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  #161  
Old 12th May 2013
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समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई-3
उसने और अंदर किया, फिर रुक कर और अंदर कर पूरा घुसा दिया। मैं हिम्मत करके सह गई, उसको नहीं रोका।

जल्दी वो भी आराम से रगड़ने लगा और मुझे मजा आने लगा।

आधे घंटे बाद जब वो रुका तो मैं संतुष्ट थी, मैंने उसके होंठ चूम लिए।

"पसंद आया तुझे?"

"बहुत !"

उसने मुझे दस हज़ार रूपये दिए, मैं उसकी दीवानी हो गई, मौका मिलते ही उसके घर चली जाती।

मुझे मालूम चला कि वो शादीशुदा है, मैं पूरी उम्र उसके साथ बीताना चाहती थी, उसके लौड़े ने मुझे बाकी लड़कों की तरफ से ध्यान हटवा दिया। उसके लौड़े ने मुझे बाकी लड़कों की तरफ से ध्यान हटवा दिया।

मुझे एक दिन चक्कर आये, भगवान का शुकर था कि मैं उस वक़्त अपनी सहेली के घर थी, उसकी बहन स्टाफ नर्स थी, मुझे उसने चैक किया तो मैं पेट से पाई गई।

यह सुन मेरे पाँव के नीचे से ज़मीन निकल गई लेकिन उसने कहा- टेंशन मत ले, अभी शुरुआत है।

मनोज का हब्शी जैसा लौड़ा पहले ही मेरी फ़ुद्दी की धज्जियाँ उड़ा चुका था, मैं उसके पास गई, बताया और पूछा- हम शादी कब करने वाले हैं?

वो बोला- अभी नहीं कर सकता।

मैं उस पर बरसी- अभी नहीं का क्या मतलब है? मेरे पेट में तेरा बच्चा पलने लगा है।

"साली, यह है किसका? मेरा या सोहन का या फिर और किसी का? साली रंडी है तू ! मेरा बसा बसाया घर मत उजाड़ !"

उसने तीस हजार फेंकें, बोला- पेट की सफाई करवा ले और अगर रंडी बन कर मेरे विशाल लौड़े से चुदना चाहती है तो आती रहना। शादी-वादी मैं नहीं करूँगा तेरे साथ !

मुझे मालूम था कि कुछ कुछ ऐसा ही होगा।

खैर कुछ दिन मैंने उसको त्याग दिया लेकिन जिस लड़के के साथ मैंने और अफेयर चलाया, वो चुदाई के मामले में बच्चा निकला तो मैं खुद को मनोज के पास जाने से नहीं रोक पाई और जम कर फ़ुद्दी मरवाई, तब जाकर फ़ुद्दी शांत हुई।

ऐसे कई लड़कों से मेरे चक्कर चलने लगे। मेरे चर्चे काफी थे आसपास !

बहुत ही मुश्किल से मुझे रिश्ता मिला और मेरी शादी हो गई, रोते यारों को छोड़ ससुराल चली गई।

जिससे शादी हुई, मुझसे से काफ़ी बड़ा था उम्र में, पर उसका लौड़ा नहीं बड़ा था। पहले तो मुझे काफी डर था कि मेरी फ़ुद्दी मार कर वो जान जाएगा कि मैं चुदक्कड़ हूँ, चुदवा चुकी हूँ। लेकिन हुआ उल्ट, वो चुदाई में फिसड्डी था अगर मेरी फ़ुद्दी सील बंद होती तो उससे मेरी सील ही मुश्किल से टूटती।

हमारा घर दोमंजिला था, हमें ऊपर का पोर्शन मिला था, नीचे सासू माँ, ससुर जी और ननद थी। सास सौरा घर में रहते थे, ऊपर से पतिदेव मुझे रोज़ प्यासी छोड़ते थे, उनसे चुदाई होती ना थी। मेरी आग अलग से जला देते, मुझे जलती छोड़ खुद खर्राटे भरने लगते। रिवाज़ के चलते शादी के बाद कुछ दिन बाद मायके आ गई, सहेली से मिलने के बहाने में मनोज के घर चली गई।

मुझे लाल चूड़े में देख वो पागल हो गया, बोला- वाह आज तो एक भाभी की फ़ुद्दी मारनी है, मजा आएगा।

किसी की चीज़ को अपने साथ लिटा वो खुश था। पाँचों दिन मैं मनोज से चुदवाने गई, फिर ससुराल आकर बांध दी गई। हमारे घर के साथ वाले घर जिसकी छत से छत मिलती थी, के मालिकों ने ऊपर का पोर्शन किराए पर दे दिया था, दोनों लड़के हॉस्टल छोड़ कर बाहर किराए पर रहने आये थे, दोनों हैण्डसम थे, स्मार्ट थे।

मैं उन पर लाइन मारती, उनको मालूम नहीं चला कि मैं किस पर मारती हूँ, मुझे तो चुदना था जो मर्जी जो मर्जी समझे।

मैं रात को अपने कमरे की बत्तियाँ जला कर कपड़े बदलती थी, वो भी रोज़ मुझे नंगी देख मुठ मारते थे बत्ती जला कर।

एक रात पति शहर से बाहर थे, मैं खाना-वाना खा कमरे में आई, सासू माँ ने कहा- अगर चाहे तो पूनम को साथ सुला ले।

पर उसने पढ़ाई करनी थी, उसका काम अपने पी.सी पर था।

मैंने कहा- नहीं, सो जाऊँगी।

ससुर जी की तबियत ढीली थी इसलिए सासु माँ को उनका ख्याल रखना था।

मैंने कमरे का दरवाज़ा बन्द किया, परदे हटा दिए, आज बैड पर खड़ी हुई, पहले कमीज़ उतार फेंकी, फिर सलवार खोल दी, उंगली होंठों से चूसी, निकाल उनको उंगली से इशारा मारा, दोनों आज पागल हुए जा रहे थे।

पैंटी-ब्रा में, वो भी लाल रंग की, बाँहों में लाल चूड़ा, एक जवान औरत कॉलेज बॉयज़ को अपनी तरफ खेंच रही थी, फ़ुद्दी को रगड़ती हुई ! मैंने उनको आने का इशारा दे मारा।

मैंने नाईटी पहनी, पानी लेने के बहाने नीचे गई। सासू माँ, ससुर जी सो गए थे, वापस आती ने बीच का दरवाज़ा ही बंद कर दिया।

जब मैं कमरे में लौटी, फिर से उनको बुलाया। शायद थोड़ा घबरा गए थे लेकिन फिर पहले इक आया, मैं बिस्तर पर फैली पड़ी थी, उठकर उसका स्वागत किया !

अभय नाम था उसका !

"क्यूँ इतना घबरा रहे थे आने को?"

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  #162  
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समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई-4

अभय नाम था उसका !

"क्यूँ इतना घबरा रहे थे आने को?"

"नहीं तो !"

मैंने अचानक से उसके लौड़े को पकड़ लिया- या फिर यह खड़ा नहीं होता?

"ऐसी बात नहीं है !"

मैंने नाईटी उतार फेंकी, ब्रा खोलकर बोली- मेरे लाल, दूध पियोगे?

वो पागलों की तरह मेरे मम्मे चूसने लगा, अब खुलने लगा। मैंने इतने में उसकी निक्कर खोल लौड़ा बाहर निकाल लिया और सहलाने लगी। उसका लौड़ा था तो ठीक ठाक लंबा, लेकिन अभी बच्चा सा था, मैंने उसको प्यार करते हुए कहा- अभी, लगता है, अभी हाथ से ही हिलाते होगे !"

"हाँ भाभी, कोई ऐसी नहीं मिलती जो इसको जवान कर दे !"

"क्यूँ? लड़कियों की तुम जैसे युवक को कैसी कमी?"

"भाभी, लेकिन कोई वो करने नहीं देती !"

वो शरमा सा गया।

"आज से तुम दोनों की यह भाभी सब मजे देगी ! लोगे ना?"

उसने मुझे बाँहों में कसते हुए मेरे होंठ चूमे- भाभी, आप जैसी भाभी को कौन छोड़ेगा ! लगता है भैया कुछ करते नहीं !

इतने में राहुल भी वहाँ आ गया, अंदर घुसा मैंने दरवाज़े को पूरी तरह लॉक किया और बड़ी लाईट बुझा दी, छोटी लाईट जला दी, परदे आगे किये, बिस्तर पर टांगें फैला पसर गई, उनको दिखा दिखा उंगली मुँह से निकालती, फिर फ़ुद्दी में डालती !

यह देख राहुल ज्यादा दीवाना बन गया।

"दोनों ऊपर आ जाओ, मेहमान हो मेरे, फिर कहोगे भाभी ने बैठने को नहीं कहा।"

राहुल बोला- साली, हम तो तेरे साथ लेटना चाहते हैं !

"यह हुई मर्द वाली बात, तुम दोनों कुत्ते हो और मैं तुम दोनों की कुतिया हूँ !'

मैंने पैंटी भी उतार फेंकी, एकदम चिकनी फ़ुद्दी देख राहुल ने कपड़े उतार दिए। उसका लौड़ा बहुत बड़ा निकला।

"तेरा बहुत बड़ा है ! लेकिन अभी है बच्चा !"

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  #163  
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समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई-5

"दोनों ऊपर आ जाओ, मेहमान हो मेरे, फिर कहोगे भाभी ने बैठने को नहीं कहा।"

राहुल बोला- साली, हम तो तेरे साथ लेटना चाहते हैं !

"यह हुई मर्द वाली बात, तुम दोनों कुत्ते हो और मैं तुम दोनों की कुतिया हूँ !'

मैंने पैंटी भी उतार फेंकी, एकदम चिकनी फ़ुद्दी देख राहुल ने कपड़े उतार दिए। उसका लौड़ा बहुत बड़ा निकला।

"तेरा बहुत बड़ा है ! लेकिन अभी है बच्चा !"

"हैं? क्या बच्चा? बच्चा कहो तो आपको बच्चा दे देगा !'

"आकर मेरी फ़ुद्दी को जुबान से चाट !"

राहुल मेरी फ़ुद्दी चाटने लगा, अभय मेरे मम्मे सहला रहा था, हम तीनो नंगे होकर कामसूत्र के खेल खेलने को तैयार थे।

मैंने राहुल के लौड़े को प्यार से सहलाया और चूसने लगी, कभी उसका चूसती, कभी अभय का !

राहुल का लौड़ा सच में बहुत बड़ा था, मोटा भी था, हाँ मनोज जैसा नहीं था, लेकिन हो जाने वाला था।

मैंने सोचा कि आज ब्लू फिल्म की तरह सब करवाऊँ, आज मेरा दिल गांड मरवाने को भी बेताब था। इसी मकसद से मैंने दोनों को अपनी तरफ खींचा था।

"कैसी लगी नंगी भाभी?"

"साली, कुतिया ! तुमने तो रोज़ हमें मस्त किया है कपड़े बदलने के बहाने !"

"राहुल, तू बहुत कुत्ता-कमीना है, यह अभय कितना शर्मीला सा है ! तुमसे ज्यादा अभय मुझे पसंद है।"

मैं उनके सामने घोड़ी बन गई, चूतड़ हिलाने लगी, तभी अभय ने मेरे कूल्हों को सहलाया, चूमने लगा।

"हाँ मेरे लाल, चाट मेरी गांड कुत्ते की तरह !"

"दारु पीती हो?" राहुल बोला।

"पिला दे !"

"रुक !"

वो उठा, अपने लोयर की जेब से पव्वा निकाला, बोला- मार ले दो घूँट !

मैंने मुँह से लगाई, काफी सारी नीट ही पी ली, मेरे लिए वही बहुत थी, बाकी उसने पी ली।

"दोनों मेरे जिस्म को सूंघो, चूमो, चाटो ! हाय। बहुत मस्त हो तुम दोनों !"

अभय ने खुलकर मेरी गाण्ड चाटी, राहुल ने मेरे निप्पल लाल कर दिए, फ़ुद्दी चाटी।

"अभय, गांड मार मेरी !"

मैं घोड़ी बन गई, राहुल सामने आया और लौड़ा मेरे मुँह में दे दिया। अभय ने थूक लगाया और लौड़ा गाण्ड में पेल दिया, दर्द हुआ लेकिन मुझे बहुत मजा आया। उसने दबा कर मेरी गाण्ड मारी, अपना पानी मेरी गाण्ड को पिलाया। मैंने पहली बार गांड मरवाई थी।

राहुल ने कहा- चल कुतिया, लेट जा, टांगें उठा !

मैंने टाँगें फैला दी, उसने अपना नौ इंच का लौड़ा मेरे अन्दर घुसा दिया।

"हाय मेरे शेर ! राहुल, जोर जोर से पेल अपनी इस रंडी भाभी को !"

"कुतिया तू कहे तो तुझे रंडी बना देंगे ! बहुत लौड़े हैं तेरे लिए !"

अभय मेरे मम्मे चाटने लगा।

"लगता है अभय के बच्चे की प्यास बुझी !"

"जी नहीं !"

"ला इसको मुँह में घुसा दे, खड़ा कर दूँगी, फिर एक साथ दोनों मेरी लेना !""लोगे ना?"

"हाँ भाभी, आप कहो तो आपका हर छेद भर जाएगा !"

राहुल काफी मास्टर निकला, उधर उकसा उकसा मैंने उसका पानी निकलवा दिया दोनों हांफने लगे पर जल्दी दोनों दुबारा तैयार हो गए, दोनों ने एक साथ, मेरी गांड में अभय का, फ़ुद्दी में राहुल का, दोनों तरफ से मस्त कर दिया मिलकर !

मुझे ससुराल में प्यास बुझाने का साधन मिल गया, पति तो था ही नाकारा ! वो मेरे पास रात के सिवा कम ही आता, वो जानता था उसमें कुछ नहीं है।

सासू माँ मेरे पीछे पड़ गई कि पोता का मुँह दिखा !

पोते का मुँह कहाँ से दिखाती ! पति जानता था उसने कभी वहाँ तक पहुँचाया नहीं था जहाँ से मेरे पेट में उसका बीज रुके !

लेकिन अपने बेटे में दोष नहीं बोलती थी, दोष मेरे में है यह था उनका कहना !

राहुल और अभय के साथ करते समय मैं माला-डी का इस्तेमाल करती थी।
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मुझे ससुराल में प्यास बुझाने का साधन मिल गया, पति तो था ही नाकारा ! वो मेरे पास रात के सिवा कम ही आता, वो जानता था उसमें कुछ नहीं है।

सासू माँ मेरे पीछे पड़ गई कि पोता का मुँह दिखा !

पोते का मुँह कहाँ से दिखाती ! पति जानता था उसने कभी वहाँ तक पहुँचाया नहीं था जहाँ से मेरे पेट में उसका बीज रुके !

लेकिन अपने बेटे में दोष नहीं बोलती थी, दोष मेरे में है यह था उनका कहना !

राहुल और अभय के साथ करते समय मैं माला-डी का इस्तेमाल करती थी।

मैंने सोच लिया था कि मैं राहुल के बच्चे की माँ बनूँगी।

एक दिन सासू माँ मुझे एक बाबे के पास ले गई, दिखने में ही वो एक नंबर का हरामी नज़र आया मुझे।

मेरी सास बोली- बाबा, इसके बच्चा नहीं होता, देखो क्या दोष है, कोई उपाय बताओ।

"इसके तो माथे में दोष दिख रहा है, एक विशेष पूजा रखनी होगी !"

बाबा काफी हट्टाकट्टा था, मैंने नशीली आँखों से उसकी तरफ देखा, अपना निचला होंठ चबाते हुए बोली- कैसी पूजा बाबा?

सासू माँ मेरे पीछे बैठी थी।

"चलो, अन्दर चलो, ध्यान लगाना होगा मेरे साथ एकांत में !"

सासू माँ बोली- हाँ बाबा, कैसे भी करके दोष मुक्त कर दो इसको।

मैं मटकती हुई अंदर गई बाबा के साथ मेरा गुंदाज जिस्म देख देख बाबा पागल होने लगा था, एक तरफ बाबा ने बिस्तर लगा रखा था।

"तुम बहुत सुंदर हो लेकिन तेरी सास तुझमें दोष निकालने आई है !"

"कुछ करो ना बाबा !"

नशीली आवाज़ थी मेरी।

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समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई-6

"कुछ करो ना बाबा !"

नशीली आवाज़ थी मेरी।

वहाँ हवन चल रहा था, जाकर वहाँ लेटो, पहले देखना पड़ेगा।

मैंने अपनी चुन्नी उतार कर एक तरफ़ रख दी, मेरे मम्मे बाहर कूदने को बेताब थे, बाबा के माथे पर पसीना आ गया था।

मैं लेट गई, मेरी पहाड़ जैसी छाती उभर कर सामने आ गई, बाबा ने सिर्फ धोती पहनी थी, उसका मरदाना जिस्म किसी औरत को पिंघला देने वाला था।

उसने मेरे पेट पर हाथ फेरा, मैं कसमसा गई, बदन कांप गया, उसके हाथ ऊपर मेरे मम्मों की तरफ चलने लगा। मैं उठी, अपना कमीज उतार दिया।

"आपको दिक्कत आ रही थी चेक करने में, इसलिए उतार दी !"

काली ब्रा में कैद गोरे मम्मे देख बाबा पागल हो गया।

"ओह हो ! काफी समझदार हो ! लगता है पति को ज्यादा कष्ट नहीं करना पड़ता होगा?"

"कष्ट करने के लायक ही नहीं है आपकी भगतनी का बेटा !"

"तुम मेरी भगतनी नहीं हो?"

"अभी देख रही हूँ, आपकी नीयत खराब है, देखना होगा कि आप भगतनी बनवाने के लायक हो?"

"मुझे तो बच्चा चाहिए गुरु जी बस !"

उसने मेरी नाभि में उंगली घूमाते हुए मेरे निचले होंठ को चूमते हुए कहा- हड्डी से हड्डी बजा दूंगा तेरी ! तू खुद भगतनी बनेगी !

"यह क्या कर दिया? होंठ क्यूँ चूमा? शोर मचा दूँगी !"

"कुछ नहीं होगा, तुझ पर अपने सेवक छोड़ दूँगा !"

उसने नाभि पर चूमा, मैं सिसकने लगी।

"मचा शोर !"

उसने कहते हुए मेरी ब्रा खोल मेरे मम्मे को चूमा, जुबान को निप्पल पर फेरा, फिर धीरे से निप्पल चूसने लगा।

मैं उसके बालों में हाथ फेर फेर उसका साथ देने लगी, मैंने पाँव को उसकी धोती में घुसा उसके लौड़े को रगड़ा।

"हाय मेरी जान ! ऐसी भगतनी आज तक नहीं मिली जो इतनी जल्दी अपनी मर्ज़ी से तैयार होकर चिपकने लगेगी !"

उसका तो बहुत बड़ा मालूम पड़ा, महसूस किया मैंने कि बहुत बड़ा औज़ार है गुरूजी का, मैं भी लालच में आ गई एक मोटे लंबे लौड़े के।

वो लगतार मेरे होंठ चूस रहे थे, मैं अंगूठे से उनके लौड़े को सहला रही थी।

"बहुत मस्त औरत है बालिका !"

"अब अगर सासू माँ आपके पास ले आई है और आपको जो करना था, इसलिए सोच लिया क्यूँ न दिल से आपका साथ दूँ !"

"तू, कसम से, बहुत बड़ा खजाना है, बहुत सेक्सी है।"

"आप भी ज़बरदस्त मर्द दीखते हैं !"

बोले- मैं तेरी सास को कहूँगा कि इसको शाम को पूजा की सामग्री के साथ भेजना, शाम को ध्यान ज्यादा लगता है।

लेकिन मैं थी कि चाहती थी कि वो मुझे ना छोड़ें, मैंने अपनी सलवार का नाड़ा खोल दिया।

बोले- भगतनी, अभी इतना समय नहीं है, और कई भगत आये होंगे।

मैंने सलवार बाँधी, लेकिन खड़ी हुई घुटनों के बल वहीं बैठ उसकी लुंगी को साइड पर किया, अंडरवीयर को खिसकाया, उनका लौड़ा देखने के लिए उतावली थी।

वाह, कितना बड़ा लौड़ा था, नौ दस इंच का होगा !

मैं उसका सुपारा चूसने लगी, गुरूजी मेरी इस हरक़त से पागल हो गए खुद लौड़ा आगे धकेला, मैंने मजे से चूप्पे लिए, उनको बाहर के भगत भूलने गए और मैं भी चाहती थी कि एक बार जाते जाते उनका अमृत पी लूँ। मैं तेज़ी से चूसने लगी, वो बराबर मेरे बालों में हाथ फेर रहे थे, मैंने निप्पल की तरह चूसा, साथ साथ मुठ मारती रही।

बोले- पी लोगी क्या?

"वैसे तो कम पीती हूँ, आप गुरु जी हैं, आपका अमृत है रोकना मत !"

और चूसने लगी, जल्दी उनका जिस्म अकड़ने लगा, उन्होंने लौड़ा हाथ में लिया, मुठ मारते मारते अपना पानी निकालने लगे, इतना पानी मैंने किसी लौड़े से निकलता नहीं देखा था। उस अमृत की एक एक बूँद मैंने चाट चाट कर साफ़ कर दी और हम दोनों कपड़े पहन बाहर निकल आये।

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समय के साथ मैं चुदक्कड़ बनती गई

बाबा मेरी सासू मां को एक पर्चा देकर बोले- भगतनी, यह सामग्री इसके हाथों शाम को सात बजे भेजना होगा, उस वक़्त ध्यान ज्यादा लगता है।


"कोई राह दिखी है क्या स्वामी जी? क्या मैं पोते का मुँह देख पाऊँगी?"

"हाँ भगतनी, मेरी सेविकाओं ने इसका मुआयना किया, पूरी पूरी आस है बच्चा होने की ! बस जब जब कहूँ पूजा करवाने भेजती रहना !"

शाम को सासू माँ बोली- जा !

मैंने कहा- मुझे यह सब पाखंड लगते हैं, वो पाखंडी है, मुझे नहीं जाना वहाँ।

"तेरी माँ भी जायेगी कुतिया ! चल उठ, यह थाल पकड़ और निकल जा !"
"हाँ भगतनी, मेरी सेविकाओं ने इसका मुआयना किया, पूरी पूरी आस है बच्चा होने की ! बस जब जब कहूँ पूजा करवाने भेजती रहना !"

शाम को सासू माँ बोली- जा !

मैंने कहा- मुझे यह सब पाखंड लगते हैं, वो पाखंडी है, मुझे नहीं जाना वहाँ।

"तेरी माँ भी जायेगी कुतिया ! चल उठ, यह थाल पकड़ और निकल जा !"

जब मैं पहुँची वहाँ कोई भगत नहीं था, उनके दरवाज़े के बाहर गनमैन थे, वो मेरी तरफ नशीली आँखों से देखने लगे।

"स्वामी जी हैं क्या?"

बोले- हाँ हाँ ! जा तेरा इंतज़ार हो रहा है !

जैसे वो जानते हों कि मेरी किस चीज़ की पूजा स्वामी करेगा।

स्वामी अपने बेडरूम में था, उसके हाथ में दारु का पैग था- आ गई भगतनी !

"हाँ !"

वो बड़ी सी कुर्सी पर बैठा था, झूल रहा था। मैं उसके करीब गई, उसका जाम पकड़ा, पूरा जाम दो घूँट में खींच गई, चुन्नी उतार दी, टाँगें फैला कर उसकी जांघों पर बैठ गई। मेरे दोनों उभारों का दबाव स्वामी के गले और होंठों के पास था, उसके बिना कहे कमीज़ उतार दी, ब्रा खोल दी।

वो मेरे दोनों मम्मे दबाने लगा, फिर निप्पल चूसने लगा। मैं उसके लौड़े को खड़ा होते महसूस करने लगी।

मैंने सलवार उतार दी और बिस्तर पर नागिन की तरह बल डाल लेट गई, काली चड्डी में मेरी गोरी जांघें देख स्वामी ने लुंगी उतार दी और बिस्तर पर आ गया।

मैंने उसका अंडरवीयर उतारा और लौड़ा चूसने लगी। स्वामी ने मेरी चड्डी भी उतार दी।

"हाय ! क्या फ़ुद्दी है कमीनी तेरी !"

वो चाटने लगा, मैं पगलाने लगी, मचलने लगी, वो और जोर जोर से चाटने लगा तो मैंने उसके लौड़े को हाथ में कस लिया और बोली- स्वामी जी, अब मत तड़पाओ, गुफा में घुसा डालो !

उसका लौड़ा नौ-दस इंच था। जैसे ही वो घुसाने लगा, इतनी चुदी होने के बावजूद मैं तकलीफ महसूस कर रही थी, लंबाई में ज्यादा था, मेरी बच्चेदानी से रगड़ रहा था, मैं मदहोश होकर स्वामी का साथ देने लगी।

"हाय मेरी जान ! तू साली गश्ती है ! पक्की रंडी बोले तो ! तेरी गांड मार सकता हूँ !"

स्वामी जी गांड तो मरवा लेती हूँ लेकिन आपका लौड़ा बहुत बड़ा है, उसमें दर्द देगा !"

"प्यार से डालूँगा !"

"अगली बार घुसा लेना !"

बोला- घोड़ी बन जा, उससे मेरा माल अच्छे से तेरी फ़ुद्दी में निकलेगा और बच्चेदानी तक जाएगा जिससे तेरा पेट बढ़ने के आसार होंगे। घोड़ी बना कर स्वामी ने फ़ुद्दी में घुसा दिया पूरा लौड़ा ! बच्चेदानी के मुँह पर रगड़ा मार रहा था। वो तेज़ हो गया, पौने घंटे से वो मुझे रगड रहा था तब जाकर उसने अपना अमृत मेरी बच्चेदानी के द्वार पर निकाला, उसके लौड़े से पानी बहुत निकलता था।

स्वामी मुझे आये दिन बुलाता, मेरी फ़ुद्दी का सत्यानाश कर दिया। उधर पति पर मेरा कोई ध्यान नहीं था, मुझे छोटे लौड़े बिल्कुल पसंद नहीं आते थे, अभेय का तो मुझे बच्चे की लूली लगने लगा था। मेरा दिल था कि एक साथ चार-पांच मर्द मुझे एक साथ एक बिस्तर पर ठोकें, सभी के लौड़े बड़े हों।

वो भी हुआ, स्वामी को दिल्ली जाना था, वहाँ उसने शिविर लगाना था, मैं उसकी ख़ास भगतनी बन गई थी, वो मुझे बोल कर गया कि पीछे से आश्रम का सारा कामकाज तुम देखोगी।

उसको तीन दिन के लिए जाना था, मेरी मदद के लिए उसके हटटे कटे सेवादार मौजूद थे जिनकी बाँहों में मैं पिसना चाहती थी।

उसके जितने सेवादार थे, सभी तो मानो पहलवान थे।

सासू माँ ने जब यह सुना कि स्वामी ने मुझे आश्रम सौंप दिया बहुत खुश थी, बोली- तू वहीं रुकना और दिल से आश्रम संभालना ताकि स्वामी लौट कर खुश हो कर तुझे वर दे डाले बच्चे का !

दिन में मैं देखती रही कि कौन सा सेवक कहाँ है और किस किस को चुन कर मैं एक साथ कई मर्दों के साथ चुदने का अपना सपना पूरा करूँ।

शाम हुई, मैं बिना बताये पूरे आश्रम का चक्कर लगाने निकली सेवकों के कमरों की तरफ। एक कमरे में मुझे हंसने की आवाजें सुनाई दी। जब उधर गई तो कमरे में बैठे चार सेवादार दारु पी रहे थे। मुझे देख सभी सीधे हो गए।

"यह क्या हो रहा है?"

"कुछ नहीं जी ! गलती हो गई।"

"क्या गलती हो गई? यह आश्रम है या बियर बार?"

एक बोला- आपके लिहाज से देखा जाए तो यह रंडीखाना भी है, रोज़ स्वामी आपको लेकर घुस जाते हैं तो बस या आगे बोलूँ?"

"मादरचोद, जुबां कैंची सी चलती है तेरी ! तुम भी मर्द हो ! तुम भी मुझे लेकर घुस जाओ ना !" अपना होंठ काटती हुई मैंने होंठों पर जुबां फेरी, आँख मारी, बोली- दारु लेकर थोड़ी देर में मेरे कमरे में आ जाना, तुम्हें भी सब को रंडीखाना दिखा दूँ, !

"यहाँ क्या है?"

"नहीं, कोई स्टेंडर्ड भी रखना चाहिए !"

मैं नाईटी लेकर बाथरूम में घुस गई, दरवाज़ा बंद किये बिना साफा लपेट नहाने लगी। मुझे पता था कि वो आने वाले हैं, पानी की आवाज़ सुनते हुए वो इधर आ गए, मुझे नहाती देख सबकी आँखें फटी रह गई।

"आ जाओ कमीनो ! मुझे नहलाने में मदद करो !"

"साफा भी उतार दे साली ! खुलकर नहा !"

चारों ने कपड़े उतार दिए, एक बोला- यहीं पैग पियोगी क्या?"हाँ, यहीं ले आओ !"

पैग खींच कर मैं बोली- बाकी सब तो ठीक है पर सबके कच्छे मैं एक एक कर उतारूंगी ! समझे?

"पहले तुम आओ राजा, क्या नाम है?

बोला- बिरजू लाल !

"हाय मेरे लाल !" उसका कच्छा खिसकाया तो काले रंग का हब्शी जैसा लौड़ा निकल हिलने लगा। मैंने उस पर पानी डाला और उसका सुपारा चूमा।

दूसरे को बुलाया- तेरा नाम?

बोला- बिश्नोई !

"मैं तेरे साथ सोई !"

उसकी इलास्टिक खिसकाई, एक और सांवला लौड़ा था, उसको धोकर चूमा।

तीसरा बोला- मैं विनोद हूँ !

उसका लौड़ा बहुत बड़ा था, मैंने चूमा।

चौथा बोला- मैं हूँ सरजू ! उसका लौड़ा भी हब्शी जैसा था।

शावर चला कर मैं बैठ गई, चारों के लौड़े बारी बारी चूसने लगी।

इतने में पांचवा भी आ गया, बोला- मैं कीमती लाल !

उसका बहुत बड़ा था।

"मुझे उठाओ और बिस्तर पर ले जाओ !"

कीमती ने मुझे उठाया और बिस्तर पर पटक दिया।

"एक फ़ुद्दी चाटो, दूसरा गांड चाटो, बाकी अपने लौड़े मेरे मुँह में बारी बारी से दो, मजे लो !"

विनोद बोला- साली तेरी गांड भी कोई गंगा से कम नहीं ! इसको चाटकर मैं धन्य हो जाऊँगा।

विनोद के बाद बिरजू बोला- तेरी चूत किसी धार्मिक गुफा से कम ना है ! इसको चाट अमृत मिलेगा।

बाकी तीनों के लौड़े चूस मेरा जबड़ा दुखने लगा, घोड़ी बन कर बोली- कीमती मेरी गांड में उतार दे !

जोर से झटका देकर उसने मेरी गांड फाड़ डाली।

"जोर जोर से पटको मुझे !"

कोई मेरा मम्मा चूसने लगा, कोई जाँघें !

सच में स्वाद आ रहा था पांचों से मुझे !

पूरी रात पेला सबने मुझे, सुबह मैं चलने लायक नहीं बची थी, फ़ुद्दी का मुँह खुला हुआ था, पाँच पाँच हब्शियों ने दो दो बार मुझे इस कदर चोदा कि क्या बताऊँ।

दोस्तो, इन दिनों मैं पेट से हूँ, ना जाने बच्चा किसका है, गिनती-मिनती करके देखा है तो लगता यही है कि यह स्वामी का है, सौ में से नब्बे परसेंट चांस स्वामी का है, जब बच्चा होगा उसके बाद जब चुदने लगूंगी।

तब फिर से आपके संग जुड़ जाऊँगी। मेरी यह किश्तों की चुदाई एकदम सच्ची सुच्ची है !

मेरे बच्चा देने तक सबको टाटा ! बाय !

Last edited by nishanath : 12th May 2013 at 09:56 AM.

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चाची ने मुझे चुदवाया


मैं उन दिनों अपने चाचा के यहां आई हुई थी। मैं एम ए की छात्रा थी। चाचा बिजनेस के सिलसिले में कुछ दिनों के लिये दिल्ली गये हुए थे। चाची घर पर ट्यूशन पढाती थी। चाची का नाम सुमन था। उनकी उम्र 35 वर्ष की थी। उसके पास कोलेज दो के छात्र पढने आते थे। रवि और सोनू नाम था उनका। दोनो ही 20 – 21 वर्ष के थे। मुझे पहले दिन से ही वो हाय हेल्लो करने लगे थे। उन दोनों से मेरी जल्दी ही दोस्ती हो गयी थी। ऊपर का कमरा खाली था सो सुमन उन्हे वहीं पढाया करती थी।

एक बार जब सुमन ट्यूशन पढा रही थी तब मैं किसी काम से ऊपर कमरे में गयी। जैसे ही मैं कमरे के पास पहुचीं तो मुझे सिसकारी की आवाज सुनायी पडी। मैं सावधान हो गयी। तभी मुझे फिर से हाऽऽय की आवाज सुनायी पडी। मैने धीरे से खिडकी से झांक कर देखा। वो लडके सुमन की चूंचियां दबा रहे थे। सुमन ने पेन्ट के ऊपर से ही एक का लन्ड पकड रखा था। सुमन बार बार आनन्द से सिसकारियां भर रही थी। मैं दबे पांव पीछे हट गयी और नीचे उतर आई।


मेरे सारे शरीर में सनसनी फ़ैल गयी थी। मैं अपने कमरे में आकर बिस्तर पर लेट गयी। मेरी सांसे तेज चल रही थी। मेरे मन में उत्तेजना भरने लगी थी। मुझसे रहा नहीं गया…… मैं फिर से दबे पांव ऊपर गई … मैने फिर से झांक कर देखा… मुझे पसीना छूटने लग गया। कमरे में सभी नंगे थे… रवि ने अपना लन्ड सुमन की चूत में डाल रखा था…और तबियत से चोद रहा था…… सोनू ने अपना लन्ड सुमन के मुँह में दे रखा था… मैं फिर नीचे आ गयी… मेरी चूत भी गीली हो चुकी थी… मैं अपनी चूत दबा कर बैठ गयी। मैं भी जवान थी…मेरे पास भी जवानी का पूरा खजाना था। मेरे मन में भी चुदवाने तेज इच्छा उठने लगी। मेरी चूंचियां कड़ी होने लगी… जवानी का जोश हिलोरें मारने लगा।


मैं मन मार कर कमरे से बाहर निकल आई… पास की दुकान से अपना मोबाईल रीचार्ज करवाने लगी। जब मैं वापस आई तो उनका कार्यक्रम समाप्त हो चुका था। रवि और सोनू जाने की तैयारी में थे। मुझे देख कर कर वो दोनों ही मुसकराये, मैने भी उन्हे तिरछी निगाहों से मुसकरा कर देखा। वो दोनो चले गये और मैं सुमन की किस्मत पर जल उठी… जो कि दो जवान लण्डों की मालकिन थी। मेरे मन में हलचल हो रही थी…। मन अशान्त था …… मुझसे सुमन की चुदाई बरदाश्त नही हो पा रही थी।


रात के करीब 10 बज रहे थे…। मैने कमरे की लाईट बन्द कर दी और सोने के लिये लेट गयी। पर नींद कहां थी। रह रह कर सुमन की चुदाई की याद आ रही थी। मैने अपनी पेन्टी उतारी , रात को मैं ब्रा नहीं पहनती थी। मैने सोचा कि चूत में उंगली करके झड़ जाती हूं…… पर मुझे उसी समय बाहर कुछ आवाज आई… मैने दरवाजे से झांक कर देखा तो रवि और सोनू सुमन के कमरे की तरफ़ जा रहे थे। मैने अपने कमरे के दरवाजे के छेद में आंखे गडा दी , यह दरवाजा चाचा के कमरे में खुलता था, और सुनने का प्रयास करने लगी। मुझे ये सुन कर हैरानी हुई कि सुमन उन दोनो के साथ मेरी चुदाई का प्रोग्राम बना रही थी… पर कैसे…?

वे तीनों मेरे कमरे की ओर आने लगे। मैं भाग कर अपने बिस्तर पर आकर लेट गयी। मुझे लगा कि वो तीनों मेरे कमरे के बाहर आ गये है…… तभी मेरे कमरे का दरवाजा खुला… मैने देखा सुमन पहले अन्दर आयी… फिर दोनो उनके पीछे पीछे आये……।
मैने सोने का बहाना किया। सोनू ने दरवाजा अन्दर से बन्द कर दिया। पर तीनों मेरे साथ क्या करेंगे ……
क्या बलात्कार…
यानी मेरी चुदाई…
मेरा मन खुशी के मारे उछलने लगा…बिना कुछ किये मन की मुराद पूरी हो जाये तो… फिर ऊपर वाले का धन्यवाद करो…। मेरा सोचना बिलकुल सही निकला। रवि ने लाईट जला दी… मुझे देख कर उन दोनो के मुंह में पानी आ गया। मैने पेन्टी और ब्रा वैसे भी नहीं पहन रखी थी। स्कर्ट भी जांघों से उपर आ चुका था। अन्दर से मेरी चूत झांक रही थी।

रवि ने बिस्तर पर पास बैठ कर मेरी छोटी सी कमीज़ को ऊपर कर दिया। मेरे नंगी चूंचियां उसके सामने तनी हुयी खडी थी। मेरे शरीर में रोमांच भर आया… मुझे लग रहा था कि मेरी चूंचियां पकड कर मसल दे… लेकिन उसने बडे प्यार से मेरे स्तन सहलाये… मेरी नोकों को हौले हौले से पकड कर मसलते हुये घुमाया। इतने में सोनू ने मेरे स्कर्ट को ऊंचा करके मेरी चूत नंगी कर दी। अचानक मुझे मेरी चूत पर गीलापन लगा…… सोनू की जीभ से थूक मेरी चूत पर टपका कर उसे चाट लिया था…… मैं तड़प उठी… पर मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पडा। सुमन ने मेरे दोनो हाथ ऊपर कस कर पकड़ लिये। सोनू ने मेरी टांगे चीर कर फ़ैला दी। और मेरी टांगों के बीच में आ गया। अब मुझे लग गया कि मैं चुदने वाली हूं……तो मैने नाटक शुरु कर दिया…… मैने जाग जाने का नाटक किया…
“अरे ये क्या…… छोडो मुझे……… चाची…”
“चुप हो जा…कुतिया… मजे ले अब…”
” चाची… नहीं प्लीज़……”
इतने में सोनू का लन्ड मेरी चूत में घुस गया। मन में मस्ती छा गयी। चूत को लन्ड मिल गया था… तेज गुदगुदी सी उठी।
“सोनू…ये क्या कर दिया तूने… मुझे छोड दे……मत कर ना…मादरचोद…”
“रीता रानी … ऐसी मस्त जवान लड़की को तो चुदना ही पड़ता है… देख क्य टाइट चूत है…अब हम तेरी बहन चोद देंगे।” सोनू मस्त हो कर बोला।
रवि मेरे चूंचकों को चूस रहा था… सुमन ने खुद के कपड़े उतार फ़ेंके…वो पूरी नंगी हो गयी। हम सभी को पता था कि कार्यक्रम सफ़ल हो चुका है। सुमन ने रवि की पेन्ट और कमीज़ उतार कर उसे नन्गा कर दिया। सोनू पहले ही नंगा हो चुका था। चाची मुझे समझा रही थी
“देख रीता… लन्ड तो तेरी चूत में फ़िट हो ही गया है… अब मजा ले ले…ना’
“चाची… प्लीज़… मत करो ना…देखो मैं मर जाऊगीं…” मैने फिर नाटक किया। चाची ने मेरे होंठ चूमते हुये कहा
“अच्छा… दो मिनट के बाद छोड देंगे… मजा नहीं आये… तो नहीं सही… बस”
चाची समझ चुकी थी…कि मै यूं ही ऊपर से कह रही हूं और वास्तव में मुझे मजा आ रहा है।
“सोनू …मत करो…… इसे अच्छा नहीं लग रहा है… चलो मेरी मां चोद दो…”
अरे ये क्या हो गया…मैने तुरन्त पासा पलटा……
“चाची… तुम बडी खराब हो…एक दम हरामी … मां की लौड़ी”
मैने नीचे से सोनू को नीचे से चूतड़ उछाल कर एक तेज धक्का दिया…। और रवि का लन्ड पकड कर अपने मुख में डाल दिया। मेरी फ़ुर्ती देख कर दोनों को मस्ती आ गयी। दोनो सिसकारियां भरने लगे। चाची ने रवि और सोनू को रोक दिया।

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मैने नीचे से सोनू को नीचे से चूतड़ उछाल कर एक तेज धक्का दिया…। और रवि का लन्ड पकड कर अपने मुख में डाल दिया। मेरी फ़ुर्ती देख कर दोनों को मस्ती आ गयी। दोनो सिसकारियां भरने लगे। चाची ने रवि और सोनू को रोक दिया।
“अब देखो कोई जबरदस्ती नहीं करना है…ये मादरचोद तो… रीता राज़ी है …”
सभी बिस्तर पर बैठ गये… मेरे बचे हुये शरीर के कपडे भी उतार दिये। फिर सुमन सभी को बताने लगी कि उन्हे क्या करना है… मैने अपनी बात रख दी,”पहले सोनू को मेरे पर चढने दो… उसका लन्ड मेरी चूत में रहने दो…फिर बात करो…”
“चलो सोनू तुम रीता को चोद डालो…रवि तुम मुझे चोदो… फिर बदल लेंगे…”
सोनू मुझसे लिपट गया… मुझे बुरी तरह से चूमने चाटने लगा… उस ने मुझे तुरन्त मुझे घोड़ी बनाया… और अपना कड़क लन्ड मेरी गान्ड पर मारने लगा। तो सोनू अब मेरी गान्ड चोदेगा। मेरी गान्ड में उसने ढेर सारा थूक लगाया और लन्ड को छेद पर रख कर अन्दर दबा कर घुसा दिया… उसका लाल सुपाडा फ़क से अन्दर घुस गया। मैं आनन्द से निहाल हो उठी… दूसरे धक्के में आधा लन्ड अन्दर था… तीसरा धक्का लन्ड को पूरा जड़ तक ले गया…… गान्ड मैने कई बार चुदाई थी… इसलिये मुझे इसमें बहुत मजा आता है…उसका गान्ड में फ़ंसा हुआ मोटा सा लन्ड मुझे बहुत ही आनन्द दे रहा था। सोनू अब धीरे धीरे धक्के तेज़ करने लगा… उधर रवि और सुमन मेरे साथ ही आ गये… शायद रवि को मैं अधिक पसन्द आ रही थी… रवि ने मेरी चूंचियां पकड कर मचकानी चालू कर दी… सुमन ने भी अपनी कला दिखाने लगी… उसने अपनी दो उंगलियों को मेरी चूत में घुसा दी। मेरे मुख से आनन्द की हंसी और सिस्कारियां निकलने लगी। सोनू की धक्के मारने की गति तेज हो गयी थी… उसके मुख से आनन्द की सीत्कारें तेज हो उठी थी। मेरे चूतड अपने आप उछले जा रहे थे। मुझे ऐसे गान्ड मरवाने में बडा मजा आता था। सोनू के धक्के बढने लगे… उसका शरीर अकडने लगा।
अचानक सुमन ने मेरी चूत से दोनों उंगलियां निकाल दी और सोनू के दोनों चूतडों को कस कस के दबाने लगी। तभी सोनू के लन्ड ने मेरी गान्ड के अन्दर ही अपना वीर्य तेजी से छोड दिया। सुमन उसके चूतडों को दबाती ही रही जब तक कि उसका पूरा वीर्य नहीं छूट गया। तब रवि ने उसकी जगह ले ली। रवि बिस्तर पर लेट गया उसका खडा लन्ड मेरी चूत को आमन्त्रण दे रहा था … मैं रवि पर चढ गयी और उसके लन्ड को सीधे चूत पर टिका दिया… और फिर हौले से लन्ड पर दबा दिया…
“आऽऽऽऽऽऽह …… चुद गयी रे… चाची…”
“चुद जा… रीता…तेरी किस्मत अच्छी है कि पहली बार में ही तुझे दो दो लन्ड बिना कुछ किये ही मिल गये……चुद जा छिनाल अब…”
“चाची …… आई लव यू…… आप दिल की बात जानती हैं…आप बडी हरामी हैं…” मेरी बात सुन कर सुमन मुस्करा उठी…
“अब चुदने में मन लगा…रन्डी… मजा आयेगा…”
“हाय चाची …… चुद तो रही हू ना… देखो ना कैसे मोटे तगडे जवान लन्ड हैं…मेरी तो मां चोद देंगे ये…”
अब सोनू ने सुमन के उरोज पकड लिये… और लन्ड सुमन की गान्ड में घुसाने लगा… वह फिर से तैयार हो चुका था। सुमन हंस कर बोली-”देखा सोनू को … गान्ड मारने में माहिर है…… इसे सिर्फ़ गान्ड मारना ही अच्छा लगता है…”
मैं अब रवि पर लेट गयी थी… रवि नीचे से चुदाई का मजा ले रहा था। मैं उपर से उसे जबर्दस्त झटकों से चोद रही थी। मेरी गान्ड से सोनू का वीर्य निकल कर उसके लन्ड को तर कर रहा था।
“मेरे राजा… हाय…… क्या लन्ड है…मेरी चूत फ़ाड दे…राजा… ” कहते हुये उसके खुले हुये मुख में मैने अपना मुख चिपका दिया… मेरे थूक से उसका चेहरा गीला हो गया था… पर मैं उसे चाटे जा रही थी। मुझे कुछ भी होश नही था। मेरा पूरा जोर उसके लन्ड पर था। फ़च फ़च की मधुर आवाजे माहोल को और सेक्सी बना रही थी। चूत के धक्कों से फ़च फ़च कि आवाज के साथ वीर्य के छीटें भी उछल रहे थे। उधर सोनू सुमन की गान्ड चोदने में लगा था।
अचानक रवि ने अन्गडाई ली … उसका लन्ड कडकने लगा…बेहद टाइट हो गया… उसका चेहरा लाल हो गया… दान्त भिंच गये……
‘ मै गया…… रानी…… निकला… हाऽऽऽऽय्…… गया…।”
मैने धक्कों की रफ़्तार बढा दी… अपनी चूत टाइट कर ली……… और मेरा भी निकलने को तैयार हो गया। मैने चूत टाइट कर के दो धक्के खींच के मारे …… तो उसकी और मेरी उत्तेजना चरम सीमा को पार कर गयी-”राजा …… मैं तो पूरी चुद गयी………गयी मैं तो…… निकला मेरा… हाऽऽऽऽय्…”
उधर रवि को झटके लगने चालू हो गये थे… उसका वीर्य झटके मार मार कर पिचकारी छोड रहा था। मैं भी झडने लगी थी…… हम दोनो ने एक दूसरे को कस कर पकड लिया। हमारा माल निकलता रहा…। अब हम पूरे झड चुके थे। हम ऐसे ही पडे सुस्ताते रहे…फिर में बिस्तर पर से उतर गयी।
सोनू भी झडने वाला था। उसका लन्ड सुमन की चूत चोद रहा था। मै और रवि ने तुरन्त उनकी मदद की… सुमन के चूचकों को मैने खींचना और मरोडना चालु कर दिया। रवि ने सोनू के चूतडों को जोर जोर से दबाने लगा… सुमन अचानक धीरे से चीख उठी… “रीतू… छोड मेरी चूंची को …… मैं गयी…… हाय… बस कर सोनू…”
पर सोनू तो चरम सीमा पर पहुन्च गया था… चूतडों के दबाते ही उसका लन्ड बरस पडा…… सारा वीर्य सुमन की चूत में भरने लगा। मैने सोनू के चूतडों को थपथपाया… और प्यार कर लिया…
रवि, मैं, सुमन वहीं बिस्तर पर लेट गये… और बातें करने लगे। मैं बोली-”चाची…… आज तो कस कर चुद गयी… थेन्क यू …चाची॥”
“मैने तुझे देख लिया था… फिर जब दूसरी बार आयी तो मैं समझ गयी …कि तू चुदना चाहती है…”
“चाऽऽऽची… जब मालूम था तो वहीं पकड कर क्यों नहीं चोद दिया…”
“नहीं रीतू रानी… बिना तडप के… चुदाई की कोई कीमत नही होती है…”
“नहीं चाची…… आप मुझे पकड के चुदवा देती… तो भी मुझे चुदना तो था ही ना॥”
“और अब चुदने में ज्यादा मजा आया ना…”
“आय… हाय चाची………मन शान्त हो गया… चूत की खुजली मिट गयी…”
सोनू और रवि बिस्तर के एक कोने में नन्गे पडे ही खर्राटे भर रहे थे… हम दोनो भी न जाने कब बातें करते करते सो गये थे…

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मेरी नौकरानी पूनम


ये बात बहुत पुरानी है..लेकिन मेरी पहली चुदाई की है.. यह उस वक्त की बात है हमलोग पुणे में रहते थे . हमारे घर में एक नौकरानी थी जिसका नाम पूनम था और उसकी उम्र 30 थी फिगर 36-30-38 था . वोह बहुत सेक्सी लगती थी पर उसका रंग सांवला था और चून्चियां तो ऐसी थी की मेरी दोनों हाथों में एक भी ना आये और हमेशा ऐसा लगता था जैसे कहती हो आओ मुझे चूसो प्यार करो , दबाओ उसकी शादी हो चुकी थी पर उसके कोई बच्चा नहीं था . मैं बहुत नासमझ , डरपोंक और शर्मीला था . मेरी मकान मालिक की एक बेटी थी नाम किरण था और वोह मुझे अच्छी लगने लगी जो की इन्टर में पढ़ती थी . और मैं उनके चून्चियों की तरफ़ ही देखता था . .
मैं हमेशा पूनम की तरफ़ नज़र बचा के देखता था पर एक दिन पूनम ने मुझे पकड़ लिया और कहा क्या देख रहे हो संजू बाबा तो मैं बोला कुछ नहीं . वोह हँसी और कहा आजकल गन्दी पिक्चर भी देखते हो और पैंट ख़राब करते हो..मै चुप रहा और वो अपना काम करने लगी . फिर मैं डर गया और उसकी तरफ़ भी नही देखता था एक बार वोह घर में दो दिन तक नहीं आई तो ममी ने मुझे उसके घर भेजा पता करने के लिए .मैं घर पहुँचा और घंटी दबायी तो देखी तो पूनम ने दरवाजा खोला और सामने मैं खड़ा था . देखता क्या हूँ की वोह सिर्फ़ पेटीकोट और ब्लाउज में थी . एक तो वोह गरीब बाई थी और सेक्सी बहुत थी .उसका पेटीकोट सामने से फटा था जिसमे से उसकी झांटे साफ दिख रही थी . उसने तुरंत अपना पेटीकोट ऊपर खोंसा और मुझे अन्दर आने को कहा . मैं अन्दर गया और पूछा तुम आ क्यों नहीं रही हो , वोह बोली कुछ नहीं उसका पति आया था और चला गया है कल से आऊंगी .तभी उसका पेटीकोट फिर गिर गया और वोह शर्मा गई क्योंकि लगातार मेरी नज़र उसकी चूंची पर थी क्योंकि वोह काफी बड़े थे और उसमे से उसकी निपल दिख रहे थी क्योंकि वोह ब्रा नहीं पहने थी उसने मुझे बिठाया और अन्दर चली गई और साड़ी पहन आई . मैं अभी भी उसकी चूची देख रहा था तभी वोह बोली कोई बात है क्या मेरी मुहँ से निकला
तुम्हारे टांगों के बीच इतने बाल क्यों हैं , वोह हडबडाई और मुझे घूरने लगी . मैं घबरा गया और बहार निकल आया . डर भी गया कहीँ वोह ममी से ना कह दे .मैं शाम में उसके घर में गया और बेल बजायी उसने दरवाज़ा खोला मुझे देख अन्दर बुलाया , बोली क्या है मैंने बोला मैंने जो पूछा था उसे ममी से नहीं कहना तोह वोह बोली कहूँगी मैं डर गया और रोने लगा वोह हँसने लगी बोली डरो नहीं नहीं बोलूंगी .अगले दिन ममी सुबह तैयार हो कर मौसी के यहाँ जाने लगी , तो मुझसे बोली की पूनम जब आए तो बर्तन साफ करा लेना और खाना खा लेना . छोटी बहिन स्कूल चली गाई थी और भइया मुम्बई मे थे .मैंने स्कूल की किताब निकाली और पढने लगा . हमारे घर में बाहर छोटा सा बगीचा था और उसमे मैंने फूलों के पौधे लगाये थे और बकरियां उसे चार जाती थी . तभी पूनम की आवाज़ आई
" संजू जल्दी आओ मैंने बकरी पकड़ी है , गेट बंद करो ". मैं तेज़ी से आया और गेट बंद किया तो देखा बकरी के थन काफी नीचे लटके थे , और पूनम बकरी को पकड़े थी . वोह बकरी को पकड़ कर अन्दर ले आई और उसके मुह पर कपड़ा बाँध दिया ताकी वोह चिल्लाये नहीं और मुझसे बोली "संजू यहाँ आओ " और मुझसे बोली मै जरा बर्तन साफ कर लूँ . फिर मैं उसके पास गया और पूछने लगा की बकरी क्यों पकड़ी है तो मेरी ओर मुस्कुरा कर बोली एक काम के लिए और मेरी नज़र उसकी चूची पर पड़ी और ठहर गई उसने मेरी ओर देखा और साड़ी खिसका दी ताकि मुझे और साफ दिख सके मैं खड़ा रहा क्योंकि उसका ब्लाउज बगल से फटा था और उस में से उसका बदन दिख रहा था . उसने जल्दी से काम खत्म किया और मुझे देख कर बोली आओ और बकरी को पकड़ कर अन्दर कमरे में ले आई . फिर नीचे बैठ गयी और बकरी के थन सहलाने लगी ,और बोली लो दूध पियोगे , मैंने कहा बकरी का तो बोली नही तो क्या मेरा , फिर बकरी के थन चूसने लगी और बोली लो अब तुम पियो और मुझे गोद में बिठा कर दूध पिलाने लगी , और मेरी गाल चूमने लगी . मेरी को लगा जैसे मेरा लंड कड़क होकर टूट जाएगा , क्योंकि वो एकदम खड़ा हो कर अन्दर मुड गया था मुझे अच्छा लग रहा था .
उसने मुझसे पूछा मजा आया मैंने कहा हाँ .फिर वोह बोली आओ अंदर चलें बेड पर , मैंने कहा हाँ वहाँ उसने अपनी साड़ी उतर दी और ब्लाउज और पेटीकोट में मेरे सामने आ गयी .मेरा लंड तन गया और मैं अपने लंड को दबाने लगा , उसने कहा क्या है लाओ मैं देखूं , उसने मेरी पैंट उतर दी और अंडरवियर में से लंड को निकाल कर देखने लगी , धीरे धीरे सहलाने लगी मेरे तो होश उड़ गए , फिर उसने मेरे लंड को मुँह में ले लिया और चूसने लगी ,मैं हैरान था और बोला क्या कर रही हो वोह बोली तुम्हें पिक्चर समझा रही हूँ .और उसने मेरे लंड को कस कस कर दबाया और बोली मेरे भोले राजा बहुत घूरते हो औरतों को आज तुम्हारी हर इच्छा पूरी कर दूँगी . और उसने मेरा हाँथ अपनी बहुत बड़ी बड़ी चूंचियों पर रख लिया और मेरा लंड झटका खा गया . मैंने पहली बार किसी चूची को छुआ था . मैंने कस कर उसकी चूची पाकर ली और दबाता चला गया वोह चिल्ला परी बस करो नहीं तो टूट जाएँगी , मैंने उसकी चूची को ब्लाउज के ऊपर से चूसना शुरू किया तो बोली ब्लाउज तो उतारो . मैंने एक एक कर के बटन खोले और जैसे मेरे सामने दोनों दूद्दू खुले मैं उससे चिपक गया मेरा लंड उसके फटे हुए पेटीकोट के अम्दर था और उसकी बुर को छू रहा था . उसने मेरा हाँथ अपनी दोनों चूंची पर रखा और बोली लो मेरा दूध पियो , और मैं चालू हो गया एक एक कर के दोनों को छूने लगा आधे घंटे चूसने चाटने के बाद वोह बोली बस करो क्या खा ही जाओगे मैं रूका,
उसने अपना पेटीकोट उतारा और मुझे अपनी बुर दिखायी और बोली कभी देखी है , मैंने कहा नहीं तो बोली लो इसको चाटो मैंने तुरंत us पर अपनी जबान रखी और चाटने लगा तो उसके झांटे मेरे मुहँ में जाने लगी तो मैंने कहा इसे साफ तो करो उसने पापा के शेविंग बॉक्स लाने को कहा..मैंने पहले कैंची से उसके झान्ट को छोटा किया और फ़िर साबुन का झाग बने ब्रश से झाग बनाया और फ़िर एक रेज़र से सारे बाल साफ कर दिए उसकी छूट एकदम गुलाबी हो गई थोड़ा सांवला रंग था लेकिन चूत की जगह एकदम गोरी थी क्युकी वो जगह बालों से ढंकी थी...मैंने वहाँ हाथ फेरा वो सि सि सि क..करने ..ये ,मेरा पहला अनुभव था..उसकी चूत पर से थोड़ा थोड़ा ..कुछ पनि जैसा निकल रहा था.
मैंने हाथ लगाया वो चिपचिपा था....अब उसकी आंखे भी बंद थी और मुझे भी मजा आ रहा था.क्युकी मैंने तो पहली बार ऐसा किया था. अब उसने कहा साले मेरी चूत को चाट..उसकी ये गली सुन के मई तो हैरान हो गया..लेकिन मुझे मज़ा आया..मैंने उसकी चूत मे अपना मुह लगाया..मै उसकी बुर को चाटता रहा उसने मुझे 69 पोजीशन में लिया और मेरा लंड चूसने लगी 5 मिनट में मेरा जूस निकलने लगा ये मेरा पहली बार था..मै तो डर गया..ये क्या हो रहा है.. तो मैंने कहा पूनम मुझे कुछ हो रहा है तो बोली क्या हो रहा है..मैंने कहा मेरे लंड से कुछ निकलेगा..शायद पेशाब..उसने कहा कोई बात नही मेरे मुह में होने दे तू अपना काम करता रह . तभी मैंने कहा मुझे दूद्ध पीना है
वोह बोली आज से जब मन चाहे दूध पियो मैं नहीं रोकूंगी .मैंने ठीक है लेकिन तब तक मेरा जूस उसके मुँह मे निकल चुका था...मुझे ऐसा लगा की मेरे लंड से पिचकारी निकल रही है..उसने लंड का सुपाडा अपने जीभ पर रखा था..लंड का फव्वारा उसके सर तक गया..जब पिचकारी खत्म हुयी तो उसने..लंड को मुह मे ले लिया और चूसने और चाटने लगी..फ़िर बोली संजू तू तो बहुत मजबूत है..तेरा पहली बार है न..इसलिए जल्दी निकल गया..अब तू लम्बी रेस का घोडा है..अब मै भी सीधा हो कर लेट गया ..उसने मेरे होठों को चूमा ..मै भी उसे चूमने लगा और चूमते हुए उसकी चूंची तक आया..फ़िर उसके दूध पर दांत गदा दिए वोह चिल्ला पड़ी मत करो लगता है .
फिर बोली क्या मुझे चोदना चाहते हो मैंने कहा यह कैसे होता है बोली जब इतना सिखा दिया है और भी सिखा दूँगी , मेरे राजा , और उसने मुझे कहा जब मैं कहूं तो अपना लौडा मेरी बुर में डाल देना उसने मुझे अपने ऊपर से हटाया ..और उठ कर ठीक से लेट गई.मुझसे कहा ये दो तकिये मेरे गांड के नीचे रखो...अपनी गांड उठाते उए.उसने जगह बनायी...मैंने देखा उसकी गांड भी करारी थी.अब उसने मेरे लैंड को फी से सहलाना शुरू किया..वो फ़िर सख्त होने लगा..आज मैंने देखा की उसकी लम्बाई और मोटाई कुछ ज्यादा ही लग रही थी..और बड़े ही जोर से फन फना रहा था उसने मेरा एक हाथ अपने टांगों के बीच चिकनी हो गई चूत पर रखा..पुरी गीली थी..उसने अपने दाने पर मेरा हाथ लगाया और कहा इसको थोड़ा रगड़ फ़िर वो ख़ुद मेरे लुंड को चाटने लगी..बीच बीच मे होठों मे चुस्तो भी थी..
वो कहने लगी संजू..इतनी से उमर मे इतना लंबा और मोटा लैंड है तेरा..जिस कुंवारी लड़की को चोदेगा..उसकी चूत का तो सत्यानाश हो जाएगा..मुझे तो लगता है मेरी चूत भी नही सेहन कर पायेगी इसको..मेरी चूत भी मेरे मरद के पतले और नुन्नी जैसे लंड से चुदाती है...लेकिन मई कितना भी चिल्लाऊ तू रुकना मत..अन्दर डाल के..बिल्कुल बेरहमी से चोदना.. और दनादन धक्का लगना , बस फिर क्या था ..अब उसकी चूत भी तैयार हो गई थी...लेकिन फ़िर भी हम क़रीब 15 मिनिट तक और चूमा छाती करते रहे..उसकी चूत से जूस बहा कर गांड की तरफ़ जा रहा था..उसने मुझे अपने पैर फैला के ऊपर उठाते हुए उसके बीच मे आने को कहा..मई घुटने मोड़ कर वह बैठ गया..गांड के नीचे तकिया होने से चूत ऊपर उठ गई थी और उसका मुँह भी थोड़ा खुल गया था..जिसमे से अन्दर की लाली दिख रही थी..उसने अपनी चूत को थोड़ा और आगे खिसकाया और अपने हाथ से मेरे लंड को पकड़ कर चूत के ऊपर घिसने लगी..उसने मुझसे कहा यह तो कोई मुश्किल नहीं है ना..लेकिन उसके चूत के छोटे से छेद मे मुझे लंड डालना है ये सोच कर मई परेशान था..इसी तरह घिसने के बाद उसने छेद पर लंड को लगाया फिर उसने मुझे खिंचा और मेरे लंड को बुर पर रखा और इशारा किया मैंने जैसे ही धक्का मारा वोह चिल्ला पड़ी मैंने उसके होटों पर कब्जा किया और
धक्के पर धक्का मरता रहा लंड फिसलता हुआ अन्दर जा रहा था.
पूनम अपने चूतड उछाल उछाल कर चीख रही थी ..अह्ह्ह..शी शी शी..उफ़...उफ़.. गऊऊ ऊ ऊ ऊ , गा आ आ आ आ आ आ , उ उ.ऊ..ऊ.ऊऊ.ऊ.उ.., अआया.अ.आह.ह..हह.ह..ह..हह.हह..हह.हह.ह. ह.हह.., मेरे रे र ऐ राजा , मेरे यार मेरे प्यारे ..क्या मूसल जैसा लंड है.. और .. चोदो मुझे मेरी चूत को फाड़ डालो .. मुझे. माँ.बाना.. ..दो. अपने बच्चे की .. माँ मेरे मरद के लौडे मे ताकत ही नही है..आह्ह..मैंने पूछा वो भी ऐसे ही छोड़ता है क्या...अरे नही मेरे राजा..वो होता तो अभी उसका पानी निकल जाता..मुझे रेत डालो मुझे चूस डालो ..मसल दो मुझे..मेरी जवानी बेकार हो रही थी .. मुझे चोदो...और जोर से..पोर लंड अन्दर तक डालो..अच्छा लगता है जब इसका सुपाडा.मेरे बच्चेदानी को दबाता है.., आह्ह्ह..दर्द हो रहा...रुको नही...मरो..मेरी चूंची को मसलों..घुंडी को मुँह मे ले कर चुसो..वो जैसा कह रही थी मै वैसा ही कर रहा था., अहह हह..ह..ह.हह.हह.हह.हह. लग.. रहा. ..हैईईईईईईईइ.., और. करो. ना....
मुझे आज गाभन कर दो..मेरे पेट मे तेरा बच्चा डाल दे संजू
मैंने एक हाथ उसकी गांड के नीचे डाला और उचालती हुयी गांड मे मैंने ऊँगली कर दी..उईईई ...
तुझे मेरी गांड भी दूंगी मेरे राज्जा...
वो कुंवारी है..
मेरे मरद ने कोशिश की लेकिन उसका लंड कमजोर है अन्दर ही नही गया..तेरा मोटा..और लंबा भी है..साथ मे लोहे जैसा सख्त..तू जरुर मेरी गांड फाड़ देगा...तुने तो चूत भी फाड़ दी है मेरी..आह्ह..रंडी बाना दो मेरी गांड मर्लो मेरा मुहँ काला कर दो ....मेरी... इज़्ज़त... लूट... लो... और नजाने क्या क्या चिल्लाती रही मेरा लंड पिस्टन जैसा अन्दर बाहर हो रहा था..बीच मे तीन बार वो झड़ गई..मुझे चिपटा लिया.उसके झड़ने सेस चूत और चिकनी हो गई थी. क़रीब 45 मिनट बाद मेरा लंड झड़ने लगा और मेरा लंड मैंने पूरी गहराई मे डाल दिया.मै एकदम थक सा गया था मैंने उसकी बुर में ही सब निकाल दिया वोह भी थक गयी थी और बोली मज़ा आ गया राजा , इस चुदाई को याद रखूंगी , तुमने तो मेरी जवानी खिला दी ,
बहुत बड़ा लंड रखे हो कहाँ छुपा रखा था , मैंने कहा पूनम क्या यही चुदाई है बोली हाँ राजा तुमने आपनी पूनम रानी को चोद दिया .
आब तुम जहाँ बोलो जब बोलो मैं चुदवाउंगी . और फिर एक बार मैंने उसके चूची को चूसा फिर मेरा खड़ा हो गया..इस बार पूनम ने मुझे नीचे सोने को कहा और मेरे ऊपर चढ़ कर उसने अपने हाथ से लंड को अपनी चूत मे डाला..लेकिन जैसे ही उसने अपनी गांड मेरे लंड पर दबाई तो फ़िर से चीख पड़ी..अईई..मर गई..आह्ह..आह..ऐसा करते हुए उसने गांड ऊपर नीचे करना शुरू किया..क़रीब 20 मिनट करने के बाद मैंने उसे पकड़ के अपने नीचे ले लिया था और मैं फिर पूनम पर चढ़ गया और उसे पेलने लगा वोह मना कर रही थी कह रही थी बहुत दर्द हो रहा है..असल मे वो फ़िर से दो बार झड़ गई थी. पर मै नहीं माना और एक तरह से उसका बलात्कार करने लगा जब मैं फिर झडा तो वोह बोली राजा तुम तो बड़े वोह हो मेरे मना करने पर भी मेरी चूत को चोद दिया .मैं तो तुम्हें बच्चा समझ रही थी तुम तो बड़े चोदु निकले
मैंने उसकी गांड पर हाथ मारा लो मर दी , वोह हँसने लगी और मेरे होटों को चूसते हुए बोली मेरे संजू राजा जी इसमें अपना लंड तो डालिये जैसे मेरी चूत मे डाला था . मैंने जब ये सुना तो बिना सोचे समझे उसकी गांड के छेद पर लंड को टिकाया और दबाने लगा..गांड थोड़ी गीली थी..क्युकी उसकी चूत का जूस और मेरे लंड की मलाई बह कर गांड तक आ गई थी..इसलिए थोड़ा सा सुपाडा अन्दर घुसा ..मैंने और धक्का मारा वोह चिल्लायी राजा पहले तेल तो लगाओ नहीं तो मुझे बहुत दरद होगा और ये मोटा लंड अन्दर जाएगा भी नही . मैंने कहा तो तुम ले आओ तेल . वोह उठी और नंगी ही तेल लेने गई उसके मोटे चूतड ऐसे हिल रहे थे की मेरा दिमाग हिल गया मैंने दौड़ कर उसे पीछे से पकड़ लिया और आँगन में ही उसे कुतिया बना कर उसके हाथ से तेल लिया और अपने लंड पर और उसकी गांड पर तेल लगाया और उसकी गांड पर लंड रख दिया वोह बोली अन्दर चलो पर मैं नहीं माना और धक्का मार दिया जरा सा अन्दर गया था की वो चीख उठी..अरे मार डाला रे..आह्ह्ह मेरी माँ...मेरी गांड फट जायेगी..निकालो..बाहर निकालो..और वोह रोने लगी नहीं डालो दर्द हो रहा है मैंने पूछा क्या पहली बार है वो बोली हाँ मैंने सुना था की दीदी जीजा से गांड मरवाती है. मै भी अपने पति से मरवाना चाहती थी..लेकिन उसका लंड तो एकदम मरियल है..पहली रात मे उसका लंड मेरी चूत मे ही नही घुस रहा था..घुसाने के पहले दो बार बाहर ही पानी निकल दिया था..
इसलिए मैंने उससे गांड मरवाने का कोई इरादा नही किया..लेकिन आज तुम्हारे इस मूसल और लोहे जैसे सख्त लंड को देख कर मेरी फ़िर से इच्छा हो रही थी ईसलिए तुमसे कहा . पर तुम्हारे इस मोटे लंड से इतना दर्द हो रहा है मई सहन करना चाहती हु..पर बहुत दर्द हो रहा है मत करो ..
तो मैंने कहा हो सकता है अभी दर्द हो बाद में नहीं और मज़ा भी बहुत आये..वो बोली ठीक है जो चाहे करो मारो मेरी गांड राजा जी . आपकी ही चीज़ है जैसे चाहे इस्तेमाल करो , मैंने दूसरा धक्का लगाया वोह चिल्लायी फिर तीसरा ..जो की जबर्दस्त था और पूरा 8" लंड फ़चाक..की आवाज़ के साथ अन्दर मेरे गोटे उसके चूतड से टकराए..मैंने हाथ बढ़ा कर उसकी नीचे लटकी चून्चिया..पीछे से पकड़ ली...और फ़िर
मैंने मारा धक्के पे धक्का वोह चिल्लाती रही ..
बस करो फट गई मादरचोद .. बेहनचोद. ..बेटिचोद.. मार... डाला... अब... रहने... दो.... मत. करो... मार... डालोगे... और न जाने क्या क्या बोलती रही..मैंने देखा मेरे लंड पर खून लग गया था..उसकी गांड सच मे फट गई थी..लेकिन मै रुकने की हालत मे नही था..वो..रोक रही थी.. पर मैं नहीं माना..अब मैंने उसकी चूत मे ऊँगली दाल दी और चूत को ऊँगली से चोदने लगा..वो आह्ह..उह्ह .. कर रही थीमैंने लंड आधा निकाला..और बचा हुआ तेल उस पर डाला..इससे लंड अब आराम से अन्दर जाने लगा..इधर उसकी चूत भी ऊँगली से चुदवा रही थी.. और 15 मिनट में वोह मज़ा लेने लगी उसका दर्द कम हो गया था... कुतिया जैसे उछलने लगी गाना गा रही थी..गांड मारे सैयां हमार..मोटे से लौडे पे खून लाल लाल..
गांड मारे सैयां हमारे..
और भी अजीब अजीब हरकत कर रही थी..और उसकी चूत झड़ गई.. मैंने भी अब स्पीड बढ़ा दी..लेकिन मेरा लंड झड़ने का नाम नही ले रहा था...क़रीब आधे घंटे गांड मारने के बाद मुझे लगा की मेरा लंड झड़ने वाला है..और 8- 10 धक्के जोर से लगाने के बाद पुरा लंड अन्दर डाल कर मै झड़ गया.. तो वो बोली राजा जी आज तो मैं फ़िर से जवान हो गई मज़ा आ गया है दिलखुश हो गया . मैंने भी कहा मुझे भी बहुत मजा आया मैंने उसकी गांड से लंड बाहर निकाला..उसके खून लगा हुआ था..और जैसे ही बाहर खींचा..पक की आवाज़ हुयी और मैंने देखा उसकी गांड खुली ही रही..अंग्रेज़ी के "O" जैसी..और उसमे से मेरी मलाई बाहर निकलने लगी थी ..हम दोनों ने बाथरूम मे साफ किया..और कमरे मे आ गए..और वैसे ही नंगे सो गए .. क़रीब एक घंटे के बाद वो उठी...मेरी ममी के आने का वक्त हो गया था..उसने कहा संजू राजा ..आज तो तुम भी जवान हो के मर्द बन गए हो.

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देवर भाभी
मुझे कुछ कुछ ऐसा प्रतीत होता है कि जिन घरों में भाभियां होती हैं, तो साथ रहने वाले देवर के मन में कभी ना कभी तो पाप जाग ही जाता है और नतीजन भाभियाँ चुदने लगती हैं, या देवर भाभियों के चक्कर में आ ही जाता है। मैं तो कहती हूँ कि आग तो दोनों ओर ही बराबर सी सुलग उठती है ...तो वास्तव में इसमें गलती किसी की नहीं होती। आईये देखे, यहाँ श्री मनोहर सिंह जी क्या बता रहे हैं..मैं गोवा का निवासी हूँ, मेरी यहाँ में पर्यटकों की आवश्यकताओं से सम्बंधित एक दुकान है। यह घटना मेरी जवानी के समय की है जब मैं मात्र 18 वर्ष का था और कॉलेज में पड़गता था। मेरे भैया की शादी हो चुकी थी। मेरे छोटे होने के कारण भाभी मुझसे बहुत स्नेह रखती थी। यूँ तो वो मुझसे सिर्फ़ पांच साल ही बड़ी थी। सच पूछो तो उसके पृष्ठ-उभार मुझे बहुत लुभाते थे, बस ! लुभाते ही थे ... पर भाभी के गोल गोल सुघड़ चूतड़ों को दबाने की इच्छा कभी नहीं हुई। भाभी अधिकतर टुक्की वाला ब्लाऊज पहनती थी। उनके कठोर पर्वत मुझे बहुत सुन्दर लगते थे, पर उन्हें मसलने जैसी इच्छा कभी नहीं हुई। उनके चिकने बदन पर मेरी दृष्टि फ़िसल फ़िसल जाया करती थी, पर ऐसा नहीं था कि मैं उस चिकने बदन को अपनी बाहों में लेकर उन्हें चूम लूँ !बस हम दोनों एक दूसरे के साथ साथ खेलते थे। मैं उनके साथ खाना बनवाने में मदद करता था, वॉशिन्ग मशीन में कपड़े धो देता था और भी बहुत से काम कर देता था। एक दिन अचानक ही ये सारी मर्यादायें टूट कर छिन्न भिन्न हो गई। दोनों के मन में काम भावनायें जागृत हो उठी...। उस दिन सारा काम निपटाने के पश्चात हम दोनों यूँ ही खेल रहे थे, कि मन में ज्वाला सुलग उठी। भाभी का टुक्की वाला ब्लाऊज कील में फ़ंस कर फ़ट गया और सामने से चिर गया। भाभी का एक कठोर स्तन उभर कर बाहर निकल आया। मेरी नजरें स्तन पर ज्यों ही पड़ी, मैं देखता ही रह गया, सुन्न सा रह गया। भाभी एक दम सिहर कर दीवार से चिपक गई। मैं अपनी आंखे फ़ाड़ फ़ाड़ कर उन्हें देखने लगा। भाभी सिहर उठी और अपने हाथों को अपने नंगे स्तन के ऊपर रख कर छुपाने लगी। मैं धीरे धीरे भाभी की ओर बढ़ने लगा। वो सिमटने लगी। मेरा एक हाथ उसके कठोर स्तनों को छूने के लिये बढ़ गया।

"नहीं भैया, नहीं... मत छूना मुझे !"

"ये... ये... कितने चमक दार, कितने सुन्दर है..."

मेरी अंगुलियों ने ज्यों ही उनके स्तन छुये, मेरे बदन में जैसे आग लग गई।
भाभी तुरन्त झुक कर मेरी बगल से भाग निकली, और दूर जाकर जीभ निकाल कर चिढ़ाने लगी। मैं स्तब्ध सा उन्हे देखता रह गया। जाने क्यूँ इस घटना के बाद मैं चुप चुप सा रहने लगा। मेरे दिल में भाभी के लिये ऐसे वैसे वासना भरे विचार सताने लगे। शायद जवानी का तकाजा था, जो मेरे मन को उद्वेलित कर रहा था।
शाम को मैं छत पर टहल रहा था कि भाभी वहां आ गई।
"क्या बात है, आजकल तुम बहुत गुमसुम से रहने लगे हो?"
"नहीं ... हां वो ... ओह क्या बताऊ मैं...!"
"भैया मेरी कसम है तुझे ... जो भी हो, अच्छा या बुरा... कह दो। मन हल्का हो जायेगा।"
"बात यह है कि भाभी ... अब कैसे बताऊँ..."
"मैंने कसम दी है ना ... चलो अपना मुँह खोलो..." शायद भाभी को मेरी उलझन मालूम थी।
"ओह कैसे कहूँ भाभी,... आप मुझे बहुत अच्छी लगने लगी हैं !"
"तो क्या हुआ ... तुम भी देखो ना मुझे कितने अच्छे लगते हो, है ना?" भाभी की नजरें झुक गई।
"पर शायद... मैं आपको प्यार करने लगा हूँ..."
"ऐ ... चुप... क्या कहते हो ... मैं तुम्हारी भाभी हूँ..." सुनकर भाभी ने मुस्करा कर कहा
"कसम दी थी सो बता दिया ... पर मैं क्या करू... मैं जानता हूँ कि तुम मेरी भाभी..."
"भैया, अपने मन की कहूँ... प्यार तो मैं भी तुम्हे करती हूँ" भाभी ने भी झिझकते हुये कहा।
"क्या कहती हो भाभी ..."
भाभी ने धीरे से मेरे सीने पर अपना सर रख दिया... मेरी सांसें तेज हो उठी। तभी भाभी मुड़ कर तेजी से भाग कर सीढ़ियाँ उतर गई। मैं भौचक्का सा उन्हें देखता रह गया। यह क्या हो गया ? भाभी भी मुझसे प्यार करती हैं !!! और फिर बड़े भैया ? सभी कुछ गड-मड हो रहा था। मैं छत से नीचे उतर आया। भाभी मुझे देख कर खुशी से बार बार मुस्करा रही थी जैसे उनकी कोई मन की मुराद पूरी हो गई हो। मैं चुपचाप अपने कमरे में चला आया। कुछ ही देर में भाभी भी वहीं पर आ गई। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था, भाभी मेरे पास बैठ कर मेरे बालों को सहलाने लगी।
"कमल, तुम तो बहुत प्यारे हो, तुम्हें देख कर मुझे तो बहुत प्यार आता है !"
"भाभी..."
"ना भाभी नहीं, दीपाली कहो, मेरा नाम लो ..." भाभी ने अपनापन दिखाते हुये कहा।
"दीपा, तुम्हें देख कर जाने मन में क्या क्या होने लगता है, ऐसा लगता है कि तुम्हें प्यार कर लूँ, चूम लूँ..." मैंने अपने होंठों पर जीभ फ़ेर कर अपनी मन की बता दी। मेरे गीले होंठ देख कर भाभी ने भी अपने होंठ थूक से गीले कर लिये और मेरे पर धीरे से झुक गई और इतने नजदीक आ गई कि उसकी गरम सांसें मेरे चेहरे से टकराने लगी।
"गीले होंठ बहुत रसीले होते हैं, एक बार और गीले कर लो !"भाभी ने अपना रस भरा अनुभव बताया।
मैंने अपने होंठ फिर से गीले कर लिये और भाभी ने अपने गीले होंठ मेरे होठों से लगा दिये और मेरा ऊपर का होंठ अपने होंठों से चूसने लगी। इतने नरम और थरथराते होंठ मुझे असीम सुख दे रहे थे। मैं पहली बार गीले नरम होंठों का स्पर्श इतनी मधुरता के साथ महसूस कर रहा था। धीरे धीरे भाभी ने अपनी जीभ भी मेरे मुख में डाल दी। भाभी की एक एक हरकत मुझे वासना की पीड़ा दे रही थी। वो अब मेरे होंठों को बेतहाशा पीने लगी थी। जब वो उठी तो उनकी आंखे वासना से सुर्ख हो गई थी। पर मेरी हिम्मत अब भी उनके स्तनों को दबाने की नहीं हो रही थी।
"बबुआ, कैसा लगा ... दिल की मुराद पूरी हुई या नहीं ?" भाभी ने मुझे मुस्कराते हुये पूछा।
मैं शरमा गया। मेरी आंखें झुक गई।
"मेरे भोले देवर, तू तो बुद्धू ही रहेगा !" और वो हंस दी।
इन सभी प्रक्रियाओं से गुजरने के बाद मुझे ध्यान ही नहीं रहा कि मेरा लण्ड बेहद कड़ा हो चुका था और पजामे में तम्बू जैसा तना हुआ था। भाभी ने मेरा कड़क लण्ड देखा तो उसके मुख से आह निकल गई। वो उठ कर चल दी। आज तो भाभी का मन बाग बाग हो रहा था। रात को भी भाभी ने मुझे खाने के बाद मिठाई भी खिलाई, फिर मेरा चुम्मा भी लिया। अब मेरे दिल में भाभी के शरीर की सम्पूर्ण रचना बस गई थी। रह रह कर मुझे भाभी को चोदने को चोदने का मन करने लगा था। कल्पना में भाभी की रस भरी चूत को देखता, उनके भरी हुई उत्तेजक चूंचियों के बारे में सोचने लगता था। भैया नाईट शिफ़्ट के लिये जाने वाले थे। मैं भी अपने कमरे में कम्प्यूटर पर काम करने लगा। भैया के जाने के बाद भाभी मेरे कमरे में चली आई।
"भाभी, मम्मी-पापा सो गये क्या ?"
"हां सो गये, भैया के जाते ही वे भी सो गये थे, समय तो देखो ग्यारह बज रहे हैं।"
"ओह हाँ, मैं भी अब काम बन्द करता हूँ, भाभी एक चुम्मा दे दो !"
मैं उठ कर बिस्तर पर बैठ गया। भाभी ने लाईट बन्द कर दी और कमरा भी अन्दर से बन्द कर दिया।
"अब चाहे कितनी भी बाते करो, कोई डर नहीं !"
"भाभी आप कितनी सुंदर हैं, आपके प्यारे नरम होंठ बार बार चूमने को मन करता है !"
"सच ... तुम भी बहुत अच्छे हो... मेरे दिल में बस गये हो।"
"मुझसे बहुत प्यार करती हो ना ...?"
हमारी प्यार भरी बातें बहुत देर तक चलती रहीं। मेरा दिल बहुत खुश था... भाभी और मैं बिस्तर पर लेट चुके थे... भाभी ने अपने गीले होंठ एक बार फिर मेरे गीले होठों से चिपका दिये। मेरा डण्डा तन गया था। भाभी मेरी पीठ को सहलाते हुये सामने पेट पर हाथ ले आई। भाभी के कड़े स्तन मेरी छाती से रगड़ खा रहे थे। वो बार बार अपनी चूंचियाँ मेरी छाती पर दबा दबा कर रगड़ रही थी। मुझे लगा कि जैसे मैं भाभी को सचमुच में प्यार करने लगा हूँ। मैंने अपने प्यार का इजहार भी कर दिया,"भाभी सच कहूँ तो मैं तुमसे प्यार करने लगा हूँ, तुम्हारे बिना अब नहीं रहा जायेगा !"
"आह, मेरे कमल, तुमने तो मेरे दिल की बात की बात कह दी, मैं भी कैसे रह पाऊंगी तुम्हारे बिना... ?!!"
"पर भाभी, बड़े भैया का क्या होगा...?"
"बड़े भैया अपनी जगह है, अपन दोनों को तो बस प्यार करना है सो करते रहेंगे !"
भाभी के हाथ मेरे शरीर पर इधर उधर फ़िसल कर मुझे रोमान्चित करने लगे थे। मेरी छाती पर सर रख कर वो लेट गई थी और प्यार भरी बातें करने लगी थी। क्या वो प्यार की प्यासी थी, या उन्हें शारीरिक तृप्ति चाहिये थी ? पर कुछ भी हो, मैं तो बहुत खुश था। भाभी अपने एक एक अंग को मेरे शरीर के ऊपर दबा रही थी, सिसक रही थी... चुम्बनों से मेरा मुख गीला कर दिया था। लण्ड मेरा फ़ूलता ही जा रहा था। लग रहा कि बस भाभी की चिकनी चूत को मार ही दूँ। भाभी के हाथ जैसे कुछ ढूंढ रहे थे... और ... और यह क्या ... ढूंढते हुए उनका हाथ मेरे तने हुए लण्ड पर आ गया। उन्होंने उसे छू लिया ... मेरा दिल अन्दर तक हिल गया। दो अंगुलियों से मेरे लण्ड को पकड़ लिया और हिलाने लगी। मुझे कुछ बचैनी सी हुई... पर मैं हिल ना सका... भाभी ने मेरे होंठों में अपनी जीभ डाल दी और मुझे कस कर चिपका लिया। मुझे एक अजीब सी सिरहन दौड़ गई। मेरे हाथ अपने आप भाभी की कमर पर कस गये। मेरा बड़ा सा लण्ड अचानक भाभी ने जोर से दबा दिया। मेरे मन में एक मीठी सी वासनायुक्त चिंगारी भड़क सी उठी।
"भाभी, आह यह कैसा आनन्द आ रहा है ... प्लीज और जोर से दबाओऽऽ !" मैं सिसक उठा।
"आह मेरे भैया ... क्या मस्त है ... " भाभी भी अपनी सीमा लांघती जा रही थी।
"भैया, अपना पजामा उतार दो !"
मेरे दिल यह सुनते ही बाग बाग हो उठा... आखिर भाभी का मन डोल ही गया। अब भाभी को चोदने का मजा आयेगा।
"नंगा होना पड़ेगा... मुझे तो शरम आयेगी !"
"चल उतार ना ... "
"भाभी... मुझसे भी नहीं रहा जाता है ... मुझे भी कुछ करने दो !"
भाभी की हंसी छूट गई ...
"किसने मना किया है ... कोई ओर होता तो जाने अब तक क्या कर रहा होता !"
"मैं बताऊँ कि क्या कर रहा होता?"
"हूँ... अच्छा बताओ तो..."
"तुम्हें चोद रहा होता... तुम्हारी चूंचियों को मसल रहा होता !"
"हाय ये क्या कह दिया कमल ... " उन्होंने मुझे चूम लिया और अपना पेटीकोट ऊपर उठा लिया।
"ले मैं अपना पेटीकोट ऊपर उठा लेती हूँ, तू अपना पजामा नीचे सरका ले !"
"नहीं भाभी, अब तो अपने पूरे कपड़े ही उतार दो... मैं भी उतार देता हूँ"
मैंने बिस्तर से उतर कर अपने सारे कपड़े उतार दिये और बत्ती जला दी। भाभी भी पूरी नंगी हो चुकी थी। पर लाईट जलते ही वो अपने बदन को छिपाने लगी। मैं भाभी के बिलकुल सामने लण्ड तान कर खड़ा हो गया। एक बारगी तो भाभी ने तिरछी नजरों से मुझे देखा, फिर लण्ड को देखा और मुस्करा उठी। वो जैसे ही मुड़ी मैंने उन्हें पीछे से दबोच लिया। मेरा लण्ड उनके चूतड़ों की दरार में समाने लगा।
"क्या पिछाड़ी मारेगा ..."
"भाभी, आपकी गाण्ड कितनी आकर्षक है ... एक बार गाण्ड चोद दूंगा तो मुझे चैन आ जायेगा... हाय कितनी मस्त और चिकनी है !""तो तेल लगा दे पहले ..."
मैंने तेल ले कर उसकी गाण्ड में लगा दिया और अपनी अंगुली भी गाण्ड में घुसा दी।
"ऐ ... अंगुली नहीं, लण्ड घुसा..." फिर हंस दी।
भाभी पलंग पर हाथ रख कर घोड़ी सी बन गई। मैंने भाभी के चूतड़ को चीर कर तेल से भरे छेद पर अपना लण्ड रख दिया।
"अब धीरे से अन्दर धकेल दे ... देख धीरे से...!"
मुझे गाण्ड मारने का कोई अनुभव नहीं था, पर भाभी के कहे अनुसार मैंने धीरे से दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया। मेरा सुपाड़ा फ़क से छेद में उतर गया।
"अब देख जोर से धक्का मारना ... इतना जोर से कि मेरी गाण्ड फ़ट जाये !"
मैंने पोजिशन सेट की और जोर से लण्ड को अन्दर दबा कर पेल दिया। मेरे लण्ड में एक तेज जलन सी हुई। मैंने लण्ड को तुरन्त बाहर खींच लिया। मेरे लण्ड की सुपाड़े से चिपकी झिल्ली फ़ट गई थी और खून की एक लकीर सी नजर आई।
"क्या हुआ...? निकाला क्यूँ ...? हाय कितना मजा आया था... !" भाभी तड़प कर बोली।
"यह तो देखो ना भाभी ! खून निकल आया है...!"
भाभी ने मुझे चूम लिया... और मुझसे लिपट गई।
"आह कमल, प्योर माल हो ..."
"क्या मतलब ... प्योर माल ?"
"अरे कुछ नहीं... इसे तो ठीक होने में समय लगेगा... तो ऐसा करो कि मन की आग तो बुझा लें ... कुछ करें..."
भाभी ने मेरे हाथ अपने सीने पर रख दिये... और इशारा किया कि उसे दबाये। मुझे इसका पूरा आईडिया था। भाभी की नंगी छातियों को मैं सहलाने लगा। भाभी ने अपनी आंखें बन्द कर ली। उनके उभारों को मैं दबा दबा कर सहलाने लगा था। वासना से उनकी छाती कड़ी हो चुकी थी और चुचूक भी कड़क हो कर तन से गये थे। मैंने हौले हौले से चुचूकों और उरोजों को दबाना और मसलना आरम्भ कर दिया। भाभी के मुख से सिसकारियाँ फ़ूट पड़ी। मेरी नजरें भाभी की रस भरी चूत पर पड़ी और मैं जैसे किसी अनजानी शक्ति से उसकी ओर झुक गया। मैंने अब उसकी चूचियाँ छोड़ दी थी और उनकी जांघों को दबा कर एक तरफ़ करने लगा। भाभी ने स्वतः ही अपनी टांगें चौड़ी कर ली। चूत की एक मदहोश करने वाली महक आई और मेरा चेहरा उस पर झुकता चला गया। मैंने उसकी पतली सी दरार में जीभ घुमाई, भाभी तड़प सी गई। मेरा लण्ड बेहद कड़क हो उठा था पर हल्का दर्द भी था। मैंने भाभी की गाण्ड के छेद में एक उंगली घुसा दी और चूत के दाने और लम्बी से फ़ांक को चाटने लगा। भाभी तीव्र वासना की पीड़ा में जोर से कांपने लगी थी। उनकी जांघें जैसे कंपकंपी से लहराने लगी थी। उनके मुख प्यारी सी सी... सी सी करती हुई सिसकारियाँ फ़ूट रही थी। तभी उन्होंने मेरा चेहरा अपनी टांगों से दबा लिया और झड़ने लगी। उनका रज छूट गया था। अब उन्होने अपनी टांगें पर बिस्तर पर पसार दी थी और गहरी गहरी सांसें ले रही थी।इधर मेरा लण्ड फ़ूल कर कुछ कर गुजरने को तड़प रहा था। पर दर्द अभी था।
भाभी ने कहा," कमल, तुम अब बिस्तर पर अपनी आंखें बन्द कर के लेट जाओ... बस आनन्द लो !"मैं बिस्तर पर चित्त लेट गया। लण्ड कड़क हो कर लग रहा था कि फ़ट जायेगा। तभी मुझे अपने लण्ड पर कोमल सा स्पर्श महसूस हुआ। भाभी ने रक्त रंजित लण्ड अपने मुख में लिया था और हल्के से बहुत मनोहारी तरीके से चूस रही थी। मैं दर्द वगैरह सब भूल गया। भाभी ने अपने अंगूठे और एक अंगुली से मेरे लण्ड के डण्डे के पकड़ लिया और उसे ऊपर नीचे करने लगी। मेरे शरीर में वासना की आग जल उठी। भाभी की पकड़ बस डण्डे के निचले भाग पर ही थी। भाभी के होंठ मेरे जरा से निकले खून से लाल हो गये थे। उनकी आंखें बन्द थी और और उनकी अंगुलियाँ और मुख दोनों ही मेरे लण्ड को हिलाते और चूसते ... मुझे आनन्द की दुनिया में घुमा रहे थे। मेरा दिल अब भाभी को चोदने को करने लगा था, पर भाभी समझदार थी, सो मेरे लण्ड को अब वो जरा दबा कर मल रही थी। शरीर में आग का शोला जैसे जल रहा था। मेरे सोचने की शक्ति समाप्त हो गई थी। बस भाभी और लण्ड ही नजर आ रहा था। अचानक जैसे शोला भभका और बुझ गया। मैंने तड़प कर अपना गाढ़ा वीर्य जोर से बाहर निकाल दिया। भाभी ने अपना अनुभव दिखाते हुये पूरे वीर्य को सफ़ाई के साथ निगल लिया। मैं अपना वीर्य पिचकारियों के रूप में निकालता रहा।
"अब कमल जी, आराम करो, बहुत हो गया..."
"पर भाभी, मेरा लण्ड बस एक बार अपनी चूत में घुसवा लो, बहुत दिनों से मैं तुम्हें चोदने के लिये तड़प रहा हूँ..."
"श्...श्... धीरे बोलो ... अभी तीन चार दिनों तक इन्तज़ार करो... वर्ना ये चोट खराब ना हो जाये, दिन में कई बार इसे साफ़ करना...!"
वो मुझे हिदायतें देकर चली गई।
अब रोज रात को हम दोनों का यही खेल चलने लगा। तीन चार दिन बाद मेरा लण्ड ठीक हो गया और मैंने आज तो सोच ही लिया था कि भाभी की गाण्ड और चूत दोनों बजाना है... पर मेरा सोचना जैसा उसका सोचना भी था। उसने भी यही सोचा था कि आज की रात सुहागरात की तरह मनाना है। रात होते ही भाभी अपना मेकअप करके आई थी। बेहद कंटीली लग रही थी। कमरे में आते ही उन्होंने अपना पेटीकोट उतार फ़ेंका। उनके देखा देखी मैंने भी अपना पजामा उतार दिया और मेरे तने हुये लण्ड को उनकी ओर उभार दिया। हम दोनों ही वासना में चूर एक दूसरे से लिपट गये। भाभी के रंगे हुये लिपस्टिक से लाल होंठ मेरे अधरों से चिपक गये। उनके काजल से काले नयन नशे में गुलाबी हो उठे थे। भाभी के बाल को मैंने कस के पकड़ लिया और अपने जवान लण्ड की ठोकरें चूत पर मारने लगा।
"बहुत करारा है रे आज तो तेरा लण्ड ... लगता है आज तो फ़ाड़ ही डालेगा मेरी...!"
"भाभी, खोल दे पूरी आज, अन्दर घुसा ले मेरा ये किंग लिंग... मेरी जान निकाल दे ... आह्ह्ह ... ले ले मेरा लण्ड !"
" बहुत जोर मार रहा है, कितना करारा है ... तो घुसा दे मेरी पिच्छू में ... देख कितनी सारी क्रीम गाण्ड में घुसा कर आई हूँ ... यह देख !"भाभी ने अपनी गोरी गोरी गाण्ड मेरी तरफ़ उभार दी ... मुझसे अब सहन नहीं हो रहा था। मैंने अपना कड़कता हुआ लण्ड उनकी क्रीम भरी गाण्ड के छेद के ऊपर जमा दिया। मेरा सुपारा जोर लगाते ही आप से खुल पड़ा और छेद में समाता चला गया। मुझे तेज मिठास भरी गुदगुदी हुई। भाभी झुकी हुई थी पर उनके पास कोई हाथ टिकाने की कोई वस्तु नहीं थी। मैंने लण्ड को गाण्ड में फ़ंसाये हुये भाभी को कहा,"पलंग तक चल कर बताओ इस फ़ंसे हुये लण्ड के साथ तो मजा आ जाये !""कोशिश करूँ क्या ..."
भाभी धीरे से खड़ी हो गई पर गाण्ड को लण्ड की तरफ़ उभार रखा था। मेरा लम्बा लण्ड आराम से उसमें फ़ंसा हुआ था। भाभी के चलते ही मेरे लण्ड में गाण्ड का घर्षण होने लगा, मेरा लण्ड दोनों गोलों के बीच दब गया। वो और मैं कदम से कदम मिला कर आगे बढ़े ... और अंततः पलंग तक पहुँच ही गये। इस बीच गाण्ड में लण्ड फ़ंसे होने से मुझे लगा कि मेरा तो माल निकला... पर नहीं निकला... पलंग तक पहुंच कर भाभी हंसते हुये बोली,"मेरी गाण्ड में लण्ड फ़ंसा कर जाने क्या क्या करोगे ... फिर चूत में घुसा कर मुझे ना चलाना !"
"नहीं भाभी मुझे लगा कि अब तुम झुकोगी कैसे, सो कहा था कि पलंग तक चलो।"
"चल शरीर कहीं के ..." भाभी ने हंसते हुये कहा और अपनी टांगें फ़ैलाने लगी और आराम जैसी पोजीशन में आ गई। आधा बाहर निकला हुआ लण्ड मैंने धीरे से दबा कर पूरा अन्दर तक उतार दिया। इस बार मुझे स्वर्ग जैसा आनन्द आ रहा था। कसी हुई गाण्ड का मजा ही कुछ और ही होता है। भाभी पीछे मुड़ कर मुझे देखने लगी। मैं तो धक्के मारने में लगा हुआ था। अचानक भाभी हंस दी।
"सूरत तो देखो... जैसे कोई खजाना मिल गया हो ... चोदते समय तुम कितने प्यारे लगते हो !"
"भाभी, उधर देखो ना, मुझे शरम आती है..."
"अच्छा जरा अब जम कर चोद दे..." भाभी ने मुझे और उकसाया।
मेरे धक्के तेज हो गये थे। भाभी भी अपनी गाण्ड हिला कर आनन्द ले रही थी।
"अरे मर गई मां ... ये क्या ... मेरी चूत चोदने लगे..."
पता नहीं कब जोर जोर से चोदने के चक्कर में लण्ड पूरा बाहर निकल रहा था और पूरा अन्दर जा रहा था। इस बार ना जाने कैसे फ़िसल कर उनकी रस भरी चूत में चला गया।
"ओह भाभी सॉरी ... ये जाने कहां कहां मुँह मारता रहता है !"
भाभी मेरी इस बात पर हंस दी, "चल चूत में अधिक मजा आ रहा है... साला भचाक से पूरा ही घुस गया।"
मैंने उनकी चूत को जोर जोर से चोदना आरम्भ कर दिया। इस बार भाभी की सिसकियाँ तेज थी।
"भाभी जरा धीरे से ... मजा तो मुझे भी आ रहा है, पर पकड़े गये तो सारा मजा गाण्ड में घुस जायेगा !"
"क्या करूँ, बहुत मजा आ रहा है ..." भाभी ने अपना मुख भींच लिया और सिसकारी के बदले जोर जोर से अपनी सांसें छोड़ने लगी।"अरे मर गई साले ... भेनचोद ... फ़ाड़ दे मेरी ... चोद दे इस भोसड़ी को ... मां ऽऽऽऽऽ..."
"भाभी, खूब मजा आ रहा है ना ... मुझे मालूम होता तो मैं आपको पहले ही चोद मारता..."
"बस चोद दे मेरे राजा ... उफ़्फ़्फ़्फ़ ... साला क्या लौड़ा है ...अंह्ह्ह्ह्ह्...।"
भाभी का बदन मस्त चुदाई से मैं तो ऐंठने लगा था। उसने अपनी चूत और चौड़ा दी ... मुझे चूत में फ़ंसा लण्ड साफ़ दिखने लगा था... मैंने शरारत की, उसके फ़ूल जैसे उभरे हुये गाण्ड के छेद में अपनी दो अंगुलियाँ प्रवेश करा दी। इसमें उसे बहुत मजा आया..."और जोर से गाण्ड में घुसा दे... साले तू तो मस्त लौण्डा है ... जोर के कर !"
लण्ड चूत चोद रहा था और अंगुलियाँ गाण्ड में अन्दर बाहर होने लगी थी।
"भेन की चूत ... मेरे राजा ... मैं तो गई ..."
"मैं भी आया... तेरी तो मां की चूत..."
"राजा और जमा के मार दे ..."
"ले रानी ... ले ... लपक लपक कर ले ... पूरा ले ले ... साली चूत है या ... ओह मैं गया..."
एक सीत्कार के साथ भाभी का रस चू पड़ा... और मेरा वीर्य भी... आह उसकी चूत में भरने लगा। वो और झुक गई, अपना सर बिस्तर से लगा लिया। हम दोनों पसीना पसीना हो चुके थे ... उसके पांव अब थरथराने लग गये थे... शायद वो इस अवस्था में थक गई थी। मैंने भाभी को सहारा दे कर बिस्तर पर लेटा दिया। भाभी ने अपना हाथ बढ़ा कर मुझे खींच लिया। मैं कटे वृक्ष के समान उनके ऊपर गिर पड़ा। भाभी ने अपने बदन के साथ मुझे पूरा चिपका लिया और बहुत ही इत्मिनान से मुझे लपेटे में लेकर प्यार करने लगी। जाने कब तक हम दोनों एक दूसरे को चूमते रहे, प्यार करते रहे... तभी भाभी चिंहुक उठी। मेरा खड़ा लण्ड जाने कब उनकी चूत में जोर मार कर अन्दर घुस कर चूत को चूमने लगा था। लाल टोपा चूत की गुलाबी चमड़ी को सहलाता हुआ भीतर घुस कर ठोकर मार कर अपनी मर्दानगी दिखाना चाह रहा था ...... रात फिर से गर्म हो उठी थी... दो जवान जिस्मों का वासना भरा खेल फिर से आरम्भ हो गया था ... दिल की हसरतें काम रस के रूप में बाहर निकल आती और फिर से एक नया दौर शुरू हो जाता..

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  #170  
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उसका मेरा रिश्ता -1

जब मैं कॉलेज में पढ़ती थी तब मैं राहुल से बहुत प्यार करती थी।


मेरी एक हमराज सहेली भी थी विभा... वो मेरी राहुल से मिलने में बहुत मदद करती थी। एक तो वो अकेली रहती थी और वो मेरे अलावा किसी से इतनी घुली मिली भी नहीं थी। जब मैं एम ए के प्रथम वर्ष में थी... मुझे याद है मैंने पहली बार अपना तन राहुल को सौंपा था। बहुत मस्त और मोटे लण्ड का मालिक था वो। विभा मुझसे अक्सर पूछा करती थी कि आज क्या किया... कितनी चुदाई की... कैसे चोदा... मजा आया या नहीं...


मैं उसे विस्तार से बताती थी तो वो बस अपनी चूत दबा कर आह्ह्ह कर उठती थी, फिर कहती थी- अरे देख तो सही...


अपनी चूत घिस घिस कर मेरे सामने ही अपना रस निकाल देती थी। मुझे तो राम जी ! बहुत ही शरम आती थी।


राहुल ने मुझे एम ए के अन्तिम वर्ष तक जी भर के चोदा था। कहते है ना वो... चोद चोद कर भोसड़ा बना दिया... बस वही किया था उसने। पहली बार उसने मेरी गाण्ड जब मारी थी तब मैं जितना सुनती थी कि बहुत दर्द होता है... तब ऐसा कोई जोर का दर्द तो नहीं हुआ था। बस पहली बार थोड़ा सा अजीब सा लगा था...


दर्द भी कोई ऐसा नहीं था... पर हाँ जब धीरे धीरे मैं इसकी अभ्यस्त हो गई तो खूब मजा आने लगा था।


पढ़ाई समाप्त करते करते मुझमें उसकी दिलचस्पी समाप्त होने लगी थी। पर चोदने में वो अभी भी मजा देता था... मस्त कर देता था। मैंने धीरे से अपनी मां से शादी की बात की तो घर में जैसे तूफ़ान आ गया। जैसा हमेशा होता आया है... मेरी शादी कहीं ओर कर दी गई। राहुल ने भी मुझसे शादी करने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। बाद में मुझे पता चला था कि वो विभा से लग गया था और उसी को चोदने में उसे आनन्द आता था।


राहुल को न पाकर मैं बहुत रोई थी, बहुत छटपटाई थी। पर विभा की बात जब मैंने सुनी तो सारा जोश ठण्डा पड़ गया था। मैं पढ़ी लिखी, समझदार लड़की थी...


मैंने अपने आप को समझा लिया था। पर उसकी वो चुदाई और गाण्ड मारना दिल में एक कसक छोड़ गई थी। मेरी शादी हो गई थी। मुझे घर भी भरा पूरा मिला था। सास थी... ससुर थे... एक देवर अंकित भी था प्यारा सा, बहुत समझदार... हंसमुख... मुझे बहुत प्यार भी बहुत करता था।


पति सुरेश एक कॉलेज में सहायक प्राध्यापक था। बहुत अनुशासनप्रिय... घर को कॉलेज बना दिया था उसने... उसकी सारी प्रोफ़ेसरी वो मुझ पर ही झाड़ता था। आरम्भ में तो वो रोज चोदता था... पर उसके चोदने में एकरसता थी। कोई भिन्नता नहीं थी... बस रोज ही मेरे टांगों के मध्य चढ़ कर चोद कर रस भर देता था। झड़ तो मैं भी जाती ही थी पर झड़ने में वो कशिश नहीं थी।


एक दिन वो बाईक से गिर पड़े... फ़ुटपाथ के कोने से चोट लगी थी। रीढ़ की हड्डी में चोट आई थी। नीचे का हिस्सा लकवा मार गया था। अब वो अस्पताल में थे...


महीना भर से अधिक हो गया था... पता नहीं ये निजी अस्पताल वाले कब तक उन्हें वहाँ रखते... शायद उन्हें तो बस पैसे से मतलब था। मैंने ससुर से कह कर अंकित को अपने कमरे में सुलाने की आज्ञा ले ली थी। अकेले में मुझे डर भी लगता था।


पर इन दिनों में मुझे अंकित से लगाव भी होने लगा था। वो मुझे भाने लगा था। रात को मैं देर से सोती थी सो बस उसे ही चड्डी में पहने हुये सोते हुये निहारती रहती थी।


उफ़ ! बहुत प्यार आता था उस पर... पर शायद यह देवर वाला प्यार नहीं था... मैं उसके गुप्त अंगों को भी अन्दर तक से एक्सरे कर लेती थी।

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