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  #1  
Old 12th October 2009
kaamdev007 kaamdev007 is offline
 
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थोडा सा हट के एक प्रेम कथा

पाठकों को दिवाली की हार्दिक सुभकामनाएँ

ये घटना आज से १५ साल पहले की है जब मेरी उम्र लगभग १५ साल थी, में एक मिडेल क्लास फॅमिली से हूँ पिताजी गवर्मेंट इंजिनियर थे , में अपने माता पिता की एकलौती संतान हूँ , जहाँ हम रहते थे वो एक गवर्मेंट कालोनी थी मकान लगभग सभी एक दुसरे से सटे हुए थे सभी लोग एक दूसरे को अच्छी तरह से जानते थे, मेरे घर से पांच घर दूर ही मेरे एक दोस्त का घर था उसकी दो बहने थी बड़ी शालिनी लगभग २२ साल की जो हम से लगभग ७ साल बड़ी थी वो एक गिर्ल्स डिग्री कॉलेज से बी. ए. कर रही थी ये उसकी सेकंड इयर थी, छोटी सपना हम ऊम्र ही थी लगभग एक साल हम से छोटी वो एक कन्या विद्यालय में नौवी क्लास में थी

मेरी शिक्षा आठवीं तक एक विद्या मंदिर में हुई थी जहाँ लड़कों के लिए सभी लड़कियों बहने और लड़कियों के लिए सभी लड़के भाई थे , रक्षा बंधन पर सभी लड़कियां सभी लड़कों को राखी बान्द थी ये जरुरी था पढाई हो या ना हो सम्बन्ध जरुर निभाए जाते थे, अगर उस दिन स्कूल ना जाओ तो आचार्य जी गांड तोड़ देते थे लेकिन उनकी ये तमाम कोशिश बच्चों को जवान होने से नहीं रोक सकती थीं, और जवानी की सुरुआत सेक्स से होती है

खैर जैसे-तैसे आठवीं पास करके मैंने दूसरे हाई स्कूल में एड्मिसन लिया, वहां मेरी मुलाकात पहले से ही एक्सपर्ट संजय से हुई संजय ही सपना और शालिनी का भाई था, उसने मुझे शुरु के कुछ महीनो में ही एहसास दिला दिया की अब तक मैंने क्या खोया है , मस्तराम की किताबें , एडल्ट मगज़िने सब कुछ उसी ने उपलब्ध कराईं पता नहीं उसके सोर्स क्या थे लेकिन उस पर सब कुछ उपलब्ध रहता था मेरे लिए नहीं क्लास के और लोंडों के लिए भी वो मसीहा था, मेरे लिए अच्छी बात थी की वो मेरा दोस्त था और मुझे फ्री में ही मजे दिलाता था औरों के लिए वो इसका चार्ज बसूलता था जिससे उसकी सिगरेट के पैसे निकलते थे , दो सेम अबिलिटी के बन्दों में दोस्ती नहीं हो सकती, दोनों की कमजोरी ही एक दूसरे को दोस्त बनाती है ताकि उसकी वो कमी वो दोस्त से पूरी कर सके , संजय पढाई में थोडा कमज़ोर था ये उसकी कमजोरी थी में चूँकि पढाई में ठीक था तो उसने मुझ से दोस्ती कर ली, मेरी कमजोरी वही थी जो क्लास में और लड़कों की थी ( सेक्स मटेरिअल )

में सुबह जब स्कूल जाता तो संजय को लेता हुआ जाता था इसके लिए मुझे उसके घर जाना पड़ता था, जब भी मेरी एंट्री उसके घर में होती बड़ी दीदी शालिनी बेड पर सोती हुई मिलती शायद घोडे बेच के सोती थी कुछ होश नहीं रहता था की कपडों की क्या हालत हो रही है , शालिनी मुझ से थोडा सहमती थी क्यूंकि मैंने उसे एक बार कालोनी में ही रहने वाले एक लड़के नवीन से बात करते देख लिया था, मिडेल क्लास में बात करना ही बहुत होता है अगर ये बात में संजय को बता देता तो वो नवीन का हवाई जहाज़ बना देता भले ही वो लड़का संजय से ७ साल बड़ा था लेकिन संजय के सोर्सेस के आगे कहीं नहीं टिकता था खैर मेरे लिए तो शालिनी का राज़, राज़ ही रखना था कम से कम इसी बहाने वो मुझ से थोडा बहुत बात कर लेती थी, नहीं तो वो किसी को घास भी नहीं डालती थी

शालिनी गजब की सुंदर लड़की थी गोरा रंग लाल होठ ५'२" लम्बी ३४डी - २५ - ३६ का साइज़ रहा होगा, मेरे लिए तो उन् कहानियों की काल्पनिक हेरोइन थी जो मस्तराम की किताबों में होती थी चूँकि उन् किताबों में करेक्टर के फोटो तो होते नहीं थे सो किसी ना किसी तो एमजेंन करना ही पड़ता था मेरी लिए हर स्टोरी की हेरोइन शालिनी ही रहती

हाई स्कूल के उस एक साल ने मुझ में कई परिवर्तन ला दिए थे सबसे बड़ा परिवर्तन मेरे लंड में था मैंने विद्या मंदिर की शिक्षा तक मुट्ठी नहीं मारी थी लेकिन इस एक साल में सायद हफ्ते में २ या ३ बार तो मार ही लेता था इसका असर ये हुआ की जो लंड एक साल पहले अस्तित्व में नहीं था वो आज अपनी उपस्थिति बहुत ही शानदार तरीके से करा रहा था

( दोस्तों ये मेरा अपना पर्सनल अनुभव है की मुट्ठी मारने से लंड का साइज़ बढता है, क्यूंकि आज में ७" के लंड का मालिक हूँ ये वही साइज़ है जो तभी बन गया था जब में १६ साल का था, वैसे भी साइज़ १८ से २० साल तक ही बढता है मेरे ख्याल से ये साइज़ नोर्मल से थोडा बड़ा ही है क्यूंकि एवरेज साइज़ ५ से ६ " का ही होता है और ये सब सायद मेरे मुट्ठी मारने की वजह से ही संभव हो पाया था )

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  #2  
Old 12th October 2009
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दोस्तों अपने विचार देना जिनसे मुझे स्टोरी आगे बढाने में प्रेरणा मिले

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  #3  
Old 12th October 2009
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सपना से मेरी बात कम ही होती थी वो बहुत ही रिज़र्व नेचर की लड़की थी , कम बोलना बात बात पर कमेन्ट कर देना जिससे किसी की भी गांड सुलग जाए लेकिन सुन्दरता में वो अपनी बहन पर ही गयी थी शालिनी के शरीर के दर्शन तो सुबह हो जाते थे जब वह सो रही होती थी कपडों में ही उसके अंगों का उतार चदाव नज़र आ जाता था लेकिन एक दिन वह हुआ जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी

एक सुबह जब में संजय के घर पंहुंचा तो उसके पापा ड्यूटी जा चुके थे मम्मी रसोई में थी, संजय नहा रहा था और शालिनी सोयी हुई थी सपना घर की सफाई कर रही थी झाडू वो लगा चुकी थी अब पोंछा लगा रही थी मेरे लिए दरवाजा खोल कर फिर अपने काम में लग गयी शायद जल्दी में थी इसलिए पोंछा लगते समय उसका स्कर्ट जो की घुटनों तक का ही था क्रोस टांगें होने की वजह से खुल गया और उसके अंदर उसकी सफ़ेद पैंटी की झलक मुझे मिल गयी ये घटना मेरे लिए एक दम नयी थी मैंने इस से पहले किसी लड़की की पैंटी नहीं देखी थी शायद उस दिन मुझे पहली बार एहसास हुआ की वास्तव में लड़की की जाघें कैसे होती हैं एकदम चिकनी गोरी घुटनों से ऊपर गजब की मोटाई सपना भले ही शालिनी से ८ साल छोटी थी लेकिन उसकी गांड उस से बिलकुल कम नहीं थी बल्कि शालिनी की चड्डी सपना के टाइट ही आती

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  #4  
Old 12th October 2009
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yarose04 is beginning to get noticed
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good starting keep update

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  #5  
Old 12th October 2009
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सपना पोंछा लगा के जा चुकी थी लेकिन मुझे ऐसे चीज़ के दर्शन कराने के बाद जिसने मेरे सोचने के शक्ति पर रोक लगा दी मेरा ध्यान सिर्फ वहीँ अटक गया था और में मूर्ति की तरह पलंग पर बैठा हुआ था, तभी किसी ने मेरे कंधे पर हाथ रखा सपना की चड्डी के ख़याल में ऐसा खोया की ध्यान नहीं रहा पीछे बेड पर शालिनी सो रही है वो उठ चुकी थी और मुझे ऐसे हालत में बैठा देख वो तुंरत भांप गयी की शायद मैंने सोते समय उसका कोई अंग देख लिया है वो अपने कपडे जल्दी जल्दी ठीक करने लगी उसे क्या पता था की उसकी छोटी बहन मुझ पर ४४० वोल्ट का करंट गिरा कर गयी है, शालिनी ने तुंरत सवाल ढोक दिया तुम कब आये वो शायद कन्फर्म करना चाह रही थी की में कितनी देर से उसका शरीर निहार रहा हूँ में कुछ बोलता उस से पहले संजय नहा कर आ चुका था उसके आते ही शालिनी बिना अपना उत्तर सुने ही बाथरूम चली गयी और में संजय के साथ निकल लिया स्कूल के लिए ...

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  #6  
Old 12th October 2009
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dear freind very good post
urs story is remarkable
i remebers our old days
very nice
dear freind update all fast

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  #7  
Old 12th October 2009
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brijand brijand is offline
@@ Death is Hereditary @@
 
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Send a message via Yahoo to brijand
good story..
keep it up
______________________________

Life is like an onion.

Why ???
Because you peel away layer after layer and when you come to the end you have nothing.


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  #8  
Old 12th October 2009
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सपना की सफ़ेद पैंटी ने मुझे पूरे दिन कोई काम नहीं करने दिया और फिर जैसा की होना ही था मुझे रात को उसके नाम की मुठी मार के लंड को धोका देना पड़ा अगली सुबह में फिर उसी उम्मीद से संजय की घर पहुंचा तो पता चला की वो जल्दी चला गया किसी काम की वजह से ( मुझे पता था कहाँ गया होगा अपने नए सोर्स बनाने ), में वहां से जाने लगा तो सपना बोली की तुम मुझे स्कूल तक छोड़ दो संजय नहीं है तो तुम्हारी साइकिल खाली जायेगी इस से बडिया मुझे ही ले चलो, में भी पैदल चलने से बच जाउंगी

उसका स्कूल हमारे स्कूल के रास्ते में ही पड़ता था लगभग घर से १ किलोमीटर और उसके स्कूल से १ किलोमीटर हमारा स्कूल था मुझे उसे ले जाने में कोई प्रॉब्लम नहीं थी लेकिन पीछे साइकिल में मेरा बैग लगा हुआ था और उसको पीछे ही बैठना था संजय तो आगे बैठ जाता था ( साइकिल की फ्रेम पर ) और साथ में सपना का अपना बैग भी था जो मेरे बैग से बड़ा ही था तो उसे दोनों बैग लेके पीछे बैठना पड़ा, थोडी दूर चलने पर ही उसका बैलेंस बिगड़ गया शायद उसकी ३६ साइज़ गांड साइकिल के कैरिएर पर फिट नहीं हो पा रही थी ऊपर से बेग्स का बोझ उसने दोनों बैगस गिरा दिए, उसकी इस हरकत से मुझे साइकिल रोकनी पड़ी अपने बैग को गिरा देख मुझे गुस्सा तो बहुत आया और मैंने उसे डांटते हुए कहा अपने बैग उठाओ और पैदल ही जाओ, लेकिन वो चुपचाप खडी रही रास्ते में उसके स्कूल की और लड़कियां भी पैदल जा रही थी शायद उसे अपनी बेजत्ति होने का डर सता रहा था, स्कूल की लड़कियों ने उसे मेरे साथ साइकिल पर आते हुए देख लिया था, अब अगर वो पैदल जाती तो उसका मजाक बन सकता था, उसके गोरे गाल टमाटर की तरह लाल हो चुके थे मुझे समझते देर ना लगी की अगले १-२ मिनट में ये आंसुओं की धारा निकालने वाली है, मैंने स्थिति को देखते हुए उस से कहा की तुम दोनों बैग पीछे लगा दो और आगे बैठ जाओ उसे मेरा आईडिया पसंद आ गया और वो आगे बैठ गयी, अब हम दोनों ही खुश थे सपना को पैदल चल कर अपना मजाक नहीं बनवाना पड़ता और मुझे तो जैसे भगवान् ने कुछ अच्छा महसूस कराना था, मेरे हर पेडल ( साइकिल चलने के स्टेप ) पर मेरा घुटना उसकी मुलायम और मोटी जाँघों से टकरा रहा था, टकरा घुटना रहा था और अहसास लंड को हो रहा था ( दोनों के बीच अच्छी अंडरस्टेनन्डिंग थी ) २ मिनट बाद ही लंड अपना पूरा आकार ले चुका था, सपना साइकिल पर पीछे की तरफ होकर बैठी थी मतलब उसकी कमर लगभग गद्दी से लगी हुई थी इस स्थिति में मेरा लंड उसकी कमर पर रगड़ खा रहा था इस बात का अहसास सपना को हो गया और वो थोडा आगे खिसक गयी लेकिन जब तक उसका स्कूल आ चुका था और मैंने साइकिल रोक दी थी, सपना और मेरा सामना बहुत कम समय के लिए होता लेकिन उतने समय में कोई ऐसे हरकत होती जो मुझे पागल कर जाती पहले उसके चड्डी के दर्शन और अब ये सब...


सपना साइकिल से उतर कर अपना बैग निकालने लगी, बैग निकालते हुए मुझ से बोली अगर लोटने में संजय तुम्हारे साथ ना आया तो मुझे यहाँ से ले चलना, उसकी इस बात को सुनकर मैंने तुंरत ही निश्चय कर लिया की अब संजय को अकेले ही आना पड़ेगा

में ठीक २ बजे सपना के स्कूल पहुँच गया और गेट पर उसके बाहर निकलने का वेट करने लगा वो २ मिनट बाद ही बाहर आई, उसके साथ उसकी सहेली भी थी जो उसके साथ ही वापस जाती थी मुझे देख कर सपना ने तुंरत ही उस से पीछा छूदाते हुए कहा की वो मेरे साथ जायेगी तू आज अकेली चली जा, वो लड़की थोडा अपसेट हो गयी क्यूंकि सेम टाइम लड़कों की छुट्टी का भी होता था और वो अकेली जाती लड़कियों पर कमेन्ट करे बिना नहीं निकलते थे, इसलिए ज्यदातर लड़कियां या तो ग्रुप में या परेंट्स के साथ ही जाती थीं

सपना को इस बात से कोई मतलब नहीं था वो अपना बैग पीछे लगा चुकी थी और आगे बैठने की तेयारी कर रही थी, मुझे एक बार तो अजीब सा लगा लेकिन फिर अगले ही पल सोचा तुमने कोई समाज सुधार का ठेका नहीं ले रखा जब इसकी सहेली को इसकी परवाह नहीं तो तुम क्यूँ अपने हाथ में आये लडू फ़ेंक रहे हो, मैंने सपना को आगे बैठा लिया और साइकिल चला दी सब कुछ सुबह की तरह ही होने लगा लेकिन इस बार सपना मेरे लंड की टक्कर से आगे नहीं बड़ी और पीछे ही सटके बैठे रही या तो उसे कोई फर्क नहीं पड़ रहा था या उसे मजा आ रहा था, कहना मुस्किल है क्या सही था

थोडी ही देर में सपना का घर आ गया उसका घर आते ही मुझे बिजली का झटका लगा, संजय घर पहुँच चुका था और गेट पर ही खडा था उसने सपना को मेरे साथ आगे साइकिल पर बैठा देख लिया, लेकिन में भी संजय का ही चेला था मेने तुंरत बात संभाली और उसको बोल दिया की मैंने उसे बहुत ढूंडा वो नहीं मिला तो रस्ते में सपना मिल गयी और मैंने उसे लिफ्ट दे दी, मेरी ये बात सुनकर संजय को तो यकीन हो गया लेकिन सपना की हसीं छूट गयी उसे पता था की में उसका वेट उसके स्कूल पर कर रहा था और इस टाइम में झूठ बोल रहा था, लेकिन वो हसंती हुयी अन्दर चली गयी

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  #9  
Old 12th October 2009
kaamdev007 kaamdev007 is offline
 
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सपना की हसीं उस दिन मुझे बहुत मीठी सी लगी वो कमेन्ट वाली हसीं नहीं थी, अब तो में ये सोचने लगा की अगली बार कब मोंका मिलेगा..

२ दिन बाद संजय मेरे घर आया और बोला आज आप लोगों का खाना हमारे यहाँ है सपना का बर्थडे है सो कुछ कालोनी के लोगों का खाना घर पर ही है, और उसने मेरे पापा से कोई भी गिफ्ट लेके आने के लिए मना कर दिया क्यूंकि ये सब संजय के पापा को पसंद नहीं था उन्हें तो सपना की जिद की वजह से ये सब करना पड़ रहा था, उसकी कुछ सहेलियों का जन्मदिन ऐसे ही बनता था तो उसने भी इस बार सलेबिरेट करने की जिद की जो उसके मम्मी पापा को माननी पड़ी, में शाम को घर जा रहा था उस दिन बारिस बहुत तेज़ हो रही थी में घर से अब भी ३ किलोमीटर दूर था, रास्ते में साइकिल पंक्चर हो गयी, साइकिल तो मैंने ठीक करा ली लेकिन बारिस बंद होने का वेट करने लगा अगर भीगता हुआ घर जाता तो घर वाले पूछते आज कैसे भीगा क्यूंकि मुझे भीगना पसंद नहीं था मुझे तुंरत झुकाम होता था, और फिर में घर वालों को कैसे बताता की सपना की बर्थडे की वजह से भागा चला आया.. इसलिए में वेट करने लगा लेकिन आज बारिस कुछ जादा ही लम्बी थी खैर लगभग २ घंटे बाद बारिस बंद हुई और में सीधे सपना के घर ही गया में आलरेडी लेट था केक कट चुका था

संजय और शालिनी मेहमानों को डिनर सर्वे कर रहे थे उनको मेरे लेट आने से कोई फर्क नहीं पड़ता था संजय ने बस इतना ही कहा "कहाँ गांड मरा रहा था बे" उसको ये हक़ था आखिर वो मेरा दोस्त था

मैंने सोचा की बर्थडे गर्ल को विश तो कर ही दूं, में सपना के पास गया वो अपनी सहेलियों के बीच बैठी थी मुझे देख कर मेरे पास आई और बोली केक तो ख़तम...

मैंने कहा कोई बात नहीं फिर खा लेंगे, मेरी इस बात पर तुंरत जवाब आया की जन्मदिन रोज़ रोज़ थोड़े ही बनता है जो फिर खा लेंगे फिर हंसने लगी, फिर अचानक मुझ से बोली की मेरा गिफ्ट कहाँ है, उसे पता था को कोई गिफ्ट नहीं है लेकिन फिर भी उसने मेरी गांड में ऊँगली कर दी, मुझे लगा की गलती मेरी है एक तो मैं लेट आया वो भी बिना गिफ्ट के खैर मैंने उसके कान में हलके से कहा की गिफ्ट तो है लेकिन में तुम्हें सबके सामने नहीं दे सकता, वो बोली ऐसा क्या लाये हो जो सबके सामने नहीं दे सकते...

Last edited by kaamdev007 : 12th October 2009 at 06:59 PM.

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  #10  
Old 12th October 2009
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अब सोचने की बारी मेरी थी क्यूंकि गिफ्ट तो मेरे पास था नहीं और इसके इस सवाल का क्या जवाब दूं, किताबें और स्टोरीज पड़ के मुझे इतना तो आईडिया हो ही गया था की लड़कियां बहुत भावुक होती हैं और छोटी सी बात भी उन्हें बहुत फील कर जाती है यही सोच कर मैंने उस से कहा की " देखो गिफ्ट ज्यादा महंगा नहीं हैं तुम्हें पसंद नहीं आया और तुमने अपनी सहेलियों के सामने खोल दिया और उन्होंने मेरा मजाक बना लिया तो मेरी बेइजत्ती हो जायेगी"

ये बात सपना को थोडी सी अजीब लगी और शायद सही भी वो थोडा सहमते हुए बोली .. ठीक है जब तुम्हें मोंका मिले तब दिखा देना, अब वो थोडा उदास सी लगने लगी उसे शायद पहली बार एहसास हो रहा था की वो दूसरो का मजाक बनाती है,

सच मानिये मैंने ये बात उसे आइना दिखाने के लिए नहीं कही थी, में इतना समझदार नहीं था की किसी को समझा सकता लेकिन अनजाने में चलाये तीर ने २ काम कर दिए एक तो सपना को मुझ पर तरस ( सिम्पेथी ) आने लगा, दूसरा उसे उसकी गलती का एहसास हो गया..

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