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Old 11th August 2014
saleemkhan12 saleemkhan12 is offline
 
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चोरी का माल

मेरा नाम अशोक है, और मेरी उम्र २१ साल की है, मेरे घर में मेरे अलावा मेरी मम्मी पापा और मेरी छोटी बहन ऋतू रहते हैं, मेरे पापा का अपना बिज़नस है और हम अपर मिडल क्लास में आते हैं , खेर , असली कहानी पर आते हैं, मैं आज कॉलेज से घर पहुँच कर जल्दी से अपनी अलमारी का दरवाजा खोला और उसमे बनाये हुए छेद के जरिये अपनी छोटी बहन के कमरे में झाँकने लगा, ये छेद मैंने काफी मेहनत से बनाया था और इसका मेरे अलावा किसी और को पता नहीं था, ऋतू अपने स्कूल से अभी -२ आई थी और अपनी यूनिफार्म चेंज कर रही थी,उसने अपनी शर्ट उतार दी और गोर से अपने फिगर को आईने में देखने लगी , फिर अपने दोनों हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा खोल दी, वो बेजान पत्ते के सामान जमीन की और लहरा गयी , और उसके दूध जैसे 32 साइज़ के अमृत कलश उजागर हो गए, बिलकुल तने हुए और उनके ऊपर गुलाबी रंग के दो छोटे छोटे निप्पल तन कर खड़े हो गए..
मैं ऋतू से २ साल बड़ा था पर मेरे अन्दर सेक्स के प्रति काफी जिज्ञासा थी और मैं घर पर अपनी जवान होती बहन को देख कर उत्तेजित हो जाता था इसलिए तक़रीबन २ महीने पहले मैंने ये छेद अपनी अलमारी में करा था जो की उसके रूम की दूसरी अलमारी में खुलता था जिसपर कोई दरवाजा नहीं था और कपडे और किताबे रखी रहती थी, मैंने ये नोट करा की ऋतू रोज़ अपने कपडे चेंज करते हुए अपने शरीर से खेलती है, अपने स्तनों को दबाती है अपने निप्पल को उमेठती है और फिर अपनी चूत मैं ऊँगली डाल कर सिसकारी भरते हुए मुठ मारती है, ये सब देखते हुए मैं भी अपना लंड अपनी पैंट से निकाल कर हिलाने लगता हूँ और ये ध्यान रखता हूँ के मैं तभी झडू जब ऋतू झडती है, ..
आज फिर ऋतू अपने जिस्म को बड़े गौर से देख रही थी, अपने चुचे अपने हाथ में लेकर उनका वजन तय करने की कोशिश कर रही थी, और धीरे-२ अपनी लम्बी उंगलियों से निप्पल्स को उमेठ रही थी, और वो फूलकर ऐसे हो रहे थे जैसे अन्दर से कोई उनमे हवा भर रहा हो, किसी बड़े मोती के आकार में आने में उनको कोई समय नहीं लगा!
अगले दिन दोनों मेरे साथ ही कॉलेज से घर आ गए, हमने खाना खाया और वही पड़ने बैठ गए, शाम होते - २ , पड़ते और बाते करते हुए, हमने टाइम पास किया, फिर रात को जल्दी खाना खा कर मेरे रूम में चले गए.

वहां पहुँचते ही सन्नी बोला, "अबे कब तक इन्तजार करवाएगा, कब देखने को मिलेगी हमें नंगी लड़की, सुबह से मेरा लंड नंगी लड़की के बारे मैं सोच सोचकर खड़ा हुआ है.."

विशाल भी साथ हो लिया, "हाँ यार, अब सब्र नहीं होता, जल्दी चल कहाँ है नंगी लड़की"

"यंही है !, मैंने कहा
वो दोनों मेरा मुंह ताकने लगे

मैंने अपनी अलमारी खोली और छेद में से देखा, ऋतू अभी अभी अपने रूम में आई थी और अपने कपडे उतर रही थी, ये देखकर मैं मंद मंद मुस्कुराया और सुन्नी से बोला "ले देख ले यहाँ आकर"

सन्नी थोडा आश्चर्य चकित हुआ पर जब उसने अपनी आँख छेद पर लगे तो वो हैरान ही रह गया और बोला "अबे तेरी ऐसी की तैसी , ये तो तेरी बहिन ऋतू है "

ऋतू का नाम सुनते ही विशाल सन्नी को धक्का देते हुए छेद से देखने लगा और बोला, "हाँ यार, ये तो इसकी बहन ऋतू hai "और ये क्या ये तो अपने कपडे उतार रही है...."

दोनों के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान आ रही थी और मेरे चेहरे पर विजई.

विशाल, "तो तू अपनी बहन के बारे में बाते कर रहा था, तो तो बड़ा ही हरामी है."

wow ,विशाल बोला, अबे सन्नी देख तो साली की चुचिया कैसी तनी हुई है,"

सन्नी बोला, मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा की तू अपनी बहन को छेद के जरिये रोज़ नंगा देखता है और पैसे लेकर हमें भी दिखा रहा है..तू सही मैं भेन चोद टाइप का इंसान है,कमीना कही का.." हा हा ..

मैंने कहा "तो क्या हुआ, मैं सिर्फ देख और दिखा ही तो रहा हूँ, और मुझे इसके लिए पैसे भी तो मिल रहे हैं, और ऋतू को तो इसके बारे में कुछ पता ही नहीं है, और अगर हम उसको नंगा देखते है तो उसे कोई नुक्सान नहीं है, तो मुझे नहीं लगता की इसमें कोई बुराई है.."

"अरे वो तो अपने निप्पल्स चूस रही है" विशाल बोला और अपना लंड मसलने लगा

"मुझे भी देखने दे" सन्नी ने कहा.

फिर तो वो दोनों बारी - २ छेद पर आँख लगाकर देखने लगे.

विशाल बोला "यार क्या माल छुपा रखा था तुने अपने घर पर अभी तक, क्या बॉडी है"

"वो अपनी पैंट उतार रही है....अरे ये क्या, उसने पेंटी भी नहीं पहनी हुई.ओह माय माय ...और उसने एक लम्बी सिसकारी भरते हुए अपना लंड हाहर निकाल लिया और हिलाने लगा.

"क्या चूत है...हलके -२ बाल और पिंक कलर की चूत ...wow

अब वो अपनी चूत में उंगलिया घुसा - २ कर सिस्कारिया ले रही थी. और अपना सर इधर उधर पटक रही थी..

विशाल और सन्नी के लिए ये सब नया था, वो दोनों ये देखकर पागल हो रहे थे और ऋतू के बारे मैं गन्दी-२ बातें बोल कर अपनी मुठ मारते हुए झड़ने लगे.

तभी ऋतू झड गयी और थोड़ी देर बाद वो उठी और लाइट बंद करके सो गयी.

विशाल और सन्नी shock स्टेट में थे , और मेरी तरफ देखकर बोले "यार मज़ा आ गया, सारे पैसे वसूल हो गए"

"मुझे तो अभी भी विश्वास नहीं हो रहा है की तुने अपनी मुठ मारती हुई बहन हमें दिखाई" सन्नी बोला.

"चलो अब सो जाते है" मने कहा.

विशाल "यार, वो साथ वाले कमरे में नंगी सो रही है, ये सोचकर तो मुझे नींद ही नहीं आएगी"

मैं बोला" अगर तुम्हे ये सब दोबारा देखना है तो जल्दी सो जाओ और सुबह देखना, वो रोज़ सुबह उठकर सबसे पहले अपनी मुठ मारती है फिर नहाने जाती है." लेकिन उसके लिए तुम्हे पांच सो रूपए और देने होंगे."

"हमें मंजूर है " दोनों एक साथ बोले.

मैं अपनी अक्ल और किस्मत पर होले होले मुस्करा रहा था.

सुबह उठते ही हम तीनो फिर से छेद पर अपनी नज़र लगा कर बैठ गए, हमें ज्यादा इंतजार नहीं करना पड़ा, १० मिनट बाद ही ऋतू उठी, रोज़ की तरह पूरी नंगी पुंगी, अपने सीने के उभारो को प्यार किया, दुलार किया, चाटा, चूसा और अपनी उंगलियों से अपनी चूत तो गुड मोर्निंग बोला.

विशाल "यार क्या सीन है, सुबह सुबह कितनी हसीं लग रही है तेरी बहन.

फिर सुन्नी बोला "अरे ये क्या, इसके पास तो नकली लंड भी है....amazing . और वो अब उसको चूस भी रही है, अपनी ही चूत का रस चाट रही है..बड़ी गर्मी है तेरी बहन में यार"

और फिर ऋतू डिल्डो को अपनी चूत में दाल कर जोर जोर से हिलाने लगी

हम तीनो ने अपने लंड बाहर निकाल कर मुठ मारनी शुरू कर दी, हम सभी लगभग एक साथ झड़ने लगे...दुसरे कमरे में ऋतू का भी वोही हाल था, फिर वो उठी और नहाने के लिए अपने बाथरूम में चली गयी.

फिर तो ये हफ्ते में २-३ बार का नियम हो गया, वो मुझे हर बार १५०० रूपए देते, और इस तरह से धीरे धीरे मेरे पास लगभग साठ हज़ार रूपए हो गए..

अब मेरा दिमाग इस business को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने के लिए सोचने लगा.

एक दिन मैंने सब सोच समझ कर रात को करीब आठ बजे ऋतू का दरवाजा खटकाया.


फिर उसने अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर अपने दाये निप्पल को अपने मुंह में लेने की असफल कोशिश की पर बात बनी नहीं, और उन्हें फिर से मसलने लगी और फिर से अपनी जीभ निकाली, और इस बार वो सफल हो ही गयी, शायद का असर हो गया था, मुझे भी अब उसके बड़े होते चूचो का सीक्रेट पता चल गया था.


फिर उसने अपनी स्कूल पैंट को अपने सांचे में ढले हुए कुलहो से आज़ाद किया और उसको उतार कर साइड में रख दिया , उसने अन्दर कोई पेंटी नहीं पहनी हुई थी, ये मैं पिछले २ हफ्ते से नोटिस कर रहा था, वो हमेशा बिना पेंटी के घुमती रहती थी, ये सोच कर मेरा पप्पू तन कर खड़ा हो जाता था, खैर, पैंट उतारने के बार वो बेद के किनारे पर अलमारी की तरफ मुंह करके बैठ गयी और अपनी टाँगे चोडी करके फैला दी, और अपनी चूत को मसलने लगी, फिर उसने जो किया उसे देख कर मेरा कलेजा मुंह को आ गया, उसने अपनी चूत में से एक ब्लैक डिल्डो निकाला, मैं उसे देख कर हैरान रह गया, ऋतू सारा दिन उसे अपनी चूत में रख कर घूम रही थी , स्कूल में, घर पर सभी के साथ खाना खाते हुए भी ये डिल्डो उसमी चूत में था, मुझे इस बात की भी हैरानी हो रही थी की ये उसके पास आया कहाँ से, लेकिन हैरानी से ज्यादा मुझे उत्तेजना हो रही थी, और उस डिल्डो से इष्र्या भी जो उस गुलाबी चूत में सारा दिन रहने के बाद , चूत के रस में नहाने के बाद चमकीला और तरोताजा लग रहा था,


फिर ऋतू ने उस डिल्डो को चाटना शुरू कर दिया और दुसरे हाथ से अपनी क्लिट को मसलना जारी रखा, कभी वो डिल्डो चूत में डालती और अन्दर बाहर करती , फिर अपने ही रस को चाट कर साफ़ करती, मेरे लिए अब सहन करना मुच्किल हो रहा था, और मैं जोर जोर से अपनी पप्पू को आगे पीछे करने लगा, और मैंने वही अलमारी में जोत से पिचकारी मारी और झड़ने लगा..


वहां ऋतू की स्पीड भी बाद गयी और एक आखिरी बार उसने अपनी पूरी ताकत से वो काला लंड अपनी चूत में अन्दर तक दाल दिया, वो भी अपने चरमो स्तर पर पहुँच गयी और निढाल हो कर वही पसर गयी , अब उसकी चूत में वो साला काला लंड अन्दर तक घुसा हुआ था और साइड में से चूत का रस बह कर बहार रिस रहा था ..


फिर वो उठी और लाइट बंद करके नंगी ही अपने बिस्टर में घुस गयी और इस तरह मेरा शो भी ख़त्म हो गया, मैं भी अनमने मन से अपने बिस्टर पर लौट आया और ऋतू के बारे में सोचते हुए सोने की कोशिश करने लगा..मेरे मन में विचार आ रहे थे की क्या ऋतू का किसी लड़के के साथ चक्कर चल रहा है या फिर वो चुद चुकी है ? लेकिन अगर ऐसा होता तो वो डिल्डो का सहारा क्यों लेती..ये सब सचते -२ कब मुझे नींद आ गयी, मुझे पता ही नहीं चला..


अगली सुबह मैं जल्दी से उठ कर छेद में देखने लगा , ऋतू ने एक अंगड़ाई ली और सफ़ेद चादर उसके उरोजो से सरकती हुई निप्पल्स के सहारे अटक गयी , पर उसने एक झटके से चादर साइड करके अपने चमकते जिस्म के दीदार मुझे करा दिए, फिर अपनी टाँगे चोडी करके १ के बाद १ तीन उंगलिया अपनी चूत में दाल दी और अपना दाना मसलने लगी, मेरा लंद ये मोर्निंग शो देखकर अपने विकराल रूप में आ गया और मैं उसे जोर से हिलाने लगा, फिर ऋतू के मुंह से एक आनंदमयी सीत्कारी निकली और उसने पानी छोड़ दिया, मैंने भी अपने लंद को हिलाकर अपना वीर्य अपने हाथ में लेकर अपने लंद पर वापिस रगड़ दिया और लुब्रिकैत करके उसे नेहला दिया, ऋतू उठी और टॉवेल लेकर बाथरूम में चली गयी, मैं भी जल्दी से तैयार होने लगा.

वो निचे मुझे डाइनिंग टेबल पर मिली और हमेशा की तरह मुस्कुराते हुए गुड मोर्निंग कहा और इधर उधर की बातें करने लगी, उसे देखकर ये अंदाजा लगाना मुश्किल था के ये मासूम सी दिखने वाली, अपने फ्रेंड्स से घिरी रहने वाली, टीचर्स की चहेती और क्लास में अव्वल आने वाली इतनी कामुक और उत्तेजक भी हो सकती है जो रात दिन अपनी मुठ मारती है और काला डिल्डो चूत में लेकर घुमती है.

मेरी माँ, पूर्णिमा किचन में कुक के साथ खड़े होकर breakfast बनवा रही थी, वो एक आकर्षक शरीर की स्वामी है, ४१ की उम्र में भी उनके बाल बिलकुल काले और घने है, जो उनके कमर से नीचे तक आते हैं , मेरे पिता भी जो डाइनिंग टेबल पर बैठे थे सभी को हंसा - २ कर लोट पोत करने में लगे हुए थे, कुल मिला कर उनकी चेमिस्ट्री मेरी मम्मी के साथ देखते ही बनती थी, वो लोग साल में एक बार अपने फ्रेंड्स के साथ पहाड़ी इलाके में जाते थे और कैंप लगाकर खूब एन्जॉय करते थे.

मैंने कॉलेज जाते हुए ऋतू को अपनी bike पर स्कूल छोड़ा और आगे निकल गया, रास्ते में मेरे दिमाग में एक नयी तरकीब आने लगी, मुझे और मेरी बहन को हमेशा एक लिमिटेड जेब खर्ची मिलती थी, हमें मेरे दोस्तों की तरह ऐश करने के लिए कोई एक्स्ट्रा पैसे नहीं मिलते थे , जबकि मेरे दोस्त हमेशा ग्रुप पार्टी करते, मूवी जाते पर कम पैसो की वजह से मैं इन सबसे वंचित रह जाता था, मैंने अपनी बहन के बारे में कभी भी अपने फ्रेंड्स को नहीं बताया था , वो कभी भी ये यकीं नहीं करते की ऋतू इतनी कामुक और वासना की आग में जलने वाली एक लड़की हो सकती है, उनकी नजर में तो वो एक चुलबुल औए स्वीट सी लड़की थी.

मैं कॉलेज पहुंचा और अपने दो सबसे करीबी फ्रेंड्स विशाल और सन्नी को एक कोने में लेकर उनसे पूछा के क्या उन्होंने कभी नंगी लड़की देखि है, उनके चेहरे के आश्चर्य वाले भाव देखकर ही मैं उनका उत्तर समझ गया.

मैंने आगे कहा, "तुम मुझे क्या दोगे अगर मैं तुम्हे १० फीट की दुरी से एक नंगी लड़की दिखा दूं "

विशाल "मैं तुम्हे सारी उम्र अपनी कमाई देता रहूँगा "..."पर ये मुमकिन नहीं है, तो इस टोपिक को यही छोड़ दो"

मैंने कहा "लेकिन अगर मैं कहूँ की जो मैं कह रहा हूँ, वो कर के भी दिखा सकता हूँ,...."तब तुम मुझे कितने पैसे दे सकते हो"

सन्नी बोला "अगर तुम मुझे नंगी लड़की दिखा सकते हो तो मैं तुम्हे १००० रूपए दे सकता हूँ,"

"मैं भी एक हज़ार दे सकता हूँ" विशाल बोला. "पर हमें ये कितनी देर देखने को मिलेगा"

मैंने कहा "दस से पंद्रह मिनट "

"अबे चुतिया तो नहीं बना रहा, कंही कोई बच्ची तो नहीं दिखा देगा,गली में नंगी घुमती हुई " हा. हा. हा ...दोनों हंसने लगे.

मैं बोला "अरे नहीं, वो उन्नीस साल की है, गोरी, मोटे चुचे, और तुम्हारी किस्मत अच्छी रही तो शायद वो तुम्हे मुठ भी मरते हुए दिख जाए"

सन्नी ने कहा "अगर ऐसा है तो ये ले " और अपनी पॉकेट से एक हज़ार रूपए निकाल कर मुझे दिए और कहा "अगर तू ये ना कर पाया तो तुझे डबल वापिस देने होंगे, मंजूर है"

"हाँ मंजूर है" मैंने कहा.

सन्नी को देखकर विशाल ने भी पैसे देते हुए कहा "कब दिखा सकता है"

"कल, तुम दोनों अपने घर पर बोल देना की मेरे घर पर रात को ग्रुप स्टडी करनी है, और रात को वही रहोगे"

"ठीक है !" दोनों एक साथ बोले.
मैं अन्दर जाने से पहले काफी नर्वस था, पर फिर भी मैंने हिम्मत करी और जाने से पहले छेद मैं से देख लिया की वो स्कूल होमेवोर्क कर रही है और बात करने के लिए यह समय उपयुक्त है, मैंने दरवाज़ा खड्काया, अन्दर से आवाज आई "कोंन है ?"


"मैं हूँ ऋतू" मैंने बोला.


"अरे आशु (घर मैं मुझे सब प्यार से आशु कहते है), तुम, आ जाओ.."


"आज अपनी बहन की कैसे याद आ गयी, काफी दिनों से तुम busy लग रहे हो, जब देखो अपने रूम मैं पड़ते रहते हो, अपने दोस्तों के साथ ग्रुप study करते हो, आई ऍम रेअल्ली इम्प्रेस .." ऋतू ने कहा.


"बस ऐसे ही..तुम बताओ लाइफ कैसी चल रही है."


"ठीक है"


" ऋतू आज मैं तुमसे कुछ ख़ास बात करने आया हूँ" मैंने झिझकते हुए कहा ..


"हाँ हाँ बोलो, किस बारे में"


"पैसो के बारे में" मैं बोला.


ऋतू बोली "देखो आशु , इस बारे मैं तो मैं तुम्हारी कोई हेल्प नहीं कर पाउंगी, मेरी जेब खर्ची तो तुमसे भी कम है "


"एक रास्ता है, जिससे हमें पैसो की कोई कमी नहीं होगी" मेरे कहते ही ऋतू मेरा मुंह देखने लगी और बोली "ये तुम किस बारे में बात कर रहे हो, ये कैसे मुमकिन है"


"मैं इस बारे में बात कर रहा हूँ" और मैंने उसके टेबल के अन्दर हाथ डाल के उसका ब्लैक डिल्डो निकाल दिया और बेड पर रख दिया.


"ओह माई god "वो चिल्लाई और उसका चेहरा शर्म और गुस्से के मारे लाल सुर्क हो गया और उसने अपने हाथो से अपना चेहरा छुपा लिया, उसकी आँखों से आंसू बहने लगे.


"ये तुम्हे कैसे पता चला, तुम्हे इसके बारे में कैसे पता चल सकता है...इट्स नोट पोस्सीबल " वो रोती जा रही थी.


"please dont cry ऋतू " मैं उसको upset देखकर घबरा गया.


"तुम मेरे साथ ये कैसे कर सकते हो, तुम मम्मी पापा को तो नहीं बताओगे न ? वो कभी ये सब समझ नहीं पांएगे .."ऋतू रोते रोते बोल रही थी, उसकी आवाज में एक याचना थी.


"अरे नहीं बाबा , मैं मम्मी पापा को कुछ नहीं बताऊंगा, मैं तुम्हे किसी परेशानी में नहीं डालना चाहता, बल्कि मैं तो तुम्हारी मदद करने आया हूँ, जिससे हम दोनों को कभी भी पैसो की कोई कमी नहीं होगी." मैं बोला.


ऋतू ने पूछा "लेकिन पैसो का इन सबसे क्या मतलब है" उसने डिल्डो की तरफ इशारा करके कहा.


मैंने डिल्डो को उठाया और हवा में उछालते हुए कहा "मैं जानता हूँ, तुम इससे क्या करती हो, मैंने तुम्हे देखा है"


"तुमने देखा है ???" वो लगभग चिल्ला उठी "ये कैसे मुमकिन है"


"यहाँ से.."मैंने उसकी अलमारी के पास गया और उसे वो छेद दिखाया और बोला, "मैं तुम्हे यहाँ से देखता हूँ."


"हे भगवान् ...ये क्या हो रहा है, ये सब मेरे साथ नहीं हो सकता.."और उसकी आँखों से फिर से अश्रु की धारा बह निकली.


"देखो ऋतू, मुझे इससे कोई परेशानी नहीं है, मैं सिर्फ तुम्हे देखता हूँ, मेरे हिसाब से इसमें कोई बुराई नहीं है, और सच कहूं तो ये मुझे अच्छा भी लगता है:"


ऋतू थोड़ी देर के लिए रोना भूल गयी और बोली "अच्छा ! तो तुम अब क्या चाहते हो"


"तुम मेरे फ्रेंड्स को तो जानती ही हो, विशाल और सन्नी, मैं उनसे तुमको ये सब करते हुए देखने के १५०० रूपए चार्ज करता हूँ "


"ओह नो.."वो फिर से रोने लगी, "ये तुमने क्या किया, वो मेरे स्कूल में सब को बता देंगे, मेरी कितनी बदनामी होगी, तुमने ऐसा क्यों किया, अपनी बहन के साथ कोई ऐसा करता है क्या...मैं तो किसी को अपना मुंह दिखाने के काबिल नहीं रही "ऋतू रोती जा रही थी और बोलती जा रही थी.


"नहीं वो ऐसा हरगिस नहीं करेंगे, अगर करें तो उनका कोई विश्वास नहीं करेगा, मेरा मतलब है तुम्हारे बारे में कोई ऐसा सोच भी नहीं सकता,"मैंने जोर देते हुए कहा, "और उन्हें मालुम है की अगर वो ऐसा करेंगे तो मैं उन्हें कभी भी तुमको ये सब करते हुए नहीं देखने दूंगा."




"और तुमने उनका विश्वास कर लिया" ऋतू रोती जा रही थी..."तुमने मुझे बर्बाद कर दिया"


"हाँ मैंने उनपर विश्वास कर लिया और नहीं मैंने तुम्हे बर्बाद नहीं किया, ये देखो "और मैंने पांच पांच सो के नोटों का बण्डल उसको दिखाया, "ये साठ हजार रूपए हैं, जो मैंने विशाल और सन्नी से चार्ज करें हैं तुम्हे छेद मैं से देखने के !.."


"और मैं उन दोनों से इससे भी ज्यादा चार्ज कर सकता हूँ अगर तुम मेरी मदद करो तो .." मैं अब लाइन पर आ रहा था.


"तुम्हे मेरी हेल्प चाहिए " वो गुर्राई .."तुम पागल हो गए हो क्या."

"नहीं मैं पागल नहीं हुआ हूँ, तुम मेरी बात ध्यान से सुनो और फिर ठन्डे दिमाग से सोचना., देखो मैं तुमसे सब पैसे बांटने के लिए तैयार हूँ, और इनमे से भी आधे तुम ले सकती हो, " ये कहते हुए मैंने बण्डल में से लगभग ३० हजार रूपए अलग करके उसके सामने रख दिए.

"लेकिन मेरे पास एक ऐसा आइडिया है जिससे हम दोनों काफी पैसे बना सकते हैं.,,"मैं दबे स्वर में बोला.

"अच्छा , मैं भी तो सुनु की सो क्या आइडिया है.."वो कटु स्वर में बोली.

फिर मैं बोला, "क्या तुम्हारी कोई फ्रेंड है जो ये सब जानती है, की तुम क्या करती हो..? तुम्हे मुझे उसका नाम बताने की कोई जरुरत नहीं है, सिर्फ हाँ या ना बोलो "

"हाँ , है., मेरी एक फ्रेंड जो ये सब जानती है, इन्फक्ट ये डिल्डो भी उसी ने दिया है मुझे."

"अगर तुम अपनी फ्रेंड को यहाँ पर बुला के, उससे ये सब करवा सकती हो, तो मैं अपने फ्रेंडस से ज्यादा पैसे चार्ज कर सकता हूँ, और तुम्हारी फ्रेंड को कुछ भी पता नहीं चलेगा..."मैंने उसे अपनी योजना बताई.

"लेकिन मुझे तो मालुम रहेगा ना..और वोही सिर्फ मेरी एक फ्रेंड है जिसके साथ मैं सब कुछ शेयर करती हं, अपने दिल की बात, अपनी अन्तरंग बांते सभी कुछ, मैं उसके साथ ऐसा नहीं कर सकती" ऋतू ने जवाब दिया.

"तुम्हे तो अब मालुम चल ही गया है, और हम दोनों इसके बारे में बातें भी कर रहे हैं..है ना.." मैं तो तुम्हे सिर्फ पैसे बनाने का तरीका बता रहा हूँ, जरा सोचो, छुट्टियाँ आने वाली है, मम्मी पापा तो चाचा - चाची के साथ हर साल की तरह पहाड़ों में कैंप लगाने चले जायेंगे,और पीछे हम दोनों घर पर बिना पैसो के रहेंगे, अगर ये पैसे होंगे तो हम भी मौज कर सकते हैं, लेट night पार्टी, और अगर चाहो तो कही बाहर भी जा सकते हैं...छुट्टियों के बाद अपने दोस्तों से ये तो सुनना नहीं पड़ेगा की वो कहाँ कहाँ गए और मजे किये, हम भी ये सब कर सकते हैं ..हम भी अपनी छुट्टियों को यादगार बना सकते हैं , जरा सोचो.."


"अगर मैं मना कर दूं तो" ऋतू बोली "तो तुम क्या करोगे"

"नहीं तुम ऐसा नहीं करोगी," मैंने कहा "ये एक अच्छा आईडिया है, और इससे किसी का कोई नुक्सान भी नहीं हो रहा है, विशाल और सन्नी तो तुम्हे देख देखकर पागल हो जाते हैं, वो ये सब बाहर बताकर अपना मजा खराब नहीं करेंगे, मेरे और उनके लिए ये सब देखने का ये पहला और नया अनुभव है."

"और अगर मैंने मन कर दिया तो मैं ये सब नहीं करूंगी, और ये छेद भी बंद कर दूँगी, और आगे से कभी भी अपने रूम में ये सब नहीं करूंगी, फिर देखते रहना मेरे सपने..."ऋतू बोली.

"please ऋतू.." मैं गिढ़गिराया "ये तो साबित हो ही गया है के तुम काफी उत्तेजना फील करती हो और अपनी उत्तेजना को शांत करने के लिए अपनी मुठ मारती हो और इस डिल्डो से मजे भी लेती हो, अगर तुम्हे और कोई ये सब करते देखकर उत्तेजना में अपनी मुठ मारता है तो इसमें बुरे ही क्या है, तुम भी तो ये सब करती हो और तुम्हे देखकर कोई और भी मुठ मारे तो इसमें तुम्हे क्या परेशानी है."

"मेरे कारण वो मुठ मारते हैं, मतलब विशाल और सन्नी ? वो आश्चर्य से बोली.

"मेरे सामने तो नहीं, पर मुझे विश्वास है घर पहुँचते ही वो सबसे पहले अपनी मुठ ही मारते होंगे " मैंने कुछ बात छिपा ली.

"और तुम ?..क्या तुम भी मुझे देखकर मुठ मारते हो.??"

"हाँ !!मैं भी मारता हूँ , मैंने धीरे से कहा, "मुझे लगता है की तुम इस दुनिया की सबसे खुबसूरत और आकर्षक जिस्म की मालिक हो."

"तुम क्या करते हो ?"उसकी उत्सुकता बदती जा रही थी.

"मैं तुम्हे नंगा मुठ मारते हुए देखता हूँ और अपने ममम..से खेलता हूँ." मैं बुदबुदाया ..

"और क्या तुम....मेरा मतलब है ..~!!

"क्या ?" मैंने पूछा.

"क्या तुम्हारा निकलता भी है जब तुम मुठ मारते हो..?:

"हाँ , हमेशा..मैं कोशिश करता हूँ की मेरा तब तक ना निकले जब तक तुम अपनी चरम सीमा तक नहीं पहुँच जाओ, पर ज्यादातर मैं तुम्हारी उत्तेजना देखकर पहले ही झड जाता हूँ"

"मुझे ये सब पर विश्वास नहीं हो रहा है" ऋतू ने अपना डिल्डो उठाया और उसको वापिस बेद के निचे draw में रख दिया.

"देखो ऋतू, मैं तुम्हे इसमें से आधे पैसे दे सकता हूँ, बस जरा सोच कर देखो, वैसे भी मेरे हिसाब से ये रूपए तुमने ही कमाए है."

"हाँ ये काफी ज्यादा पैसे है, मैंने तो इतने कभी सपने में भी नहीं सोचे थे"

"तुम ये आधे रूपए रख लो और बस मुझे ये बोल दो की तुम इस बारे में सोचोगी" मैंने कहा.

"लेकिन सिर्फ एक शर्त पर"...ऋतू बोली.

"तुम कुछ भी बोलो...मैं ख़ुशी से उछल पड़ा "मैं तुम्हारी कोई भी शर्त मानने को तैयार हूँ"

"तुम मुझे देखते रहे हो, ठीक "

"हाँ तो ?"

"मैं भी तुम्हे हस्त्मेथुन करते देखना चाहती हूँ." ऋतू बोली..

"क्या ..........!!!!???"

"तुम अभी हस्त्मेथुन करो...मेरे सामने, .

"नहीं ये मैं नहीं कर सकता,,,मुझे शर्म आएगी .."मैंने कहा.

"तो फिर भूल जाओ, मैं इस बारे में सोचूंगी भी नहीं..

"अगर मैंने करा तो क्या तुम सोचोगी"

"हाँ ! बिलकुल".. ऋतू ने अपनी गर्दन हाँ में हिलाई.

"और कभी कुछ भी हो जाए, तुम ये अलमारी का छेद कभी बंद नहीं करोगी." मैंने एक और शर्त राखी.

"अगर तुम मुझे बिना बताये अपने दोस्तों को यहाँ लाये तो कभी नहीं.."

" wow , क्या सच में " मुझे तो अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ.

"तो क्या तुम अभी मेरे सामने हस्मेथुन करोगे.." उसने फिर से पूछा.

"हाँ"

"तो ठीक है "स्टार्ट now ....."
मैंने शर्माते हुए अपनी जींस उतारी और अपना boxer भी उतार कर साइड में रख दिया, और अपने लंड को अपने हाथ में लेकर मन ही मन में बोला , चल बेटा तेरे कारनामे दिखाने का टाइम हो गया..धीरे -२ उसने विकराल रूप ले लिया और मैं उसे आगे पीछे करने लगा.


मैंने ऋतू की तरफ देखा तो वो आश्चर्य से मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी,उसकी आँखों में एक ख़ास चमक आ रही थी.


मैं अपने हाथ तेजी से अपने लंड पर चलने लगा, ऋतू भी धीरे-२ मेरे सामने आ कर बैठ गयी, उसका चेहरा मेरे लंड से सिर्फ एक फूट की दुरी पर रह गया, उसके गाल बिलकुल लाल हो चुके थे, उसके गुलाबी लरजते होंठ देखकर मेरा बुरा हाल हो गया, वो उनपर जीभ फेरा रही थी और उसकी लाल जीभ अपने गीलेपन से उसके लबों को गीला कर रही थी. मेरा लंड ये सब देखकर १ मिनट के अन्दर ही अपनी चरम सीमा तक पहुँच गया और उसमे से मेरे वीर्य की पिचकारी निकल कर ऋतू के माथे से टकराई, वो हडबडा कर पीछे हुई तो दूसरी धार सीधे उसके खुले हुए मुंह में जा गिरी और पीछे होते होते तीसरी और चोथी उसकी ठोड़ी और गले पर जा लगी.


"wow ...मुझे इसका बिलकुल भी अंदाज़ा नहीं था.." ऋतू ने चुप्पी तोड़ी.


"मतलब तुमने आज तक ये....मेरा मतलब असली लंड नहीं देखा.." मैंने पूछा,


उसने ना में गर्दन हिलाई.


"और मुझे इस बात का भी अंदाज़ा नहीं था की ये पिचकारी मारकर अपना रस निकलता है. लेकिन ये रस है बड़ा ही टेस्टी." ऋतू ने अपने मुंह में आये वीर्य को निगलते हुए चटखारा लिया..


"क्या इसका स्वाद तुम्हारे रस से अलग है.." मैंने पूछा. "मैंने भी तुम्हे डिल्डो को अपनी योनी में डालने के बाद चाटते हुए देखा है"


"हाँ..थोडा बहुत,,तुम्हारा थोडा नमकीन है..पर मुझे अच्छा लगा."


"मेरा इतना गाड़ा नहीं है पर थोडा खट्टा-मीठा स्वाद आता है.....क्या तुम टेस्ट करना चाहोगे." ऋतू ने मुझसे पूछा.


"हाँ....बिलकुल...क्यों नहीं..पर कैसे."


वो मुस्कुराती हुई धीरे धीरे अपने बेड तक गयी और अपना डिल्डो निकला,उसको मुंह में डाला और मेरी तरफ हिला कर फिर से पूछा..."क्या तुम मेरा रस चखना चाहोगे.."


मैंने हाँ में अपनी गर्दन हिलाई..


उसको डिल्डो चूसते देखकर मेरे मुरझाये हुए लंड ने एक चटका मारा..जो ऋतू की नजरों से नहीं बच सका..


फिर उसने अहिस्ता से अपनी जींस के बटन खोले और उसको उतार दिया, हमेशा की तरह उसने अंडर वेअर नहीं पहना हुआ था, उसकी चूत मेरी आँखों के सामने थी, मैंने पहली बार इतनी पास से उसकी चूत देखि, उसमें से रस की एक धार बह कर उसकी जींस को गीला कर चुकी थी, वो काफी उत्तेजित थी.


फिर वो अपनी टाँगे चोडी करके बेड के किनारे पर बैठ गयी, और वो डिल्डो अपनी चूत में दाल कर अंदर बाहर करने लगी..मैं ये सब देखकर हैरान रह गया, वो आँखे बंद किये, मेरे सामने, २ फीट की दुरी से अपनी चूत में डिल्डो डाल रही थी.जब वो डिल्डो उसके अन्दर जाता तो उसकी चूत के गुलाबी होंठ अन्दर की तरफ मुद जाते और बाहर निकालते ही उसकी चूत के अन्दर की बनावट मुझे साफ़ दिखा जाते. मैं तो उसके अंदर के गुलाबीपन को देखकर और रस से भीगे डिल्डो को अन्दर बाहर जाते देखकर पागल ही हो गया. मैं मुंह फाड़े उसके सामने बैठा था. उसने अपनी स्पीड बड़ा दी और आखिर में वो भी जल्दी ही झड़ने लगी, फिर उसने अपनी आँखे खोली, मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखा और अपनी चूत में से भीगा हुआ डिल्डो मेरे सामने करके बोली..."लो चाटो इसे ...घबराओ मत..तुम्हे अच्छा लगेगा...चाटो.."


मैंने कांपते हाथों से उससे डिल्डो लिया और उसके सिरे को अपनी जीभ से छुआ, मुझे उसका स्वाद थोडा अजीब लगा,पर फिर एक दो बार चाटने के बाद वोही स्वाद काफी मादक लगने लगा और मैं उसे चाट चाटकर साफ़ करने लगा..ये देखकर ऋतू मुस्कुराई और बोली.."कैसा लगा." ?


"इट्स रेअल्ली टेस्टी " मैंने कहा.


ऋतू ने डिल्डो मेरे हाथ से लेकर वापिस अपनी चूत में डाला और खुद ही चूसने लगी..और बोली "मज़ा आया".


"हाँ"


"मुझे भी मज़ा आता है अपने रस को चाटने मैं, कई बार तो मैं सोचती हूँ की काश मैं अपनी चूत को खुद ही चाट सकती.."


"क्या तुमने कभी अपना रस चखा है.."उसने मुझसे पूछा..


"नहीं ...क्यों.."


"ऐसे ही...एक बार ट्राई करना"


"आज रात सब के सोने के बाद तुम मेरे लिए एक बार फिर से मुठ मारोगे और अपना रस भी चाट कर देखोगे.." ऋतू बोली.


"मैं अपना वीर्य चाटूं ???पर क्यों." मैंने पूछा.


"क्योंकि मैं चाहती हूँ, और अगर तुमने ये किया तभी मैं तुम्हे अपना जवाब दूंगी." ऋतू ने अपना फैसला सुनाया.


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ठीक है... मैंने कहा.

ऋतू : "अब तुम जल्दी से यहाँ से जाओ, मुझे अपना होमेवोर्क भी पूरा करना है."

मैंने जल्दी से अपना underwear और जींस पहनी, लेकिन मेरे खड़े हुए लंड को अन्दर डालने में जब मुझे परेशानी हो रही थी तो वो खिलखिलाकर हंस रही थी, और उसके हाथ में वो काला डिल्डो लहरा रहा था. मैं जल्दी से वहां से निकल कर अपने रूम में आ गया.

अपने रूम में आने के बाद मैंने छेद से देखा तो ऋतू भी अपनी जींस पहेन कर पढाई कर रही थी.

रात को सबके सोने के बाद मैंने देखा की उसके रूम की लाइट बंद हो चुकी है, थोड़ी ही देर मैं मैंने अपने दरवाजे पर हलकी दस्तक सुनी, मैंने वो पहले से ही खुला छोड़ दिया था, ऋतू दरवाजा खोलकर अन्दर आ गयी.उसने nightgown पहन रखा था.

"चलो शुरू हो जाओ " वो अन्दर आते ही बिना किसी भूमिका के बोली.

मैं चुपचाप उठा और अपना पायजामा उतार कर खड़ा हो गया, अपने लंड के ऊपर हाथ रखकर आगे पीछे करने लगा, वो मंत्र्मुघ्ध सी मुझे मुठ मारते हुए देख रही थी, इस बार वो और ज्यादा करीब से देख रही थी, उसके होठों से निकलती हुई गर्म हवा मेरे लंड तक आ रही थी..मैं जल्दी ही झड़ने के करीब पहुँच गया,

तभी ऋतू बोली "अपना वीर्य अपने हाथ में इक्कठा करो."

मैंने ऐसा ही किया, मेरे लंड के पिचकारी मारते ही मैंने अपनी मुठ से अपने लंड का मुंह बंद कर दिया और सारा माल मेरी हथेली में जमा हो गया.

"वाह ...मजा आ गया, तुम्हे मुठ मरते देखकर सच में मुझे अच्छा लगा...अब तुम इस रस को चख कर देखो" ऋतू बोली.

मैंने झिझकते हुए अपने हाथ में लगे वीर्य को अपनी जीभ से चखा.

ऋतू ने पुचा "कैसा लगा" ?

"तुम्हारे रस से थोडा अलग है" मैंने जवाब दिया.

ऋतू : "कैसे "?

मैं : "शायद इसमें मादकता कम है".

वो मुस्कुराई.

ऋतू : "चलो मुझे भी चखाओ "

मैं : "ये लो"

और मैंने अपना हाथ ऋतू की तरफ बड़ा दिया, वो अपनी गरम जीभ से धीरे धीरे उसे चाटने लगी फिर अचानक सड़प-२ कर वो मेरा पूरा हाथ साफ़ करने के बाद बोली...यम्मी ..मुझे तुम्हारा रस बहुत स्वाद लगा. और काफी मीठा भी. क्या तुम मेरे रस के साथ अपने रस को compare करना चाहोगे.

मैं : "हाँ हाँ ...क्यों नहीं"

फिर वो थोडा पीछे हठी और अपना gown आगे से खोल दिया..मैं देख कर हैरान रह गया, वो अन्दर से पूरी तरह नंगी थी.

उसकी ३४ब साइज़ की सफ़ेद रंग की चूचियां तन कर खड़ी थी, और उन स्तनों की शोभा बढ़ाते दो छोटे-२ निप्पल्स किसी हीरे की तरह चमक रहे थे.

फिर उसने अपने हाथ अपनी जांघो के बीच में डाला और अपनी चूत में से वो काला डिल्डो निकाला , वो पूरी तरह से गीला था, उसका रस डिल्डो से बहता हुआ ऋतू की उँगलियों तक जा रहा था,

मैंने उसके हाथ से डिल्डो लिया और उसको चाटने लगा, गर्म और ताज़ा,मैं जल्द ही उसे पूरी तरह से चाट गया, वो ये देखकर खुश हो गई.

मैं : " मुझे भी तुम्हारा रस अच्छा लगा"

ऋतू बोली "अब मुझे भी तुम्हारा थोडा रस और चखना है...अपना लंड अपने हाथ में पकड़ो..."

मेरे लंड के हाथ में पकड़ते ही वो झुकी और मेरे लंड के चारो तरफ अपने होंठो का फंदा बना कर उसमे बची हुई आखिरी बूँद को झट से चूस गई..

मैं तो सीधा स्वर्ग में ही पहुँच गया.

"wow ..." मैंने कहा "ये तो और भी अच्छा है"

ऋतू बोली " तुम्हारा लंड भी इस नकली से लाख गुना अच्छा है"

"क्या मैं भी तुम्हे टेस्ट कर सकता हूँ"...मैंने शर्माते हुए ऋतू से पुचा.

"तुम्हारा मतलब है जैसे मैंने किया....क्यों नहीं....ये लो."

इतना कहकर वो मेरे बेड पर अपनी कोहनी के बल लेट गयी और चोडी करके अपनी टाँगे मोड़ ली, उसकी गीली चूत मेरे बिलकुल सामने थी.मैं अपने घुटनों के बल उसके सामने बैठ गया और उसकी जांघो को पकड़ कर अपनी जीभ उसकी चूत में दाल दी...वो सिसक पड़ी और अपना सर पीछे की तरफ गिरा दिया..

उसकी मादक खुशबु मेरे नथुनों में भर गयी ...फिर तो जैसे मुझे कोई नशा सा चढ़ गया, मैं अपनी पूरी जीभ से उसकी चूत किसी आइसक्रीम की तरह चाटने लगा, ऋतू का तो बुरा हाल था, उसने अपने दोनों हांथो से मेरे बाल पकड़ लिए और खुद ही मेरे मुंह को ऊपर नीचे करके उसे कण्ट्रोल करने लगी, मेरी जीभ और होंठ उसकी चूत में रगड़कर एक घर्षण पैदा कर रहे थे और मुझे ऐसा लग रहा था की मैं किसी गरम मखमल के गीले कपडे पर अपना मुंह रगड़ रहा हूँ....उसकी सिस्कारियां पुरे कमरे में गूंज रही थी..और फिर वो एक झटके के साथ झड़ने लगी और उसकी चूत में से एक लावा सा बहकर बाहर आने लगा.

मैं जल्दी से उसे चाटने और पीने लगा, और जब पूरा चाटकर साफ़ कर दिया तो पीछे हटकर देखा, ऋतू का शारीर बेजान सा पड़ा था और उसकी अद्खुली ऑंखें और मुस्कुराता हुआ चेहरा हलकी रौशनी में गजब का लग रहा था.

मेरा पूरा चेहरा उसके रस से भीगा हुआ था.

वो हंसी और बोली "मुझे विश्वास नहीं होता की आज मुझमें से इतना रस निकला....ऐसा लग रहा था की आज तो मैं मर ही गई"

मैंने पूछा "तो तुम्हारा जवाब क्या है"?

"हाँ बाबा हाँ, मैं तैयार हूँ" वो हँसते हुए बोली.

वो आगे बोली "लेकिन वो भी पहली बार सिर्फ तुम्हारे लिए , तब तुम अपने दोस्तों को नहीं बुलाओगे....फिर बाद में हम decide करेंगे की आगे क्या करना है"

"ठीक है...मुझे मंजूर है" मैंने कहा.

मैंने उसे खड़ा किया और उसे नंगे ही गले से लगा लिया "तुम्हे ये सब करना काफी अच्छा लगेगा "

वो कसमसाई और बोली "देखेंगे..."

और अपना gown पहन कर अपने डिल्डो को अंडर छुपा लिया और बोली "मुझे भी अपनी चूत पर तुम्हारे होंठो का स्पर्श काफी अच्छा लगा..ये एहसास बिलकुल अलग है...और मुझे इस बात की भी ख़ुशी है की मेरा अब कोई सिक्रेट भी नहीं है"

"हम दोनों मिलकर बहुत सारे पैसे कमाएंगे..." मैंने कहा..." और बहुत मज़ा भी करेंगे...."

"good night " मैंने बोला.

"good night " ये कहकर वो अपने रूम में चली गयी.

मैं भी ऋतू के बारे में और आने वाले समय के बारे में सोचता हुआ अपनी आगे की योजनायें बनाने लगा..


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अगले दिन जब मैं उठा तो कल रात की बातें सोचकर मुस्कुराने लगा, फिर कुछ सोचकर झटके से उठा और छेद में देखने लगा, पहले तो मुझे कुछ दिखाई ही नहीं दिया पर जब गौर से देखा तो हैरान रह गया, ऋतू की चूत मेरी आँखों के बिलकुल सामने थी, वो छेद के पास खड़ी हुई अपनी चूत में डिल्डो अन्दर बाहर कर रही थी....बिलकुल नंगी.

मैं तो ये देखकर पागल ही हो गया., मैंने झट से अपना तना हुआ लंड बाहर निकाला और उसे तेजी से आगे पीछे करने लगा, मेरा मन कर रहा था की मैं अपनी जीभ छेद में दाल कर अपनी बहन की चूत में दाल दू और उसे पूरा चाट डालूं. मैं ये सोचते-२ जल्दी ही झड़ने लगा....तभी छेद में से ऋतू को अपनी तरफ देखते देखकर मैं पास गया तो उसने पुछा "क्या तुम्हारा हो गया...?"

"हाँ..."मैंने जवाब दिया "और तुम्हारा ...?"

"हाँ मेरा भी..." वो मुस्कुराई.

"मुझे तो बड़ा ही मजा आया" मैंने कहा.

"मुझे भी....चलो अब नीचे breakfast टेबल पर मिलते है.." ये कहकर वो बाथरूम में चली गयी, अपनी गांड मटकाती हुई.
आज मेरे दिल में एक अजीब सी ख़ुशी मचल रही थी, जिंदगी के ये नए रंग मुझे सचमुच अच्छे लग रहे थे,हांलांकि भाई बहिन के बीच ये सब पाप की नजर से देखा जाता है पर ना जाने क्यों ये पाप करना मुझे अच्छा लग रहा था.

मैं नाश्ता करके अपनी bike पर ऋतू को स्कूल छोड़ने चल दिया, रास्ते भर हम अपने इस नए "बिज़नस" के बारे में बातें करते रहे, की कैसे ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाए जाएँ, अगर १ हफ्ते में २ बार हम २ लोगो को या फिर ४ लोगो को, या फिर ३ से ४ बार "स्पेशल शो" दिखाएँ तो कितने पैसे मिलेंगे...और calculation के हिसाब से पैसे हमेशा बड़ते जा रहे थे, ये देखकर ऋतू काफी खुश हो रही थी.

उसी रात डिन्नर के टाइम ऋतू ने मम्मी पापा से कहा की उसकी सहेली पूजा कल रात यहीं पर रहेगी क्योंकि उनके एक्साम्स आ रहे हैं और वो उसकी तय्यारी करना चाहतें हैं. पूजा का नाम सुनते ही मैं चौंक गया, मैंने कई बार पूजा को अपने घर पर ऋतू के साथ देखा है, वो एक पंजाबी लड़की है, काफी सांवली जैसे पुराने जमाने की एक्ट्रेस रेखा हुआ करती थी, पर उसके मुम्मे और हांड ग़जब की है, एकदम tight और फेली हुई गांड और तने हुए छोटे खरबूजे जैसे मुम्मे.मैंने उनके बारे में सोच सोचकर कई बार मुठ भी मारी थी.

तो वोही वो लड़की है जिसने ऋतू को वो डिल्डो दिया था, तब तो वो काफी अडवांस होगी और मुझे भी काफी मौज करने को मिलेगी,,मैं यह सोचकर हलके - २ मुस्कुराने लगा. मुझे मुस्कुराते देखकर ऋतू भी रहस्यमयी हंसी हंस दी.

अपने कमरे में आने के बाद मैंने छेद में से झाँकने की कोशिश की पर वहां तो बिलकुल अँधेरा था, ऋतू ने लाइट बंद कर दी थी और वो अपने बिस्टर पर सो रही थी, मैं भी अपने बिस्तर पर जा कर सोने की कोशिश करने लगा.

तक़रीबन १ घंटे के बाद मुझे अपने दरवाजे पर हलचल महसूस हुई और मैंने देखा की ऋतू चुपके से मेरे कमरे मैं दाखिल हो रही है. उसने वोही night gown पहन रखा था.

"क्या हुआ ..इतनी रात को तुम्हे क्या चाहिए ?" मैंने पुछा.

"क्या तुम फिर से मेरी चूत चाट सकते हो, हैसे कल चाटी थी, मुझे सच में बड़ा मजा आया था.." ऋतू ने कहा.

"क्या सच मैं..." मुझे तो अपने luck पर विश्वास ही नहीं हुआ..

"हाँ ...और अगर तुम चाहो तो बदले में मैं तुम्हारा लंड चूस दूंगी क्योंकि मेरे डिल्डो में से रस नहीं निकलता...हे हे ." वो खिलखिलाई.

"wow , ठीक है मैं तैयार हूँ " मैंने कहा.

"ओके..then " ..फिर ऋतू ने एक झटके से अपना gown उतार फेंका उसने कल की तरह अन्दर कुछ भी नहीं पहन रखा था,...एकदम नंगी..मैंने अपने बेड के साइड का बल्ब जला दिया, दुधिया रौशनी में उसका गोरा बदन चमक उठा. वो आकर मेरे बेद पर अपनी टाँगे फैला कर लेट गयी , मैंने भी अपना मुंह उसकी चूत पर टिका दिया, और उसके निचले अधरों का रस पान करने लगा, आज वो कुछ ज्यादा ही उत्तेजित लग रही थी, उसकी गीली चूत में मुंह मारने में काफी मजा आ रहा था, वो लम्बी-२ सिस्कारियां ले रही थी और आशु...आशु...बडबडा रही थी.

आआआआआआआआह .......आआअशु ....म्म्म्मम्म्म्मम्म . मैंने उसकी clit अपने दांत में लेकर चुब्लाना शुरू कर दिया...वो तो पागल ही हो गयी. मैंने सांस लेने के लिए जैसे ही अपना सर उठाया,उसने एक झटके से मेरे सर को दोबारा अपनी चूत पर टिका दिया और बोली.....बस्स्सस्स्स्सस्स्स थोडा आआआआआआऔर .......म्म्मम्म्म्मम्म ...चुसो मेरी चूत को....पी जाओ मेरा रस.......माआआआआआ ......

फिर तो जैसे एक सैलाब आया, मैं दीवानों की तरह उसकी चूत में अपनी जीभ और दांत से हमले करता चला गया....अंत में जब वो धराशायी हुई तो उसका पूरा बदन कांपने लगा और शरीर ढीला हो गया. मैंने जल्दी से उसका रस पीना शुरू कर दिया...अंत में वोह बोली...बस करो आशु...मैं मर जाउंगी...बस करो..please ..

मैं हटा तो उसकी आँखों में मेरे लिए एक अलग ही भाव था. मैंने कहा "मुझे तो तुम्हारी चूत का रस काफी अच्छा लगता है, काफी मीठा है, मुझे तो अब इसकी आदत ही हो गयी है..."

वो उठी और बोली "लाओ अब मैं तुम्हारा लंड चूस देती हूँ..."

"नेकी और पूछ पूछ.." मैं तेजी से उठा और अपना पायजामा jocky समेत उतार दिया और बेड के किनारे पर लेट गया.

वो मेरे सामने बैठी और बोली "मेरे पास डिल्डो सिर्फ एक वजह से है क्योंकि मेरे पास ये चीज असली में नहीं हैं.." उसने मेरे लंड को अपने हाथों में लिया और मसलने लगी.. नरम हाथों में आते ही मेरा पप्पू अपनी औकात पर आ गया और फूल कर कुप्पा हो गया.

"ये कितना नरम और गरम है" ऋतू बोली.

फिर उसने मेरे लंड को ऊपर नीचे करना शुरू कर दिया..जल्दी ही मेरे लंड के सिरे पर precum की बूँद चमकने लगी, वो थोडा झुकी और अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर उसे चाट गयी और फिर धीरे धीरे अपनी जीभ मेरे लंड के सुपदे पर फिरने लगी, मैं कोहनियों के बल बैठा आँखे फाड़े ये सब देख रहा था, फिर ऋतू ने अपने होंठ खोले और मेरे लंड को अपने मुंह में दाल लिया...वो तब तक नहीं रुकी जब तक मेरा सात इंच का लंड उसके गले से नहीं टकरा गया. फिर उसने अपने लब बंद कर लिए और अन्दर ही अन्दर अपनी जीभ मेरे लंड के चारो तरफ फिराने लगी.

मेरा तो बुरा हाल हो गया, उसके मुंह के अन्दर जाते ही वो कुछ ज्यादा ही मोटा और बड़ा हो गया था, मैं अपने लंड की नसें चमकते हुए देख सकता था. फिर उसने धीरे-२ लंड को बाहर निकला और बोली...ये तो टेस्टी भी है,,,और ये कहकर दुगने जोश के साथ उसको फिर मुंह में लेकर चूसने लगी. वो अपने एक हाथ से मेरी बाल्स को भी मसल रही थी, मैं जल्दी ही झड़ने के कगार पर पहुँच गया और जोर -२ से साँसे लेने लगा, वो समझ गयी और जोर से चूसने लगी, तभी मेरे लंड ने पिचकारी मार दी जो सीधे उसके गले के अन्दर टकराई, वो रुकी नहीं और हर पिचकारी को अपने पेट में समाती चली गयी, और अंत में जब कुछ नहीं बचा तभी उसने मेरा लंड छोड़ा.."वओ ...मजा आ गया...लंड चूसने में तो मजा है ही...रस पीने का मजा भी अलग ही है."

"ईट फील unbelievable " मैंने उखड़ी सांसो से कहा.

"वेल... गुड night " वो बोली और उठते हुए मेरे लंड पर एक kiss करदी.

"गुड night "

फिर वो अपना gown पहन कर चुपके से अपने रूम मैं चली गयी और मैं कल के बारे में सोचकर रंगीन सपने बुनने लगा.

अगले दिन ऋतू को स्कूल छोड़कर जब मैं collage गया तो मेरा मन पढाई में नहीं लगा, सारा दिन मैं होने वाली रात के बारे में सोचता रहा, जब सन्नी और विकास ने भी मुझसे बात करने की कोशिश की तो उन्हें भी मैंने कहा बाद में बात करेंगे, वो दरअसल अगले "शो" के बारे मैं जानना चाहते थे. शाम को जब मैं घर पहुंचा तो मुझे ऋतू का इन्तजार था, थोड़ी देर में ही दरवाजे की बेल बजी और मैं भागकर गया, दरवाजा खोला तो ऋतू अपनी सहेली पूजा के साथ खड़ी थी, मुझे देखते ही ऋतू ने मुझे आँख मारी और बोली "भाई दरवाजे पे ही खड़े रहोगे या हमें अन्दर भी आने दोगे." और ये कहकर वो पूजा की तरफ देखकर जोर से खिखिअकर हंस दी. मैं साइड हो गया, पूजा ने अन्दर जाते हुए मुझे मुस्कुराके धीरे से hi बोला, मैं तो उसकी white शर्ट में फंसी हुई चूचियां ही देखता रह गया, जो शर्ट फाड़कर बाहर आने को तैयार थी, मैंने मन में सोचा ये लडकियां इतना भार अपने सीने पर संभालती कैसे हैं?.

अन्दर जाकर दोनों ने change किया ,डिन्नर के टाइम में दोनों स्कूल, बोयस, movies और आने वाली छुट्टियों के बारे में ही बातें करते रहे, फिर दोनों अपने रूम में चले गए, मैंने जल्दी से जाकर छेद से देखा तो दोनों बेड पर बैठकर पढाई कर रहे थे, मैं वापिस आकर लेट गया...उसके बाद कई बार चेक किया पर हर बार उन्हें पड़ते हुए ही पाया.

१ घंटे बाद मम्मी पापा ने सबको गुड night बोला और अपने कमरे में सोने चले गए, मैंने फिर से छेद में देखा टी पाया की दोनों अपनी कीताबें समेत रही हैं, फिर थोड़ी देर बैठकर बातें करने के बाद ऋतू ने धीरे से अपना gown खोल दिया ...लेकिन आज उसने अन्दर ब्रा और पेंटी पहन रखी थी, फिर पूजा ने भी अपनी टी शर्ट और केप्री उतार दी, उसने अन्दर ब्लैक कलर का सेट पहन रखा था. फिर दोनों ने बारी बारी से बाकी बचे कपडे भी उतार दिए, मेरी नजर अब सिर्फ पूजा पर ही थी, क्या ग़जब के चुचे थे यार..एकदम गोल-२ और तने हुए ऐसा लग रहा था जैसे कोई ताकत उन्हें ऊपर खींच रही है, और वो तन कर खड़े हुए हैं,उसके निप्पलस डार्क ब्लैक कलर के थे और एरोहोले काफी बड़े और फैले हुए थे, पेट एकदम सपाट, नाभि अन्दर की और घुसी हुई ,चूत पर हलके - २ काले रंग के बाल थे, मोती टाँगे और कासी हुई पिंडलियाँ, वो पलटी तो उसकी गांड देखकर ऐसा लगा की कोई गद्दा फिट किया हुआ हाई साली ने अपनी गांड में....मैंने एक मिनट में ही उसकी बॉडी का xray कर डाला, मेरा पप्पू अपने फुल मूड में आ चूका था.
ऋतू ने बेड के नीचे से अपना काला डिल्डो निकाला और मुंह में चूस कर पूजा को दिखाया, फिर दोनों हंसने लगी, ऋतू बेड पर लेट गयी और अपनी उँगलियों से अपनी चूत मसलने लगी, फिर पूजा लेटी और वो भी अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डालकर आँखें बंद करके मजे लेने लगी, उसकी चूत के अन्दर की बनावट मुझे साफ़ नजर आ रही थी, वो भी एकदम गुलाबी रंग की थी, थोड़ी फूली हुई, लेटने से उसकी गांड का छेद भी दिखाई दे रहा था, भूरा और एकदम tight

दोनों सिस्कारियां ले लेकर अपनी उंगलियाँ अपनी चूत में डाल रही थी.

फिर ऋतू ने डिल्डो उठाया और अपनी चूत में डालकर तेजी से अन्दर बाहर करने लगी, पूजा अभी भी अपनी उँगलियों से मजे ले रही थी, थोड़ी देर बाद ऋतू ने अपने रस से भीगा हुआ डिल्डो पूजा की चूत में लगाया, उसने आँखे खोली और साँसे रोककर ऋतू की तरफ देखा, ऋतू आगे बड़ी और अपने होंठ पूजा के खुले हुए लबों पर रख दिए, दोनों एकदम गीले थे, फिर ऋतू ने एक ही झटके में पूरा डिल्डो पूजा की नाजुक चूत में उतार दिया, उसकी आँखें बाहर की और निकल आई और वो छत्पटाने लगी, पर ऋतू ने उसके होंठ जकड़े हुए थे तो उसकी सिर्फ गूऊऊओ.गूऊऊऊऊ की आवाज ही सुनाई दी.

मैंने अपना लंड बाहर निकाला और जोर जोर से मुठ मारने लगा.

फिर ऋतू ने उसके होंठ छोड़ दिए, वो एकदम लाल हो चुके थे, उसके खुले मुंह से एक लार निकल कर उसके चुचे पर गिर गयी, ऋतू थोडा झुकी और पूजा की लार के साथ साथ उसके चुचे भी चाटने लगी, बड़ा ही कामुक द्रश्य था, पूजा अपने निप्पलस पर हुए इस हमले से मचलने लगी, उसके निप्पलस एकदम सख्त हो चुके थे, और लगभग एक इंच बाहर नजर आ रहे थे.

फिर ऋतू ने अपना पूरा ध्यान पूजा की चूत में लगा दिया, वो तेजी से डिल्डो अन्दर बाहर करने लगी, थोड़ी ही देर में एक आनंदमयी सीत्कार के साथ पूजा झड़ने लगी, उसका शरीर कांपते हुए चूत के जरिये अपना अनमोल रस छोड़ने लगा.

पूजा ने ऋतू का हाथ पकड़कर उसे रोक दिया, डिल्डो अभी भी पूजा की चूत में धंसा हुआ था, और पूजा का रस चूत में से रिस रहा था, ऋतू ने उसे निकाला और उसपर लिपटा हुआ जूस लपलपाकर चाटने लगी, फिर वोही डिल्डो अपनी चूत में डालकर पूजा के मुंह के आगे कर दिया, वो भी उसे चाटने लगी, तब तक ऋतू बेड पर उसी pose में लेट गयी, अब पूजा ने धीरे -२ पूरा डिल्डो ऋतू की चूत में उतार दिया, वो भी उसके मजे लेने लगी, वो पहले से ही उत्तेजित थी तो झड़ने में ज्यादा वक़्त नहीं लगा, झड़ते ही उसने झटके से पूजा की गर्दन पकड़ी और एक गहरा चुम्बन उसके होंठो पर जड़ दिया. पूजा ने डिल्डो निकाल कर उसे चाटना शुरू कर दिया, रस ख़तम होने के बाद फिर से उसने चूत में डिल्डो डुबाया और चाटने लगी, जैसे चटनी के साथ समोसा खा रही हो.

थोड़ी देर बातें करने के बाद दोनों बेड पर लेट गयी और एक दुसरे की चूत पर हाथ रखकर उसे मसलने लगी, दोनों की आँखें बंद थी, फिर ऋतू धीरे से उठी और सीधे पूजा की चूत पर अपना मुंह लगा दिया, उसने पूजा की दोनों जांघे पकड़ रखी थी पूजा ने ऋतू के बालों में अपनी उंगलियाँ फंसा दी और बेड पर जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी, ऋतू उसकी चूत नीचे से ऊपर तक चाट रही थी, और फिर अपनी जीभ से उसकी चूत कुरेदने लगी, पूजा अपने कुल्हे हवा में उठा कर सिसकारी ले रही थी,

आआआआआअ.रीईईईइतूऊऊऊउ मैं माआआआआआर गैईईईईईईईई .....

आआआआआआआआआआह्ह्ह ......जूऊऊऊऊऊऊर्र्र्र सीईईईईईईईईई ......अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
!!!!!!!!!!!!!!!!हाआआआआन हाआआआआआन चाआआतो मेरीईईईइ चूऊऊऊऊओत ... आआआआआह.

और फिर वो झड़ने लगी.

ऋतू ने सारा रस ऐसे पिया जैसे coke पी रही हो, और फिर वो खड़ी हो गयी, उसका पूरा चेहरा भीगा हुआ था.

पूजा का चेहरा एकदम लाल सुर्ख हो गया था, आँखें नशे में डूबी हुई लग रही थी, और वो होले से मुस्कुरा रही थी.

फिर उसने ऋतू को धक्का देकर बेड पर लिटाया,

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पूजा अब ऋतू के सामने आकर लेट जाती है, उसकी पाव रोटी जैसी फूली हुई चूत देखकर उसके मुंह में पानी आ जाता है, वो थोडा झुकती है और चूत के चारो तरफ अपनी जीभ फिराने लगती है, पर ऋतू की वासना की आग इतनी भड़की हुई थी की वो उसका मुंह पकड़ कर सीधे अपनी चूत पर लगा देती है, पूजा भी समझ जाती है और अपनी जीभ ऋतू की चूत में दाल कर उसे चूसने लगती है, ऋतू के मुंह से आआआआअह आआआआआह की आवाजें निकलने लगती है, उसका एक हाथ पूजा के सर के ऊपर और दूसरा अपनी चुचियों को मसलने में लग जाता है, वो अपने निप्पलस को बुरी तरह से मसल रही थी जिसकी वजह से वो पिंक color से रेड color में बदल गए थे...वो तेजी से अपने चर्मोकर्ष पर पहुँचने वाली थी......आआआआआआआआह .....mmmmmmmmmmmm.. माआआआआआआआर दाआआआआआआआअलाआआआआ ..........

और तेज......
और तेज......हाँ चाआआआअत मेरीईईई चूऊऊऊऊऊउत ......


हाआआआआआआआआआआआअ.


और वो तेजी से झड़ने लगती है.

पूजा को काफी रस पीने को मिला. मेरे मुंह में भी पानी आने लगा...और लंड में भी....मैं जल्दी से अपने लंड को झटके देने लगा और आखिर मैंने भी ४-५ लम्बी धार अपनी अलमारी के अन्दर मार दी.

फिर थोड़ी देर माद दोनों नंगी ही चादर के अन्दर घुस गयी और अपनी लाइट बंद कर दी.

मैं थोड़ी देर वहीँ खड़ा रहा पर जब लगा की अब कुछ और नहीं होगा तो अपने बेड पर आकर लेट गया.

अगले दिन सुबह दोनों को breakfast table पर देखकर ऐसा नहीं लगा की दोनों इस तरह की है, दोनों ने नाश्ता किया और स्कूल चली गयी मैं भी collage गया और सारा दिन दोनों के बारे में सोचता रहा, शाम को घर पहुंचकर ऋतू का इंतज़ार करने लगा,

वो स्कूल से आते ही सीधे मेरे रूम में घुसी और मुझसे लिपट गयी...

और मुझसे पुछा..."तुमने देखा...कैसा लगा...मजा आया के नहीं...बोलो न."

"अरे हाँ, मैंने देखा, और बहुत मजा आया"

"हाइ... मैं तुम्हे क्या बताऊँ, पूजा की चूत का रस इतना मीठा था के मजा आ गया.." और मेरे लंड पर हाथ रखकर बोली "पर इसका कोई मुकाबला नहीं हा हा .."

"क्या तुम्हे देखने में अच्छा लगा" उसने आगे पूछा.

"हाँ, मेरा मन तो कर रहा था की काश मैं तुम्हारे रूम में होता, तुम्हारे साथ."

"कोन जाने , शायद एक दिन तुम भी वहां पर हो, हम दोनों के साथ" उसने एक रहस्यमयी मुस्कान के साथ कहा.

"तो क्या मैं सन्नी और विकास को बुला लूं तुम दोनों का शो देखने के लिए, तुम्हे कोई आपत्ति तो नहीं है न ?"

ऋतू : "तुम कितना चार्ज करोगे उनसे"

मैं : "१००० एक बन्दे से, यानी टोटल दो हजार रूपए पर शो"

ऋतू : " पर अब हम दो लोग हैं, क्या तुम्हे नहीं लगता की तुम्हे ज्यादा चार्ज करना चाहिए"

मैं : "हाँ, बात तो सही है, कितने बोलू उनको...पंद्रह सो ठीक है क्या..?"

ऋतू :"हाँ १५०० ठीक हैं.."

मैं : "तो ठीक है, अगला शो कब का रखे, पूजा कब आ सकती है दुबारा तुम्हारे साथ रात को रुकने के लिए ?"

ऋतू :"उसको जो मजे कल रात मिले है, मैं शर्त लगा कर कह सकती हूँ, वो रोज रात मेरे साथ बिताने के लिए तैयार होगी.." और वो हंसने लगी.

ऋतू :"मुझे भी एक आईडिया आया है, जिससे हम और ज्यादा पैसे कम सकते हैं"

मैं :" कैसे"

ऋतू :"अगर मैं भी अपनी friends को अपने रूम में बुलाकर तुम्हे मुठ मारते हुए दिखाऊं तो..... "

मैं :"मुझे मुठ मारते हुए...इसमें कौन रूचि लेगा.."

ऋतू :"जैसे तुम लड़के, लड़कियों को नंगा देखने के लिए मचलते रहते हो, वैसे ही हम लड़कियां भी लडको के लंड के बारे में सोचती हैं और उत्तेजित होती हैं , अगर कोई लड़की तुम्हे मुठ मारते हुए देखे तो इसमें तुम्हे क्या आपत्ति है ?"

मैं :" लेकिन ये तुम करोगी कैसे"

ऋतू :" मैं कल पूजा को अपने साथ लेकर ४ बजे घर आउंगी, तुम ३:३० पर ही आ जाते हो, तुम ठीक ४:०० बजे मुठ मारनी चालू कर देना, मैं उसको बोलूंगी की मेरा भाई रोज ४:०० बजे अपने रूम में मुठ मारता है, और मैं इस छेद से रोज उसको देखती हूँ, मुझे विश्वास है की वो भी तुम्हे देखने की जिद करेगी तब मैं उससे पैसो के बारे में बात करके तुम्हे मुठ मारते हुए दिखा दूँगी....क्यों कैसी रही??"

मैं :" वाह मैं तो तुम्हारी अक्ल का कायल हो गया...तुम तो मुझसे भी दो कदम आगे हो"

ऋतू : "आखिर बहन किसकी हूँ हा हा ..."

मैं : "और तुम उससे कितना चार्ज करोगी?"

ऋतू : "वोही...एक हजार रूपए, ठीक है ना .."

मैं : "ठीक है..."

ऋतू : "और फिर रात को सन्नी और विकास भी आ सकते हैं और वो दोनों, हम दोनों को देखने के ३००० हजार रूपए अलग से तुम्हे देंगे...तो हम एक दिन में चार हजार रूपए कमा सकते हैं"

मैं तो अपने दिमाग में calculate करना शरू किया की ४००० एक दिन के, हफ्ते में ३ बार, अगर लड़के या लडकियां बढती हैं तो ज्यादा भी हो सकते है, और इस तरह से १ महीने में कितना हुआ....शायद calculator की मदद लेनी होगी.."

ऋतू : "अरे क्या सोचने लगे"

मैं :"कुछ नहीं...कुछ नहीं"

ऋतू :"वैसे एक बात बताऊँ, मुझे काफी exitement हो रही थी की तुम मुझे छेद से वो सब करते हुए देख रहे हो, काफी मजा आ रहा था "

मैं : "मुझे भी काफी मजा आ रहा था, मेरा लंड तो अभी भी कल की बातें सोचकर खड़ा हुआ है"

ऋतू : "अगर तुम चाहो तो मैं तुम्हारा लंड चूस सकती हूँ"

मैं : "अभी....मम्मी पापा आने वाले हैं, तुम मरवाओगी "

ऋतू : "अरे इसमें ज्यादा वक्त नहीं लगेगा...please ...अपना लंड निकालो न..जल्दी"

मैंने जल्दी से अपनी पैंट नीचे उतारी और ऋतू झट से मेरे सामने घुटनों के बल बैठ गयी, मेरा underwear एक झटके में नीचे करके मेरे फड़कते हुए लंड को अपने नरम हाथों में लेकर ऊपर नीचे किया और फिर उसे चूसने लग गई, उसकी बेकरारी और मेरी उत्तेजना लायी और सिर्फ एक मिनट में ही मैंने एक के बाद एक कई पिचकारी उसके मुंह में उतार डाली.

वो उठी और अपना मुंह साफ़ करी हुई बोली "मुझे तो तुम्हारा वीर्य ने अपना दीवाना ही बना दिया है..और फिर मेरे लंड को पकड़ कर मेरे चेहरे पर अपनी गरम साँसे छोडती हुई बोली "आगे से तुम इसे कभी व्यर्थ नहीं करोगी...समझे न."

मैंने हाँ में गर्दन हिलाई.

मैं : "अगर तुम चाहो तो बाद मैं मैं भी तुम्हारी चूत चूस सकता हूँ " मैंने धीरे से कहा.

ऋतू : "तुमने तो मेरे दिल की बात छीन ली...मैं रात होने का इन्तजार करुँगी."

मैं : "मैं भी रात होने का इन्तजार करूँगा ...बाय"

ऋतू : "बाई"

रात को खाना खाने के बाद सब अपने-अपने रूम में चले गए, मैं अपने बेड पर लेटा हुआ सोच रहा था की पिछले कुछ दिनों में, मैं और ऋतू एक दुसरे से कितना खुल गए हैं, लंड-चूत की बातें करते हैं,मुठ मारना एक दुसरे को नंगा देखना और छुना कितना आसान हो गया है. मैं अपनी इस लाइफ से बड़ा खुश था.


मैंने अपना लंड बाहर निकाला और उसे मसलना शुरू कर दिया, मुझे ऋतू का इन्तजार था, मुझे ज्यादा इन्तजार नहीं करना पड़ा, करीब पंद्रह मिनट में ही वो धीरे से मेरे कमरे का दरवाजा खोल कर अन्दर आ गयी और मुझे अपना लंड हिलाते हुए देखकर चहक कर बोली.


"वाह, तुम तो पहले से ही तैयार हो, लाओ मैं तुम्हारी मदद कर देती हूँ"


मैं : "पर मैंने कहा था की मैं तुम्हारी चूत चुसना चाहता हूँ..!"


ऋतू :"कोई बात नहीं, तुम मेरी चूत चुसो और मैं तुम्हारा लंड, हम 69 की position ले लेते हैं."


मुझे ये आईडिया पसंद आया.


ऋतू ने जल्दी से अपना gown खोला, हमेशा की तरह आज भी वो अन्दर से पूरी तरह से नंगी थी, उसके भरे हुए मुम्मे और तने हुए निप्पल्स देखकर मेरे लंड ने एक-दो झटके मारे, और मैंने नोट किया की आज उसकी चूत एकदम साफ़ थी, चिकनी.


शायद उसने आज अपनी चूत के बाल साफ़ किये थे... मेरे तो मुंह में पानी आ गया.


वो झुकी और अपने गीले मुंह में मेरा लंड ले लिया और अपनी टाँगे उठा कर घुमाते हुए, जैसे कोई घोड़े पर चढ़ रहा हो, बेड पर फैलाई और उसकी चूत सीधे मेरे खुले हुए मुंह पर फिक्स हो गयी, उसके मुंह में मेरा लंड था पर फिर भी उसके मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी, उसकी चूत जल रही थी, एकदम गरम, लाल, गीली, रस छोडती हुई...मैं तो अपने काम में लग गया, उसकी चूत के लिप्स को अपनी उँगलियों से पकड़ के मैंने अन्दर की बनावट देखि, उबड़ खाबड़ पहाड़ियां नजर आई, और उन पहाड़ियों से बहता हुआ उसका जल...मैंने अपनी लम्बी जीभ निकाली और पहाड़ियां साफ़ करने में लग गया, पर जैसे ही साफ़ करता और पानी आ जाता...मैं लगा रहा...लगा रहा..साथ ही साथ मैं अपनी एक ऊँगली से उसकी clit भी रगड़ रहा था.


मेरे लंड का भी बुरा हाल था वो उसको आज ऐसे चूस रही थी जैसे कुल्फी हो..अन्दर तक ले जाती जीभ से चारों तरफ circle बनाती और फिर बाहर निकालते हुए हलके से दांतों का भी इस्तेमाल करती..वो लंड चूसने में परफेक्ट हो चुकी थी.


मैंने अब उसकी चूत के मुंह पर अपने दोनों होंठ लगा दिए, और बिना जीभ का इस्तेमाल किये बिना चुसना शुरू कर दिया, किसी vaccum cleaner की तरह suck करने लगा, वो तो बिफर ही गयी मेरे इस हमले से और उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकलने लगा और वो झड़ने लगी...मैं भी अब कगार पर था, मेरे लंड ने भी विराट रूप ले लिया और पूजा ने जैसे ही मेरी बाल्स को अपने हाथ में लेकर मसलना शुरू किया, मैं झड गया और वो मेरा पूरा माल हड़प कर गयी..


फिर हम दोनों उठे और एक दुसरे की तरफ देखा, दो के चेहरे गीले थे हम ये देखकर हंसने लगे.


ऋतू :"तुमने तो मुझे अपने juice की लत्त लगा दी है..कितना मजा आता है तुम्हारा लंड चूसने में और तुम्हारा वीर्य पीने में."


मैं : "मैं भी तुम्हारे मीठे रस का आदि हो चूका हूँ, जी करता है सारा दिन तुम्हारी चूत चूसता रहूँ."


मेरा लंड अभी भी खड़ा हुआ था, वो मेरे साथ लेट गयी, उसके मोटे-२ चुचे मेरे सीने से लगकर दब गए, उसने एक हाथ से मेरा लंड पकड़ा और उसे ऊपर नीचे करने लगी, मैंने अपनी आँखे बंद करली और मजे लेने लगा.


उसकी गरम साँसे मेरे कानो पर पड़ रही थी.


उसकी एक टांग मेरे ऊपर थी और वो उसको रगड़ रही थी जिससे ऋतू की गीली चूत मेरी जांघ से रगड़ खा रही थी.


ऋतू : "wow , तुम्हारा तो अभी भी खड़ा हुआ है...मेरी चूत के अन्दर भी कुछ कुछ हो रहा है..."



और फिर उसने जो किया मैं स्तब्ध रह गया..
ऋतू उठी और अपनी दोनों टाँगे फैला कर मेरे ऊपर आ गयी, उसकी दोनों बाहें मेरे सर के दोनों तरफ थी और ऋतू के दोनों मोटे मोटे मुम्मे मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे, और उसकी रसीली चूत मेरे खड़े हुए लंड को छु रही थी, वो थोडा झुकी और मेरे होंठो को चूसने लगी, उसके मुंह में से मेरे वीर्य की गंध आ रही थी, मैंने भी उसके नर्म होंठो को चुसना और चाटना शुरू कर दिया, फिर जब उसने अपनी जीभ मेरे मुंह में डाली तो मैं उसकी मचलती जीभ को पकड़ने की नाकाम कोशिश करते हुए जोर जोर से उसे चूसने लगा, मेरे हाथ अपने आप उसकी छाती पर जा चिपके और मेरी उंगलियाँ उसके निप्पल्स को सहलाने लगे, लटकने की वजह से उसके मुम्मे काफी बड़े लग रहे थे, मेरी हथेली में भी नहीं आ रहे थे.


वो धीरे धीरे अपनी चूत की बाहरी दीवारों पर मेरे खड़े हुए लंड को रगड़ रही थी, और उसकी चूत की गरम हवाओं से मेरा लंड झुलस रहा था.


मैंने भी अपनी जीभ अब उसके मुंह में दाल दी, वो उसे ऐसे चूस रही थी जैसे मेरा लंड हो, पूरी तरह से वो मुझे पीना चाहती थी..दूसरी तरफ मेरा लंड अब उसकी चूत की दरार में फंस गया था,

उसने अपनी आँखें खोली और मेरी तरफ नशीली आँखों से देखा,
और मुझसे कहा "आई लव यू " मैं कुछ समझ पाता इससे पहले उसने अपनी गांड का दबाव मेरे ऊपर दाल दिया. और मेरा पूरा लंड उसकी चूत में समाता चला गया .


ऋतू के मुंह से एक कराह निकल गयी आआआआआआआईईई ....म्म्मम्म्म्मम्म ....


माआआअर ग्यीईईईईईईईईई आआआआआआअह


मैं तो भोचक्का रह गया, मुझे इसकी बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी, पर जब मैंने ऋतू का तृप्ति भरा चेहरा देखा,
उसकी बंद आँखें और हलकी मुस्कराहट से भरा चेहरा देखा tab मुझे एक सुखद एहसास हुआ, और मैं भी पुरे जोश के साथ अपने लंड को उसकी चूत में अन्दर बाहर करने लगा,


उसने अपनी bahon से मेरी गर्दन के चारो तरफ फंदा बना डाला जिसकी वजह से उसके मुम्मे मेरे चेहरे पर रगड़ खा रहे थे,
मैंने अपने हाथ उसकी चोडी गांड पर रखे और उन्हें दबाते हुए नीचे से धक्के मारने लगा, उसके होंठ मेरे कानो के बिलकुल पास थे, और वो मीठे दर्द से हलके हलके चिल्ला रही थी..


आआआआआआआआअह ..आशु.....i love you .......fuck me .....आई लव यौर बिग cock ....तुम्हारा मोटा


लंड.....आआआआआ...मेरी चूत में अन्दर तक दाआआआअलो .................और जोर से.....और जोर से.....आआआआअह्ह्ह


मेरी चूत तुम्हारी है.......मारो मेरी चूत.....चोदो मुझे......


वो अब गन्दी गन्दी गालियाँ भी देने लगी थी..


बहिन चोद....चोद न......आआआआआआआअह...


चोद अपनी बहन को.......अपने लम्बे लंड से.........पूरा ले लुंगी...............आआआआआआअयीईईईइ


हरामखोर........चोद मुझे.....फाड़ दे अपनी बहन की चूऊऊऊऊत ....आआआआह.....


बेहेण के लोडे......माआआआआआआऐन तो गयीईईईईईईईईईई ......आआआआआअह....


और वो झड़ने लगी ..


मैंने अपने लंड पर उसका लावा महसूस किया.


वो गहरी -२ साँसे लेकर ढीली पड़ गयी...


फिर मैंने उसे बेड पर धक्का दिया और उसे घोड़ी बना कर उसकी चूत में पीछे से अपना लंड दाल दिया.


उसकी फैली हुई गांड काफी दिलकश लग रही थी...


मैंने उसको स्टारिंग की तरह पकड़ा और अपनी गाडी की स्पीड बड़ा दी.


उसके मुंह से ओह्ह्हह्ह...ओफ्फ्फफ्फ्फ्फ़.aaaahhhhh की आवाजें दुबारा आने लगी.


मैं भी अब झड़ने के करीब पहुँच गया...मैंने कहा...........ऋतू मैं आया.............
.वो जल्दी से पलटी और मेरे लंड पर अपना मुंह लगा दिया....
मेरे लिए ये काफी था, मैंने उसका मुंह उसकी मनपसंद मिठाई से भर दिया...


वो सारी रसमलाई खा गयी.


फिर वो उठी और आई लव यू कहकर मेरे सीने से लग गयी मैं भी उसके कोमल से शरीर को सहलाते हुए आई लव यू टू ..आई लव यू टू ...कहने लगा.




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दोस्तों मुझे सेक्स से बहुत ही प्यार है आजो और सेक्स का मज़ा ले लो

Last edited by saleemkhan12 : 11th August 2014 at 01:26 PM.

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  #6  
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हाँफते हुए ऋतू ने अपनी नजर मुझसे मिलायी और मुस्कुराकर बोली.."मुझे तुम्हारा लंड पसंद आया, ये अन्दर जाकर तो बहुत ही मजे देता है,डिल्डो को अन्दर ले लेकर मैं थक गयी थी, ये कितना मुलायम, गर्म, और मजेदार है."

मैंने कहा "तुम्हारी चूत भी बहुत मजेदार है, मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा है, कितना आनंद आ रहा था, तुम्हारी रेशम जैसी चूत में अपना लंड डालने में, इस आनंद की तो मैंने कल्पना भी नहीं की थी."

ऋतू : "अब तुम कल मुझे सुबह उठाने के लिए आ जाना मेरे रूम में" उसने उठते हुए कहा.

मैं :"उठाने के लिए ? पर किसलिए ??"

ऋतू : "क्योंकि मुझे और मजे चाहिए इसलिए..कल से रोज सुबह तुम मेरी चूत चाटोगे और फिर अपने इस खुबसूरत लंड से मेरी चूत मारोगे..और अब तो हम बिज़नस पार्टनर हैं..हैं ना"

मैं : "हाँ हाँ बिलकुल हैं." मैंने खुश होते हुए कहा.

ऋतू : "ठीक है फिर..good night " और उसने झुक कर मेरे लंड को चूम लिया और बाहर निकल गयी

मैं : " good night " मैंने कहा.

अगले दिन सुबह मेरी नींद जल्दी ही खुल गयी और मैंने जब छेद से ऋतू के रूम में देखा तो वहां अँधेरा था, मैं दबे पांव उसके रूम में गया और उसके बेड के किनारे जाकर खड़ा हो गया, थोड़ी देर बाद अँधेरे में अपनी आँखें adjust करने के बाद मैंने देखा की ऋतू अपनी चादर से बाहर निकल कर सो रही है, वो एकदम नंगी थी, उसकी दोनों टांगें फैली हुई थी जिसकी वजह से उसकी चूत अलग ही चमक रही थी. मेरा लंड ये नजारा देखकर फुफकारने लगा, मैंने रिकॉर्ड टाइम में अपने कपडे उतारे और उसकी खुली हुई टांगो के बीच कूद गया, मैंने अपना मुंह जैसे ही उसकी चूत पर टिकाया उसके शरीर में एक सिहरन सी हुई और उसकी नींद खुल गयी, जब उसने मुझे अपनी चूत चाटते हुए देखा तो वो सब समझ गयी और उसके मुंह से सिस्कारियां निकलने लगी..


म्म्म्मम्म्म्मम्म आआआआआआआआआशु .......गुड मोर्निंग.

मैंने उसकी रसीली चूत से अपना मुंह ऊपर उठाया और बोला "गुड मोर्निंग"

हमेशा की तरह उसकी चूत में से ढेर सारा रस बहने लगा और मैं सड़प-२ करके उसे पीने लगा..ऋतू ने मेरे बाल पकड़ लिए और मुझे ऊपर की तरफ खीचने लगी..मैं ऊपर खिसकते हुए उसकी नाभि, पेट और फिर मोटे-मोटे मुम्मो पर किस्स करता चला गया और अंत में उसके अधीर होठों ने मुझे ऐसे जकड़ा की मेरे मुंह से भी आह निकल गयी, मैंने अपने दोनों हाथों से उसका चेहरा पकड़ लिया और चूम चूमकर उसे गीला कर दिया, उसने अपना हाथ हम दोनों के बीच डाला और मेरा लंड पकड़कर अपनी चूत के मुंहाने पर रख दिया, बाकी काम मैं जानता था, और एक तेज धक्के से मैंने अपना सात इंच लम्बा लंड उसकी गरम चूत में दाल दिया, उसकी आँखें उबल कर बाहर आने को होने लगी पर फिर ३-४ झटको के बाद वोही आँखें मदहोश होने लगी और उसके मुंह से तरह-२ की आवाजें आने लगी...

aaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhh

चोदो मुझीईईईईईईए ..................मुझे तुम्हारा लंड रूऊऊऊऊज चहियीईईईईई

aaaaaaaahhhhhhhhhh आआआआआआआअह ...............जोर से sssssssssssssssssss

और जूऊऊऊऊऊऊऊर से sssssssssssss

मैंने अपना मुंह ऋतू के मुंह से जोड़ दिया, और उसकी जीभ चूसने लगा, मैं झड़ने के करीब था, मेरे मुंह से एक भारी हुंकार निकली, ऋतू समझ गयी और उसने हमारी किस तोड़ते हुए मेरा लंड बाहर निकाला और बेड के किनारे पर लेट कर मेरा गीला लंड अपने मुंह में ले लिया, मैं अब तेजी से अपना लंड उसके मुंह में आगे पीछे करने लगा, अब मैं उसका मुंह चोद रहा था.

वो भी मेरे लंड को अन्दर तक ले जा रही थी, जो उसके गले के अंत तक जाकर उसकी दीवारों से टकरा रहा था.

मैंने जल्दी ही झड़ना शुरू कर दिया. और अपने गर्म वीर्य की धारें ऋतू के गले में छोड़ने लगा.

वो मेरे वीर्य की हर बूँद चटखारे लेकर पी गयी.

फिर उसने मुझे धक्का दिया और मेरे मुंह के ऊपर आकर बैठ गयी उसकी चूत ने मेरे होंठो को ढक लिया, मैंने उसकी चूत में अपनी जीभ डाली और उसे चुसना शुरू कर दिया, और जल्दी ही उसका रस बहकर मेरे मुंह में आने लगा और वो हलके से चिल्लाकर झड़ने लगी.

वो उठी और फिर हम दोनों ने काफी देर तक एक दुसरे की किस्स ली.

फिर उसने किस्स तोड़ी और बोली "अब तुम जल्दी से अपने रूम में जाओ इससे पहले की मम्मी पापा उठ जाएँ...और कॉलेज भी तो जाना है ना तुम्हे, मुझे भी स्कूल के लिए तैयार होना है "

मैं : "ओह्ह मैं तो भूल ही गया था...मुझे तो बस आज रात का इन्तजार है."

ऋतू : "मुझे भी"

और फिर मैंने अपने कपडे पहने और रूम में जाकर तैयार हुआ.

नाश्ता करते हुए ऋतू ने सबको बता दिया की आज रात उसकी फ्रेंड पूजा रात को यहीं रुकेगी.

कॉलेज जाकर मेरा मन सारा दिन कहीं नहीं लगा मुझे तो बस शाम का इन्तजार था.

मैं कॉलेज से जल्दी घर आ गया, घड़ी देखि तो ३ बजने वाले थे, ऋतू सादे तीन बजे तक स्कूल से आती थी, मैं अपने रूम में जाकर उसका इन्तजार करने लगा.

ठीक ३:३० पर ऋतू और पूजा घर आ गए, मैंने छेद से देखा तो दोनों अपने रूम में बैठकर बातें कर रहे थे.

वो उसे बता रही थी की कैसे वो रोज मुझे छेद के जरिये मुठ मारते हुए देखती है और अगर वो भी देखना चाहती है तो उसे एक हजार रूपए देने होंगे. पैसो का नाम सुनकर पूजा ऋतू को हैरानी से देखने लगी पर जब ऋतू बोली की अगर तुम्हे लगे की ये "शो" मैं कोई worth नहीं हैं तो तुम पैसे मत देना..कुछ सोचने के बाद वो मान गयी, क्योंकि उसने भी आज तक कोई असली लंड नहीं देखा था .

मैंने घडी की तरफ देखा तो ४ बजने वाले थे. मैं अपने बेड पर आकर बैठ गया और सकुचाते हुए अपनी जींस और underwear उतार दिया और मुठ मारना शुरू किया. मुझे इस बात का आभास हो गया था की छेद से अब वो दोनों बारी-२ से मुझे देख रहे हैं.दुसरे रूम में से जब ऋतू ने देखा की मैंने अपनी जींस उतार दी है और मुठ मारना चालू कर दिया है तो उसने पूजा को बुलाया और उसे छेद में से देखने को कहा.


"वाव sssssssssssssssssssss....तुम्हारे भाई का लंड तो काफी बड़ा है..और सुन्दर भी." पूजा ने धीरे से कहा.


"हाँ शायद, क्योंकि मैंने कभी और किसी का लंड तो देखा नहीं है...ले देके सिर्फ अपना डिल्डो ही है जिससे हम भाई के लंड को compare कर सकते हैं" ऋतू बोली. और दोनों हंसने लगी.


"ये सच में डिल्डो के मुकाबले कुछ ज्यादा ही है, और इसे देखने में भी कितना मजा आ रहा है, लंड के ऊपर नसें कैसे चमक रही है..सच में its really beautifull ." पूजा ने गहरी सांस लेते हुए कहा.


मैं भी अपने रूम में बैठा उत्तेजित होता जा रहा था, ये सोचकर की पूजा और ऋतू मुझे दुसरे रूम से देख रही हैं. मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और जब मैं झड़ने वाला था तो थोडा सा घूम कर अलमारी की तरफ हो गया और खड़े होकर अपनी धारें मारनी शुरू करदी.


ये देखकर, दुसरे रूम में पूजा आश्चर्यचकित रह गयी, वो बोली "हाई ...वो तो खड़ा हो गया है और अब उसका लंड मेरे बिलकुल सामने है....वाव ...अब उसके लंड में से रस निकल रहा है....कितना सुन्दर दृश्य है..मजा आ गया."


मैंने गहरी साँसे लेते हुए झाड़ना बंद किया और बेड पर लेट गया और सोचने लगा की काश पूजा मेरे सामने होती तो मैं उसके चेहरे के भाव देख सकता.


दुसरे रूम में पूजा ने उछलते हुए ऋतू को गले से लगा लिया और उसके होंठो को चूम लिया और बोली "मैंने इससे ज्यादा सुन्दर चीज आज तक नहीं देखि, मेरी तो चूत से पानी निकलने लगा है,निप्पल्स खड़े हो गए हैं...ये देख ..और उसने ऋतू का एक हाथ अपनी चूची पर और दूसरा सीधे अपनी चूत पर टिका दिया..ऋतू दोनों चीजें अपने हाथ में लेकर दबाने लगी और पूजा से पुछा "मतलब तुम मानती हो न की ये शो एक हजार रूपए की worth का था"


पूजा ने कुछ नहीं बोला और सीधे अपने पर्स में से एक हजार रूपए निकाल कर ऋतू को दे दिए और बोली "बिलकुल था...ये लो" और आगे बोली "काश ये सब मुझे बिलकुल मेरे सामने देखने को मिल जाएँ, तो मजा ही आ जाए"


ऋतू : "तो चलो चलकर उससे पूछ लेते हैं" और हंसने लगी "देखते हैं वो क्या कहता है"


पूजा : "पागल हो गयी है क्या, मैं तो सिर्फ बात कर रही हूँ, इसका मतलब ये नहीं की मैं उससे जाकर बोलू की वो मेरे सामने मुठ मार सकता है या नहीं"


ऋतू : "तुम मत जाओ, मैं जाकर उसको बोलती हूँ तुम्हारी तरफ से, अगर तुम चाहो तो"


पूजा : "वो कभी भी नहीं तैयार होगा इस पागलपन के लिए, ये सिर्फ मेरे मन के विचार हैं और कुछ नहीं इन्हें ज्यादा गंभीरता से मत लो "


ऋतू : "अरे try तो करते हैं ना...वो या तो हाँ करेगा या ना, और वो ये बात मोम डैड को भी नहीं बता पायेगा, क्योंकि उसे ये बातें उन्हें बताने में बड़ी शर्म आएगी...मैं तो ये सोच रही हूँ की उसको क्या देना पड़ेगा ये सब करवाने के लिए "


पूजा : "क्या मतलब ??"


ऋतू : "मतलब की वो शायद कर सकता है अगर बदले में हम उसे कुछ ऐसा दे जिसकी उसे जरुरत है"


पूजा :"जैसे की.....?"


ऋतू : "मुझे नहीं पता...कुछ भी हो सकता है, ये तो सिर्फ मेरा आईडिया है, चलो एक काम करते हैं, मैं जाकर उससे पूछती हूँ की क्या वो हमारे सामने मुठ मारने को तैयार है और उसके बदले में क्या चाहिए"


पूजा : "तुम्हारे में इतनी हिम्मत ही नहीं है, की अपने सगे भाई से इस तरह की बात पूछ सको, और अगर पूछती भी हो तो वो तैयार नहीं होगा"


ऋतू : "अगर ऐसी बात है तो मैं अभी जाकर पूछती हूँ " और वो दरवाजे की तरफ चल पड़ी " अगर तुम भी आना चाहो तो आ सकती हो या फिर छेद में से देख सकती हो"


पूजा : "ना बाबा ना..मुझे तो बड़ी शर्म आएगी इस सबमे...तुम ही जाओ"


ऋतू ने आकर मेरे रूम का दरवाजा खडकाया और अन्दर आ गयी, मैंने बड़ी हैरानी से उसे देखा...वो जल्दी से मेरे पास आई और मेरे मुंह पर ऊँगली रख कर मुझे चुप रहने के लिए कहा और फुसफुसाकर बात करने लगी, दुसरे रूम से पूजा बड़ी बेसब्री से ये सब देख रही थी, उसने देखा की ऋतू ने मुझसे कुछ कहा और १-२ मिनट बात करने के बाद ऋतू का भाई झटके से अलग हुआ और अपने हाथ हवा में उठाकर मना करने के स्टाइल में कुछ बोलने लगा...पूजा सांस रोके ये सब देख रही थी, फिर ऋतू दुबारा अपने भाई के पास गयी और उसे कुछ और बोला, फिर भाई ने भी आगे से कुछ कहा और ऋतू सोचने के अंदाज में सर खुजाने लगी, और फिर कुछ और बातें करने के बाद दोनों एक दुसरे के गले लग गए और ऋतू बाहर निकल गयी.


अन्दर आते ही पूजा ने ऋतू से बड़ी अधीरता से पूछा "तुमने उससे क्या कहा..कैसे पूछा ??"


ऋतू : "वोही जो हमने तय किया था..मैंने पूछा की क्या वो हमारे सामने masturbate कर सकता है क्योंकि हमने कभी भी असली में ऐसा नहीं देखा.."


पूजा : "और उसने क्या कहा?"


ऋतू : "वो तो यह सुनकर काफी भड़क गया था"


पूजा : "देखा...मैंने कहा था न"


ऋतू : "पर जब मैंने उससे कहा की हम इसके लिए उसे कुछ पैसे देंगे या फिर कुछ और भी जो वो चाहे तो बात आगे बड़ी"


पूजा : "तो उसने क्या कहा " उसने excitement में आगे पूछा


ऋतू : "बोटम लाइन इस , वो तैयार है और वो इसके लिए २००० रूपए मांग रहा है."


पूजा ने आश्चर्य के भाव दिए और बोली "क्या सच में...वो सब हमारे सामने करने को तैयार है और उसे सिर्फ २००० रूपए चाहियें"


ऋतू : "हाँ...और साथ ही साथ वो चाहता है की हमें भी उसके सामने नंगा होना पड़ेगा" उसने धीरे से कहा.


पूजा : "वाह बहुत बढ़िया...वो हमें नंगा देखना चाहता है तभी वो masturbate करेगा " उसने कट्टाक्ष भरे स्वर में कहा.


ऋतू : "पर जरा सोचो...उसका लम्बा और खुबसूरत लंड तुम्हारी नाक से सिर्फ कुछ ही दुरी पर होगा" ऋतू ने उसे उकसाया


पूजा कुछ सोचते हुए "चलो वो तो ठीक है पर क्या तुम अपने भाई के सामने नंगी हो सकती हो ?"


ऋतू : "उसे अपने सामने मुठ मारता हुए देखने के लिए तो मैं ये सब कर ही सकती हूँ, ये कोई बड़ी बात नहीं है, और जब हम दोनों करेंगे तो मुझे इसमें ज्यादा शर्म भी नहीं आएगी"


पूजा : "हम दोनों से तुम्हारा क्या मतलब है...मैं तो अभी तक इसके लिए तैयार ही नहीं हुई"


ऋतू ने अपनी आवाज में थोड़ी कठोरता लाते हुए कहा "तुम मुझे ये बताओ तुम तैयार हो या नहीं...ये तुम्हारा लास्ट चांस है"


पूजा : " ठीक है, जब तुम्हे अपने भाई के सामने नंगा होने में कोई परेशानी नहीं है तो मुझे क्या...वो ये सब कर करेगा"


ऋतू : "शायद आज रात को सबके सोने के बाद"


पूजा : "मुझे तो बड़ी घबराहट हो रही है...क्या सच में तुम ये सब करना चाहती हो"


ऋतू : "अरे हाँ ...ये एक नया adventure होगा...मजा आएगा...और फिर हम बाद में......समझ गयी न"


पूजा : "ठीक है...पर सच में तुम बड़ी पागल हो"


ऋतू : "पागलपन करने में भी कभी -२ बड़ा मजा आता है...चलो अब अपना होमेवोर्क कर लेते है...फिर रात को तो कुछ और नहीं कर पायेंगे"
जब रात को सभी डिन्नर कर रहे थे तो ऋतू ने सारी बातें मेरे कान में बता दी, बीच - २ में जब मैं पूजा की तरफ देखता था तो वो शरमा कर अपना चेहरा नीचे कर लेती थी.जब खाना ख़त्म हुआ तो ऋतू और पूजा अपने रूम में चले गए बाकी का बचा हुआ homework करने के लिए.

और आखिरकार सारे घर में शांति छा गयी, ऋतू और पूजा अपने रूम में nightgown पहेनकर मेरा वेट कर रहे थे. पूजा ने सोचा की शायद आशु नहीं आएगा और कुछ बोलने के लिए अपना मुंह खोला ही था के उसे दरवाजे पर हलकी सी knok सुनाई दी,आवाज सुनते ही ऋतू उछल कर दरवाजे के पास गयी और मुझे अन्दर खींच लिया. मुझे खींचकर वो बेड के पास तक ले गयी और वहां बैठी पूजा के पास बैठ गयी, मैं उन दोनों के सामने नर्वस सा खड़ा हुआ था.

"अरे किस बात का वेट कर रहे हो...तुम ये करना भी चाहते हो या नहीं..." ऋतू ने पूछा.

मैं : "मुझे लगा तुम मुझे पहले पैसे दोगी.."

ऋतू : "बिलकुल देंगें, (पूजा की तरफ देखकर), हमने बोला है तो जरुर देंगे"

मैं : "तुमने बोला था की तुम मुझे २००० रूपए दोगे और नंगे भी होगे "

ऋतू : "क्या तब तुम masturbate करना शुरू करोगे ??"

मैं : (सकुचाते हुए...) " ह्म्म्म हाँ sss "

ऋतू : "ok then ...और पूजा की तरफ देखकर उसे कुछ इशारा करती है, पूजा झट से अपने purse में से २००० रूपए निकाल कर मुझे दे देती है"

पर मुझे कुछ न करते देखकर वो समझ जाती है की आगे क्या करना है.

ऋतू : "come on पूजा..चलो एक साथ करते हैं"

फिर धीरे-२ पूजा उठती है और दूसरी तरफ मुंह करके अपना gown खोल कर नीचे गिरा देती है..ऋतू भी उसके साथ - २ वही करती है, दोनों की गांड मेरी तरफ थी, मैं तो वो दृश्य देखकर पागल ही हो गया, एक गोरी और दूसरी सांवली,एकदम ताजा माल, भरी हुई जांघें और सुदोल पिंडलियाँ, फिर दोनों घूम कर वापिस मेरी तरफ मुंह करके बेड के किनारे पर बैठ गयी, पूजा के चुचे देखकर मेरे मुंह से आह निकल गयी और मैं अपने लंड को अपने पायजामे के ऊपर से ही मसलने लगा..ये देखकर ऋतू ने मुझे घूरकर गुस्से के लहजे में देखा और अगले ही पल हंसकर मुझे आँख मार दी, पूजा ये सब नहीं देख पायी, वो तो अपनी नजरें भी नहीं उठा रही थी.

मैंने देखा की उसके चुचे ऋतू से काफी बड़े हैं, थोड़े लटके हुए , शायद ज्यादा भार की वजह से, और उसके काले-२ निप्पलस इतने बड़े थे की शायद मेरे पैर की ऊँगली के बराबर...पेट बिलकुल गोल मटोल और सुदोल, मैं खड़ा हुआ उसकी चूत भी देख पा रहा था, वो बिलकुल काली थी, बालों से ढकी हुई, और बीच में जो चीरा था, उसमें से गुलाबी पंखुडियां अपनी बाहें फैला कर जैसे मुझे ही बुला रही थी. मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया. ऋतू की तरफ देखा, उसके चूचो का तो मैं वैसे ही दीवाना था, मुझे अपनी तरफ देखते पाकर उसकी ऑंखें बंद सी होने लगी और अपनी एक ऊँगली अपने मुंह में डालकर वो बोली.

"चलो अब तुम्हारी बारी है" ऋतू ने मुझसे कहा.

मैंने एक गहरी सांस लेकर अपना पायजामा और jocky नीचे गिरा दिया, और अपनी टी-शर्ट भी उतार दी, फिर मैंने अपना तना हुआ लंड हाथ में लिया और उसे आगे पीछे करने लगा.

"इतना दूर नहीं, यहाँ हमारे पास आकर खड़े हो जाओ और फिर हिलाओ" ऋतू ने आर्डर सा दिया.

मैं खिसककर आगे आ गया और अब मेरे पैर बेड से टकरा रहे थे, दोनों के नंगे जिस्म आपस में रगड़ खा रहे थे और उन दोनों का चहरा मेरे लंड से सिर्फ 4 -5 इंच की दुरी पर ही था, मैं उसे हिलाने लगा, पूजा ने ऋतू की तरफ देखा, वो मुस्कुरा दी, जवाब में पूजा भी मुस्कुरा दी और उसकी थोड़ी tention कम हुई, और वो अब अपने सामने के नज़ारे के मजे लेने लगी.
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दोस्तों मुझे सेक्स से बहुत ही प्यार है आजो और सेक्स का मज़ा ले लो

Last edited by saleemkhan12 : 11th August 2014 at 01:28 PM.

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मेरा पूरा ध्यान अब पूजा की तरफ था, वो अपनी आँखें फाड़े मेरे लंड को देख रही थी, उसका मुंह खुला हुआ था, चुचे तन कर खड़े हो गए थे, लगता था वो अपनी सुध बुध खो चुकी है, मैंने ऋतू की तरफ देखा तो वो बड़े ही कामुक स्टाइल से मेरी ही तरफ देख रही थी, उसका एक हाथ अपनी चूत की मालिश कर रहा था, और वो अपने होंठो पर अपनी लाल जीभ फिर रही थी, जैसे वो मेरा लंड चुसना चाहती हो...पर क्या वो पूजा के सामने मेरा लंड चूस लेगी..शायद हाँ.

ये सोच-सोचकर मैंने अपनी स्पीड बड़ा दी और मैं छुटने के बिलकुल करीब पहुँच गया.

ऋतू को शायद इस बात का अंदाजा हो गया था, वो थोड़ी और आगे खिसक आई...साली मेरे रस की भूखी..और मेरे लंड ने अपना रस उबालकर बाहर उडेलना शुरू कर दिया..मेरी पहली धार सीधे ऋतू के चेहरे से टकराई वो थोडा पीछे हटी तो दूसरी धार सीधे पूजा के खुले हुए मुंह के अन्दर और तीसरी और चोथी उसके गालों और माथे पर जा लगी, फिर मैंने थोडा लेफ्ट turn किया और बाकी की बची हुई पिचकारी अपनी बहन के चेहरे पर खाली कर दी.

पूजा तो अवाक रह गयी जब मैंने अपना वीर्य उसके मुंह में डाला पर जब उसने अपना मुंह बंद करके स्वाद चखा तो उसे साल्टी सा लगा और वो उसे निगल गयी, उसने सोचा,इसका स्वाद ऋतू के रस से थोडा अलग है पर tasty है, फिर उसने अपने चेहरे से बहते हुए रस को अपनी उँगलियों से समेटा और निगल गयी, उसने देखा की ऋतू बड़े मजे से अपना मुंह खोलकर मेरी धारें अपने चेहरे और मुंह पर मरवा रही है और बड़े मजे से पी भी रही है.

मेरा लंड धीरे से मुरझाने लगा और ऋतू ने पूजा की तरफ देखा और उसे गले से लगा लिया, और बोली "देखा..कितना मजा आया...कितना exciting था "और उसके चेहरे पर बचा हुआ रस चाटने लगी.

पूजा : "हाँ बड़ा ही exciting था, मुझे भी देखने में काफी अच्छा लगा"

ऋतू : "क्या तुम्हे इसके रस का स्वाद पसंद आया"

पूजा : (शर्माते हुए) "हाँ....ठीक था."

ऋतू : "चलो फिर मेरे चेहरे से सारा रस चाट कर इसे साफ़ करदो...जल्दी"

'ठीक है" और पूजा ने सकुचाते हुए अपनी लम्बी जीभ निकालकर ऋतू का चेहरा चाटना शुरू कर दिया, थोड़ी ही देर में वो बिलकुल साफ़ हो गया और पूजा चटखारे लेते हुए पीछे हो गयी.
"और इसका क्या होगा", मैंने अपने मुरझाये हुए लंड को निचोड़ कर आगे किया और उसके सिरे पर बड़ी सी वीर्य की बूंद चमकने लगी

ऋतू : "पूजा तुम चाट लो इसे.."

पूजा : "मैं.....नहीं मैं कैसे.." वो घबरा रही थी.

मैं : "जल्दी करो..नहीं तो मैं जा रहा हूँ"

ऋतू : "अरे चलो भी पूजा, अब क्यों शरमा रही हो...चूस लो"

पूजा : "नहीं मैं नहीं कर सकती"

ऋतू : "बिलकुल कर सकती हो.." और पूजा का चेहरा पकड़ कर आगे किया और दुसरे हाथ से मेरा लंड पकड़ कर उसके मुंह में दाल दिया.

मैंने महसूस किया की उसके होंठ मेरा लंड मुंह में लेते ही बंद हो गए और उसकी जीभ मेरे लंड के सिरे को कुरेदने लगी, एक दो चूपे लेने के बाद उसने मेरे लंड को बाहर निकाल दिया.

"कैसा लगा " ऋतू ने पूछा

"मजेदार...काफी नरम और गरम है ये तो..मुझे नहीं लगता ये जल्दी पहले जैसा कड़ा हो सकेगा." पूजा बोली.

"थोडा और चुसो तब बोलना.." मैंने कहा.

"हाँ हाँ चलो थोडा और चुसो पूजा, देखते हैं क्या होता है " ऋतू ने उसे उकसाया .

उसने अपना मुंह जल्दी से खोला और मैंने आगे बढकर उसका मुंह अपने लंड से भर दिया, वो उसे अब पहले से ज्यादा तेजी से चूसने लगी, अपनी जीभ का use भी कर रही थी अपने दुसरे हाथ से मेरे लंड को पकड़कर हलके से दबा भी रही थी, मेरे लंड ने विशाल रूप लेना शुरू कर दिया. मैंने पूजा को धक्का देकर बेड पर लिटा दिया, मेरा लंड अभी भी उसके मुंह में था, और मैं उसके सख्त और गद्देदार चूचो पर हलके भार से बैठ गया, पीछे से ऋतू ने बिना कोई वक़्त गवाएं झुक कर अपना चेहरा उसकी काली चूत पर टिका दिया और चूसने लगी.मैं अपने लंड से पूजा का मुंह चोद रहा था और ऋतू अपनी जीभ से उसकी चूत.

पूजा के लिए ये बहुत था, वो बेड पर लेटी हुई मचलने लगी, और अपने एक हाथ से मुझे और दुसरे से ऋतू को धक्का देने लगी. पर ऋतू ने उसकी दोनों टांगो को इस तरह से जकड रखा था की वो छुड़ा ही नहीं पायी और मैं तो उसके चेहरे पर बैठा था और मेरे वजन को हटा पाना उसके बस का नहीं था, वो सिस्कार उठी,उसके शरीर में तरंगें उठने लगी और फिर उसे ऐसा लगा की पुरे शरीर में करंट लग गया है वो अकड़ गयी और उसकी चूत हवा में उठ गयी, और वो झड़ने लगी, उसकी चूत में से रस दनादन बहकर बाहर आने लगा , ऋतू ने उसे फिर भी नहीं छोड़ा और उसके उठते हुए चूतडों के साथ वो भी उठ गयी और रसपान जारी रखा, ऋतू ने पीछे से एक हाथ आगे करके मेरी गांड में ऊँगली दाल दी, मेरे लिए ये काफी था, मेरा भी लंड अपना रस छोड़ने लगा, और पूजा ने भी कोई गलती नहीं की और सड़प-२ के मेरा सारा रस पी गयी, जब सब कुछ शांत हो गया तो मैं उसके ऊपर से हट गया, ऋतू ने भी उसकी चूत से अपना मुंह हटा लिया और खड़ी हो गयी, उसका पूरा चेहरा पूजा के रस से भीगा हुआ था, पूजा का चेहरा भी लाल सुर्ख हुआ पड़ा था, पर उसकी आँखों में एक अलग ही चमक थी.

"wow ...ये तो बहुत ही मजेदार था, मुझे तो काफी अच्छा लगा" मैंने कहा.

"मुझे तो ये विश्वास ही नहीं हो रहा है की हमने ये सब किया"...पूजा ने खुश होते हुए कहा.

"it was wonderfull " मैंने कहा और आगे बढकर पूजा के होंठों को चूम लिया.

मेरे चुमते ही पूजा ने अपने हाथ मेरी गर्दन के चारों तरफ लपेट दिए और मुझे फ्रेंच किस करने लगी, उसके अधीर होठों ने मेरे होंठ पकड़ लिए और चूसने लगी, वो काफी गरम थे, उसकी जीभ मेरे मुंह के अन्दर जाकर डांस करने लगी. उसके कठोर चुचे मेरे नंगे सीने से टकरा कर चूर-२ हो गए, मेरा एक हाथ अपने आप उनपर चला गया, वो थोडा पीछे हुई और हम दोनों बेड पर गिर पड़े और उसका नाजुक सा शरीर मेरे अन्दर मचलने लगा.

ये सब देखकर ऋतू आगे आई और हमें अलग करते हुए कहा..."चलो चलो..बहुत हो गया, आज के लिए इतना ही काफी है, भैया तुम अपने रूम में जाओ अब"

मैंने अनमने मन से अपने कपडे पहने और अपने रूम में आ गया और छेद से देखने लगा, ऋतू ने एक छलांग लगाकर अपना चेहरा पूजा की चूत पर टिका दिया था और अपनी चूत उसके चेहरे पर, और फिर दोनों 69 की position में एक दुसरे को चूसने लगी, मैंने भी अपना लंड निकालकर हिलाना शुरू कर दिया और सोचने लगा, काश मैं भी वहीँ पर होता. जल्दी ही सभी झड गए और सोने चले गए.
अगली सुबह जब मैं उठा तो मैंने भाग कर अपनी आँख छेद पर लगा दी, मैंने देखा की वो दोनों उठ चुकी हैं और दोनों के मुंह एक दुसरे की चूत में चिपके हुए हैं . मैं अपने रूम से निकला और चुपके से उनके रूम में दाखिल हो गया, ऋतू का चेहरा दरवाजे की तरफ था और वो पूजा के ऊपर लेती हुई थी, पूजा का चेहरा ऋतू की मांसल जांघों के बीच पिस रहा था, ऋतू बड़ी बेरहमी से अपनी चूत पूजा के मुंह पर रगड़ रही थी,पूजा भी उसकी चूत चाटने में और अपनी चटवाने में busy थी.


मैं थोडा आगे आया और बेड के पास आकर खड़ा हो गया, ऋतू को मेरे आने का आभास हो गया और उसने चेहरा उठाकर मुझे देखा और मुस्कुरा दी, मैंने भी मुस्कुराते हुए अपना पायजामा नीचे गिरा दिया और अपना खड़ा हुआ लंड उसे दिखाया, मैं अपने घुटनों के बल बैठ गया और अपना मुंह पूजा की चूत पर टिका दिया, ऋतू अपने एक हाथ से पूजा की clit मसल रही थी और मैं पूजा की रसीली चूत को साफ़ करने में लग गया, अपनी चूत पर हुए अलग तरह के अटैक से पूजा सिहर उठी और उसने भी ऋतू की चूत पर दोगुने जोश से हमला बोल दिया, और फिर दोनों झड़ने लगी, मैंने अपने मुंह पर पूजा के रस का सैलाब महसूस किया और उसे पीने में जुट गया, पूजा भी ऋतू के रस से नहा चुकी थी और अपने मुंह से उसकी चूत को चाटने में लगी हुई थी. ऋतू झड कर साइड में हो गयी पर मैंने पूजा की चूत को नहीं छोड़ा, पूजा ने नोट किया की ऋतू तो उसके ऊपर से उतर चुकी है फिर भी उसकी चूत पर किसी का मुंह लगा हुआ है, वो झटके से उठी और मुझे देखकर उछल ही पड़ी,..."अरे...तुम....तुम्म कब आये., ये क्या कर रहे हो ?"


" breakfast !!" मैंने कहा.


"चलो इसका लंड चूसते हैं" ऋतू ने पूजा की तरफ देखकर कहा और मेरे सामने आकर बैठ गयी और अपना मुंह खोलकर मेरे फड़कते हुए लंड को अन्दर ले लिया और उसे तरह - २ से चूसने और चाटने लगी .


पूजा बड़ी हैरानी से ये सब देख रही थी, उसे विश्वास ही नहीं हो रहा था की ऋतू अपने सगे भाई का लंड इतने मजे से अन्दर ले रही है, वो अपना मुंह फाड़े ये सब अनहोनी होते देख रही थी.


"अरे देख क्या रही हो, इधर आओ और मेरी मदद करो" ऋतू ने मेरे लंड के सिरे पर अपनी जीभ फिराते हुए कहा.


पूजा थोड़ी हिचकिचाई पर मेरे लम्बे लंड को देखकर उसके मुंह में भी पानी आ गया और वो भी नंगी उठ कर ऋतू के साथ ज़मीन पर घुटनों के बल बैठ गयी और दोनों ने एक साथ मेरे लंड को सताना शुरू कर दिया, दोनो बारी-२ से मेरे पप्पू को अपने मुंह में लेकर lolypop की तरह चूस रही थी, फिर उन्होंने ने दोनों तरफ से मेरे लंड के चारो तरफ अपने रसीले होंठ फिरने शुरू कर दिए, उनके गीले होंठो के बीच मेरा लंड पिस कर रह गया, वो दोनों उसे mouth organ की तरह बजा रहे थे, और मेरे लंड को अपने मुंह में रखकर दोनों ने फ्रेंच किस करना शुरू कर दिया, मेरी तो टांगे ही कांपने लगी, जिस तरह का treatment वो दोनों मेरे पप्पू को दे रहे थे वो उसे सेहन नहीं हुआ और उसने अपना गर्म लावा उगलना शुरू कर दिया, दोनो में होड़ लग गयी की कौन ज्यादा से ज्यादा मेरा रस पीता है और इस तरह मेरी एक-२ बूंद निचोड़ ली कमीनियों ने..मेरा लंड मुरझाकर उनके होंठों से निकल कर बाहर आ गया, पर फिर भी दोनों ने अपनी किस नहीं तोड़ी, वो शायद एक दुसरे के मुंह में मेरा रस ढूंड रहे थे.


"मैं चलता हूँ.." मैंने धीरे से कहा और अपना पायजामा ऊपर करके बाहर निकल गया, वो दोनों अभी भी एक दुसरे में busy थी.


नीचे breakfast टेबल पर दोनों बच्चो की तरह behave कर रही थी, बात -२ पर हंस रही थी पर कुछ भी ऐसा impression नहीं दे रही थी की हम सबके बीच रात को और सुबह में क्या-२ हुआ. मैं मन ही मन मुस्कुरा रहा था, की जैसा हमने सोचा था सब वैसा ही हुआ बल्कि उससे भी अच्छा हुआ क्योंकि पैसो के साथ - साथ पूजा ने उसका लंड भी चूसा और अपनी चूत भी चुस्वायी..मुझे आज अपने आप पर गर्व हो रहा था.


शाम को मैं और ऋतू अपने कमरे में बैठ कर आगे के बारे में बातें कर रहे थे की कैसे ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाए जाएँ, मैंने ऋतू से कहा की मैं अपने दोस्तों को तुम्हारा और पूजा का शो दिखने के ज्यादा पैसे चार्ज कर सकता हूँ, या फिर दूसरा आप्शन ये है की ऋतू अपनी चूत मेरे दोस्तों से चटवा ले.


ऋतू ने कहा की क्यों न वो अपनी दूसरी सहेलियों को भी मेरा masturbate करता हुआ शो दिखाए या फिर मैं उसकी सहेलियों की चूत चाटूं..


"मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है" मैंने कहा.


"या फिर मुझे लगता है की हमें दोनों काम करने चाहियें, हमें तो पैसो से मतलब है न, फिर जहाँ से मर्जी आयें...है न." ऋतू बोली


"ह्म्म्म हाँ.." मैंने सोचते हुए कहा.


"पर क्या पूजा इन सबके लिए राजी होगी..?". मैंने ऋतू से पूछा.


"अगर तुम उसकी चूत फ्री में चाट कर झाड दो तो जरूर राजी हो जाएगी..हा हा " ऋतू ने हँसते हुए कहा.


रात को डिन्नर के टाइम पापा ने announce किया की इस बार वो दोनों हमें भी अपने साथ जंगल कैंप पर ले जायेंगे..क्योंकि पिछले साल भी कुछ लोग अपने teenagers बच्चों को लेकर आये थे तो वो भी अपने बच्चों को अपने साथ लेकर जाना चाहते हैं.

साथ ही उन्होंने बताया की उनका छोटा भाई अजय और उनकी पत्नी आरती अपनी बेटी नेहा को भी साथ ला रहे हैं.चाची के बारे में सुनकर मैं खुश हो गया, हम काफी समय से उनसे नहीं मिले थे, वो काफी आकर्षक थी, खासकर उनकी चूचियां, बड़ी-२ और उठी हुई. नेहा लगभग 15 -16 साल की थी, उसे भी काफी समय से नहीं देखा था. मजा आएगा, मैंने मन ही मन सोचा.

"अरे वाह ...क्या सच में आप हम दोनों को अपने साथ लेकर चलोगे..." ऋतू ने ख़ुशी के मारे उछलते हुए कहा.


"हाँ हाँ बिलकुल..." ऋतू के पापा संदीप ने अपनी पत्नी पूर्णिमा की तरफ देखते हुए कहा.


"ओह्ह पापा यू अरे ग्रेट..."मैंने उठ कर पापा के गले लग गया, ऋतू भी उठी और हम दोनों से लिपट गयी मेरा हाथ सीधा ऋतू की गांड से टकराया और मैं उसे दबाने लगा, मम्मी भी आकर हमारे साथ बीच में घुस गयी अब मेरे दूसरी तरफ मम्मी थी और मेरा हाथ सीधा उनकी नंगी कमर पर था, उन्होंने साडी पहन राखी थी, मेरे पुरे बदन में सिहरन सी दौड़ गयी अपनी माँ की नंगी कमर को पकड़ने मात्र से...
आज फिर ऋतू अपने जिस्म को बड़े गौर से देख रही थी, अपने चुचे अपने हाथ में लेकर उनका वजन तय करने की कोशिश कर रही थी, और धीरे-२ अपनी लम्बी उंगलियों से निप्पल्स को उमेठ रही थी, और वो फूलकर ऐसे हो रहे थे जैसे अन्दर से कोई उनमे हवा भर रहा हो, किसी बड़े मोती के आकार में आने में उनको कोई समय नहीं लगा!


फिर उसने अपनी गुलाबी जीभ निकाल कर अपने दाये निप्पल को अपने मुंह में लेने की असफल कोशिश की पर बात बनी नहीं, और उन्हें फिर से मसलने लगी और फिर से अपनी जीभ निकाली,
और इस बार वो सफल हो ही गयी, शायद का असर हो गया था, मुझे भी अब उसके बड़े होते चूचो का सीक्रेट पता चल गया था.


फिर उसने अपनी स्कूल पैंट को अपने सांचे में ढले हुए कुलहो से आज़ाद किया और उसको उतार कर साइड में रख दिया , उसने अन्दर कोई पेंटी नहीं पहनी हुई थी, ये मैं पिछले २ हफ्ते से नोटिस कर रहा था,
वो हमेशा बिना पेंटी के घुमती रहती थी, ये सोच कर मेरा पप्पू तन कर खड़ा हो जाता था, खैर, पैंट उतारने के बार वो बेद के किनारे पर अलमारी की तरफ मुंह करके बैठ गयी और अपनी टाँगे चोडी करके फैला दी,
और अपनी चूत को मसलने लगी, फिर उसने जो किया उसे देख कर मेरा कलेजा मुंह को आ गया, उसने अपनी चूत में से एक ब्लैक डिल्डो निकाला, मैं उसे देख कर हैरान रह गया,
ऋतू सारा दिन उसे अपनी चूत में रख कर घूम रही थी ,
स्कूल में, घर पर सभी के साथ खाना खाते हुए भी ये डिल्डो उसमी चूत में था, मुझे इस बात की भी हैरानी हो रही थी की ये उसके पास आया कहाँ से, लेकिन हैरानी से ज्यादा मुझे उत्तेजना हो रही थी,
और उस डिल्डो से इष्र्या भी जो उस गुलाबी चूत में सारा दिन रहने के बाद , चूत के रस में नहाने के बाद चमकीला और तरोताजा लग रहा था,


फिर ऋतू ने उस डिल्डो को चाटना शुरू कर दिया और दुसरे हाथ से अपनी क्लिट को मसलना जारी रखा, कभी वो डिल्डो चूत में डालती और अन्दर बाहर करती ,
फिर अपने ही रस को चाट कर साफ़ करती, मेरे लिए अब सहन करना मुच्किल हो रहा था, और मैं जोर जोर से अपनी पप्पू को आगे पीछे करने लगा, और मैंने वही अलमारी में जोत से पिचकारी मारी और झड़ने लगा..


वहां ऋतू की स्पीड भी बाद गयी और एक आखिरी बार उसने अपनी पूरी ताकत से वो काला लंड अपनी चूत में अन्दर तक दाल दिया, वो भी अपने चरमो स्तर पर पहुँच गयी और निढाल हो कर वही पसर गयी ,
अब उसकी चूत में वो साला काला लंड अन्दर तक घुसा हुआ था और साइड में से चूत का रस बह कर बहार रिस रहा था ..


फिर वो उठी और लाइट बंद करके नंगी ही अपने बिस्टर में घुस गयी और इस तरह मेरा शो भी ख़त्म हो गया, मैं भी अनमने मन से अपने बिस्टर पर लौट आया और ऋतू के बारे में सोचते हुए सोने की कोशिश करने लगा..
मेरे मन में विचार आ रहे थे की क्या ऋतू का किसी लड़के के साथ चक्कर चल रहा है या फिर वो चुद चुकी है ? लेकिन अगर ऐसा होता तो वो डिल्डो का सहारा क्यों लेती..ये सब सचते -२ कब मुझे नींद आ गयी, मुझे पता ही नहीं चला..
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Last edited by saleemkhan12 : 11th August 2014 at 01:32 PM.

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अगले दिन ऋतू को स्कूल छोड़ने जाते समय मैंने उससे आगे के लिए बात की, हम सोच रहे थे की जाने से पहले कैसे ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाए जाएँ, हम दोनों ने निष्कर्ष निकाला की हम अपने दोस्तों से बात करेंगे और देखेंगे की क्या हो सकता है.

शाम को मैंने ऋतू को बताया की मैंने सन्नी और विकास से बात कर ली है और वो ऋतू और पूजा को एक साथ नंगा देखने के लिए 2500 देने को तैयार हैं यानी एक शो के पांच हजार रूपए. और साथ ही साथ ये भी कहा है की अगर वो ऋतू की चूत भी चाटना चाहते हैं तो उसके पांच हजार रूपए लगेंगे..उन्होंने पहली बात तो झट से मान ली पर 5000 का नाम सुनकर बोले की ये तो बहुत ज्यादा है, वो फिर कभी कर लेंगे अभी तो सिर्फ दो नंगी लड़कियों को नंगा देखना चाहते हैं.

ऋतू बोली की उसने भी एक-दो लड़कियों से बात की है पर किसी ने अभी तक confirm नहीं किया है.

इसलिए हमने तय किया की अगले दिन दोपहर को स्कूल से आने के बाद हम ये शो करेंगे, मम्मी पापा के आने से पहले.

ये सब बातें करते -२ हम दोनों काफी उत्तेजित हो चुके थे, मैंने उसकी स्कर्ट को उठाया और उसे डायनिंग टेबल के ऊपर झुकाकर उसकी कच्छी उतार दी और अपना मुंह उसकी रस टपकाती चूत पर टिका दिया, वो मचल पड़ी और उसके मुंह से सिसकारी फुट पड़ी.

आआआआआआआआआआआआआह .म्म्म्मम्म्म्मम्म chhhhhhhhhhhhhhhhhaaaaaaaaaaaaatooooooooo

जूऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊऊर सीईईईईईईईईईईईईईईई आआआआआआआआआआआआआआआअह ..

मेरी लम्बी जीभ उसकी चूत कुरेदने में लग गयी, मैंने हाथ ऊपर करके उसकी शर्ट के बटन खोल दिए और और झटके से उसके कंधो से शर्ट के साथ - २ उसकी ब्रा के स्ट्रेप भी उतार दिए, उसके गोरे मुम्मे बाहर उचल पड़े और वो आगे की तरफ झुक कर टेबल पर आधी लेट गयी, टेबल का ठंडा कांच उसके मुम्मो को मसल रहा था और उसके शरीर में सिहरन दौड़ा रहा था, उसकी चूत इतनी गीली हो चुकी थी की मैं सारा रस पी ही नहीं पा रहा था, वो बहकर जांघो से होता हुआ नीचे तक जा रहा था, मैंने उसका रस टांगो के ऊपर रगड़ना शुरू कर दिया उसकी टाँगे रस से भीगकर लसीली हो चुकी थी फिर मैंने अपनी जीभ से उसकी टाँगे चाटना शुरू कर दिया तो वो पागल ही हो गयी, उसे गुदगुदी भी हो रही थी, उसने पलटकर मेरी तरफ मुंह किया और मेरा सर पकड़कर जोर से चीख मरने लगी...


यीईईईईईईईईईईईईई क्याआआआआआआआआआआआ...........कर रहे हूऊऊऊऊऊऊऊओ ........मैंने टाँगे चाटते हुए उसका पैर उठाकर अपने चेहरे के सामने किया और उसकी पैर की छोटी-२ उँगलियों को अपने मुंह में लेकर चुबलाने लगा, वो उत्तेजना के मारे दोहरी हो गयी और उसने उसी पैर को मेरे सीने पर दबाव देते हुए मुझे नीचे जमीन पर लिटा दिया और उछालकर मेरे मुंह पर बैठ गयी, और दूसरी तरफ झुककर मेरे लंड को आजाद किया और चूसने लगी, मेरे लिए अब सहन करना मुश्किल हो रहा था, मैंने उसे अपनी तरफ घुमाया, वो समझ गयी और अपने होंठ मेरे मुंह में देते हुए अपनी चूत मेरे लंड पर टिका दी, हम दोनों के मुंग से gooonnnnnnnnnnnnnnnn gooooooooooonnnnnnnnnnnn की आवाज निकली और मैंने नीचे से धक्के लगाने शुरू कर दिए, जल्दी ही मैं झड़ने के कगार पर आ गया और मैंने अपना चुम्बन तोडा,,वो फिर पहली जैसे अवस्था में आ गयी और अपनी गीली चूत मेरे मुंह में डालते हुए मेरा रसीला और अपने ही रस में डूबा लंड चूसने और चाटने लगी, मेरे लंड ने जल्दी ही फायरिंग करनी शुरू कर दी

माआआआआऐन्न्न aaaaaaaaaaaaaaaaayyyyyyyyyyyyyyyyaaaaaaaaaaaa आआआआआआआह ...

और वो सब कुछ निगलती चली गयी, मेरा मुंह भी उसके काम रस से लबालब भर गया और हम गहरी साँसे लेते हुए वोंही आधे नंगे लेटे रहे..

तभी मैंने मम्मी की कार की आवाज सुनी और हमने जल्दी से अपने कपडे समेटे और ऊपर की तरफ भाग लिए, बेल की आवाज सुनकर मैं सिर्फ अपनी शोर्ट्स जल्दी से पहन कर नीचे आया और दरवाजा खोला, मैंने ऊपर कुछ नहीं पहन रखा था, मम्मी ने मेरा गठीला शरीर देखा और बोली ऐसे क्यों घूम रहे हो तो मैंने कहा अपने रूम में excercise कर रहा था उन्होंने ऋतू के बारे में पूछा तो मैंने कहा शायद वो अपने रूम में पढाई कर रही है, और फिर भाग कर ऊपर अपने कमरे में आ गया,छेद में से झांककर देखा तो ऋतू कपडे change कर रही थी नीचे जाने के लिए.
अगली दोपहर मैं, सन्नी और विकास ३ बजे घर आ गए, थोड़ी ही देर में हमने ऋतू और पूजा को भी घर में दाखिल होते देखा, हम पहले ही अपने कमरे में छुप गए थे, और छेद से देख रहे थे, उन दोनों ने आते ही अपने कपडे उतारना शुरू कर दिया और २ मिनट में ही नंगी खड़ी हो गयी. सन्नी और विकास बारी-२ से देख रहे थे की कैसे वो दोनों नंगी होने के बाद फ्रेंच किस कर रही हैं, एक दुसरे के चुचे दबा रहीं हैं, वो दोनों तो पूजा का नशीला शरीर देखकर बिफर ही गए..उन्होंने ऐसी "ब्लैक ब्यूटी" नहीं देखि थी, जिसके दूध इतने बड़े और गांड इतनी चोडी हो और साथ ही बला की खुबसूरत भी हो..ऋतू की चमकती त्वचा के सामने वैसे तो पूजा कुछ भी नहीं थी पर हर किसी का अपना taste है..

वो दोनों अब 69 की अवस्था में आ चुकी थी और एक दुसरे की रसमलाई चाटने में लगी हुई थी..

"अरे देख यार, कैसे साली ये दोनों एक दुसरे की चूत चाट रही है...भेंन चोद...मेरा मन कर रहा है की दोनों रंडियों को गली में लेजाकर चोदुं और पूरी दुनिया इनकी चुदाई देखे.." सन्नी ने ऋतू को देखते हुए कहा

मैं अपनी बहन के बारे में ये सब सोचकर गुस्से होने के बजाये ये सब होने के बारे में सोचकर अपने ख्याल बुनने लगा.

मैंने धीरे से सन्नी के कान में कहा "तुम चाहो तो इसकी चूत तुम भी चाट सकते हो" मैंने मौके की नजाकत को समझते हुए गर्म लोहे पर चोट मारी.

"इस बात की क्या गारंटी है की वो तुम्हारी बात मान जाएगी..." सुन्नी ने कुछ सोचते हुए कहा

"अगर मैं नहीं कर पाया तो तुम मुझे 5000 रूपए मत देना." मैंने कहा

"और दूसरी वाली के बारे में क्या ख्याल है...क्या वो भी चूसने देगी" अब विकास बोला, उसे काला माल ज्यादा पसंद आ रहा था.

"उसके बारे में मैं ये कह सकता हूँ की उससे मैं अपना लंड चुसवा सकता हूँ, अगत तुम उसे मेरा लंड चुसते हुए देखना चाहते हो तो तुम्हे 2000 रूपए देने होंगे, अगर मैंने ये कर दिया और फिर तुम्हारा मूड change हो जाए तो तुम मेरी बहन की चूत चाट सकते हो और टोटल 5000 रूपए दे सकते हो," मैंने एक नया package उन्हें दिया.

"ठीक है, मुझे मंजूर है, और अगर तुम ये सब ना कर पाए तो तुम्हे इसके दुगने पैसे हमें देने होंगे." विकास ने कहा.

"मुझे मंजूर है" मैंने खुश होते हुए कहा.

"कल दोपहर को मैं तुम्हे ये सब होते हुए दिखा दूंगा." मैंने उन दोनों से कहा.

तब तक तुसरे रूम में रस का सैलाब आ चूका था और दोनों ने बिना कोई वक़्त गवाएं सारा पानी चाट कर सफा कर दिया.

और फिर दोनों कपडे पहन कर पड़ने के लिए बैठ गयीं.

उसी रात मैं होले से ऋतू के कमरे मैं घुस गया और उसकी रजाई में जाकर लेट गया, वो मेरा ही इन्तजार कर
रही थी....पूरी नंगी.

मैंने अपने शोर्ट्स उतारा और वो मेरा लैंड चूसने में लग गयी, मैंने उसे बताना शुरू किया की हमारी क्या-२ बातें हुई और मैं ये सब कैसे करने वाला हूँ, और कैसे मेरे दोस्त उसकी चूत को चूसेंगे,...वो मेरी बात सुन रही थी और मेरा लंड चूसती जा रही थी, मेरे दोस्तों द्वारा अपनी चूत चाटने की बात सुनकर उसकी चूसने की स्पीड बढ गयी और वो दोनों हाथों से मेरा लंड पकड़कर अन्दर बाहर करने लगी मैंने अपना गाढ़ा वीर्य उसके दहकते हुए मुंह में झोंक दिया. और वो सारा रस पी गयी.

इसके बाद मैं वापिस अपने रूम में आकर लेट गया.
अगले दिन, सभी कुछ वैसे ही हुआ, हम तीनो उन दोनों का इन्तजार कर रहे थे वो कल की तरह आयीं और आते ही शुरू हो गयी, मैंने अपने दोस्तों से कहा की वो छेद से देखते रहें और मैं धीरे से अपने कमरे से निकलकर दुसरे रूम में आ गया.

उन्होंने देखा की मैं रूम में पहुंचकर नंगा हो गया हूँ और मेरा लंड खड़ा हुआ है, मैं धीरे से आगे आया और बेड पर 69 की अवस्था में लेती हुई ऋतू और पूजा के पास आकर खड़ा हो गया. ऋतू ऊपर थी और पूजा नीचे.

मैंने एक हाथ बढाकर ऋतू को पूजा की चूत से हटा दिया और अपना लंड लेटी हुई पूजा के खुले हुए मुंह में दाल दिया.

वो पहले तो चोंक गयी पर फिर उसने मेरा लंड जोर शोर से चुसना शुरू कर दिया, ऋतू अभी भी पूजा की चूत चूसने में लगी हुई थी.

मैंने छेद की तरफ मुंह करके उन दोनों को भी इशारा किया की वो इस रूम में आ जाएँ.

जब वो दोनों रूम में आये तो ऋतू दरवाजे के पीछे खड़ी हुई नंगी ही उनका वेट कर रही थी, उसने दोनों को चुपके से दीवार के सहारे सटा दिया और बिना कोई आवाज करे अपने पीछे आने को कहा.

वो दोनों आगे आये और बेड पर नंगी लेटी हुई पूजा की तरफ देखने लगे, उसकी गुलाबी रंग की चूत काली टांगो के बीच चमक रही थी, और आँखें बंद करे वो मेरा लंड चूसने में लगी हुई थी उसकी दोनों पहाड़ियां और उनपर चमकते दो मोती क़यामत ढा रहे थे.

विकास की नजरें तो पूजा के शरीर से हट ही नहीं रही थी, सन्नी ऋतू के नंगे शरीर का आँखों से बलात्कार करने में लगा हुआ था.

ऋतू की चूत भी अपने को चुस्वाने के लिए मचल रही थी, उसने पूजा और अपनी चूत की तरफ इशारा करके दोनों को अपनी चोइस लेने को कहा, विकास बिना वक़्त गवाएं पूजा की चूत को चाटने लगा, और अपनी लम्बी जीभ से उसे कुरेदने लगा.

जब ऋतू ने ये देखा तो वो धीरे से बेड पर पूजा की बगल में लेट गयी और हवा में अपनी टांगें उठा कर अपने हाथों से परों को पकड़ लिया और उसकी चूत खुल कर सामने आ गयी, सन्नी के लिए ये invitation बहुत था वो भी लपक कर अपने मुंह से ऋतू की चूत पर पिल पड़ा.

पुरे कमरे में तरह -२ की आवाजें गूंज रही थी...आआआआआआआआआआआआअह mmmmmmmmmmmmmmmmmm

aaaaaaaaaaassssssssssssssssssssss चाआआआआआआआआआआआआतो sssssssssssssssssss

चाआआअतो मेरी चूऊऊऊऊऊउत .........ऋतू बोली........

ऋतू की आवाज सुनकर पूजा ने नोट किया की ऋतू तो बेड पर लेटी अपनी चूत चुसवा रही है फिर भी उसकी चूत कोई चाट रहा है और उसके भाई का लंड तो उसके मुंह में है और वो खड़ा है...वो थोडा उठी और उसने परिस्थितियों का अवलोकन किया...फिर सब समझ कर उसने सब कुछ भगवान् भरोसे छोड़ दिया और मेरा लंड और जोर से चूसने में लग गयी..

मैं देख रहा था की कैसे विकास उसकी चूत को खाने में लगा हुआ है वो थोडा नीचे हुआ और अपने पेनी जीभ पूजा की गांड के छेद पर भी फीराने लगा, वो मेरा लंड मुंह में लिए मचल उठी..

दूसरी तरफ, ऋतू की चूत पर नया मुंह लगने की वजह से वो कुछ ज्यादा ही गरम हो चुकी थी और उसने अपने पैरों से सन्नी की गर्दन के चरों तरफ फंदा बना डाला था, और अपनी चूत उससे चुस्वाने में लगी हुई थी..उसने मेरी तरफ देखा और मेरी तरफ अपने होंठ गोल करके एक flying किस किया.
मैं अपने चारों तरफ उत्तेजना का नंगा नाच देखकर झड़ने के करीब पहुँच गया और मेरा लंड फूलकर और लम्बा हो गया , मैं अब पूजा के कोमल चेहरे को बड़ी बेरहमी से चोदने लगा.

जब मेरा वीर्य निकला तो वो सारा ऐसे पी गयी जैसे बच्चा colddrink पीता है. वो कुतिया आखरी बूंद भी निचोड़ कर ले गयी मेरे लंड से.

"तुम दोनों अब अपनी जगह बदल लो" मैंने सन्नी और विकास को कहा.

पूजा ने उठने की कोशिश की पर मैंने उसे वापिस लिटा दिया और कहा की घबराने की कोई बात नहीं है, ये सब किसी को पता नहीं चलेगा, तुम बस एन्जॉय करो...और मैंने उसके कान में कहा (तुम्हे इसके पैसे भी नहीं देने होंगे).

वो कुछ कहना चाहती थी पर तभी सन्नी, जो अब उठकर उसकी टांगो के बीच पहुँच चूका था, ने उसकी चूत पर अपनी जीभ रख दी और वो सब कुछ भूलकर फिर से चूत चुस्वाने में मस्त हो गयी.

विकास ने भी अपना मुंह मेरी बहन की चूत में दे मारा और उसे काफी तेजी से चाटने लगा....

दोनों की चीखें गूंज रही थी कमरे में.

aaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh आआआआआआआआआआआआअ..........cccccccccccccccchhhhhhhhaaaaaaaaatttooooooooooo


aaaaaaaaaaaaaassssssssssssssssssssssss ....mmmmmmmmmmmmm

जीभ सीईईईईईईईईईईईई........चाआआआआआआआआआआअतो .......और तेज......................और तेज.........


आआआआआअह आआआआआआआआआआआह आआआआआआआआआआआआआआआआआअह.....

मैं तो गयीईईईईईईईईईईईईईई .......और ऋतू झड़ने लगी, विकास ने सारा रस पी लिया.

सन्नी की मेहनत भी रंग लायी और पूजा की चूत ने भी पानी छोड़ दिया.

वो दोनों आँखें बंद किये हांफ रही थी.

मैंने सन्नी और विकास को उठाया और उन्हें लेकर कमरे से बाहर आ गया .

"ऊह्ह पूजा....मजा आ गया...." ऋतू ने कहा "कैसे इन लड़कों ने हमारी चूत चाटी और हमें मजे दिए, और बिना हमसे मिले, कोई बात करे, कमरे से चले गए...अपनी service देकर.."

"मैं तो डर ही गयी थी...पर जब तुम्हारी चूत पर किसी की चूत का एहसास हो तो कुछ सोचने - समझने की शक्ति ही नहीं रहती.
मैं तो सब कुछ भूलकर बस चूत चटवाने में खो गयी थी." पूजा ने हँसते हुए कहा.

"क्या तुम्हे मेरे भाई ला लंड चूसने में मजा आया" ऋतू ने उससे पूछा.

"हाँ...बहुत मजा आया"

"क्या तुम्हे लगता है की तुम्हारी कोई फ्रेंड भी अपनी चूत चुस्वाना चाहती है" उसने आगे कहा.

"तुम्हारा मतलब क्या है ??"

"मेरा मतलब, की अगर तुम अपनी फ्रिएंड्स को भी यहाँ ले आओ जो ये सब मजे लेना चाहती है तो मेरा भाई और उसके दोस्त ये सब कर सकते हैं, और अगर तुम चाहो तो हम उनसे चार्ज भी कर सकते है, फिर और भी मजा आएगा." ऋतू ने सब डिटेल में बताया.

"हाँ...मेरी कई सहेलियां हैं जो अपनी चूत चुस्वाना चाहती हैं उन्हें ऐसे मौके मिलते नहीं और वो दुनिया के डर से खुद ही एक दुसरे की चूत चाटती रहती है, मैं भी कई बार उनके साथ ये सब कर चुकी हूँ." उसने आगे से कहा.

"तो ठीक है तुम उन सबसे बात करना और फिर हम देखेंगे की आगे क्या करना है" ऋतू ने पूजा को कहा

और फिर दोनों मम्मी पापा के आने से पहले कपडे पहन कर तैयार हो गए और पड़ने बैठ गए.
*-*
आगे सलीम खान ने ऐड किया है
*-*
मैं ऋतू के कमरे में उसे चोद रहा था.

आआआआआआआआआआआआआअह
chooooooooooooooooooooooodoooooooooooooooooo
mujheeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeeee
mmmmmmmmmmmmmmmmmmm
दाआआआआआआआआआआलो हाँ हाँ हाँ हाआआआआअन
mmmmmmmmmmmmmmma

ऋतू मेरे लंड पर बैठी तरह -२ की आवाजें निकाल रही थी, मैं खाना खाने के बाद सीधा उसके रूम में आ गया, पूजा शाम को ही जा चुकी थी,
मैं अंदर घुसा तो वो दरवाजे के पीछे छुपी हुई थी और मुझे पीछे से पकड़ कर मेरी पड्डी चढ़ गयी और मुझे पीछे से चूमने लगी,
मेरे हाथ पीछे गए तो पाया की वो बिलकुल नंगी है मैंने उसे बेड पर लेजाकर पटक दिया वो मुझे कामुक निगाहों से देखते हुए एक हाथ अपनी चूत में डालकर अपना रस चाटने लगी...
मैंने अपने कपडे उतारने शुरू किये और कुछ ही देर में बिलकुल नंगा उसके सामने खड़ा हो गया,
मैंने कोई देर किये बिना उसकी रसीली चूत के स्विमिंग पूल में छलांग लगा दी और उसने मेरे कूदते ही अपनी टांगें मेरी कमर से लपेट ली....

माआआआआअर दाआआआआअलाआआअ ......mmmssssssssss

उसकी वेलवेट जैसी चूत मेरे लैंड को लपेटे हुए थी....आज वो कुछ ज्यादा ही उत्तेजित थी.

साआआअल बड़े मजे ले रहाआआअ था .......म्म्म्मम्स्स्स
वो हाँफते हुए मुझे गाली देती हुई बोली, वो शायद दोपहर वाली बात कर रही थी...

तुम्हारी सहेली है ही इतनी पत्तखाआआआ ..

वो जल उठी और मुझे नीचे धक्का देकर मेरे ऊपर आ गयी और जोर जोर से मेरे लंड के ऊपर कूदने लगी,
मेरा लंड उसकी चूत से बिलकुल बाहर आ रहा था और फिर वो हर बार अन्दर भी जा रहा था, बड़े लम्बे धक्के ले रही थी,
इस तरह से मेरा लंड उसकी चूत के अन्दर तक जा रहा था, मेरे लंड के ऊपर का ये pressure मैं बर्दाश्त नहीं कर पाया और मेरे मुंह से उह्ह्ह आआआह की आवाजें निकलने लगी,
वो पहचान गयी और हर बार की तरह हटी और मेरा लंड मुंह में लेकर मेरा सारा माल हड़प कर गयी, फिर उसने अपनी गीली चूत मेरे मुंह पर रख दी और मैंने भी अपना पेट उसके रस से भर लिया.

उसके बाद वो नंगे एक दुसरे की बाँहों में पड़े रहे और आगे की योजना बनाने लगे.

अगले दिन शाम को ऋतू ने बताया की पूजा की 4 सहेलियां तैयार हो गयी हैं अपनी चूत चटवाने के लिए और वो इसके लिए दो-दो हजार रूपए देने को भी तैयार हैं.

हमने अगले दिन ४ बजे का टाइम फिक्स किया...उस रात मुझे सोने में बहुत परेशानी हुई अगले दिन के बारे में सोच-सोचकर..

अगले दिन मैं उनका इन्तजार करने लगा, जब मैंने उनके आने की आवाजें सुनी तो छेद से देखा, ऋतू और पूजा के साथ उनकी 4 और सहेलियां आई हुई थी, १ लड़की को तो मैं भी जानता था, वो ऋतू के बर्थडे पर पहले भी घर आई हुई थी, वो देखने में बिलकुल सीधी-साधी लगती थी पर उसके नैन नक्श बहुत तीखे थे, दूसरी लड़की काफी मोटी थी, उसकी कमर फैली हुई और छाती भरी हुई थी, तीसरी उससे बिलकुल विपरीत दुबली पतली और चुचे ना के बराबर,पर उसके कुल्हे काफी भरे हुए और गुदाज दिख रहे थे, और चोथी लड़की को तो मैं देखता ही रह गया, वो बिलकुल कटरीना कैफ जैसी दिख रही थी, same हेयर स्टाइल वैसा ही हंसमुख और लम्बा चेहरा, भरे हुए दूध के ग्लास और पतली कमर के नीचे मोटे-मोटे गद्देदार चूतड..कुल मिलकर वो सेक्स बोम्ब लग रही थी, वो अन्दर आते ही धीरे-२ अपने कपडे निकाल कर नंगे हो गए और बेड पर लाइन से अपनी चूत को उभार कर लेट गए, ऋतू ने उनसे कुछ कहा और बाहर निकल गयी,

फिर मेरे रूम में आई और बोली..."चल मेरे शेर, तेरे जलवे दिखाने का टाइम आ गया है....
"मैं नंगा खड़ा था, वो आगे आई और मेरा लंड पकड़कर मुझे अपने रूम में ले गयी और अपनी नंगी सहेलियों के सामने लेजाकर खड़ा कर दिया.

मैंने इतना सुन्दर दृश्य कभी नहीं देखा था, पूजा साइड में नंगी खड़ी थी, बाकी 4 लडकियां पूरी तरह से नंगी हुई आधी बेड पर लेटी हुई थी,
उनकी नजरें मेरे लंड को घुर रही थी, मैंने पहली लड़की को देखा, वो मोटी वाली थी, मैं झुका और उसकी टांगों पर हाथ रखकर उन्हें ऊपर उठाया और उसे पीछे की तरफ धक्का दिया,
वो लेट गयी और अपनी टंगे ऊपर हवा में उठा दी, मैंने अपनी जीभ निकाली और सीधे उसकी चूत पर लगा दी, उसके मुंह से एक सिसकारी निकल गयी उसकी चूत काफी गरम थी,
बिलकुल tight और छोटे-२ बाल भी थे, मैंने उसे चुसना और चाटना शुरू कर दिया, वो बिस्तर पर मचलने लगी और अपने चूतड उठा -२ कर मेरे मुंह में अपनी चूत मारने लगी..
जल्दी ही वो झड़ने लगी और मेरे मुंह में उसका गरमा गरम रस आ गया और मैंने सारा पी डाला...बुरा नहीं था.

दूसरी वो कटरीना कैफ थी, मैंने उसकी चूत को ध्यान से देखा ..बिलकुल चिकनी , बिना बाल की, लगता था आज ही उसने सफाई की हो..
वो मुझे देख कर मुस्कुरा रही थी, उसके चुचे एकदम कड़क और उठे हुए थे, मैंने एक हाथ उसके कड़क चुचे पर रखा,
दूसरा उसकी गांड पर रखकर उसे थोडा उठाया और उसकी आँखों में देखते हुए अपने होंठ उसकी चूत के होंठों से जोड़ दिए,
और उन्हें फ्रेंच किस करने लगा, वो सिहर उठी और मेरे गालों पर हाथ फेरते हुए अपने चुचे को दबाने लगी .....


aaaaaaaaaaaaaaaahhhhhh मैंने चाटना जारी रखा...मैंने नजर घुमाई दो पाया की बाकी सभी लडकियां, पूजा और ऋतू भी,
अपना मुंह फाड़े मुझे चूत चाटते हुए देख रहे थे और उनका एक हाथ अपनी -२ चूत पर था, मैंने अपना ध्यान वापिस कटरीना पर लगाया और उसे जोर से सक करने लगा,
वो चीखती रही और एक लम्बी सिसकारी के साथ मेरे मुंह पर झड़ने लगी, फिर मैं उठा और अपने अगले शिकार के सामने बैठ गया.

वो दुबली -पतली लड़की थी, जैसा मैंने कहा था, उसके सीने पर कोई भी उभार नहीं था, पर उसके निप्पल्स इतने बड़े थे की मेरे हाथ खुद बा खुद उनके ऊपर जा टिके और मैंने उन्हें मसल दिया,
वो चिहुंक उठी और मेरा मुंह पकड़ कर अपनी चूत पर दबा दिया, मैं तो उसकी चूत का चेहरा भी नहीं देख पाया था, पर उसकी उत्तेजना के आगे मैं कुछ न कर पाया और मैं उसे चाटने में लग गया,
उसका स्वाद बड़ा मीठा था, मुझे काफी मजा आ रहा था, वो भी जल्दी ही झड गयी और मुझे अपना अमृत पीला कर हांफने लगी.

लास्ट में बची लड़की की निगाहें जब मुझसे मिली तो वो होले से मुस्कुरा दी और पीछे सर करके लेट गयी, मैंने देखा उसकी चूत पर घने बाल थे,
मैंने अपनी उँगलियों से उसकी काली-२ झाटें साइड करी और उसकी पिंक चूत को बाहर निकाला, मैंने इतने बाल चूत पर आज तक नहीं देखे थे.
खैर..मुझे क्या, सबकी अपनी-२ पसंद होती है...मैंने अपनी जीभ निकाली और उसे भी
चूस -२ कर झाड दिया.

मैं उठ खड़ा हुआ, मेरा पूरा मुंह गीला था और उसपर सभी लड़कियों का मिला जुला रस लगा हुआ था.

वो चारों अपनी चूत फैलाये अपने ओर्गास्म का आनंद लेते हुए ऑंखें बंद किये, गहरी सांसें लेती हुई, पड़ी हुई थी.

"और अगर तुम चाहो तो इसका भी आनंद ले सकती हो...." ऋतू ने मेरे खड़े हुए लंड को अपने हाथों में लेकर कहा.

"पूजा, जरा दिखाओ तो इनको की ये कितना मजा देता है.." ऋतू ने पूजा की तरफ देखते हुए कहा.

पूजा अपनी मोटी गांड मटकती हुई , नंगी मेरे सामने आकर बैठ गयी और मेरी आँखों में देखते हुए मेरे लंड को पकड़कर अपने मुंह में लेकर lollypop की तरह चूसने लगी.
मेरी ऑंखें बंद होने लगी और मैं खड़ा हुआ पूजा से चुस्वाने में लगा रहा, वो बड़े प्यार से मेरे लंड को अन्दर ले रही थी, जीभ से सहला रही थी और अपने होठों से चूस रही थी, बाकी सभी लडकियां उठी और गौर से हमें देखने लगी.

मैं जल्दी ही झड़ने के करीब पहुँच गया, पूजा ने मेरे लंड को पूरा बाहर निकाला और अपना मुंह खोलकर , लंड को जोर से हिलाने लगी.

मेरे लंड ने पिचकारी मारनी चुरू कर दी और अपने सामने बैठी पूजा के मुंह पर, आँखों पर, माथे पर, नाक पर निशाने लगा-२ कर , उसका सांवला चेहरा, अपने सफ़ेद वीर्य से भिगो दिया, वो अपने मुंह में आये रस को पी गयी और फिर अपने चेहरे पर लगे हुए वीर्य को भी अपने हाथों से इकठ्ठा करके चाट गयी.

"अगर तुममे से कोई भी मेरे भाई का लंड चुसना चाहता है तो मुझे बता देना...पर अभी तुम सब कपडे पहनो और जाओ यहाँ से, मेरे मम्मी पापा आने ही वाले है." ऋतू ने सभी लड़कियों से कहा.

मैं भी जल्दी से अपने रूम में आ गया और बेड पर नंगा लेट गया, बिलकुल संतुष्ट, आज मैंने चार लड़कियों की चूत चाटी थी और पूजा ने मेरा लंड भी चूसा था, और साथ ही साथ आठ हजार रूपए भी कमाए थे..

अगले दिन, जैसा मैंने सोचा था, उन सभी लड़कियों ने आकर मेरा लंड एक-एक करके चूसा और मेरा वीर्य भी पिया, इसके लिए हमने अलग से दो - दो हजार रूपए चार्ज किये, फिर मैंने उनकी चूत भी चाटी, और हर रोज़ की तरह रात को ऋतू की चूत भी मारी.

अगले एक महीने तक हमने तरह -२ से, कभी मेरे दोस्तों ने ऋतू की चूत चाटकर और कभी मैंने ऋतू की सहेलियों की चूत चाटकर और अपना लंड चुस्वाकर लगभग २ लाख रूपए जमा कर लिए...

अब छुट्टियों पर जाने का टाइम आ गया था, हमारे पास काफी पैसे जमा हो चुके थे, इसलिए अब हम एन्जॉय करना चाहते थे, और जल्दी ही वो दिन भी आ गया जब हम सब एक साथ अपनी कार में बैठे और जंगल कैंप की तरफ निकल पड़े.


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दोस्तों मुझे सेक्स से बहुत ही प्यार है आजो और सेक्स का मज़ा ले लो

Last edited by saleemkhan12 : 11th August 2014 at 01:38 PM.

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  #9  
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हम सब कार में बैठ कर केम्प की तरफ चल दिए , हम सब बड़े exited थे, वहां तक का सफ़र ६ घंटे का था, काफी भीड़ थी वहां, पहाड़ी इलाका था, सभी कारें लाइन में अन्दर जा रही थी, पापा ने गेट से अपने केबिन की चाबी ली और हम आगे चल पड़े, पापा ने बताया की उनके अजय की फॅमिली भी उनके साथ उसी केबिन में रहेगी , वो हमेशा उनके साथ 2 बेडरूम वाले केबिन में ही रहते थे, इस बार हमारी वजह से पापा ने 3 बेडरूम वाला केबिन लिया था, हम अन्दर पहुंचे तो मैं वहां का मैनेजमेंट देख कर हैरान रह गया, एक छोटी पहाड़ी पर बने इस जंगल केम्प में तक़रीबन 90 -100 केबिन बने हुए थे, काफी साफ़ सफाई थी, हर केबिन एक दुसरे से काफी दूर था, इनमे 1 ,2 ,3 बेडरूम वाले कमरे थे, बीच में एक काफी बड़ा stage था, जिसमे शायद मनोरंजन के प्रोग्राम और bon fire आदि होते थे, पहाड़ी इलाके की वजह से काफी ठंड थी, हम अपने काबिन पहुंचे, वहां पहले से ही अजय चाचा की फॅमिली बैठी थी, चाचा की उम्र तक़रीबन ४० के आसपास थी, कान के ऊपर के बाल हलके सफ़ेद थे, गठीला शरीर और घनी मूंछे, उनकी wife आरती की उम्र तकरीबन 36 -37 के आसपास थी, वो काफी भरे हुए शरीर की औरत थी, काफी लम्बी, अपने husband की तरह, इसलिए मोटी नहीं लग रही थी, साथ ही हमारी cousin सिस्टर 18 साल की नेहा भी थी, वो शारीर से तो काफी जवान दिख रही थी पर जब बातें करी तो पाया की उसमे अभी तक काफी बचपना है.!


हम सबने एक दुसरे को विश किया और अन्दर आ गए, पापा ने पहला रूम लिया दूसरा अजय अंकल ने..
पापा ने मुझे और ऋतू से कहा की तीसरा रूम हमें एक साथ शेयर करना पड़ेगा क्योंकि वहां इससे बड़ा कोई केबिन नहीं था,
मैंने मासूमियत से कहा.."नो प्रॉब्लम डैड, हम manage कर लेंगे " और ऋतू की तरफ देख कर आँख मार दी.


हम सबने अपने सूटकेस खोले और कपडे change करके बाहर आ गए, शाम हो चुकी थी ,
बड़े stage के चारों तरफ खाने का इंतजाम किया गया था, हर तरह का खाना था, हमारा ग्रुप आया हमने पेट भरकर खाना खाया और मैं ऋतू को लेकर टहलने के लिए निकल गया,
मम्मी पापा, और अजय अंकल की फॅमिली वहीँ अपने दुसरे दोस्तों से बातें करने में व्यस्त थे.


हमने पूरा इलाका अच्छी तरह से देखा, ठंड बड़ रही थी,
इसलिए हम वापिस केबिन की तरफ चल दिए, आये तो पाया की वो सब भी अन्दर आ चुके हैं, और ड्राइंग रूम में बैठे बीयर पी रहे हैं. मैंने पहली बार मम्मी को भी पीते हुए देखा, पर उन्होंने ऐसा शो किया की ये सब नोर्मल है.
हम सभी वहीँ थोड़ी देर तक बैठे रहे और बातें करते रहे,पापा ने हमें बताया की नेहा भी हमारे रूम में रहेगी, दोनों लडकियां एक बेड पर और मैं एक्स्ट्रा बेड पर सो जाऊंगा, हमने कोई reaction नहीं दिया, नेहा पहले ही जाकर हमारे रूम में सो चुकी थी, फिर तक़रीबन एक घंटे बाद सबको नींद आने लगी और सभी एक दुसरे को good night करके अपने-२ रूम में चले गए, रास्ते में मैंने ऋतू से नेहा के बारे में विचार जानने चाहे तो उसने कहा..."बच्ची है...देख लेंगे." और हंसने लगी.

अपने रूम में जाकर मैंने ऋतू से कहा "मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा की इन्होने हमें एक ही रूम में सोने के लिए कहा है , इससे बेहतर तो कुछ हो ही नहीं सकता था"

ऋतू : "हाँ...सच कह रहे हो, हम अब एक दुसरे के साथ पूरी रात ऐश कर सकते हैं"

मैं : "पर इसका क्या करें ?" मैंने नेहा की तरफ इशारा करके कहा.

"देख लेंगे इसको भी...पर पहले तो तुम मेरी प्यास बुझाओ..." और वो उछल कर मेरी गोद में चढ़ गयी और अपनी टांगे मेरी कमर के चारो तरफ लिपटा ली और मेरे होंठो पर अपने सुलगते हुए होंठ रख दिए...मैंने अपना सर पीछे की तरफ झुका दिया और उसके गद्देदार चूतडों पर अपने हाथ रखकर उसे उठा लिया, ऋतू की गरम जीभ मेरे मुंह के अन्दर घुस गयी और मुझे आइसक्रीम की तरह चूसने लगी, मैंने उसके नीचे के होंठ अपने दांतों के बीच फ़सा लिए और उन्हें चूसने और काटने लगा,...आज हम काफी उत्तेजित थे, मैंने एक नजर नेहा की तरफ देखा , वो बेखबर सो रही थी, मैंने दरवाजा पहले ही बंद कर दिया था, मैं ऋतू को किस करता हुआ बेड की तरफ गया और पीठ के बल लेट गया, नेहा एक कोने में उसी बेड पर सो रही थी, हमारे पास काफी जगह थी, मैंने अपने हाथ बढाकर ऋतू के मुम्मो पर रख दिए..वो कराह उठी.

आआआआआअह ......mmmmmmmmmmmmmm .......दबऊऊऊऊऊऊऊऊऊओ इन्हीईईईई .........aaaaaaaaaahhhhh

मैंने उसकी टी शर्ट उतार दी, उसके ब्रा में कैद चुचे मेरी आँखों के सामने झूल गए, मैंने उन्हें ब्रा के ऊपर से ही दबाया, काली ब्रा में गोरी चूचियां गजब लग रही थी, मैंने गौर से देखा तो उसके निप्पलस ब्रा में से भी उभर कर दिखाई दे रहे थे, मैंने अपने दांत वहीँ पर गड़ा दिए और उसका मोती जैसा निप्पल मेरे मुंह में आ गया, ऋतू ने हाथ पीछे लेजाकर अपनी ब्रा भी खोल दी, वो ढलक कर झूल गयी, मैंने अपना मुंह फिर भी नहीं हटाया, अब उसकी झूलती हुई ब्रा और निप्पल पर मैं मुंह लगाए बैठा था, ऋतू की आँखें उन्माद के मारे बंद हो चुकी थी उसने मेरा मुंह अपनी छाती पर दबा डाला...मेरे मुंह में आने की वजह से उसकी ब्रा भी गीली हो चुकी थी, गीलेपन की वजह से ऋतू के शारीर में एक अजीब सी सिहरन दौड़ गयी, उसने मेरे मुंह को जबरदस्ती हटाया और बीच में से ब्रा को हटाकर फिर से अपना चुचा पकड़कर मेरे मुंह में ठूस दिया, जैसे एक माँ अपने बच्चे को दूध पिलाते हुए करती है, वैसे ही उसने अपना निप्पल मेरे मुंह में दाल दिया , मैंने और तेजी से उन्हें चुसना और काटना शुरू कर दिया..

मैंने एक हाथ नीचे किया और पलक झपकते ही उसकी जींस के बटन खोल कर उसे नीचे खिसका दिया, जींस के साथ-२ उसकी पेंटी भी उतर गयी और उसकी चूत की खुशबू पुरे कमरे में फैल गयी, मैंने अपनी एक ऊँगली उसकी चूत में डाल दो, वो ऐसे अन्दर गयी जैसे मक्खन में गर्म छुरी...वो मचल उठी और उसने अपने होंठ फिर से मेरे होंठो पर रख दिए और चूसने लगी, एक हाथ से वो मेरी जींस को उतारने की कोशिश करने लगी, मैंने उसका साथ दिया और बेल्ट खोलकर बटन खोले, वो किसी पागल शेरनी की तरह उठी और बेड से नीचे उतर कर कड़ी हो गयी, अपनी जींस पूरी तरह से उतारी, मेरी जींस को नीचे से पकड़ा और बाहर निकाल फेंका, मेरा लंड स्प्रिंग की तरह बाहर आकर खड़ा हो गया, वो नीचे झुकी और मेरा पूरा लंड निगल गयी और चूसने लगी, उसकी व्याकुलता लंड को चूसते ही बनती थी, मैंने उसकी कमर पकड़ी और उसे अपनी तरफ घुमा कर 69 की अवस्था में लिटा लिया, मेरा मुंह उसके रस से भर गया, उसका एक ओर्गास्म हो चूका था, मैंने करीब 15 मिनट तक उसकी चूत चाटी, मैं भी झड़ने के करीब था, पर मैं पहले उसकी चूत का मजा लेना चाहता था, मैंने उसे फिर से घुमाया और अपनी तरफ कर के उसकी गीली चूत में अपना मोटा लंड दाल दिया,.....वो चिल्लाई...आआआआआआआअय्य्य्यीईईइ ......चूत काफी गीली थी पर उसके tight होने की वजह से अभी भी अन्दर जाने में उसे तकलीफ होती थी...पर मीठी वाली.

मैंने नीचे से धक्के लगाने शुरू किये, उसकी चूचियां मेरे मुंह के आगे उछल रही थी किसी बड़ी गेंद की तरह, मैं हर झटके के साथ उसके निप्प्लेस को अपने मुंह में लेने की कोशिश करने लगा अंत में जैसे ही उसका निप्पल मेरे मुंह में आया...वो झटके दे-देकर झड़ने लगी...और मेरे दाई तरफ लुडक गयी, मैंने अपना लंड निकाला और अब उसके ऊपर आ गया और फिर अन्दर डालकर उसे चोदने लगा...मैंने नोट किया की इस तरह से स्टॉप एंड स्टार्ट तकनीक का सहारा लेकर आज मेरा लंड काफी आगे तक निकल गया... मैंने करीब 5 मिनट तक उसे इसी अवस्था में चोदा, वो एक बार और झड गयी, मैं भी झड़ने वाला था, मैंने जैसे ही अपना लंड बाहर निकालना चाहा उसने मुझे रोक दिया और अपनी टांगें मेरी कमर के चारो तरफ लपेट दी और बोली..."आज अन्दर ही करदो...." मैं हैरान रह गया पर इससे पहले की मैं कुछ पूछ पाता, मेरे लंड ने पानी उगलना शुरू कर दिया, उसकी ऑंखें बंद हो गयी और चेहरे पर एक अजीब तरह का सकूँ फ़ैल गया, मैंने भी मौके की नजाकत को समझते हुए पुरे मजे लिए और उसकी चूत के अन्दर अपना वीर्य खाली कर दिया, और उसके ऊपर लुडक गया, उसकी टांगे अभी भी मुझे लपेटे हुए थी, मैंने अपने आप को ढीला छोड़ दिया, मेरा हाथ बगल में सो रही cousin सिस्टर नेहा से जा टकराया, मैंने सर उठा कर देखा तो वो अभी भी सो रही थी, और काफी मासूम से लग रही थी, ना जाने मेरे मन में क्या आया, मैंने अपना एक हाथ बड़ा कर उसके चुचे पर रख दिया, वैसे तो वो सिर्फ ** साल की थी पर उसके उभार काफी बड़े थे, मुझे ऐसे लगा कोई रुई का गुबार हो, मैंने नोट किया की उसने ब्रा नहीं पहनी थी ये महसूस करते ही मेरे लंड ने ऋतू की चूत में पड़े-पड़े एक अंगडाई ली, मेरे नीचे मेरी नंगी बहन पड़ी थी और मैं पास में सो रही cousin सिस्टर नेहा के चुचे मसल रहा था.......
मैं उठा और बाथरूम में जाकर फ्रेश हो गया, ऋतू भी मेरे पीछे आ गयी और मेरे सामने नंगी पोट पर बैठ कर मुतने लगी, वो मुझे लंड साफ़ करते हुए देखकर होले -२ मुस्कुरा रही थी, मैंने टॉवेल से लंड साफ़ किया और बाहर आ गया, मैंने अपनी शोर्ट्स पहनी, टी शर्ट उठाई और पहनकर दीवार पर लगे छोटे से शीशे के आगे आकर अपना चेहरा साफ़ करने लगा, शीशा थोडा छोटा और गन्दा था, मैं थोडा आगे हुआ और अपने हाथ से उसे साफ़ करने लगा, मेरे हाथ के दबाव की वजह से वो हिल गया और उसका कील निकल कर गिर गया, मैंने शीशे को हवा में लपककर गिरने से बचाया, मैंने देखा देखा शीशे वाली जगह पर एक छोटा सा होल है, मैं आगे आया और गौर से देखने पर मालूम चला की दूसरी तरफ भी एक शीशा लगा हुआ है पर शीशे के उलटी तरफ से देखने की वजह से वो पारदर्शी हो गया था , और इस वजह से मैं दुसरे कमरे में देख पा रहा था, वो कमरा अजय चाचा का था. वो खड़े हुए अपनी बीयर पी रहे थे.

अब तक ऋतू भी बाथरूम से वापिस आ चुकी थी, और कपडे पहन रही थी, मैंने उसे इशारे से अपनी तरफ बुलाया, वो आई और मैंने उसे वो शीशे वाली जगह दिखाई, वो चोंक गयी और जब सारा माजरा समझ आया तो हैरानी से बोली..."ये तो चाचा का कमरा है ..क्या वो हमें देख पा रहे होंगे."

मैं :"नहीं, ये शीशे एक तरफ से देखने वाले और दूसरी तरफ से पारदर्शी है...ये देखो" और मैंने उसे अपने रूम का शीशा दोनों तरफ से दिखाया.

उसके चेहरे के भाव बदलते देर नहीं लगी और उसके चेहरे पर एक शरारती मुस्कान तैर गयी और बोली..."ह्म्म्म तो अब तुम अपनी बहन के बाद चाचा के कमरे की भी जासूसी करोगे...."

"चोरी छुपे देखने का अपना ही मजा है" मैंने कहा!!

वो हंस पड़ी और हम दुसरे कमरे में देखने लगे.

अब चाचा बेड के किनारे पर खड़े हुए अपने कपडे उतार रहे थे, उन्होंने अपनी शर्ट और पैंट उतार दी और सिर्फ underwear में ही बैठ गए, आरती चाची बाथरूम से निकली और चाचा के सामने आकर खड़ी हो गयी, उन्होंने night gown पहन रखा था, अजय ने अपना मुंह चाची के गुदाज पेट पर रगड़ दिया और उसके gown की गाँठ खोल दी, चाची ने बाकी बचा काम खुद किया और gown को कंधे से गिरा दिया, नीचे उसने सिर्फ पेंटी पहन राखी थी, चाची के मोटे-२ चुचे बिलकुल नंगे थे और अजय के सर से टकरा रहे थे, मैंने इतने बड़े चुचे पहली बार देखे थे..मेरे मुंह से WOW निकल गया.

ऋतू जो मेरे आगे खड़ी हुई थी उसने मेरी तरफ देखा और मुस्कुरा दी....और बोली "वाह...आरती आंटी की ब्रेस्ट कितनी बड़ी और सुंदर है..तुम्हारी तो favourite चीज है न इतनी बड़ी चूचियां..है ना ??" मैंने सिर्फ हम्म्म्म कहा और दोबारा वोहीं देखने लगा.

मेरा लंड अब फिर से खड़ा हो रहा था और ऋतू की गांड से टकरा रहा था.

अजय ने आरती की कच्छी भी उतार दी और उसे पूरा नंगा कर दिया...क्या चीज है यार...मैंने मन ही मन कहा, चाची का पूरा शरीर अब मेरे सामने नंगा था, उसकी बड़ी-२ गांड, हलके बालों वाली चूत और बड़ी-२ चूचियां देखकर मेरा इस कमरे में बुरा हाल था, अजय ने ऊपर मुंह उठाकर चाची का एक चुचा मुंह में ले लिया और उसे चबाने लगा, चूस वो रहा था और पानी मेरे मुंह में आ रहा था.

चाची थोड़ी देर तक अपने चुचे अजय से चुसवाती रही और खड़ी हुई मचलती रही, फिर उसने अजय को धक्का देकर लिटा दिया और उसका underwear एक झटके से निकाल फैंका, उसका लंड देखकर अब ऋतू के मुंह से wow निकला...वो काफी बड़ा था, मेरे लंड से भी बड़ा और मोटा, काले रंग का था, उसकी नसे चमक रही थी, चाची ने अजय का लंड अपने मुंह में डाला और उसे चूसने लगी, अजय ने अपनी ऑंखें बंद कर ली और मजे लेने लगा, आरती के मोटे-२ चुचे झटको से ऊपर नीचे हो रहे थे, आधी बैठने की वजह से उसकी गांड बाहर की तरफ उभर कर काफी दिलकश लग रही थी...मैं तो उसके भरे हुए बदन का दीवाना हो गया था.

अचानक अजय के रूम का दरवाजा खुला और मेरी माँ कमरे में दाखिल हुई, मैं उन्हें एकदम देखकर हैरान रह गया, उन्होंने night gown पहन रखा था, पर उन्हें आरती को अजय का लंड चूसते देखकर कोई हैरानी नहीं हुई, आरती ने सर उठा कर माँ को देखा तो वो भी बिना किसी हैरानी के उन्हें देखकर मुस्कुरा दी और फिर से लंड चूसने में लग गयी.

जितना हैरान मैं था, उतनी ही ऋतू भी, वो मुंह फाड़े उधर देख रही थी, और फिर हैरानी भरी आँखों से मेरी तरफ देखा और आँखों से पूछा ये क्या हो रहा है ...मैंने अपने कंधे उचका दिए और सर हिला दिया ...मुझे नहीं मालुम कहने के स्टाइल में...

हमने वापिस अन्दर देखा, माँ अब बेड पर जाकर उनके पास बैठ गयी थी, वो दोनों अपने काम में लगे हुए थे और हमारी माँ, चाची को अजय चाचा का लंड चूसते हुए देख रही थी...मेरा तो दिमाग चकरा रहा था, की ये सब हो क्या रहा है.

अब अजय उठा और मेरी माँ को देखकर मुस्कुराते हुए घूमकर नीचे बैठ गया और आरती को अपनी वाली जगह पर वैसे ही लिटा दिया, मेरी माँ ने भी अजय को निहारा और एक seductive सी स्माइल दी , चाचा ने अपना मुंह आरती की सुलगती हुई चूत पर लगा दिया...


आआआआआआआआआआआआआअह्ह्ह..म्मम्मम्मम्म ......आआआआआआआह्ह्ह


पूरा कमरा चाची की गरम आह से गूंज उठा...मेरी माँ आगे आई और बेड पर आधी लेट गयी और अपने हाथ से चाची के बालों को सहलाने लगी, अजय पूरी तन्मन्यता से चाची की चूत चाट रहा था, अचानक उन्होंने एक हाथ बढाकर मेरी माँ के gown में डाल दिया, मेरी हैरानी की कोई सीमा न रही जब मेरी माँ ने अजय को रोकने के बजाय अपनी टाँगे थोड़ी और चोडी कर ली और अजय के हाथ को अपनी चूत तक पहुचने में मदद की....मैं ये देखकर सुन्न रह गया.

मेरी माँ पूर्णिमा अब चाची के बगल में उसी अवस्था में लेट गयी और अपनी ऑंखें बंद कर ली.

और फिर उन्होंने अपने gown को खोला और अपने सर के ऊपर से घुमा कर उतार दिया और अब वो भी चाची की तरह बेड पर उनकी बगल में नंगी लेती हुई थी.

मैंने पहली बार अपनी माँ को नंगा देखा था.

मैं उनके बदन को देखता रह गया, अब समझ आ रहा था की ऋतू किसपर गयी है, साफ़ सुथरा रंग, मोटे और गोल गोल चुचे, ऋतू से थोड़े बड़े पर आरती से छोटे, और उनपर पिंक कलर के निप्पल्स, अलग ही चमक रहे थे.

उनका सपाट पेट, जिसपर ऑपरेशन के हलके मार्क्स थे, और उसके नीचे उनकी बिलकुल साफ़ और चिकनी बिला बालों वाली चूत.

हालांकि हम दुसरे कमरे में थे पर उनकी चूत की बनावट काफी साफ़ दिखाई दे रही थी.

मेरा तो लंड खड़ा हो कर फुप्कारने लगा. जो ऋतू की गांड ने महसूस किया. उसने अपनी गांड का दबाव पीछे करके मेरे लंड को और भड़का दिया.

अजय अपनी पत्नी की चूत चाट रहा था और अपनी भाभी की चूत में अपनी उंगलियाँ डालकर उन्हें मजा दे रहा था, पुरे कमरे में दो औरतों की हलकी-२ सिस्कारियां गूंज रही थी.

फिर अजय ने अपना चूत में भीगा हुआ सर उठाया और अपनी भाभी की चूत पर टिका दिया.

वो एकदम उछल पड़ी और अपनी ऑंखें खोलकर अजय को देखा और उसके सर के बाल हलके से पकड़ कर उसे अपनी चूत में दबाने लगी. अजय दुसरे हाथ से चाची की चूत को मजा दे रहा था.

मुझे और ऋतू को विश्वास नहीं हो रहा था की हमारी माँ इस तरह की हो सकती है, मेरे मन में ख्याल आया की पता नहीं पापा को इसके बारे में कुछ मालुम है के नहीं की उनकी बीबी उन्हीके छोटे भाई के साथ मस्ती कर रही है और अपनी चूत चटवा रही है.

पुरे कमरे में सेक्स की हवा फैली हुई थी.
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मैंने घडी की तरफ देखा, रात के 11 :30 बज रहे थे, नेहा सो रही थी, मैं और ऋतू अजय चाचा के रूम में बीच से बने रोशनदान से देख रहे थे, और हमारी माँ अपने देवर अजय और देवरानी आरती के साथ नंगी पलंग पर लेती मजे ले रही थी.


मेरा दिमाग सिर्फ ये सोचने में लगा हुआ था की मम्मी ये सब अजय चाचा के साथ कब से कर रही है, चाची को इससे कोई परेशानी क्यों नहीं है, और पापा को क्या इस बारे में कुछ भी मालुम नहीं है ?


पर मुझे मेरे मेरे सभी सवालों का जवाब जल्दी ही मिल गया.


पापा कमरे में दाखिल हुए, बिलकुल नंगे..उनका लंड खड़ा हुआ था और वो सीधे बेड के पास आये और नंगी लेती हुई आरती चाची की चूत में अपना लंड पेल दिया..


मेरी और ऋतू की हैरानी की सीमा न रही.


उनका लंड अपने छोटे भाई की पत्नी जो बहु के सामान होती है की चूत मैं अन्दर बाहर हो रहा था.


अब मुझे सब समझ आ रहा था, ये लोग हर साल यहाँ इकठ्ठा होते हैं और ओर्गी करते है, एक दुसरे की बीबी और पति से मजा लेते हैं, मैंने wife /husband स्वेपिंग के बारे में और ग्रुप सेक्स के बारे में सुना था, आज देख भी रहा था, पर मैंने ये कभी नहीं सोचा था की मैं ये सब अपने ही परिवार के साथ होते हुए देखूंगा.


मेरा लंड ये सब देखकर अकड़ कर दर्द करने लगा था, मैंने अपनी शोर्ट्स गिरा दी और अपने लंड को हाथों में लेकर, माँ की चूत पर अजय चाचा का चेहरा देखकर, हिलाने लगा.


उधर ऋतू के तो होश ही उड़ गए थे, अपने पापा का लम्बा, गोरा और जानदार लंड देखकर...पर जल्दी ही वो भी सब कुछ समझते हुए , हालात के मजे लेने लगी थी और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर जा लगा और दूसरा हाथ घुमा कर मेरे लंड को पीछे से पकड़ लिया और मेरे से और ज्यादा चिपक गयी..


म्मम्म......आशु देखो तो जरा, पापा का लंड कितना शानदार है....


वो था भी शानदार, चाचा के लंड जितना ही बड़ा .....पर गोरा चिट्टा.


चाची की चूत में मेरे पापा का लंड जाते ही वो गांड उछाल -२ कर चुदवाने लगी, पापा ने अपने हाथ उसके मोटे-२ चूचो पर टिका दिए और मसलने लगे, फिर थोडा झुके और उनके दायें चुचे पर अपने होंठ टिका दिए....मेरे आगे खड़ी ऋतू ऐसे behave कर रही थी जैसे पापा वो सब उसके साथ कर रहे है, क्योंकि वो उनके rytham के साथ-२ अपनी गांड आगे पीछे कर रही थी और पापा द्वारा चाची के चुचे पर मुंह लगते ही वो भी सिहर उठी और अपनी चूत से हाथ हटाकर अपने निप्प्ल्स को उमेठने लगी, उसने एक झटके में अपनी टी शर्ट उतार दी और अब वो अपने आगे झूलते हुए मोटे-२ चूचो को एक-२ करके दबा रही थी और लम्बी -२ सिस्कारियां ले रही थी.


मैं समझ गया की उसको पापा का लंड पसंद आ गया है....जैसे मुझे मम्मी का बदन और उनकी चूत पसंद आ गयी है.
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मम्मी ने अपनी ऑंखें खोली और उठ कर बैठ गयी, उसने अजय चाचा के चेहरे को पकड़ कर उठाया और बड़ी व्याकुलता से अपने होंठ उसके होंठो से चिपका दिए, फिर तो कामुकता का तांडव होने लगा बेड पर...अजय चाचू माँ के होंठ ऐसे चूस रहे थे जैसे उन्हें कच्चा ही चबा जायेंगे, उनके मुंह से तरह-२ की आवाजें आ रही थी, माँ ने चाचा के चेहरे पर लगे अपने रस को सफा चट कर दिया, उनकी घनी मूंछो से ढके होंठो को वो चबा रही थी, बीच-२ में उनकी मूंछो पर भी अपनी लम्बी जीभ फिरा रही थी, अजय से ये सब बर्दाश्त नहीं हुआ और उन्होंने माँ को दोबारा लिटा दिया और अपना तन्तनाता हुआ लंड पेल दिया गीली-२ चूत में..आआआआऐईईईइ marrrrrrrrrrr गयीईई ...माँ धीरे से चिल्लाई...


aaaaaaaaaaaaaaaaammmmmm aurrrrrrrrrrrrrrrr jorrrrrrrrrrrrrrrrrrrrrr सीईईईईईईईई
ajayyyyyyyyyyyyyyyyyyyy aaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaaahhhhhhhhhhhhhhh


मेरा तो बुरा हाल हो रहा था अपनी माँ को चुदते हुए देखकर.


पापा भी अपनी पूरी स्पीड में थे. ऋतू की नजरें पापा के लंड से हटने का नाम ही नहीं ले रही थी.


अचानक चाची ने पापा के लंड को अपनी चूत में से निकाल दिया और बेड पर उलटी हो कर कुतिया की तरह बैठ गयी..
पापा ने अपना चेहरा चाची की गांड से चिपका दिया, मैंने नोट किया की पापा आरती चाची की चूत नहीं गांड का छेद चाट रहे है....मेरी उत्तेजना अपनी चरम सीमा पर थी,


पापा उठे और अपने लंड को चाची की गांड के छेद से सटाया और आगे की तरफ धक्का मारा..


चाची तो मजे के मारे दोहरी हो गयी....उसकी गांड में पापा का लंड फ़चाआअक की आवाज के साथ घुस गया.


वो अब चाची की गांड मार रहे थे, दोनों के चेहरे देख कर यही लगता था की उन्हें इसमें चूत मारने से भी ज्यादा मजा आ रहा है.


ये देखकर ऋतू की सांसे तेज हो गयी और उसने अपने हाथों की गति मेरे लंड पर बड़ा दी और अपनी गांड को पीछे करके टक्कर मारने लगी.


उसने अपने दुसरे हाथ से अपनी स्कर्ट उतर दी, नीचे उसने पेंटी नहीं पहनी थी, अब उसके गोल चुतड मेरे लंड के सुपाडे से टकरा रहे थे. वो उत्तेजना के मारे कांप रही थी, ऐसा मैंने पहली बार देखा था, वो थोडा झुकी और अपनी गांड को फैला कर अपने हाथ दीवार पर टिका कर खड़ी हो गयी, और मेरे लंड को पीछे से अपनी चूत पर टिका दिया....मैंने एक हल्का झटका मारा और मेरा पूरा लंड उसकी रसीली चूत में जा घुसा....mmmmmmmmmmmm......ऋतू ने अपनी ऑंखें बंद करली और पीछे होकर तेजी से धक्के मारने लगी, फिर तकरीबन 5 मिनट बाद अचानक उसने मेरा लंड निकाल दिया और उसे पकड़ कर अपनी गांड के छेद पर टिका दिया..


मैंने हैरानी से उसकी तरफ देखा...


"please ........मेरी गांड में अपना लंड daaalooooo " मेरी तो हिम्मत ही नहीं हुई उसे ना कहने की.


मैंने ऋतू की चूत के रस से भीगा हुआ अपना लंड उसकी गांड के छेद पर ठीक से लगाया और एक करारा झटका मारा,




आआआआआआआअह्ह्ह्ह .......marrrrrrrrrrrrrrrrrrrr गयी.............मैंने उसके मुंह में अपनी उंगलियाँ दाल दी ताकि वो ज्यादा न चिल्ला पाए, वो उन्हें चूसने और काटने लगी. उसके मुंह की लार ने मेरी साड़ी उंगलियाँ गीली कर दी और मैंने वोही गीला हाथ उसके चेहरे पर मल कर उसे और ज्यादा उत्तेजित कर दिया.



मेरा आधे से ज्यादा लंड उसकी गांड में घुसा हुआ था, मैंने उसे बाहर निकाला और अगली बार और ज्यादा तेजी से अन्दर धकेल दिया....वो पहले झटके से उबर भी नहीं पायी थी की दुसरे ने तो उसकी गांड ही फाड़ दी..वो थोड़ी देर के लिए नम सी हो गयी, उसका शरीर एकदम ढीला हो गया और वो मेरे हाथों में लटक सी गयी...उसका ओर्गास्म हो चूका था.


वहां दुसरे रूम में पापा ने अपनी स्पीड बड़ा दी और जोर से हुंकारते हुए अपना टैंक आरती चाची की चूत में खाली कर दिया...


चाची अपनी मोटी गांड मटका-२ कर पापा का रस अन्दर ले रही थी, उनका चेहरा हमारी तरफ था, और वो अपने मुंह में अपनी उँगलियाँ डाले चूस रही थी,,,जैसे कोई लंड हो.


अजय चाचू भी लगभग झड़ने के करीब थे, उन्होंने एक झटके से मेरी माँ को ऊपर उठा लिया जैसे कोई गुडिया हो.


और खड़े-२ उन्हें चोदने लगे.


माँ ने अपने हाथ चाचू की गर्दन के चारो तरफ लपेट लिए थे और टांगे उनकी कमर पर.


तभी उन्होंने एक जोर का झटका दिया और अपने रोकेट जैसी वीर्य की धारें मेरी माँ की चूत में उछाल दी.


माँ भी झड़ने लगी, हवा में लटकी हुई.


उनकी चूत में से चाचा का रस टपक कर नीचे गिर रहा था. चाचू के पैरों पर..


मैंने माँ को झड़ते देखा तो मेरा लंड भी जवाब दे गया और मैंने भी अपना वीर्य अपनी बहन की कोमल गांड में दाल दिया, अपने हाथ आगे करके उसके उभारों को पकड़ा और दबा दिया.


ऋतू ने अपनी कमर सीधी करी और अपने एक हाथ को पीछे करके मेरे सर के पीछे लगाया और अपने होंठ मुझसे जोड़ दिया, मेरा लंड फिसल कर उसकी गुदाज गांड से बाहर आ गया.


और उसके पीछे-२ मेरा ढेर सारा रस भी बाहर निकल आया.


हम फ्रेंच किस कर रहे थे.


उसने ऑंखें खोली और अपनी नशीली आँखों से मुझे देखकर थैंक्स बोली....पर तभी पीछे देखकर वोही ऑंखें फैल कर चोडी हो गयी.


हमारी cousin सिस्टर नेहा उठ चुकी थी और हमारी कामुकता का नंगा नाच ऑंखें फाड़े देख रही थी.


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दोस्तों मुझे सेक्स से बहुत ही प्यार है आजो और सेक्स का मज़ा ले लो

Last edited by saleemkhan12 : 11th August 2014 at 01:51 PM.

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  #10  
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मैंने जब पीछे मुड कर देखा तो नेहा हम भाई बहन को नंगा देखकर हैरान हुई खड़ी थी, उसकी नजर मेरे लटकते हुए लंड पर ही थी.

मैंने अपने लंड को अपने हाथ से छिपाने की कोशिश की पर उसकी फैली हुई निगाहों से बच नहीं पाया

" ये तुम दोनों क्या कर रहे हो....?" नेहा ने हैरानी से पूछा

" तुम्हे क्या लगता है नेहा, हम लोग क्या कर रहे हैं" ऋतू ने बड़े बोल्ड तरीके से नंगी ही उसकी तरफ जाते हुए कहा

मैं तो कुछ समझ ही नहीं पाया, की ऋतू ये क्या कह रही है और क्यों.

"मम्मउ झे sss लगता है की तुम....दोनो ssss ...गन्दा काम कर रहे थे...." नेहा ने हकलाते हुए कहा.

ऋतू : "गंदे काम से तुम्हारा क्या मतलब है .."

नेहा : "वोही जो शादीsss के बाद करतेsss है..." उसका हकलाना जारी था.

ऋतू : "तुम कैसे जानती हो की ये गन्दा काम है...शादी से पहले या बाद में, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, ये तो सभी करते है और खूब एन्जॉय करते हैं"

नेहा : "पर तुम दोनों तो भाई बहन हो, ये तो सिर्फ lovers या पति पत्नी करते है"

ऋतू : "हम्म्म्म काफी कुछ मालुम है तुम्हे दुनिया के बारे में, अपने घर के बारे में भी कुछ मालुम है के नहीं"

नेहा :"क्या मतलब ??"

ऋतू : "यहाँ आओ और देखो यहाँ से.."

ऋतू ने उसे अपने पास बुलाया और ग्लास वाले एरिया से देखने को बोला.

नेहा पास गयी और अन्दर देखने लगी, अन्दर देखते ही उसके तो होश ही उड़ गए, उसके मम्मी पापा हमारे मम्मी पापा यानि उसके ताऊ और ताई जी के साथ नंगे एक ही पलंग पर लेते थे.

अब तक दुसरे रूम में सेक्स का नया दौर शुरू हो चूका था.

मेरी माँ अब जमीन पर बैठी थी और नेहा के पापा का लम्बा लंड अपने मुंह में डाले किसी रंडी की तरह चूसने में लगी थी.

मेरे पापा भी आरती चाची को उल्टा करके उनकी गांड पर अपने होंठ चिपका दिए और उसमे से अपना वीर्य चूसने लगे.

ऋतू ने आगे आकर नेहा के कंधे पर अपना सर टिका दिया और वो भी दुसरे कमरे में देखने लगी.

और नेहा के कान में फुसफुसाकर बोली : "देखो जरा हमारी फॅमिली को, तुम्हारे पापा मेरी माँ की चूत मारने के बाद अब उनके मुंह में लंड डाल रहे हैं और तुम्हारी माँ कैसे अपनी गांड मेरे पापा से चुसवा रही है, इसी गांड में थोड़ी देर पहले उनका मोटा लंड था."

नेहा अपने छोटे से दिमाग में ये सब समाने की कोशिश कर रही थी की ये सब हो क्या रहा है.

उसकी उभरती जवानी में शायद ये पहला मौका था जब उसने इतने सारे नंगे लोग पहली बार देखे थे.

मैंने नोट किया की नेहा का एक हाथ अपने आप उसकी चूत पर चला गया है.

"जब हमारे पेरेंट्स ये सब एक दुसरे के साथ खुल कर कर सकते हैं तो हम क्यों पीछे रहे" ऋतू ने अपना तर्क दिया.

"पर ये सब गलत है " नेहा देखे जा रही थी और बुदबुदाये जा रही थी.

"क्या गलत है और क्या सही अभी पता चल जाएगा...." और ऋतू ने आगे बढकर मेरा मुरझाया हुआ लंड पकड़कर नेहा के हाथ में पकड़ा दिया.

उसके पुरे शारीर में एक करंट सा लगा और उसने मेरा लंड छोड़ दिया और मुझे और ऋतू को हैरानी से देखने लगी.

"देखो मैं तुम्हे सिर्फ ये कहना चाहती हूँ की जैसे वहां वो सब और यहाँ हम दोनों मजे ले रहे हैं, क्यों न तुम भी वोही मजे लो..." ऋतू बोली और फिर से मेरा उत्तेजित होता हुआ लंड उसके हाथ में दे दिया.

इस बार उसने लंड नहीं छोड़ा और उसके कोमल से हाथों में मेरा लंड फिर से अपने विकराल रूप में आ गया.

उसका छोटा सा हाथ मेरे लम्बे और मोटे लंड को संभाल पाने में असमर्थ हो रहा था , उसने अपना दूसरा हाथ आगे किया और दोनों हाथों से उसे पकड़ लिया.

मैं समझ गया की वो मन ही मन ये सब करना चाहती है पर खुल के बोल नहीं पा रही है, अपनी तरफ से तो ये साबित कर रही है की इन्सेस्ट सेक्स बुरा है पर अपनी भावनाओ को रोक नहीं पा रही है.

ऋतू ने मुझे इशारा किया और मैंने आगे बढकर एक दम से उसके ठन्डे होंठो पर अपने गरम होंठ टिका दिए.

उसकी आंखे किस करते ही फ़ैल गयी, पर फिर वो धीरे-२ मदहोशी के आलम में आकर बंद हो गयी.

मैंने इतने मुलायम होंठ आज तक नहीं चूमे थे..एकदम ठन्डे, मुलायम, मलाई की तरह.

मैंने उन्हें चुसना और चाटना शुरू कर दिया, नेहा ने भी अपने आपको ढीला छोड़ दिया. उसने भी मुझे किस करना शुरू किया, मैं समझ गया की वो स्कूल में किस करना तो सीख ही चुकी है, वो किसी एक्सपर्ट की तरह मुझे फ्रेंच किस कर रही थी, अपनी जीभ मेरे मुंह में डालकर, मेरी जीभ को चूस रही थी..

अब मेरे लंड पर उसके हाथों की सख्ती और बढ़ गयी थी .

ऋतू नेहा के पीछे गयी और उसके मोटे-२ चुचे अपने हाथों में लेकर रगड़ने लगी.

नेहा ने अपनी किस तोड़ी और अपनी गर्दन पीछे की तरफ झुका दी, मैंने अपनी जीभ निकाल कर उसकी लम्बी सुराहीदार गर्दन पर टिका दी, वो सिसक उठी...स्स्सस्स्स्सस्स्सम्मम्मम्म .........नाआआआअ .......

ऋतू की उँगलियों के बीच उसके निप्प्ल्स थे, नेहा मचल रही थी हम दोनों भाई बहिन के नंगे जिस्मो के बीच.

नेहा अपनी छोटो गांड पीछे करके उससे ऋतू की चूत दबा रही थी.

नेहा ने आत्मसमर्पण कर दिया था. हम दोनों के आगे और अपनी उत्तेजना के सामने.

मैंने अपने हाथ नेहा के चुचे पर टिका दिए. wow ...क्या चुचे थे.ये ऋतू से थोड़े छोटे थे पर ऐसा लगा जैसे उसने अपनी टी शर्ट के अन्दर संतरे छुपा रखे हैं, उसने ही बड़े और मुलायम.

ऋतू ने नेहा की टी शर्ट पकड़ कर ऊपर उठा दी.

उसने काली रंग की ब्रा पहन राखी थी. गोरे चुचे उसके अन्दर फँस कर आ रहे थे, शायद ब्रा छोटी पड़ रही थी , इन कबूतरों के लिए.

मैंने हाथ पीछे करके उसके कबूतरों को उसकी ब्रा से आजाद कर दिया और वो फडफडा कर बाहर आ गए., वो इतने छोटे भी नहीं थे जितना मैंने सोचा था, बिलकुल उठे हुए, ब्राउन निप्प्ल्स, निप्प्ल्स के चारों तरफ फैला काले रंग का एरोहोल..बिलकुल अनछुए चुचे थे.

मैंने आगे बढकर अपना मुंह उसके दायें निप्पल पर रख दिया.

aaaaaaaaaaaahh ये क्याsssssssssssssss उसने मेरे बाल पकड़कर मेरे मुंह को अपने सीने पर दबा दिया. वो अपनी गोल आँखों से मुझे अपने चुचे चाटते हुए देख रही थी, और मेरे सर के बाल पकड़कर मुझे कण्ट्रोल कर रही थी, वो मेरे सर को कभी दायें चुचे पर रखती और कभी बाएं पर...मैंने अपने दांतों से उसके लम्बे निप्प्ले को जकड लिया और जोर से काट खाया....

आआआआआआआह्ह्ह उसने एक दो झटके लिए और फिर वो नम हो गयी,

मेरे चूसने मात्र से ही उसका ओर्गास्म हो गया था, मैंने चुसना जारी रखा. उसके दानो से मानो बीयर निकल रही थी, बड़े नशीले थे उसके बुबे..मैंने उनपर जगह-२ काट खाया, चुब्लाया, चूसा, और उसकी पूरी छाती पर लाल निशाँ बना दिए.

ऋतू ने पीछे से उसकी कैपरी भी उतार दी और नीचे बैठ कर उसकी कच्छी के लास्तिक को पकड़ कर नीचे कर दिया,

वो भी अब मदर्जात नंगी थी.

मेरे मन में ख्याल आया की मात्र १० मीटर के दायरे में दो परिवार पुरे नंगे थे.

भाई-बहन-चचेरी बहन , जेठ-छोटी भाभी , देवर-भाभी....की जोडियाँ नंगे एक दुसरे की बाँहों में सेक्स के मजे ले रहे थे.

मेरी बाँहों में मेरी चचेरी बहन नंगी खड़ी थी, और उसके पीछे मेरी सगी बहन भी नंगी थी..

मेरा लंड पिछले दो घंटो में तीसरी बार खड़ा हुआ फुफकार रहा था और अपने कारनामे दिखाने के लिए उतावला हुए जा रहा था . उसे कुंवारी चूत की खुशबु आ गयी थी.

मैंने अपना एक हाथ नीचे करके नेहा की चूत पर टिका दिया.

वो रस से टपक रही थी, मैंने अपनी बीच की ऊँगली उसकी चूत में डालनी चाही पर वो बड़ी tight थी, मैंने उँगलियों से उसका रस समेटा और ऊपर करके उन्हें चूस लिया, बड़ा मीठा रस था, ऋतू ने मुझे ये सब करते देखा तो लपककर मेरा हाथ पकड़कर अपने मुंह में दाल लिया और बचा हुआ रस चाटने लगी..म्म्म्मस्स्स्स...इट्स tastyyyyyyy ....

नेहा के चेहरे पर एक गर्वीली मुस्कान आ गयी उसने अपनी ऑंखें खोली और मेरा हाथ अपनी चूत पर रखकर रगड़ने लगी, मैं समझ गया की लोंडिया गरम हो चुकी है.

मेरी नजर दुसरे कमरे में चल रहे खेल पर गयी.

वहां मेरी माँ तो अपने देवर का लंड ऐसे चूस रही थी जैसे कोई गन्ना..

अजय चाचू ने मेरी माँ को वहीँ जमीन पर लिटाया और लंड समेत उनके मुंह पर बैठ गए...ले साली....चूस मेरे लंड को.......चूस छिनाल भाभी ....मेरे लंड कूऊऊओ.......आआआआआह्ह्ह ....
वो अपने टट्टे मेरी माँ के मुंह में ठुसने की कोशिश कर रहे थे...माँ का मुंह थोडा और खुला और लंड निकाल कर वो अब गोटियाँ चूसने लगी...चाचू का लंड उनकी नाक के ऊपर लेटा हुआ फुफकार रहा था.
उनकी लार से पूरा चेहरा गीला हो चूका था....ले साआआआआली .....चुसे इन्हीईईए.....आआआआआह्ह्ह्ह

मेरी माँ की आँखों से आंसू निकल आये इतनी बर्बरता से चाचू उनका मुंह चोद रहे थे..


मेरे पापा अपने छोटे भाई के कारनामे देखकर मुस्कुरा रहे थे, पर अपनी पत्नी को भाई के द्वारा humilate होते देखकर वो भी थोडा भड़क गए और अपना गुस्सा उन्होंने उसकी पत्नी आरती के ऊपर निकाला...उन्होंने आरती की टांगो को पकड़ा और उसे हवा में शीर्सासन की मुद्रा में अपनी तरफ मुंह करके उल्टा खड़ा कर दिया और टांगे चोडी करके उनकी चूत पर अपने दांत गडा, वो अपनी चूत पर इतना हिंसक प्रहार बर्दाश्त ना कर पाई और उसके मुंह से सिसकारी निकल गयी....आआआआआआआआअह्ह्ह...भेन चोद्द्दद्द्द......क्याकर रहा है........आआआआआआह्ह्ह्ह धीईरे ssssssss
आआआआआआह्ह्ह्ह चाअतूऊऊ ..पर वो अपनी गांड हिला रही थी यानि उसको dominate होने में मजा आ रहा था...

तभी मेरे पापा ने अपने लंड को आरती चची के मुंह की तरफ करके पेशाब कर दिया.....उनकी धार सीधे आरती चाची के उलटे और खुले मुंह में जा गिरी....कुछ उनकी नाक में भी गयी और वो खांसने लगी...मुझे ये देखकर बड़ी घिन्न आई...पर मैंने नोट किया की आरती चाची को इसमें मजा आ रहा है...वो खूब एन्जॉय कर रही थी.

अपनी बीबी से बदला लेते देखकर अजय अंकल मेरे पापा की तरफ देखकर हंसने लगे..

और मेरी माँ पर और बुरी तरह से पिल पड़े.

वो दोनों भाई एक दुसरे की बीबियों की बुरी तरह से लेने में लगे हुए थे.

मैं और मेरी बाकी दोनों बहने मेरे साथ ये सब देख रही थी और एक दुसरे के नंगे जिस्म सहला रही थी.

अब नेहा के लिए कण्ट्रोल करना मुश्किल हो गया. उसने मेरा चेहरा अपनी तरफ किया और मेरे होंठो को पागलो की तरह चूसने लगी, शायद अपने मम्मी पापा के कारनामे उसे उत्तेजित कर रहे थे.

ऋतू ने नीचे बैठ कर नेहा की लार टपकाती चूत पर अपना मुंह रख दिया..

उसकी चूत की leakage बंद हो गयी...

नेहा की चूत पर हलके -२ गोल्डेन color के रोंये थे.

वो अभी जवानी की देहलीज पर भी नहीं पहुंची थी और और चूत के रस को अपनी बहन के मुंह में डाल कर मजे ले रही थी.

ऋतू चटकारे ले-लेकर उसकी चूत साफ़ करने लगी.

वो नीचे से उसकी चूत चूस रही थी और मैं ऊपर से उसके होंठ.

ऋतू ने अपनी जीभ नेहा की चूत में घुसा दी, उसकी चिकनाई से वो अन्दर चली गयी, और फिर अपनी दो उंगलियाँ भी उसके अन्दर डाल दी. वो मचल उठी और मेरी जीभ को और तेजी से काटने और चूसने लगी. मैंने अपने पंजे उसकी छाती पर जमा दिए, उसपर हो रहा दोहरा अटैक उससे बर्दाश्त नहीं हो रहा था.

ऋतू ने धक्का देकर हम दोनों को बेड पर ले जाकर गिरा दिया.

मैंने अब गौर से नेहा का नंगा जिस्म बेड पर पड़े हुए देखा, उसका मासूम सा चेहरा, मोटे-२ चुचे, पतली कमर और कसे हुए चुतड, मोती टांगे और कसी हुई पिंडलियाँ, देखकर मैं पागल सा हो गया और उसे ऊपर से नीचे तक चूमने लगा, मैं चूमता हुआ उसकी चूत तक पहुंचा और गीली-२ चूत को अपने मुंह से चाटने लगा, उसका स्वाद तो मैं पहले ही चख चूका था, अब पूरी कडाही में अपना मुंह डाले मैं उसका मीठा रस पी रहा था.

ऋतू ने दूसरी तरफ से नेहा को किस करना शुरू किया और उसके होंठो पर अपने होंठ रगड़ने लगी.

मुझे कुछ हो रहा haiiii .......कुछ करूऊऊऊ............नेहा बद्बदाये जा रही थी.

ऋतू ने मुझे इशारा किया और मैं समझ गया की वो घडी आ चुकी है.

मैंने उठ कर अपना लंड उसके रस से चोपड़ कर उसकी छोटी सी चूत के मुंहाने पर रखा.

ऋतू ने मेरा लंड पकड़ा और उसे नेहा की चूत के ऊपर नीचे रगड़ने लगी. और फिर एक जगह फिक्स कर दिया और बोली....भाई...थोडा धीरे करना...छोटी है अभी..

मैंने कुछ नहीं कहा और अपने लंड का जोर लगाकर अपना सुपदा उसकी चूत में धकेल दिया.

उसकी तो बुरी हालत हो गयी.....नाआआआआआआअ.......निकाआआआआआआअल्ल्लूऊओ मुझे नहीईइ कर्नाआआआअ.......मैं थोडा रुका, ऋतू ने नेहा को फिर से किस किया और उसके चुचे चुसे, वो थोडा नोर्मल हुई, मैंने अगला झटका दिया, उसका पूरा शरीर अकड़ गया मेरे इस हमले से, मेरा आधा लंड उसकी चूत में घुस गया और उसकी झिल्ली से जा टकराया, वो चीख पड़ती अगर ऋतू ने उसके होंठो पर अपने मुंह की tape न लगाई होती. मैंने लंड पीछे खींचा और दुबारा और तेजी से अन्दर डाल दिया, मेरा लंड उसकी झिल्ली को चीरता हुआ अन्दर जा घुसा , मैंने अपने लंड पर उसके गर्म खून का रसाव महसूस किया, उसकी छोटी सी चूत फट चुकी थी. मैंने सोचा भी नहीं था की चूत इतनी tight भी हो सकती है, वो मेरे नीचे पड़ी चटपटा रही थी, ऋतू ने उसके दोनों हाथों को पकड़ा हुआ था और उसे किस करे जा रही थी.

मैंने लंड बाहर खींचा और धीरे -२ अन्दर बाहर करने लगा, थोड़ी ही देर में उसके कुल्हे भी मेरे लंड के साथ-२ हिलने लगे.

अब उसे भी मजा आ रहा था...साआले....जान ही निकाआल दी तुने तूऊ....अब देख क्या रहा है...जोर से चोद मुझे भेन चोद....

सालाआआ कुत्ताआआआ ...चोद मुझीईईईए.........आआआआआआआआह्ह्ह्ह

उसकी गरम चूत मेरे लंड को जकड़े हुए थी, मेरे लिए ये सब बर्दाश करना अब कठीन हो गया और मैंने अपना वीर्य अपनी छोटी सी कुंवारी बहन की चूत में उड़ेल दिया....वो भी झटके लेकर झड़ने लगी.

और मैं हांफता हुआ अलग हो गया.

उसकी चूत में से मेरा रस और खून बहार आने लगा. नेहा थोड़ी डर गयी पर ऋतू ने उसे समझाया की ये सब तो एक दिन होना ही था और उसे बाथरूम मे ले गयी साफ़ करने के लिए, और बेड से चादर भी उठा ली धोने के लिए.

मैं भी उठा और छेद से देखा की अन्दर का माहोल भी लगभग बदल चूका है मेरे पापा आरती चाची की चूत में लंड पेल रहे थे और मेरी माँ अजय चाचू के ऊपर उनके लंड को अन्दर लिए उछल रही थी. मेरी माँ ने नीचे झुककर चाचू को चूमा और झड़ने लगी, चाचू ने भी अपने हाथ मेरी माँ की मोटी गांड पर टिका दिए और अपना रस अन्दर छोड़ दिया.

पापा ने भी जब झड़ना शुरू किया तो अपना लंड बाहर निकाला और चाची के मुंह पर धारें मारने लगे, वो नीचे पेशाब वाले गीले फर्श पर लेटी थी, उनकी हालत एक सस्ती रंडी जैसी लग रही थी. शरीर पेशाब से गीला और चेहरा मेरे पापा के रस से...
थोड़ी देर लेटने के बाद मेरी माँ अपनी जगह से उठी और आरती चाची के पास आकर उनके चेहरे पर गिरा मेरे पापा का रस चाटने लगी, बड़ा ही कामुक दृश्य था, आरती का चेहरा चाटने के साथ-२ मेरी माँ उन्हें चूम भी रही थी, फिर चाची ने मेरी माँ को भी किस करना चुरू कर दिया और उनके उभारों को चूसते हुए नीचे की तरफ जाने लगी और उनकी चूत पर पहुँच कर अपनी जीभ अन्दर दाल दी और वहां पड़े अपने पति के रस को खोद खोदकर बाहर निकालने लगी, माँ ने भी अपना मुंह चाची की चूत पर टिका कर उसे साफ़ करना शुरू कर दिया, थोड़ी ही देर में दोनों ने एक दुसरे को अपनी-2 जीभ से चमका दिया. फिर मेरे मम्मी पापा अपने रूम में चले गए और चाचू -चाची नंगे ही अपने बिस्टर में घुस गए.


ऋतू और नेहा भी वापिस आ चुकी थी, नेहा थोड़ी लड़खड़ा कर चल रही थी, उसकी मासूम चूत सूज गयी थी मेरे लंड के प्रहार से. ऋतू ने उसे पेनकिलर दी और नेहा उसे ले कर सो गयी, मैं भी घुस गया उन दोनो के बीच एक ही पलंग में और रजाई ओढ़ ली..मजे की बात ये थी की हम तीनो नंगे थे.

सुबह मेरी आँख जल्दी खुल गयी और मैंने पाया की नेहा वहीँ शीशे वाली जगह से अन्दर देख रही है, मैंने ऋतू की तरफ देखा, वो सो रही थी, नेहा नंगी खड़ी दुसरे रूम में देख रही थी, मैं उठ कर पास गया और उसके गोल-२ चूतडो पर अपना लंड टिका कर उसके पीछे खड़ा हो गया, उसने मुस्कुराकर पीछे देखा और मुझे जगह देते हुए साइड हो गयी, मैंने अन्दर देखा की चाचू और चाची 69 की अवस्था में एक दुसरे को चूस रहे थे, क्या गजब का सीन था, मैंने मन ही मन सोचा - सुबह-२ इनको चैन नहीं है, और नेहा की तरफ देखा, उसकी साँसे तेजी से चल रही थी, अपने मम्मी पापा को ऐसी अवस्था में सुबह देखकर वो काफी उत्तेजित हो चुकी थी, उसकी चूत में से रस बहकर जांघो से होता हुआ नीचे बह रहा था... मैंने मन ही मन सोचा कितना रस टपकाती है साली...उसके होंठ कुछ कहने को अधीर हो रहे थे, उसकी आँखों में एक निमंत्रण था, पर मैंने सोचा चलो इसको थोडा और तड़पाया जाए और मैंने उसकी तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और वापिस अन्दर देखने लगा.

अन्दर उन्होंने अपना आसन तोडा और चाची उठ कर चाचू के सामने आ गयी और उनका लंड मुंह में डालकर चूसने लगी.

अजय की आँखें बंद होती चली गयी, आरती किसी professional की तरह चाचू का लंड चूस रही थी, मेरा तो दिल आ गया था अपनी रांड चाची पर. जी कर रहा था की अभी अन्दर जाऊं और अपना लोडा उसके मुंह में ठूस दूं...साली कुतिया.

वहां नेहा काफी गरम हो चुकी थी, वो अपना शरीर मेरे शरीर से रगड़ रही थी, अपने चुचे मेरे हाथों से रगड़ कर मुझे उत्तेजित कर रही थी, मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की और अन्दर ही देखता रहा, पर मेरा लंड मेरी बात कहाँ मानता है, वो तो खड़ा हो गया पूरी तरह.

जब नेहा ने देखा की मैं कुछ नहीं कर रहा हूँ तो वो मेरे सामने आई और मेरे लिप्स पर अपने होंठ रखकर उन्हें चूसने लगी और अपना पूरा शरीर मुझसे रगड़ने लगी.

अब मेरी सहन शक्ति ने जवाब दे दिया और मैंने भी उसे reply करना शुरू कर दिया और उसे जोरो से चूसने और चाटने लगा, मैंने अपने हाथ उसके गोल और मोटे चूतडो पर टिकाया और अपनी एक ऊँगली उसकी गांड में दाल दी, वो चिहुंक उठी और उछल कर मेरी गोद में चढ़ गयी, और अपनी टाँगे मेरे चारों तरफ लपेट ली, मेरी ऊँगली उसकी गांड में अन्दर तक घुस गयी, वो उसे जोरो से हिलाने लगी, मेरे मन में उसकी गांड मारने का विचार आया पर फिर मैंने सोचा अभी कल ही तो इसने चूत मरवाई है, इतनी जल्दी गांड भी मार ली तो बेचारी का चलना भी दूभर हो जाएगा, इसलिए मैंने अपनी ऊँगली निकालकर उसकी रस उगलती चूत में डाल दी, वो तो मस्ती में आकर मुझे काटने ही लगी और इशारा करके मुझे बेड तक ले जाने को कहा, मैं उल्टा चलता हुआ बेड तक आया और उसे अपने ऊपर लिटाता हुआ नीचे लेट गया, उससे सहन नहीं हो रहा था, उसने मेरे लंड को निशाना बनाया और एक ही बार में मेरे लंड को अपनी कमसिन चूत में उतारती चली गयी, सुर्र्र्रर्र्र्रर्र्र.की आवाज के साथ मेरा पप्पू उसकी पिंकी के अन्दर घुसता चला गया. म्म्म्मम्म्म्मम्म....आनंद के मारे उसकी ऑंखें बंद होती चली गयी.

पास सो रही ऋतू को अंदाजा भी नहीं था की हम सुबह-२ फिर से चूत लंड खेल रहे हैं.

नेहा मेरा लंड अपने तरीके से अपनी चूत के अन्दर ले रही थी, वो ऊपर तक उठकर आती और मेरे लंड के सुपाडे को अपनी चूत के होंठो से रगडती और फिर उसे अन्दर डालती, इस तरह से वो हर बार पूरी तरह से मेरे लंड को अन्दर बाहर कर रही थी, उसकी चूत के रस से काफी चिकनाई हो गयी थी, इसलिए आज कल जितनी तकलीफ नहीं हो रही थी बल्कि उसे आज मजे आ रहे थे.

उसके बाल्स जैसे चुचे मेरी आँखों के सामने उछल रहे थे, मैंने उन्हें पकड़ा और मसल दिया, वो सिहर उठी और अपनी ऑंखें खोलकर मुझे देखा और फिर झटके से मेरे होंठो को दबोचकर उन्हें अपना अमृत पिलाने लगी.

उसके धक्के तेज होने लगे और अंत में आकर वो जोरो से हांफती हुई झड़ने लगी, मैंने भी अपनी स्पीड बड़ाई और 8 -10 धक्को के बाद मैं भी झड़ने लगा...उसकी कोमल चूत के अन्दर ही.

वो धीरे से उठी और मेरे साइड में लुडक गयी, और मेरा लंड अपने मुंह में डालकर चूसने लगी और उसे साफ़ करके अपनी चूत में इकठ्ठा हुए मेरे रस में उंगलियाँ डालकर उसे भी चाटने लगी. फिर वो उठी और बाथरूम में चली गयी.

मैं थोडा ऊपर हुआ और सो रही नंगी ऋतू के साथ जाकर लेट गया, उसने भी अपना सर मेरे कंधे पर टिका दिया और मुझसे चिपककर सो गयी.

मैं बेड पर पड़ा अपनी नंगी बहन को अपनी बाँहों में लिए अपनी किस्मत को सराह रहा था.
9 बजे तक ऋतू भी उठ गयी और मेरे लंड को अपने हाथ में पकड़कर मेरे होंठो पर एक मीठी सी पप्पी दी और बोली "गुड मोर्निंग जानू"...जैसे कोई नव-विवाहित अपने पति को बोलती है.

मैंने भी उसे जवाब दिया और चूम लिया. मैंने नेहा को भी उठाया और उसे भी उसी अंदाज में गुड मोर्निंग बोला.

हम जल्दी से उठे और कपडे पहन कर बाहर की तरफ चल दिए, बाहर मम्मी पापा, चाचू-चाची सेंट्रल टेबल पर बैठे न्यूज़ पेपर के साथ-२ चाय पी रहे थे.

हमें देखकर पापा बोले : "अरे बच्चो गुड मोर्निंग, कैसी रही तुम्हारी रात, नींद तो ठीक से आई ना ?"

मैं : "गुड मोर्निंग पापा , हाँ हमें बहुत बढ़िया नींद आई, मैं तो घोड़े बेच कर सोया"

ऋतू : "और मैं भी, मुझे तो सोने के बाद पता ही नहीं चला की मैं हूँ कहा.."

नेहा भी कहाँ पीछे रहने वाली थी :" और मेरा तो अभी भी उठने को मन नहीं कर रहा था, कितनी प्यारी नींद आई कल रात" वो हलके से मुस्कुरायी और हम दोनों की तरफ देखकर एक आँख मार दी.

मम्मी : "अरे इन पहाड़ो पर ऐसी ही नींद आती है...अभी तो पुरे दस दिन पड़े है, अपनी नींद का पूरा मजा लो बच्चों..हा हा .."

मैं : "मम्मी-पापा, हमें इस बात की बहुत ख़ुशी है की इस बार आप लोग हमें भी अपने साथ लाये, थैंक्स ए लोट."

पापा : "यू आर वेल्कम बेटा, चलो अब जल्दी से नहा धो लो और फिर हमें बाहर जाकर सभी लोगो के साथ नाश्ता करना है"

हम सभी नहाने लगे, मेरी पेनी नजरें ये बात पता करने की कोशिश कर रही थी की ये दोनों जोड़े कल रात वाली बात का किसी भी तरह से जिक्र कर रहे है या नहीं...पर वो सब अपने में मस्त थे, उन्होंने कोई भी ऐसा इशारा नहीं किया.

तैयार होने के बाद हम सभी बाहर आ गए और नाश्ता किया, हम तीनो एक कोने में जाकर टेबल पर बैठ गए, वहां हमारी उम्र के और भी बच्चे थे, बात करने से पता चला की वो सभी भी पहली बार इस जगह पर आये हैं, और ये भी की यहाँ की association ने बच्चे लाने की छुट पहली बार ही दी है. हम तीनो ने नाश्ता किया और वहीँ टहलने लगे, ऋतू ने नेहा को गर्भनिरोधक गोलियां दी और उन्हें लेने का तरीका भी बताया. वो भी ये गोलियां पिछले 15 दिनों से ले रही थी, और वो जानती थी की नेहा को भी अब इनकी जरुरत है.

नेहा गोली लेने वापिस अपने रूम में चली गयी, मैं और ऋतू थोड़ी और आगे चल दिए, पहाड़ी इलाका होने की वजह से काफी घनी झाड़ियाँ थी थोड़ी उचाई पर, ऋतू ने कहा की चलो वहां चलते हैं, हम २० मिनट की चढाई के बाद वहां पहुंचे और एक बड़ी सी चट्टान पर पहुँच कर बैठ गए, चट्टान के दूसरी तरफ गहरी खायी थी, वहां का प्राकर्तिक नजारा देखकर मैं मंत्रमुग्ध सा हो गया और अपने साथ लाये डिजिकैम से हसीं वादियों के फोटो लेने लगा.

"जरा इस नज़ारे की भी फोटो ले लो" मेरे पीछे से ऋतू की मीठी आवाज आई

मैंने पीछे मुड कर देखा तो मेरी आँखें फटी की फटी रह गयी .....ऋतू उस बड़ी सी चट्टान पर मादरजात नंगी लेटी थी.

उसने कब अपने कपडे उतारे और यहाँ क्यों उतारे मेरी समझ में कुछ नहीं आया...उसने अपनी एक ऊँगली अपनी चूत में डाली और अपना रस खुद ही चूसते हुए मुझे फिर बोली "कैसा लगा ये नजारा....?"

"ये क्या पागलपन है ऋतू, कोई आ जाएगा, यहाँ ये सब करना ठीक नहीं है...." पर मेरा लैंड ये सब तर्क नहीं मान रहा था, वो तो अंगड़ाई लेकर चल दिया अपने पुरे साइज़ में आने के लिए.

ऋतू : "कोई नहीं आएगा यहाँ...हम काफी ऊपर हैं अगर कोई आएगा भी तो दूर से आता हुआ दिख जाएगा...और अगर आ भी गया तो उन्हें कोनसा मालुम चलेगा की हम दोनों भाई बहन है, मुझे हमेशा से ये इच्छा थी की मैं खुले में सेक्स के मजे लूं, आज मौका भी है और दस्तूर भी"

मैंने उसकी बाते ध्यान से सुनी, अब मेरे ना कहने का कोई सवाल ही नहीं था, मैंने बिजली की तेजी से अपने कपडे उतारे और नंगा हो गया, मेरा खड़ा हुआ लंड देखकर उसकी नजर काफी खुन्कार हो गयी और उसकी जीभ लपलपाने लगी मेरा लंड अपने मुंह में लेने के लिए..

मैंने अपना कैमरा उठाया और उसकी तरफ देखा, वो समझ गयी और उसने चट्टान पर लेटे-२ एक सेक्सी पोस लिया और मैंने उसकी फोटो खींच ली, बड़ी सेक्सी तस्वीर आई थी, फिर उसने अपनी टाँगे चोडी करी और अपनी उँगलियों से अपनी चूत के कपाट खोले, मैंने झट से उसका वो पोस कैमरे में कैद कर लिया, फिर तो तरह-२ से उसने तस्वीरे खिंचवाई. उसकी रस टपकाती चूत से साफ़ पता चल रहा था की वो अब काफी उत्तेजित हो चुकी थी, मेरा लंड भी अब दर्द कर रहा था, मैं आगे बड़ा और अपना लम्बा बम्बू उसके मुंह में ठूस दिया....
"ले भेन की लोड़ी...चूस अपने भाई का लंड...साली हरामजादी....कुतिया....चूस मेरे लंड को....आज मैं तेरी चूत का ऐसा हाल करूँगा की अपनी फटी हुई चूत लेकर तो पुरे शहर में घुमती फिरेगी...आआआआआअह्ह्ह्ह" उसने मेरी गन्दी गालियों से उत्तेजित होते हुए मेरे लंड को किसी भूखी कुतिया की तरह लपका और काट खाया.

उस ठंडी चट्टान पर मैंने अपने हिप्स टिका दिए और वो अपने चूचो के बल मेरे पीछे से होती हुई मेरे लंड को चूस रही थी, मैंने अपना हाथ पीछे करके उसकी गांड में एक ऊँगली दाल दी....
\
आआआआआआआअह्ह्ह.म्म्म्मम्म्म्मम्म .उसने रसीली आवाज निकाली, ठंडी हवा के झोंको ने माहोल को और हसीं बना दिया था. मुझे भी इस खुले आसमान के नीचे नंगे खड़े होकर अपना लंड चुस्वाने में मजा आ रहा था.

ऋतू काफी तेजी से मेरे लंड को चूस रही थी, चुसे भी क्यों न, आज उसकी एक सेक्रेट फंतासी जो पूरी हो रही थी.

साआआआआले भेन्चोद.....हरामी कुत्ते.....अपनी बहन को तुने अपने लम्बे लंड का दीवाना बना दिया है....मादरचोद...जी करता है तेरे लंड को खा जाऊं ....आज में तेरा सारा रस पी जाउंगी...साले गांडू...जब से तुने मेरी गांड मारी है, उसमे खुजली हो रही है....भेन के लोडे...आज फिर से मेरी गांड मार...."

मैंने उसे गुडिया की तरह उठाया और अपना लंड उसकी दहकती हुई भट्टी जैसी गांड में पेल दिया.....

आआआआय्य्य्यीईई .......आआआआअह्ह्ह ..........

उसकी चीख पूरी वादियों में गूँज गयी, मैंने उसे चुप करने के लिए अपने होंठ उसके मुंह से चिपका दिए.

आज मुझे भी गाली देने और सुनने में काफी मजा आ रहा था, आज तक ज्यादातर हमने चुपचाप सेक्स किया था, घरवालों को आवाज न सुनाई दे जाए इस डर से, पर यहाँ ऐसी कोई परेशानी नहीं थी इसलिए हम दोनों काफी जोर से सिस्कारियां भी ले रहे थे और एक दुसरे को गन्दी-२ गालियाँ भी दे रहे थे.



ले साली कुतिया...हरामजादी...मेरे लंड से चुदवाने के बाद अब तेरी नजर अपने बाप के मोटे लंड पर है....मैं सब जानता हूँ...तू अपनी रसीली चूत में अब अपने बाप का लंड लेना चाहती है...छिनाल.....और उसके बाद चाचू से भी चुदवायेगी...है ना.....और फिर वापिस शहर जाकर मेरे सभी दोस्तों से भी जिनसे अभी तक तुने अपनी चूत ही चटवाई है ...बोल रंडी..."

"हाँ हाँ.....चुद्वुंगी अपने बाप के मोटे लंड से और अपने चाचू के काले सांप से...साले कुत्ते.....तू भी तो अपनी माँ की चूचियां चुसना चाहता है और अपने मुंह से उनकी चूत चाटना चाहता है ....और चाची मिल गयी तो उसकी चूत के परखच्चे उदा देगा तू अपने इस डंडे जैसे लंड से..साला भडवा...अपनी बहन को पूरी दुनिया से चुदवाने की बात करता है...तू मेरे लिए लंड का इंतजाम करता जा और मैं चुदवा-२ कर तेरे लिए पैसो का अम्बार लगा दूंगी..."

ये सब बातें हमारे मुंह से कैसे निकल रही थी हमें भी मालुम नहीं था, पर ये जर्रूर मालूम था की इन सबसे चुदाई का मजा दुगुना हो गया था.

मैं तो अपने सभी पाठको को ये सलाह दूंगा की वो भी चुदाई के समय अपने साथी को गन्दी-२ गालियाँ दे, उन्हें अपनी चूत और जोर से मारने या लंड को और अन्दर लेने के लिए भड़काए, फिर देखना, चुदाई कैसी मजेदार होती है...

खेर, मेरा लंड अब किसी रेल इंजीन की तरह उसकी कसावदार गांड को खोलने में लगा हुआ था, उसका एक हाथ अपनी चूत मसल रहा था, मेरे दोनों हाथ उसके गोल चूचो पर थे और मैं ऋतू के निप्प्ल्स पर अपने अंगूठे और ऊँगली का दबाव बनाये उन्हें पूरी तरह दबा रहा था.

उसके चुतड हवा में लटके हुए थे और पीठ कठोर चट्टान पर, मैं जमीन पर खड़ा उसकी टांगो को पकडे धक्के लगा रहा था.

"ले चुद साली...बड़ा शोंक है ना खुले में चुदने का..आज अपनी गांड में मेरा लंड ले और मजे कर कुतिया..." मैंने हाँफते हुए कहा.

"मेरा बस चले तो मैं पूरी जिंदगी तेरे लंड को अपनी चूत या गांड में लिए पड़ी रहूँ इन पहाड़ियों पर...चोद साले...मार मेरी गांड...फाड़ दे अपनी बहन की गांड आज अपने मुसल जैसे लोडे से....मार कुत्ते.....भेन के लोडे.....चोद मेरी गांड को...आआआआआआआआअह्ह्ह्ह .. हयीईईईईईईईई .......आआआआआआआअह्ह्ह्ह.......

और उसकी चूत में से रस की धार बह निकली....उसका रस बह कर मेरे लंड को गीला कर रहा था, उसके गीलेपन से और चिकनाहट आ गयी और मैंने भी अपनी स्पीड तेज कर दी.....

ले छिनाल......आआआआआआआआह......ले मेरा रस अपनी मोटी गांड में.......आआआआआआह्ह्ह......हुन्न्न्नन्न्न्न आआआआआआ,,,,...

मेरे मुंह से अजीब तरह की हुंकार निकल रही थी..

मेरा लंड उसकी गांड में काफी देर तक होली खेलता रहा और फिर मैं उसकी छातियों पर अपना सर टिका कर हांफने लगा.

उसने मेरे सर पर अपना हाथ रखा और होले-२ मुझे सहलाने लगी....

मेरा लंड फिसल कर बाहर आ गया.

मैंने नीचे देखा तो उसकी गांड में से मेरा रस बहकर चट्टान पर गिर रहा था....उसकी चूत में से भी काफी पानी निकला था, ऐसा लग रहा था की वहां किसी ने एक कप पानी डाला हो...इतनी गीली जगह हो गयी थी.

ऋतू उठी और मेरे लंड को चूस कर साफ़ कर दिया, फिर अपनी गांड से बह रहे मेरे रस को इकठ्ठा किया और उसे भी चाट गयी....मेरी हैरानी की सीमा न रही जब उसने वहां चट्टान पर गिरे मेरे वीर्य पर भी अपनी जीभ रख दी और उसे भी चाटने लगी..और बोली "ये तो मेरा टोनिक है.." और मुझे एक आँख मार दी.

उसे चट्टान से रस चाटते देखकर मेरे मुंह से अनायास ही निकला " साली कुतिया..." और हम दोनों की हंसी निकल गयी.

फिर हम दोनों ने जल्दी से अपने कपडे पहने और नीचे की तरफ चल दिए.


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दोस्तों मुझे सेक्स से बहुत ही प्यार है आजो और सेक्स का मज़ा ले लो

Last edited by saleemkhan12 : 11th August 2014 at 03:06 PM.

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