड से खेल रही थी। उसे अपनी मुट्ठी में रखकर भींच रही थी। मेरे कलेजे को अपने हाथों में कस कस के दबा रही थी। मुझे बड़ी उत्*तेजना हो रही थी। हमलोग वैसे लेटे-लेटे काफी देर रहे और हम काफी मजेदार और अद्भुत भी महसूस कर रहे थे। इस बीच उसके मंगेतर का फोन आया और कोमल ने उससे बातें भी की। उस समय भी मैं उसके बदन से खेल रहा था। कुछ देर बाद मैं उसको बात करता छोड़कर ट्रेन के प्*लेटफॉर्म का पता करने चला गया। कोमल को लंबे समय तक अपने मंगेतर से बात करता देखकर मुझे थोड़ा अखर भी रहा था जिस कारण मैं उससे बिल्*कुल बात नहीं कर रहा था।

Reply With Quote
  #2  
Old 9th May 2013
vaani _'s Avatar
vaani _ vaani _ is offline
 
Join Date: 7th May 2013
Posts: 693
Rep Power: 6 Points: 3112
vaani _ is hunted by the papparazivaani _ is hunted by the papparazivaani _ is hunted by the papparazivaani _ is hunted by the papparazivaani _ is hunted by the papparazivaani _ is hunted by the papparazi
dear 4 new thread

Reply With Quote
  #3  
Old 9th May 2013
ptfbd's Avatar
ptfbd ptfbd is offline
Custom title
 
Join Date: 21st September 2009
Posts: 16,085
Rep Power: 165 Points: 155689
ptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps databaseptfbd has hacked the reps database
UL: 908.66 mb DL: 0.99 gb Ratio: 0.90
______________________________

A Satisfying Show... (http://www.xossip.com/showthread.php?t=1236166)

Reply With Quote
  #4  
Old 9th May 2013
verynaughtyniraj verynaughtyniraj is offline
 
Join Date: 19th February 2013
Posts: 3
Rep Power: 0 Points: 1
verynaughtyniraj is an unknown quantity at this point
कोमल के साथ दिल्ली के मजे-A REAL STORY WRITTEN BY ME

कोमल के साथ दिल्*ली के मजे-(अगला भाग)
ट्रेन आने पर मैंने सीट ढूँढ कर सामान रखकर मॉम को लिटा दिया। चूँकि मैं उस समय कोमल से रूठा हुआ था इसीलिए तुरंत ही अपनी सीट पर जाकर लेट गया परंतु वो जगी ही रही। मैं ऊपर से एकटक उसको देखता रहा और वो भी उसी तरह मेरी ओर देखती रही। इसी तरह करते करते ना जाने कब मेरी ऑंख लग गई। जब नींद खुली और मैं निचली बर्थ की ओर देखा तो पाया कि कोमल जगी हुई थी और मेरी ओर ही देख रही थी। मुझे ऐसा लगा कि वो मुझे मूक निमंत्रण दे रही हो। मैं चुपचाप अपनी सीट से उतर कर आर.ए.सी. वाली उसकी सीट पर आकर बैठा और फिर लेट गया। कोमल उसी सीट पर मेरे से ठीक सामने लेटी हुई थी। हम एक ही चादर में लेट गए। उसी समय मेरा रूठना खत्*म हो गया और मैं उसके पैरों और जांघों को जोर-जोर से अपने हाथों में पकड़कर भींचने लगा। उस समय मेरे मन की दशा कुछ ऐसी थी कि एक साथ गुस्*सा और हिंसक प्रेम दोनों भावना मेरे पर हावी हो रही थी। मैं उसके हाथों को पकड़कर अपनी ओर खींचने लगा। वो भी पूर्ण समर्पित कर दी अपने आपको मेरे लिए। मैं उसको अपनी ओर खींच कर लिटा दिया खिड़की के साइड। इसके बाद मैं उसके बालों, गालों, गर्दन, कंधों, ओंठ पर जोर-जोर से चूमने और चाटने लगा। मैं उस समय बस पागल हो गया था। मन कर रहा था कि उसी वक्*त उसको पकड़ के और पटक के उस पे चढ के अपना लंड उसके बुर में जड़ तक घुसेड़ कर चोद दूँ। मैं उसको ना जाने कितने जोर से पकड़ और जकड़ रहा था और कहीं कहीं पर दॉंत से काट भी रहा था। ऐसा करने से मेरे साथ उसकी सॉंस भी बड़े जोर से चल रही थी। वो इतनी जोश में आ गई थी कि चलती ट्रेन में चादर के अंदर मेरे पैंट में हाथ घुसाकर मेरा लंड पकड़ने की कोशिश करने लगी थी। जीवन में पहली बार मैंने अत्*यधिक जोश के वश उससे गाली के स्*वर में बोला कि खोल ना साली चेन खोल के निकाल हमर लंड को। आज साली खा जाएंगे तुमको। छोड़ेंगे नहीं तुमको चोद देंगे। एकदम मसल देंगे हम जान लो। वो भी पूरे जोश में आ गई और मेरे लंड को पेंट की चेन खोलकर निकाल लिया और उसे खूब मसलने लगी। मैं जितनी जोर से उसके चूची को मसल रहा था उतने ही ताकत से वो मेरे लंड पर अपनी पकड़ बना रही थी। मैं उसके झॉंटों में अपनी अंगुलियों को उलझा रहा था तो वो भी मेरी झॉंटों में अपनी अंगुलियों को उलझा रही थी। मैं उसके पूरे बुर को अपनी हथेली में पकड़ कर मसलने लगा तो वो भी मेरे लंड के साथ मेरे आंडों को एक साथ पकड़ के दबाने लगी थी। ना जाने उसने कितना मेरा ओंठ काटा होगा और गाल को चूसा और काटा होगा। वो एकदम मस्तिया गई हमलोगों के इन हरकतों से और वो मेरे ऊपर उसी चादर में लेटे-लेटे आ गई और उसने अपना पूरा बदन से मेरे पूरे बदन पर बादल की तरह छा गई। हमलोग कुछ सेंकेंड वैसे ही रहे थे। डर, रोमांच, उत्*तेजना, सेक्*स, प्*यार, खुशी ना जाने कितनी फीलिंग एक साथ हम दोनों के मन में एक साथ हो रही थी। आस-पास के बर्थों पर जब लोग थोड़ा बहुत सुगबुगाने लगे तब हम संभल गए और सिम्*पली आमने सामने होकर लेट गए। लेकिन यह अनुभव ऐसा था जो अप्रतिम था।
सुबह होने पर मैंने अपना लैपटॉप निकाला और अपनी जानू के साथ एक ही बर्थ पर बैठे-बैठे उसे ऑन किया। मेरी रानी ने मुझसे पहले ही कह रखा था कि ब्*लू-फिल्*म साथ रख लेने के लिए। अंतिम समय पर पूरी फिल्*म तो नहीं ले सका पर हॉं कुछ चुनिंदा क्लिपिंग्*स मैंने लैपटॉप में अपनी रानी के देखने के लिए रख लिया था। वो सारी मैंने अपनी स्*वीटहार्ट को दिखाया। वो बहुत इंटरेस्*ट से पूरा देखी बल्क्*ि यों कहें कि हमने साथ-साथ देखा और मैं धीरे-धीरे स्*वर में उससे कुछ-कुछ कहता भी जा रहा था। फिर मैंने उसे एक चुदाई कथा भी पढाया। जब वो कहानी पढ रही थी तो मैं उसके चेहरे के भावों पर अपना ध्*यान केंद्रित कर रहा था। मैंने उस वक्*त की फोटो भी लिया। ट्रेन में उसने मेरा और मैंने उसका फोटो भी मोबाइल से खींचा। मॉम के फोटो भी लिए गए।
हरिद्वार पहुँचने पर हमने होटल ठीक किया और फिर वहॉं कुछ नाश्*ता किया। मॉम तो सफर की इतनी थक चुकी थी कि खाने के बाद बिल्*कुल बेसुध होकर सो गई। वैसे हमारे नाश्*ते करने के समय भी वो सोने लगी थी। हम एक दूसरे को भॉंति-भॉंति तरह से खिला रहे थे। मॉम के सोए होने का हमने खूब फायदा उठाया। मेरे सामने में ही वो कपड़े बदली और नाइटी पहनी। मैं दीवान के नीचे बैठ कर उसके जांघों और पैरो को चूम और चाट रहा था। जब वो बाथरूम में मूतने गई तो मैं भी उसके पीछे पीछे चला गया था। बाथरूम में जाकर उसकी नाइटी को उठाकर तब ब्रा के उपर से उसकी चूचियों पर दॉंत से खूब काटा और जीभ से ब्रा को गीला किया मैंने। हम एक दूजे से खूब लिपटम-चिपटम करते रहे बाथरूम में ही। मैं बेडरूम में था और मेरी कोमल, मोतीनगर का, खरीदा गुलाबी कलर का मस्*त ब्रा-पैंटी पहने हुए बाथरूम से मुझे दिखा रही थी। उसने अपनी नाइटी को अपने गर्दन के पास कर रखा था। उसकी 34 सी साइज की मस्*त-मस्*त चूचियॉं उस ब्रा में बहुत अच्*छी लग रही थी। उसका नंगा पेट, और जांघें भी सैक्*सी लग रही थी। मन तो कर रहा था कि उसके ये दोनों नन्*हे-नन्*हे कपड़ों को भी उनके बदन से अलग कर दूँ और तब अपनी सैक्*स बम को निहारता रहूँ। पर ऐसा करना सुरक्षित नहीं था। वो पूरी कामदेवी लग रही थी। यकीन नहीं हो रहा था कि मेरी रानी मेरे सामने साक्षात ऐसे खड़ी है। उसका सैक्*सी बदन साक्षात मुझे निमंत्रण देता लग रहा था। मैंने मोबाइल से उसकी दो तस्*वीरें खींची। फिर वो बेडरूम में पास में आ गई। मॉम उल्*टी दिशा में मुँह कर के खड़ी थी। ट्युब लाइट के स्*पष्*ट प्रकाश में मैंने उसके नंगे अंगों की कई तस्*वीरें मोबाइल से खींची। उसके चूची पर दॉंत कटाई के निशान के, उसके सैक्*सी नाइटी से झॉंकने को और उछलने को आतुर उसकी मस्*त मलाईदार चूचियों की, उसकी नंगी जांघों पर रखे अपने माथे की और विभिन्*न तरीके से उसके मस्*त बुर की। फिर उसने मेरे लंड की अलग-अलग पोज में कई फोटों निकाला। क्रीम से चुपड़े लंड की, हाथ से खड़े किए काले लंड की, मुट्ठी में कस के पकड़े मेरे लंड की, प्री-कम की पहली बूँद निकलते लंड की और मेरे लंड से निकलते वीर्य को पकड़े अपने हाथों की जिसमें वीर्य से उसका हाथ लथपथ था। इस तस्*वीर को लेने के लिए उसने तेज रोशनी में मेरे लंड को बाहर निकाल के अपने कोमल हाथों से मेरे लंड की चमड़ी को पहले धीरे-धीरे सहलाते-सहलाते उपर नीचे किया इसके बार जोर-जोर से मसलने और रगड़ने लगी और इस तरह अपने हाथों से मेरे नजर के सामने हस्*तमैथुन कर के उससे वीर्य निकाला और सही समय पर उसकी तस्*वीर भी निकाल ली। फिर कुछ देर हम लोग आराम किए इसके बाद हम लोग शाम में हर की पौड़ी जाने के लिए तैयार हो गए। वहॉं आरती तो हम मिस कर दिए पर घूमने और फोटो खींचने का काम हमने जरूर किया। हॉं, उनलोगों ने शॉपिंग भी की और रास्*ता भटकने की वजह से हम देर से होटल पहुँचे। रात में खाना खाकर हमलोग बेड पर लेट गए।
मॉम बिस्*तर पर जाते ही नींद के आगोश में समा गई पर मैं और मेरी बीवी दोनों नहीं सोए और लैपटॉप के सामने बैठ गए। पहले तो हमने मोबाइल के दिन भर के खींचे फोटो को लैपटॉप में ब्*लूटूथ के माध्*यम से डाला इसमें वो तस्*वीरें भी शामिल थीं जो हमने दिन में अपने नंगे शरीर के अंगों की ली थी। हमने कुछ रात पहले दिल्*ली में लैपटॉप से लिए गए अपनी न्*यूड फोटो सब भी देखा। इसके बाद मैंने फिर से ब्*लूफिल्*मों की इंटरनेट से ली गई क्लिपिंग्*स लैपटॉप पे लगा दिया। हमदोनों इत्*मीनान से सारे मस्*त चुदार्इ के दृश्*य और अजूबे-अनोखे नॉन-वेज दृश्*य जैसे कि बुर के अंदर चुदाई और झड़ते हुए लंड का सीन, डिलेवरी होने का सीन, लड़की द्वारा रेस्*टोरेंट में अपनी चूची से कॉफी मग में दूध डालने का सीन, बुर में मोबाइल घुसाने का सीन, रेजर से झॉंटे साफ करने का सीन, चुदाई वाली गाड़ी वाला सीन इत्*यादि साथ देखने लगे। हम वो सब देखते हुए एक दूसरे के वस्*त्रों के अंदर हाथ घुसाकर छेड़खानी भी कर रहे थे। मेरी कोमल मेरे लंड के साथ खेल रही थी। उसको पुचकार रही थी और उसको दबा भी रही थी। मैं भी उसके दूध से भरे सजीव बरतनों यानी उसकी चूचियों को सहला रहा था। उसको कपड़े के उपर से और अंदर दोनों ओर से दबा रहा था। वो मेरी छाती को कभी-कभी बड़े जोर से दबा देती थी। मैंने उसके बुर में भी अंगुली खूब की और उसके झॉंटों से भी खेला। चूँकि अगले दिन का हमारा कार्यक्रम काफी अधिक था इसीलिए मेरी कोमल जल्*दी ही सोने की तैयारी करने लगी। कुछ देर बाद मैं भी लैपटॉप बंद कर के सो गया। नियमत: तो मैं मॉम के बगल में ही सोने को विवश था किंतु मेरा मन अपनी जानू से सट कर लेटने का था मतलब इलेक्*ट्रिक करेंट मस्*ट पास वाली अपनी थ्*योरी। सो मैं उनलोगों के पैर के पास अपना माथा रखकर लेट गया। इस तरह से मेरा पैर कोमल के कलेजे के आस-पास था। मैं कुछ घंटे वैसे ही सोया। फिर जब रात में नींद खुली या मॉम ने टोका होगा तो मैं फिर मॉम के पास सोने चला गया।
अगली सुबह हमलोग नौ बजे तक हर की पौड़ी यानी गंगा घाट नहाने पहुँच गए। पहले मैंने मॉम को हाथ से जंजीर पकड़े नहाने में मदद की। जब मॉम कपड़े बदल चुकी तो उसको सीढीयों पर बिठा दिया। फिर मैं कोमल को नहलाने के लिए घाट पर लाया। उस समय से पहले मेरे दिल और दिमाग में ऐसी ना सोंच और कल्*पना उत्*पन्*न हुई थी कि हमलोग साथ भी स्*नान कर सकते हैं। परंतु जब वहॉं औरत मर्द बूढ़े जवान सबको बिंदास नहाते देखा तो मैंने कोमल से कह दिया कि तुमको डुबकी लगवाने जाऊँगा तो हम भी साथ में दो-एक डुबकी लगाएंगे तुम्*हारे। मेरे मन में एक अलग तरह का रोमांच था, कलेजे की धड़कन भी तेज हो चली थी। मैं अपनी कोमल को हाथ का सहारा देकर एक दो सीढीयॉं नीचे उतरा दिया और उसको एक-दो डुबकी लगाने को कहा। कोमल दो-तीन डुबकी लगाई। उस समय तक मॉम को और जानू को नहलाने ले जाने के कारण मेरा जॉंघ तक का हिस्*सा तो पानी से गीला हो ही चुका था। जब कोमल डुबकी लगा रही थी तो मैंने एक नजर मॉम की ओर डाला और अपने आस-पास। मैंने कोई समस्*या नहीं महसूस की तो अपने कोमल के हाथों को अपने हाथों में थामे थामे साथ में चार-पॉंच डुबकिया लगा लिया। इतना जोश, उत्*साह, खुशी और रोमांच महसूस हुआ कि हम बयान नहीं कर सकते। कहॉं तो आज तक हम साथ नहा नहीं सके बाकी ना जाने कितने सुख हमलोगों ने साथ भोगा पर ये वो सुख था जिससे हम आज तक वंचित थे। फिर हमलोग नदी के घाट पर बैठ गए और अपनी कोमल को मैंने वहीं से गंगाजल ले-लेकर सिर पर और बदन पर डालकर नहलाना शुरू कर दिया। हम वहॉं लगभग 5-7 मिनट सीढी पर बैठे रहे और अपने पैर पानी में डाले रहे। फिर हमलोगों ने उस समय की अपनी फीलिंग एक दूसरे से शेयर किया और अपनी खुशी जाहिर की। फिर हमलोग साथ-साथ मॉम के पास आए और इसके कुछ देर बाद वहॉं से चलने के पहले हमने फोटोग्राफर से साथ में तीन फोटो भी खिंचवाया जिसका प्रिंट बहुत अच्*छा निकला था। हमें वहॉं का माहौल इतना अच्*छा लगा और साथ ही जौरे जौरे स्*नान करने की इच्*छा इतनी जोर मार रही थी कि कोमल ने ही यह सुझाव दिया कि हम कल भी नहाने यहॉं आऍंगे।
घाट से होटल पहुँच कर हमने थोड़ा आराम किया, नाश्*ता किया और फिर कुछ देर में हमलोग ऋषिकेश के लिए निकल गए। मेरी कोमल ऑटो में भी मेरे स्*नैप्*स ले रही थी। उसने मुझे कंप्*लीमेंट भी दिया कि आपकी ड्रेस काफी अच्*छी लग रही है। हमलोग ऑटो में भी एक दूजे को एस.एम.एस. कर रहे थे और साथ गुजरे मस्*त रोमांटिक क्षणों को शेयर कर रहे थे। कोमल पूरी फोटोग्राफर बन चुकी थी। ऋषिकेश में पहले हमलोग लक्ष्*मण झूला देखे और वहॉं काफी सारा फोटो भी खींचे। वहॉं तेरहमंजिल मंदिर में मेरी जानू ने इतनी सारी तस्*वीरें खींची कि मैं चिड़चिड़ा भी गया। बारिश की वजह से वहॉं मौसम भी ठंढा हो गया था। फिर वहॉं से हमलोग रामझूला पहुँचे। वहॉं भी घूमे। शाम हो गई थी और वहॉं भी गंगा आरती होती थी इसीलिए हम वहॉं रूक गए। वहॉं हमने देखा कि घाट में मोटर बोट्स लगी हुई थीं। मेरा और कोमल का मन बोटिंग करने का होने लगा। पर मॉम डर रही थी और मना कर रही थी। वो जिद करने लगी कि मुझे रामझूला से ही उस पार कर दो और तूम लोग अपना आते रहो बोट से। मैं उस पार मॉम को ले कर गया भी पर वो तरीका मुझे ना अच्*छा लगा और ना ही सुरक्षित ही। नतीजतन मैं मॉम को वापस वहॉं ले कर आ गया जहॉं मैं कोमल को छोड़ कर आया था। फिर हमने मॉम को भी बोट पर चलने के लिए तैयार कर ही लिया। बोट पर कोमल फोटोग्राफर अपने ड्युटी पर लग गई और उसने शानदार फोटो खींचे। बोट पर चलते-चलते हमलोग फोटो खीच रहे थे। हम पानी में हाथ डाले हुए थे। हम एक बार इस पार से उस पार गए और कुछ देर बाद वही बोट वापस लौटने लगी। लौटते वक्*त हमलोग बोट पर एक दूसरे के बिल्*कुल पास थे और सटे हुए थे। हम लोग इतने सटे हुए थे कि सबकी नजर बचाकर मैंने उसे एक दो बार चूमा भी। हमारे हाथ गंगा जल की लहरों का आनंद उठा रहे थे। हमारे हाथ इतने ठंढे हो गए थे कि लगता था कि कट कर गिर जाएंगे। बिल्*कुल सुन्*न सा लग रहा था। हमने एक दूसरे पर पानी भी उछाला। पूरी मस्*ती हमने की। सच में बड़ा ही मजा आया। कोमल और मैं दोनों अपनी अंगुलियों को पानी में इस प्रकार रखे हुए था कि उस से पानी उँचा हो कर निकल रहा था। हमने एक दूसरे के हाथ को गंगाजल में ही रखकर दबाया। हमारे हाथ गंगाजल में भी एक दूसरे से मिले हुए थे। वहॉं से फ्री हुए तो गंगा आरती का समय हो चुका था और हमलोग बिल्*कुल भी इसको मिस नहीं करना चाहते थे। उस स्*थान पर हमलोग पहुँचे और एक साथ तीनों बैठ गए। वहॉं से हमने देखा कि कुछ लोग गंगा नदी के जल में खड़े होकर वहीं से आरती देख रहे थे। मैं और कोमल भी वहॉं पहुँच गए । वहॉं का पानी बिल्*कुल कनकनाने वाला था। वहॉं से मैंने कोमल का और उसने मेरा फोटो खींच लिया। गंगा आरती देखने और सुनने में बहुत मजा आ रहा था। बिल्*कुल ही अवर्णनीय अनुभव रहा वो। हम सब भक्ति रस में बिल्*कुल डूब गए थे। वहॉं से जब हम बाहर आए तो वहॉं के कुछ दुकानों के शोपीस आईटम देखते हुए हम लौटने लगे। एक जगह हमने रोड पर टिक्*की चाट खाया। कोमल वहॉं पर बोलने लगी कि यही चीज हमलोग अच्*छे से खा लेते हैं फिर रात में खाना नहीं खाएंगे क्*योंकि वहॉं का खाना दिन में ठीक नहीं था। मैं इस पर भड़क गया कि यह खाकर कैसे रहेगी। पर वो भी असली अडि़यल थी। हमलोग सड़क पर ही खूब झगड़ने लगे। मॉम भी मुझे डॉंटने लगी। बहुत मूड ऑफ हो गया था। खैर हमलोग वहॉं से निकले और वापस लौटने के लिए ऑटो लिया और कोमल मेरे कंधे से लगकर सोने लगी। हम सभी बहुत थक गए थे। खैर एक घंटे के बाद हम हर की पौड़ी पहुँचे और वहीं से पैदल ही होटल की ओर चल पड़े। एक जगह हमने आलू पराठे का दूकान देखा और टेस्*ट करने पर अच्*छा खाना पाया। वहॉं खूब छक कर खाया और फिर मैंने कोमल को कहा भी कि अभी तुमको मन से खाते देखकर मुझे बड़ा संतोष हो रहा है। अब हमलोग होटल के कमरे में आ गए। आज के दिन केवल शाम में हमलोगों के बीच थोड़ा झगड़ा हो गया था वैसे सारा दिन बढि़या ही गुजरा था। खैर खाना खाने के साथ ही हमारा मुड ग्रीन हो ही गया था जो कि हमारे रात के सुनहरे मौके को और रोमांटिक और यादगार बनाने में काफी हेल्*प फुल रहा। मॉम तो काफी थक ही चुकी थी सो बिस्*तर पर आते ही पसर गई और उसको नींद आ गई। हमने लाइट तो ऑफ कर ही दिया था। मेरी कनिया कोमल लाल नाइटी पहन के मेरे मूड को रंगीन करने और रात को रंगीन करने के इरादे से मेरे से सट कर अधलेटी सी हो गई। मॉम दूसरी ओर मुँह कर के सोई हुई थी। मैंने लैपटॉप ऑन कर दिया था। पहले तो कुछ फोटो ब्*लूटूथ से हमने लैपटॉप में अपलोड किया। फिर कोमल मेरे से सट गई कि मैं उससे सट गया ये तो याद नहीं पर हमने खूब मस्*ती करने का मन बना लिया था। हम लैपटॉप के पीछे एक दूसरे से लिपटने-चिपटने लगे। हमलोग खूब सारा चूम्*मा-चाटी भी करने लगे। मैं उसके पूरे जिस्*म को अपने हाथों से नापने और तोलने लगा। उसके गर्दन को मैं चूमने लगा। कोमल ने मेरे बदन से बनियान यानी गंजी को निकाल दिया था। हमलोग दीवान पर लेट गए थे। कोमल मेरे नंगी छाती पर अपना माथा और चेहरा रख कर लेटी हुई थी। मैं उसके बालों को सहला रहा था और उसके चेहरे को भी। वो लेटे लेटे हुए ही मेरे से चिपकी हुई थी। मैं कभी-कभी उसके हाथों को भी सहला रहा था। वो एक हाथ से पाजामे के अंदर से मेरा लंड निकाल कर उस पर तेल की मालिश की थी उस दिन। उसने अपने बुर पर मेरा लंड टिकाया भी था। मैंने उसके नाइटी को उठाकर उसके ब्रेसियर यानी चूचकसाना का हुक पीठ की ओर से खोल दिया और उसके सेक्*सी जिस्*म से अलग कर दिया। मैं अपनी जानू को चित्*त लिटाकर अपनी छाती के निप्*पल्*स को उसके चूचियों के बड़े-बड़े निपल्*स पर सेट कर लेट गया। हमको और जानू दोनों को बहुत गुदगुदी भी हो रही थी। मैंने उसके दूधों को खूब चूस-चूस के पीय और उस पर दॉत भी काटा। हमारे नंगे जिस्*म आपस में चिपके हुए थे। हमारे बदन की गर्मी एक दूसरे के बदन में संचरित हो रही थी। फिर कोमल ने उठकर वो ब्रेसियर मेरे पिचकी छाती पर पहना दिया। इसके बाद वो मुझसे चिपक गई। फिर हमने लैपटॉप के सामने वेब कैम से अपना कपल फोटो खींचा। बहुत हँसी भी लग रही थी क्*यांकि कोमल बिना ब्रेसियर की नाइटी पहने हुई थी जबकि मैं अपने नंगे बदन पर उसका गुलाबी सैक्*सी ब्रेसियर पहने हुए था। एक फोटो केवल मैंने अपना ब्रेसियर पहने हुए वाला लिया। एक फोटो में वो और मैं दोनों एक दूसरे के साथ थे। बहुत अच्*छा फोटो बन पड़ा था वो। एक बात तो शायद ठीक से मुझे याद नहीं आ रही है पर ऐसा लगता है कि शायद हमने अपना अपना जांघिया और पैंटी भी आपस में अदला-बदली की थी। सब कुछ करने के बाद मैंने फिर से अपनी वाइफ को ब्रा और पैंटी पहना दिया जो कि बड़ा अच्*छा लगा रहा था। अब हमने लैपटॉप बंद कर लिया और सोने लगे। मैं जान रहा था कि मेरी रानी आज बहुत चली है और उसका पैर जरूर दर्द कर रहा होगा। मॉम का तो खैर मैंने पैर पहले ही दबा दिया था। जब कोमल आधी नींद में आ गई तब मैंने उसके बदन में तेल लगाने का निश्*चय किया। लाइट्स तो ऑफ था ही। दीवान के नीचे से सरसों तेल की शीशी निकाल कर कोमल के नाइटी से एक पैर निकालकर मैंने उसके तलवे और घुटने के नीचे में मालिश करना शुरू कर दिया। थोड़ी देर तेल लगाने के बाद वो जग गई और हल्*का-फुल्*का मना करने लगी पर मैंने उसे मना ही लिया। मैंने लगभग उसके पूरे जिस्*म पर सरसों तेल की मालिश की। यहॉं तक कि उसके गांड, चूची, पेट,ढोंरी, झॉट, बुर, जांघ, गर्दन ,पीठ ,हाथ हर जगह। कोमल को बहुत अच्*छा लगा मेरा मसाज करना। फिर मैं उसके माथे के पास आ गया। वहॉं पर मैं उसके गर्दन पर तेल लगाया और नीचे की ओर टघारते हुए उसके चूचियों पर भी तेल की मालिश की। उसके बालों में मैंने अंगुलियॉं फिराई और उसके माथे को अपने गोद में रख कर चूमा भी। कुछ देर तक वैसे ही रहने के बाद फिर मैं सो गया।
रात में एक बार मेरी नींद खुली तो मैं कोमल के साइड चला आया और जो उसके पास लेटा तो ना जाने कब मुझे नींद आ गई और एक-आध घंटे के बाद नींद खुली तो फिर मैं अपने जगह पर चला गया। अगले दिन हमें दिल्*ली के लिए शाम वाली ट्रेन से वापस भी होना था।
आज हम लोग बहुत सवेरे-सवेरे ही जग गए। जब कभी भी मॉम बाथरूम में जाती थी तो हमारे मजे आ जाते थे। मैं और कोमल आपस में चिपक जाते थे। मैं उसके गालों, ओंठों आदि पर चूमने लगता था। कोमल को तो खैर मेरे ओंठ चूमने और चूसने के बजाय उनको काटने में ज्*यादा मजा आता था ही सो वो वही ज्*यादा करती थी। खैर हम साढ़े सात बजे तक घाट पर पहुँच गए। सबसे पहले मैने मॉम को हर की पौड़ी में स्*नान कराया। मॉम को ढ़ेर सारी डुबकियॉं मैंने लगवाया। कोमल उस दौरान फोटोग्राफी कर रही थी। अब हमारे एक साथ स्*नान करने का सुनहरा मौका आने वाला था। आखिर इसीलिए तो मेरी प्*यारी कोमल ने एक और दिन नहाने का प्रस्*ताव पारित करवाया था। किंतु जो घाट पर हम नहाना चाहते थे ,वहॉं बहुत सारे लड़के स्*नान कर रहे थे और वे पूरी मस्*ती करने के मूड में थे। हमलोग बहुत देर इंतजार किए पर वे अपनी मस्*ती करते ही रहे। तब हम थोड़ा दूर हट के जहॉं कुछ फैमिलीज स्*नान कर रही थी, वहॉं चले आए। पहले मैं पानी में उतरा और जानू ने मेरी कई तस्*वीरें लीं। इसके बाद मेरी जानू पानी में उतरी और मैंने अपने हाथों को पोंछकर उसकी तस्*वीरें खींची। जब हम जी-भर कर तस्*वीरें खींच चुके तो मोबाइल ले जाकर मॉम को सौंप दिया जो कि काफी दूर सीढ़ीयों पर बैठी थी जहॉं से वो हमको उतना स्*पष्*ट देख नहीं सकती थी। इसके बाद मैं दौड़ता हुआ अपनी पत्*नी के पास आया जो कि मेरा घाट की सीढीयों पर अपने पैर पानी में डाले अपने पति यानी मेरा इंतजार कर रही थी। फिर हम हाथों में हाथ डाले और एक हाथ से रस्*सी थामे घाट की सीढ़ीयॉं संग-संग उतरने लगे। अब हम एक साथ सार्वजनिक रूप से स्*नान कर रहे थे। मन प्रफुल्लित हो रहा था। उमंगे उठ रही थी या यों कहें कि मन मयूर नाच उठे थे हमारे। हम ढ़ेर सारी डुबकियॉं एक साथ लय मिलाकर लगा रहे थे। हम एक दूसरे पर पानी भी खूब उछाल रहे थे। अब हम थोड़ा और नीचे उतर गए और रस्*सी तो पकड़े थे ही। हमारे जिस्*म उस समय कलेजे भर पानी में डूबे हुए थे। जब मैं और कोमल दोनों पानी में डुबकियॉं लगा रहे थे तब मैं अपनी स्*वीटू के पैर पानी के अंदर से सहला और दबा रहा था। कोमल ऊपर से मस्*त मुस्*का रही थी। जब कोमल डुबकी लगाने के लिए नीचे झुकी तो मैंने उसकी छाती भी पानी में सहलाया और चूची को भी पकडा। मैं एक बार यों ही डुबकी लगाते समय रस्*सी पकड़े पकड़े अपने पैरों को कूदने के स्*टाइल में सतह से उठाया तो बिल्*कुल तैरने का सा मुझे अनुभव हुआ। मैंने अपनी रानी को यह बताया कि ऐसे करो। फिर हम दोनों एक साथ ही रस्*सी को ऊपर पकड़े और नीचे हाथों को जकड़े पानी में अपने पैरों को सतह से उठा कर कूदने लगे। इस तरह हमनें खूब मस्*ती की। ऐसा लग रहा था मानों हमारा बदन काफी हल्*का हो गया हो और हम जहाज की तरह तैर रहे हों। हमारा नहाना बंद करने का मन ही नहीं कर रहा था। मन कर रहा था कि काश वक्*त ठहर जाए और हम यूँही पानी में साथ-साथ छुपकौव्*वल करते रहें। सच में अगर मॉम हमारे साथ नहीं रहती तो हम इतना ज्*यादा देर संग संग नहाते और मस्*ती करते कि हम-दोनों को सर्दी तो शर्तिया हो जाती।
नहाने के बाद हम वापस होटल की ओर चल निकले। हमारा एक कपड़ों से भरा प्*लास्टिक की थैला कहीं छूट गया था जिसके कारण विशेषकर कोमल को थोड़ी परेशानी का सामना करना पड़ा। पर उसने भी आखिरकर वो ढूँढ ही लिया। रूम पर थोड़ा फ्रेश होकर फिर हम खाना खाने और घूमने के लिए निकल पड़े। उसी आलू पराठे वाली दुकान से खाने के बाद हम उड़नखटोला की यात्रा का आनंद उठाने के लिए चल पड़े। टिकट हमारी आशा से ज्*यादा महँगा पड़ गया पर समय और मौके के महत्*व को समझते हुए ये खर्च जरूरी था। सचमुच में उड़नखटोले पर चढना हम सभी के लिए एक रोमांचक अनुभव था। मेरी कोमल वहॉं के भी फोटो खींचती जा रही थी। ऊपर हम चंडी देवी के मंदिर दर्शन के लिए आए। बड़ी भीड़ थी। लाइन में लगे हुए थे और यह लाइन ऐसी घुमावदार बनाई हुई थी कि हर मोड़ पर मैं अपनी जानू से हाथ मिला लेता था। बड़ा सुखद अहसास होता था। बाद में कोमल ने हाथ नहीं मिलाया। मुझे थोड़ा अखरा बाद में मेरी मॉम नं.-2 ने बताया कि मॉम नं.-1 को शायद पसंद ना आए इसीलिए उसने हाथ मिलाना बंद कर दिया। फिर वहॉं से हमलोग उड़नखटोला से ही वापस आए। मनसा देवी मंदिर जाने से पहले हमें थोड़ा इंतजार करना पड़ा। हमने वहॉं कॉर्न फ्लैक्*स लिया और कई फोटो भी खींचा। मनसा देवी मंदिर भी हम उड़नखटोला से चले। मनसा देवी मंदिर में हमने धागा भी बांधा साथ में। कोमल ने मेरे लिए बाला खरीदा और अपने घर के लिए कुछ लिया। मैंने एक चाभी रिंग लिया। फिर हमलोग वहॉं पर समोसा और जलेबी नाश्*ता किए और वापस उड़नखटोला से नीचे उतरने के लिए पहुँचे। वहॉं पर चढ़ने के लिए लाइन लगी हुई थी। कोमल ने वहॉं कुछ फोटो खींचा और वो लाइन में मेरे पीछे खड़ी थी। मॉम मेरे आगे लाइन में लगी हुई थी। जब कभी लाइन में भीड़ आगे-पीछे होती थी तो मेरी पीठ मेरी कोमल के सीने से चिपक जाती थी। कोमल ने मेरे साथ उसी लाइन में खड़े-खड़े कितनी सारी मस्*ती की। कभी वो मुझे पीछे से पकड़ लेती थी तो कभी पीठ सहलाती रहती थी। मैं भी कहॉं कम था, जान-बूझकर मैं अपनी पीठ उसके सीने पर स्थित उसकी चूचियों से रगड़ देता था। हम एक-दूसरे को देख-देख कर मुस्*कुरा भी रहे थे। खैर हमलोग उड़नखटोला से नीचे उतर गए। जितनी बार भी हमने उड़न-खटोला से यात्रा की उसमें केवल एक बार ही मॉम के साथ मैं बैठा। बाकी तीन बार मैं अपनी जानू के साथ ही बैठा। बड़ा अच्*छा लग रहा था। ठंढ़ी-ठंढी हवाओं का झोंका, इतनी ऊँचाई और अपनी रानी का साथ कितना अनमोल क्षण था। ना जाने कितने सैकड़े फीट की ऊँचाई पर हम साथ थे। आखिर में हमारी उड़नखटोला यात्रा पूरी हुई और हम वापस होटल की ओर चले। रास्*ते में एक जगह पानी वाला सिंघाड़ा मिल गया जो हमने खरीदा क्*योंकि हमारी बेगम की यह तमन्*ना थी। होटल में मॉम को आराम करने को छोड़ हम पुन: नीचे आ गए क्*योंकि हमारी बेगम का पसंदीदा काम यानी शौपिंग अभी बाकी ही था। उन्*होंने हमसे वादा लिया था कि उनको शौपिंग करते वक्*त हम जल्*दबाजी नहीं करेंगे सो हमने भी अपनी पिछली गलतियों से सीख लेते हुए धैर्य का रिचार्ज कूपन डलवा लिया था। खैर आखिरकर बेगम की शौपिंग पूर्ण हुई और हम प्रसाद वगैरह लेने के लिए आगे बढ़े। एक जगह दूध की दूकान खोजकर हमने गरम मलाईदार दूध पीया। एक दिन पहले हमने रात में दूध पीया था तो मेरी कोमल का मन था कि अगर संभव हुआ तो एक बार और पीएंगे। समय की कमी थी इसीलिए मेरी जानू होटल से खाना पैक कराने लगी और मैं होटल से मॉम को लेकर वहॉं से निकल पड़ा। हमलोग कोमल से एक जगह मिल गए और फिर हम हरिद्वार की गंगा आरती देखने घाट पर पहुँच गए। कोमल आरती के दृश्*य को कवर करने मोबाइल लेकर आगे बढ गई और मैं मॉम को साथ लिए खड़ा रहा। कोमल के चेहरे की खुशी देखने लायक थी जब वो मन से तस्*वीर खींचने में कामयाब हो गई थी तब। अब हम वापस होटल पहुँचे और वहॉं से सामान लेकर स्*टेशन की ओर चले। रास्*ते भर कोमल फोटो खींचते चली। स्*टेशन पर ट्रेन लगी ही थी पर खुलने में अभी कुछ समय शेष था।

Reply With Quote
  #5  
Old 9th May 2013
verynaughtyniraj verynaughtyniraj is offline
 
Join Date: 19th February 2013
Posts: 3
Rep Power: 0 Points: 1
verynaughtyniraj is an unknown quantity at this point
कोमल के साथ दिल्ली के मजे-A REAL STORY WRITTEN BY ME

कोमल के साथ दिल्ली केमजे(अंतिम भाग)
NOTE:- प्रिय पाठकों, मेरा इस वेबसाइट पर कहानी upload करने का यह पहला अनुभव है। इस कारण एक ही Thread के अंदर पूरी कहानी को कैसे upload करते हैं ये मुझे नहीं पता है। इसीलिए कृपा कर इस कहानी के पिछले दो भाग को पढने के लिए इसी नाम के और इसी तारीख के दो पोस्*ट पढ़ें। कृपया परेशानी के लिए क्षमा करें।
अब कहानी के अंतिम भाग को पढें।
हम लोग ट्रेन में सवार हो गए। तय समय पर ट्रेन चल दी। इस ट्रेन में ना के बराबर भीड़ थी। ट्रेन बौगी के जिस कंपार्टमेंट में हम लोगों की सीट थी उसमें कोई और आया ही नहीं था। हम ही तीन थे उस में भी मैं और मेरी वो एक सीट पर बैठे थे और सामने वाली सीट पर मॉम बैठी थी। थोड़ी ही देर में हमलोग खाना खाकर फ्री हो गए। मैं
कोमल को हरिद्वार की तस्*वीरें लैपटॉप निकाल कर दिखलाने लगा और मॉम कुछ देर में अपनी सीट पर कंबल ओढकर लेट गई। जब लैपटॉप का चार्ज डाउन होने लगा तो हमने लैपटॉप को वापस ब्रीफकेस में रख दिया। हालॉकि मेरी सीट ऊपर में थी पर मैं अपनी सीट पर गया ही नहीं। ऐसा मौका मैं कैसे जाने दे सकता था। मेरी हमेशा से ऐसी लालसा रही थी कि कोमल मेरे गोद में सोती और मैं जागता हुआ उसे देखता रहता। मेरी जानू, लाइट ऑफ करके मेरे गोद में अपना माथा रखकर लेट गई और अपने पैर सीट के नीचे लटकाए कोमल का माथा सहलाते हुए उसको देखने लगा। चूँकि लाइट तो ऑफ थी ही इसीलिए मैं उसके बाल, गर्दन और कलेजे पर भी अपने हाथ फिरा रहा था। मैं उसकी चूचियों को भी दबा रहा था। कुछ देर ऐसा करने के बाद कोमल सो गई परंतु मैं बहुत देर तक नींद से लड़ता रहा। कुछ देर के बाद मुझे भी झपकी आ गई और मैं बैठे-बैठे ही ऊंघने लगा। चूँकि उसका माथा मेरे गोद में था इसीलिए मैं ठीक से सो नहीं सकता था। लगभग एक घंटे के बाद कोमल की थकान भी शायद दूर हो गई और इधर मेरे पैर नीचे लटके-लटके दर्द करने लगे और नींद भी खूब आ रही थी। सो मैंने अब अपने पॉंव बर्थ पर ही फैला लिए। कोमल ने मुझे सिर से पैर तक अपने बर्थ्* पर लेटा पाया तो वो उस चादर को हमारे पूरे बदन पर फैला कर उसमें मुझे भी समेट लिया। मेरा मुँह मॉम के बर्थ की ओर था और कोमल का मुँह मेरे कलेजे की ओर था। वो मेरे से चिपक चुकी थी। मुझे बहुत मजा आ रहा था। मैं उसके पीठ और कमर में हाथ डाले हुए था। उसके स्*तन मेरे कलेजे से दब रहे थे। उसने मुझे फुसफुसाकर कहा कि नीरज भैया दुद्दधुआ पीजिए ना मेरा। उसने अपनी चूचियॉं सूट में से निकालकर मेरे मुँह में भी भर दिया। मैं उसकी चूचियों को मुँह में लेकर चुभला रहा था। उनको चूस रहा था और निचोड़ने के साथ उनको काट भी रहा था। कई बार तो मैंने उसके चूचियों पर जगह-जगह काट लिया होगा। जब भी काटता था तो वो मेरे से बुरी तरह लिपट जाती थी। वो मेरे लंड को पैंट से निकालकर दबा रही थी और उससे खेल भी रही थी। मैं भी उसके बुर के झाँटों में अंगुली घुमा रहा था। उसके झॉंटो को थोड़ा-थोड़ा खींच भी रहा था। उसकी बुर में अंगुली घुसाकर मैं उनको गीला किया और उसके अपने जीभ से लगा लिया। मेरी सैक्*सी कोमल ने मेरा लंड लेकर अपने बुर में घुसाने की चेष्*टा की। वो अपने पैर को बेपरवाही में मेरे बदन पर फैंक के लेटी हुई थी। वो चादर को हमदोनों के बदन पर डालके उसके अंदर मेरे से चिपक गईऔर मेरे कलेजे पे अपना माथा रख दिया था। मैं उस समय हल्*का सा ओठंगा हुआ था और वो मेरे पे चढ के सोई हुई थी। बहुत अच्*छा लग रहा था। हमें उस समय दुनिया की हर खुशी अपने कदमों में नजर आ रही थी। कुछ देर में जब हमें लगा कि मॉम जग रही है तो मैं मॉम के बर्थ पर आकर लेट गया और कोमल अपने बर्थ पर आकर सो गई। मेरी नींद खुली तो तब जब कोमल ने मुझे जगाया। असल में वो जानना चाह रही थी कि कहीं दिल्*ली के इसी स्*टेशन पर तो नहीं उतरना है। मैं गहरी नींद से अचानक जगने के कारण कुछ समझ नहीं पा रहा था। थोड़े समय के बाद समझ में आया कि अगले स्*टेशन पर हमलोगों को उतरना है। खैर कुछ देर में पुरानी दिल्*ली स्*टेशन आ गया और हम उतर गए। वहॉं से ऑटो लिया और क्*वार्टर की ओर चल पड़े। रास्*ते में मेरी रानी मेरे हाथ को पकड़े हुई थी और मेरे कंधे पर अपना सर रखकर टिक गई थी। हमलोग क्*वार्टर पहुँच कर सोने की तैयारी करने लगे। मॉम पापा से बात करने लगी तो मेरी कोमल चिढ़ गई कि गे मौसी केत्*ते बात करई छे। मॉम दूसरे कमरे में जाकर बात करने लगी और इधर मैं कुछ देर लैपटॉप को चार्ज में लगा दिया पर नींद इतने जोर से आ गई कि पता ही नहीं चला। नींद खुली तो तब तक गोलू लैपटॉप ऑफ करके ऊपर रख चुका था।
सुबह में आठ बजे के करीब मैं अपनी जानू को उसके रमन भैया को पहुँचाने के लिए निकल पडा। ना जाने कैसेट कोमल के होंठ कट गएथे। मैंने तो उससे मजाक भी किया कि जरूर ये मेरी ओठचुसाई और कटाई का नतीजा है। इस पर वो मुस्*कुराने लगी। मेडीसिन वालों ने भी कोई घरेलू उपचार ही करने का बताया। मैंने उसका मोबाइल रिचार्ज कराया और फिर हम राजेंद्रा प्*लेस मेट्रो स्*टेशन पहुँचे। मैं कोमल को उसके भैया के घर छोड़कर वहॉं से आ गया। कोमल ने मुझे 16 अक्*टूबर को आने को कहा था और ये भी कहा था कि उस रात आप मेरे साथ सोएंगे क्*योंकि उनके यहॉं भैया-भाभी के सोने के कमरे के अलावा केवल एक ही कमरा बचता है जिसमें कि मैं सोती हूँ। उस कमरे में बेड भी काफी बड़ा है जिससे कोई प्रोब्*लम भी उनलोगों को नहीं होगी आपको इस कमरे में सोने देने में और दूसरी बात यह कि वे लोग काफी खुले दिमाग वाले लोग हैं। मैंने तो उस रात के लिए कई सारे ख्*वाब और योजनाऍं भी बुननी शुरू कर दी थी। हम रात में जब भी 11 बजे के बाद बातें करते तो उस रात क्*या क्*या करेंगे, इसी पर बातें करते थे। मैं चुदाई छोड़ बाकी हरसंभव चीजें अपनी रानी के साथ करना चाहता था जैसे जानू के साथ नंगा नृत्*य करना, अपनी ऑंखों पर पट्टी बंधवा कर उसके सैक्*सी अंगों को केवल जीभ या नाक से पहचानने की कोशिश करना जिसमें जीतने पर वो मुझे जी भर चाटती और हारने पर वो जहॉं चाहती वहॉं पर मुझे काटती। उसके गांड पर मैं अपनी गांड रखकर मैं बैठ जाता और फिर खूब आगे-पीछे कर रगड़ता। जितने भी ब्रा मेरी जानू ने खरीदा, सब उसे पहनाता और खोलता। बिस्*तर पर नंगे होकर आपस में गुत्*थम गुत्*था होकर खूब उल्*टी-पल्*टी करता। रात में साथ एक पतले चादर में नंगे साथ में चिपक कर सोता। उसके पुरे जिस्*म को अपनी जीभ से चाटते हुए नापता। मेरी जानू, मेरे शैतानी भरे आइडियाज पर काफी गुदगुदा जाती थी। कई बार तो वो मुझे फोन पर बोली कि मेरी बुर तक गनगना गई है आपकी बातों से और यह भी बोली कि मेरी बुर पूरी तरह चिपचिपा गई आपकी इन सेक्*सी बातें सुनकर।
कोमल ने 16 अक्*टूबर के बजाय 14 अक्*टूबर को ही मुझे फोन पर आने का न्*योता दिया। कारण कि रमन भैया उस दिन अपनी फैमिली सहित किसी पार्टी में जाने वाले थे। जानू ने बताया कि आप यदि पॉंच बजे तक आ जाते तो रमन भैया लोग के जाने के बाद हम लोगों की साथ नहाने की तमन्*ना आज पूरी हो सकेगी। मैं खुशी के मारे तो फूला ना समा रहा था। मैंने उसको आश्*वस्*त कर दिया कि मैं समय से पहुँच जाऊँगा। किंतु सारी तमन्*नाऍं किसकी पूरी हुई हैं भला। अचानक से मेरी जानू ने फोन किया कि रमन भैया का एक्*सीडेंट हो गया है और भाभी लोग उनको देखने हॉस्*पीटल जा रही हैं। ऐसे में उसी के हमारे क्*वार्टर पर आने का सीन बन गया। मेरा मुँह उतर गया। कहॉं तो मैं उसके साथ रात गुजारने के हसीन सपने संजो रहा था और मेरा दिल बाग बाग हो रहा था और कहॉं अचानक से सारा कुछ उलट-पुलट हो गया। खैर मैं कोमल को लेने आनंद विहार चला गया। एक घंटे के इंतजार के बाद कोमल एक ऑटो से आई और उसके उतरने से पहले ही मैंने ऑटो में ही उसका हाथ पकड़ लिया, वो तो चौक ही पड़ी कि किसने ऑटो में उसका हाथ पकड़ा। अब हमारे मूड तो ऑफ ही थे पर क्*या करता हम एक दूजे से गुस्*सा तो थे नहीं इसीलिए आपस में अपनी हताशा शेयर करते फुटपाथ पर चलने लगे। वहॉं पर दो-तीन किशोर किशोरियॉं भीख मांग रहे थे। हमने एक को दो रूपए दिए तो वो बोली कि भगवान आपलोगों की जोड़ी सलामत रखे। मेरा मन था कि आज वहीं एक बड़े शॉपिंग मॉल में साथ घूमे। मैंने कोमल को कहा तो उसने पहले तो मना कर दिया। हम फिर मेट्रो स्*टेशन की ओर बढ़ने लगे। फिर ना जाने जानू को क्*या सूझा कि ऐ नीरज भैया, कोई सिनेमा का टाइम नहीं है क्*या कम से कम इंटरवल तक ही देख लेते साथ-साथ बैठकर फिर क्*वार्टर लौट जाते। मेरी तो बॉंछें ही खिल उठी। मैंने कहा कि इसके लिए तो यहीं पर मॉल है ही उसमें भी सिनेमा हॉल है। चलो वहीं देखते हैं। फिर हमलोग हाथों में हाथ डाले पैसिफिक मॉल में गए। पहले फिल्*म के बारे में ही पता किया। पता चला कि उस समय कोई शो शुरू होने वाला नहीं था। दूसरे वहॉं का टिकट भी बहुत महँगा था। कोमल ने भी मना कर दिया। फिर हम वहॉं शॉपिंग मॉल में घूमने का लुत्*फ उठाने लगे। मेरे दिमाग में ख्*याल आया कि अगर हम यहॉं से जल्*दी निकल चलें और राजीव चौक मेट्रो से उतर कर रीगल सिनेमा चलें तो शायद शुरू होती पिक्*चर पकड़ सकेंगे। मैंने जानू को बताया कि जल्*दी से निकलो यहॉं से। वहॉं चलकर साथ में फिल्*म देखेंगे। कोमल को भी खूब मन था साथ फिल्*म देखने का इसीलिए वो झटपट तैयार हो गई। हमलोग रीगल सिनेमा पहुँचे। सिनेमा तो शुरू हो चुका था पर हमें इससे क्*या, हमें तो बस साथ-साथ दिल्*ली में फिल्*म देखना था। हमने झटपट टिकट खरीदा और कोमल का बैग रखने सिनेमा हॉल के पिछवाड़े की ओर बढ़े।। वो जगह हॉल से कुछ दुकान पहले एक गली में जाकर था। चूँकि आज दिल्*ली में कॉमनवेल्*थ खेलों का समापन समारोह था इसीलिए उस इलाके की सारी दुकानें बंद थी। वह गली भी उस समय सुनसान और प्रकाश विहीन थी। मेरी जानू, एक सीढी के नीचे वाली जगह पर मुझे रोक ली और मेरे से लिपट गई और मेरे होठों को अपने होठों से गिरफ्तार कर लिया। उसका इरादा तो मेरे होठों को अपने होठों की उम्रकैद में रखने का था पर उस समय वो संभव नहीं था। फिर कुछ दुरी पर कदमों की आहट सुनकर हम अलग हुए और फिर वास्*तव में जिस काम के लिए आए थे वो किया और वापस लौटने लगे। लौटते समय मैंने फिर सुनहरा अवसर पाया और अबकी बार मैं उसको अपने बगल में दबाए और उठाए उठाए ही कुछ दूर तक चलता चला गया। मेरी कोमल उस समय बेहद खुश थी। खुशी साथ फिल्*म देखने की तो थी ही पर उससे पहले ही हमें जो बोनस पर बोनस मिलता जा रहा था वो तो और भी मजेदार और रोमांटिक था ना।
हम गेट पर टिकट और बॉडी चेकिंग करवाए। हमारा तो मन था कि जो दो सुरक्षा गार्ड एक मर्द और एक औरत जिन्*होंने हमारी बॉडी चेकिंग की, वो आराम करते और हम ही एक दूजे के बॉडी को चेक कर उनको कन्*फर्म कर देते कि सब कुछ मस्*त और ओ.के. है। हा हा हा। खैर हम टिकट लेकर अंदर थियेटर में घूसे। गिनती के लोग ही हॉल में थे। एक बूढे टिकट चेकर ने हमें ऐसी जगह बिठा दिया जो कि असल में ठीक जगह नहीं निकला। पर हमारे लिए दिल्*ली में तनहा तनहा केवल अपनी जानू के साथ फिॅल्*म देखने की खुशी भी काफी थी। हमारा ऐसा सपना जो हकीकत बन गया था उस पर हम दोनों को काफी रोमांच उत्*पन्*न हो रहा था। फिल्*म तो खैर बहुत ही बकवास थी पर हमें उससे क्*या। मेरी जानू, मेरे कंधे पर अपना सिर टिकाए हुई थी। मैंने अपना एक हाथ उसके पीठ से होकर उसके बॉहों को पकड़कर अपने पास कर लिया था और इस तरह मेरी जानू मुझसे चिपक कर मूवी देख रही थी। हमारे पैर आपस में मेल-मिलाप कर रहे थे। वो मुझे चूम रही थी और मैं उसे। मैंने उसकी चूचियों को भी दबाना शुरू कर दिया था। कोमल कुछ देर के बाद सिसकने लगी क्*योंकि वो बहुत भावुक हो रही थी। उसके बाद कोमल कुछ देर तक मेरे कलेजे से ही चिपकी रही। फिल्*म देखने में तो मजा था ही नहीं। मजा तो हम लोगों का अपना था। सवा घंटे के बाद हमदोनों ने वहॉं से निकलने का मन बनाया। वहॉं से निकले और फिर बैग लेने उसी अंधेरी गली में आए। वहॉं फिर कोमल और हम आलिंगन करने लगे, उसी समय गली के मुँह के पास से कोई गुजरा और शायद उसने देखा भी होगा। हम फुर्ती से अलग हुए और गली में से आगे निकलकर अपना बैग लिया और फिर पालिका बाजार वाली तरह के भूमिगत पार पाथ यानी सब-वे में घुसे। अंदर भी कोई नहीं था। मैं तो वहॉं पर भी अपनी रानी, अपनी मिट्ठू को चूमने और चूसने लगा। वहॉं हमलोग खुब लिपटे-चिपटे। कोमल भी बड़े जोश और शोख मिजाज में थी। बहुत मजा आ रहा था। कोई नहीं था इसीलिए हम एक दूसरे से चिपके हुए ही सब-वे पार करने लगे। सीढ़ीयों पर तो मैं उसको अपने पीठ पर अपने हाथों से उसकी पीठ को जकड़कर उठाते हुए ही चलने लगा था। बहुत मस्*ती महसूस हो रही थी। बाहर निकले तो वहीं पर पालिका बाजार के ऊपर स्थित पार्क था। वहॉं हम आ गए। एक जगह कपल्*स सब बैठें, लेटे और घूम रहे थे वहीं पर हम भी आ गए। हमने अपनी अपनी पादुकाऍं खोल लीं और बैग को भी घास पर रख दिया। इसके बाद हम घास पर बैठ गए और सुस्*ताने लगे। उस पार्क में बैठकर कोमल के साथ समय गुजारना बहुत खुशी दे रहा था। जानू भी उतनी ही खुश थी। सामने रोड पर ट्रैफिक का शोर और आकाश में रोमांटिक चांद और इन सब के बीच घास पर बैठे दो प्रेमी। मन कर रहा था कि यहीं पर दोनों लेट जाऍं और जब तक पार्क बंद ना हो तब तक कम से कम वहीं पर लेटे रहें। किंतु हमें समय का ख्*याल भी रखना था जो कि सुरक्षा के लिहाज से ज्*यादा जरूरी था। मेरी कोमल ने मुझसे कहा कि आप लेट जाइए और मेरे गोद में अपना माथा रख लीजिए। मैंने पहले तो उसकी जांघ और पैरों पर अपना सिर रखा पर कोमल कही कि आप थोड़ा और ऊपर आ जाइए ना अपना माथा मेरे गोद में रखिए ना। मैं भी खूब शरारती हो गया और बिल्*कुल से अपना माथा उसकी गोदी में खूब उपर तक कर लिया। कोमल मेरा माथा, गाल और गर्दन सहला रही थी। और हम दोनों चांद को देख रहे थे। बातें कर रहे थे। फीलिंग शेयर कर रहे थे। मैंने कोमल को भी कहा कि तुम मेरी गोद में लेट जाओ पर कोमल बिल्*कुल तैयार नहीं हो रही थी। बहुत मनाने पर और आस-पास में एक दो लड़की को वैसे ही अपने ब्*वॉय फ्रेंड के गोद में लेटे देखकर मुश्किल से वो एक या दो मिनट के लिए मेरे गोद में लेटी। फिर हम फटाफट उस पार्क से निकले और उसी सब-वे का सहारा लिया। फिर हम कोमल को उसी तरह अपने हाथों से अपनी पीठ पर चढाए सीढीयॉं उतरे और भूतल पर आ गए। हमने एक दूसरे की तस्*वीरें भी ली। इसके बाद हम गले लगे लगे उपर सीढीयों की ओर बढ़ने लगे। हमने यहॉं से एक ऑटो लिया। ऑटो में बैठते ही सबसे पहला काम मैंने यह किया कि कोमल के पीठ के पीछे से हाथ ले जाकर उसके दॉंये हाथ की तरफ वाले किनारे से उसके सूट के अंदर घुसा लिया और उसका पहले तो पेट सहलाया और उसके ढोंरी में अंगुली किया। ऊपर से हम लोग तो जितना संभव था, उतना तो चिपके थे ही। अब मैं उसके सलवार में अपने हाथ को घुसा लिया और पैंटी के अंदर घुसाकर उसके झॉंटो से ऑटो में ही खेलने लगा। उसकी झॉंटों से खूब मस्*ती किया। इसके बाद उसके बुर में अंगुली मैंने घुसा दिया। मैं उसके बुर से जान-बूझकर धीरे-धीरे खेल रहा था ताकि कोमल अचानक से बहुत गर्म और उत्*तेजित ना हो जाय। मैं उसको धीरे-धीरे एक्*साइट कर रहा था और वो खूब मस्तिया रही थी। उसके बुर में अंगुली कर के उससे निकलते बुर रस को पुरा मैंने अंगुली से लगा लगा कर सुखा दिया और फिर भी अंगुली उसके बुर में ही घुसाए रखा। रीगल सिनेमा से हमारा क्*वार्टर कम से कम 10 किलोमीटर की दूरी पर है और पूरे रास्*ते मैं ऑटो में उससे चिपका रहा और मेरी अंगुली उसके बुर और झांटों से खिलवाड़ करती रही। मेरी एक अंगुली उसके बुर में घुसी हुई थी और बीच बीच में उसके वर्टिकल लिप्*स को सहलाती रहती थी जबकि मेरी बाकी अंगुलियॉं उसके झॉंटों को टच कर रही थी। ऐसा ही करते करते हमारे क्*वार्टर का गेट आ गया और सेफ्टी का ख्*याल रखते हुए हम वहीं पर उतर गए और वहॉं से पैदल ही अपने क्*वार्टर की ओर आने लगे। एक जगह काफी सुनसान सा था। वहॉं पर मेरी जानू, मेरे से चिपक गई और मुझे बुरी तरह चूमने लगी। मैंने कोमल को पार्क में किस किया। पार्क के मंदिर से हमने प्रसाद भी लिया। जब हम क्*वार्टर पहुँचे तो वहॉं ताला लगा हुआ था। फोन लगाया तो पता चला कि मॉम और गोलू वीर बाजार गए हुए हैं और आधे घंटे के बाद ही आ सकेंगे। ये हमारे लिए एक और खुशी की वजह बना। हमने सामान दरवाजे के पास रखा और एक-एक कर हम छत पर आ गए। हमने अपनी जेब से सारे सामान निकाल लिए और कोमल ने भी पर्स वगैरह एक जगह पर रख दिया। छत पर हमारा कालीन बिछा था ही पहले से। हम दोनों उसी पर आकर लेट गए। हम दोनों एक दम से एक दूसरे से बुरी तरह चिपक गए। मैंने पैरों के बीच में उसको फँसा लिया और हमारे सीने एक दूसरे से बिल्*कुल भिड़ गए। हम एक दूजे को खूब चूमने लगे। मैं उसको खुद से चिपकाए चिपकाए कालीन पर इस तरफ से उस तरफ लुढकने लगा। कभी मैं उसके ऊपर हो जाता तो कभी वो मेरे ऊपर हो जाती। मतलब रजाई कभी तोशक बन जाता तो तोशक कभी रजाई। हम ऐसा कई बार किए। कोमल ने मेरा लंड निकाल लिया बाहर और मैंने उसके सलवार का नाड़ा खोलकर उसकी बुर को झॉंटों समेत बाहर कर दिया। अब मैं अपना लंड उसके बुर के मुँह पर रखकर उस पर लेट गया। कोमल तो बिल्*क्*ुल लंड को अपनी बुर में लेने को आतुर थी ही। मैंने कोमल को खूब सारा प्*यार किया और प्*यारी प्*यारी बातें कहीं । हमने कई खेल भी खेला आपस में। जैसे कि उसे खुब गुदगुदी लगाया और उसको हँसते-हँसते बेहाल कर दिया। वो इतना हँस रही थी कि नीरज भैया प्*लीज छोड़ दीजिए, हम पागल हो जाएंगे हँसते-हँसते। मैं उसको लिटा दिया कालीन पर और उसके पैर के सामने खड़ा हो गया और फिर ऐसे उस पर ऊपर से नीचे की ओर हुआ जैसे कि उस पर गिर ही जाऊँगा और फिर उसके बदन पर धीरे से हौले से गिर जाता था और फिर अपने जिस्*म से उसके जिस्*म को मसलने लगता था। मैं पैरों से लेकर उसके सिर तक चूमता जा रहा था और वो गुदगुदी से बेचैन हो रही थी। मैं उसको पेट के बल लिटा दिया और इस तरह उसकी गांड ऊपर की तरफ हो गई। मैं उस पर अपने गांड के बल बैठ गया और उस पर आगे-पीछे करने लगा। वो खूब हँस रही थी। एक दो बार वो जिस दिशा में सिर की हुर्इ थी उस ओर मैं पैर करके अपना लंड उसके बुर पे टिकाकर खुब रगड़ने लगता था। मैं उसके पैरों पर झुककर घुघुआ मन्*ना करते हुए उसको माथा पर ओठों पर और गालों पर चूम और चाट रहा था। कभी कभी तो मैं उसके नाक पर चाट लेता था तो वो हँसती भी थी और बिदकती भी थी। मैं उसके पेट पर बैठ गया और उसको उन्*हीं जगहों पर चूम चाट रहा था। मैं थोड़ा और आगे बढ़ कर अब उसकी चूचियों पर हल्*के से बैठ गया और अब फिर से उसके होठों, माथे और गालों पर चूमने लगा। कोमल की सॉंस भी तेज हो रही थी क्*योंकि मैं उसके सीने पर जो सवार हो गया। पेट पर जब मैं बैठा था तो अपने एक हाथ से उसके बुर में भी अंगुली किया और उसको सहलाया था। खड़े होने पर मैंने उसको गोद में भी उठा लिया था। उससे छत पर मैं खुब लिपटम चिपटम कर रहा था पर चूँकि सामने एक किचन था जिस से कोई हमें देख सकता था इसीलिए हमने अपने जोश पर काबू किया। मैं अपना गर्दन कोमल के टांगों के बीच रख लिया एक बार और उसके बुर के नीचे अपनी गर्दन से रगड़ रहा था। जब मेरी कोमल रेलिंग पकड़कर सामने की ओर देख रही थी तो मैं उसके दोनों टांगों के बीच अपना गर्दन कर उसकी बुर को रगड़ने लगा और फिर अपने गर्दन को उठाने लगा। मैं जब गर्दन उठाता था तो उसकी बुर के नीचे से मेरे द्वारा विपरी गुर यानी गुरूत्*व बल लगता था जिससे वो भी उपर की ओर उठ जाती थी। बड़ी मस्*ती की हमने उस समय। अब हमें लगने लगा कि मॉम के आने का समय हो गया है तो हम छत से नीचे की ओर आए। हम एक दूसरे से लिपटे हुए ही नीचे उतरे और आकर नीचे रखी कुर्सियों पर बैठ गए। कुछ देर में मॉम और गोलू भी आ गए। रात में खाना खाकर हम सो गए। अभी उस दिन की मस्*ती तो हमें याद नहीं आ रहा पर हमने कुछ न कुछ मस्*ती जरूर की होगी। हॉं एक रात की बात याद आ रही है कि अपनी रानी के टॉयलेट जाने के बाद हम भी उसके पीछे पीछे वहॉं चले आए और अपना लंड निकाल कर उसके बुर पर रगड़ने लगे। इसके बाद हम उसके लेकर बाथरूम में आ गए और वहॉं भी अपना लंड उसके बुर में जोर-जोर से रगड़ने लगे। अचानक मॉम टॉयलेट की तरफ आती दिखाई दी। भय के मारे हमारी टांगे कॉंपने लगी। मैंने वहॉं किसी तरह अपनी कमजोरी का बहाना बनाकर दोनों को फँसने से किसी प्रकार बचाया।
तो ये थी मेरे पहले प्*यार के साथ मेरे बीत सुनहरे, मस्*त और सेक्*सी पलों का बयान। इस कहानी में एक ही चीज नहीं हुआ और वो था चुदाई का वर्णन। ये सुनहरा मौका उसके शादी हो जाने के बाद ही मैंने उठाया क्*योंकि मैं उसकी जिंदगी में कोई रिस्*क नहीं आने देना चाहता था। उसकी शादी हो जाने के बाद और अपनी शादी होने से ठीक पहले मुझे अपने पहले प्*यार से वो शारीरिक सुख भी मिल गया यानी मैं उसे चोदने में कामयाब हो गया। एक बात मैं ये भी बता दूँ कि वो किसी और की पत्*नी है और मैं किसी और का पति।

Reply With Quote
Reply


Thread Tools Search this Thread
Search this Thread:

Advanced Search

Posting Rules
You may not post new threads
You may not post replies
You may not post attachments
You may not edit your posts

vB code is On
Smilies are On
[IMG] code is On
HTML code is Off
Forum Jump



All times are GMT +5.5. The time now is 07:28 PM.
Page generated in 0.01808 seconds