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दोनों बेड पर सो जाते हैं।

दोनों बेड पर सो जाते हैं।

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में विभिन्न विषयों की
प्रवेश परीक्षा देने के लिए विद्यार्थी दूर दूर से आए हुए थे। लंका (काहिवि के
मुख्य द्वार पर स्थित मार्केट) एवं आसपास के सारे होटल भरे हुए थे। मैं कई होटलों
में भटक चुका था लेकिन कोई कमरा खाली नहीं मिला। मेरी चचेरी बहन, सुगन्धा, जिसे जीव
विज्ञान में स्नातक की प्रवेश परीक्षा देनी थी वो भी मेरे साथ घूमते घूमते थक चुकी
थी। ऊपर से जानलेवा गर्मी। हमारे कपड़े पसीने से भीग चुके थे।

एक दो होटलों में और देखने के बाद उसने कहा- भैय्या अब जहाँ भी जैसा भी कमरा
मिले तुरंत ले लेना मुझसे और नहीं चला जाता। थोड़ी और परेशानी झेलने के बाद एक घटिया
से होटल में सिंगल बेड रूम मिला। होटल दूर दूर से आए परीक्षार्थियों से भरा हुआ था।
मैंने होटल के मैनेजर से एक अतिरिक्त गद्दा जमीन पर बिछाने के लिए कहा तो उसने एक
घटिया सा कंबल लाकर जमीन पर बिछा दिया।

मैंने सुगन्धा
से कहा- तुम थक गई होगी चलो बाहर कहीं से खाना खाकर आते हैं इस गंदे होटल में तो
मुझसे खाना नहीं खाया जाएगा।

फिर हम लोग पास के एक
रेस्टोरेंट से खाना खाकर आए। सुगन्धा को मैंने बेड पर सो जाने के लिए कहा और खुद
नीचे सो गया।

रात को मैं बाथरूम जाने के लिए उठा और
जैसे ही बत्ती जलाई मेरा दिल धक से रह गया। थकी होने के कारण सुगन्धा घोड़े बेचकर सो
रही थी। इतनी गर्मी में कुछ ओढ़ने का तो सवाल ही नहीं उठता था। ऊपर से पंखा भी भगवान
भरोसे ही चल रहा था। उसकी स्कर्ट उसकी जाँघों के ऊपर उठी हुई थी। अभी एक महीने पहले
ही वो अठारह साल की हुई थी। उसकी हल्की साँवली जाँघें ट्यूबलाइट की रोशनी में ऐसी
लग रही थीं जैसे चाँद की रोशनी में केले का तना। उस वक्त मैं राजनीति शास्त्र में
एमए करके इलाहाबाद से प्रशासकीय सेवाओं की तैयारी कर रहा था। मेरा ज्यादातर समय
पढ़ाई में ही बीतता था। लड़कियों के बारे में मैंने दोस्तों से ही सुना था और युवाओं
के मशहूर लेखक मस्तराम को पढ़कर हस्तमैथुन कर लिया करता था।

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अचानक मुझे लगा कि मैं यह क्या कर रहा हूँ? यह लड़की मुझे भैया कहती है और
मैं इसके बारे में ऐसा सोच रहा हूँ। मुझे बड़ी आत्मग्लानि महसूस हुई और मैं बाथरूम
में चला गया।

बाहर आकर मैंने सोचा कि इसकी स्कर्ट ठीक
कर दूँ। फिर मुझे लगा कि अगर यह जग गई तो कहीं कुछ गलत न सोचने लग जाए इसलिए मैं
बत्ती बुझाकर नीचे लेट गया और सोने की कोशिश करने लगा। लेकिन मुझे नींद कहाँ आ रहा
थी। ऐसा लग रहा था जैसे मेरे भीतर एक युद्ध चल रहा हो। मस्तराम की कहानियाँ रह रहकर
मुझे याद आ रही थीं। मस्तराम की कहानियों में भाई बहन की बहुत सी कहानियाँ थीं मगर
मैं उन्हें देखते ही छोड़ देता था। मुझे ऐसी कहानियाँ बेहद ही बचकाना एवं बेवकूफ़ी
भरी लगती थीं। भला ऐसा भी कहीं होता है कि लड़की जिसे भैय्या कहे उसके साथ संभोग
करे।

अगला एक घंटा ऐसे ही गुजरा। कामदेव ने मौका देखकर
अपने सबसे घातक दिव्यास्त्र मेरे सीने पर छोड़े। मैं कब तक बचता। आखिर मैं उठा और
मैंने कमरे की बत्ती जला दी। सुगन्धा की स्कर्ट और ऊपर उठ गई थी और अब उसकी नीले
रंग की पैंटी थोड़ा थोड़ा दिखाई पड़ रही थी। उसकी जाँघें बहुत मोटी नहीं थीं और उरोज
भी संतरे से थोड़ा छोटे ही थे। मैं थोड़ी देर तक उस रमणीय दृष्य को देखता रहा। मेरा
लिंग मेरे पजामे में तम्बू बना रहा था। अगर इस वक्त सुगन्धा जग जाती तो पता नहीं
क्या सोचती।

फिर मेरे दिमाग में एक विचार आया और मैंने
बत्ती बुझा दी। थोड़ी देर तक मैं वैसे ही खड़ा रहा धीरे धीरे मेरी आँखें अँधेरे की
अभ्यस्त हो गईं। फिर मैं बेड के पास गया और बहुत ही धीरे धीरे उसकी स्कर्ट को पकड़कर
ऊपर उठाने लगा। जब मुझे लगा कि स्कर्ट और ज्यादा ऊपर नहीं उठ सकती तो मैंने स्कर्ट
छोड़कर थोड़ी देर इंतजार किया और कमरे की बत्ती जला दी। जो दिखा उसे देखकर मैं दंग रह
गया। ऐसा लग रहा था जैसे पैंटी के नीचे सुगन्धा ने डबल रोटी छुपा रक्खी हो या नीचे
आसमान के नीचे गर्म रेत का एक टीला बना हुआ हो। मैं थोड़ी देर तक उसे देखता
रहा।

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फिर मैंने बत्ती बुझाई और बेड के पास आकर उसकी
जाँघों पर अपनी एक उँगली रक्खी। मैंने थोड़ी देर तक इंतजार किया लेकिन कहीं कोई हरकत
नहीं हुई। मेरा दिल रेस के घोड़े की तरह दौड़ रहा था और मेरे लिंग में आवश्यकता से
अधिक रक्त पहुँचा रहा था। फिर मैंने दो उँगलियाँ उसकी जाँघों पर रखीं और फिर भी कोई
हरकत न होते देखकर मैंने अपना पूरा हाथ उसकी जाँघों पर रख
दिया।

धीरे धीरे मैंने अपने हाथों का दबाव बढ़ाया मगर
फिर भी कोई हरकत नहीं हुई। सुगन्धा वाकई घोड़े बेचकर सो रही थी।

धीरे धीरे मेरी हिम्मत बढ़ती जा रही थी। फिर मैंने अपना हाथ उसकी जाँघों से
हटाकर उसकी पैंटी के ऊपर रखा। मेरी हिम्मत और बढ़ी। मैंने अपने हाथों का दबाव बढ़ाया।
अचानक मुझे लगा कि उसके जिस्म में हरकत होने वाली है। मैंने तुरंत अपना हाथ हटा
लिया। उसके जिस्म में वाकई हरकत हुई और उसने करवट बदली। मैं फौरन जाकर नीचे लेट
गया। फिर वो उठी और उसने कमरे की लाइट जलाई। मैंने कस कर आँखें बंद कर लीं और ईश्वर
से दुआ करने लगा- प्रभो इस बार बचा ले ! आगे से मैं ऐसा कुछ भी नहीं करूँगा। वो
बाथरूम का दरवाजा खोलकर अंदर चली गई। अब मेरी समझ में आया कि वो बाथरूम गई है। वो
वापस आई। ट्यूबलाइट की रोशनी सीधे मेरी आँखों पर आ रही थी इसलिए आँख बंद करने के
बावजूद ट्यूब लाइट की रोशनी की तीव्रता कम होने से मैंने महसूस किया कि वो
ट्यूबलाइट के पास जाकर खड़ी हो गई है। वो थोड़ी देर तक वैसे ही खड़ी रही मेरा दिल फिर
धड़कने लगा।

अचानक उसने ट्यूबलाइट बंद कर दी और अपने
बिस्तर पर जाकर लेट गई। तब मुझे समझ में आया कि वो ट्यूबलाइट के पास क्यूँ खड़ी थी।
मेरे लिंग ने पजामे में तंबू बनाया हुआ था और मैं बनियान पहनकर सो रहा था। हो न हो
ये जरूर मेरे लिंग को ही देख रही होगी आखिर जीव विज्ञान की छात्रा है मुझसे ज्यादा
तो मैथुन क्रिया के बारे में इसे पता होगा।

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यह सोचकर
मेरी हिम्मत बढ़ गई और मैं हस्तमैथुन करने लगा। थोड़ी देर बाद ढेर सारा वीर्य फर्श पर
गिरा। मैंने उस गंदे कंबल के निचले हिस्से से फर्श पोंछा और सो
गया।

अगले दिन सुबह जब मैं उठा तो वह बाथरूम में थी।
मेरी निगाह अब उसके लिए बदल चुकी थी और मेरी हिम्मत भी इस वक्त बहुत बढ़ी हुई थी।
मैंने तलाश किया तो उस घटिया होटल के घटिया से बाथरूम के पुराने दरवाज़े में एक छोटा
सा सुराख फर्श से एक फीट ऊपर दिखाई दिया। अंदर से कपड़े धोने की आवाज़ आ रही थी लेकिन
बैठकर भी उस सुराख से झाँका नहीं जा सकता था। तो मैं वहीं फर्श पर लेट गया और अपनी
आँखें उस सुराख पर लगा दीं।

अंदर का दृश्य देखकर फौरन
मेरा लिंग उत्तेजित अवस्था में आ गया। सुगन्धा बिल्कुल नंगी होकर कपड़े धो रही थी।
उसके निर्वस्त्र पीठ और नितंब मेरी तरफ थे। दो अधपके खरबूजे रात्रिभोज का निमंत्रण
दे रहे थे।

फिर वो खड़ी हो गई और मुझे उसकी सिर्फ़ टाँगें
दिखाई पड़ने लगीं। मैं किसी योगी की तरह उसी आसन में योनि के दर्शन पाने का इंतजार
करने लगा।

आखिरकार इंतजार खत्म हुआ। वो मेरी तरफ मुँह
करके बैठी और उसने अपनी जाँघों पर साबुन लगाना शुरू किया। फिर उसने अपनी टाँगें
फैलाई तब मुझे पहली बार उस डबल रोटी के दर्शन मिले जिसको चखने के लिए मैं कल रात से
बेताब था। हल्के हल्के बालों से ढकी हुई योनि ऐसी लग रही थी जैसे हिमालय पर काली
बर्फ़ गिरी हुई हो और बीच में एक पतली सूखी नदी बर्फ़ के पिघलने और अपने पानी पानी
होने का इंतजार कर रही थी। पहली बार मैंने सचमुच की योनि देखी।

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अच्छी चीजें कितनी जल्दी नज़रों के सामने से ओझल हो जाती हैं। साबुन लगाकर वो
खड़ी हो गई और फिर मुझे उसके कपड़े पहनने तक सिर्फ़ उसकी टाँगें ही दिखाई
पड़ीं।

प्रवेश परीक्षा का पहला पेपर दिला कर मैं उसे
होटल वापस लाया। दूसरा और आखिरी पेपर अगले दिन था। वो प्रवेश परीक्षा दे रही थी और
मैं परीक्षा हाल के बाहर बैठा अपनी वासना की पूर्ति के लिए योजना बना रहा था। शाम
को हम खाना खाने गए। वापस आकर मैंने उससे कहा- सुगन्धा, कल रात मैं ठीक से सो नहीं
पाया, यह कंबल बहुत चुभता है, इस पर मुझे नींद नहीं आती।

वो बोली- भैया, आप बेड पर सो जाओ मैं नीचे सो जाती हूँ।

इस पर मैं बोला- नहीं, तुम्हारा ठीक से सोना जरूरी है तुम्हारी परीक्षा चल
रही है। चलो कोई बात नहीं मैं एक दिन और अपनी नींद खराब कर
लूँगा।

इस पर वो बोली- नहीं भैय्या, ऐसा करते हैं, हम
दोनों बेड पर सो जाते हैं।

मेरी योजना सफल हो गई थी।
मैंने उसे दिखाने के लिए बेमन से हामी भर दी।

वो दूसरी
तरफ मुँह करके सो रही थी और मैं धड़कते दिल से उसके सो जाने का इंतजार कर रहा था।
मेरा पजामा और उसका स्कर्ट एक दूसरे को चूम रहे थे।

जब
मुझे लगा कि वो सो गई है तो मैंने अपना लिंग उसके खरबूजों के बीच बनी खाई से सटा
दिया।[/color]

Last edited by jai12345678 : 2 Weeks Ago at 09:10 AM.

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वो बोली- नहीं भैय्या, ऐसा करते हैं, हम दोनों बेड
पर सो जाते हैं।

मेरी योजना
सफल हो गई थी। मैंने उसे दिखाने के लिए बेमन से हामी भर
दी।

वो दूसरी तरफ मुँह करके
सो रही थी और मैं धड़कते दिल से उसके सो जाने का इंतजार कर रहा था। मेरा पजामा और
उसका स्कर्ट एक दूसरे को चूम रहे थे।

जब मुझे लगा कि वो सो गई है तो मैंने अपना लिंग उसके खरबूजों के बीच
बनी खाई से सटा दिया। थोड़ी देर तक मैं उसी पोजीशन में रहा। जब उसकी तरफ से कोई हरकत
नहीं हुई तो मैंने लिंग का दबाव बढ़ाया। फिर भी कोई हरकत नहीं हुई। तब मैंने धीरे से
अपना हाथ उसके नितम्ब पर रख दिया। मेरे हाथ में हल्का हल्का कंपन हो रहा था। थोड़ी
देर इंतजार करने के बाद मैंने उसके नितम्ब पर अपने हाथों का दबाव और बढ़ा
दिया।

अचानक उसके नितम्ब
थोड़ा पीछे हुए और उनमें संकुचन हुआ, उसके खरबूजों ने मेरे लिंग को जकड़ लिया। पहले
तो मैं यह सोचकर डर गया कि वो जगने वाली है पर उसकी तरफ से और कोई हरकत नहीं हुई तो
मैं समझ गया कि इसे भी मजा आ रहा है।

कल यह मेरा लिंग देख रही थी और आज बिना ज्यादा ना नुकुर किए मेरे साथ
इस सिंगल बेड पर सोने को तैयार हो गई। यह सोचकर मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने अपना हाथ
उसके नितम्ब से सरकाकर उसकी जाँघ पर ले गया फिर थोड़ा इंतजार करने के बाद मैंने अपनी
हथेली उसकी डबल रोटी पर रख दी। उसका पूरा बदन जोर से काँपा वो थोड़ा और पीछे होकर
एकदम मुझसे सट गई और मेरा लिंग उसके खरबूजों की दरार में और गहरे सरक
गया।

अब मैं पूरी तरह
आश्वस्त हो गया कि आग दोनों तरफ बराबर लगी हुई है।

फिर मैं आहिस्ता आहिस्ता उसकी डबल रोटियों को सहलाने
लगा। उसका बदन धीरे धीरे काँप रहा था और गरम होता जा रहा था। मैंने अपना हाथ ऊपर की
तरफ ले जाना शुरू किया। सुगन्धा ने अभी ब्रा पहनना शुरू नहीं किया था। कारण शायद यह
था कि उसका शरीर अभी इतना विकसित नहीं हुआ था कि ब्रा पहनने की जरूरत पड़े। उसने
टीशर्ट के अंदर बनियान पहन रखी थी।

Last edited by super84 : 1 Week Ago at 09:44 AM.

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Last edited by jai12345678 : 2 Days Ago at 02:40 AM.

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जब मेरे हाथों ने उसके
टीले को दो भागों में बाँटने वाली दरार को स्पर्श किया तो उसे फिर से एक जोर का
झटका लगा। अगर मेरा पजामा और उसकी स्कर्ट पैंटी बीच में न होते तो मेरा लिंग
पिछवाड़े के रास्ते से उसके शरीर में प्रवेश कर जाता। उसकी दरार से गुनगुने पानी का
रिसाव हो रहा था जिसके स्पर्श से मेरी उँगलियाँ गीली हो गईं। गीलापन मेरी उँगलियों
के लिए चिकनाई का कार्य कर रहा था और अब मेरी उँगलियाँ उसकी दरारों में गुप्त गुफ़ा
ढूँढ रही थीं। न जाने क्यों सारे खजाने गुप्त गुफ़ाओं में ही होते हैं। जल्द ही मेरी
तर्जनी ने गुफा का मुहाना खोज लिया और उसमें प्रवेश करने की चेष्टा करने लगी। गुफ़ा
के रास्ते पर बड़ी फिसलन थी और जैसे ही मेरी तर्जनी सरकते हुए मुहाने के पार गई
सुगन्धा के मुँह से हल्की सी चीख निकल पड़ी, वो करवट बदलकर मुझसे लिपट
गई।

इस प्रक्रिया में मेरी
तर्जनी और लिंग दोनों उस असीम सुख से वंचित हो गए जो उन्हें मिल रहा
था।

थोड़ी देर मैंने उसे खुद
से लिपटे रहने दिया फिर मैंने धीरे से उसे खुद से अलग किया और चित लिटा दिया। फिर
मैंने नीचे से उसका स्कर्ट उठाना शुरू किया और उसकी टाँगों को चूमना शुरू किया।
मेरे हर चुम्बन पर वो सिहर जाती थी। जब मैंने उसकी पैंटी के ऊपर से उसके गर्म
रेतीले टीले को चूमा तो वो जोर से काँपी। अब मैं उसके टीलों को देखने का आनंद लेना
चाहता था। बाथरूम में इतनी दूर से देखने में वो मजा कहाँ था जो इतने करीब से देखने
पर मिलता।

मैंने सुगन्धा से
पूछा- बत्ती जला दूँ?

इतनी
देर में वो पहली बार बोली- नहीं मुझे शर्म आएगी।

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  #10  
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उफ़ ! ये लड़कियाँ भी ज्यादा बेशर्म हो जाएँ तो बेमजा,
ज्यादा शर्मीली हो जाएँ तो बेमजा।

बहरहाल मैंने उसकी पैंटी की इलास्टिक में अपनी उंगली फँसाई और उसे
नीचे खींचने लगा। उसने अपने नितंब ऊपर उठा दिए और मेरा काम आसान हो गया। पैंटी
उतारने के बाद मैं अपना मुँह उसकी योनि के पास ले गया। एक अजीब सी गंध मेरे नथुनों
से टकराई। मैंने साँस रोककर उसकी योनि को चूम लिया।

वो उछल पड़ी।

अब स्वयं पर नियंत्रण रख पाना मेरे लिए मुश्किल था। मैंने तुरंत पजामा
उतार दिया। शायद "आदमी हो या पजामा" वाली कहावत यहीं से बनी है। ऐसी स्थिति में भी
जो पजामा पहने रहे वो वाकई आदमी नहीं पजामा है। मैंने बनियान भी उतारी और उसके बाद
अपने अंतिम अंतर्वस्त्र को भी बेड के नीचे फेंक दिया। सुगन्धा की टाँगें चौड़ी की और
महान लेखक मस्तराम की कहानियों की तरह लिंग उसकी योनि पर रखकर एक जोरदार झटका
मारा।

लिंग तो घुसा नहीं
सुगन्धा चीख पड़ी सो अलग।

यह
क्या हो गया मैंने सोचा। मस्तराम की कहानियों में तो दो तीन झटकों और थोड़े से दर्द
के बाद आनन्द ही आनन्द होता है। यहाँ सुगन्धा कराह रही
है।

मैं तुरंत सुगन्धा के
बगल लेट गया और उसे कसकर खुद से चिपटा लिया, मैंने पूछा- क्या हुआ
बेबी?

वो बोली- भैय्या, बहुत
दर्द हुआ, इतने जोर से मत कीजिए। धीरे धीरे कीजिए न।

बार बार मेरी हिम्मत टूट रही थी और सुगन्धा बार बार मेरी
हिम्मत बढ़ा रही थी। शायद कामदेव ने उसके ऊपर भी अपने सारे अमोघ अस्त्रों का प्रयोग
कर दिया था। मैं दुबारा उसकी जाँघों के बीच बैठा और इस बार महान लेखक मस्तराम के
लिखे को न मानते हुए मैंने अपना लिंग उसकी योनि पर रगड़ना शुरू किया। वो भी अपनी कमर
उठा उठा कर मेरा साथ देने लगी। फिर मैंने उसकी गुफा के मुहाने पर लिंगमुंड का दबाव
बढ़ाया। इस बार उसने कुछ नहीं कहा।

मैंने थोड़ा और दबाव बढ़ाया तो वो बोली-
भैय्या।

मैंने कहा-
हाँ।

वो बोली- आपकी भी
प्रवेश परीक्षा चल रही है।

उसकी बात सुनकर मेरे मुँह से बेसाख्ता हँसी निकल गई। मैं समझ गया कि
लिंग रगड़ने के दौरान ही सुगन्धा आनंद के चरम पर पहुँच गई थी और अब वो केवल मेरा साथ
देने के लिए लेटी हुई है। ऐसी स्थिति में अंदर घुसाने की कोशिश करना बेकार भी था और
खतरनाक भी।

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