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Old 9th April 2013
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neerathemall is a pillar of our communityneerathemall is a pillar of our communityneerathemall is a pillar of our communityneerathemall is a pillar of our communityneerathemall is a pillar of our communityneerathemall is a pillar of our communityneerathemall is a pillar of our communityneerathemall is a pillar of our community
मेरा कोई सगा भाई नहीं है.इसलिए जब भी राखी या दूज का त्यौहार आता है मैं पड़ोस के एक लडके को राखी बांधती हूँ .उस लडके का नाम विशाल है .वह मेरा दूर के रिश्ते की बुआ का लड़का है .उसकी आयु 24 आयु 21साल है .विशाल मेरे घर से 7 किलोमीटर दूर सिटी में कम्पूटर की मरम्मत की दुकान है .साथ ही विशाल वहीं पर विडियो लाइब्रेरी भी चलाता था .अपने साथ उसने एक लड़े को भी काम पर रहा था .जिसका नाम सुनील था .सुनील 27 साल का युवक था .उसका काम ग्राहकों को उनकी पसंद की सीडियां देना था .विशाल का घर दूकान और मेरे घर से बहु दूर था ,इसलिए उसने अपनी दूकान के ऊपर एक कमरा किराये पर ले लिया था .कमरे में लैट बाथ साथ ही थे .जब भी विशाल को समय मिलाता था वह एक दो दिन में मेरे घर जरुर अत था .कई बार मम्मी उस से बाजार से जरूरी सामान मंगवा लेती थी .
छोटी होने के कारण विशाल मुझे बहुत चाहता था ,और जब भी आता था मेरे लिए कोई न कोई चीज जरुर लाता मम्मी भी उसे पसंद कराती थीं ,और उस से हरेक बात में सलाह लेती थीं..विशाल के पिता गुजर गए थे ,और वसीयत में एक मकान छोड़ गए थे ,जो दुकान से दूर था ,उसी में विशाल की माँ रहती था ,विशाल दिन भर दुकान पर रहता था ,सुनील उसके लिए घर से खाना ले आता था .रत को विशाल घर में खाना खाता था .

यह घटना राखी के दिन की है ,हर साल की तरह मैं विशाल को राखी बांधती थी .और उसी के आने का इन्तेजार हो रहा था .विशाल ने मुझे राखी पर एक मोबाइल गिफ्ट देने का वादा किया था .उस दिन रह रह कर बरसात हो रही थी .और रास्तों में पानी भर गया था ,करीब शाम के पांच के करीब विशाल आया .और देर के लिए माफ़ी मांगी . फिर मैंने जब उसे राखी बांधी तो ,उसे मोबाइल देने का वादा दिलाया .खाने के बाद विशाल में कहा मेरे साथ मार्केट चलो ,तुम्हें जैसा मोबाईल चाहिए वैसा दिलवा दूंगा .उस समय शाम के सात बज चुके थे ,तभी जोर की बरसात होने लगी .मेरी मम्मी ने विशाल से कहा तुम अगले दिन मोबाइल खरीद देना .लेकिन मैं उसी दिन की जिद करने लगी .विशाल ने कहा अगर पानी के कारण देर हो गयी तो ? मगर मैंने कहा चाहे कितनी भी देर हो जाये नुझे तो मोबाईल चाहिए .मेरी मम्मी भी बोली बेटा यह बड़ी जिद्दी है .अगर तू आज मोबाईल नहीं देगा तो यह मेरी जान खाती रहेगी .मुझे तुम पर पूरा विश्वास है ,भले कुछ देर अधिक भी हो जाये .
विशाल बोला आंटी चिंता मत करो ,अगर बरसात जोर से आने लगेगी तो हम अपनी दुकान के ऊपरी कमरे में रुक जायेंगे .क्योंकि वह में सिटी में है .वहीँ नए नए तरह के मोबाइल मिलते है .
यह सुनते ही मैं विशाल की बाइक पर बैठ गयी .और जाते जाते विशाल ने ममी से कहा आंटी आप चिंता नहीं करो .मैं आपको फोन कर दिया करूँगा .
उस समय थोड़ी बून्दाबून्दी हो ताहि थी ,हमने काफी घुमानेके बाद एक मोबाईल पसंद कर लिया .लेकिन जैसे ही हम दुकान से बहार निकले तो मुसलाधार बरसात होने लगी .साथ में ठंडी हवाएं भी चलने लगी विशाल ने मेरी मम्मी को बता दिया कि हम बाजार में हैं ,हमें देर हो सकती है ,विशाल का कमरा थोड़ी दूर ही था ,उसने कहा कि बरसात रुकने तक मैं उसके कमरे में रुक सकती हूँ ,क्यों वहां कोई नहीं होगा ,कमरे की एक चाभी विशाल के पास थी .दूसरी उसने अपने नौकर को दे रखी थी .कमरे के आने तक हम पूरी तरह भीग चुके थे .मिझे सर्दी लग रही थी .मैं काँप रही थी .लेकिन उस कमरे में मेरे लिए दूसरा कपड़ा नहीं था ,विशाल ने मुझे अपना कुरता दे दिया ,मैं निचे से नंगी थी .
विशाल के कमरे में सिर्फ एक तौलिया और लुंगी थी .जब वह गिले कपडे बदने लगा तो उसकी तौलिया निचे गिर गयी .और उसका लम्बा मोटा ,गोरा ,प्यारा लंड मैंने देख लिया .शायद उसने जानबूझ कर ऐसा किया होगा .
मैं दो \तीन बार मोहल्ले के लड़कों से चुदवा चुकी थी .तब से मुझे लंड लेने की इच्छा होती रहती थी .मैं चाहती थी कि कोई लम्बा लंड वाला मेरी चूत की जमकर चुदाई करे और मेरी चूत की प्यास बुझादे .
विशाल का लंड मुझे अच्छा लगा ,10 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा था .मेरी चूत भर जाने पर भी लंड बचा रहता
जब से मैंने विशाल का मस्ताना लंड देखा देखा सर्दी होने बावजूद मेरी चूत में वासना की आग भड़क रही थी ,मैं सोच रही थी की ,किसी न किसी तरकीब से विशाल का लंड लिया जाये ,मैंने विशाल से कहा मुझे ऐसा लग रहा है कि मुझे सर्दी होने वाली है .तुम्हारे कमरे में गैस भी नहीं है ,वर्ना चाय बन सकती थी .विशाल ने कहा मैं तो नीचे से किसी दुकान से चाय मंगवा लेता हूँ .अगर कोई दुकान खुली हो ,मरे पास तो सिर्फ एक बोतल ब्रांडी है .मुझे जब भी सर्दी हो जाती है ,मैं एक दो पैग ले लेता हूँ .मैं नौकर सुनील को फोन करता हूँ वह चाय का इंतजाम कर देगा ,अगत तुम चाहो तबतक तुम भी एक पैग ले सकती हो .मैं खुश होकर बोली अगर तुम खुद अपने हाथों से पिलाओगे ,तो मैं पी लूंगी .
मेरा काम हो गया .मेरी चूत लुप लुपहोने लगी .मैंने फ़ौरन एक कि जगह तिन पैग ले लिए और कहा मेरी सर्दी जल्दी जाने वाली नहीं है ,मुझे और गर्मी चाहिए .विशाल में मुझे अपने पास बिठाया और कहा लो तुम मुझ से सट कर बैठ जाओ ,शायद मेरे शारीर से तुम्हे कुछ गर्मी मिल जाए .बातें करते वक्त विशाल मेरे शारीर पर हाथ फेरने लगा .उसका लंड लुंगी में उछलने लगा था .और मेरी चूत से रस रिसने लगा था .विशाल ने मुहे अपने बिलकुल पास लिटा लिया .और अपनी टाँगें मेरी टांगों में फसा लीं .मेरी चूचियां एकदम कड़क हो गयीं .विशाल कि सांसें मेरी सांसों से मिल रही थीं .
तभी विशाल का नौकर सुनील अचानक कमरे में अगया ,हम दरवाजा बंद करना भूल हाय थे ,हमें ऐसी हालत में देखकर सुनील पहले तो चौंका और बोला यार मॉल तो मस्त लाये हो ,क्या अकेले ही मजा लेने का प्लान था .विशाल ने कहा यह मेरी मुंहबोली बहिन है .सुनील बोला इस से कोई फर्क नहीं होता .यह तेरी सगी बहिन तो नहीं है ,तुझ्र यह कहावत पता नहीं ?
"लंड न देखे दिन या रात,छूत ने देखे रिश्ता नात"यार जब लंड टायर हो ,छुट गर्म हो .तो सरे रश्ते नाते भूलकर चुदाई का मजा लेना चाहिए ,ऐसे में अगर मेरी सगी बहिन भी होती तो ,मैं उसे चोदे बिना नहीं छोड़ता .यार छूत का अपमान नहीं करना चाहिए .
सुनील में मुझ से कहा ,आप ही बताइए क्या मैंने कोई गलत बात कही है .?ब्रांडी के नशे में ,या चुदवाने की इच्छा में मैंने हाहा तुम सच कह रहे हो .कुदरत ने सर्फ मर्द और स्त्री ही बनाये हैं ,रिश्ते तो लोगों ने बनादिये हैं .
विशाल ने कहा इसला मतलब ,तुम चुवाने को राजी हो .सुनील भी बोल पड़ा मैंने यह ज्ञान दिया है ,मेरा भी कुछ हक़ बनता है .इस लड़की को एक साथ दो दो लंड का मजा मिलेगा .यह भी याद करेगी कि चुदाई क्या होती है .विसाल ने मुझ से पूछा कि क्या तुम तय्यार हो ?मैंने अपना सर हिला कर हाँ का इशारा कर दिया .सुनील फ़ौरन नंगा हो गया ,उसका लंड भी दस इंच से कम नहींथा ,और कड़क होकर ऊपर नीचे हो रहा था.मुझे लंड का गुलाबी गुलाबी सुपरा बहुत प्यारे लग रहे थे ,और उनको चूसने कि इच्छा नहीं रोक पा रही थी
तभी सुनील ने विशाल हे कहा आओ अज पिंकी को दो दो लंड का मजा इ दें ,यह भी याद करेगी .अगर यह ऐसा मजा ले लेगी तो हमें खुद चोदने के लिए रोज बुलाया करेगी .विशाल ने कहा पिंकी आओ ,तुम मेरे खड़े लंड पर इस तरह चढ़ जाओ ,जिस से लंड फक से चूत में समां जाए .तुम चुद चुकी हो ,तुम्हे दर्द नहीं होगा .जिस समय में विशाल का लंड लेने के लिए लंड पर सवार होने लगी तो मेरी गंद सुनील के सामने आगई .उसने फ़ौरन अपना लंड मेरी गंद में घुसा दिया .लंड गांड में रास्ता बनाते हुए अन्दर समां गया .मेरी चीख निकने ही वाली थी लेकिन मने उसे रोक लिया .मजा लेने के लिए दर्द सहना ही पड़ता है ,वर्ना मजा कैसे आयेगा .फिर दौनों के लंड अपना कम करने लगे ,मई स्वर्ग के मजे ले रही थी मेरी चूत से चिकना रस रिस रहा था ,लेकिन गांड लाल हो रही थी

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प्यार की चाहत

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शाम ढल चुकी थी। बादलों के कारण मौसम में ठण्डक आ गई थी। अचानक रास्ते में मुझे एक लड़की नजर आई। वो पंजों के बल उछल उछल कर मुझे रुकने का इशारा कर रही थी। बरसात होने वाली थी। काले बादल सर पर आ चुके थे। ऊंचा सा स्कर्ट पहने और गहरे गले का टॉप पहने कोई मॉडर्न गर्ल थी। मैंने उसके पास ही गाड़ी रोकी ... कार का दरवाजा खोल कर मैंने अन्दर आने का इशारा किया। वो लपक कर सामने बगल वाली सीट पर आ गई।
"थेन्क्स जो ... नाईस ऑफ़ यू ... "
"आप मुझे जानती हैं ... आप का परिचय ... ?"
"मैं शैली ... यहीं पास में होटल में काम करती हूँ ... आप कल शाम को यहाँ रुके थे ना ... "
"ओह हाँ ... मैंने 50 रुपये टिप में दिये थे ... ऐसे मौसम में बाहर नहीं निकलना चाहिये ... "
" रात भर मैं यहाँ क्या करती ... सोचा बाहर आ कर कोशिश करूँ ... देखा, आप मिल गये ना ... यहाँ पास में मन्दिर में रुकना ... मुझे कुछ काम है।" उसने सामने मन्दिर की तरफ़ इशारा किया। बरसात चढ़ी हुई थी, मेरा मन रुकने को नहीं था, बस 50 किलोमीटर ही दूर था मडगांव। फिर भी मैंने मन्दिर की तरफ़ गाड़ी मोड़ ली। बूंदा बांदी शुरू हो गई थी। बादलो की गड़गड़ाहट और तेज बिजलियाँ कौंध रही थी। गाड़ी मन्दिर परिसर में खड़ी करके हम दोनों मन्दिर के अन्दर चले आये।
"जल्दी करना शैली ... "
"बस दो मिनट ... "
इतने में अन्दर से एक लड़का भागता हुआ आया ... उसके हाथ में छाता था और शायद वो घर जा रहा था।
"मन्दिर में कोई नहीं है ... चलो ... " लड़के ने भागते हुए कहा "बारिश जोर की आयेगी ... "
"अरे मुझे पण्डित जी से काम है ... " शैली ने जोर से चीख कर कहा।
" वो नहीं है ... चाबी वहीं हैं ... आप इन्तज़ार कर लो ... " वो तेजी से सीढ़ियां उतर कर चला गया।
"मुझे पता है ... आओ जो ... " वो मुझे देख कर मुस्कराई ...
इतने में बरसात तेज हो गई। हवा में शैली का छोटा सा स्कर्ट बार बार कमर के ऊपर उड़ कर आ रहा था। उसकी छोटी सी पेन्टी में से उसके उभरे हुए चूतड़ साफ़ दिखने लगे थे। मैंने अपना दिल थाम लिया ... साली चुदने लायक है ... मैंने लण्ड को दबा कर समझाने का प्रयास किया। फिर मैंने निराशा से बाहर देखा और रुकने में ही भलाई समझी। मन्दिर के साथ ही पुजारी का कमरा था,हमने पुजारी का कमरा खोला ... और अन्दर आ गये।
आते ही शैली बिस्तर पर लेट गई, लेटते ही उसकी स्कर्ट फिर से ऊपर हो गई। उसकी चिकनी सलोनी गोरी मांसल जांघें चमक उठी। मेरी पैन्ट के ऊपर से लण्ड का उभार देख कर वो भी इतराने लगी और जान करके अपनी टांगें फ़ैला ली। चूत के स्थान पर एक गीला धब्बा उभर आया था।
"शैली , स्कर्ट नीचे कर लो ... सब दिख रहा है।" मैंने झिझकते हुए कहा।
"अच्छा ... तो देखो ना ... कैसी हूँ नीचे से ... " उसने मुझे निमंत्रण देते हुए कहा, अपनी चूत को हाथ से दबाते हुई बोली ... गीला धब्बा और फ़ैल गया ... चूत का रस निकल रहा था।
"तराशी हुई चिकनी जांघे, गोरी सुन्दर् ... छोटी सी पेन्टी ... और उभरी और गीली हुई ... "
"हाय ... " उसने जल्दी से स्कर्ट ऊपर डाल लिया ... "आप तो मेरे अन्दर ही घुसे जा रहे हैं ... "
"आपने पूछा था ना ... कोई दूसरा होता तो ... वो जाने क्या कर डालता ... ये गीली ... "
"और आप कुछ भी नहीं करते क्या ... और गीली क्या ... " खुला न्योता दे रही थी ... अगर मैंने कुछ नहीं किया तो वो समझेगी कि मेरे में कुछ कमी है।
"क्यों नहीं करता ... । जैसे ये आपके बड़े बड़े सेक्सी चूंचे ... और ये गीली चूत ... " मैंने उसके पास जाकर उसके चूंचे दबा दिये।
"रुको ... 5000 रुपये लूंगी ... " मुझे भड़का कर उसने कमाई की दर बता दी।
"मंजूर है ... पर फिर मैं जो चाहूँगा वो करूंगा ... चाहे पिछाड़ी ही मार दूँ !"
"और सुनो ... उसके अलावा, मैं जो चाहूँ वो भी करोगे ना ... आ जाओ ना ... समय कीमती है ... शुरू हो जाओ ... और निकाल दो मेरी हसरतें ... आपकी हसरतें ... " वो बड़े ही प्रोफ़ेशनल अन्दाज में बोली।
"चलो कपड़े उतारें ... शैली" बाहर बरसात पूरा जोर पकड़ चुकी थी।
मैंने अपने कपड़े उतार दिये ... उसके तो कपड़े वैसे ही ना के बराबर थे। मेरा तन्नाया हुआ लण्ड देख कर उसके मुख से अनायास ही निकल पड़ा ...
"माई गॉड ... ... ये लण्ड है या मूसल ... इसका तो पूरा मजा लूंगी मैं तो ... " मुझे समझ में नहीं आया, मेरा लण्ड तो साधारण था, हां खड़े होने के बाद आठ या साढ़े आठ इन्च का हो जाता होगा।
उसकी नंगी चूत गीली थी, हाथ लगाया तो लसलसी सी, चिकनाई से भरी हुई थी ... मेरा हाथ उसने झटक डाला।
"यहाँ खड़े हो जाओ जो ... " खुद एक कुर्सी पर नंगी बैठ गई और मेरा लण्ड पकड़ लिया। उसके ठण्डे और नरम हाथों ने मेरे लण्ड को और कड़क कर दिया। मेरे लण्ड को वो हल्के हल्के मलने लगी। मुझे मीठा मीठा सा मजा आने लगा। मैंने उसके बाल पकड़ लिये और दूसरे हाथ से उसकी चूची सहलाने लगा। वो कभी कभी मेरा लण्ड अपने मुँह में लेकर चूस भी लेती थी। मेरा सुपाड़ा उसके थूक से भीग जाता था।
"साला ... चूत में घुसेगा तो मुझे मस्त ही कर डालेगा ... और गाण्ड को तो मजे आ जायेंगे ... "
"शैली, अब जरा मुठ मार के मजा दे यार ... "
"ये लो ... क्या कड़क लौड़ा है ... चूसने में भी मजा आ रहा है ... " और उसने अपने हाथ में लण्ड को ठीक से बांध लिया और जोर से दबा लिया ... ।
"तैयार हो जो ... तेरा लण्ड अब तो गया ... " उसके हाथों ने कस कर हाथ जड़ तक रगड़ा और फिर बाहर तक दबा कर रगड़ मारी ... मुझे लगा कि माल निकाला ...
"हां शैली अब लगा कि मुठ मारा है ... चल जल्दी जल्दी कर ... फिर चुदाई भी तो करनी है ...
"जल्दी क्या है जो ... ये भयंकर बरसात है, सुबह तक तो चलेगी ... तब तक क्या करोगे ... "
और उसका भारी हाथ मेरे लौड़े को रगड़ मारते हुये मुठ मारने लगा। मुझे मस्ती चढ़ने लगी। मुझे आश्चर्य हुआ कि उसके हाथों में इतनी ताकत कहां से आ गई। मेरा जिस्म वासना से भर कर तन गया। लण्ड को मैंने और उभार लिया। शैली जम कर मुठ मार रही थी।
"बस कर शैली ... देख मेरा माल निकल जायेगा ... "
"जो ... निकाल दे माल ... निकाल दे ... मजा आ जायेगा ... " उसने अपने हाथों को और तेज कर दिया। मेरा लण्ड उफ़ान पर आ गया।
"शैली ... रुक जा रे ... देख निकल जायेगा ... "
उसने हाथ रोक दिया और लण्ड को मुँह में ले लिया ... और एक विशेष तरह से लण्ड को मोड़ कर मुठ मारा ... तीन चार स्ट्रोक में मेरी हालत खराब हो गई।
"मा ... दी फ़ुद्दी ... मां चुद गई मेरी तो ... हाय रे ... ओह्ह्ह्ह्ह्ह" और मेरे लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया, वीर्य उसके हलक में सीधा उतर गया और वो गट से पी गई। अब वो मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी, मानो लण्ड की सफ़ाई कर रही हो ... ।
मैं बिस्तर पर लम्बी सांसें भरता हुआ लेट गया। मेरे लेटते ही वो मेरे ऊपर आ गई। और मुझे लिपटा कर चूमने लगी।
"जो मजा आया ना ... तेरा लण्ड मस्त है रे ... मुठ मारने में बहुत मजा आया ... ।"
शैली अपनी चूत मेरे लण्ड पर घिसने लगी ... उसकी शेव की हुई चूत के कड़े बाल मेरे लण्ड पर चुभ रहे थे और खरोंचें मार रहे थे। बड़ा मजा आ रहा था।
"शैली तुमने कहां से सीखी ये सब मस्ती वाली हरकतें ...? "
"यह तो मैं अस्सी नब्बे सालों से कर रही हूँ ... ।" और हंस दी ... "तुम्हें जब सौ साल का अनुभव हो जायेगा ना, तो तुम भी एक्स्पर्ट हो जाओगे ... "
"हां जैसे सत्तर साल का तो हूँ ही ... !" और हम दोनों हंस पड़े।
"सच कहती हूँ रे ... साला मजाक समझ रहा है ... " वो हंस के अजीब से स्वर में बोली।
"सच है ... चूत 20 साल की, बोबे 15 साल के ... जवानी 25 साल की ... गाण्ड 20 साल की ... और नशीली आंखें ... जोशीला बदन ... माल निकाल देने वाली अदायें ... 20 साल और जोड़ लो हो गया 100 का आंकड़ा।"
"हाय तुमने तो ये बोल कर मेरे बदन में आग लगा दी। आह्ह्ह्ह्ह्ह, साला लौड़ा चूत में घुस ही गया ना"
मेरा लौड़ा जाने कब कड़ा हो गया और शैली ने जोर लगा कर अपनी चूत में घुसेड़ लिया था। मुझे भी चूत का गरम गरम अहसास होने लगा। उसने अपनी चूंचियां उठा कर मेरे मुँह में घुसेड़ दी और मैं उसकी चूची एक एक करके दोनों चूसने लगा। अचानक उसके चूचियों में से दूध आने लगा। मीठा मीठा सा ... स्वाद भरा ... मैं दूध पीने लगा ... उसने अपनी चूत का धक्का जोर से मारा और मेरा पूरा लण्ड चूत ने समा लिया।
"कैसा लगा मेरे जो ... दूध का मजा ... चूत का मजा ... ?"
"इतना सारा दूध निकल रहा है ... मजा आ रहा है ... पी जाऊँ क्या ... तुम्हारा कोई बच्चा है ना ... ?"
"कुछ भी मत कहो ... तुम ही हो मेरे सब कुछ ... बस पी लो ... " और चूत उछाल उछाल कर लण्ड पर मारने लगी। उसकी छाती में से दूध भी बहने लगा। मेरा लण्ड मस्ती में भर गया थ। मेरा पेट दूध पी कर भर चुका था। जाने कितना दूध था उसकी छातियों में ...
"जो ... राजा तुम्हारा पेट भर गया क्या ...? "
"क्या ?? शैली तुम भी ना गजब की हो ... " मैंने भी अपना लण्ड ऊपर चूत पर मारते कहा।
उसका दूध निकलना बन्द हो गया था और अब वो रुक गई थी ...
"जो लण्ड निकालो तो ... मुझे सू सू आ रही है ... " मेरे लण्ड निकालते ही वो मुझसे लिपट गई और थोड़ा सा जोर लगाया तो पेशाब होने लगा। जाने कैसे मेरे लण्ड में भी तरावट आ गई और मेरे लण्ड से भी पेशाब निकल पड़ा। पेशाब निकलते ही मुझे बड़ा आराम सा लगा। हम दोनों ही पेशाब करने लगे। मुझे लगा कि साथ ही मैं झड़ भी गया हूँ ... वीर्य भी साथ निकल गया है ... एक अजीबो गरीब अहसास ... जो मुझे कभी नहीं हुआ था।
"शैली यह क्या हुआ ... मेरा तो माल ही निकल गया ... "
"मेरे दूध का असर था ... मैं भी झड़ गई हूँ ... तुमने मुझे आज पूरा सन्तुष्ट कर दिया है ... अब तुम सो जाओ।"
"आअह्ह्ह्ह्ह्ह, ये क्या ... मुझे गहरी नींद आ रही है ... ।"
"मेरे प्यारे जो, तुम्हारे पापा, मेरे मित्र थे ... अपनी मां से पूछना ... मुझे तुम्हारे नाना ने मार डाला था ... पर मैं तुमसे, तुम्हारे पापा से प्यार करती थी ... तुम्हारे अन्दर मुझे डेविड हन्टर नजर आते है ... तुमसे चुद कर यूँ लगता है जैसे डेविड ही हो ... मुझे तुम्हारा हमेशा इन्तज़ार रहेगा।" जैसे मुझे कोई दूर से बोल रहा हो ... मेरी पलकें बंद होती जा रही थी ... मैं सोना नहीं चाह रहा था। शैली मेरे ऊपर लेटी हुई मुझे चूमे जा रही थी ... । उसके प्यार की गर्मी से मैं कब सो गया मुझे पता ही नहीं चला।
सुबह पन्डित मुझे जगा रहे थे ... मेरा सर भारी था, पन्डित जी ने मुझे कॉफ़ी पिलाई ... मेरा सर थोड़ा हल्का हुआ। अचानक मुझे रात वाली घटना याद हो आई ... मैंने तुरन्त बिस्तर की ओर देखा ... वो एक दम साफ़ सुथरा था ... कोई पेशाब का दाग नहीं था।
"अब आप जाईये जो साहब ... भाभी को मेरा प्रणाम कहना ... !"
मैंने उन्हें धन्यवाद कहा।
मैं बाहर निकल आया ... मौसम साफ़ था ... मैंने कार स्टार्ट की और मडगांव की ओर चल पड़ा।

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बरसात की रात

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मैं तो लड़की हू ना..





मैंने बाहर झांका तो रीता अपने घर के बाहर की सफ़ाई कर रही थी। मुझे देख कर वो मुस्कुराई। सफ़ाई बंद करके वो मेरी तरफ़ आने लगी.... मैंने पास पड़ी कमीज पहन ली। वो दरवाजा खोल कर अन्दर आ गई।


" विनोद जी.... दरवाजा तो बन्द कर लिया करो...."


"आप कब आई थी....रीता जी"


"मैं बस जी....बिल्कुल सही समय पर आई थी.... तुम्हें जी भर कर देख लिया.... लगता है मौसम ने रात को गड़बड़ी कर दी..."


"ना....नहीं.... वो तो ऐसे ही ना....रात को तौलिया खुल गया था..."


"फिर भी.... बिना अंडरवियर के .... और बेचारा बंटी.... अपना दम उस पर निकाल दिया...." और हंस पड़ी।


"रीता जी.... बस करो ना.."


" ओह हां सॉरी .... पर ...." रीता ने मुस्करा कर मेरे लण्ड की तरफ़ देखा।


"पर क्या........"


"मजा आया रात को...."


" रीता जी....वो लड़की थोड़ी है.... वो तो...."


"पर मैं तो लड़की हू ना....। उसके स्वर में सेक्स भरा अनुरोध था।


रीता के मन में हलचल हो रही थी।


"रीता जी ....मुझे शरम आ रही है....मेरा मजाक मत बनाओ....रात को मेरी वजह से सब गड़बड़ हो गई थी...."


"क्या गड़बड़ हुआ मुझे क्या बंटी से पूछना पड़ेगा" वो आगे बढती ही जा रही थी। साफ़ जाहिर था कि उसे मालूम था कि मैंने आज बंटी की गाण्ड चुदाई की है। मैंने भी सीधे ही कहा -"रीता जी ....! एक बात पूछूं....?"


" हां....पूछो....."


"आपके दिल में कुछ हलचल है ना...."


उसने मुझे वासना की नजर से देखा - " विनोद !!!......"


मैंने धीरे से दोनो हाथों से उसका चेहरा थाम लिया । उसने अपनी आंखें बंद कर ली। मेरे हों� उसके हों� ो की तरफ़ झुकने लगे। हमारे हों� आपस में मिल गये। मेरे हाथ उसके उरोजों से चिपक गये। मैंने रीता उरोजों को मसलना चालू कर दिया। उसके मुख से सिसकारी निकल पड़ी।


"उफ़्फ़ बस करो....क्या कर रहे हो...."


मैंने उसके हाथ पकड़े और बाथरूम में ले आया.... और उससे लिपट गया.... उसके अंगों को बेतहाशा मसलने लगा।


" छोड़ो ना....ये क्या कर रहे हो...." उसने मुझसे और चिपकते हुये कहा। फिर एकएक दूर हटते हुए मुझ पर तिरछी नज़र डालते हुए शरमा कर भाग गई।


मैंने बंटी को उ� ाया। उसने उ� कर कपड़े पहने और नाश्ता किया और चला गया। सारा काम निपटा कर मैं बाथ रूम में नहाने चला गया। बंटी के जाने के बाद रीता वापस आ गई।


उसने मुझे धीरे से आवाज दी। मैंने कहा," यहीं आ जाओ.... बाथ रूम में !"


"उसने मुझे बाथ रूम में अन्दर झांका। और मुझे देखती ही रह गई। मैं नंगा नहा रहा था। मेरा लण्ड तो वैसे ही खड़ा था। मुझे देख कर उसने अपना मुंह हाथों में छिपा लिया। मैंने उसने हाथो को हटा कर उसे चूम लिया और उसके हाथ को अपने लण्ड पर रख दिया-"रीता....प्लीज पकड़ लो इसे...."


रीता ने शरमाते हुए मेरा लण्ड पकड़ लिया और झट से मुझसे लिपट गई। मैंने उसे झरने के नीचे खींच लिया। वो भीगने लगी। वो सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाऊज में थी। उसने अंदर ब्रा नहीं पहनी थी। भीगते ही उसके चूंचियां ब्लाऊज में से दिखने लगी।


मैंने उसके बोबे पर अपना हाथ रख दिया और होले होले दबाने दबाने लगा। उसका पेटीकोट का नाड़ा मैंने खोल दिया। पेटीकोट नीचे पांवो के पास गिर पड़ा। दूसरे ही पल मैंने उसका ब्लाऊज उतार दिया। उसकी आंखे बन्द थी। उसने अपने आप को पूरा समर्पित कर दिया था।


झरने के नीचे मेरा लण्ड उसकी चूत से रगड़ खाने लगा था। वो भी अपनी चूत को मेरे लण्ड से चिपका रही थी। मैंने उसे घुमा दिया और उसकी पी� से चिपक गया। मुझे उसकी गोल गोल गाण्ड बहुत प्यारी लगती थी। मैंने अपना लण्ड उसकी चूतड़ों में घुसा दिया। उसने अपनी गाण्ड ढीली छोड़ दी। पानी हमारे शरीर पर गिर रहा था। मैंने उसकी गीली गाण्ड में अपना लण्ड दबा दिया। लण्ड उसकी गाण्ड के छेद में घुसता चला गया। वो सिसक उ� ी। जरा सा और जोर लगा कर लण्ड को पूरा अन्दर तक बै� ा दिया।


मेरा लण्ड मी� ी गुदगुदी से भर गया। मैंने उसके बोबे पकड़ कर उसका शरीर अपने से चिपटा लिया। उसकी आंखे अभी भी बन्द थी। अपनी गाण्ड में वो लण्ड का पूरा आनन्द ले रही थी। मैंने पीछे से धक्के मारना जारी रखा। मैंने अब एक हाथ छोड़ कर उसकी चूत पकड़ ली और दबा दी।


"इसे छोड़ो विनोद.... वरना मैं झड़ जाऊंगी........"


मुझे लगा वो उत्तेजित तो पहले ही से थी। कहीं सच ही में ना झड़ जाये। मैंने अपना लण्ड उसकी गाण्ड से निकाला और उसे अपनी बाहों में उ� ा कर बिस्तर पर ले आया। उसे सीधा लेटा कर मैं उस पर चढ गया। और उसके शरीर पर अपना बोझ डाल दिया। उसने भी मुझे अपने दोनो हाथों से कस लिया। उसके हों� ो पर मैंने अपने हों� रख दिये। और कमर उ� ा कर लण्ड उसकी चूत में पेल दिया। उसके मुख से एक प्यारी सी सिसकारी निकल पड़ी,"मेरे राजा.... हाय.... इसी का इंतज़ार था.... हाय मेरी चूत को अब शांति मिली...."


मेरा लण्ड बुरी तरह से उतावला हो रहा था। मैंने भी अब बेरहमी से उसे चोदना चालू कर दिया। दोनों की कमर तेजी से चल रही थी। लग रहा था कि जनम जनम से प्यासी हो। दोनों के मुख से सुख भरी चीखें निकल रही थी। अब रीता की बारी थी उसने कोशिश की कि वो मेरे ऊपर आ जाये।


मैंने उसका इशारा समझ लिया और एक पलटी मार कर उसे अपने ऊपर चढा लिया। रीता ने अपनी चूत में सट से लण्ड वापस डाल लिया और और पांव सीधे करके मेरे पर लेट गई। उसकी कमर धीरे धीरे चल रही थी। उसने पांव पास करके अपनी चूत तंग कर ली थी। अच्छी तेज रगड़ लग रही थी। मेरा सुपाड़ा घर्षण से तेज उत्तेजना दे रहा था।


रीता बोली," राजा.... मेरी चूंचियां मसल दो.... निपल खींचो.... हाय जल्दी करो...."


मैं अब निर्दयता से उसके बोबे मसकने लगा.... निपल खींच खींच कर मलने लगा। वो निहाल हो गई। मस्ती में उसकी कमर तेज चलने लगी।

"हाय.... और जोर से.... मेरे राजा.... चोद दो मुझे............ सारा निकाल दो मेरा कस बल...."


"मेरी रानी.... लगा.... जरा जोर से धक्का लगा.... देख मेरा लण्ड तेरी चूत का कैसा प्यासा हो रहा है...."


"हाय रे....विनोद.... मुझे कैसा कैसा लग रहा है.... मैया री.... चुद गई रे मैं तो...."


मुझे लगने लगा कि रीता चरमसीमा पर पहुंच चुकी है। चूत काफ़ी पानी छोड़ रही थी। फ़च फ़च की आवाजें तेज हो चली थी। उसकी मेरे शरीर पर पकड़ तेज होने लगी थी।


"येएएहऽऽ.... मेरे राजा.... ईईईईह्ह्ह्ह्ह्ह्ह्.... चुद गई....चुद गई.... हाय्.... ओऽऽऽऽह .... माई रेऽऽऽऽऽ........ गई मैं तो.... विनोद॥.... निकल गई.... हाय........ ये निकला....निकला....हाआईईईई रे...."


लगभग चीखती सी रीता झड़ने लगी.... मैंने भी अपने लन्ड को उसकी चूत में गड़ा कर झड़ने की कोशिश करने लगा.... पर नहीं निकला। वो झड़ती रही और मेरे शरीर पर निढाल सी पड़ गई। मैंने पलटी मार कर उसे फिर से नीचे ले लिया और उसकी जांघों पर बै� गया........ और मु� मारने लगा। तेज पिचकारी के साथ मेरा वीर्य छूट पड़ा तो उछल कर रीता के उरोजों पर जा गिरा। उसने हाथ से वीर्य अपने बोबे पर फ़ैला दिया। मेरा लण्ड झटके दे दे कर वीर्य छोड़ रहा था। अन्त में रीता ने मेरा लौड़ा पकड़ कर बचा खुचा वीर्य भी निचोड़ लिया। मैं उसके ऊपर से हट गया और बिस्तर से नीचे आ गया। रीता भी कुछ देर बाद बिस्तर पर बै� गई


"विनोद.... तुम तो कमाल के हो.... मेरी तो पूरी जान ही निकाल दी...."


"नहीं रीता.... तुमने तो मुझे आज निचोड़ डाला.... मेरी तो आज जिन्दगी सफ़ल हो गई...."


रीता हंसने लगी। मैंने कहा - "आओ अब नहा लेते हैं....."


हम दोनो शावर के नीचे जा कर खड़े हो गये.... और नहाने लगे.... जाने कब हम फिए होश खो बै� े.... और हमारे शरीर फिर से चिपकने लगे.... लण्ड खडा हो गया.... रीता मेरी बाहों में कसने लगी.... लन्ड एक बार फिर रीता की कोमल चूत में घुस पड़ा........ और ....और....दोनों फिर से सिसकारियां भरने लगे.....

Last edited by neerathemall : 9th April 2013 at 07:12 PM.

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भीगा बदन






,जब मैं कुवांरी थी तब मेरी चुदने की इच्छा कम होती थी। क्यूंकि मुझे इस बारे में अधिक नहीं मालूम था। आज मेरी शादी हुये लगभग पांच साल हो चुके हैं, मैं बेशर्मी की हदें पार करके सभी तरीको से अपने पति से चुदवा चुकी हूँ।

जी हां ! बिल्कुल अनजान बन कर ! भोली बन कर ! और मासूम बन कर ... ! जैसे कि मैं सेक्स के बारे में कुछ नहीं जानती हूं। यही भोलापन, मासूमियत उनके लण्ड को खड़ा कर चोदने पर मजबूर कर देती थी। आप ही बताईये, लड़कियां जब भोली बन कर, अनजान बनकर और मासूम सा चेहरा लेकर लण्ड लेती हैं तब पति को लगता है कि मेरी बीवी सती सावित्री है ...

पर वो क्या जाने, हम लोग भोली बनकर ऐसे ऐसे मोटे मोटे और लम्बे लण्ड डकार जाती हैं कि उनके फ़रिश्तों तक को पता नहीं चल पाता है।

पर अब बड़ी मुश्किल आन पड़ी है। वो छ्ह माह के लिये कनाडा चले गये हैं ... मुझे यहां अकेली तड़पने के लिये। पर हां ! यह उनका उपकार है कि मेरी देखभाल करने के लिये उन्होंने अपने दोस्त के बेटे दीपू को कह दिया था कि वह मेरा ख्याल रखे।

जानते हैं आप, उसने कैसा ख्याल रखा ... मुझे चोद चोद कर बेहाल कर दिया ... नए नए तरीकों से ! मुझे खूब चोदा ...

क्या हुआ था आप जानना चाहेंगे ना ...

मेरे पति के कनाडा जाने के बाद रात को दीपू खाना खा कर मेरे यहां सोने के लिये आ जाता था।

गर्मी के दिन थे ... मैं अधिकतर छत पर ही अकेली सोती थी। कारण यह था कि रात को अक्सर मेरी वासना करवटें लेने लगती थी। बदन आग हो जाता था। मैं अपना जिस्म उघाड़ कर छत पर बेचैनी के कारण मछली की तरह छटपटाने लग जाती थी। पेटीकोट ऊपर उठा कर चूत को नंगी कर लेती थी, ब्लाऊज उतार फ़ेंकती थी। ठण्डी हवा के मस्त झोंके मेरे बदन को सहलाते थे। पर बदन था कि उसमें शोले और भड़क उठते थे। मुठ मार मार कर मैं लोट लगाती थी ... फिर जब मेरे शरीर से काम-रस बाहर आ जाता था तब चैन मिलता था।

आज भी आकाश में हल्के बादल थे। हवा चल रही थी ... मेरे जिस्म को गुदगुदा रही थी। एक तरावट सी जिस्म में भर रही थी। मन था कि उड़ा जा रहा था। उसी मस्त समां में मेरी आंख लग गई और मैं सो गई। अचानक ऐसा लगा कि मेरे शरीर पर पानी की ठण्डी बूंदे पड़ रही हैं। मेरी आंख खुल गई। हवा बन्द थी और बरसात का सा मौसम हो रहा था। तभी टप टप पानी गिरने लगा। मुझे तेज सिरहन सी हुई। मेरा बदन भीगने लगा। जैसे तन जल उठा।

बरसात तेज होती गई ... बादल गरजने लगे ... बिजली तड़पने लगी ... मैंने आग में जैसे जलते हुये अपना पेटीकोट ऊंचा कर लिया, अपना ब्लाऊज सामने से खोल लिया। बदन जैसे आग में लिपट गया ...

मैंने अपने स्तन भींच लिये ... और सिसकियाँ भरने लगी। मैं भीगे बिस्तर पर लोट लगाने लगी। अपनी चूत बिस्तर पर रगड़ने लगी। इस बात से अनजान कि कोई मेरे पास खड़ा हुआ ये सब देख रहा है।

"रीता भाभी ... बरसात तेज है ... नीचे चलो !"

मेरे कान जैसे सुन्न थे, वो बार बार आवाज लगा रहा था।

जैसे ही मेरी तन्द्रा टूटी ... मैं एकाएक घबरा गई।

"दीपू ... तू कब आया ऊपर ... " मैंने नशे में कहा।

"राम कसम भाभी मैंने कुछ नहीं देखा ... नीचे चलो" दीपू शरम से लाल हो रहा था।

"क्या नहीं देखा दीपू ... चुपचाप खड़ा होकर देखता रहा और कहता है कुछ नहीं देखा" मेरी चोरी पकड़ी गई थी। उसके लण्ड का उठान पजामें में से साफ़ नजर आ रहा था। अपने आप ही जैसे वह मेरी चूत मांग रहा हो। मैंने उसका हाथ पकड़ कर उसे अपनी ओर खींच लिया और उसे दबोच लिया ... कुछ ही पलों में वो मुझे चोद रहा था। अचानक मैं जैसे जाल में उलझती चली गई। मुझे जैसे किसी ने मछली की तरह से जाल में फ़ंसा लिया था, मैं तड़प उठी ... तभी एक झटके में मेरी नींद खुल गई।

मेरा सुहाना सपना टूट गया था। मेरी मच्छरदानी पानी के कारण मेरे ऊपर गिरउ गई थी। दीपू उसे खींच कर एक तरफ़ कर रहा था। मेरा बदन वास्तव में आधा नंगा था। जिसे दीपू बड़े ही चाव से निहार रहा था।

"भाभी ... पूरी भीग गई हो ... नीचे चलो ... " उसकी ललचाई आंखे मेरे अर्धनग्न शरीर में गड़ी जा रही थी। मुझ पर तो जैसे चुदाई का नशा सवार था। मैंने भीगे ब्लाऊज ठीक करने की कोशिश की ... पर वो शरीर से जैसे चिपक गया था।

"दीपू जरा मदद कर ... मेरा ब्लाऊज ठीक कर दे !"

दीपू मेरे पास बैठ गया और ब्लाऊज के बटन सामने से लगाने लगा ... उसकी अंगुलियाँ मेरे गुदाज स्तनों को बार बार छू कर जैसे आग लगा रही थी। उसके पजामे में उसका खड़ा लण्ड जैसे मुझे निमंत्रण दे रहा था।

"भाभी , बटन नहीं लग रहा है ... "

"ओह ... कोशिश तो कर ना ... "

वह फिर मेरे ब्लाऊज के बहाने स्तनों को दबाने लगा ... जाने कब उसने मेरे ब्लाऊज को पूरा ही खोल दिया और चूंचियां सहलाने लगा। मेरी आंखे फिर से नशे में बंद हो गई। मेरा जिस्म तड़प उठा। उसने धीरे से मेरा हाथ लेकर अपने लण्ड पर रख दिया। मैंने लण्ड को थाम लिया और मेरी मुठ्ठी कसने लगी।

बरसात की फ़ुहारें तेज होने लगी। दीपू सिसक उठा। मैंने उसके भीगे बदन को देखा और जैसे मैं उस काम देवता को देख कर पिघलने लगी। चूत ने रस की दो बूंदें बाहर निकाल दी। चूंचियां का मर्दन वो बड़े प्यार से कर रहा था। मेरे चुचूक भी दो अंगुलियों के बीच में सिसकी भर रहे थे। मेरी चूत का दाना फ़ूलने लगा था। अचानक उसका हाथ मेरी चूत पर आ गया और दाने पर उसकी रगड़ लग गई।

मैं हाय करती हुई गीले बिस्तर पर लुढ़क गई। मेरे चेहरे पर सीधी बारिश की तेज बूंदे आ रही थी। गीला बिस्तर छप छप की आवाज करने लगा था।

"रीता भाभी ... आप का जिस्म कितना गरम है ... " उसकी सांसे तेज हो गई थी।

"दीपू ... आह , तू कितना अच्छा है रे ... " उसके हाथ मुझे गजब की गर्मी दे रहे थे।

"भाभी ... मुझे कुछ करने दो ... " उसका अनुनय विनय भरा स्वर सुनाई दिया।

" कर ले, सब कर ले मेरे दीपू ... कुछ क्यों ... आजा मेरे ऊपर आ जा ... हाय, मेरी जान निकाल दे ... "

मेरी बुदबुदाहट उसके कानो में जैसे अमृत बन कर कर उतर गई। वो जैसे आसमान बन कर मेरे ऊपर छा गया ... नीचे से धरती का बिस्तर मिल गया ... मेरा बदन उसके भार से दब गया ... मैं सिसकियाँ भरने लगी। कैसा मधुर अनुभव था यह ... तेज वर्षा की फ़ुहारों में मेरा यह पहला अनुभव ... मेरी चूत फ़ड़क उठी, चूत के दोनों लब पानी से भीगे हुये थे ... तिस पर चूत का गरम पानी ... बदन जैसे आग में पिघलता हुआ, तभी ... एक मूसलनुमा लौड़ा मेरी चूत में उतरता सा लगा। वो दीपू का मस्त लण्ड था जो मेरे चूत के लबों को चूमता हुआ ... अन्दर घुस गया था।

मेरी टांगे स्वतः ही फ़ैल गई ... चौड़ा गई ... लण्ड देवता का गीली चूत ने भव्य स्वागत किया, अपनी चूत के चिकने पानी से उसे नहला दिया। दीपू लाईन क्लीअर मान कर मेरे से लिपट पड़ा और चुम्मा चाटी करने लगा ... मैं अपनी आंखें बंद करके और अपना मुख खोल कर जोर जोर से सांस ले रही थी ... जैसे हांफ़ रही थी। मेरी चूंचियां दब उठी और लण्ड मेरी चूत की अंधेरी गहराईयों में अंधों की तरह घुसता चला गया। लगा कि जैसे मेरी चूत फ़ाड़ देगा। अन्दर शायद मेरी बच्चेदानी से टकरा गया। मुझे हल्का सा दर्द जैसा हुआ। दूसरे ही क्षण जैसे दूसरा मूसल घुस पड़ा ... मेरी तो जैसे हाय जान निकली जा रही थी ... सीत्कार पर सीत्कार निकली जा रही थी। मैं धमाधम चुदी जा रही थी ... दीपू को शायद बहुत दिनों के बाद कोई चूत मिली थी, सो वो पूरी तन्मयता से मन लगा कर मुझे चोद रहा था। बारिश की तेज बूंदें जैसे मेरी तन को और जहरीला बना रही थी।

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दीपू मेरे तन पर फ़िसला जा रहा था। मेरा गीला बदन ... और उसका भीगा काम देवता सा मोहक रूप ... गीली चूत ... गीला लण्ड ... मैं मस्तानी हो कर लण्ड ले रही थी। मेरे

शरीर से अब जैसे शोले निकलने लगे थे ... मैंने उसके चूतड़ों को कस लिया और उसे कहा,"दीपू ... नीचे आ जाओ ... अब मुझे भी चोदने दो !"

"पर रीता भाभी, चुदोगी तो आप ही ना ... " दीपू वर्षा का आनन्द लेता हुआ बोला।

"अरे, चल ना, नीचे आ जा ... " मैं थोड़ा सा मचली तो वो धीरे से मुझे लिपटा कर पलट गया। अब मेरी बारी थी, मैंने चूत को लण्ड पर जोर दे कर दबाया। उसका मूसल नुमा लण्ड इस बार मेरी चूत की दीवारों पर रगड़ मारता हुआ सीधा जड़ तक आ गया। मेरे लटकते हुये स्तन उसके हाथ में मसले जा रहे थे। दीपू की एक अंगुली मेरे चूतड़ों की दरार में घुस पड़ी और छेद को बींधती हुई गाण्ड में उतर गई।

मैं उसके ऊपर लेट गई और अपनी चूत को धीरे धीरे ऊपर नीचे रगड़ कर चुदने लगी। बारिश की मोटी मोटी बूंदें मेरी पीठ पर गिर रही थी। मैंने अपना चेहरा उसकी गर्दन के पास घुसा लिया और आंखें बन्द करके चुदाई का मजा लेने लगी। हम दोनों जोर जोर से एक दूसरे की चूत और लण्ड घिस रहे थे ... मेरे आनन्द की सीमा टूटती जा रही थी। मेरा शरीर वासना भरी कसक से लहरा उठा था। मुझे लग रहा था कि मेरी रसीली चूत अब लपलपाने लगी थी। मेरी चूत में लहरें उठने लगी थी। फिर भी हम दोनों बुरी तरह से लिपटे हुये थे। मेरी चूत लण्ड पर पूरी तरह से जोर लगा रही थी ... बस ... कितना आनन्द लेती, मेरी चूत पानी छोड़ने लिये लहरा उठी और अन्ततः मेरी चूत ने पानी पानी छोड़ दिया ... और मैं झड़ने लगी। मैं दीपू पर अपना शरीर लहरा कर अपना रज निकाल रही थी।

मैं अब उससे अलग हो कर एक तरफ़ लुढ़क गई। दीपू उठ कर बैठ गया और अपने लण्ड को दबा कर मुठ मारने लगा ... एक दो मुठ में ही उसके लण्ड ने वीर्य छोड़ दिया और बरसात की मूसलाधार पानी के साथ मिल कहीं घुल गया। हम दोनों बैठे बैठे ही गले मिलने लगे ... मुझे अब पानी की बौछारों से ठण्ड लगने लगी थी। मैं उठ कर नीचे भागी। दीपू भी मेरे पीछे कपड़े ले कर नीचे आ गया।

मैं अपना भीगा बदन तौलिये से पोंछने लगी, पर दीपू मुझे छोड़ता भला। उसने गीले कपड़े एक तरफ़ रख दिये और भाग कर मेरे पीछे चिपक गया।

"भाभी मत पोंछो, गीली ही बहुत सेक्सी लग रही हो !"

"सुन रे दीपू, तूने अपनी भाभी को तो चोद ही दिया है , अब सो जा, मुझे भी सोने दे !"

"नहीं रीता भाभी ... मेरे लण्ड पर तो तरस खाओ ... देखो ना आपके चूतड़ देख कर कैसा कड़क हो रहा है ... प्लीज ... बस एक बार ... अपनी गाण्ड का मजा दे दो ... मरवा लो
प्लीज ... "


"हाय ऐसा ना बोल दीपू ... सच मेरी गाण्ड को लण्ड के मजे देगा ... ?" मुझे उसका ये प्रेमभाव बहुत भाया और मैंने उसके लण्ड पर अपनी कोमल और नरम पोन्द दबा दिये। उसका फिर से लण्ड तन्ना उठा।

" भाभी मेरा लण्ड चूसोगी ... बस एक बार ... फिर मैं भी आपकी भोसड़ी को चूस कर अपको मजा दूंगा !"

"हाय मेरे राजा ... तू तो मेरा काम देवता है ... "मैंने अपने चूतड़ों में से उसका लण्ड बाहर निकाल लिया और नीचे झुकती चली गई। उसका लण्ड आगे से मोटा नहीं था पर पतला था, उसका सुपाड़ा भी छोटा पर तीखा सा था, पर ऊपर की ओर उसका डण्डा बहुत ही मोटा था। सच में किसी मूली या मूसल जैसा था। मैंने मुठ मारते हुये उसे अपने मुख में समा लिया और कस कस कर चूमने लगी। मुझे भी लग रहा था कि अब दीपू भी मेरी भोसड़ी को चूस कर मेरा रस निकाले। मैंने जैसे ही उसका लण्ड चूसते हुये ऊपर देखा तो एक बार में ही वो समझ गया। उसने मुझे बिस्तर पर लेटा दिया और मेरी चूत पर उसके होंठ जम गये। उसकी लपलपाती हुई जीभ मेरी चूत के भीतरी भागों को सहला रही थी। जीभ की रगड़ से मेरा दाना भी कड़ा हो गया था। मैं सुख से सराबोर हो रही थी। तभी दीपू ने तकिया लेकर कहा कि अपनी चूतड़ के नीचे ये रख लो और गाण्ड का छेद ऊपर कर लो।

पर मैंने जल्दी से करवट बदली और उल्टी हो गई और अपनी चूत को तकिये पर जमा दी। मैंने अपनी दोनों टांगे फ़ैला कर अपना फ़ूल सा भूरा गुलाब खिला कर लण्ड़ को हाज़िर कर दिया। उसका मूसल जैसा लण्ड चिकनाई की तरावट लिये हुये मेरे गुलाब जैसे नरम छेद पर दब गया। मैंने पीछे घूम कर उसे मुस्करा कर देखा। दूसरे ही क्षण लण्ड मेरी गाण्ड पर घुसने के लिये जोर लगा रहा था। मैंने अपनी गाण्ड को ढीला छोड़ा और लण्ड का स्वागत किया। वो धीरे धीरे प्यार से अंधेरी गुफ़ा में रास्ता ढूंढता हुआ ... आगे बढ़ चला। मेरी गाण्ड तरावट से भर उठी। मीठी मीठी सी गुदगुदी और मूसल जैसा लण्ड, पति से गाण्ड मराने से मुझे इस लण्ड में अधिक मजा आ रहा था। उसके धक्के अब बढ़ने लगे थे। मेरी गाण्ड चुदने लगी थी।

मैं उसे और गहराई में घुसाने का प्रयत्न कर रही थी। मेरे चूतड़ ऊपर जोर लगाने लगे थे। दीपू ने मौका देखा और थोड़ा सा जोर लगा कर एक झटके में लण्ड को पूरा बैठा दिया। मैं दर्द से तड़प उठी।

"साला लण्ड है या लोहे की रॉड ... चल अब गाड़ी तेज चला ... "

वो मेरी पीठ पर लेट गया। उसके हाथ मेरे शरीर पर चूंचियाँ दबाने के लिये अन्दर घुस पड़े ... मैंने जैसे मन ही मन दीपू को धन्यवाद दिया। दोनों बोबे दबा कर उसकी कमर मेरी गाण्ड पर उछलने कूदने लगी। मैं खुशी के मारे आनन्द की किलकारियाँ मारने लगी। सिसकी फ़ूट पड़ी ... । उसके सेक्सी शरीर का स्पर्श मुझे निहाल कर रहा था। मेरी चूंचियाँ दबा दबा कर उसने लाल कर दी थी। उसका लण्ड मेरी गाण्ड की भरपूर चुदाई कर रहा था। मेरी चूत भी चूने लग गई थी। उसमें से भी पानी रिसने लगा था। मेरी गाण्ड में मनोहारी गुदगुदी उठ रही थी, अब तो मेरी चूत में भी मीठी सी सुरसराहट होने लग गई थी। मेरी चूत लण्ड की प्यासी होने लगी। हाय ... कितना अच्छा होता कि अब ये लण्ड मेरी चूत की प्यास बुझाता ... मैंने गाण्ड मराते हुये घूम कर दीपू को आंख से इशारा किया।

"आह्ह नहीं रीता भाभी ... तंग गाण्ड का मजा ही जोर का है ... पानी निकालने दो प्लीज !"

"हाय रे फिर कभी गाण्ड चोद लेना, अभी तो मेरी चूत मार दे दीपू !"

"तो ये ले भोसड़ी की ... हाय भाभी सॉरी ... गाली मुँह से निकल ही गई !"

"नहीं रे चुदाते समय सब कुछ भला सा लगता है ... " फिर मेरे मुख से सीत्कार निकल पड़ी। उसने अपना लण्ड मेरी चूत में जोर से घुसेड़ दिया था ... बस लण्ड का स्पर्श जैसे ही चूत को मिला ... मेरी चूत फ़ड़क उठी। लड़कियों की चूत में लण्ड घुसा और वो सीधे स्वर्ग का आनन्द लेने लगती है। मेरी चूत की कसावट बढ़ने लगी ... वो मेरे पीठ पर सवार हो कर चूत चोद रहा था। उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा ... शायद लण्ड को अन्दर पेलने में तकलीफ़ हो रही थी। मेरी गाण्ड ऊंची होते ही उसका लण्ड चूत में यूं घुस गया जैसे कि किसी बड़े छेद में बिना किसी तकलीफ़ सीधे सट से मोम में घुस गया हो। मेरी चूत बहुत गीली हो गई थी। किसी बड़े भोसड़े की तरह चुद रही थी ... उसने मेरे स्तन एक बार फिर से पकड़ते हुये अपनी ओर दबा लिये। मुझे चुचूकों को दबाने से और चूत में मूसल की रगड़ से मस्ती आने लगी। उसका लण्ड मेरी चूत को तेजी से झटके मार मार कर चोद रहा था। अचानक उसका चोदने का तरीका बदल गया। करारे शॉट पड़ने लगे। मेरी चूत मे तेज आनन्द दायक खुजली उठने लगी। लगा कि चूत पानी छोड़ देगी।

"मां ... मेरी ... दीईईईपूऊऊऊ चोद मार रे ... निकाल दे फ़ुद्दी का पानी ... हाय राम जीऽऽऽऽ ... मेरी तो निकल गई राजा ... आह्ह्ह्ह" और मैंने अपना पानी छोड़ दिया ...

उसका हाथ स्तनों पर से खींच कर हटाने लगी ...

"बस छोड़ दे अब ... मत कर जल रही है ... " पर उसे कहाँ होश था ... मैं दर्द के मारे चीख उठी और दीपू ... उसका माल छूट गया ... उसकी चीख ने मेरी चीख का साथ दिया ...

उसका लण्ड बाहर निकल आया और अपना वीर्य बिस्तर पर गिराने लगा। कुछ देर तक यूं ही माल निकलने का सिलसिला चलता रहा। फिर उस बिस्तर से उठे और हम दोनों दूसरे बिस्तर पर नंगे ही जाकर लेट गये ... और फिर जाने कब हम दोनों ही सो गये।

मुझे लगा कि कोई मुझे बुरी तरह झकझोर रहा है ... मेरी आंख खुल गई ... सवेरा हो चुका था ... पर ये दीपू ... मेरी चूत में अपना लण्ड घुसाने का प्रयत्न कर रहा था ... मुझे हंसी आ गई ... मैंने अपने दोनों टांगें पसार दी और उसका लण्ड अपनी चूत में समेट लिया। उसे अपने से कस कर सुला लिया। मैं सुबह सवेरे फिर से चुद रही थी ... मुझे अपनी सुहागरात की याद दिला रही थी ... सोना नहीं ... बस चुदती रहो ... सुबह चुदाई, दिन को चुदाई रात को तो पूछो मत ... शरीर की मां चुद जाती थी ... हाय मैंने ये क्या कह दिया ...

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कामाग्नि




,हम सभी लोग दर्शन कर के वापस आ रहे थे। हम सभी लोग एक ट्रक में थे। नीचे गद्दे बिछाए हुए थे। रात हो चुकी थी। बरसात का मौसम होने की वज़ह से ट्रक पूरा ढक दिया गया था। मैं सबसे पीछे लेटा हुआ था। मेरे सामने मेरी मौसी लेटी हुईं थीं। वहाँ अँधेरा था।


मेरी मौसी बहुत मोटी है और हॉट भी। वह विधवा है, उनके पति का देहांत १० साल पहले हो चुका था। सभी लोग सो चुके थे। मैंने सोने के लिए जैसे ही पैर आगे किए तो मेरा पैर मौसी की झाँटों पर जा लगा। पाँव का स्पर्श वहाँ होते ही मेरे शरीर में बिजली दौड़ गई और मेरा ७ इंच का लंड फटाक् से खड़ा हो गया।

अब मैं मौसी को चोदने के बारे में सोचने लगा था। फिर मैंने अपने पैर को और आगे बढ़ाकर अपने पाँव के अँगूठे से ही उसकी चूत को महसूस किया और दबाया। मौसी जाग गईं। मैं डर गया कि वो कहीं डाँटे ना, मैंने जल्दी से अपने पाँव पीछे सिकोड़ लिए। थोड़ी देर ऐसे ही सोता रहा। कुछ देर के बाद मैंने फिर से अपने पाँवों को उनकी चूत से लगाया तो उन्होंने कुछ नहीं कहा। मेरी हिम्मत बढ़ी, और मैंने पाँव के अँगूठे से उनकी चूत को दबाया, उनके मुँह से सिसकारी निकल पड़ी और उन्होंने अपने पाँव और फैला दिए।

अब मैं उनके पास जाकर लेट गया और उनकी चूचियाँ ऊपर से ही दबाने लगा। थोड़ी देर दबाने के बाद मैंने अपनी एक उँगली उनकी चूत में डाल दीं। वह आहें भरने लगीं। तभी ट्रक में से कुछ और आवाज़ आई, तो हमने समझा कि शायद कोई और भी जाग गया है, तो मैं तो जल्दी से आँखें बन्द करके सो गया।

हम लोग जल्दी ही घर पहुँच गए। मैंने सोच लिया था कि उन्हें अब घर में चोदना ही है। दूसरे दिन मौसी अपने घर जाने के लिए सामान बाँध रहीं थीं। वह हमारे यहाँ से ५० किलोमीटर दूर रहतीं थीं। उन्होंने मेरी माँ को कहा कि साहिल को भी साथ ले चलती हूँ। थोड़े दिन मेरे पास रहने दो, तो माँ भी राज़ी हो गईं।

मैं तो खुश हो गया था और जल्दी से अपना सामान भी बाँध लिया और मौसी के साथ चल पड़ा।

मैं आपको बता दूँ कि मौसी की दो बेटियाँ हैं। दोनों की शादी हो चुकी है, इसलिए वह अकेली ही रहतीं हैं। उनका बंगला काफी बड़ा है। हम लोग उनके घर पहुँचे। मैं जाकर तरोताज़ा होकर बेडरूम मे आ गया और टीवी देखने लगा, मौसी किचन में खाना बनाने लगी। थोड़ी देर के बाद मौसी की आवाज़ आई कि खाना खा लो।

हमने साथ में खाना खाया। खाना खत्म होने के बाद मौसी ने कहा कि तुम बेडरूम में जाओ, मैं बर्तन साफ़ करने के बाद आती हूँ।

मौसी जब आईं तो वह कफ़ी सुन्दर लग रहीं थीं। उन्होंने गुलाबी रंग की नाईटी पहनी थी। आते ही मौसी ने दरवाज़ा बन्द कर लिया और मुझे चूमने लगी। मैं भी उन्हें चूमने लगा। चूमते-चूमते हम दोनों ने एक दूसरे के कपड़े भी उतार फेंके। अब हम दोनों पूरे नंगे थे। मौसी मेरे लंड को देखकर हैरान थीं - "शाही, तेरा तो काफी बड़ा है! तेरे मौसा जी के दो लण्डों के बराबर है।" यह कहकर उन्होंने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगीं।

चूसते-चूसते वह कभी-कभी दाँत भी गड़ा देतीं, वह पागलों की तरह चूसे जा रहीं थीं। मैंने कहा - "मौसी, मौसाजी के मरने के बाद क्या तुमने कभी सेक्स नहीं किया है?"

"१० साल बाद आज पहली बार मर्द का लंड ले रही हूँ" - उन्होंने बताया।

"१० साल तुमने कैसे चलाया?" - मैंने पूछा।

तो वह उठी और बिस्तर के नीचे से एक कृत्रिम लंड निकाल और कहने लगी, "यही मेरा पति है जो हर रात मुझे शांत करता था।"

अब हम दोनों 69 की मुद्रा में आ गए और एक-दूसरे को चाटने लगे। मौसी की चूत एकदम साफ थी। उसपर एक बाल भी नहीं था। क़रीब १० मिनट चाटने के बाद मौसी को मैंने सीधा करके मैं उनके ऊपर आ गया और उनकी चूत पर अपना लंड रख कर रगड़ने लगा। मौसी शशश्सस्सस्सससस... सिसकारियाँ भरने लगीं और कहने लगी, शाही अब रहा नहीं जाता... जल्दी डाल दे और मेरी चूत फाड़ दे।

मैंने अपना लंड मौसी की चूत में पेल दिया, और चोदने लगा। लगभग ५ मिनट चोदने के बाद वह झड़ गईं। फिर मैंने उन्हें कुतिया की मुद्रा में आने को कहा और उनकी गाँड दबाने लगा। उन्होंने कहा, "चूत में ही डालो ना!"

मौसी मैं तो गाँड ही मारूँगा" - मैंने कहा।

"ऐसा तो तेरे मौसा ने भी कभी नहीं किया। बहुत दर्द होगा।"

"मौसी मैं आराम से डालूँगा।" - यह कहकर मैंने अपने लंड के सुपाड़े को उनकी गाँड की छेद पर रखकर एक झटका मारा तो मौसी चिल्लाने लगी और कहने लगी, "बाहर निकाल..."

पर मैं कहाँ निकालने वाला था। दर्द की वज़ह से मौसी की आँखों से आँसू आ रहे थे। मैं थोड़ी देर रुक गया और आहिस्ता-आहिस्ता झटके देने लगा। जब उनका दर्द कम हुआ तो मैंने अपनी गति बढ़ा दी। थोड़ी ही देर बाद मैं झड़ गया और बगल में आकर लेट गया।

उस रात मौसी को मैंने ५ बार चोदा और १५ दिनों तक वहीं रहकर उनकी जमकर चुदाई करता रहा। कई बार हमने ब्लू-फिल्में देखते हुए भी चुदाई का आनन्द उठाया। फिर मैं घर वापस आ गया। मगर फिर भी जब भी मौका मिलता है, मैं उनके घर जाकर ज़बर्दस्त चुदाई कर आता हूँ।

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बारिश मे भीग गई थी.मम्मी की कजिन












,ये कहानी आज से क़रीब १८ साल पहले की है..तब मै इंजीनियरिंग के अन्तिम वर्ष मे था, उस दिन रविवार था मेरे माता पिता और बहिन एक रिश्तेदार की यहाँ जाने वाले थे..मै उनके साथ नही गया..क्युकि मेरे टेस्ट चल रहे थे..वैसे पेरी तय्यारी पूरी थी..और ना जाने का कारण दूसरा ही था. दरअसल पिछले तीन दिनों से मै अपने लंड मे बहुत तनाव महसूस कर रहा था.. मेरे क़रीब सभी दोस्तों की गर्ल फ्रेंड थी और वो सेक्स का मजा भी लेते थे..लेकिन मै थोड़ा डरपोंक किस्म का था..इसलिए किसी लड़की से मेरी दोस्ती नही थी..और बाहर सेक्स करके बीमारी का खतरा था..सो मै उस दिन घर पर रूका .सबके जाते ही मै विडियो शॉप से एक इंडियन ब्लू फ़िल्म ले आया..लौटते वक्त अचानक बारिश शुरू हो गई मै पूरा भींग गया ..घर पहुंच कर मैंने अपने सारे कपड़े उतार दिए..और बिल्कुल नंगा होकर फ़िल्म चालू कर दी..फ़िल्म इंडियन थी और उसमे नायिका भी देसी थी..साड़ी वाली फ़िल्म के शुरू मे चूमा चाटी के बाद फ़िल्म के हीरो ने लड़की की साड़ी खोलनी शुरू की..ये मेरा सबसे प्यारा काम था..मुझे साड़ी वाली औरतों को देख कर ज्यादा लंड सनसनाता है..फ़िल्म मे उस लड़की की बहुत अच्छे से चुदाई दिखाई थी जिसे देख कर मेरा लंड भी फन फनाकर उछल रहा था..मै उसे हाथ से सहलाता रहा..इसी तरह पूरी पिक्चर मैंने देख ली.. अब मै अपने लंड को जोर जोर से हिला रहा था..उसी वक्त दरवाजे की बेल बजी..मै डर गया..जल्दी से टीवी बंद किया मेरा बाथ रॉब पहना और लंड को दबाते हुए दरवाजे के पास आया...फ़िर दरवाजा खोला..
दरवाजा खोलने के बाद मेरे होश उड़ गए..सामने मम्मी की कजिन याने मेरी मौसी खड़ी थी..शायद वो कही आस पास ई थी और बारिश मे भीग गई थी..उनकी उमर ज्यादा नही सिर्फ़ ३८ साल की थी..लेकिन वो उतनी लगती नही थी..मेरे साथ तो उनका मजाक का भी रिश्ता था..उनकी १२ साल की एक लड़की थी और वो ख़ुद तलाकशुदा थी..वैसे तो मम्मी की बहिन होने के नाते मेरी मौसी ही थी..लेकिन आज उन्होंने हरे रंग की जो शिफान की साड़ी पहनी हुयी थी वो पानी से उनके पोर्रे बदन से चिपकी हुयी थी और उनके छरहरे बदन को उजागर ही कर रही थी..शरीर हा हर कटाव हर गोलाई साफ नजर आ रही थी..और इसने मेरे लिए आग मे घी का काम किया.., उन्होंने कहा वो किस इंटरव्यू मे जा रही है.. और ये नौकरी उनके लिए बहुत जरुरी है..इसलिये वो कपड़े बदलना चाहती है..उनके ब्लाउज के अन्दर से काली ब्रा साफ नजर आ रही थी, वैसे तो उनके मम्मे मुझे कभी ख़ास नही लगे लेकिन आज वो मुझे बुला रहे थे..ब्लाउज पुरा गीला हो चुका था, और चुन्चियो के निपल भी अपनी मौजूदगी का अहसास दिला रहे थे..मेरा लैंड काबू से बाहर होता जा रहा था..जिसे मैंने दबाये रखा था..
वो सीधी बाथरूम की तरफ़ जाने लगी..मैंने देखा उनके मांसल नितम्ब मटकते हुए हिल रहे थे..गांड का कटाव उफ़.. और वो पतली सी कमर..दिल कर रहा था अभी जा के पीछे से जकड लूँ..और चूमते हुए उन्हें बेडरूम मे ले जाकर जबर्दस्त चुदाई कर दूँ..मई जनता था की मेरे मन मे ग़लत और गंदे ख्यालात आ रहे है..लेकिन..शायद उन्हें भी मेरे सामने इस तरफ़ थोड़ी शर्म आई होगी..लेकिन लेकिन मेरे दिमाग ने काम करना बंद कर दिया था..अब तो सिर्फ़ लंड ही सोच रहा था..और उसे चूत के सिवा कुछ नही सूझ रहा था.. तो क्या ग़लत है और क्या सही ये मुझे समझ मे नही आ रहा था..
जैसे ही उन्होंने बाथरूम मे जा कर दरवाजा बंद किया..मैं सोचने लगा की मौसी नंगी होने से कैसी दिखाती होगी..और ये सोच कर ही लंड उछल पडा..किसी तरह उसे दबाया फ़िर आंखो के सामने उनकी नोंकदार चुंचिया आ गई..दिल कर रहा था की काश उन्हें पीछे से पकड़ लूँ और सामने हाथ बढ़ा कर मम्मे दबाऊ..फ़िर बिस्तर पर नंगी कर के अच्छे से चुदाई करूं ..मैंने आज से पहले उन्हें इस नज़र से कभी नही देखा था..आज मैं सारे रिश्ते भूल गया था मेरे सामने वो एक मादा थी और मैं एक कामांध नर जो उन्हें मसल के चोदना चाहता था..मेरी सोच जारी थी..
तभी वो बाथरूम से सिर्फ़ एक टॉवेल लपेट कर बाहर आई..जो की काफी छोटा था..और हमेशा बाथरूम मे टंगा रहता था..उसमे उनकी आधी चुंचिया ही ढँक पाई थी..उसके बीच की घाटी साफ दिखाई दे रही थी..और नीचे कमर से थोड़ा नीचे का भाग ढंका हुआ था.उनकी चूत से थोड़ा ऊपर तक..उनकी चिकनी और बाल रहित जान्घे और पैर एकदम खुले थे..मैं इस ख़्याल से ही रोमांचित हो गया की घर मे हम दोनों हे अधनंगे और अकेले थे..उनके बदन के हर अंग से सेक्स बरस रहा था..मैं मंत्रमुग्ध हो कर उनके इस अधनंगे हुस्न को निहार रहा था..
उनकी गोरी त्वचा और उसकी चिकनाई जैसे सिल्क का एक चादर हो..वो मेरे सामने खड़ी हुई और टॉवेल को एक हाथ से पकड़ा फ़िर मुझसे कहा की ,अम्मी के कप बोर्ड से एक ब्लाउज , ब्रा और साड़ी उन्हें निकाल के दूँ..
जहाँ खड़ी हो कर वो मुझसे बात कर रही थी वहीँ कोने मे एक लंबा मिरर लगा हुआ था और मैं उसने उनके दूधिया चूची को साइड से देख रहा था..मुझे उनके गहरे भूरे रंग के निपल भी दिख रहे थे..मैंने देखा उनके मम्मे एकदम एवरेज साइज़ के थे..और अभी तक लटके नही थे.. लेकिन बहुत ही गोलाई मे थे..मैंने उन्हें पूंछा और कुछ चाहिए..?
उन्होंने कहा उन्हें पैंटी भी चाहिए..लेकिन मेरी मम्मी की पैंटी उन्हें फीट नही होगी क्युकी मम्मी की गांड उनसे बहुत बड़ी है..चूँकि वो मुझसे खुली बात करती थी इसलिए ये बात उन्होंने हंसते हँसते मुझसे कही.और वो मुझे अभी भी अपने भांजे की नजर से देख रही थी..
लेकिन मैं आज उन्हें मौसी की नजर से नही देख पा रहा था..मेरे सामने तो बस एक औरत का जिस्म था आधा नंगा उफ़ उनके बदन की को मादक गोलाईयां नितम्बो का वो उभरापन स्तनों के बीच की घाटी..और केले के खंभे जैसी चिकनी गोरी गोरी जांघें ..ये नज़ारा देख कर मेरा लंड काबू से बाहर होता जा रहा था.. उस आईने मे मैं उन्हें नंगा ही कर चुका था..उन्हें मैं इस तरह देख रहा हु ये शायद अभी तक उन्होंने सोचा भी नही था..मैं अपनी मम्मी के कपबोर्ड के तरफ़ गया और साड़ी और ब्लाउज तो निकला लेकिन ब्रा मुझे वहाँ नही मिली..मैंने उनके तीन ब्रा धुलाई के कपडो के साथ देख चुका था..दरअसल मम्मी अपनी पैंटी और ब्रा किसी दुसरी जगह रखती थी जो मुझे मालूम नही थी..मैंने ऊपर के खाने मे टटोला तो उनकी पुरानी ब्रा और कुछ पुराने कपडे दिखे, जो की वो कभी पहनती नही थी,
और ये ब्रा बहुत ही पतले कपडे की थी उसका स्ट्रेप बहुत छोटा सा था और उसका एलास्टिक भी ख़राब हो चुका था..., मैंने वो मौसी को दिए मैं बाहर आ गया..थोड़ी देर मे मौसी ने मुझे बुलाया और दिखने लगी की वो ब्रा उनके शरीर पर कैसी लग रही है..उन्होंने ब्रा पहन रखी थी..और हंस रही थी..असल मे वो उन्हें ढीली हो रही थी और उनकी चुन्चियों से नीचे लटक रही थी..पूरी चुन्ची खुली थी सिर्फ़ घुन्डियाँ ढकी हुयी थी...वो भी ब्रा के उपरी भाग के टिके हुए रहने के कारण
ये देखकर मैं सच मे गरम हो गया..और लंड लोहे के रॉड जैसा सख्त हो गया.. मेरे होंतो पर नकली हँसी लाते हुए मैं खडा रहा..उन्होंने कहा की पहले मेरी मम्मी और उनके ब्रा साइज़ एक से थे..उनके 36 c थे मौसी के 36 d
उन्होंने हँसते हुए कहा "शादी के बाद तुम्हारी मम्मी ने बहुत ज्यादा सेक्स का मजा लिया लगता है..इसीलिये उसके साइज़ 42d हो गया है " ये सुन कर मैं एकदम संन्न हो गया क्युकी आज से पहले इस तरह की बात उन्होंने मेरे साथ कभी नही की थी
वो शायद भूल गई की वो आधी नंगी खड़ी है और मैं एक जवान लड़का हूँ...मेरे मुह मे पानी आने लगा उनका ये हुस्न देख कर..थोड़ी देर बाद मैं अपने बहन के कप बोर्ड से ३४ साइज़ के ब्रा उन्हें ला दी उन्होंने उसे मेरे सामने ही पहना और कहा "ये फ़िर भी ठीक है, क्युकी ये कम से कम इन्हे पकड़ कर तो रख सकती है, और जानते हो मुझे ऐसा लग रहा जैसे कोई इन्हे दबा रहा है.." ये सब सुन कर तो मैं अपने आप पर काबू नही रख पा रहा था..मैं मेरे लंड के झटके अब नही सम्हाल पा रहा था. मेरा 7.5 इंच का लंड मैं कैसे छुपाऊं ...और मैंने सिर्फ़ मेरा बाथरोब लपेटा हुआ था.. जो की सामने से खुला हुआ था..मैंने दोनों पैरों को एक के ऊपर एक रखा और सोफे पर बैठ गया..अब उह्नोने कपडे पहन लिए और जाने के लिए तैयार हुई और मुझसे कहा की दरवाजा बंद कर लो..जैसे ही मैं उठा..मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया..और उसने मेरे कड़क लंड को देखा जो की उनके तरफ़ निशाना ले रहा था..मैं थोड़ा सा निराश हो गया..उन्होंने कहा.. कोई बात नही अब मैं जा रही हूँ तुम अकेले हो चाहो तो दिन भर नंगे रहो कोई नही देखेगा..और एक अज्ज़ब से मुस्कराहट बिखेर कर चली गयी.
जैसे ही वो निकल गई मैंने दरवाजा बंद किया और फ़िर से वोही फ़िल्म चालू कर दिया और अपने लंड को हिलाने लगा..और फ़िर आज तो मैंने एक औरत की चूची और उसके नितम्ब और चिकने सेक्सी पैरो को देखा था..इसलिये मेरा लंड और ज्यादा कड़क हो रहा था, जैसे ही मैं झड़ने के क़रीब आया मुझे याद आया की मौसी के कपडे तो बाथरूम मे ही है.. मैंने लंड हिलाना बंद किया ..मेरे भीतर क्या हो रहा था ये आप समझ सकते है..इतने बार झड़ने के क़रीब आकर मैंने मूठ मरना रोका..मेरे भीतर लावा भड़क रहा था बाहर निकलने के लिए..मैं जल्दी से बाथरूम मे गया..और उसकी पैंटी और ब्रा को ले कर आया मैंने पैंटी को सूंघा बड़ी ही कामोत्तेजक सुगंध थी. उसमे बीच मे एक पीलापन था.जिस जगह उसकी चूत और गांड रहती है वहीँ पर..ब्रा मे भी पसीने की और पाउडर की मिली जुली खुशबू थी..मुझे ऐसा लगा मैं सच मे उसके मम्मे की खुशबू ले रहा हूँ.. मैंने उसकी पैंटी पहन ली उसके उस पैंटी के अन्दर मेरा खड़ा लंड टेंट बनाये हुए था..और वो मैंने आईने मे देखा..और मैं उसे वैसे ही मसलने लगा ..और उसकी पैंटी मे मैंने अपना पूरा माल निकाल दिया..पूरी पैंटी भर गई...मैं काफी देर से उत्तेजित था..इसलिये मेरा माल भी बहुत सारा निकला.. थोड़ी देर मैं वही पलंग पर लेटा रहा ..
लेकिन उठाने के बाद मुझे थोड़ी शर्म महसूस हुई और ग्लानी भी हुई..मुझे डर लगने लगा...मैं नही जनता था की पैंटी की ये हालत देख कर मौसी क्या सोचेंगी..क्या मेरे मम्मी डैडी से सब कह देंगी या मुझे झापड़ मरेंगी..और फ़िर कभी बात नही करेंगी..ये सब ख़्याल मेरे दिमाग मे आ रहे थे..मैंने दोनों को (पैंटी और ब्रा) पलंद के ऊपर सूखने के लिए रखे और पंखा तेज चला दिया..तभी मेरे मम्मी का फोन आया..उन्होंने सब ठीक है या नही ये पूंछा फ़िर कहा की वो लोग कहीँ और भी जाने वाले है और थोड़ी शॉपिंग भी करनी है इसलिये रात मे देर से लौटेंगे
इसके बाद मैं अपनी बेवकूफी के बारे मे सोचने लगा..क़रीब एक घंटे के बाद मौसी वापस आई. वो काफी खुश थी.उन्होंने बताया की उन्हें वो जॉब मिल गया है..मैंने उनकी तरफ़ देखा तो उनके ऊपर कुछ कीचड के छींटे दिखे..मैंने पूंछा ये कैसे हुआ ? उन्होंने कहा ..एक मोटरसाइकिल वाले ने तेजी से जाते हुए ये किया है..और अब वो नहाना चाहती है.
उन्होंने कहा की वो गरम पानी से नहायेंगी क्युकी बारिश गिरने से माहौल भी ठंडा हो गया था..इसलिये गिज़र चालू कर दूँ मैंने कहा गिज़र तो ख़राब है..उन्होंने कहा मैं बाथरूम मे हूँ तुम गैस पर पानी गरम कर के मुझे ला दो. मैंने गैस पर पानी गरम किया और फ़िर एक बाल्टी मे दाल कर बाथरूम के दरवाजे को खटखटाया ..उन्होंने दरवाजा खोला और कहा की अन्दर ला के रख दो..क्युकी मेरे कमर मे दर्द है और मैं बाल्टी नही उठा सकती..अब मेरा लंड फ़िर से खड़ा होने लगा..मुझे मालूम था की वो अन्दर किस हालत मे होंगी..और बाथ रूम का दरवाजा खोलते ही बांये तरफ़ कमोड था और कमोड की तरफ़ मुह किया तो दाहिनी तरफ़ नहाने की जगह थी..इसका मतलब मुझे बाल्टी अन्दर तक ले जाना था.. मैंने फ़िर पूंछा क्या मैं अन्दर आ जाऊं ? उन्होंने कहा ये तो तुम मेरी मदद करने के लिए कर रहे हो..मैं अन्दर घुसा..ऊफ्फ वो अन्दर पूरी नंगी थी..लेकिन दुसरी तरफ़ के दीवार के पास खड़ी थी..उनका चेहरा दीवार की तरफ़ था और एक हाथ से वो अपनी गांड के छेद को ढांके हुई थी..मैं मुड़ा लेकिन उनके मस्त सेक्सी निताम्बो को देखने से ख़ुद को नही रोक पाया..अब मैंने सोच लिया की अगर आज नही तो कभी नही..मैं अपने घुटनों के बल झुका और मेरा एक हाथ उनके चिकने गोरे जांघों पर फेरते हुए उनकी चूत तक सहलाया..उनकी चूत एकदम चिकनी थी..एक भी बाल नही था..और फूली हुयी चूत थी..मेरे हाथों ने चूत की दरार को महसूस किया..बिल्कुल किसी कुंवारी की कसी हुयी अनचुदी चूत जैसी चूत थी उनकी..ये सब मैंने अचानक किया और उन्हें कुछ सोचने का टाइम भी नही मिला..उन्हें तो जैसे बिजली का झटका लगा और क़रीब १० सेकेंड के बाद उनके मुह से सीत्कार निकली. सी सी स् .स्.स्.स्.स्..स्.और उनकी साँस भारी हो गई.. उन्होंने सिर्फ़ आह्ह ..संजू..उफ़..ना..कर..इतना ही कहा..मैं सहलाता रहा
अब उन्होंने पीछे देखा और कहा संजू मैं तेरी मौसी हूँ..ये ठीक नही है..आह्ह्ह.., लेकिन मैंने उनकी बात को सुनी अनसुनी कर दी.. उन्होंने मुझे हटाने का कोई प्रयास नही किया..लेकिन मेरा सहस बढ़ते देख उन्होंने अपनी गांड से मुझे पीछे धकेला मैं बाथ रूम के फर्श पर गिर पड़ा और तब मैंने उनकी मस्त निताम्बो और गांड का पूरा नज़ारा देखा..नितम्ब जैसे दो पहाड़ थे और और गांड का गुलाबी छेद उसके बीच मे , उसपर चारों तरफ़ थोड़े बाल थे..लेकिन वो हलके हलके से.मुझे धकेल कर वो रुकी नही.. बाथरूम से निकलकर वो सीधे उस कमरे मे आई और बेड पर बैठ कार अपनी पैंटी उठाकर पहनने लगी, मैं अब काफी गरम हो चुका था और इस अधूरे मोहीम मे खतरा भी था..किसी भी तरह मौसी की चुदाई तो करना ही था..मैंने अपना बाथरोब निकाल दिया और मेरा फनफनाता ७.५ इंच का लंड हिलाते हुए उनके पास पहुँचा , वो पैंटी पहनने के लिए झुकी थी..मैंने उन्हें वैसे ही बेड पर धकेल दिया अचानक हमले से वो बेड पर गिर पड़ी..

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2बारिश मे भीग गई थी.मम्मी की कजिन


उन्होंने पैंटी आधी ही पहनी थी सिर्फ़ घुटनों तक..मैंने दोनों हाथ पकड़ कर उन्हें बेड पर इस तरह लिटाया था की उनके पैर जमीन पर लटक रहे थे..और बाकी का हिस्सा बेड पर था..पीठ के बल ,,ओह्ह..मैंने अपनी जिंदगी मे पहली बार चूत के दर्शन किए..असली चूत..वैसे तो ब्लू फ़िल्म मे देख चुका था..लेकिन ये तो उनसे भी ज्यादा प्यारी चूत थी..एक नंगी चूत..मेरा लंड तो आपे से बाहर हो गया..थोड़ी देर पहले मैंने इसी चूत को सहलाया था..लेकिन तब मुझे सामने का ये खूबसूरत नज़ारा नही दिखा था..मैंने मेरा मुँह उनके मस्त चुंचियों के बीच मे घुसेड दिया..और मेरे नाक से उन्हें गुदगुदाने लगा वो अपने पैरो को जोर से पटकते हुए छुड़ाने की कोशिश कर रही थी..उसने कहा..संजू..ये ग़लत है..मैं तुम्हारी मौसी हूँ..मुझे ख़राब मत करो..लेकिन मैंने एक ना सुनी..अब मैंने उनके अंगूर जैसे निपल को मुँह मे ले लिया..और दोनों को बारी बारी से चूसने लगा..अब उनके पैर पटकने की स्पीड भी कम होने लगी थी..लेकिन वो कह रही थी..प्लीज़ संजू..आह्ह..मुझे छोड़ दो..उफ़..आह्ह.., अब मैंने उनके निप्पल को हलके से काटना शुरू किया दांत गडाते हुए.. अब वो भी गरम होने लगी थी..क्युकी उनके निपल अब कड़े होने लगे थे..और मैं मुँह मे ले कर चूसे जा रहा था..अब उन्होंने विरोध करना पूरी तरफ़ बंद कर दिया और आँख बंद कर के अआछ..ऊह्ह..चुस्सो..जोर से दबाओ..हाय..स्.स्.स्.स्.स्..संजू..जू.जू..और मेरा सिर अपने चूची पर दबाने लगी..थोड़ी देर के बाद उन्होंने मेरा सिर ऊपर किया और कहा..अब इन्हे चूसना बंद करो और मेरी चूत का ख़्याल करो.. .ये बहूत दिनों से प्यासी है..मैंने उन्हें ठीक से लिटाया..घुटने मोड़ दिए और उनके चूत पर मुँह रखा..आह्ह्हा क्या सुगंध और क्या स्वाद था..उनकी चूत ने जूस निकालना शुरू कर दिया था..और बहूत गीली थी..मैंने अपनी जीभ उनकी चूत के फांक को फैलाकर अन्दर डाली ..चूत अभी भी गुलाबी थी..और एकदम टाईट जैसे ही मैंने जीभ अन्दर डाली (ये मैंने ब्लू फिल्मो से सिखा था) वो सिसिया उठी..हाय..उफ़..तुमने ये क्या कर दिया संजू....और मैं उनके चूत मे जीभ घुमा रहा था तभी उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया..और कहा..बाप रे..तुम्हारा तो बहुत लंबा और मोटा है..इतना लंबा तो तुम्हारे मौसा का भी नही था और न तुम्हारे डैडी का ..(मैं तो समझ नही पाया..तो क्या डैडी मे भी मौसी को चोदा है?) मैंने उनसे पूंछा तो उन्होंने कहा हाँ मेरी शादी के पहले एक बार तेरे डैडी ने मुझे चोदा था और इसी लिए स्नेह मेरे पेट मे थी शादी के वक्त और ये जानकर तेरे मौसा ने मुझे डाइवोर्स दिया लेकिन उसके बाद मैं आज चुदवा रही हूँ.." मैंने कहा इसीलिये तुम्हारी चूत इतनी टाईट है..उन्होंने कहा हाँ बेटे..लेकिन तेरा लंड तो मूसल है..इतना मोटा लंड..मैंने नही देखा कभी..और उन्होंने मुझे अपने ऊपर खीचा मेरे लंड को चूमा और चाटा फ़िर अचानक मेरे सुपाडे को मुँह के अन्दर ले लिया और चूसने लगी..अब हम 69 के पोज़ मे थे मैं पागलों की तरह उनकी चूत को चाट रहा था..लंड चटाने से मैं तो एकदम जोश मे आ गया था..मेरे चूत को चाटने की स्पीड बढ़ गई जीभ से उनके दाने को भी मैं छेड़ रहा था..वो भी उभर कर ऊपर निकल आया था...मेरा चेहरा उनके जांघों के बीच मे था.. अचानक...उन्होंने मेरे सिर को अपनी जाँघों के बीच जोर से दबा लिया और आह्ह..ओओओह..हाय..ऊफ्फ.जैसी जोरो से चिल्लाने की आवाज़ .करते हुए अपनी चूत मेरे चहरे पर चिपकाने लगी..कुछ झटके लिए और मैंने मेरे मुँह मे उनकी चूत से गरम गरम कुछ लिसलिसा तरल पदार्थ आने लगा..जो की मेरे पूरे चहरे मे लग गया था मैंने भी उन्हें जोर से जकड लिया और जितना चाट सकता था पूरा चाट लिया..अब वो शांत हो गई..मेरे सिर को भी छोड़ दिया..और मेरी तरफ़ देख कर शर्माते हुए कहा "सॉरी" मैंने पूंछा "किस लिए सॉरी " उन्होंने कहा मेरा पूरा पानी मैंने तुम्हारे मुँह मे डाल दिया मैं तुमसे कह भी नही पाई की मैं अब झड़ने वाली हूँ ..क्या करूं आज कितने सालों के बाद चूत पर किसी मर्द ने हाथ लगाया है..मैं अपने आप को रोक नही सकी झड़ने से" मैंने कहा..मुझे तो ये बहुत अच्छा लगा.. . मैं तो फ़िर से ऐसा करना चाहूँगा..तुम्हारे चूत का पानी मुझे बहुत अच्छा लगा..
उन्होंने कहा "संजू अब मत तड़पाओ और तुम्हारा ये मोटा लंड मेरी चूत मे डाल के मेरी अच्छे से चुदाई करो..तभी मेरे चूत के अन्दर की आग बुझेगी जो तुमने आज दोपहर से लगाई है.." मैंने पूंछा "दोपहर से?
"हाँ" जाते वक्त तुम्हारे इस मोटे लंड की झलक मैं देख चुकी थी..इसीलिये तो मैं फ़िर से वापस आई..और तुम्हे बाथ रूम मे भी इसी लिए बुलाया " मैंने पूंछा फ़िर वहाँ से भाग कर क्यों आ गई..?" "वो तो तुम्हे और भड़काने के लिए आई." उसने कहा..
"लेकिन अब तुम ये मोटा और लंबा लंड मेरी चूत मे डाल दो."
मैंने उससे कहा की अब वो पेट के बल लेट जाए और उसके पेट के नीचे एक तकिया लगा दिया..उसकी गांड पीछे से ऊपर उठ गई थी..क्या नितम्ब और गांड थे..मैं तो गांड पर हाथ फेरने लगा..उसे चूमा..फ़िर गांड के छेद पर भी किस किया..जीभ से उसकी पीठ और दोनों नितम्बो के बीच की दरार मे गिला करने लगा..वो भी गरम होने लगी थी..मैंने उसके बालों को हटा कर गर्दन के पास चूमा और जीभ से छठा भी फ़िर उसके कान के नीचे और कान पर भी ऐसा ही किया..वो कसमसाने लगी मैं नीचे आया और गांड से होते हुए उसकी चूत को सहलाया..उन्होंने अपने घुटने थोड़े मोड़ लिए जिससे चूत पीछे की ओर उभर आई...अब वो डॉगी स्टाइल मे थी मैंने उनके गोरे गोल्गोल नितम्बो को दोनों हाथों से पकड़ा ..दबाया फ़िर गांड के छेद मे जीभ लगाया और अन्दर करने लगा..वो थोड़ा हिली..और आह..इश..स्.स्.स्.स् मैंने वह चाटना शुरू किया वह का भाग बड़ा ही नमकीन था शायद पसीने की वजह से ..मैंने गांड के छेद को फैलाया..और उस छोटे से गुलाबी छेद मे जितना हो सके मैंने जीभ अन्दर कर दिया..अब उसने चिल्लाते हुए कहा तुम्हे मेरी गांड पसंद है तो मुझे पहले चोद क्यों नही लेते.... तुम मेरी गांड को चाटो लेकिन मेरी चूत मे ऊँगली करो..बहुत खुजलाहट हो रही है ..मैंने उनके कहे अनुसार अपनी एक ऊँगली उनके चूत मे डाल दी..चूत से अभी भी रस निकल रहा था उसकी को मैं गांड के छेद मे लगा कर चाट रहा था..और उनके चूत के दाने को भी मसल रहा था..
हम दोनों ही काफी गरम हो चुके थे..उसने कहा संजू मेरी गांड मारोगे ? नेकी और पूंछ पूछ मैंने कहा हाँ..उन्होंने कहा तुम पहली बार कर रहे हो इसलिये पहले मेरी कुंवारी गांड को खोलो फ़िर मेरी चूत का मजा लेना..तुम अपनी मम्मी के ड्रेसिंग टेबल से वसलिन ले आओ और अच्छे से तुम्हारे लंड पर और मेरी गांड के छेद मे लगाओ " मैंने वैसा ही किया..उसने मेरे लंड को चूमा और अच्छे से वसलिन लगाया फ़िर मैंने उसे उसी पोजीशन मे किया और मेरे लंड के सुपाडे को गांड के छेद पर टिका के एक धक्का दिया चिकनाई की वजह से लंड का सुपाडा तो अन्दर चला गया लेकिन मौसी चीख . उठी..आह्ह ..मार डाला..उफ़ मर गयी..कितना मोटा है..इतने जोर से डालते है. मैंने उनके कमर को पकड़ रखा था और उनकी चीख के बावजूद मैंने दुसरे धक्के मे पूरा लंड जड़ तक अन्दर घुसेड दिया..मौसी की आंखों से आंसू निकल आए..चेहरे पर दर्द था और चीख अलग..ऊह माँ ..थोड़ा रुकने के बाद मैंने धीरे धीरे लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया..मैंने एक हाथ से उनके चुन्चियो को भी दबाना जारी रखा और फ़िर उनकी चूत मे ऊँगली अन्दर बाहर करने लगा..मैंने धक्को की स्पीड बढ़ा दी..मेरे हर धक्के से उसकी गांड कंप जाती थी और मैं लंड को बाहर खीच कर पूरा अन्दर पेल रहा था..वो इससे कभी कभी चिल्ला उठती थी..तब मैं अपनी स्पीड कुछ धीमी कर देता..लेकिन मैं घमासान धक्के लगाये जा रहा था..वो सिर्फ़ आह..ओओओह. .मम्..मम्.म.म. इश..स्.स्.स्. की आवाज़ निकल रही थी..मैंने महसुसू किया की उनकी चूत मेरे ऊँगली को कस के जकड रही है..और फ़िर क़रीब 5 मिनिट बाद ही मौसी ने मेरे हाथ मे ही पानी छोड़ दिया..मेरा पूरा हाथ भर गया..मैंने उसे चाट लिया और तेजी से गांड मारना जारी रखा..लेकिन वो थोड़ी देर शांत रही और कहा.."संजू..अब मैं लंड को चूत मे लूंगी..मैंने कहा ठीक है ..मैंने लंड बाहर निकाला तो उन्होंने कहा "अब तुम लेटो,..उन्होंने पास पड़ी अपनी पैंटी से मेरे लंड को पोंछा और उसे मुह मे ले लिया.मुह मे ले कर उसे चूसने लगी..दरअसल गांड मरते हुए मैं भी झड़ने के क़रीब आ चुका था, वो इस तरह से चाट और चूस रही थी की मैं अपने को नही रोक पाया और उनके सिर को पकड़ कर पूरा लंड अन्दर गले तक पहुंचाने लगा..मैंने कहा..मेरा.निकलने वाला है..ओह..ओह..और जैसे ही मेरी पिचकारी की धार उनके गले तक पहुँची उन्होंने मेरा लंड बाहर निकाला लेकिन अब तो एक के बाद एक जोरदार पिचकारी निकल रही थी जो उनके पूरे चेहरे पर फ़ैल गई... थोड़ा तो उन्होंने चाट लिया और फ़िर अपने मुँह को पोंछा..मेरी तरफ़ देख कर मुस्कुराई.. और कहने लगी..तुम्हारा तो माल भी बहुत निकलता है..और कितना गरम है..उन्होंने मेरे लंड को नही छोड़ा ..हाथ मे ले कर मसलती रही..ऐसे ही २० मिनिट हम सोये रहे..फ़िर उन्होंने उठ कर मेरे लंड को फ़िर से चाटना शुरू कर दिया..मैंने भी उनकी चूत के दाने को और चूत को छेड़ना शुरू कर दिया..निपल को मुह मे लिया..दबाया..इस तरह वो फ़िर से गरम होने लगी और मेरा लंड फ़िर से चुदाई के मैदान मे कूद पड़ा.. अब उन्होंने पास पड़ी शीशी से .फ़िर वसलीन ले कर लगाया....मैंने पूंछा अब क्यों ? उन्होंने कहा "मुझे क्या मरना है बिना वसलीन लगाए ये मोटा और लंबा लंड अन्दर लेकर..ये वैसे ही आज मेरी चूत को फाडेगा ..लेकिन मैं बेचैन हूँ..इसे मैं अपनी मरजी के मुताबिक़ अन्दर लूंगी"..और मुझे पीठ के बल लिटा दिया .फ़िर मेरे कमर के दोनों तरफ़ पैर रख कर चूत को मेरे चिकने लंड के ऊपर लाई और अहिस्ता उस पर बैठ गई मैंने उनके मम्मे हाथ मे लिए..मैं अधलेटा हो गया ताकी चूचियों का मजा ले सकूं..
मैं हैरान था की मौसी जो की इतनी शांत रहती थी आज इस तरह क्यों कर रही है..असल मे चुदवाने या चोदने की इच्छा हर मर्द और औरत मे रहती है..सिर्फ़ उसे सही तरीके से गरम करना या तैयार करना ही कठिन है..और मैंने अनजाने मे ये काम कर लिया था.., वो मेरे लंड पर बहुत धीरे धीरे ऊपर नीचे हो रही थी..अभी आधा लंड भी अन्दर नही लिया था..ज़्यादातर वो लंड को चूत के दाने पर ही घिस रही थी..उनकी चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया था..इसलिए लंड भी थोड़ा आसानी से अन्दर बाहर हो रहा था लेकिन वो पूरा लंड अन्दर लेने की हिम्मत नही जुटा पा रही थी..लंड भी चूत मे एकदम कसा कसा जा रहा था..अब मैंने उनके चूतादों के नीचे हाथ लगा कर उसे कस के पकड़ा और जब वो नीचे की ओर आई तो मैंने अपनी कमर जोर से उछाल दी और गप्प से पूरा लंड अन्दर चला गया और सीधा उनके बच्चेदानी से टकराया..वो भी अपना बैलेंस नही सम्हाल पायी और उनकी गांड का पूरा वजन मेरे लंड पर आया..जिससे लंड और अन्दर तक धंस गया,,और उनके मुह से आइईई...मर गई.ई.ई.ई.ई..ई.ई.ई.ई. की जोरदार चीख निकली..वो मेरे सिने पर लेट गई..मैंने उन्हें अपने बाँहों मे जकड लिया..अब पूरा लंड अन्दर घुस चुका था..मैंने ही पहले नीचे से कमर हिला कर धक्के लगाने शुरू किए..और फ़िर वो भी अपने पंजो के बल बैठ गई और लंड को अन्दर बाहर करने लगी..बीच बीच मे मैं जोर से नीचे से धक्का देता तो लंड फ़िर बच्चेदानी से टकरा जाता था..इस तरह क़रीब १५ मिनिट मे ही मौसी ने फ़िर से अपने पानी से मेरे लंड को स्नान करवाया मैंने उनकी कमर पकड़ कर उन्हें अपने नीचे ले लिया चूंकि वो झाड़ चुकी थी इसलिये थोड़ी देर वैसी ही शांत रही फ़िर उसने भी कमर हिलाना शुरू किया..मैंने उसकी गांड के नीचे एक तकिया लगाया चूत उभर आई , उसके पैरों को सिर तक मोड़ दिया और उसके बाद मेरे तूफानी दक्कों ने मौसी की चूत के चक्के चुदा दिए..मैं पहले दो बार झाड़ चुका था इसलिए अब मैं जल्दी झड़ने वाला नही था..मेरे धक्को के बीच फ़िर से मौसी ने मुझे चिपटा लिया और आह्ह..संजू..मैं झाड़ गयी..ओह..चो..चोद मुझे..फाड़ दे मेरी चूत को..अब मेरे लंड मे तनाव अने लगा था..वो फ़िर से फूलने लगा था..मैंने कहा मैं झड़ने वाला हूँ..बाहर निकालू या अन्दर ही डालूँ..उसने कहा..अन्दर ही डालो..मैंने बहुत दिन से चूत के अन्दर नही डलवाया है..और इतने अन्दर तक तो आज तके मेरी चूत मे कोई चीज़ नही घुसी.. मैंने कहा..प्रेगनंट..हो गई तो..? " उसकी फिकर तुम मत करो मैं गोली खा लूंगी..तुम चोदो..आह्ह..उफ्फ्फ. क्या मस्त लंड है..संजू तुम मेरे घर आ कर मुझे जब चाहे चोद सकते हो..मैं तुम्हारे लंड की दीवानी हो गई हूँ.."और ना जाने क्या क्या बोल रही थी..मैं तो धक्के लगाने मे मशगूल था..और फ़िर मेरी पूरी ताकत सिमट गई और पूरा लंड जड़ तक अन्दर डाल कर मैं उसके छाती पर लेट गया..और मेरे लंड ने अपना फौवारा उसकी चूत मे छोड़ दिया..पूरी चूत भर गई..उसकी गरमी से मौसी भी एक बार फ़िर मुझसे चिपक कर झड़ने लगी..इस तरह अब हम दोनों एक साथ ही झड़े ..क़रीब बीस मिनिट हम ऐसे ही सोये रहे मौसी ने कहा संजू मुझे अब जाना है..चलो उठो..मैं उठा और मैंने लंड को , जो की अब सिकुड़ गया था ..बाहर निकाला..मैंने देखा उनकी चूत जो पहले सिर्फ़ एक दरार थी अब खुल गई थी और उसने से मेरा और उसका दोनों का पानी बह कर उसकी गांड से होते हुए चादर पर टपक रहा था..
उसके बाद हम दोनों ही उठ कर बाथरूम मे गए वहाँ से आकार उसने पानी गरम किया और फ़िर से दोनों ने एक साथ नहाया..और नहाते वक्त मैंने कमोड के ऊपर बैठ कर उसे मेरे लंड की सवारी करवाई..उसे ये बहुत अच्छा लगा..दोनों ने एक दुसरे को अच्छे से साबुन से नहलाया..फ़िर पोंछा..बाद मे उसने अपने कपड़े वैसे ही एक थैली मे भरे और मम्मी की साड़ी पहन कर चली गई..जाते वक्त उसने फ़िर से कहा की मेरे घर आ कर तुम मुझे जब चाहे तब चोद सकते हो..और ऐसे ही चुदाई मे वो एक बार गर्भवती हो गयी..बाद मे उन्होंने कहा की इसे मैं जन्म दूँगी ये तुम्हारे धमाकेदार चुदाई की निशानी है..वो दुसरे शहर मे एक साल तक जा कर रही और बाद मे मेरे बेटे को साथ ले कर आयी...शायद मेरे मम्मी और डैडी को ये बात उसने बता दी थी इसलिए कभी कभी वो बाहर जाते वक्त मुझसे कहते आज रेखा को बुला लेना..

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