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  #1  
Old 21st March 2013
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हिंदी में भाभी की चुदाई की कहानिया

सभी से निवदीन ह की केवल हिंदी में भाभी से संबधित चुदाई के कहानियों को पोस्ट कर इस सूत्र को आगे बढ़ने में मदद करे...
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we are young bi-couple from Ahmadabad (Now In Delhi) ... mail us with your Genuine details & photo to rahulradhikaatgmaildotcom ------------ Perfect Muscular body Shape of Men does matter in life..

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  #2  
Old 21st March 2013
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होली के रंग पिया संग....

होली का दिन मेरे लिये शुभ दिन बन कर आया। उस दिन मेरे मन की एक बड़ी इच्छा पूरी हो गयी। अनिल मेरे दूर के रिश्ते में मेरा चाचा ही लगता था उन दिनों वो भी आया हुआ था। मुझे अनिल बहुत अच्छा लगता था। मुझे ऐसा लगता था कि हाय ! कभी मैं उसके साथ चुदाई करूं। पर ऐसा मौका कभी नही मिला। मै उस पर दिल से मरती थी। होली उसे हमारे साथ ही खेलना था। चाचा और चाची उसके आने से बहुत खुश थे। अनिल उम्र में मुझसे दो साल छोटा था। अनिल १९ साल का रहा होगा। शाम को होली जलने वाली थी.... चाचा ने होली के बाद की रस्में पूरी की और अपनी रात की शिफ़्ट में काम करने को चले गये....


रात को अचानक मेरी नींद खुल गयी। मैने करवट ली और फिर से आंखे बन्द कर ली। मुझे लगा कि कोई बात कर रहा है। चाची के कमरे से आवाज आ रही थी। चाचा तो थे नहीं....फिर किस से बात हो रही थी। मेरी उत्सुकता बढ गयी। मै बिस्तर से उतरी और चाचा के कमरे के दरवाजे के छेद पर आंख लगा दी। सामने अनिल खड़ा था। मैने समय देखा रात के लगभग १२ बज रहे थे। इतनी रात को ....? अभी तक सोये नहीं थे। मैं स्टूल धीरे से दरवाजे के पास रख कर आराम से बै�� गई.... मुझे लगा कि आज तक तो चाचा चाची की चुदाई देखती थी .... शायद आज कुछ और नजारा दिख जाये....


मैने बड़े आराम से छेद पर आंख लगा दी। अनिल पहले तो चाची से बात करता रहा.... फिर उसने चाची के ब्लाऊज़ पर ऊपर से ही हाथ फ़ेरा। चाची ने उसका हाथ पकड़ कर अपनी चूंचियों पर दबा दिया। मेरे शरीर पर चींटियां रेंगने लगी.... तो अनिल भी चाची के साथ मजे करता है.... चाची का नाम नीता है....। नीता ने अपना एक हाथ बढा कर उसका लन्ड पकड़ लिया .... उनका कार्यक्रम शुरु हो चुका था.... मेरी चूत भी गरम होने लगी.... मैने अपनी चूंचियां दबा ली.... और देखती रही.... न जाने कब मेरी उंगली मेरे चूत में घुस गयी.... और अन्दर बाहर होने लगी.... अनिल चाची को खूब मजे से चोद रहा था। चाची अपना होली का त्योहार बड़े आनन्द से मना रही थी.... कभी में अपने बोबे भींचती कभी चूत को उंगली से चोदती........ मेरे मुख से भी कभी कभी आह निकल जाती.... सिसकारियां फ़ूट पड़ती.... अचानक में झड़ गयी.... मैने अपनी चूत दबा ली.... और आकर बिस्तर पर लेट गयी .... पर नींद कहां थी.... आवाज़ें अभी भी आ रही थी.... मैने फिर से उ�� कर देखा तो अब गान्ड चुदाई हो रही थी.... मैं फिर तरावट में आने लगी .... मेरी फ़ुद्दी फिर फ़ुदक उ�� ी.... हाय।.... मैने अपनी चूत को दबाया और मन कड़ा करके बिस्तर पर आ गई।


कुछ ही देर में चाची के कमरे से आवाजें आनी बन्द हो गयी .... मैं सोने की कोशिश करने लगी.... सवेरे उ�� ते ही देखा कि सभी सो रहे थे। अनिल भी अपने कमरे में सो रहा था। मैने जल्दी से चाय बनाई.... पहले अनिल को उ�� ा कर चाय दी फिर चाची यानी नीता को चाय दी। नीता ने सुस्ताते हुये कहा," नेहा इधर बै�� ........तुझसे कुछ पूछना है...."


"हाऽ.... आन्टी.... कहो...."


"एक बहुत पर्सनल सवाल है .... अनिल के बारे में...." नीता ने कहा। मैं एकदम से सहम कर नीता को देखने लगी।


"अनिल के बारे में.... हां ........ क्या ?"


"अनिल तुम्हारे बारे में कल पूछ रहा था .... क्या तुम्हें वो अच्छा लगता है...." मैं एकदम से झेंप गई।


"आन्टी .... हां अच्छा है .... पर ऐसा क्यू पूछा...."


"कल तुम रात को हमें उस छेद से देख रही थी ना....।" नीता ने तिरछी नजर से मुझे मुसकरा कर पूछा....


"ना....नहीं तो.... वो....तो...." एकदम से सीधा वार हुआ।


"हम दोनों को पता है........तुम देख रही थी.... पर हमने तुम्हें देखने दिया ...." नीता ने मतलबी निगाहों से मुझे मुस्करा कर देखा।


"आन्टी .... सोरी.... अब नहीं होगा...."


"अनिल तुम्हारे साथ रात वाला काम करना चाहता है .... बोलो है इच्छा...."


"आन्टी .... सच .... " मैने शरमा कर नीता की गोदी में अपना मुहं छुपा लिया "पर आन्टी मुझे शरम आयेगी ना...."


"जब दो दिल राज़ी तो वहां शरम का क्या काम.... फिर मैं हू ना...."


सुबह सुबह होली खेलने के दिन मेरे लिये अनिल क पैगाम ले कर आया.... मैने नीता के गाल पर एक प्यार का चुम्मा ले लिया। नीता मुसकरा उ�� ी.... " नेहा.... बेस्ट ओफ़ लक ...."


"हटो आन्टी.... आप बड़ी वो है....यानी अच्छी हैं....।" मैं खुशी से फ़ूली नहीं समा रही थी.... मैने तुरन्त कपड़े बदले और होली के लिये सफ़ेद ड्रेस पहन लिया। हल्का सा मेक अप किया और इ�� ला कर अनिल के कमरे में गई....


"चाय का कप?.... " मैने अनिल से बड़ी अदा से कहा.... अनिल मुझे देखता ही रह गया ....उसने मुझे चाय का कप थमा दिया।


मैने कहा,"आज तो होली है .... 8 बजे से हम तो होली खेलेंगे.... तैयार रहना...."


मेरी सहेलियां और नीता के मिलने वाले आने लगे थे। मि�� ाईयां खाई और खिलाई जा रही थी। सभी रंग में रंगे थे। मैं आज कुछ ज्यादा ही खुश थी.... क्योंकि सुबह ही मुझे चुदाई का न्योता मिल गया था.... रह रह कर मैं अनिल के पास जा कर उसे रंग लगा रही थी। अनिल भी अब शरारत करने लगा था .... वो कभी मेरा हाथ पकड़ लेता.... कभी मेरी पी�� पर धीरे से हाथ मारता। मुझे सिरहन होने लगती थी।


"नेहा.... एक काम करा दे.... ये सामान ऊपर वाले कमरे में ले चल...." नीता ने आवाज लगाई। मैं भाग कर अन्दर गई.... और सामान ले कर नीता के साथ ऊपर कमरे में आ गई।


नीता ने पूछा,"अनिल के क्या हाल है........?"


"आन्टी.... बड़ी मस्ती कर रहा है...."


"तेरी ऐसे करके.... चूंचियां दबाई कि नहीं...." नीता ने मेरी चूंची दबाते हुये कहा।


इतने में अनिल वहां आ गया.... नीता ने अनिल को देखते ही कहा,"ले नेहा.... अनिल आ गया.... अब तू चुदेगी...." फिर मेरे कान में बोली "तबियत से चुदवा लेना .... इसका लन्ड सोलिड है...."


मैं शरमा गयी....


नीता ने अनिल को कहा,"आ गये तुम .... अब ये रही नेहा ........ अब होली के मजे करो .... मैं जा रही हूं.... दरवाजा अन्दर से बन्द कर लेना........"


"चाची........मत जाओ ना .... मुझे शरम आयेगी........"


अनिल मुस्कराया.... और बोला -"अब चाची? .... मेरे साथ होली तो खेलो.... और नेहा....तुम बच कर कहां जाओगी"


कहते हुये अनिल ने मेरे चेहरे पर गुलाल लगा दी .... उसके हाथ अचानक मेरी चूंचियों पर आ गये और मेरे कुरते में अन्दर हाथ डाल कर मेरे उभारों पर गुलाल मल दिया साथ में मेरे उभारों को भी मसल डाला.... नीता ने देखा अनिल शुरु हो चुका है तो वो बाहर जाने लगी। इस हमले से मैं एकदम मस्त हो गयी। अनिल के मेरे उभारों को दबाने से मै उसे देखती रह गयी.... मुझे शरम आने लगी पर साथ ही मैने अपने उभारों को और आगे उभार दिया.... उसे चूंचियां मसलने का पूरा मौका दिया। अनिल ने मेरे बोबे हाथों में भर लिये। मैं सिसक उ�� ी।


"सिर्फ़ तेरे बोबे ही तो मचका रहा है....अभी तो देखती जा...." नीता ने कमरे को बन्द कर दिया। अनिल ने अन्दर से दरवाजा बन्द कर दिया। मैं सिमट कर खड़ी हो गयी। अनिल ने मुझे अपनी तरफ़ खींच लिया और अपनी बाहों में भर लिया । उसके लन्ड का कड़ापन मुझे चूत के आसपास चुभने लगा था।


मैने जानकर कहा,"मेरे पीछे मत दबाना.... गुदगुदी होती है...."


"अच्छा .... कहां पर .... यहां चूतड़ों पर ...." और उसने मेरे दोनो गोल गोल चूतड़ मसल डाले। मै और शरमा कर सिमटने लगी।


"जानती हो .... शरमाने वाली लड़की को चोदने से बड़ा आता है...."


"हाय....ऐसे नहीं बोलो ना ...."


इधर अनिल ने अब मेरे कुर्ते को उतार दिया। मेरे दोनो उरोज तन कर सामने आ गये। फिर उसने मेरी सलवार का नाड़ा खोल कर उसे उतार दिया और मुझे बिल्कुल नंगी कर दिया। नंगी होने से मुझे शरम आने लगी मैं नीचे बै�� गयी।


अनिल ने प्यार से मुझे उ�� ाया और कहा,"नेहा........ तुम्हारी जगह बिस्तर पर है.... उ�� ो...."


मैने जैसे ही नजर उ�� ाई.... अनिल सामने नंगा खड़ा था। उसने कब खुद के कपड़े कब उतार लिये थे ये पता ही नहीं चला। मैने अपनी आंखे बन्द कर ली और अब मुझे होने वाली चुदाई नजर आने लग गयी थी। उसका लन्ड खड़ा हुआ था। मैने धीरे से उसका लन्ड पकड़ लिया। और उसकी चमड़ी ऊपर सरका दी.... उसका फूला हुआ लाल सुपाड़ा मेरे सामने था। मैने जीभ से उसे चाट लिया। अनिल कराह उ�� ा। उसका लन्ड कड़क होता जा रहा था। मैने अब सुपाड़ा मुँह में भर लिया। और उसका लन्ड नीचे से पकड़ कर उसे ऊपर नीचे करने लगी। अनिल ने मेरे बोबे पकड़ लिये और उन्हे धीरे मसलने लगा। बोबे पर से लाल गुलाल अब हटने लगा था।


उसने लन्ड मेरे मुंह से निकालते हुए अनिल ने कहा," झुक जाओ.... घोड़ी बन जाओ.... देखो नेहा .... अब तुम चुदने वाली हो.... तैयार हो ना...."


"हाय रे.... नंगी तो हूं ना....अनिल.... " मैने कहा और शरमा गयी....


मैने बिस्तर पर अपने दोनो हाथ रख लिये और गान्ड पीछे उभार कर गान्ड की दोनों गोलाईयां उसके सामने कर दी। उसने अपना लन्ड हाथ से सहला कर मेरी गोलाईयों के बीच दरार में रख दिया। उसका लन्ड जैसे ही मेरी दरारों में लगा मुझे झुरझुरी आ गयी। अब उसका लन्ड सरक कर मेरी गान्ड के छेद पर आ टिका था। उसकी इच्छा गान्ड चोदने की थी ....


मेरी गान्ड उसके लिये पूरी तरह से तैयार थी। उसके दोनों हाथ मेरी चूंचियों पर आ कर जम गये थे। कुछ ही क्षणों में उसने मेरी चूंचियां भींचते हुये लन्ड पर जोर मारा.... फ़क से उसका मोटा सुपाड़ा छेद में घुस पड़ा। मुझे हल्का सा दर्द हुआ। पर मोटे लन्ड का प्यारा सा अहसास हुआ। मेरी गान्ड में फंसा उसका लन्ड मुझे असीम आनन्द दे रहा था....


तभी उसका एक जोरदार धक्का पड़ा.... मेरी चीख निकल गयी,"हायीईईऽऽऽऽऽऽऽऽऽऽ............ ओह्.... सोरी.... "


"नेहा .... देखो ये कब से तुम्हारा दीवाना है....पूरा जाने दो अन्दर इसे ....।"


"हाय अनिल........ हां जाने दो........"


मेरी गान्ड पर उसने अपना थूक टपका कर उसे और चिकना बना दिया।


"हाय मेरे राजा....थूक लगा कर चोदोगे....?"


अनिल हंस पड़ा.... और उसका लन्ड मेरी गान्ड में अन्दर बाहर सरकने लगा। मेरे सारे शरीर में उत्तेजना की लहर दौड़ पड़ी। मुझे उसके लन्ड का अन्दर बाहर जाना और रगड़ का अह्सास मस्त किये दे रहा था।


"हाय अनिल........ ये तुम्हारा लन्ड कितना प्यारा है.... कैसा सरक रहा है...."


अनिल को ये सुनते ही और मस्त हो गया और मुझे अच्छा लग रहा है ये जानकर और भी जोश में आ गया। उसका लन्ड मेरी गान्ड में अब तेजी से उतरने लगा था। मेरी गान्ड चुद कर मस्त हो रही थी । मुझे हालांकि चुदाई जैसा तेज मजा तो नहीं आ रहा था....पर मैं अनिल को यही जता रही थी कि मैं आनन्द से पागल हुई जा रही हूँ।


"हाय मेरे राजा चोद मेरी गान्ड को ........ पेल दे अपना लन्ड .... हाय क्या लन्ड है...."


अनिल मेरे आनन्द को देख कर और ही मस्त हुआ जा रहा था। अब उसने मेरी गान्ड में से अपना लन्ड निकाल लिया.... मुझे लगा कि शायद ये झड़ने वाला होगा .... उसने अपने लन्ड को मेरी चूत पर मारा.... मेरा चिकना पानी चूत में भरा था। उसका गीला लन्ड मेरी चूत के बाहर फ़िसलने लगा फिर सरकता हुआ चूत में अन्दर बढ चला। अब सच में मेरी जान निकलने की बारी थी.... तीखी मि�� ास के साथ मेरे चूत में उसका लन्ड अन्दर जा रहा था ............ये था असली चुदाई का मजा। मै चिहुंक उ�� ी। मुख से मी�� ी सी सिसकारी निकल पड़ी।


"हाय रीऽऽऽऽऽ अनिल........मेरी चुद गई रे.... हाय घुसा दे राम........"


"नेहाऽऽऽऽऽऽ.... तुम्हारी चूत मुझे मार डालेगी मुझे........" अनिल भी कराहता हुआ बोला। उसके हाथ मेरी चूंचियो को मींज रहे थे। वो कभी मेरे चूंचक खींचता कभी जोर से मसक डालता। मै निहाल हो उ�� ी थी। मेरी चूत में गजब की मि�� ास भरती जा रही थी.... मैं तेजी से सीमाएँ पार करने लगी.... लगभग मेरे मुँह से सीत्कारें निकलने लगी।


"आये हाय रे....मेरे राजा ........ चोद दे रे.... मेरी चूत तो गयी आज........ हाय मै चुद गयी...."


"मेरी रानी .... तेरी चूत की मैं आज मां चोद दूंगा .... साली को फ़ाड़ दूंगा...."


अनिल का धीरज भी छूटता जा रहा था। वो गालियों पर उतर आया था.... यानी अब सब कुछ उसके आपे से बाहर था....


"साली........रंडी.... तेरी भोसड़ी मारूं ........ मेर लन्ड हाय रे...."


"मेरे प्यारे अनिल।........ हां हां ........मेरी चूत का भोसड़ा बना दे.... लगा ....जोर से चोद्.... हाय राम्...."


"हाय मेरी छिनाल.... तेरी बहन को....तेरी मां को.... रे.... आऽऽऽह्.... सबको चोदा मारू.... मेरी नेहा........"


उसकी मी�� ी मी�� ी गालियां सुन कर मेरी चूत में जोरदार मि�� ास भरने लगी.... मैं चरमसीमा पर पहुंचने लगी। उसकी नन्गी बातों ने मुझे झड़ने की ओर अग्रसर कर दिया। मैं अपने आप को रोकती रही....पर असफ़ल रही........ मेरी चूत का पानी आखिर छूट ही पड़ा।


"अनिल....आय राम ....मैं तो गई .... जरा जोर से झटके मार...." उसने मेरी चूंचियां और दबाई और झटके मारने लगा.... पर हाय रे....मै अब झड़ने लगी.... मैं अपनी चूंचियां उससे छुड़ाने लगी....मेरी चूत अब बार बार लहरें मार मार कर अपना रस छोड़ रही थी। मै अब पूरी झड़ चुकी थी। मैं अब बस और नही चुदना चह्ती थी। पर उसने और जोर लगा कर लन्ड मेरी चूत में दबा दिया,"आह नेहा........ मैं गया.... आया........ निकला रे...." मैंने अपनी चूत में से उसका लन्ड तुरंत निकाल लिया।


"ओह्....नहीं....रूको....ऽभी नहीं...." पर मैने लन्ड निकाल कर उसे मु�� में ऐसा दबाया कि उसके लन्ड ने मेरे हाथ में अपना वीर्य छोड़ दिया। मैं उसके लन्ड को दूध निकालने जैसे खींच कर दुहने लगी.... उसके लन्ड से पिचकारी निकल कर मेरे हाथों को गीला कर रही थी....उसका सारा वीर्य उसके लन्ड पर मल दिया.... और अपने गीले हाथों में उसका वीर्य अपने हों�� ो से चाट लिया.... अनिल ने बड़े प्यार से मुझे देखा और अपने नंगे बदन से मेरा नंगा बदन चिपका लिया....हम कुछ पल ऐसे ही लिपटे खड़े रहे और प्यार करते रहे।


फिर अनिल अलग हो गया और अपने कपड़े पहनने लगा। मैने भी जल्दी से कपड़े पहन लिये। अनिल ने ज्योंही दरवाजा खोला तो नीता सामने खड़ी थी ....


"अरे नीता.... यहां कब से खड़ी हो...."


"अरे अनिल जी.... दिन को चुदाई कर रहे हो....बाहर पहरा दे रही थी...." मैं सर झुका कर चुपके से निकलने लगी।


"नेहा.... चुदवा कर शरमा रही हो .... अब इस चुदाई की हमें मि�� ाई तो खिला दो...." नीता बड़ी बेशरमी से बोली।


"रात को सब मिल कर खायें तो मजा आयेगा ना........" नीता और अनिल दोनो हंस पड़े.... मैने शरमा कर अपने हाथों से अपना मुँह छुपा लिया.... नीता से प्यार से मुझे चूम लिया।
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ज़ा आता है., भाभी बोली शायद यही सच है.तुम क्या कर रहे हो..मैंने कहा मू�� मार रहा ऊँ..भाभी बोली मत मारो मै अभी रमेश के सोने के बाद तुमसे चुदवाने आऊंगी., ये कह कर वो मेरे लंड को थपथपा के जाने लगी..मैंने उनकी चुन्ची को दबा दिया..वो उईई.कर उ�� ी..और फुसफुसाके बोली..थोड़ा सब्र करो..सब दूंगी..राज्जा..पूरी नंगी होके चुदवाऊन्गी और वो अपने कमरे में चली गई.. जाते ही रमेश बोला यह दूध में शक्कर डाला ही नही है जाके शक्कर मिला के ले आओ . भाभी बिना कुछ कहे वो दूध लेके बाहर आयी और मुझे इशारा कर के किचेन में बुलाया..मै उनके पीछे उनकी गांड से मेरा खड़ा लंड टिका के खड़ा हो गया..उन्होंने भी मेरे लंड पर अपनी गांड और चिपका दी..फ़िर बोली कोई नींद की गोली है ?मैंने कहा बहुत है.. ममी पहले लेती थी मैंने दो गोली निकाल के दी भाभी ने दोनों गोली पीस के दूध में डाली और शक्कर डाल के फ़िर चम्मच से हिला के दूध तैयार किया फ़िर वो बोली मुझे तुम्हारा लंड दिखाओ , मैंने अपना पाजामा खोला और अपना मूसल बाहर निकला..उसक् ? सुपाडे के छेद से अब पानी निकल रहा था. उसने अब उसे हाथ में लिया..बाप रे ये तो दुगुना लंबा और मोटा है..मेरा ७.५ इंच लंबा और २.५ इंच मोटा लंड हाथ में लेने की कोशिश की..और कहा कितना सलोना है..और कितना तगड़ा है बहुत मोटा है ये..मेरी चूत फाड़ डालेगा..और झुक के मेरे लंड को चूमा और कहा मेरा इंतज़ार करो ऐसा बोल के दूध अपने साथ ले के वो बेडरूम में चली गयी.
मै अपने बेड पर आ के पाजामा खोल के सो गया..लंड को मै सहला रहा करीब २० मिनिट के बाद भाभी बेडरूम का दरवाजा खोल के मेरे रूम मे आई उसने आते ही मुझसे कहा संजय आज मेरी पूरी प्यास बुझा दो मेरी चूत को तुम्हारे मोटे लंड से तृप्त कर दो..मैंने भाभी को अपने बिस्तर पर मेरे ऊपर खीच लिया मै तो नंगा ही था, भाभी ने मेरे लंड को महसूस किया मै उन्हें चूमने लगा. उन्होंने फूस फुसते हुए कहा..इतना मोटा लंड मेरी चूत मे धीरे धीरे डालना संजू. मै उन्हें चूमते हुए उनका ब्लाउज खोलने लगा.अंडा ब्रा ऍ ?ही पहना था शायद रमेश से चुदवाते हुए वो पहले ही खोल चुकी थी..मैंने उनकी साड़ी भी खोल के नीचे फेंक दिया..अब सिर्फ़ पेटीकोट मे थी वो..कितनी गोरी थी..मै उन्हें चूमे जा रहा था और चुन्चिया मेरे हाथो मे थे..मस्त नरम मख्खन जैसी चुन्चिया थी..मैंने उनके पेट को सहलाते हुए नीचे चूत पर हाथ लगाया उफ़ लगा जैसे आग लगी है मैंने उनके चूची को आटा गूंथने जैसे मसला वो आह..ओह्ह.. कर रही थी लेकिन बहुत धीरे...फ़िर मैंने उनका पेटीकोट का नाडा खोल दिया और उसे नीचे खीच दिया..चड्डी भी नही थी..मैंने भाभी को मेरे बेड परलिटा दिया उफ़ क्या छोट थी पुस्तक मे कुंवारी लड़की की जैसी चूत थी �� ीक वैसी ही चूत की दरार थी..मै तो पागल होने लगा..झुक कर चूत को चूमा..चूत गीली थी..मैंने दाने को ढूंढा उसे मसल दिया भाभी ऑफ़ कर उ�� ी..फ़िर एक ऊँगली गीली चूत मे दाल दी..बहुत टाईट थी चूत..मेरी ऊँगली भी मुश्किल से जा रही थी..भाभी ने कहा अब मुझे पहले तुम्हारे लंड से च ोद दो.. .मैंने उन्हें और तडपाने के लिए अब मेरी जीभ चूत पर लगा दी और चूसने लगा अब भाभी बेचैन हो गई..अहह संजय..क्या कर रहे हो..आह्ह..इश..ओ माँ और जीभ चूत पर लगाने से उनकी चूत से और पानी निकलने लगा ..उन्होंने कहा पहले एक बार इस लंड को अन्दर दाल के चोद डालो..फ़िर बाद मे जो चाहे करना..मैंने कहा �� ीक है..और मै उनके पैरों के बीच बै�� गया.मैंने देखा उनकी चूत का सूराख बहूत छोटा है..पास ही टेबल पर फेयर न लवली करें का नया ट्यूब था उसे मेरे लंड पर अच्छे से लगाया..और ऊँगली से भाभी के सूराख पर भी.., भाभी ने अपने पैर अच्छे से फैला दिए मैंने अपना लंड चूत पर रखा..भाभी ने तुरंत लंड हाथ मे पकड़ लिया और अपनी चूत पे रगड़ने लगी , थोड़ी देर के बाद मेरे लंड का सुपाडाअपने चूत के गुलाबी छेद पर रखा और फूसफुसाके बोली संजू ये इतना मोटा है तुम मेरी चूत का ख़्याल रखना..एकदम आहिस्ता आहिस्ता अन्दर डालो..मेरी चूत फाड़ मत देना...ये सुनकर मै और जोश म् ? आ गया..फ़िर भी मैंने लंड के सुपाड़े को अन्दर धकेला..और भाभी..उईई..माँ...कर के उछल पड़ी मैंने अब लंड को धीरे धीरे अन्दर घुसाने लगा लेकिन चूत बहुत टाईट थी..मैंने थोड़ा जोर लगाया और चुन्ची दबा के धक्का दिया आधा लंड अन्दर घुस गया और भाभी उछल पड़ी..मैंने देखा चूत से थोड़ा खून निकल आया..मै डर गया..मैंने पूंछा भाभी ज्यादा दर्द हो रहा है क्या.
भाभी ने कहा तुम फिकर मत करो अन्दर डालो पूरा..आह्ह मजा आ रहा है..लेकिन भाभी के चेहरे पर दर्द दिख रहा था..मैंने आधे घुसे लंड को अन्दर बाहर करना शुरू किया.थोड़ी देर में भाभी ने कहा और तेज ..और तेज.आह..और मै जोश में आ गया.मैंने लंड को बाहर खीचा और पुरी ताकत से अन्दर दाल दिया और इस बार भाभी जोर से चीखने जा रही थी लेकिन अपने ही हाथो को मुँह में डाला और काट लिया उनकी कलाई से खून निकल आया लेकिन वो अब कमर उछालने लगी थीं मुझे चिपक रही थीं..आह..ऊह्ह....संजू..मै आने वाली हूँ..और जोर से..और...और फ़िर उन्होंने दो टिन झटके मारे और मुझसे चिपक गई..उनका पूरा बदन कांप रहा था पसीना निकल आया था और मेरे लंड पर भी बहुत गरम गरम लगा..उनका पानी..उन्होंने मेरा चुम्मा लिया और कहा....आज मेरी चूत पहली बार झड़ी है जिंदगी में..अब तुम जैसे चाहो चोदो मुझे..मैंने कहा तुम्हारी चूत से खून भी निकला है..उन्होंने कहा ..सच्च...मैंने अपना लंड निकल कर दिखाया..जो की लाल हो रहा था..वो मुझसे और जोर से लिपटी और कहा आज ही मै सही मायने में औरत बनी हूँ.. भाभी ने जिस तरह से चूत को झटके दिए उससे मै तो घबरा गया था..मै उनसे कुछ पूछने जा रहा था उन्होंने मेरा मुह हाथ से बंद किया और मेरा लंड वापस चूत में डालने का इशारा किया इस बार मैंने लंड को एक झटके में अन्दर डाला..भाही ने फ़िर से कमर उछालना शुरू किया..शायद अभी पूरी झड़ी नही थी..मेरे लंड को चूत में कस लिया मै उनकी चूची चूसते हुए जोर से झटके मारने लगा“ भाभी ने कहा संजय..बहुत मज़ा आया रहा है..तुम सच में अच्छा चोदते हो..और तुम्हारा ये मजबूत लंड आः..अब मुझे भी मेरे लंड में से कुछ निकलेगा ऐसा महसूस हो रहा था..लंड और कड़क हो के फुल रहा था..मैंने अब धक्को की स्पीड बड़ा दी मेरे धक्को से भाभी की चुचिया उछल रही थी..और ७-८ धक्को के बाद मैंने लंड को चूत की गहराई में पेल दिया और मेरे लंड से पिचकारियाँ निकलने लगी..एक निकली..दुसरी निकली..तीसरी..चौथी...और ऐसे क़रीब ७-८ मोटी धार की पिचकारी से भाभी की चूत पूरी भर गयी..मै उनके ऊपर ल???ट गया..वो मेरे बालों में हाथ फेरने लगी..फ़िर हमने एक दुसरे के हो�� ों को बहुत जोर से चूमा.. ,क़रीब ५ मिनिट के बाद भाभी ने कहा अब लंड को बाहर निकाल लो..मै उ�� ा और लुंड जो अभी भी आधा खड़ा था..उसे बाहर निकाला..पक्क की एक आवाज़ हुयी..और भाभी की चूत से मेरा लावा और खून दोनों बह कर चादर पर गिरने लगे , मैंने देखा पहले जो चूत सिर्फ़ एक पतली दरार दिख रही थी अब वो अंग्रेज़ी के "ओ" जैसी दिखने लगी थी , मैंने सोचा भाभी को अब रमेश का लंड बहुत ही छोटा लगेगा.
भाभी ने उ�� ाते हुए आह्ह की आवाज़ की..मैंने अहिस्ता पूंछा क्या हुआ..उन्होंने कहा चूत चरपरा रही है.. मैंने उनका हाथ पकड़ कर खड़ा किया .. उसके बाद हम दोनों बाथरूम में गए..भाभी और मै दोनों नंगे ही थे.. बाथरूम में भाभी चूत साफ करने बै�� ी तो मैंने देखा और भी बहुत सा माल उनकी चूत से निकला..उन्होंने कहा..कितना माल निकाला है..रमेश का तो एक चम्मच ही गिरता है...ये तो क़रीब १० चम्मच है..फ़िर उन् होंने मेरे लंड को साबुन लगा के धोया..लंड फ़िर खड़ा होने लगा..मैंने कहा भाभी और एक बार...भाभी ने कहा..देखते है..फ़िर हम दोनों बेद पर आ कर लेट गए नंगे..और सो गए..थोड़ी देर मैंने उनकी चूची मसली चुम्बन किया..उनकी चूत सह्लायी..भाभी भी मेरे लंड को सहला रही थी.. एक घंटे के बाद फिरसे मेरा लंड खड़ा हुआ अब मैंने भाभी को जगाने लगा.. वो जाग गई थोड़ी देर चुम्बन के बाद मैंने भाभी से कहा..मेरा लंड चुसो न..उसने पहले मना किया फ़िर किस किया..मैंने भाभी को कहा चाटो..उन्होंने चाटना शुरू किया मैंने कहा सुपाडे को मुह में लो..,उसने कोशिश की..लेकिन पूरा नही ले पा रही थी....मैंने भाभी से कहा तुम अपनी चूत मेरे मुँह के ऊपर रखो..वो दोनों पैर फैला के मेरे मुह पर बै�� गई..मैंने उन्हें कहा मेरे लंड को झुक के मुँह में लो..उसने किया..और इस तरह चूत चटवाते हुए क़रीब १२-१३ मिनिट में वो उह.. आह्ह..और जोर से चाटो..जीभ मेरे अन्दर तक डाल दो..आह्ह..उनकी चूत से पानी निकल के मेरे गले और चहरे पर बहने लगा था..मै उनकी कुंवारी गांड के छेद को ऊँगली से टटोल रहा था..और भाभी..आह्ह..मेरा होने वाला है..संजय..पूरी जीभ अन्दर डालो..और भाभी ने चूत मेरे मुँह पर दबा दी और झटके मारने लगी..इस बार उन्होंने अपने चूत के पानी से म???रा पूरा मुह भिगो दिया...और बदन ऐँ�� कर शांत हो गई..थोड़ा चूसने के बाद मैंने भाभी को चार पाया बनाया और पिछे से चूत में लंड डाला...इस बार क़रीब ३० मिनिट से ज्यादा मैंने भाभी को चोदा..वो बिस्तर पर पेट के बल लेट गई..लेकिन मै चोदता रहा.. इस दौरान भाभी और ३ बार झड़ी..फ़िर मै पीछे से ही भाभी की चूत में झड़ गया.. और उनके पी�� के ऊपर लेट गया और सामने हाथ डाल कर चूची दबाता रहा.
इस तरह आधा घंटा सोने के बाद हम लोग फ़िर नंगे ही बाथरूम में गए ..तब सुबह के चार बज रहे थे..बाथरूम में साफ होने के बाद वापस आके मैंने भाभी को नंगी ही पकड़ के .बहुत ...चूमा .. मम्मे दबाये..फ़िर वो अपने कपड़े पहन कर बेड रूम में रमेश के पास चली गई.. अब तो मै भाभी को बहुत चोदता हू हपते में तीन चार रात तो भाभी मेरे ही बिस्तर पर रात गुजारती है, और चुदाई का पूरा मज़ा लेती है.. शायद इस बार भाभी गर्भवती है कह रही थी मासिक नही हुआ अभी तक...ये बच्चा मेरा ही है.. ये कहानी पढ़ने वाली सभी भाभियों और उनकी शादी शुदा सहेलियों से मै उम्मीद करता हू की वो भी मेरे इस अनुभव का लाभ उ�� ाएँगी.
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मेरे दोस्त की बीवी

हाय,मैं एक ३० साल का आदमी हूं और दिल्ली मैं रहता हूं, मेरा एक
दोस्त है जो कि रामपुर मैं रहता है और उसके भाई भाभी हलद्वानी मैं
रहते हैं। वो पहले उसके ही साथ रहते थे पर अब कुछ चार साल से अलग
रह रहे हैं।
ये कहानी करीब साढ़े चार साल पहले शुरु हुई थी मैं साल मैं एक
या दो बार अपने दोस्त से मिलने उसके घर जाता था , सफ़र को पास करने
के लिये मैं अक्सर नोवेल या सेक्स स्टोरी बुक्स ले लेता था।
अपने दोस्त के पस्स जाने के बाद मैं अपना बेग ऐसे ही रख
देता था पर एक दिन जब मैने अपना बेग खोला तो मुझे अपनी सेक्स
स्टोरी बुक नहीं दिखाई दी।
तब मैने अपने दोस्त से पूछा तो उसने मना कर दिया कि उसने
नहीं ली है तभी थोड़ी देर बाद उसकी भाभी जिसका नाम लवर (नाम
बदला हुआ) था वो बोली कि तुम क्या ढूंढ रहो हो तब मैने
कहा कि मेरे एक किताब नहीं मिल रही है तब उसने
कहा की कहीं तुम इस किताब को तो नहीं ढूंढ रहे हो तो मैं उसके हाथ
मैं किताब देख कर चौंक गया तब उसने कहा कि मैं तो अकसर
ही तुम्हारे बेग से किताब निकाल कर पढ़ती हूं पर इस बार तुम्हे
पता चल गया। इस तरह से उससे मेरा खुला हंसी मजाक (सेक्सी भी )
शुरु हो गया। फिर कुछ दिनो बाद मेरे दोस्त के भाई और
भाभी हलद्वानी चले गये।
फिर जब मैं करीब छह महीने के बाद अपने दोस्त के
यहां गया तो दोस्त से मिलने के बाद मैं हलद्वानी चला गया अपनी लवर
से मिलने। वहां जा कर देखा तो मेरे दोस्त का भाई टूर पर गया हुआ
था पर लवर मुझे देख कर बहुत ही खुश हुई।
अब मैं समझ गया कि आज बहुत कुछ हो सकता है। पहले तो हम आपस
मैं हंसी मजाक करते रहे फिर रात का खाना खाने के बाद उसने
मेरा बिस्तर गेस्ट रूम मैं लगा दिया और खुद अपने बच्चे को लेकर
अपने बेडरूम मैं चली गयी।
थोड़ी देर बाद वो मेरे रूम मैं दूध लेकर आयी तब मैं उसे देखता ही रह
गया क्योंकि उस वक्त उसने हालांकि सलवार सूट पहन रखा था पर
वो उस वक्त क्या लग रही थी मैं बयां नहीं कर सकता। उसने मुझे एक
नोटी स्माइल के साथ दूध दिया तो मैने मजाक मैं कहा कि मुझे
तो दो चूची वाली गाय का दूध पीना है। तब उसने हंस कर कहा कि पहले
तुम इस तो पी लो फिर देखा जायेगा।
तब मैने मन में सोचा कि आज तो मैं तुझे चोद कर ही रहुंगा। फिर
दूध पीने के बाद वो मेरे पास आ कर बैठ गयी और मुझसे मजाक करने
लगी तब मैने कहा कि अब मुझे दो चूची वाली गाय का दूध पीना है तब
उसने कहा कि मैने कब मना किया है पर तुम्ही देर रहे हो।
सोरी दोस्तों, अभी मेरे बोस ओफ़िस में आ रहे हैं इस लिये मैं
अपनी कहानी अधूरी छोड़ रहा हूं शेष जल्दी ह
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मैं और मेरी भाभी गर्लफ़्रेन्ड



हाय दोस्तों !


पता नहीं लोगों को चार पांच बार नई नवेली चुदाई करने को मिल जाती है, पर मैंने तो एक बार में भी शायद देर कर दी।


मेरी कहानी ऐसी है कि मैं शायद कभी लोगों को समझ नहीं पाया खासकर लेडीज को, पता ही नहीं लगता कि उन्हें कब चुदना है कब नहीं? मेरी कहानी कुछ ऐसी है।


मैं बहुत ही सेक्सी किस्म का इन्सान हूँ, अक्सर सेक्स के बारे में सोचता रहता हूँ।


एक दिन मेरे भाई (सगा नहीं) की बीवी से मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि आप बड़े मज़ाकिये हो। फिर उसने मेरा नम्बर ले लिया। उसके एक सप्ताह बाद उसने हमारे फर्म से काम करना शुरू कर दिया। मेरा फर्म कंप्यूटर डील करता है इसलिए जब भाई घर पर नहीं होते थे वो मुझे घर पे फ़ोन करके बुलाती और कहती कि उनके कंप्यूटर में कुछ प्रॉब्लम है इसलिए सर्विस के लिए मुझे जाना ही पड़ता था। वो मेरे करीब बै�� जाती थी लेकिन कभी भी ग़लत हरकत नहीं की।


उसके बाद जब उसे लगा कि मैं कुछ समझ नहीं पा रहा हूँ, तो उसने खुलकर आई लव यू ! भी बोल दिया लेकिन मैं समझ नहीं पाया फिर उसने मुझे कई बार बाहर घूमने के लिए बुलाया और मैं भी चला गया। फिर वो मेरे बगल में सटकर बै�� जाती और बातें करती। कहती कि उसका मन मेरे बिना नहीं लगता। मैंने भी कह दिया कि वो मुझे अच्छी लगती है।


फिर एक दिन जब हम अकेले बै�� े थे तो मैंने उसकी ब्रेस्ट को छू लिया क्योंकि हम पार्क में थे इसलिए मैं उसके कपड़े नहीं उतार सका, फिर २ मिनट बाद वो चलने को कहने लगी और हम चल दिए।


अगले दिन उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया और हम पार्क पहुँच गए। थोड़ी देर इधर -उधर की बात के बाद मैंने उसे छूने की इच्छा जाहिर की और वो बोली इधर बहुत भीड़ है। हम एक कोने में चले गए, वहां उसने धीरे से कहा अब छू सकते हो!


मैंने कहा- क्या?


तो बोली- कुछ नहीं !


फिर मैंने उसे पकड़ लिया और उसके हों�� चूमने लगा। वो भी मजे ले रही थी तभी उधर से कोई आदमी के आने की आहट हुई और हम दूर दूर हो गए। वो डर गई और घर चलने को कहा। हम घर आ गए वहां कोई नहीं था पर जब मैंने उसे छूना चाहा तो उसने मुझे मना कर दिया और डांटने लगी, कहने लगी- आप बड़े बदतमीज़ हैं। और मैं घर चला गया।


फिर ८-१० दिन बाद उसने फिर से मिलने के लिए बुलाया। क्योंकि उसके घर में नॉन-वेज़ नही बनता था इसलिए उसने मुझे लंच के लिए मुझे एक होटल में बुलाया और मैं गया। फिर उसने कहा- चलो एक कमरा लेते हैं और कुछ देर बै�� ते है।


पर मैंने मना कर दिया क्योंकि मेरे पास १००० रुपये नहीं थे, कमरे का किराया ८०० रुपये था। इसलिए मैंने कहा कि मेरे पास समय नहीं है और जल्दी ऑफिस जाना है। फिर वो मुझे एक कपड़े की दुकान में ले गई, मेरे लिए शर्ट खरीदी, मुझे गिफ्ट किया और मुझे ट्राई रूम के अन्दर बुलाने लगी। पर दुकान में भीड़ होने के कारण मैंने मना कर दिया। फिर उसको घर छोड़ आया।


फिर उसके घर पर बहुत बार मिले लेकिन उसने मुझे छूने भी नहीं देती दिया। एक दिन वो कहीं बाहर जा रही थी तो मुझे स्टेशन पर छोड़ने के लिए बुलाया और जब गाड़ी आई तो बिछड़ते हुए उसकी आंखों में आंसू आ गए। मैं सोच में पड़ गया कि वो मुझसे कितना प्यार करती है ! पर उसके बाद वो आई और मुझसे दूर रहने लगी। एक टूर पर पूरे परिवार के साथ गई और मुझे घर पर रहने को कहा। वो चली गई मुझे लगा कि वो मुझे फ़ोन करेगी पर उसने नहीं किया। फिर वो वापिस आ गई और मुझसे दूर रहने लगी। मेरे समझ में नहीं आ रहा था कुछ भी।


फिर एक दिन पता लगा कि वो मेरे ऑफिस के एक स्मार्ट लड़के जो कि मुझसे लंबा और स्वस्थ था उससे बात करने लगी थी। इसी बीच मेरा तबादला ७ किलोमीटर दूर वाली दुकान में हो गया था और वो दोनों खूब मिलने लगे। मुझे बहुत बुरा लगा क्योंकि मैं शायद उससे प्यार करने लगा था और उसके साथ सेक्स भी करना चाहता था, पर शायद देर हो चुकी थी।


उसने मुझसे मिलने से मना कर दिया जिसकी वजह से हम दोनों में खूब झगड़े हुए और वो मुझसे और दूर हो गई। अब न मैं उससे फ़ोन करता न वो मुझे। इसी बीच मेरी जिंदगी में एक लड़की आ गई जिस कारण मैं उससे आसानी से दूर हो सका।


आज फिर से उसने मुझे फ़ोन किया और मैं फिर से उलझन में हूँ।
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Smile मैं, मेरी बीवी और भाभी

[COLOR="red"मैं, मेरी बीवी और भाभी[/color]

मेरे तायाजी के लड़के यानि सुमित भैया कनाडा में दो साल के ट्रेनिंग के लिए गए तो विशाखा भाभी हमारे यहाँ रहने के लिए आ गई। कारण कि तायाजी चाहते थे कि भाभी को अकेलापन ना लगे, तायाजी अकेले ही हैं इसलिए।

सुमित और विशाखा की शादी भी कुछ एक महीने पहले हुई थी। भाभी मुझसे दो साल बड़ी है। मेरी शादी केवल दस दिन पहले ही हुई थी। मेरी बीवी और मैं नई-नई शादी का पूरा मजा ले रहे थे, जब भी समय मिलता, हम दोनों कमरे में बंद हो जाते।

भाभी हमें खूब चिढ़ाती।

लेकिन मेरी बीवी चिढ़ती नहीं, बल्कि भाभी को उलटा चिढ़ाती और कहती- भाभी कभी अचानक हमारे कमरे में मत आ जाना ! नहीं तो आपकी और साथ ही मेरी भी हालत खराब हो जायेगी।

दोनों खूब मजाक करती।

धीरे-धीरे भाभी की तड़प हम दोनों के सामने भी दिखाई देने लगी।

एक दिन मेरी बीवी ने मुझसे कहा- जानू, भाभी की हालत देखी नहीं जाती ! कल रात को मैंने उन्हें तकिया दबाते हुए और सिसकी भरते हुए देखा तो मुझे उन पर बहुत तरस आया ! भैया तो अभी दो साल के बाद आयेंगे। उन्होंने तो भाभी के साथ केवल थोड़ी रातें बिताई हैं।

हम दोनों अब जब भी भाभी को अकेला कमरे में जाता देखते तो पीछे चले जाते।

एक बार हम दोनों ने देखा कि भाभी ने अपने सभी कपड़े उतार दिए और पलंग पर लेट गई। वो तड़पने लगी और तकिये को पकड़ कर बिस्तर पर उलटने-पलटने लगी। फिर हमने देखा कि भाभी ने अपनी ऊँगली अपने जननांग में डाली और सिसकी भरते हुए ऊँगली अन्दर-बाहर करने लगी। हम दोनों को ही भाभी पर बहुत दया आई, दोनों भरे मन से अपने कमरे में लौट आये।

रात को मेरी बीवी जब भाभी के कमरे में गई तो मेरी बीवी ने देखा भाभी फिर वो ही दोहरा रही थी। मेरी बीवी ने धीरे से दरवाजा बंद किया और भाभी के पास पलंग पर बैठ गई।

उसने भाभी का हाथ पकड़ा और बोली- भाभी आप ऐसा मत करो।

भाभी बोली- तो फिर मैं क्या करूँ? दो साल कैसे गुजारुंगी मैं?

मेरी बीवी कुछ ना बोली।

भाभी ने मेरी बीवी का हाथ पकड़ लिया। भाभी का हाथ गर्म हो रहा था। भाभी ने मेरी बीवी का हाथ पकड़ा और अपने गुप्तांग और जननांग से छुआ दिया। मेरी बीवी काँप गई। वो जैसे ही उठने को हुई, भाभी ने उसे अपनी बाहों में भर लिया।

भाभी निर्वस्त्र थी। मेरी बीवी को लगातार भाभी पर आती दया ने उठने नहीं दिया। वो कुछ देर बैठी रही।

जब भाभी शांत हुई तो वो लौट आई।मेरी बीवी ने मुझे यह सब बताया तो मैंने कहा- इसमें कुछ गलत नहीं है, तुम उससे लिपट जाया करो, भाभी की आग थोड़ी तो शांत हो जायेगी।

अब दोनों इस तरह से कई बार आपस में मिलने लगी।

एक बार मुझे किसी जरूरी काम से रात की गाड़ी पकड़कर अहमदाबाद जाना था। मैं स्टेशन चला गया। पहले कहा गया कि ट्रेन एक घंटा लेट है, फिर कहा गया कि दो घंटा लेट है, कोई अक्सिडेंट हुआ है इसलिए।

रात के बारह बज गए और घोषणा हुई कि कल दोपहर तक कोई ट्रेन नहीं चलेगी। मैं घर के लिए वापस रवाना हो गया। करीब एक बजे मैं घर पहुँचा। मैं जैसे ही अपने कमरे में दाखिल हुआ तो मैंने देखा कि भाभी मेरी बीवी के साथ मेरे पलंग पर लेटी हुई है, मेरी बीवी विशाखा भाभी को चूम रही है।

मेरी बीवी और भाभी दोनों ही निर्वस्त्र हैं।

मुझे ना जाने क्यूँ यह अच्छा लगा। मैंने सामान रखा और पलंग के पास आ गया।

दोनों ने जैसे ही मुझे देखा तो मेरी बीवी ने भाभी के ऊपर एक चादर ओढ़ा दी।

मैंने मेरी बीवी से कहा- मेरी ट्रेन कल दोपहर के बाद ही जायेगी। , यह तुमने बहुत अच्छा किया जो भाभी की मदद कर रही हो। दो साल तक भाभी कब तक तड़पेगी।

मेरी बीवी ने मुस्कुराकर मेरी तरफ देखा और बोली- जानू, मुझे भी ख़ुशी हुई कि आपने इस बात का बुरा नहीं माना.. भाभी आज मेरे साथ यहीं सो जाएँगी, आप पास वाले सोफे पर लेट जाइए।

मैं स्याली की बात मान कर सोफ़े पर सोने के लिए चल दिया।

तभी भाभी ने कहा- सोफे पर कैसे सोयेगा? डबलबेड है, तुम हम दोनों के बीच आ जाओ और जानू को भी यहीं सोने दो।

अब हम तीनों उसी पलंग पर सो गए। मेरी बीवी के एक तरफ मैं था तो दूसरी तरफ भाभी।

मैं बाथरूम गया, जब वापस लौटा तो मेरी बीवी भाभी के स्तनों की मालिश कर रही थी। मैं पलंग पर बैठ कर दोनों को देखने लगा।

मेरी बीवी ने मेरी तरफ देखा, भाभी हम दोनों को देख रही थी।

मैंने मेरी बीवी के होंठों को चूम लिया, मेरी बीवी ने भी मेरे होंठों को चूम लिया। इस दौरान मेरी बीवी भाभी के स्तनों की मालिश जारी रखे हुए थी।

भाभी हम दोनों को इस तरह से चूमता देख बेकाबू होने लगी, उनके जिस्म में बढती हलचलों को काबू में रखने के लिए मैं भी उसके स्तनों पर मालिश करने लगा।

भाभी अब तड़पने लगी। मेरी बीवी को और मुझे दोनों को भाभी को लेकर चिंता होने लगी।

मेरी बीवी ने मेरे कान में कहा- जानू, अगर आप बुरा ना मानें तो मेरा यह सोचना है कि जब तक भाभी अकेली है हम इन्हें सबसे छुपाकर अपने साथ ही सुला लिया करेंगे।

मैंने हाँ कह दिया।

मेरी बीवी ने मुझे कहा- जानू, यह बात हम तीनों के बीच में ही रहेगी।

भाभी की हालत लगातार बिगड़ने लगी, उनके मुँह से अजीब-अजीब आवाजें आने लगी।

मैंने मेरी बीवी से कहा- इस तरह से हम भाभी को किस तरह से संभालेंगे?

मेरी बीवी ने कुछ सोचा और बोली- जानू, तुम हमेशा मेरे ही रहोगे लेकिन मेरा कहा मानो, जब तक भैया नहीं आ जाते, आप भाभी को मेरे साथ साथ संभाल लो। भाभी के लिए तुम सुमित बन जाओ।

मैंने मेरी बीवी की तरफ हैरानी से देखा, मेरी बीवी ने कहा- जब मुझे कोई आपत्ति नहीं तो ! भाभी को देखो, कैसे तड़प रही हैं। आओ मेरे साथ आ जाओ।

मेरी बीवी के बार बार कहने पर मैं दोनों के बीच भाभी के साथ सटकर लेट गया।

मैंने भाभी के गाल पर एक हल्का सा चुम्बन लिया। भाभी ने एक आह भारी और मुझसे लिपट गई। मेरी बीवी ने मुझे इशारा किया और मैंने भाभी को लगातार चूमना शुरू कर दिया।

मेरी बीवी भी अब मुझे भाभी को संभालने में मदद करने लगी। उसने भी भाभी को गालों पर चूमा. अब भाभी मुझसे एकदम खुलकर चुम्बन लेने और देने लगी। मेरी बीवी भी अब शामिल हो गई और हमारा सामूहिक सेक्स शुरु हो गया था।

अब धीरे धीरे मैं भाभी को अपनी गिरफ्त में लेने लगा।मेरी बीवी ने मेरे लिंग को चूमकर एकदम खड़ा कड़क और लंबा कर दिया और उस पर कोंडोम चढ़ा दिया। मेरी बीवी ने भाभी को मुझसे अलग किया और उनकी टांगें फैला दी। मैंने तुरंत भाभी की टांगों के बीच में लेटकर अपना लिंग उसके जननांग के तरफ बढ़ा दिया।मेरी बीवी ने मेरे लिंग को भाभी के जननांग में थोड़े से जोर से अन्दर डाल दिया और फिर मैंने जोर लगाकर उसे और अन्दर पहुँचा दिया।

भाभी के मुँह से ख़ुशी की आवाजें निकलने लगी। अब मेरी बीवी से रहा नहीं गया। उसने मुझे इशारा किया, मैंने अपना लिंग भाभी के अन्दर से निकाला और मेरी बीवी के जननांग में घुसा दिया।

भाभी हमारे करीब आ गई और हम दोनों को चूमने लगी।

प्यारे दोस्तो, हेल्लो दोस्तों ,मेरा सैक्सी बोएय है , दोस्तों,
IF YOU HAVE ANY PROBLEM ABOUT SEX TELL ME I M SOLVE YOUR PROBLEM.
CALL ME NINE TWO ONE ONE ONE TWO THREE THREE ONE EIGHT.


भाभी हमारे करीब आ गई और हम दोनों को चूमने लगी।

उसने भी अब मेरी बीवी की पूरी मदद की। कुछ देर के बाद मैंने मेरी बीवी की योनि में अपने लिंग की धारा चला दी।

यह देख भाभी ने कहा- मेरे साथ भी करो !

मेरी बीवी ने मुझे कहा- आप भाभी को करो !

लेकिन मैंने भाभी को समझा लिया कि बाद में उनके अन्दर ही लिंग डालूँगा।

भाभी मान गई।

हम दोनों इसी तरह से लेटे हुए थे। भाभी जब यह देखा तो उन्हें बहुत अच्छा लगा।

मेरी बीवी ने भाभी से कहा- भाभी, अगर आप बुरा नहीं मानो और आप की इजाजत हो तो ये आपके साथ दिल्ली से लौटने के बाद कर लेंगे।

भाभी ने मेरी बीवी को चूमा और बोली- तुम मेरा कितना ख़याल रख रही हो। मुझे मंज़ूर है लेकिन यह बात केवल हम तीनों तक ही रहनी चाहिए।

मैंने भाभी के गाल चूमे और बोला- आप बिल्कुल चिंता मत करो, इस कमरे के बाहर यह बात बिल्कुल नहीं जायेगी..

भाभी ने मुझे और मेरी बीवी के होंठों को एक साथ जोर से चूम लिया। भाभी की आग थोड़ी बुझ चुकी थी।

इस तरह से लगातार मैं मेरी बीवी के जननांग को भेदता रहा और भाभी को चूमता रहा और करीब-करीब सारी रात ऐसे ही बिताई।

जब हम थक कर चूर हो गए तो देखा कि सवेरे के छह बज गए हैं, हम सो गए।

अगले दिन मैं अहमदाबाद चला गया और जब दो दिन के बाद लौटा तो मेरी बीवी और भाभी दोनों ने मुझे एक साथ अपनी बाहों में भर लिया।

वे दोनों ही तड़प रही थी, जैसे तैसे कर हमने दिन बिताया। रात को हम तीनों हमारे कमरे में थे। भाभी ने आज गहरे लाल रंग की ब्रा और पैंटी पहनी, मेरी बीवी ने उन्हें होंठों पर गहरे लाल रंग की ढेर सारी लिपस्टिक भी लगाईं।

भाभी एक बार-गर्ल जैसी सेक्सी लगने लगी थी।

मैंने भाभी को बाहों में लिया और एक साथ उसके होठों का सारा रंग अपने होंठों और जीभ पर ले लिया।

भाभी का सारा बदन सरसरा उठा।

फिर मेरी बीवी मेरे पास आ गई। हमने भाभी को और उत्तेजित करने के लिए आपस में कई सेक्स मुद्राएँ की।

भाभी की अब पूरी तरह से भड़क चुकी थी। मैंने कोंडोम लगाकर अपने को पूरी तरह तैयार कर लिया।

भाभी पलंग पर लेटी, मेरी बीवी उनके पास लेट गई और उन्हें चूमने लगी। मैंने भाभी के जननांग पर अपना और मेरी बीवी का हाथ रखा। भाभी का जननांग एकदम कच्चा और गुदगुदा लग रहा था जैसे कोई फल आधा पका हुआ हो।
मेरी बीवी और मैंने एक दूजे को देखा,मेरी बीवी ने मुझे होंठों पर चूमा और भाभी के जननांग को दिखाते हुए बोली- जानू, इस कच्चे फल को आज तुम पूरी तरह से पका दो !

उस दिन पहली बार तुमने इसे छुआ था लेकिन देखो कैसा अनछुआ लग रहा है। उस दिन तुमने केवल थोड़े समय के लिए ही इसे छुआ था, आज तुम इसे पूरा छू लो और इसे लाल कर पूरा पका दो। यह फल तुम्हारे लिए ही बना है ऐसा समझो !

भाभी लेटी हुई थी और हम दोनों उसके जननांग को बैठे हुए देख रहे थे। मैंने अपने को भाभी के ऊपर लिटा लिया और मेरी बीवी ने तुरंत मेरे लिंग को भाभी की उस गुदगुदी गुफा में धकेल दिया।

मैंने जोर लगाया...

मेरा लिंग दूर, बहुत दूर अन्दर तक चला गया। मेरी बीवी ने भाभी के होंठों को अपने होंठों से छू लिया। अब मेरी बीवी भी मुझसे चिपक गई। मेरी बीवी अपना एक हाथ भाभी के जननांग के पास ले जाकर मेरे लिंग को पकड़कर उसके अन्दर धकेलने लगी। मुझे और भाभी को यह बहुत अच्छा लगा।

मैंने भाभी का हाथ पकड़ा और एक अपनी और एक भाभी की ऊँगली साथ में मिलाकर मेरी बीवी की योनि में दोनों उंगलियाँ डाल दी।

मेरी बीवी को बहुत अच्छा लगा। हम दोनों अपनी उंगलियाँ मेरी बीवी के अन्दर धीरे धीरे चलाते रहे। काफी देर तक इसी तरह करने के बाद अचानक हम तीनों ही जोर से तड़प उठे।मेरी बीवीकी चूत अब गीली होकर बहने लगी थी। हमारी उंगलियों ने उस मलाईदार रस को बाहर आने से रोक दिया। तभी मेरा लिंग भी अपने से मलाई निकालकर भाभी के अन्दर छोड़ने लगा।

अद्भुत नजारा था !

हम तीनों इतना तड़पे और आनंद में आये कि हम पागल से हो गए।

इसके बाद मैंने मेरी बीवी योनि को अपने लिंग से भर दिया। भाभी ने अब मेरी बीवी की भूमिका निभाई।

सारी रात हम तीनों इसी तरह से सेक्स का मजा लेते रहे। मेरी बीवी की इच्छानुसार भाभी का जननांग अब पूरी तरह से गहरा लाल लाल हो चुका था।

सवेरे जब मैं ऑफिस के लिए रवाना होने लगा तो भाभी ने मुझे अपने कमरे में बुलाकर मेरे होंठों को चाशनी से भरा हुआ एक चुम्बन दे दिया।

इसी तरह से दिन बीतने लगे।

एक दिन खबर आई कि भैया को तीन दिन के लिए अपने परिवार से मिलने के लिए भारत आने का मौका मिल रहा है।

मैं और मेरी बीवी खुश हो गए कि चलो अच्छा है भाभी और भैया का मिलन हो जाएगा।

भैया आ गए लेकिन हम दोनों उस वक्त बहुत हैरान हो गए जब भाभी रात को भैया के कमरे से निकलकर हमारे कमरे में आ गई।

भाभी ने कहा कि वो हम दोनों के ही साथ सोएँगी।

भाभी ने बताया कि भैया तो कब के सो गए हैं।

हम दोनों हैरान कि आखिर भैया ऐसे कैसे सो गए जब कि पूरे एक साल बाद वो भाभी से मिल रहे हैं !

भाभी हम दोनों के साथ ही सो गई।मैंने और मेरी बीवी ने भाभी के दर्द को समझा और उनसे संभोग किया। जब उन्हें नींद आने लगी तो मैंने उन्हें छोड़ दिया।

अगले दिन भाभी ने बताया कि भैया ने वहाँ एक औरत से दूसरा विवाह कर लिया है और वो अब भाभी को नहीं अपनाएंगे।

भाभी ने मुझसे और मेरी बीवी से कहा- यह बात घर में किसी को भी पता नहीं चलनी चाहिये।

भाभी का मतलब यह था कि जब किसी को पता नहीं चलेगा तो भाभी का मेरे और मेरी बीवी के साथ का रिश्ता कायम रह पायेगा।

मेरी बीवी और मैं मान गए, भैया लौट गए।

आज भैया को गए दो साल हो गए हैं, भैया साल में एक बार आते हैं और तीन चार दिन रुक कर लौट जाते हैं। जब जब भैया आते हैं तो भाभी कमरे में उनके साथ सोती हैं लेकिन सिर्फ सबको दिखाने के लिए। भैया भाभी को छूते तक नहीं हैं..

सभी को यह लगता है कि सब कुछ सामान्य है।

इस बार जब भैया गए तो कह गए कि अब उनका आना बहुत कम या नहीं के बराबर रहेगा, उन्हें कनाडा के नागरिकता मिल चुकी है।

मेरी बीवी और भाभी दोनों ही अब मां बनने वाली है. दोनों ही के पेट में मेरा ही बच्चा पल रहा है। मैं, मेरी बीवी और भाभी बहुत ही खुश हैं।
आपको मेरी कहानी कैसी लगी, मुझे मेल करे
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ललिता भाभी की चुदाई

मेरा नाम नन्द है, मैं ग्वालियर में रहता हूँ। मुझे पहली बार सेक्स का अनुभव करने का मौका तब मिला जब मैं २१ वर्ष का था, आज मैं वह अनुभव आप सब से बाँटने जा रहा हूँ। इस समय मेरी उम्र २३ साल की है और मेरा शरीर तंदुरुस्त है और मेरी लम्बाई ५\'९\" है।
मैंने अपना कुँवारापन अपनी पड़ोस में रहने वाली भाभी के साथ खोया। उनकी सुन्दरता के बारे में क्या बताऊँ आप लोगों को ! फिगर ३५-३०-३६ की होगी। उनके मनमोहक शरीर को देखकर ही मेरा लंड खड़ा हो जाता है। उनके साथ सेक्स करकने की तमन्ना दिल में कब से थी। उनकी उम्र ३० साल की होगी।
एक दिन ऐसा आया जब मुझे उनके बदन को चूमने का मौक़ा मिला। भैया एक बिज़नेसमैन हैं और वो सुबह ही निकल जाते हैं। उनके २ बच्चे भी स्कूल चले जाते हैं। सुबह जब वह कपड़े सुखाने आती है, तब मैं हमेशा उनकी चूचियों और पेट को देखा करता हूँ। उन्होंने कई बार शायद मुझे देखा भी है कि मैं उन्हें छुप कर उन्हें देखता हूँ, पर उन्होंने कभी किसी से कुछ कहा नहीं। उनके मम्मों को देख कर उनका दूध पीने की इच्छा जाग जाती है। तो दोस्तों आपको अधिक बोर नहीं करते हुए मैं आपको अपना अनुभव सुनाता हूँ।
एक दिन की बात है, मुझे शहर में किसी काम से बाहर जाना था। घर में माँ और पिताजी दोनों ही नहीं थे, और घर में हेलमेट भी नहीं था और कविता भाभी के घर में सिर्फ कविता भाभी ही थी। मुझे अचानक याद आया कि भाभी के घर हेलमेट हो सकता है। तो मैं घर पर ताला लगा कर भाभी के घर हेलमेट लेने चला गया। भाभी कपड़े धो रही थी। जब वह कपड़े धोते हुए उ�� ी तो उनकी साड़ी एक ओर हटी हुई थी और मुझे उनकी दोनों चूचियाँ ब्लाऊज़ में से दिखाई दे रहे थे। मन हो रहा था कि दूध पी लूँ। मैं उन्हें टकटकी लगा कर देखता जा रहा था, भाभी ने भी यह ग़ौर किया और अपनी साड़ी �� ीक करते हुए मुझसे काम पूछा।
मैंने बताया कि हेलमेट चाहिए। भाभी ने कहा कि हेलमेट तो कमरे के ऊपर स्टोर में रखा है, चढ़कर उतारना पड़ेगा। भाभी और मैं कमरे में आ गए। मैं एक कुर्सी लेकर आ गया। भाभी ने मुझसे पूछा,\"तुम रोज़ मुझे छुप-छुप कर क्यों देखते हो?\"
मुझे समझ में नहीं आ रहा था कि आख़िर भाभी से क्या कहूँ,\"आप बहुत सुन्दर हैं और आपका शरीर ऐसा है कि देखने वाला बस देखता ही रह जाए। भैया बहुत भाग्यशाली हैं जो उन्हें आप जैसी पत्नी मिलीं।\"
भाभी ने एक शरारत भरी मुस्कान से मुझे देखा. मैंने उनसे कहा कि मैं उन्हें एक बार चूमना चाहता हूँ। उन्होंने थोड़ा झिझकते हुए हामी भर दी। मैंने उनके गालों पर चूम लिया और उसके साथ ही अपना एक हाथ उनकी कमर पर रख दिया और सहलाने लगा।
भाभी ने हँस कर कहा, \"अब �� ीक है, या कुछ और भी करना है?\"
मन तो कर रहा था कि कह दूँ, पर हिम्मत नहीं हो रही थी। तो मैंने भी हँस कर कह दिया, \"अनुमति मिल जाए तो सब कुछ कर दूँगा।\"
वह मुझे शैतान कह कर कुर्सी पर चढ़ गई। अब भाभी अपने दोनों हाथ ऊपर कर के हेलमेट तलाश कर रही थी। उसे इस अवस्था में खड़ा देखकर मेरा लंड भी खड़ा हो गया। मैं उनके मम्मों और पेट को ही देखे जा रहा था। पहली बार मैंने उन्हें इतने नज़दीक से देखा था। अब मेरा नियंत्रण छूट रहा था। तभी भाभी ने मुझसे कहा कि कुर्सी हिल रही है, मुझे आकर पकड़ लो, नहीं तो मैं गिर जाऊँगी।
अब क्या था, मैंने भाभी की गाँड के नीचे से इस तरह पकड़ा कि मेरा चेहरा उनके पेट के सामने रहे। मेरे और उसके पेट के बीच कुछ ही सेन्टीमीटर का फ़ासला था। अब मेरा नियंत्रण छूट गया और मैंने भाभी के पेट पर चूम लिया।
भाभी सहम गई पर कुछ कहा नहीं। इससे मेरी हिम्मत और बढ़ी और मैंने उसके पेट पर किस करना शुरु कर दिया। मैं उन्हें पेट पर चूम रहा था और उनकी नाभि को खा रहा था। अब वो मेरा सिर पकड़ कर अपने पेट से चिपकाने लगी और लम्बी-लम्बी साँसों के साथ हल्की सिसकियाँ लेने लगी।
उन्हें भी बड़ा मज़ा आ रहा था। १५ मिनटों तक उनके पेट को खाने के बाद वह कुर्सी पर बैट गई और मुझसे लिपट गई। अब मुझे हरी झंडी मिल गई थी। मैंने उसे उ�� ाया और बिस्तर पर लिटा दिया। मैंने अपने कपड़े उतार दिए और उसकी साड़ी भी। वह सच में कितनी सेक्सी लग रही थी - काम की देवी। मैं उसके हों�� ों को चूसने लगा। वो भी प्रत्युत्तर देने लगी। फिर मैं धीरे-धीरे उसके गले से होते हुए उसकी चूचियों तक पहुँचा।
उसकी चूचियों को चूसता और दबारा रहा और वह सिसकियाँ निकालती रही। अब मैंने उसकी ब्लाउज़ उतार दी और पेटीकोट में घुस कर उसकी चूत को पैन्टी के ऊपर से ही सहलाने लगा। अब मैंने उसे पूरा नंगा कर दिया। उसकी चूत में अपनी ऊँगलियाँ प्रविष्ट कर दीं और लगभग १५ मिनट तक उसे उँगली से ही चोदा। उसकी चूत को खूब चाटा।
वह उउम्म्म्म्म.... आहहहहहहह ओओओह्ह्ह्हहहह, और चाटो! की आवाज़ निकाल रही थी। उसका पानी एक बार निकल गया। मैंने वो पूरा पी लिया। अब उसे भी मेरा लंड चूसने था। मेरा लंड साढ़े छः इंच का है। हम 69 की मुद्रा में आ गए। मैं उसकी चूत खा रहा था और वह मेरा लंड। इसी तरह २० मिनट के बाद वो मुझसे कहने लगी कि और मत तड़पाओ, मुझे जल्दी से चोट दो।
मैंने अपने लंड का सिरा उसकी चूत पर रखा, उसके पाँवों को पैला दिया और ज़ोर के धक्के के साथ लौड़ा अन्दर पेल दिया। वह चिल्लाई और तड़पने लगी। कहने लगी कि धीरे-धीरे करो, दर्द हो रहा है।
पर मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं उसे चोदता चला गया। थोड़ी देर के बाद वह भी मस्त हो गई और गाँड हिला-हिला कर साथ देने लगी। उसके मुँह से ओओहहहह... आआआआहहहह... और ज़ोर से... हाएएएएए.... म्म्म्म्महह्हहहहह... आआआआआहहहहह की आवाज़ें निकलना रुक ही नहीं रहीं थीं। और अब मैं उसकी एक चूची को मसल रहा था और दूसरे को चूस रहा था। उसकी घुँडियों को काट रहा था। उसे चोदने के बाद मैं उसकी चूत में ही बह गया और मैं उसके ऊपर लेट गया।
वह मुझसे खुश थी। उस दिन के बाद जब भी मुझे मौक़ा मिलता है, मैं जाकर उसका दूध ज़रूर पीता हूँ और उसे चोदता भी हूँ।
मेरी कहानी आप को कैसी लगी, मेल कर के बताएँ
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सर्दी की एक रात- मैं और मेरी भाभी

सभी पा�� कों और आँटियों को राजू के लण्ड का सलाम। अन्तर्वासना में यह मेरी पहली कहानी है। मैं बचपन से ही सेक्स के लिए उतावला रहा हूँ। यह कहानी तब की है जब मैं बी. कॉम प्रथम वर्ष में पढ़ता था। मेरे पड़ोस में एक दम्पत्ति रहने आया। उनकी शादी हुए चार-पाँच साल ही हुए थे। मेरा उनसे मेल-जोल होने लगा। मैं उनको भैया और भाभी कहता था। मेरा उनके घर आना-जाना शुरू हो गया



एक बार भैया ने रात को दस बजे मुझे फोन किया कि मैं उनके घर आउँ। मैं तुरन्त उनके घर गया तो भैया ने कहा उनको बस-स्टैण्ड जाना है, उनको रात को किसी ज़रूरी काम से दिल्ली जाना था। भैया ने कहा कि तुम्हारी भाभी को डर लगता है इसलिए हो सके तो तुम रात को हमारे घर पर ही सो जाना।


मैंने कहा - �� ीक है।


मैं आधे घण्टे में उनको बस-स्टैण्ड पहुँचा कर वापस भाभी के पास आ गया। भैया की माँ भी उस दिन बाहर गई हुईं थीं।



भाभी को मैंने कहा कि वो अन्दर बेडरूम में सो जाये, मैं बाहर ड्राईंगरूम में सो जाता हूँ। भाभी ने कहा कि �� ीक है। भाभी ने मुझे जान-बूझकर पतली सी चादर दी ताकि मुझे �� ंड लग जाए। करीब आधे घण्टे में वो पानी पीने के लिए बाहर आई तो मैं �� ण्ड से सिकुड़ रहा था। भाभी ने कहा कि �� ण्ड लग रही है तो अन्दर सो जाओ। मैं तैयार हो गया। अन्दर केवल एक डबल बेड पलंग था। भाभी ने कहा कि यहीं सो जाओ। मैं थोड़ा सकुचाया। फिर मैं भी वहीं सो गया। करीब आधे घण्टे बाद मैंने पाया कि भाभी की एक टाँग मेरी टाँगों पर आकर लगी। टाँग पर से साड़ी ऊपर हो गई थी और भाभी की गोरी-गोरी मादक जाँघें मुझे मखमल की तरह लग रही थीं। मैंने भी धीरे से अपनी टाँग भाभी की टाँगों पर रख दीं। मेरे आ�� इंच का मूसल खड़ा होने लगा। मैंने धीरे-धीरे टाँगों को रगड़ना शुरू किया तो भाभी ने भी जवाब दिया। मुझे हरी झंडी मिल गई।



फिर धीरे-धीरे मैं भाभी के पास आता गया और मैंने भाभी की चूचियों पर अपना हाथ रख दिया तो भाभी सोने का नाटक करने लगी। अब मैंने भाभी की मादक, रसीली और भरी-भरी चूचियों को हल्के-हल्के दबाना शुरू किया। अचानक भाभी जाग गईं और कहने लगीं कि ये तुम क्या कर रहे हो? मैंने कहा कि मुझे नींद में पता नहीं चला, सॉरी। मैं उ�� कर बाहर सोने के लिए जाने लगा तो भाभी ने कहा नहीं यहीं सोना है।



भाभी ने मुझे एक भद्दी सी गाली मादरचोद कहा और कहा कि लण्ड खड़ा करने की हिम्मत है पर डालने की नहीं। मैंने भाभी से कहा कि लण्ड तो आपने ही खड़ा किया था। भाभी हँसने लगीं। भाभी उ�� ीं और रसोई से जाकर गरमा-गरम दूध लेकर आईं, फिर हमने दूध पिया। फिर कहा कि सर्दी बहुत है, मैंने कहा कि अभी सर्दी भगा देता हूँ।


भाभी बोली- तो देर क्यो कर रहे हो।


मैंने भाभी को पलंग पर ही पटक दिया और उनकी साड़ी को ऊपर कर दिया और उनकी पैण्टी में हाथ डाल दिया। अचानक मुझे लगा कि जैसे कि मैंने कोई भट्�� ी में हाथ डाल दिया है। मैंने भाभी की फूली हुई ब्रेड की माफ़िक रसीली चूत को मसलना शुरू किया। भाभी आआआआआ... आआआआ... श्श्श्श्शस्स्स्स्ससी श्सस्स्स्सी... करने लगी। फिर मैंने भाभी की ब्लाउज़ खोल दी और उसकी चूचियों को दबाना शुरू किया। मैंने भाभी के पूरे बदन को अपनी जीभ और हो�� ों से चूमा। फिर मैंने बाभी की चूत पर अपनी जीभ फेरनी शुरू की। भाभी का पूरा शरीर अकड़ने लगा और अचानक ही उनकी चूत से कुछ रस बहने लगा।


मैंने भाभी से पूछा- ये क्या है?

भाभी ने कहा- मादरचोद, गाण्डू, चाट इसको।



मैंने रस को चाटा तो काफी गरम और टेस्टी था। भाभी ने अब मेरे मूसल को हाथ में लेकर मुट्�� मारनी शुरू कर दी, थोड़ी देर में मुझे लगा कि अब मेरा रस निकलने वाला है तो मैंने भाभी को कहा कि मेरा निकलने वाला है तो भाभी ने उसको अपने मुँह में लिया और सारा रस पी गई।



१५ मिनट के बाद लण्ड फिर से खड़ा होने लगा क्योंकि भाभी अपनी चूत के बाल साफ कर रही थीं, और मैं उनको देख रहा था, मैंने भाभी से पूछा - कि भाभी आप तैयार हो? तो भाभी ने कहा- मेरे चोदू, आ जा ! चोद दे !



मैं सीधे ही भाभी के ऊपर चढ़ गया और अपना ८ इंच का मूसल उसकी चूत में डाल दिया, मूसल जाते ही भाभी दर्द के मारे छटपटाने लगी और बोली, भड़वे, लण्ड है कि मूसल है। भाभी की चूत काफी टाईट थी, मुझे अन्दर-बाहर करने में मज़ा आ रहा था। मैंने भाभी से इसका राज पूछा तो वह बोली कि जब तक किसी चीज़ को काम में नहीं लाओ तो वह नई-नई ही रहती है। मैं सारा माज़रा समझ गया।



मैंने भाभी की चूत को और तेज़ी से चोदने लगा, फिर १५ मिनट बाद में, मैंने भाभी को घोड़ी बनाया और भाभी की चूत में पीछे से लण्ड डाल दिया और चोदने लगा, बाभी का माँसल बदन और मेरे शरीर की टकराहट से कमरे में फच्च फच्च फच्च... की आवाज़ें आने लगीं।



भाभी लगातार शस्स्स्स्सी.... श्स्स्स्सी.... उई... उई... अह्ह्ह्हहा.... अह्ह्ह्हाहा की आवाज़ें निकाल रही थी। भाभी अब ज़ोर ज़ोर से धक्के लेने लगी, मैंने भी गति बढ़ा दी। भाभी बोली- साले, बहनचोद, और ज़ोर से चोद, मेरी चूत फाड़ डाल !


मैंने भाभी को कहा, हरामज़ादी, साली, कुत्ती, तेरी चूत का तो मैं औज फौलाद बना ही डालूँगा। यह कहते-कहते भाभी का रस निकल गया और थोड़ी देर बाद में मेरा भी। हमने एक दूसरे को साफ किया और सो गये। सुबह ६ बजे में मैंने भाभी को एक बार फिर से चोदा। चुदाई के बाद भाभी ने चाय बनाई, मैंने चाय पीकर भाभी को किस किया और पूछा- "रात को सर्दी तो नहीं लगी?" तो भाभी मुस्कुराने लगी।
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सौ भाभी एन्जोयिंग

हाय दोस्तों , अपनी पहली कहानी में मैंने बताया की मेरा दोस्त सन्नी रसोई में.न मेरी भाभी के मम्मे दबा रहा था, किस भी कर रहा था लेकिन उन्होंने ज्यादा कुछ नही किया मै घर में था। मुझे पता था कि वो भाभी को खूब दबा के चोदेगा। मैं देखना चाहता था कि वो यह सब कैसे करता है, मैने एक योजना बनाई और उन दोनों को मूवी देखने जाने के लिये कहा। पहले तो वो मना करने लगी पर जब मैने बताया कि सन्नी भी है तो मान गयी।


भाभी ने गहरे गुलाबी रंग का स्लीव्लैस सूट पहना। उनके बूब्स उस तंग सूट में काफ़ी उभर आये थे और वो बहुत प्यारी और सेक्सी लग रही थी। सन्नी अपनी बाइक पर आया तो मैने भाभी से कहा कि मेरे स्कूटर में हवा कम है इसलिये वो सनी के बाइक पर बै�� जायें। वो मान गयी औरतके पीछे बै�� गयी। मैं आराम से पीछे आ रहा था, तो मैने देखा कि वो बार बार ब्रेक मार रहा था और भाभी उसके ऊपर झुकी हुई थी और उसके मोटे मम्मे उसकी पी�� पर गड़े जा रहे थे। वूऊऊओ, साले को कितने मजे आ रहे होंगे मैं सोच कर ही एक्साइट हो रहा था। दोनो पता नहीं क्या बात कर रहे थे पर भाभी हंस रही थी। प्लान बना कर मैं ने ऐसी मूवी का टिकट लिया जिसमे कम भीड़ थी। हम मूवी देखने लगे। थोड़ी देर बाद मैं ने महसूस किआ कि भाभी जो हम दोनो के बीच में बै�� ी हुई थी थोड़ी बेचैन हो रही है।



मैं ने अंधेरे में नजर घुमाई तो देखा उसने एक हाथ भाभी के मम्मे पे रखा हुआ है और दबा रहा था। ऊऊऊऊऊओ। यहां भी वो कोई मौका नहीं छोड़ रहा था धीरे धीरे वो अपने हाथ नीचे ले गया और सूट के अंदर डाल दिआ, उसका हाथ उनकी टांगो के बीच था। वो उसका हाथ हटाने की कोशिश कर रही थी पर शायद उन्हे मजा भी आ रहा था। मैं समझ गया कि मेरे रहते कुछ नहीं होगा सो मैं ने फोन आने का बहाना बनाया। उनहे बताया कि मुझे अर्जेन्ट काम से जाना पड़ रहा है और वो मूवी देख के घर चले जायें मैं बाद में आ जाउंगा।


मैं हाल के बाहर पहुंचा और एक कोने से उन्हे देखने लगा थोड़ी देर मैं दोनो के बाहर आते देखा। दोनो बाइक पर बै�� कर निकल गये। मैं ने पीछा किया तो देखा कि वो एक होटल में चले गये। मैं ने सोचा था कि शायद वो घर ले जायेगा पर होटल में नहीं सोचा था। मैं अंदर गया और रिसेप्शन पे थोड़ी पूछ ताछ करने की कोशिश करी पर कुछ हाथ नहीं आया मैं मायूस हो रहा था उन्हे करीब २० मिनट हो गये थे और मैं सोच कर परेशान हो रहा था कि वहां क्या चल रहा होगा। जब मुझसे नहीं रुका गया तो मैं ने सन्नी का फोन लगाया। बेल जाती रही पर उसने नहीं उ�� ाया। वो ऐसी कंडीशन में थे कि उस समय फोन नहीं उ�� ा सकता हो। मै बहुत बेचैन हो उ�� ा।


मैं काल पे काल करता रहा आखिर उसने उ�� ाया तो मैं ने बोला कहां हो यार।



पूछने लगा क्या हुआ, उसकी आवाज़ मेँ गुस्सा था। मैं ने बोला मेरा प्रोग्राम केन्सल हो गया है और मैं हाल के बाहर उनका इंतजार कर रहा हूं।वो कुछ देर चुप रहा मैं ने पूछा क्या हुआ? तो बोला यार मूवी अच्छी नहीं थी इसलिये हम बाहर आ गये और अब मार्केट में हैं, भाभी को शोपिंग करनी थी मेरी भाभी को किस चीज़ की शोपिंग करा रहा था मैं सब समझ रहा था। मैं ने कहा मुझे शोप बताओ मैं वहीं आता हूं, गुस्से में उसने भाभी को फोन दिया और बोला भाभी बतायेंगी।


जब मैं भाभी से बात कर रहा था उनकी सांसे फ़ूली हुई लग रही थी। बीच बीच में रुक रही थी, शायद मेरे से बात करते वक्त वो उनके साथ कुछ कर रहा था, अंतत: उन्होने मुझे एक शोप पे बुला लिया। थोड़ी देर में दोनो तेजी से होटल के बाहर आये जब वो घर से गयी थी उनके बाल बंधे हुए थे और अब बाल खुल गये थे मुझे वो एक शोप में मिले तो सन्नी नाराज सा दिख रहा था और भाभी बहुत बेचैन और परेशान थी पर मुझे उनके चेहरे के भाव देख कर मजा आ रहा था लेकिन और मजा आता अगर दोनो को एक्शन में देखता। इसके लिये मैं ने एक और प्लान सोचा है जो जल्दी ही पूरा होगा, जब दोनो को एक होता हुआ देखुंगा।
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मेरा सपना और--भाभी की तन्हाई??

मैं दिल्ली में रहता हूँ !प्यारे दोस्तो, ,मेरा सैक्सी बोएय है ,

बात उस समय की है जब मैं नॉएडा में बी.टेक कर रहा था। मैं बिल्कुल नया था इस शहर में और मैंने होस्टल लिया हुआ था। वहीं पर दोस्तों से कन्याओं की काम-प्रवृति के बारे में पूरी जानकारी मिली ! सारे दोस्त होस्टल को सेक्स शिक्षा केंद्र नाम से संबोधित करते थे! वहीं से मैं भी एक सुन्दर सी कन्या के सपने देखने लगा ! इसी बीच मैंने होस्टल छोड़ दिया और नॉएडा में ही एक कमरा सेक्टर 49 में ले लिया ! मैं दूसरी मंजिल पर अकेला रहता था ! नीचे एक परिवार रहता था, भाभी जी उम्र 29 साल और फिगर क्या मस्त था ! देखते ही लार टपक जाये और उनका पति और 5 साल का एक बेटा था ! उनके पति एक बहुराष्ट्रीय कम्पनी में आई टी मैनेजर थे और अक्सर विदेश जाया करते थे !

पहले दिन भाभी को छत देखा जब वो कपड़े सुखाने आई थी। क्या मस्त, लाजवाब सेक्सी लग रही थी, उनको देखते ही मेरा लंड फ़ुफ़कारे छोड़ने लगा और मैं पहले दिन से ही भाभी को चोदने के सपने देखने लगा !

भाभी की चूचियाँ इतनी सेक्सी थी कि देखते ही लंड में पानी आ जाता था। मैं उनको हमेशा ताड़ता रहता था और उनकी प्यारी प्यारी गोल गोल चूचियाँ निहारता रहता था और अपने लंड को समझाता था कि बेटा धैर्य रख, एक दिन जरुर मिलेगी भाभी की चूत चोदने को !

मैं भाभी से बात करने का बहाना ढूंढ रहा था पर कुछ नहीं समझ आ रहा था कि मैं क्या करूँ !! फिर मैं उनको बेटे को एक दिन चोकलेट दिलाने के बहाने बाहर ले गया और धीरे धीरे मैं उससे काफी घुलमिल गया और रोज अपने कमरे में उसे ले आता था फिर भाभी बेटे के बहाने ऊपर आती थी और उससे लेकर चली जाती !

अब मैं भाभी से बातें करने लगा था और नीचे भी अक्सर क्रिकेट देखने के बहाने चला जाता था जब भी मैं उनके घर में टी.वी देखने जाता वो चाय जरूर पिलाती थी!

एक दिन चाय पीते पीते मैंने भाभी से पूछा- भाभी, भैया अक्सर बाहर रहते हैं तो आपका मन कैसे लगता है इतने बड़े घर में?

भाभी बोली- बस मैं और मेरा बेटा और मेरी तन्हाई !

मुझे लगा कि भाभी तो आसानी से पट सकती है बस थोड़ा सा पहल करने की जरुरत है ! अब तो मैं चुदाई के सपने दिन रात देखने लगा था !

एक दिन भाभी ने मुझे नीचे बुलाया और बोली- मुझे कुछ शॉपिंग करनी है, क्या तुम मेरे साथ चल सकते हो, क्योंकि मेरे बेटा तुमसे हिला हुआ है तो तुम उसे संभाल लोगे !

मैंने मन में कहा- भाभी संभल तो मैं तुम्हें भी लूँगा।

मैंने जल्दी से हाँ कर दी और शॉपिंग करने पास में ही एक मॉल में चले गये ! भाभी ने वहाँ पर दो पैंटी, चार ब्रा और कुछ मेकअप के सामान लिए। मैं सब देख रहा था, इतने में मेरे दिमाग में शरारत आई और मैंने भाभी से पूछा- भाभी ये आपकी ब्रा कितने नम्बर की है?

वो बोली- तुमसे क्या मतलब ? तुम्हें क्या करनी है?

मैं बोला- मुझे लगता है कि ये आपको छोटी पड़ेंगी !

भाभी तपाक से बोली- नहीं ! मेरा साइज़ 34 है और ये ब्रा भी 34 नंबर की ही हैं !

मैं मुस्कुराया और भाभी शरमा गई !

फिर हमने कुछ चाट खाई और काफी सारी मस्ती की। अब तो भाभी मेरे से मजाक भी करने लगी थी, जब भी किसी जोड़े को देखती तो कुछ न कुछ मज़ाक कर देती। मैं भी पीछे हटने वाला नहीं था, तुरंत एक चुलबुला सा जवाब दे देता और भाभी खिल-खिला कर हंस पड़ती !

इसी बीच माल में ही उनकी एक सहेली मिल गई, वो वहीं पर एक स्टोर में जॉब कर रही थी। भाभी ने उसको घर आने को न्योता दे दिया और उसका मोबाइल नंबर भी ले लिया।

उसने भाभी से पूछा- भैया कहाँ हैं और ये आपके साथ कौन हैं?

भाभी बोली- वो 15 दिनों के लिए सिंगापुर गये हैं और ये मेरे घर में ऊपर किराये पर रहता है !

अब तो मेरे मन में एक नहीं दो-दो चूतें मारने के ख्याल आने लगे थे, मेरा लंड मॉल में ही खड़ा हो गया था !

शाम के करीब सात बज चुके थे, मैंने भाभी से बोला- भाभी, अब चलो न ! बहुत तेज़ भूख लगी है और काफी थक भी गया हूँ मैं !

फिर हमने ऑटो किया और घर आ गये।

घर में जाते ही मैं भाभी के बेड पर जाकर लेट गया और बोला- भाभी, आज तो आपने पूरी तरह ही थका दिया !

भाभी बड़े प्यार से बोली- आज तुम खाना यहीं खाना और नीचे ही सो जाना !

इतना सुनते ही मैं ख्वाबों में खो गया और आज रात की चुदाई के सपने देखने लगा !

रात के करीब दस बज चुके थे, हम सबने खाना खा लिया था, उनका बेटा पापा के लिए रो रहा था। भाभी उसे समझाने की कोशिश कर रही थी पर वो मान नहीं रहा था।

फिर मैं उसे बाहर ले गया और चॉकलेट दिलाई और वापस आते आते वो सोने लगा।

मैं घर आकर भाभी से बोला- यह सो गया है !

तो भाभी बोली- इसे धीरे मेरे बगल में लिटा दो !

जैसे ही मैं उसे उनकी बगल में लिटा रहा था तो मेरा हाथ उनके एक चूची से छू गया और भाभी कुछ सकपका गई पर कुछ नहीं बोली। उसके बाद मैं भी उन्हीं के कमरे में टीवी देखने लगा और बातें भी करने लगा !

रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे, अब भाभी को नींद आ रही थी पर मैं उनसे पहले सोने का नाटक कर रहा था ! थोड़ी देर बाद भाभी को लगा कि मैं सो गया हूँ तो उन्होंने टीवी बंद कर दिया, रोशनी भी बंद कर दी और बिस्तर पर आकर लेट गई !

करीब आधे घंटे के बाद मैं बाथरूम जाने के बहाने उठा और बिना रोशनी किए बाहर चला गया और अँधेरे में ही वापस आ गया। फिर मैं बेड पर अँधेरे में ही चढ़ने की कोशिश कर रहा था कि तभी मेरा एक हाथ भाभी की चूची पर जा लगा पर उनकी कोई प्रतिक्रिया नहीं हुई। फिर मैं धीरे से जाकर उनके बगल में लेट गया और एक हाथ उनकी पहाड़ जैसे चूची पर रख दिया और दबाने लगा !

शायद भाभी जाग रही थी पर बिल्कुल भी मना नहीं किया तो मेरा हौंसला और बढ़ गया और मैंने अपना हाथ उनके ब्रा के अन्दर डाल दिया और कस के दबाने लगा।

इतने में भाभी बोली- क्या कर रहे हो?

मुझे कुछ समझ नहीं आया और मैं कुछ नहीं बोला और चूचियों को मसलता रहा।

इसके बाद भाभी को मज़ा आने लगा था और वो खुद ही मेरे से चिपकने लगी ! फिर मैंने अपना दूसरा हाथ उनकी चूत पर रख दिया और उंगली करने लगा भाभी को और मज़ा आने लगा और वो उफ़ उफ़ उफ़ ..........की आवाज करने लगी !

भाभी ने भी मेरा लंड पैंट के अंदर से पकड़ लिया और लंड रॉकेट की तरह उड़ने को तैयार था ! फिर धीरे से मैंने भाभी के ब्रा का हुक खोल दिया और दोनों चूचियां कंडोम की गुब्बारे की तरह हवा में आजाद हो चुकी थी ! मैंने चूचियों को चूसना शुरू कर दिया।

भाभी पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी और उनकी सांसें तेज थी, बोल रही थी- और तेज डार्लिंग और तेज़ ! और जोर जोर से मेरे लंड को चूस रही थी !nine two one one one two three three one eight.

भाभी के जिस्म को देखकर लग रहा था कि भाभी को कई दिनों से लंड नसीब नहीं हुआ है।

मेरा सात इंच का लम्बा लंड अन्दर लेने के लिए भाभी तड़प रही थी और बेड पर नागिन की तरह कमर और चूत हिला रही थी !

मैं उनकी चूचियों को सहला रहा था जिससे उनकी साँसें और तेज हो रही थी ! अब हम दोनों नंगे हो चुके और दूसरे से लिपट रहे थे। भाभी की चूत बिलकुल साफ़ और नए गद्दे की तरह उभार ले रही थी !

अब मेरा सपना पूरा हो रहा था !

मैंने भाभी की एक टांग अपने कंधे पर रखी और धीरे से लंड को अन्दर घुसाने की कोशिश की पर चूत थोड़ी कसी थी इसलिए आसानी से नहीं घुस रहा था। मैंने सोचा थोड़ी वैसलीन लगा लूँ, फिर सोचा-

नहीं ! कुछ भी हो, आज बिना वैसलीन के ही चोदूँगा !

मैंने ज्यादा जोर लगाया और लंड तीन इंच अन्दर जा घुसा।

भाभी चीख उठी, बोली- निकालो बाहर ! मैं मर जाउंगी !

फिर मैंने तीन मिनट तक अपने को रोके रखा और चूचियों और होंठों से खेलता रहा। भाभी को और ज्यादा मज़ा आ रहा था। धीरे धीरे नीचे का दर्द भी कम हो गया, फिर मैंने दूसरा जोर का धक्का मारा और लंड पूरी तरह प्लग के जैसे फिट हो गया। अब मैं धीरे धीरे लंडदेव को आगे-पीछे कर रहा था, भाभी भी मेरा पूरा साथ दे रही थी, अपनी कमर ऊपर-नीचे कर रही थी और कह रही थी- तेजी से
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