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  #201  
Old 4th March 2013
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वो अपने पापा का सर पकड़कर अपनी छाती पर घुमा रही थी, बेरहमी से काटने की वजह से उसके सफ़ेद उरोजों पर गहरे लाल निशान बन गए थे, जिनपर उसे दर्द भी हो रहा था पर अपने पापा के साथ प्यार का खेल खेलने और मजे लेने के चक्कर में उसे ये दर्द भी मीठा लग रहा था..
पंकज ने उसके सपाट पेट को चुमते हुए नीचे की तरफ जाना शुरू किया और अंत में अपने पंजो और घुटनों के बल बैठ कर उन्होंने सोनी के एक पैर को अपने कंधे पर रख कर उसकी आग उगलती चूत के ऊपर अपना मुंह लगा दिया.
आआआआआआआआआआआआह्ह्ह पापा…….
सोनी बड़े प्यार से अपने प्यारे पापा को देख रही थी, पंकज उसकी चूत को चाटते हुए उसे एकटक देख रहा था
और जोर से पपाआआआआआ …सोनी चिल्लाई..
और उसके पापा ने चूत चाटने की स्पीड और बड़ा दी..आज ही उसकी चूत को मैंने फाड़ा था इसलिए थोड़ी बहुत सुजन आ गयी थी उसपर, पर उसके पापा की जीभ उसकी चूत पर मरहम का काम कर रही थी, इसलिए उसे भी बड़ा ही मजा आ रहा था.
थोड़ी ही देर में उसकी चूत में फिर से वोही अजीब तरह की तरंगे उठने लगी और अचानक ही उसने अपनी चूत से अपने अन्दर का लावा बाहर उड़ेल दिया..नीचे बैठे उसके पापा को जैसे एक झटका सा लगा पर उन्होंने अपना मुंह नहीं हटाया उसकी चूत से और सारा गर्म पानी पी गए वो अपनी प्यारी सी बेटी का.
वो हवा में अटकी हुई हांफ रही थी, उसका शरीर निढाल सा हो गया और उसने अपने गोल चुचे पापा के सर से सटा दिए और गहरी साँसे लेने लगी.
पंकज का लंड अभी भी खड़ा था, उसने अपने बेटी को अपने ऊपर लिटाया और अपना हाथ नीचे करके अपना लंड उसकी नन्ही सी चूत में फंसा दिया..वो अभी अपने ओर्गास्म से संभल भी नहीं पायी थी की उसके पापा के एक तेज धक्के ने उनका पूरा आठ इंच का मोटा लंड उसकी चूत में उतार दिया…
अयीईईईईईईईईईईईईईईईई पपाआआआआआआआअ वो चिल्ला पड़ी…
सभी की नजरें उस तरफ उठ गयी, उसकी पत्नी मंजू, जो अपनी छोटी बेटी की चूत चाट रही थी, वो उठी और अपने पति से बोली “पंकज डार्लिंग….थोडा धीरे करो….अपनी ही बच्ची है…”, पंकज ने उसे देखा और अपना सर हिला कर आश्वासन दिया और फिर दोनों अपने काम में लग गए.
पापा का पूरा लंड अपनी चूत में लेकर सोनी थोड़ी देर तक नम सी होकर लेटी रही और फिर पापा ने जब नीचे से धीरे-२ धक्के मारने शुरू किये तो उसके गोल चूतड भी थिरक-थिरककर अपने पापा का साथ देने लगे..हर धक्के के साथ उसके अन्दर का आनंद और भी बढता जा रहा था, उसने अपने पापा को बेतहाशा चूमना और चुसना शुरू कर दिया…
पुछ्ह्ह्हह्ह्हह्ह …..हाआआआआन्न पपाआआआआआअ और तेज…….और तेज….और तेज….हाआआअन ऐसे ही…
आआआआआह्ह म्मम्मम्मम्म ओह ओह ओह ओह ओह ओह ओह हा अ हा हा हा हा हा हा…..
पंकज भी अपनी बेटी को चोदते हुए उसके चुचों का रसपान कर रहा था, जिसकी वजह से सोनी और तेजी से मचलने लगी,
उसकी चूत से फिर से एक सेलाब निकलने की तय्यारी करने लगा, पंकज ने भी जब देखा की वो झड़ने वाला है तो उसने अपना लंड बाहर निकालने की सोची पर सोनी ने उसे रोक दिया और उनकी आँखों में देखकर बोली….
नहीईईईई पपाआआआआअ…बाहर नहीईईई…..अन्दर ही डालो……..प्लीस………..
पंकज को अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ, की उसकी सगी बेटी अपने पापा का रस अपनी कुंवारी चूत में चाहती है…उसने ज्यादा न सोचते हुए अपना लंड उसकी चूत में खाली करना शुरू कर दिया..
आआआआआआआआआआआअह्ह्ह वो जोर से चिल्लाये….
और एक के बाद एक कई झटके उसकी कमसिन सी चूत में देकर वो झड़ने लगे..अपने पापा का गरमागरम रस अपनी चूत में पाकर सोनी भी निहाल सी हो गयी और उसके अन्दर के सेलाब ने भी अपने पापा के लंड के ऊपर ही अपना असर दिखाते हुए झड़ना शुरू कर दिया.
आआआआआआआआआआआआह्ह पपाआआ…म्म्म्मम्म्म्मम्म ……अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….मजा आ गया…..पापा…
और उसने अपने पापा को चूम लिया
थोड़ी देर लेटने के बाद वो उठी और लंड को बाहर निकाला, लंड के बाहर आते ही उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकल कर लंड के ऊपर गिर गया, वो नीचे हुई और लंड के चारों तरफ फैले अपने और पापा के रस को चाटने लगी और फिर रसीले लंड को अपने मुंह में लेकर चूसकर उसे भी साफ़ कर दिया, दुसरे हाथ से अपनी चूत के अन्दर के रस को भी समेटा और उसे भी चाट कर गयी..
“म्मम्मम्मम्म पापा आपका रस तो बड़ा ही मीठा है….आज से रोज सुबह मैं जूस के बदले आपके लंड का रस पियूंगी..”
पापा भी अपनी बेटी की भोली सी बात पर मुस्कुरा दिए.
मेरा लंड भी अपनी मम्मी की चूत के अन्दर काफी तेजी से आ जा रहा था, आज वो काफी खुल कर चुदाई करवा रही थी, उनके मोटे-२ चुचे केरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे, मैंने उनके मोटे कूल्हों को पकड़ा हुआ था और अपनी एडियों के बल उठ कर, नीचे लेटा उनकी चुदाई कर रहा था, उनके मुंह में सिस्कारियों की झड़ी लगी हुई थी.
.उफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़ अआः अह अह अह अह अह अ होफ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ फक्क मीई……अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआआआआन्न ….
और अंत में उन्होंने अपनी गर्म चूत में से मलाईदार रस छोड़ना शुरू कर दिया…..
आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मैं तो गयीईईईईईईईईईइ……….ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह गोड……..
मैंने उन्हें नीचे लिटाया और अपना लंड निकालकर, उनकी दोनों टाँगे उठा कर, अपने लंड को उनकी गांड में लगा दिया, उनकी आँखें विस्मय से फ़ैल गयी…मैंने जब से अपनी माँ को चुदते हुए देखा था, मैं तभी से उनकी मोती और फूली हुई गांड मारना चाहता था, आज मोका लगते ही मैंने अपना लंड टिकाया उनकी गांड के पर और एक तेज धक्का मारा…..
आआआआआआआआह्ह्ह्ह वो चिल्ला पड़ी…
उनकी गांड का कसाव सही में लाजवाब था, मैंने तेजी से झटके देने शुरू किये, गांड के कसाव के कारण और उनके गद्देदार चूतड़ों के थपेड़ों के कारण मुझे काफी मजा आ रहा था. मेरे नीचे लेटी माँ की चूचियां हर झटके से हिल रही थी, उन्होंने उसे पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया और मेरी आँखों में देखकर सिस्कारियां सी भरने लगी….
आआआआआआअह्ह्ह म्मम्मम्मम ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ अह्ह्ह्ह शाबाश बेटा…..और तेज करो…..हाँ ऐसे ही……आआआह्ह्ह्ह
वो दोबारा उत्तेजित हो रही थी…मेरे हर झटके से वो अपनी गांड हवा में उठा कर अपनी तरफ से भी ठोकर मारती थी….और जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने एक तेज आवाज निकालते हुए उनकी कसी हुई मोटी गांड में झड़ना शुरू कर दिया…
आआआआआआआह्ह मोम्म्म्म …….मैं आआयाआआआआ …..आआआआआआअह्ह्ह
उन्होंने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और बोली….
आजाआआआ मेरे लाआआअल्ल ….. आआआआआआअह्ह्ह और वो भी झड़ने लगी.
अपने जवान बेटे की चुदाई देखकर उनकी आँखों से ख़ुशी के मारे आंसू आने लगे और वो मुझे गले लगाये, मेरे लंड को अपनी गांड में लिए, लेटी रही.
पापा भी आज काफी खुंकार दिख रहे थे, उन्होंने ऋतू की चूत का भोसड़ा बना दिया अपने लम्बे लंड के तेज धक्को से, ऋतू तो जैसे भूल ही गयी थी की वो कहाँ है…अपने पापा के मोटे लंड को अन्दर लिए वो तेजी से चिल्ला रही थी….
आआआआआआह्ह्ह पपाआआआ और तेज मार साले…..बेटी चोद…भोंस्डीके…मार अपनी बेटी की चूत…….आआआआआआआआह माआआआअर कुत्ते……..ओफ्फफ्फ्फ़ अयीईईईईईईईई
वो बडबडा भी रही थी और सिस्कारियां भी मार रही थी….
जल्दी ही दोनों अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए और ऋतू ने अपनी टाँगे पापा की कमर के चारों तरफ lapet ली और अपने दोनों कबूतर उनकी घने बालों वाली छातियों में दबाकर और उनके होंठो को अपने होंठो में फंसाकर वो झड़ने लगी..
आआआआआआआआआआआह्ह्ह पपाआआआआआआआअ म्मम्मम्मम्म
अपने लंड पर बेटी के गर्म रसाव को महसूस करते ही उनके लंड ने भी अपने बीज अपनी बेटी के खेत में बो दिए….
और वो भी झड़ते हुए उसके नर्म और मुलायम होंठो को काटने लगे….और उसके ऊपर ही ढेर हो गए.
उधर अपनी बेटी की चूत चाटते हुए मंजू आंटी भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी, अपने एक हाथ से वो खुद ही खुजला कर अपनी चूत की गर्मी बाहर निकाल रही थी, मोनी जो नीचे लेटी अपनी चूत अपनी माँ से चटवा रही थी और खुद वो नेहा की चूत को चाट रही थी, उसके शरीर के अन्दर अचानक एक सुस्सुराहत सी होने लगी…
वो कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसकी चूत के अन्दर से पेशाब का एक फव्वारा सा फुट निकला और उसकी माँ मंजू के मुंह से जा टकराया…
मंजू आंटी पहले तो चोंक गयी पर फिर अन्दर से आती गर्म पेशाब की फुहारों को अपने मुंह से टकराते पाकर उन्हें भी काफी मजा आने लगा और वो अपना मुंह अपनी बेटी मोनी की चूत से थोडा दूर किये , अपनी आँखें बंद करके उस गर्म बारिश का मजा लेने लगी…
जब बारिश बंद हुई तो उन्होंने अपना मुंह दोबारा अपनी बेटी की चूत में लगा दिया..जल्दी ही मोनी के शरीर में असली वाली सुस्सुराहत होने लगी…
अब वो जान गयी थी की वो झड़ने वाली है इसलिए उसने अपने ऊपर बैठी नेहा की चूत को और तेजी से चुसना शुरू कर दिया…
नेहा भी अपनी चूत पर ये तेज हमला बर्दाश्त नहीं कर पायी और वो झड़ने लगी, उसका गर्म अमृत नीचे लेटी मोनी में मुंह के अन्दर तक जा रहा था…
नेहा के झड़ते ही उसकी चूत ने भी अपना रस अपनी माँ के मुंह में दाल दिया और वो उसे सड़प-२ करके पीने लगी…
नेहा ने झड़ने के बाद नीचे उतर कर मंजू आंटी की चूत पर अपना मुंह लगा दिया और उसके अन्दर से कुछ खींचने की कोशिश करने लगी, जल्दी ही उनका रस बाहर की तरफ खींचता चला आया और उसके मुंह से जा टकराया…वो भी उसे जल्दी से पीने लगी.
पुरे कमरे में सेक्स की खुशबू आ रही थी…सभी ने थोड़ी देर नंगे लेटे हुए बातें करी और दोबारा मिलने का वादा करके हम सभी ने अपने कपडे पहने और बाहर निकल गए.
आज के इस ग्रुप सेक्स ने हम सभी को काफी नजदीक ला दिया था..
हम सभी अपने कमरे में पहुंचे और दरवाजा खोलते ही हम हैरान रह गए, अन्दर अजय चाचू और आरती चाची के साथ रेहान और हिना थे..
अजय चाचू किसी पागल कुत्ते की तरह नंगी लेटी हिना की चूत में अपना मुसल जैसा लंड पेल रहे थे, और वो चुद्दकड़ आरती चाची तो मुसलमानी लंड को देखकर बिफर सी गयी और उसके मोटे लंड पर चढ़ कर अपनी बुर को बुरी तरह से रगड़ रही थी.
हम सभी को देखते ही अजय चाचू और आरती चाची मुस्कुरा दिए और बोले
“अच्छा हुआ आप लोग आ गए, ये दोनों बच्चे आशु और ऋतू को पूछते हुए आये थे और मैं और आरती चुदाई में लगे हुए थे, इन्होने बिना किसी तक्कलुफ़ के हमारे साथ शामिल होने की बात कही…और हम इनकार नहीं कर पाए…देखो तो कैसे आरती उछल-२ कर रेहान के मोटे लंड से चुदवा रही है…और ये हिना तो बड़ी ही प्यारी है..इसकी टाइट चूत को मारकर इतना मजा आ रहा है की मैं क्या बताऊँ…”
मैंने देखा की हिना ने हम सभी की आवाजें सुनते ही अपनी ऑंखें खोली और मेरी तरफ देखकर एक आँख मार दी, उसे चाचू के लंड को अपनी चूत में डलवाने में बड़ा ही मजा आ रहा था, उसके मोटे चुचे हर झटके के साथ आगे पीछे हो रहे थे, उसकी टाँगे हवा में थी, और हाथ सर से ऊपर…पूरी चुद्दकड़ बन चुकी थी वो पिछले दो दिनों में..
आरती चाची भी हमारी तरफ मुढ़ी और मम्मी को देखकर बोली…”आओ दीदी…यहाँ आ जाओ…बड़ा ही मजा आ रहा है..इस मुस्सल्ल्ले के लंड से…मेरी तो काफी दिनों से इच्छा थी की किसी मुसलमान के मोटे लंड से चुदाई करवाऊ…और मेरी ये इच्छा आज पूरी हुई है…मजा आ गया इस मोटे का लंड लेने में..आआआआआआआअह्ह्ह्ह .”
हम सभी अभी-२ चुदाई करके आये थे, इसलिए थोडा थक गए थे, हमने ये बात चाचू को बताई और कहा तुम मजे लो हम थोड़ी देर बैठ कर आप लोगो की चुदाई देखेंगे..और फिर शामिल भी हो जायेंगे..
और वो चारों फिर से अपनी चुदाई में लग गए..
मम्मी, ऋतू और नेहा बड़े ही गौर से रेहान को आरती चाची की चुदाई करते हुए देख रहे थे और पापा एक नयी लड़की को देखकर फिर से ताव में आने लगे थे, हिना के दिलकश चुचे उनकी आँखों में एक अलग ही चमक पैदा कर रहे थे.
नेहा तो पहले से ही रेहान के लंड की दीवानी थी और आज उसकी चूत में कोई लंड भी नहीं गया था, इसलिए वो आगे बढ़ी और अपनी मम्मी के पास जाकर खड़ी हो गयी..आरती चाची ने जब देखा की उनकी बेटी बड़े चाव से उसे चुदते हुए देख रही है तो उसने उसे पुचकारकर अपने पास बुला लिया और उसे अपने झूलते हुए चुचे पर झुका कर उसके मुंह में अपना निप्पल दाल दिया…
आआआआआआआआआह्ह्ह्ह वो धीरे से चिल्लाई…
नेहा ने अपने दांतों से अपनी माँ के दाने को चुसना शुरू कर दिया…नीचे से रेहान का लंड और ऊपर से अपने दाने पर बेटी के होंठो का दबाव पाकर आरती चाची रेहान के लंड पर नाचने सी लगी….
पापा तो जैसे हिना के हुस्न को देखकर सब कुछ भूल से गए थे..वो अपने छोटे भाई को हिना की चूत मारते देखकर फिर से उत्तेजित हो गए और अपना लटकता हुआ लंड मसलते हुए उनके पास जाकर खड़े हो गए.. हिना ने जब देखा की मेरे पापा उसके पास खड़े हैं तो उसने मेरी तरफ देखा..मैंने सर हिला कर उसे इशारा किया और वो समझ गयी की ये मेरे पापा हैं…उसने मुस्कुराते हुए हाथ बड़ा कर मेरे पापा का लंड पकड़ लिया…
स्स्स्सस्स्स्स उनके मुंह से एक सिसकारी सी फुट गयी…
अपनी बेटी की उम्र की जवान लड़की अगर लंड पकडे तो ऐसा ही होता है…
फिर उसने लंड को दबाना और मसलना शुरू कर दिया..जल्दी ही उनका विशाल नाग अपने पुरे शबाब पर आ गया..हिना भी उनके लम्बे लंड को देखकर हैरान रह गयी…चाचू ने जब देखा की पापा पूरी तरह तैयार हैं तो उन्होंने हिना की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया और पापा से बोले..
“भैय्या आप आ जाओ..आप मारो इस गर्म कुतिया की चूत..”
“अरे नहीं अजय…ऐसे कैसे…तुम एक काम करो..तुम नीचे लेट कर इसकी चूत मारो और मैं पीछे से इसकी गांड मरूँगा…” पापा ने कहा.
“नहीईई … “हीना जोर से चिल्लाई “मेरी गांड में अभी तक किसी ने ऊँगली भी नहीं डाली है..अगर मारनी है तो मेरी चूत ही मारना…वहां तो बड़ा ही दर्द होगा..”
वो गांड से कुंवारी है..ये सुनते ही पापा की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी..
और वो बोले “अरे बेटा…कोई बात नहीं …अगर तुम अपनी गांड नहीं मरवाना चाहती हो तो कोई बात नहीं…हम दोनों भाई तुम्हारी चूत में ही लंड डालकर गुजारा कर लेंगे…पर क्या हम दोनों एक साथ तुम्हारी चूत तो मार ही सकते है…तुम अजय पर उलटी होकर लेट जाओ..वो नीचे से अपना लंड तुम्हारी चूत में डालेगा और फिर थोड़ी देर बाद वो निकाल लेगा और मैं पीछे से डाल दूंगा…ये तो ठीक है न…”
“ह्म्म्म जी अंकल…” उसने समझते हुए कहा.
मैं पापा की योजना समझ तो गया था पर देखना चाहता था की वो क्या करते हैं…वैसे उनकी बातें सुनकर और चुदाई देखकर मेरे लंड ने भी हरकत करनी शुरू कर दी थी..
ऋतू भी अपने होंठो पर जीभ फिर कर अपने एक हाथ को अपनी चूत पर रगड़ रही थी.
अजय चाचू नीचे लेट गए और उन्होंने हिना को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लंड वापिस उसकी चूत में डाल दिया..नीचे से लंड डालने के एंगल से लंड पूरी तरह उसकी चूत में जा रहा था..
आठ दस धक्के मारने के बाद चाचू ने अपना लंड निकाल लिया और पीछे खड़े पापा ने अपना मोटा लंड टिका दिया उसकी फुद्दी पर…और एक करार झटका मारा..
अयीईईईईईईईईईइ मर्र्र्रर्र्र्र गयीईईईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह और हिना लुडक कर चाचू के ऊपर गिर गयी…
पापा का मोटा लंड उसकी कमसिन सी चूत के अन्दर घुस गया था और चूत के नए दरवाजे खुल गए थे जहाँ और किसी का लंड अभी तक नहीं पहुंचा था…उसके गुदाज चुचे चाचू के मुंह के ऊपर थे..उनके तो मजे हो गए, उन्होंने उन चुचों को चुसना शुरू कर दिया…जिसकी वजह से हिना का दर्द भी थोडा कम हुआ…पीछे से रेलगाड़ी फिर चल पड़ी और पापा उसके मोटे चूतडों को थामे जोर-२ से धक्के मारने लगे…हिना का दर्द भी अब कम हो गया था और उसकी सिस्कारियां गूंजने लगी मजे के मारे
हम्म्म्म अ हा हा अ अह अह आः ऊओफ उफ ओफ्फोफ़ ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ उफ ऑफ ऑफ ऑफ़ आह आह्ह ……..म्मम्मम जोर से करो ना……अंकल…..प्लीस….और तेज मारो…..
तभी पापा ने अपना लंड निकाल दिया उसकी चूत से … अब चाचू की बारी जो थी..
वो परेशान सी हो गयी…
लेकिन अगले ही पल चाचू ने नीचे से फिर से अपना लंड दाल दिया…और वो फिर से खो गयी चुदाई की खाई में…
.थोड़ी देर बाद जब दोबारा पापा का नंबर आया तो उन्होंने थोड़ी देर तक लंड नहीं डाला…वो चाचू के ऊपर उलटी पड़ी हुई मचल रही थी…अपनी मोटी गांड पीछे करके पापा के लंड का इन्तेजार कर रही थी….
डालो ऩाSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSS प्लीस…….वो चिल्लाई…
पापा ने अपना गीला लंड इस बार उसकी गांड के छेद पर रख दिया…वो समझ गयी और चिल्लाई..
नहीईईई …..वहान्न्न्नन्न नहीईईईईईईईईइ प्लीस ……..
पर तब तक देर हो चुकी थी…पापा के एक झटके ने उसे चाचू के ऊपर फिर से गिरा दिया…और इस बार पापा का लंड उसकी गांड के छेद को फाड़ता हुआ अन्दर जा धंसा…उनके लंड का सुपाडा अन्दर जाकर अटक गया था…उन्होंने रहम नहीं किया और एक और धक्का मारा…
आआआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मरररर गयीईईईईईईईईइ …..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
पापा के दो चार और तेज झटकों ने उसकी गांड का बैंड बजा दिया..उनका पूरा आठ इंच लंडा लंड उसकी गांड में घुस चूका था…नीचे से चाचू ने फिर से उसके दानो से दूध पीना शुरू कर दिया…वो हिल भी नहीं पा रही थी…पापा बड़ी ही बेरहमी से उसकी गांड मार रहे थे…अचानक चाचू ने नीचे से अपना लंड उसकी चूत में लगा दिया…और पापा के द्वारा दिए तेज झटके से उनका लंड उसकी चूत के अन्दर तक चला गया….
अब दोनों भाई उस मुसल्माननी की गांड और चूत एक साथ मार रहे थे….बड़ा ही कामुक दृश्य था…
ऋतू भी अपने पापा और चाचू की कलाकारी देखकर मंत्र मुघ्ध सी उन्हें देख रही थी…उसने अपने पुरे कपडे उतार फैंके और मेरे सी लिपट गयी.
मेरे कपडे भी कुछ ही देर में नीचे जमीन पर पड़े हुए थे..
रेहान के मोटे लंड पर बैठी आरती चाची अचानक जोर-२ से चिल्लाने लगी…
आआआआआआह्ह अह अह अह अ हा आह आह आह आह उफ उफ उफ उफ उफ आआआआआआअह्ह और तेज मार साले कुत्ते…..आआआआआअह्ह मजा आ गया….और उसने अपना रस छोड़ दिया रेहान के लंड के ऊपर…
वो हटी और नेहा ने कब्ज़ा जमा दिया उसके लंड पर…रेहान ने नेहा को नीचे पटका और अपना मुसल डाल दिया बेचारी नेहा की छोटी सी चूत में……वो मजे से चिल्लाई….आआआआआआआआअह्ह रेहाआआआआन …….म्मम्मम्म ..
ऋतू ने मुझे धक्का देकर मुझे नीचे गिराया और मेरे लंड को अपनी गीली चूत पर टीकाकार उसके ऊपर बैठ गयी…
म्म्मम्म्म्मम्म ……
और धक्के मारने लगी…मैंने अपने हाथ अपने सर के नीचे रख लिए और लंड को अपनी बहन की चूत में डाले मजे लेने लगा.
मम्मी आगे आई और गहरी सांस लेती अपनी देवरानी आरती की चूत को किसी पालतू कुतिया की तरह चाटने लगी…चाची ने भी सर घुमा कर मम्मी की चूत पर अपने होंठ टिका दिए..और दोनों 69 की अवस्था में एक दुसरे को चूसने लगे.
वहां रेहान ने नेहा की चूत को ऐसे चोदा की उसकी चीखें निकल गयी..और वो भी झड़ने लगी….
आआआआआअह्ह्ह्ह रेहाआआआआन्न मैं तो गयीईईईइ…….और वो भी गहरी साँसे लेने लगी..
साले रेहान ने दोनों माँ बेटी को चोद दिया था और फिर भी उसका मुसल खड़ा हुआ था…
उसने चारों तरफ देखा …उसकी बहन को पापा और चाचू एक साथ चूत और गांड में चोद रहे थे…उसने हमारी तरफ देखा और पीछे आकर अपना लंड ऋतू की गांड के छेद में फंसा दिया…
ऋतू को जैसे ही रेहान के मोटे लंड का एहसास अपनी गांड के छेद में हुआ वो सिहर उठी…उसने डबल पेनेटरेशन कभी भी नहीं किया था…
उसने भी अपनी गांड के छेद को फैलाया और उसके अन्दर रेहान ने तेज शोट मारकर अपना लंड धकेल दिया..
आआआआआआआआह्ह्ह वो चिल्ला उठी…
भले ही उसकी गांड पहले फट चुकी थी पर रेहान के मोटे लंड ने उसे और भी ज्यादा फाड़ कर रख दिया….अब पुरे कमरे में दो लड़कियां चार लंड ले रही थी एक साथ…
रेहान ने ऋतू की चूत से अपना लंड निकाल लिया…
ऋतू ने हैरानी से पीछे मुड कर देखा और रेहान ने अपना लंड उसकी चूत पर टिका दिया…मेरा लंड पहले से ही वहां पर था…उसके मोटे लंड का एहसास पाकर मैंने अपना लंड बाहर निकलना चाहा की शायद वो मेरी बहन की चूत मारना चाहता है….
पर उसने दबाव डाल कर मेरे लंड को बाहर नहीं आने दिया..और अपना लंड उसी छेद में फंसा कर एक तेज झटका मारा….
ऋतू की चूत के धागे खुल गए….उसका मुंह खुला का खुला रह गया….
“अयीईईईईईईईईईईईइ मर्र्र गयीईई साले कुत्ते…भेन के लंड…निकाल अपना लोडा मेरी चूत से…..फट गयी….आआआआआआह्ह्ह्ह …” उसकी आँखों से आंसू आने लगे.
उसकी नन्ही सी चूत में दो विशालकाय लंड जा चुके थे…
..उसकी चूत में तेज दर्द हो रहा था….शायद वो थोड़ी फट भी गयी थी और खून आ रहा था…पर रेहान नहीं रुका और उसने एक और शोट मारकर अपना लंड पूरा उसकी चूत में डाल दिया…मेरे लंड के साथ एक दूसरा लंड अब ऋतू की चूत में था..हम दोनों का लंड एक दुसरे की घिसाई कर रहा था…और दोनों की गोलियां एक दुसरे के गले मिल रही थी….
ऋतू के लिए ये एक नया एहसास था..उसकी चूत की खुजली अब शायद मिट जाए ये सोचकर मैंने फिर से नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए…रेहान ने भी मेरे साथ ताल मिलायी और अब हम दोनों उसकी नन्ही सी चूत में अपने-२ लंड पेल रहे थे…दो लंड जल्दी ही अपना रंग दिखने लगे…और ऋतू की दर्द भरी चीखें मीठी सिस्कारियों में बदल गयी….
आआआआआआआह्ह्ह्ह म्मम्मम्म …..साले कुत्ते…..रेहान…..तुने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली…..आआआआअह्ह्ह पर जो भी है….म्मम्मम्म मजा आ रहा है……..मारो अब दोनों….मेरी चूत को….आआआआह्ह्ह्ह
और फिर तो हमने उसकी जो रेल बनायीं…जो रेल बनायीं….वो देखते ही बनती थी..
हिना की हिम्मत भी अब जवाब दे रही थी….उसकी गांड के अन्दर सबसे पहले पापा ने अपना वीर्य छोडा…आआआआआआआआअह्ह्ह्ह वाह मजा आ गयाआआ…..वो चिल्लाये….
हिना भी अपनी गांड में गर्म लावा पाकर पिघलने लगी और चाचू के लंड को और अन्दर तक घुसाकर कूदने लगी..जल्दी ही चाचू और हिना भी एक साथ झड़ने लगे…
आआआआआअयीईईईईईईइ ….म्मम्मम्म मैं तो गयी………आआआआआअह्ह्ह्ह ….. ऊऊओफ़ गोड..
मैं भी अपनी मंजिल के काफी करीब था…रेहान का भी वोही हाल था, वो पहले ही दो चूतें मार चूका था इसलिए वो भी झड़ने वाला था…ऋतू तो ना जाने कितनी बार झड चुकी थी अपनी चूत में दो-२ लंड लेकर….सबसे पहले रेहान ने पिचकारी मारी…अपने लंड के चारों तरफ, ऋतू की चूत में और किसी के लंड का गर्म पानी पाकर एक अजीब सा एहसास हुआ…मैंने भी उसी पानी में अपना पानी मिला कर उसकी चूत को भिगोना शुरू कर दिया….दोनों के लंड से निकलता पानी उसकी नन्ही सी चूत में नहीं आ पा रहा था और वो नीचे की तरफ रिसता हुआ मेरे ही पेट पर गिरने लगा….
मम्मी भी आरती चाची के चूसने की वजह से झड़ने लगी.
ऋतू उठी और मेरे और रेहान के लंड को एक साथ अपने मुंह में लेकर चूसने लगी…और फिर उसने पेट पर गिरे वीर्य को भी साफ़ किया..सारा रस पीने के बाद उसने जोर से डकार मारा….और हम सभी की हंसी निकल गयी…
हम सभी चुदाई करने के बाद इतने थक चुके थे की हिलने की भी हालत नहीं हो रही थी, पापा ने रेहान और हिना से कहा के तुम लोग आज यहीं सो जाओ.
तो रेहान बोला “नहीं अंकल इसकी क्या जरुरत हिया, हमारा काटेज पास ही में है, हम चले जायेंगे, और वैसे भी मम्मी पापा हमारा वेट कर रहे होंगे..हम कल फिर आयेंगे “
“अरे नहीं रेहान…मेरा मन नहीं है आज यहाँ से जाने का..” हिना ने कहा, वो अपनी चूत और गांड से रिसते हुए रस को अपनी उँगलियों से मसल रही थी. उसकी चूत में लगता है और भी खुजली बाकी थी.
मैंने रेहान से कहा “एक काम करते हैं..हम अंकल आंटी को बोल के आते हैं की तुम दोनों आज रात को यहीं रुकने वाले हो…ठीक है ना..” मैंने उन दोनों से कहा और ऋतू की तरफ देखा.
“हाँ ठीक है…तुम जाकर उनसे कह दो..अगर वो मान जाते हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है..” रेहान अपनी ख़ुशी को काबू में करते हुए बोला.
मैंने ऋतू को इशारा किया अपने साथ चलने के लिए और वो झट से कपडे पहन कर मेरे साथ बाहर की और चल दी.
बाहर काफी ठण्ड थी, सभी अपने-२ काटेज में जा चुके थे, काफी सुनसान हो चूका था सब कुछ.
ऋतू ठण्ड में अकड़ी हुई सी मेरे से चिपक कर चल रही थी, मैंने अपना हाथ उसकी कमर में डाल रखा था.
थोड़ी ही देर में हम दोनों रेहान के काटेज में पहुँच गए..मैंने दरवाजा खडकाया और अन्दर से एक बहुत ही खुबसूरत लड़की बाहर निकल कर आई…”हाँ जी कहिये..” उसने अपनी सुरीली सी आवाज में कहा. उसने पीले रंग का सूट पहना हुआ था, एक दम गोरी चिट्टी, पतली कमर, फैले हुए कुल्हे, मोटे-२ लटकते हुए उसके चुचे जिनपर उसने चुन्नी भी नहीं डाल रखी थी, नीचे उसकी सलवार उसकी मोटी टांगो से चिपकी हुई थी, जिसकी वजह से उसकी मोटी टांगो की सुडोलता साफ़ दिखाई दे रही थी.
“जी मैं आशु हूँ और ये ऋतू है..” मैंने कहा..
“अच्छा तो अब आये हो आप लोग…कितनी देर से इंतज़ार कर रहे थे हम दोनों आपका…” उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अन्दर धकेल लिया..ऋतू भी मेरे पीछे -२ अन्दर आ गयी.
“आ गए क्या वो लोग…” अन्दर से एक मोटी सी आवाज आई…और अगले ही पल एक भीमकाय सा इंसान बाहर आया, उसने सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहन रखा था, पायजामा घुटनों से थोडा नीचे था, सर पर गोल मुसल्माननी टोपी, काला रंग, पेट निकला हुआ, पान वाले लाल होंठ, बिना मूंछ के लम्बी दाड़ी जिसमे आधे से ज्यादा बाल सफ़ेद थे.
“आओ -२ … मेरा नाम रूबी है और ये हैं मेरे पति नाज़िर खान …” उसने अपनी सुरीली आवाज में कहा. मैं तो हैरान रह गया, मुझे लगा था की वो शायद रेहान की बड़ी बहन है पर ये तो उसकी माँ निकली..और क्या माँ थी…
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वो अपने पापा का सर पकड़कर अपनी छाती पर घुमा रही थी, बेरहमी से काटने की वजह से उसके सफ़ेद उरोजों पर गहरे लाल निशान बन गए थे, जिनपर उसे दर्द भी हो रहा था पर अपने पापा के साथ प्यार का खेल खेलने और मजे लेने के चक्कर में उसे ये दर्द भी मीठा लग रहा था..
पंकज ने उसके सपाट पेट को चुमते हुए नीचे की तरफ जाना शुरू किया और अंत में अपने पंजो और घुटनों के बल बैठ कर उन्होंने सोनी के एक पैर को अपने कंधे पर रख कर उसकी आग उगलती चूत के ऊपर अपना मुंह लगा दिया.
आआआआआआआआआआआआह्ह्ह पापा.
सोनी बड़े प्यार से अपने प्यारे पापा को देख रही थी, पंकज उसकी चूत को चाटते हुए उसे एकटक देख रहा था
और जोर से पपाआआआआआ सोनी चिल्लाई..
और उसके पापा ने चूत चाटने की स्पीड और बड़ा दी..आज ही उसकी चूत को मैंने फाड़ा था इसलिए थोड़ी बहुत सुजन आ गयी थी उसपर, पर उसके पापा की जीभ उसकी चूत पर मरहम का काम कर रही थी, इसलिए उसे भी बड़ा ही मजा आ रहा था.
थोड़ी ही देर में उसकी चूत में फिर से वोही अजीब तरह की तरंगे उठने लगी और अचानक ही उसने अपनी चूत से अपने अन्दर का लावा बाहर उड़ेल दिया..नीचे बैठे उसके पापा को जैसे एक झटका सा लगा पर उन्होंने अपना मुंह नहीं हटाया उसकी चूत से और सारा गर्म पानी पी गए वो अपनी प्यारी सी बेटी का.
वो हवा में अटकी हुई हांफ रही थी, उसका शरीर निढाल सा हो गया और उसने अपने गोल चुचे पापा के सर से सटा दिए और गहरी साँसे लेने लगी.
पंकज का लंड अभी भी खड़ा था, उसने अपने बेटी को अपने ऊपर लिटाया और अपना हाथ नीचे करके अपना लंड उसकी नन्ही सी चूत में फंसा दिया..वो अभी अपने ओर्गास्म से संभल भी नहीं पायी थी की उसके पापा के एक तेज धक्के ने उनका पूरा आठ इंच का मोटा लंड उसकी चूत में उतार दिया
अयीईईईईईईईईईईईईईईईई पपाआआआआआआआअ वो चिल्ला पड़ी
सभी की नजरें उस तरफ उठ गयी, उसकी पत्नी मंजू, जो अपनी छोटी बेटी की चूत चाट रही थी, वो उठी और अपने पति से बोली पंकज डार्लिंग.थोडा धीरे करो.अपनी ही बच्ची है, पंकज ने उसे देखा और अपना सर हिला कर आश्वासन दिया और फिर दोनों अपने काम में लग गए.
पापा का पूरा लंड अपनी चूत में लेकर सोनी थोड़ी देर तक नम सी होकर लेटी रही और फिर पापा ने जब नीचे से धीरे-२ धक्के मारने शुरू किये तो उसके गोल चूतड भी थिरक-थिरककर अपने पापा का साथ देने लगे..हर धक्के के साथ उसके अन्दर का आनंद और भी बढता जा रहा था, उसने अपने पापा को बेतहाशा चूमना और चुसना शुरू कर दिया
पुछ्ह्ह्हह्ह्हह्ह ..हाआआआआन्न पपाआआआआआअ और तेज.और तेज.और तेज.हाआआअन ऐसे ही
आआआआआह्ह म्मम्मम्मम्म ओह ओह ओह ओह ओह ओह ओह हा अ हा हा हा हा हा हा..
पंकज भी अपनी बेटी को चोदते हुए उसके चुचों का रसपान कर रहा था, जिसकी वजह से सोनी और तेजी से मचलने लगी,
उसकी चूत से फिर से एक सेलाब निकलने की तय्यारी करने लगा, पंकज ने भी जब देखा की वो झड़ने वाला है तो उसने अपना लंड बाहर निकालने की सोची पर सोनी ने उसे रोक दिया और उनकी आँखों में देखकर बोली.
नहीईईईई पपाआआआआअबाहर नहीईईई..अन्दर ही डालो..प्लीस..
पंकज को अपने कानो पर विश्वास ही नहीं हुआ, की उसकी सगी बेटी अपने पापा का रस अपनी कुंवारी चूत में चाहती हैउसने ज्यादा न सोचते हुए अपना लंड उसकी चूत में खाली करना शुरू कर दिया..
आआआआआआआआआआआअह्ह्ह वो जोर से चिल्लाये.
और एक के बाद एक कई झटके उसकी कमसिन सी चूत में देकर वो झड़ने लगे..अपने पापा का गरमागरम रस अपनी चूत में पाकर सोनी भी निहाल सी हो गयी और उसके अन्दर के सेलाब ने भी अपने पापा के लंड के ऊपर ही अपना असर दिखाते हुए झड़ना शुरू कर दिया.
आआआआआआआआआआआआह्ह पपाआआम्म्म्मम्म्म्मम्म अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह .मजा आ गया..पापा
और उसने अपने पापा को चूम लिया
थोड़ी देर लेटने के बाद वो उठी और लंड को बाहर निकाला, लंड के बाहर आते ही उसकी चूत में से ढेर सारा रस निकल कर लंड के ऊपर गिर गया, वो नीचे हुई और लंड के चारों तरफ फैले अपने और पापा के रस को चाटने लगी और फिर रसीले लंड को अपने मुंह में लेकर चूसकर उसे भी साफ़ कर दिया, दुसरे हाथ से अपनी चूत के अन्दर के रस को भी समेटा और उसे भी चाट कर गयी..
म्मम्मम्मम्म पापा आपका रस तो बड़ा ही मीठा है.आज से रोज सुबह मैं जूस के बदले आपके लंड का रस पियूंगी..
पापा भी अपनी बेटी की भोली सी बात पर मुस्कुरा दिए.
मेरा लंड भी अपनी मम्मी की चूत के अन्दर काफी तेजी से आ जा रहा था, आज वो काफी खुल कर चुदाई करवा रही थी, उनके मोटे-२ चुचे केरे मुंह पर थपेड़े मार रहे थे, मैंने उनके मोटे कूल्हों को पकड़ा हुआ था और अपनी एडियों के बल उठ कर, नीचे लेटा उनकी चुदाई कर रहा था, उनके मुंह में सिस्कारियों की झड़ी लगी हुई थी.
.उफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़ अआः अह अह अह अह अह अ होफ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ फक्क मीईअह्ह्ह्हह्ह्ह्ह हाआआआआन्न .
और अंत में उन्होंने अपनी गर्म चूत में से मलाईदार रस छोड़ना शुरू कर दिया..
आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मैं तो गयीईईईईईईईईईइ.ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह गोड..
मैंने उन्हें नीचे लिटाया और अपना लंड निकालकर, उनकी दोनों टाँगे उठा कर, अपने लंड को उनकी गांड में लगा दिया, उनकी आँखें विस्मय से फ़ैल गयीमैंने जब से अपनी माँ को चुदते हुए देखा था, मैं तभी से उनकी मोती और फूली हुई गांड मारना चाहता था, आज मोका लगते ही मैंने अपना लंड टिकाया उनकी गांड के पर और एक तेज धक्का मारा..
आआआआआआआआह्ह्ह्ह वो चिल्ला पड़ी
उनकी गांड का कसाव सही में लाजवाब था, मैंने तेजी से झटके देने शुरू किये, गांड के कसाव के कारण और उनके गद्देदार चूतड़ों के थपेड़ों के कारण मुझे काफी मजा आ रहा था. मेरे नीचे लेटी माँ की चूचियां हर झटके से हिल रही थी, उन्होंने उसे पकड़ कर उन्हें दबाना शुरू कर दिया और मेरी आँखों में देखकर सिस्कारियां सी भरने लगी.
आआआआआआअह्ह्ह म्मम्मम्मम ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ अह्ह्ह्ह शाबाश बेटा..और तेज करो..हाँ ऐसे हीआआआह्ह्ह्ह
वो दोबारा उत्तेजित हो रही थीमेरे हर झटके से वो अपनी गांड हवा में उठा कर अपनी तरफ से भी ठोकर मारती थी.और जल्दी ही मेरे लंड ने जवाब दे दिया और मैंने एक तेज आवाज निकालते हुए उनकी कसी हुई मोटी गांड में झड़ना शुरू कर दिया
आआआआआआआह्ह मोम्म्म्म .मैं आआयाआआआआ ..आआआआआआअह्ह्ह
उन्होंने मेरे सर के ऊपर हाथ रखा और बोली.
आजाआआआ मेरे लाआआअल्ल .. आआआआआआअह्ह्ह और वो भी झड़ने लगी.
अपने जवान बेटे की चुदाई देखकर उनकी आँखों से ख़ुशी के मारे आंसू आने लगे और वो मुझे गले लगाये, मेरे लंड को अपनी गांड में लिए, लेटी रही.
पापा भी आज काफी खुंकार दिख रहे थे, उन्होंने ऋतू की चूत का भोसड़ा बना दिया अपने लम्बे लंड के तेज धक्को से, ऋतू तो जैसे भूल ही गयी थी की वो कहाँ हैअपने पापा के मोटे लंड को अन्दर लिए वो तेजी से चिल्ला रही थी.
आआआआआआह्ह्ह पपाआआआ और तेज मार साले..बेटी चोदभोंस्डीकेमार अपनी बेटी की चूत.आआआआआआआआह माआआआअर कुत्ते..ओफ्फफ्फ्फ़ अयीईईईईईईईई
वो बडबडा भी रही थी और सिस्कारियां भी मार रही थी.
जल्दी ही दोनों अपने आखिरी पड़ाव पर पहुँच गए और ऋतू ने अपनी टाँगे पापा की कमर के चारों तरफ lapet ली और अपने दोनों कबूतर उनकी घने बालों वाली छातियों में दबाकर और उनके होंठो को अपने होंठो में फंसाकर वो झड़ने लगी..
आआआआआआआआआआआह्ह्ह पपाआआआआआआआअ म्मम्मम्मम्म
अपने लंड पर बेटी के गर्म रसाव को महसूस करते ही उनके लंड ने भी अपने बीज अपनी बेटी के खेत में बो दिए.
और वो भी झड़ते हुए उसके नर्म और मुलायम होंठो को काटने लगे.और उसके ऊपर ही ढेर हो गए.
उधर अपनी बेटी की चूत चाटते हुए मंजू आंटी भी काफी उत्तेजित हो चुकी थी, अपने एक हाथ से वो खुद ही खुजला कर अपनी चूत की गर्मी बाहर निकाल रही थी, मोनी जो नीचे लेटी अपनी चूत अपनी माँ से चटवा रही थी और खुद वो नेहा की चूत को चाट रही थी, उसके शरीर के अन्दर अचानक एक सुस्सुराहत सी होने लगी
वो कुछ समझ पाती इससे पहले ही उसकी चूत के अन्दर से पेशाब का एक फव्वारा सा फुट निकला और उसकी माँ मंजू के मुंह से जा टकराया
मंजू आंटी पहले तो चोंक गयी पर फिर अन्दर से आती गर्म पेशाब की फुहारों को अपने मुंह से टकराते पाकर उन्हें भी काफी मजा आने लगा और वो अपना मुंह अपनी बेटी मोनी की चूत से थोडा दूर किये , अपनी आँखें बंद करके उस गर्म बारिश का मजा लेने लगी
जब बारिश बंद हुई तो उन्होंने अपना मुंह दोबारा अपनी बेटी की चूत में लगा दिया..जल्दी ही मोनी के शरीर में असली वाली सुस्सुराहत होने लगी
अब वो जान गयी थी की वो झड़ने वाली है इसलिए उसने अपने ऊपर बैठी नेहा की चूत को और तेजी से चुसना शुरू कर दिया
नेहा भी अपनी चूत पर ये तेज हमला बर्दाश्त नहीं कर पायी और वो झड़ने लगी, उसका गर्म अमृत नीचे लेटी मोनी में मुंह के अन्दर तक जा रहा था
नेहा के झड़ते ही उसकी चूत ने भी अपना रस अपनी माँ के मुंह में दाल दिया और वो उसे सड़प-२ करके पीने लगी
नेहा ने झड़ने के बाद नीचे उतर कर मंजू आंटी की चूत पर अपना मुंह लगा दिया और उसके अन्दर से कुछ खींचने की कोशिश करने लगी, जल्दी ही उनका रस बाहर की तरफ खींचता चला आया और उसके मुंह से जा टकरायावो भी उसे जल्दी से पीने लगी.
पुरे कमरे में सेक्स की खुशबू आ रही थीसभी ने थोड़ी देर नंगे लेटे हुए बातें करी और दोबारा मिलने का वादा करके हम सभी ने अपने कपडे पहने और बाहर निकल गए.
आज के इस ग्रुप सेक्स ने हम सभी को काफी नजदीक ला दिया था..
हम सभी अपने कमरे में पहुंचे और दरवाजा खोलते ही हम हैरान रह गए, अन्दर अजय चाचू और आरती चाची के साथ रेहान और हिना थे..
अजय चाचू किसी पागल कुत्ते की तरह नंगी लेटी हिना की चूत में अपना मुसल जैसा लंड पेल रहे थे, और वो चुद्दकड़ आरती चाची तो मुसलमानी लंड को देखकर बिफर सी गयी और उसके मोटे लंड पर चढ़ कर अपनी बुर को बुरी तरह से रगड़ रही थी.
हम सभी को देखते ही अजय चाचू और आरती चाची मुस्कुरा दिए और बोले
अच्छा हुआ आप लोग आ गए, ये दोनों बच्चे आशु और ऋतू को पूछते हुए आये थे और मैं और आरती चुदाई में लगे हुए थे, इन्होने बिना किसी तक्कलुफ़ के हमारे साथ शामिल होने की बात कहीऔर हम इनकार नहीं कर पाएदेखो तो कैसे आरती उछल-२ कर रेहान के मोटे लंड से चुदवा रही हैऔर ये हिना तो बड़ी ही प्यारी है..इसकी टाइट चूत को मारकर इतना मजा आ रहा है की मैं क्या बताऊँ
मैंने देखा की हिना ने हम सभी की आवाजें सुनते ही अपनी ऑंखें खोली और मेरी तरफ देखकर एक आँख मार दी, उसे चाचू के लंड को अपनी चूत में डलवाने में बड़ा ही मजा आ रहा था, उसके मोटे चुचे हर झटके के साथ आगे पीछे हो रहे थे, उसकी टाँगे हवा में थी, और हाथ सर से ऊपरपूरी चुद्दकड़ बन चुकी थी वो पिछले दो दिनों में..
आरती चाची भी हमारी तरफ मुढ़ी और मम्मी को देखकर बोलीआओ दीदीयहाँ आ जाओबड़ा ही मजा आ रहा है..इस मुस्सल्ल्ले के लंड सेमेरी तो काफी दिनों से इच्छा थी की किसी मुसलमान के मोटे लंड से चुदाई करवाऊऔर मेरी ये इच्छा आज पूरी हुई हैमजा आ गया इस मोटे का लंड लेने में..आआआआआआआअह्ह्ह्ह .
हम सभी अभी-२ चुदाई करके आये थे, इसलिए थोडा थक गए थे, हमने ये बात चाचू को बताई और कहा तुम मजे लो हम थोड़ी देर बैठ कर आप लोगो की चुदाई देखेंगे..और फिर शामिल भी हो जायेंगे..
और वो चारों फिर से अपनी चुदाई में लग गए..
मम्मी, ऋतू और नेहा बड़े ही गौर से रेहान को आरती चाची की चुदाई करते हुए देख रहे थे और पापा एक नयी लड़की को देखकर फिर से ताव में आने लगे थे, हिना के दिलकश चुचे उनकी आँखों में एक अलग ही चमक पैदा कर रहे थे.
नेहा तो पहले से ही रेहान के लंड की दीवानी थी और आज उसकी चूत में कोई लंड भी नहीं गया था, इसलिए वो आगे बढ़ी और अपनी मम्मी के पास जाकर खड़ी हो गयी..आरती चाची ने जब देखा की उनकी बेटी बड़े चाव से उसे चुदते हुए देख रही है तो उसने उसे पुचकारकर अपने पास बुला लिया और उसे अपने झूलते हुए चुचे पर झुका कर उसके मुंह में अपना निप्पल दाल दिया
आआआआआआआआआह्ह्ह्ह वो धीरे से चिल्लाई
नेहा ने अपने दांतों से अपनी माँ के दाने को चुसना शुरू कर दियानीचे से रेहान का लंड और ऊपर से अपने दाने पर बेटी के होंठो का दबाव पाकर आरती चाची रेहान के लंड पर नाचने सी लगी.
पापा तो जैसे हिना के हुस्न को देखकर सब कुछ भूल से गए थे..वो अपने छोटे भाई को हिना की चूत मारते देखकर फिर से उत्तेजित हो गए और अपना लटकता हुआ लंड मसलते हुए उनके पास जाकर खड़े हो गए.. हिना ने जब देखा की मेरे पापा उसके पास खड़े हैं तो उसने मेरी तरफ देखा..मैंने सर हिला कर उसे इशारा किया और वो समझ गयी की ये मेरे पापा हैंउसने मुस्कुराते हुए हाथ बड़ा कर मेरे पापा का लंड पकड़ लिया
स्स्स्सस्स्स्स उनके मुंह से एक सिसकारी सी फुट गयी
अपनी बेटी की उम्र की जवान लड़की अगर लंड पकडे तो ऐसा ही होता है
फिर उसने लंड को दबाना और मसलना शुरू कर दिया..जल्दी ही उनका विशाल नाग अपने पुरे शबाब पर आ गया..हिना भी उनके लम्बे लंड को देखकर हैरान रह गयीचाचू ने जब देखा की पापा पूरी तरह तैयार हैं तो उन्होंने हिना की चूत से अपना लंड बाहर निकाल लिया और पापा से बोले..
भैय्या आप आ जाओ..आप मारो इस गर्म कुतिया की चूत..
अरे नहीं अजयऐसे कैसेतुम एक काम करो..तुम नीचे लेट कर इसकी चूत मारो और मैं पीछे से इसकी गांड मरूँगा पापा ने कहा.
नहीईई हीना जोर से चिल्लाई मेरी गांड में अभी तक किसी ने ऊँगली भी नहीं डाली है..अगर मारनी है तो मेरी चूत ही मारनावहां तो बड़ा ही दर्द होगा..
वो गांड से कुंवारी है..ये सुनते ही पापा की आँखों में एक अजीब सी चमक आ गयी..
और वो बोले अरे बेटाकोई बात नहीं अगर तुम अपनी गांड नहीं मरवाना चाहती हो तो कोई बात नहींहम दोनों भाई तुम्हारी चूत में ही लंड डालकर गुजारा कर लेंगेपर क्या हम दोनों एक साथ तुम्हारी चूत तो मार ही सकते हैतुम अजय पर उलटी होकर लेट जाओ..वो नीचे से अपना लंड तुम्हारी चूत में डालेगा और फिर थोड़ी देर बाद वो निकाल लेगा और मैं पीछे से डाल दूंगाये तो ठीक है न
ह्म्म्म जी अंकल उसने समझते हुए कहा.
मैं पापा की योजना समझ तो गया था पर देखना चाहता था की वो क्या करते हैंवैसे उनकी बातें सुनकर और चुदाई देखकर मेरे लंड ने भी हरकत करनी शुरू कर दी थी..
ऋतू भी अपने होंठो पर जीभ फिर कर अपने एक हाथ को अपनी चूत पर रगड़ रही थी.
अजय चाचू नीचे लेट गए और उन्होंने हिना को अपने ऊपर खींच लिया और अपना लंड वापिस उसकी चूत में डाल दिया..नीचे से लंड डालने के एंगल से लंड पूरी तरह उसकी चूत में जा रहा था..
आठ दस धक्के मारने के बाद चाचू ने अपना लंड निकाल लिया और पीछे खड़े पापा ने अपना मोटा लंड टिका दिया उसकी फुद्दी परऔर एक करार झटका मारा..
अयीईईईईईईईईईइ मर्र्र्रर्र्र्र गयीईईईईई अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह और हिना लुडक कर चाचू के ऊपर गिर गयी
पापा का मोटा लंड उसकी कमसिन सी चूत के अन्दर घुस गया था और चूत के नए दरवाजे खुल गए थे जहाँ और किसी का लंड अभी तक नहीं पहुंचा थाउसके गुदाज चुचे चाचू के मुंह के ऊपर थे..उनके तो मजे हो गए, उन्होंने उन चुचों को चुसना शुरू कर दियाजिसकी वजह से हिना का दर्द भी थोडा कम हुआपीछे से रेलगाड़ी फिर चल पड़ी और पापा उसके मोटे चूतडों को थामे जोर-२ से धक्के मारने लगेहिना का दर्द भी अब कम हो गया था और उसकी सिस्कारियां गूंजने लगी मजे के मारे
हम्म्म्म अ हा हा अ अह अह आः ऊओफ उफ ओफ्फोफ़ ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ उफ ऑफ ऑफ ऑफ़ आह आह्ह ..म्मम्मम जोर से करो नाअंकल..प्लीस.और तेज मारो..
तभी पापा ने अपना लंड निकाल दिया उसकी चूत से अब चाचू की बारी जो थी..
वो परेशान सी हो गयी
लेकिन अगले ही पल चाचू ने नीचे से फिर से अपना लंड दाल दियाऔर वो फिर से खो गयी चुदाई की खाई में
.थोड़ी देर बाद जब दोबारा पापा का नंबर आया तो उन्होंने थोड़ी देर तक लंड नहीं डालावो चाचू के ऊपर उलटी पड़ी हुई मचल रही थीअपनी मोटी गांड पीछे करके पापा के लंड का इन्तेजार कर रही थी.
डालो ऩाSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSSS प्लीस.वो चिल्लाई
पापा ने अपना गीला लंड इस बार उसकी गांड के छेद पर रख दियावो समझ गयी और चिल्लाई..
नहीईईई ..वहान्न्न्नन्न नहीईईईईईईईईइ प्लीस ..
पर तब तक देर हो चुकी थीपापा के एक झटके ने उसे चाचू के ऊपर फिर से गिरा दियाऔर इस बार पापा का लंड उसकी गांड के छेद को फाड़ता हुआ अन्दर जा धंसाउनके लंड का सुपाडा अन्दर जाकर अटक गया थाउन्होंने रहम नहीं किया और एक और धक्का मारा
आआआआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मरररर गयीईईईईईईईईइ ..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
पापा के दो चार और तेज झटकों ने उसकी गांड का बैंड बजा दिया..उनका पूरा आठ इंच लंडा लंड उसकी गांड में घुस चूका थानीचे से चाचू ने फिर से उसके दानो से दूध पीना शुरू कर दियावो हिल भी नहीं पा रही थीपापा बड़ी ही बेरहमी से उसकी गांड मार रहे थेअचानक चाचू ने नीचे से अपना लंड उसकी चूत में लगा दियाऔर पापा के द्वारा दिए तेज झटके से उनका लंड उसकी चूत के अन्दर तक चला गया.
अब दोनों भाई उस मुसल्माननी की गांड और चूत एक साथ मार रहे थे.बड़ा ही कामुक दृश्य था
ऋतू भी अपने पापा और चाचू की कलाकारी देखकर मंत्र मुघ्ध सी उन्हें देख रही थीउसने अपने पुरे कपडे उतार फैंके और मेरे सी लिपट गयी.
मेरे कपडे भी कुछ ही देर में नीचे जमीन पर पड़े हुए थे..
रेहान के मोटे लंड पर बैठी आरती चाची अचानक जोर-२ से चिल्लाने लगी
आआआआआआह्ह अह अह अह अ हा आह आह आह आह उफ उफ उफ उफ उफ आआआआआआअह्ह और तेज मार साले कुत्ते..आआआआआअह्ह मजा आ गया.और उसने अपना रस छोड़ दिया रेहान के लंड के ऊपर
वो हटी और नेहा ने कब्ज़ा जमा दिया उसके लंड पररेहान ने नेहा को नीचे पटका और अपना मुसल डाल दिया बेचारी नेहा की छोटी सी चूत मेंवो मजे से चिल्लाई.आआआआआआआआअह्ह रेहाआआआआन .म्मम्मम्म ..
ऋतू ने मुझे धक्का देकर मुझे नीचे गिराया और मेरे लंड को अपनी गीली चूत पर टीकाकार उसके ऊपर बैठ गयी
म्म्मम्म्म्मम्म
और धक्के मारने लगीमैंने अपने हाथ अपने सर के नीचे रख लिए और लंड को अपनी बहन की चूत में डाले मजे लेने लगा.
मम्मी आगे आई और गहरी सांस लेती अपनी देवरानी आरती की चूत को किसी पालतू कुतिया की तरह चाटने लगीचाची ने भी सर घुमा कर मम्मी की चूत पर अपने होंठ टिका दिए..और दोनों 69 की अवस्था में एक दुसरे को चूसने लगे.
वहां रेहान ने नेहा की चूत को ऐसे चोदा की उसकी चीखें निकल गयी..और वो भी झड़ने लगी.
आआआआआअह्ह्ह्ह रेहाआआआआन्न मैं तो गयीईईईइ.और वो भी गहरी साँसे लेने लगी..
साले रेहान ने दोनों माँ बेटी को चोद दिया था और फिर भी उसका मुसल खड़ा हुआ था
उसने चारों तरफ देखा उसकी बहन को पापा और चाचू एक साथ चूत और गांड में चोद रहे थेउसने हमारी तरफ देखा और पीछे आकर अपना लंड ऋतू की गांड के छेद में फंसा दिया
ऋतू को जैसे ही रेहान के मोटे लंड का एहसास अपनी गांड के छेद में हुआ वो सिहर उठीउसने डबल पेनेटरेशन कभी भी नहीं किया था
उसने भी अपनी गांड के छेद को फैलाया और उसके अन्दर रेहान ने तेज शोट मारकर अपना लंड धकेल दिया..
आआआआआआआआह्ह्ह वो चिल्ला उठी
भले ही उसकी गांड पहले फट चुकी थी पर रेहान के मोटे लंड ने उसे और भी ज्यादा फाड़ कर रख दिया.अब पुरे कमरे में दो लड़कियां चार लंड ले रही थी एक साथ
रेहान ने ऋतू की चूत से अपना लंड निकाल लिया
ऋतू ने हैरानी से पीछे मुड कर देखा और रेहान ने अपना लंड उसकी चूत पर टिका दियामेरा लंड पहले से ही वहां पर थाउसके मोटे लंड का एहसास पाकर मैंने अपना लंड बाहर निकलना चाहा की शायद वो मेरी बहन की चूत मारना चाहता है.
पर उसने दबाव डाल कर मेरे लंड को बाहर नहीं आने दिया..और अपना लंड उसी छेद में फंसा कर एक तेज झटका मारा.
ऋतू की चूत के धागे खुल गए.उसका मुंह खुला का खुला रह गया.
अयीईईईईईईईईईईईइ मर्र्र गयीईई साले कुत्तेभेन के लंडनिकाल अपना लोडा मेरी चूत से..फट गयी.आआआआआआह्ह्ह्ह उसकी आँखों से आंसू आने लगे.
उसकी नन्ही सी चूत में दो विशालकाय लंड जा चुके थे
..उसकी चूत में तेज दर्द हो रहा था.शायद वो थोड़ी फट भी गयी थी और खून आ रहा थापर रेहान नहीं रुका और उसने एक और शोट मारकर अपना लंड पूरा उसकी चूत में डाल दियामेरे लंड के साथ एक दूसरा लंड अब ऋतू की चूत में था..हम दोनों का लंड एक दुसरे की घिसाई कर रहा थाऔर दोनों की गोलियां एक दुसरे के गले मिल रही थी.
ऋतू के लिए ये एक नया एहसास था..उसकी चूत की खुजली अब शायद मिट जाए ये सोचकर मैंने फिर से नीचे से धक्के देने शुरू कर दिएरेहान ने भी मेरे साथ ताल मिलायी और अब हम दोनों उसकी नन्ही सी चूत में अपने-२ लंड पेल रहे थेदो लंड जल्दी ही अपना रंग दिखने लगेऔर ऋतू की दर्द भरी चीखें मीठी सिस्कारियों में बदल गयी.
आआआआआआआह्ह्ह्ह म्मम्मम्म ..साले कुत्ते..रेहान..तुने तो मेरी चूत ही फाड़ डाली..आआआआअह्ह्ह पर जो भी है.म्मम्मम्म मजा आ रहा है..मारो अब दोनों.मेरी चूत को.आआआआह्ह्ह्ह
और फिर तो हमने उसकी जो रेल बनायींजो रेल बनायीं.वो देखते ही बनती थी..
हिना की हिम्मत भी अब जवाब दे रही थी.उसकी गांड के अन्दर सबसे पहले पापा ने अपना वीर्य छोडाआआआआआआआआअह्ह्ह्ह वाह मजा आ गयाआआ..वो चिल्लाये.
हिना भी अपनी गांड में गर्म लावा पाकर पिघलने लगी और चाचू के लंड को और अन्दर तक घुसाकर कूदने लगी..जल्दी ही चाचू और हिना भी एक साथ झड़ने लगे
आआआआआअयीईईईईईईइ .म्मम्मम्म मैं तो गयीआआआआआअह्ह्ह्ह .. ऊऊओफ़ गोड..
मैं भी अपनी मंजिल के काफी करीब थारेहान का भी वोही हाल था, वो पहले ही दो चूतें मार चूका था इसलिए वो भी झड़ने वाला थाऋतू तो ना जाने कितनी बार झड चुकी थी अपनी चूत में दो-२ लंड लेकर.सबसे पहले रेहान ने पिचकारी मारीअपने लंड के चारों तरफ, ऋतू की चूत में और किसी के लंड का गर्म पानी पाकर एक अजीब सा एहसास हुआमैंने भी उसी पानी में अपना पानी मिला कर उसकी चूत को भिगोना शुरू कर दिया.दोनों के लंड से निकलता पानी उसकी नन्ही सी चूत में नहीं आ पा रहा था और वो नीचे की तरफ रिसता हुआ मेरे ही पेट पर गिरने लगा.
मम्मी भी आरती चाची के चूसने की वजह से झड़ने लगी.
ऋतू उठी और मेरे और रेहान के लंड को एक साथ अपने मुंह में लेकर चूसने लगीऔर फिर उसने पेट पर गिरे वीर्य को भी साफ़ किया..सारा रस पीने के बाद उसने जोर से डकार मारा.और हम सभी की हंसी निकल गयी
हम सभी चुदाई करने के बाद इतने थक चुके थे की हिलने की भी हालत नहीं हो रही थी, पापा ने रेहान और हिना से कहा के तुम लोग आज यहीं सो जाओ.
तो रेहान बोला नहीं अंकल इसकी क्या जरुरत हिया, हमारा काटेज पास ही में है, हम चले जायेंगे, और वैसे भी मम्मी पापा हमारा वेट कर रहे होंगे..हम कल फिर आयेंगे
अरे नहीं रेहानमेरा मन नहीं है आज यहाँ से जाने का.. हिना ने कहा, वो अपनी चूत और गांड से रिसते हुए रस को अपनी उँगलियों से मसल रही थी. उसकी चूत में लगता है और भी खुजली बाकी थी.
मैंने रेहान से कहा एक काम करते हैं..हम अंकल आंटी को बोल के आते हैं की तुम दोनों आज रात को यहीं रुकने वाले होठीक है ना.. मैंने उन दोनों से कहा और ऋतू की तरफ देखा.
हाँ ठीक हैतुम जाकर उनसे कह दो..अगर वो मान जाते हैं तो मुझे कोई आपत्ति नहीं है.. रेहान अपनी ख़ुशी को काबू में करते हुए बोला.
मैंने ऋतू को इशारा किया अपने साथ चलने के लिए और वो झट से कपडे पहन कर मेरे साथ बाहर की और चल दी.
बाहर काफी ठण्ड थी, सभी अपने-२ काटेज में जा चुके थे, काफी सुनसान हो चूका था सब कुछ.
ऋतू ठण्ड में अकड़ी हुई सी मेरे से चिपक कर चल रही थी, मैंने अपना हाथ उसकी कमर में डाल रखा था.
थोड़ी ही देर में हम दोनों रेहान के काटेज में पहुँच गए..मैंने दरवाजा खडकाया और अन्दर से एक बहुत ही खुबसूरत लड़की बाहर निकल कर आईहाँ जी कहिये.. उसने अपनी सुरीली सी आवाज में कहा. उसने पीले रंग का सूट पहना हुआ था, एक दम गोरी चिट्टी, पतली कमर, फैले हुए कुल्हे, मोटे-२ लटकते हुए उसके चुचे जिनपर उसने चुन्नी भी नहीं डाल रखी थी, नीचे उसकी सलवार उसकी मोटी टांगो से चिपकी हुई थी, जिसकी वजह से उसकी मोटी टांगो की सुडोलता साफ़ दिखाई दे रही थी.
जी मैं आशु हूँ और ये ऋतू है.. मैंने कहा..
अच्छा तो अब आये हो आप लोगकितनी देर से इंतज़ार कर रहे थे हम दोनों आपका उसने मेरा हाथ पकड़ा और मुझे अन्दर धकेल लिया..ऋतू भी मेरे पीछे -२ अन्दर आ गयी.
आ गए क्या वो लोग अन्दर से एक मोटी सी आवाज आईऔर अगले ही पल एक भीमकाय सा इंसान बाहर आया, उसने सफ़ेद कुर्ता पायजामा पहन रखा था, पायजामा घुटनों से थोडा नीचे था, सर पर गोल मुसल्माननी टोपी, काला रंग, पेट निकला हुआ, पान वाले लाल होंठ, बिना मूंछ के लम्बी दाड़ी जिसमे आधे से ज्यादा बाल सफ़ेद थे.
आओ -२ मेरा नाम रूबी है और ये हैं मेरे पति नाज़िर खान उसने अपनी सुरीली आवाज में कहा. मैं तो हैरान रह गया, मुझे लगा था की वो शायद रेहान की बड़ी बहन है पर ये तो उसकी माँ निकली..और क्या माँ थी
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साली की जवानी अभी तक बरकरार थी..उसे देखकर लगता ही नहीं था की वो दो-दो जवान बच्चो की माँ है…और उसका पति उसके बिलकुल विपरीत था..पता नहीं ऐसे लोगो को इतनी ख़ूबसूरत बीबी कैसे मिल जाती है…
मैं सोच ही रहा था की रेहान के अब्बा बोले “मैंने दो बार फ़ोन करा था organisers के पास पर उन्होंने कहा की आज हमारे पास आने के लिए कोई तैयार नहीं हो रहा है…फिर तुम कैसे आये..और वैसे भी काफी देर हो चुकी है , हमारे बच्चे भी function से आते ही होंगे.. ” पर तभी उसने ऋतू की तरफ देखा, उसको देखते ही उसके बड़े से पायजामे में एक हलचल सी हुई..जिसे मैंने तो देखा ही, ऋतू भी देख कर कांप सी गयी..”पर अब तुम आ ही गए हो तो कुछ इन्तेजाम करते हैं” उसने अपने भद्दे से लाल होंठो पर जीभ फिराते हुए कहा.
मैं समझ गया की ये दोनों हमें कुछ और समझ रहे हैं… शायद रोज शाम को यहाँ के organisers सभी को अलग-२ तरह के जोड़े उपलब्ध कराते हैं, और इनके लिए शायद आज कोई तैयार नहीं हुआ होगा..और ये लोग हमें शायद organisers के द्वारा भेजा गया जोड़ा ही समझ रहे हैं..
उसकी बीबी रूबी को देखकर तो मेरा लंड फिर से अंगडाई लेने लगा पर ऋतू के बारे में सोचते ही मैं घबरा सा गया..क्योंकि अगर इस सांड जैसे कसाई ने मेरी बहन को चोदा तो उसकी चूत का भोंसडा बन जाएगा…और इसी लिए शायद इनके पास कोई भी जोड़ा आने को तैयार नहीं हो रहा होगा…पर तभी मेरे मन में ना जाने कैसे विचार आने लगे जिनमे ऋतू को तड़पाते हुए रेहान के पापा चोद रहे हैं और उसकी चीखों से मेरे मन में एक अजीब सा सकूँ मिल रहा है…मेरे मन में अपनी बहन के लिए ऐसे विचार क्यों आ रहे थे…मैं भी नहीं जानता था…पर मैंने निर्णय कर लिया की आज ऋतू की चुदाई इस जानवर जैसे कसाई के लंड से करवा के रहूँगा और अपने लंड से उसकी खूबसूरत बीबी को भी चोदुंगा …
मैंने ऋतू के कान में धीरे से कहा “ऋतू ये दोनों शायद हमें कोई और समझ रहे हैं…क्या बोलती हो..करें क्या इनके साथ भी”
“पागल हो गए हो क्या आशु…देख रहे हो इस मोटे सांड को…ये तो मेरी चूत के परखच्चे उदा देगा..ना बाबा ना…इनको सही बात बताओ और चलो यहाँ से..” ऋतू फुसफुसाई.
“अरे तुम पागल हो गयी हो क्या…इतना अच्छा मौका है…ये मोटे लोगो का लंड बड़ा ही शानदार होता है ..तुम्हे भी मजा आएगा, …अगर ज्यादा लम्बा हुआ भी तो संभाल लेना..तुम तो अब इन सबमे चेम्पियन हो चुकी हो…मैं जानता हूँ तुम इसको भी संभाल सकती हो..प्लीस..तुम्हारी वजह से मेरा चांस भी चला जाएगा…देखो तो जरा रेहान की माँ को…कितनी सुंदर है…मान जाओ न प्लीस….” मैंने उससे याचना करते हुए कहा..
उसने थोड़ी देर सोचा…और फिर बोली “ठीक है आशु…पर मैं ये सिर्फ तुम्हारे लिए कर रही हूँ….” उसके चेहरे पर अभी भी भय था.
“मेरी अच्छी ऋतू…” और मैंने ख़ुशी के मारे उसे चूम लिया..
“ये क्या खुसर-फुसर लगा रखी है तुमने…” रेहान के पापा की कर्कर्ष सी आवाज हमारे कानो में पड़ी.मैंने जल्दी से प्लान बनाया और कहा
“जी कुछ नहीं…..दरअसल..हम तो आपको ये बताने के लिए आये थे की रेहान और हिना आज रात को उनके दोस्तों के साथ ही रहेंगे…उन्होंने बाहर reception पर मेसेज छोड़ा है आपके लिए ….,और हमें organisers ने आपके पास भेजा है…मौज मस्ती के लिए…” मैंने कहा
“चलो अच्छा हुआ की वो दोनों आज रात नहीं आयेंगे…” रूबी ने कहा ” लगता है वो अपने उन्ही दोस्तों के पास रह गए होंगे जिनकी वो दोनों कल से बातें कर रहे थे..”
मैं समझ गया की वो हमारी ही बात कर रहे हैं.
“तुम दोनों तो काफी छोटे लगते हो…तुम्हारी शादी हो चुकी है क्या…” रबी ने मुझसे पूछा.
“जी..दरअसल हम दोनों भाई बहन है., हमारी उम्र 18 और 21 साल की है,…और हम भी यहाँ अपने मम्मी पापा के साथ आयें हैं…” मैंने धीरे से कहा.
मेरी बात सुनते ही उन दोनों का मुंह खुला का खुला रह गया..
“लाहोल विल्ला कुवत …तुम दोनों भाई बहन हो और इन सब में कैसे शामिल हो गए ..” रूबी ने कहा.
“जी ..हमारे घर में इस तरह की कोई पाबंदी नहीं है…हम सभी लोग घर में एक दुसरे के साथ चुदाई कर लेते है…” मैंने उसका उत्तर दिया.
“क्या सच में…” वो दोनों हमारे मुंह देखने लगे, उन्हें अपने कानो पर विशवास ही नहीं हो रहा था की भारत देश में भी ऐसा हो सकता है…..पर मैंने नोट किया की घर में चुदाई करने की बात सुनते ही उन दोनों के भाव बदल से गए थे, रूबी के सूट के अन्दर से उभरते उसके उभारों पर उसके मोती जैसे निप्पल तन कर खड़े हो गए थे, और उसके पति का लंड भी पायजामे में तम्बू सा बना रहा था.
“देखा…मैं न कहता था..हमारा देश भी काफी तरक्की कर चूका है इन सब बातों में…तुम तो मुझे ऐसे ही डांटती रहती थी, जब भी मैंने हिना के बारे में तुमसे कहा था…” नाज़िर खान ने अपनी बीबी से कहा..मैं समझ गया की उसकी गन्दी नजर अपनी फूल सी बेटी हिना पर है और उसकी माँ रूबी को ये पसंद नहीं है.
“हम जब बाहर के लोगो के साथ ग्रुप सेक्स कर सकते हैं तो अपने परिवार में करने में क्या बुराई है…” नाजिर ने आगे कहा
“अब इन दोनों बच्चो को देखो…कितनी ख़ुशी से ये हमें अपने घर के बारे में बता रहे हैं..और तुम्हे भी तो अब ग्रुप सेक्स में काफी मजा आने लगा है…जब से तुम बाहर से चुदवाने लगी हो, कितना आनंद आता है तुम्हे भी तो, अगर यही आनंद तुम्हे रेहान दे तो कैसा लगेगा…” नज़र खान ने जैसे उसकी कोई नस पकड़ ली हो…
रूबी की आँखों में लाल डोरे तैरने लगे कुछ सोचते हुए और उसका एक हाथ अपने आप ही अपनी चूत पर चला गया और उसे दबाने लगा…आआआआआअह उसने एक सिसकारी मारी और अपने पति की तरफ देखते हुए बोली…”वो बाते फिर कभी discuss करेंगे…अभी तो इनके मजे लो…” और इतना कहते ही वो मेरे शरीर से किसी बेल की भाँती लिपट गयी और अपने ठन्डे और गीले होंठ मेरे होंठो पर रख कर उन्हें बुरी तरह से चूसने लगी…
नाज़िर खान भी आगे बड़ा और ऋतू को अपने से चिपका कर अपने गले लगा लिया..मैंने देखा की ऋतू उसके गले लगते हुए बुरा सा मुंह बना रही थी…शायद उसके अन्दर से आती दुर्गन्ध की वजह से.
मैंने अपने हाथ रूबी के उभारों पर टिका दिए…वो सिसक उठी…वाह क्या कमाल के चुचे थे उनके…मैंने गर्दन नीचे करी और उसके सूट के ऊपर से ही चमकते हुए मोटे निप्पल पर दांत गदा दिए..
अयीईईईईईईई … स्सस्सस्सस म्मम्मम्मम्म अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
उसने अपनी गर्दन पीछे करी और मेरे मुंह को अपनी छाती पर दबा दिया…मैंने अपने गीले होंठ और जीभ से उसके दाने को चुसना शुरू कर दिया…बड़ा ही मोटा दाना था उसका..मेरे चूसने से उसका सूट पारदर्शी सा हो गया और काले रंग का दाना चमकने लगा.
उसने मुझे फिर से ऊपर खींचा और मेरे होंठो को पागलों की तरह चूसने लगी…उसके मुंह से आह आह की आवाजें आ रही थी…
अह्ह्ह चुसो मुझे….अहह उफ्फ्फ अयीई ……
मैंने उसके मोटे होंठ चूस चूसकर सुजा से दिए थे..बड़ा ही मीठा रस निकल रहा था उनमे से..होंठ चूसते हुए मैंने उसके चुचे अपने हाथों से दबाने शुरू कर दिए..और धीरे -२ अपना एक हाथ नीचे लेजाकर उसकी चूत पर लगा दिया…उसकी गुफा में से जैसे गरम हवा बाहर आ रही थी.. उसपर हाथ लगते ही उसके होंठो का कडापन एकदम से गायब सा हो गया..और वो नरम मलाई जैसे हो गए..अब मुझे उसके होंठ चूसने में और भी मजा आ रहा था.
मैंने नजर घुमा कर देखा तो नाजिर भी मेरी बहन ऋतू के अपने पान वाले गंदे फटे हुए होंठो से चूस रहा था..ऋतू ने अपनी आँखें बंद कर रखी थी…साफ़ दिख रहा था की उसे मजा नहीं आ रहा है. वो अपने बड़े-२ हाथों से ऋतू की छातियाँ बड़ी बेरहमी से दबा रहा था..अचानक उसके जोर से दबाने की वजह से ऋतू की चीख निकल गयी…
आआआआअह्ह …अंकल धीरे….उसकी आँखों से आंसू निकल आये थे.
रूबी ने मेरा ध्यान फिर से अपनी तरफ खींचा और मुझे चाटने लगी..मैंने हाथ नीचे करके उसके कुरते को उठाया और सर से घुमा कर उतार दिया..उसने नीचे ब्रा नहीं पहनी हुई थी..और मोटे दूध जैसे स्तन उचल कर बाहर आ गए..मैं तो उन्हें निहारता ही रह गया..क्या माल था यार..मैंने अपने हाथों से उन दोनों दुर्लभ स्तनों को पकड़ा, दबाया, नापा, और फिर अपने मुंह में डालकर उन्हें चूसने लगा..
आआआआआआह …आआआआअह्ह …..अहह उफ्फ्फ अयीई …
रूबी ने फिर से एक सिसकारी मारी…मैंने अपना दूसरा हाथ उसके दुसरे खरबूजे पर रख दिया और उसे मसलने लगा..बड़ा ही मीठा स्वाद था उसके मुम्मे का..मेरे मुंह में जाकर उसका निप्पल और भी बड़ा हो गया था..आजतक मैंने सिर्फ आरती चाची का ही निप्पल सबसे बड़ा पाया था..पर ये तो उससे भी बड़ा था..मेरे मुंह में वो किसी टॉफी जैसा लग रहा था..मैं उसको चूस भी रहा था और अपने मुंह से उसकी छाती पर धक्के भी मार रहा था..
“इसे भी चुसो नाsssssssssssssssssss” रूबी ने कहा और मेरा मुंह अपने दुसरे वक्ष पर रख दिया..मैंने उसको भी उतनी ही तेजी से चुसना और काटना शुरू कर दिया…
मैंने नीचे उसकी चूत पर फिर से हाथ लगाया, वहां का एरिया पूरा गीला हो चूका था..मेरे हाथ भी चिपचिपे से हो गए..
मैंने उसकी सलवार का नाडा खोला और उसे नीचे गिरा दिया..
सलवार के नीचे गिरते ही उसने मुझे धक्का दिया और मुझे अपने पलंग पर गिरा दिया..और उसने तेजी से अपनी टांगो में फंसी हुई सलवार निकाली और काली रंग की पेंटी में खड़ी हो गयी…
बड़ी ही दिलकश लग रही थी..उसकी मोती मांसल टांगो में फंसी हुई काली कच्छी उसकी सुन्दरता में चार चाँद लगा रहे थे..उसके मोटे-२ चुचे मेरी आँखों के सामने झूल रहे थे..उसने झुक कर मेरी जींस के बटन खोले और उसे जोकी समेत नीचे खींच कर उतार दिया..मेरा लम्बा और गोरा लंड देखकर उसकी आँखें चमक उठी..उसने प्यार से उसे सहलाया..उसके ठन्डे हाथों का स्पर्श पाकर मैं कांप सा गया..और अचानक उसने गर्दन नीचे करके मेरे लंड को अपने मुंह में डाल लिया…उन्माद के मारे मेरी आँखें बंद हो गयी और मैंने अपना एक हाथ उसके सर के ऊपर रखकर अपने लंड पर दबा सा दिया..
वो बड़ी ही तेजी से मेरे लंड को चूसने और चाटने लगी..उसके मुंह से सादाप-२ की आवाजें आ रही थी.
वहां नाजिर ऋतू की टी शर्ट उतार कर और उसके ब्रा के स्ट्रेप को कंधे से नीचे गिरा कर उसके चुचे को बड़ी ही बेरहमी से दबा रहा था…उन्होंने अपना मुंह आगे किया और अपने काले -२ दांतों से ऋतू के निप्पल को दबा कर काट दिया..ऋतू अपने ऊपर हो रहे इन भयानक हमलो से सिसक रही थी उसके चेहरे पर उभरता दर्द साफ़ दिखाई दे रहा था..उसने याचना भरी नजरों से मेरी तरफ देखा पर मैंने उसे पुचकारकर नाजिर अंकल का साथ देने को कहा.
अचानक रूबी ने मेरे लंड को अपने मुंह से निकालकर मेरी बाल्स को अपने मुंह में भर लिया..और एक हाथ से वो मेरे लंड को ऊपर नीचे भी कर रही थी..मेरी दोनों गोटियाँ उसके मुंह में घुस रही थी..वो उन्हें किसी कैंडी की तरह से चूस रही थी..फिर उसने उन्हें भी बाहर निकाला और अपनी लम्बी जीभ से मेरी गांड के छेद को चाटने लगी…ये मेरे लिए बिलकुल नया अनुभव था..मुझे वहां बड़ी गुदगुदी सी होने लगी..उसकी गीली जीभ मेरे छेद को कुरेद रही थी..उसने अपने होंठ भी वहां पर चिपकाये…मुझे बड़ी घिन्न सी आई उनके ऐसा करने पर…लेकिन फिर थोडा -२ मजा भी आने लगा…
मेरे लंड को वो काफी तेजी से ऊपर नीचे कर रही थी..मुझे लगा की मेरा निकलने वाला है, इसलिए मैंने उन्हें एक झटका दिया और उठ खड़ा हुआ..और उन्हें बिस्तर पर गिरा कर उनकी टांगो को चोडा करके ऊपर उठा दिया..और फिर टांगो में फंसी हुई कच्छी को बड़ी बेरहमी से खींचकर उतार दिया..वो फट कर ही निकल पायी उन मोटी टांगो से..
अब मेरे सामने रूबी की सफाचट चूत थी..ऐसा लगता था की किसी कमसिन कलि की चूत है जिसपर अभी तक कोई बाल भी नहीं आया है..उसके अन्दर से रस की धार बाहर आ रही थी, मुझसे रहा नहीं गया और मैंने अपना मुंह नीचे करके गरमा गरम चूत पर रख दिया..वो चिल्ला पड़ी
आआआआआआआआआअह्ह्ह ऊऊऊऊऊऊऊऊऊह्ह उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़ …….होय्य्य्यय्य्य्य …….म्मम्मम्म
मैंने अपनी एक ऊँगली भी दाल दी चूत में. अपने होंठो से मैंने उनकी चूत की फांको को फैलाया और बीच में से चमकते हुए क्लिट को अपनी जीभ से दबा दबाकर कुरेदने लगा….वो तो पागल सी होकर मेरे मुंह को अपनी चूत पर कण्ट्रोल करती हुई घिसने लगी..सही में यारों..इतनी गरम औरत मैंने आज तक नहीं देखि थी..
उसकी चूत में से गरम फुहारें निकल रही थी और मेरा मुंह गिला हो चूका था..पर मैंने उसकी चूत में रस को चुसना नहीं छोड़ा..
आआअयीईईईईईईईई ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ फक फक फक,…….मर्र्र्रर गयीईईई आआआआआआआआह्ह्ह्ह
मैं समझ गया की अगर मैंने कुछ और देर की तो वो झड जायेगी…इसलिए मैं उठा और अपना लंड उनकी आग उगलती हुई चूत पर लगाया और एक धक्का दिया..उनकी चूत की चिकनाहट ही इतनी थी की मुझे ज्यादा जोर लगाने की जरुरत ही नहीं पड़ी..लंड अन्दर तक सरकता चला गया…
आआआआआआआआआआआआह्ह्ह म्मम्मम्मम्म….
आनंद के मारे उनकी आँखें बंद हो गयी और उनके चेहरे पर हलकी हंसी आ गयी थी..
मैं नीचे झुका और रूबी के गुलाबी होंठों को चूसने लगा…मैंने लंड उनकी चूत में ले जाकर छोड़ दिया था..कोई और हरकत ना पाकर उन्होंने नीचे से धक्के देने शुरू कर दिए…
उम्म्म्म चोदो ना…डाल कर रुक क्यों गए…..
मैंने किसी आज्ञाकारी बच्चे की तरह उनका कहना माना और अपने लंड के धक्के उसकी चूत में लगाने शुरू कर दिए..
उफ़ उफ्फ्फ आह आह आह आह फक फक फक आआआआअह्ह्ह ……
म्मम्मम स्सस्सस्सस………ओईए………अह्ह्हह्ह
मैंने एक हाथ से उनके चुचे को मसला और दुसरे को अपने मुंह में डालकर उनका दूध पीने लगा…
पी ले ….मेरा सारा दूध पी ले..बेटा ….मेरा बच्चा….रेहाआअन …….वो चिल्लाई….
मैं रेहान का नाम सुनकर चोंक गया..
वहां नाजिर भी अपनी पत्नी के मुंह से चुदाई के समय रेहान का नाम सुनकर रुक गया और फिर कुछ सोचकर उनके चेहरे पर कुटिल सी मुस्कान आ गयी..वो समझ गए की रूबी चुद तो मुझसे रही है पर उसके ख्यालों में उनका बेटा रेहान है …ये जानकार उन्हें कोई गुस्सा नहीं आया क्योंकि एक तरह से उनका रास्ता भी तो साफ़ हो गया था..हिना के लिए.
मैं भी सब समझ सा गया..पर मुझे इस बात से कुछ फर्क नहीं पड़ता था..वो मुझे रेहान बुलाय या आशु..मुझे तो बस उनकी रसीली चूत से मतलब था..इसलिए मैंने और तेजी से रूबी की चुदाई करनी शुरू कर दी..
आआआअह्ह अआः ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ ऑफ़ ……अयीईईईईई……..
नाजिर भी ऋतू की तरफ फिर से मुड़ा और उसके गोरे जिस्म को फिर से चूसने लगा…अब तक ऋतू के सारे कपडे उतर चुके थे..नाजिर ने भी अपने ऊपर के कपडे उतार दिए थे..उसका भीमकाय शरीर काफी भयानक सा लग रहा था, उसकी छाती औरतों जैसी बड़ी होकर झूल सी रही थी…और वो ऋतू का सर पकड़कर अपने निप्पल्स को जबरदस्ती उसके मुंह में ठूस रहा था…वहां पर काफी घने बाल थे..ऋतू को उलटी सी आ रही थी, वो शायद काफी दिनों से नहाया भी नहीं था, उसके जिस्म से बड़ी ही गन्दी स्मेल आ रही थी, ऋतू के पास और कोई चारा नहीं था उसने बड़ी मुश्किल से अपना मुंह खोला और उसके भद्दे से लटकते हुए मोटे निप्पल को मुंह में लेकर चूसने लगी..शरीर की गन्दी महक अन्दर जाते ही उसके नथुने फड़क उठे..पर वो कुछ भी ना कर पायी क्योंकि नाजिर ने उसके सर को पीछे से अपने सीने पर दबा रखा था. वो बेचारी अपने भाई के लिए वो सब करने को बाधित थी.
थोड़ी देर चूसने के बाद उसने ऋतू को पीछे किया..वो सांस भी नहीं ले पा रही थी…खुली हवा पाकर वो ऊपर मुंह खोलकर सांस लेने लगी..नाजिर ने अपनी पेंट को नीचे सरकाया और पूरा नंगा होकर खड़ा हो गया..उसका लम्बा लंड देखकर तो मैं भी घबरा गया..काला सांप था एनाकोंडा जैसा…वो बुरी तरह से फुफकार रहा था…ऋतू की तो हालत ही पतली हो गयी ये सोचकर की उसे इस लंड से चुदना पड़ेगा..उसने फिर से मेरी तरफ देखा पर मैंने अपना सर घुमा लिया और रूबी के रूबी जैसे चुचे चूसने लगा..
रूबी ने मुझे नीचे किया और झटके से मेरे ऊपर आकर बैठ गयी..अब उसके उछलते हुए मोटे मुम्मे मेरे सामने थे मैंने उसकी बाँहों को पकड़ा और उसे नीचे खींचा ..उसके दोनों खरबूजे मेरे मुंह पर आ गिरे और मैं उन्हें ऊपर उछल उछल कर पकड़ने की कोशिश करने लगा….उसे भी इस गेम में बड़ा मजा आ रहा था..मैंने हाथ नीचे करके उसकी मोटी गांड को जकड लिया और दबाने लगा..मैंने एक ऊँगली नीचे करी अपने अन्दर जाते लंड के साथ जोड़कर उसकी चूत में डाल दी..मेरी ऊँगली पर अन्दर की चिनाई लग गयी और मैंने वोही ऊँगली उसकी गांड के छेद में डाल दी…उसका पूरा शरीर अकड़ गया और वो और तेजी से मेरे लंड को कुचलने लगी.
वहां नाजिर खान ने ऋतू को अपने सामने बैठाया और अपना काला नाग उसके मुंह में डाल दिया..उसका सुपाडा ही इतना बड़ा था की ऋतू का मुंह फटने सा लगा..उसके मुंह में सिर्फ आगे का हिस्सा जा कर फंस सा गया..अपने काले लंड को मासूम सी, बेटी जितनी उम्र की लड़की के मुंह में फंसा देखकर , नाजिर को बड़ा सुकून सा मिला और अगले ही पल उस कसाई ने एक तेज झटका मारा और अपना आधा लंड ऋतू के मुंह के अन्दर तक उतार दिया….
ग्गुन गूं …..गूं….की आवाज ही आ पाई ऋतू के गले से..
और उसकी आँखों से अश्रु की धार फिर से बह निकली..वो अपनी नाक से ज्यादा से ज्यादा सांस लेने की कोशिश कर रही थी पर छोड़ने का रास्ता तो बंद था इसलिए उसी रास्ते से सांस छोड़ भी रही थी..पर वो ज्यादा देर तक ऐसा नहीं कर पायी और उसने खांसते हुए नाजिर के लंड को बाहर धकेल दिया..
प्लीस…ऐसा मत करो अंकल…वो रो रही थी…मैंने जानकार उस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया और रूबी की चूत मारने में लगा रहा.
रूबी अब मुझे रेहान कह कर ही बुला रही थी…
हां रेहान चोद अपनी अम्मी को…हाँ ऐसे ही….अयिओईईइ चोद बेटा…डाल अपना लंड अपनी अम्मी की चूत में….आआह्ह हां बेटा…चोद अपनी रांड जैसी अम्मी की चूत को…वो पागलों की तरह बदबदाये जा रही थी और मेरे लंड पर उछल उछल कर उसका कचुम्बर बना रही थी….जल्दी ही रूबी की चूत ने गर्म लावा उगलना शुरू कर दिया…
आआआआआआह्ह्ह्ह बेटा……चोद मुझे……मैं तो गयीईईईईईईईइ………
और वो गहरी साँसे लेती हुई मेरी छाती पर गिर पड़ी…
थोड़ी देर तक उसकी कमर पर हाथ फेरते रहने के बाद वो उठी और बेड पर घोड़ी बन कर लेट गयी…उसकी उठी हुई गांड बड़ी ही दिलकश लग रही थी…मैंने उसके गांड के छेद को देखा तो मेरे लंड का ईमान डोल गया और मैंने अपना लंड उसके पीछे वाले छेद पर टिका दिया…वो समझ गयी और एक तेज धक्का पीछे की तरफ मारा और मेरा लंड अपनी कसी हुई गांड के छेद में उतार लिया…
आआआआआआआआआअह्ह्ह्ह मैं हलके से चिल्लाया और उसके गोल ग्लोबस को पकड़कर दबाने लगा और धक्के मारने लगा..
आआआआआआअ आःह्ह्ह ऑफ ऑफ ऊऊऊ ऊऊऊऊअ
जल्दी ही इसकी गांड के छेद में मैंने गोलियां दागनी शुरू कर दी..
आआआआआअह्ह्ह मैं गया……….आआआआआआअह्ह और मैं उनकी कमर पर चुमते हुए ढेर हो गया…
तभी मैंने एक तेज चीख सुनी…वो चीख ऋतू की थी…नाजिर उसकी चूत को बुरी तरह से चाट रहा था…
अब मैं बेड पर रूबी के साथ लेट गया और हम दोनों उन दोनों की चुदाई का खेल देखने लगे..
नाजिर तेजी से अपनी मोटी और खुरदुरी जीभ से मेरी ऋतू की चिकनी चमेली जैसी चूत को चाट रहा था..उसके बड़े से मुंह के आगे ऋतू की खुली हुई चूत किसी खिलोने की तरह लग रही थी, ऋतू की दोनी जाँघों को चोडा करके नाजिर अंकल ने अपनी घनी दाड़ी वाला मुंह उसकी चूत पर झुका रखा था , अपने होंठो से ज्यादा वो अपने दांत यूस कर रहे थे, और ऋतू की चूत के फैले हुए होंठो को अपने मुंह में डालकर वो ऊपर तक खींच-खींचकर छोड़ देते थे जिसकी वजह से ऋतू की चीखे निकल रही थी, उसने नाजिर के सर को पीछे की तरफ से पकड़ा हुआ था, और दर्द होने पर वो उनके बाल खींच देती थी, पर इस बात से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ रहा था..
नाजिर ने अपनी मोटी उँगलियों से उसकी गुलाबी चूत के किवाड़ खोले और उंदर से झांकती उसकी क्लिट को अपने मुंह में भर लिया..नाजिर का मुंह अन्दर तक जाने की वजह से उसकी दाड़ी के लम्बे बाल भी उसकी चूत की अंदरी दीवारों को छु रहे थे, जिसकी वजह से उसे बड़ी गुदगुदी सी हो रही थी, पर जैसे ही नाजिर ने क्लिट को मुंह में भींचा उसकी साँसे ही रुक गयी..नाजिर ने क्लिट को अपने दांत के नीचे दबा लिया, पर काटा नहीं, पर ऋतू को लगा की वो तो गयी..उसे पीड़ा के साथ – २ मजा भी आ रहा था..उसके मुंह से एक लम्बी आनंदमयी सिसकारी निकली..
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह स्स्सस्स्स्सस्स्स म्मम्मम्मम धीरीईईईए ……अंकल…
नाजिर ने अपना मुंह ऊपर उठाया…और बोला…
“मुझे अब्बा बोलो…बेटी…” उसकी बात सुनकर मैं, रूबी और हिना तीनो चोंक गए,
मैं समझ गया की जिस तरह रूबी ने मुझे रेहान समझ कर चुदवाई करवाई है उसी तरह से अब नाजिर भी ऋतू को अपनी सगी बेटी हिना समझ कर चोदना चाहता है और वो ऋतू को हिना का रोल प्ले करने के लिए कह रहा है…मजा आएगा..मैंने सोचा..और रूबी की तरफ देखा…वो मेरे मुरझाये हुए लंड से अपनी मोटी गांड चिपकाये लेटी थी..और उनकी बातें सुनकर उसने अपनी मोटी गांड को मेरे लंड पर जोर से दबा दिया…यानी वो भी इस बात को सुनकर उत्तेजित हो रही थी.
“हाआआअन्न अब्बाआआआ ऐसे ही…..चुसो अपनी हिना की चूऊऊऊऊऊत ………आआआआआह्ह्ह ” ऋतू जोर से नाजिर के बाल पकड़कर चिल्लाई…
ऋतू के मुंह से अब्बा शब्द सुनते ही नाजिर के चेहरे पर अजीब तरह का सकून आ गया, उसने अपना मुंह उसकी गीली चूत पर से उठाया और बोला..
“मेरी हिना……मेरी जान……म्मम्मम्मम ” और वापिस उसकी बहती हुई चूत में डुबकी लगा कर मीठा पानी पीने लगा.
ऋतू उर्फ़ हिना बेड के किनारे पर अपनी एक कोहनी की मदद से आधी लेटी हुई बुरी तरह से मचल रही थी…
और अचानक वो जोर से चिल्लाई…..आआआआआआआआयीईइ अब्बूऊऊऊउ मैं तो गयीईईईईईईइ अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
और मैंने और रूबी ने देखा की उसकी चूत से एक फुव्वारा सा फूटा जो लगभग एक फूट ऊपर उछल कर नाजिर के मुंह को पूरा भिगो गया..नाजिर ने अपना बड़ा सा मुंह खोलकर उडती हुई बोछारों को अपने मुंह में लेने की कोशिश की…और अंत में शांत होते ज्वालामुखी के मुंह पर फिर से अपना मुंह लगाकर अन्दर का लावा चूसने लगा..
ऋतू की हालत पस्त हो चुकी थी, वो इस बुरी तरह से आज तक नहीं झड़ी थी..
अब नाजिर ऊपर खड़ा हो गया और ऋतू को टांगो को और चोडा करके खड़ा हो गया.
अपने सामने का नजारा देखकर वो कांप गयी, नाजिर का लंड उसकी चूत के सामने खड़ा हुआ फुफकार रहा था..उस लंड का साइज़ उसके चेहरे से भी बड़ा था..
नाजिर ने अपने लंड को उस छोटी सी चूत के मुहाने पर रखा और एक धक्का मारा..
आआआयीईईईईईईईईइ वो जोर से चिल्लाई..
लंड अन्दर जाने का नाम ही नहीं ले रहा था, लंड ने केवल बाहरी दिवार पर टक्कर मारी थी जिसकी वजह से ऋतू चिल्लाई थी…उसने मेरी तरफ देखा और बोला…
“ओये लोंडे..यहाँ आ और मेरी मदद कर..” मैंने ऋतू की तरफ देखा..वो रो रही थी..
मैं उठा और उनके पास जा कर बैठ गया…मैंने देखा धक्के की वजह से ऋतू की चूत के साइड में लाल निशान बन गया है..मैं ऋतू के दर्द को समझ गया…मैंने कांपते हुए हाथो से नाजिर के मोटे लंड को पकड़ा..वो किसी मोटे खीरे जैसा था..और काफी गर्म भी..ये मेरा पहला अवसर था किसी ओर मर्द के लंड को पकड़ने का..मैंने उसे ऋतू की चूत के बिलकुल बीच में रखा..ऋतू ने अपने एक हाथ से मुझे कस कर पकड़ लिया और बोली…
“नहीं आशु…प्लीस…बड़ा दर्द हो रहा है..अंकल को बोलो की वहां ना डाले…” वो मेरी तरफ देखकर गिडगिडा रही थी…
पर मैंने उसकी बात को अनदेखा करते हुए नाजिर के लंड को ऋतू की चूत के बीचो बीच रख दिया और नाजिर को इशारा करके धक्का मारने को बोला…और अगले ही पल ऋतू दर्द से दोहरी हो कर मुझसे बुरी तरह से लिपट गयी…
अयीईईईईईईईईईईई मर्र्र्रर्र्र्र गयी…………..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऑफ …
उयीईईईईईई मार दालाआआआआअ …
मैंने लंड से अपना हाथ हटा लिया…ऋतू बुरी तरह से रो रही थी….मैंने आगे बढकर उसके चेहरे को थमा और उसके होंठो को चूसने लगा…
उसके चेहरे पर आये पसीने और आंसुओं की वजह से पूरा चेहरा गीला था, मैंने जब उसके होंठो को चुसना शुरू किया तो सारा खट्टापन मेरे मुंह में जाने लगा पर मैंने चुसना नहीं छोड़ा…थोड़ी देर बाद ऋतू भी मेरे होंठों को चूसने लगी…वो अपने दर्द को भूल सी चुकी थी पर तभी उस कसाई ने एक और शोट मारा और अपना आधे से ज्यादा लंड उसकी चूत में उतार दिया…
ऋतू ने मेरे होंठो को छोड़ दिया और फिर से चिल्ला पड़ी…
अयीईईईईईईई मम्मी,.,……मरर गयीई………अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
और फिर तो नाजिर रुका ही नहीं उसने अपना लंड पूरा बाहर खींचा और फिर से अपनी पूरी ताकत लगा कर तेज धक्का मारकर अपना पूरा 9 इंच का मोटा लंड ऋतू की चूत में उतार दिया…ऋतू की आँखों के सामने तारे घूम गए..
उसकी आँखें फ़ैल कर चोडी हो गयी…उसने नीचे झुक कर देखा तो उस दानव का पूरा लंड अपनी छोटी सी चूत में फंसा हुआ देखकर उसकी रुलाई फुट गयी….निकालो इस्से…..बड़ा दर्द हो रहा है…अंकल…प्लीस…….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
नाजिर ने अपना लंड बाहर खींच लिया…ऋतू की सांस में सांस आई पर अगले ही पल वो पूरा लंड वापिस अन्दर डाल दिया..और इस तरह उसकी रेल गाडी जो चली फिर तो उसने रुकने का नाम ही नहीं लिया..
मेरी आँखों के सामने मेरी बहन उस कसाई के मोटे लंड से चुद रही थी, उसके मोटे -२ चुचे ऊपर नीचे हर धक्के से इतनी जोर से हिल रहे थे की लगता था की वो उसके बदन से अलग ही हो जायेंगे…बड़े ही तेज धक्के मार रहा था नाजिर..अगले 15 मिनट तक सिर्फ ऋतू की चीखे ही गूँज रही थी उस कमरे में..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ऑफ ओफ्फ्फ ओफ्फफ्फ्फ़ अयीईईईईइ म्मम्मम ओईई……..अह्ह्ह्हह्ह
अह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ नहीईई अह्ह्ह्हह्ह हयीईइ हयीईइ ओह ओह ओह ओह ओह ओह …….
ओह माय गोद्द्द्दद्द्द्द…. अह्ह्ह्ह ओह ओह हो हो हो ऊऊओह…….
और धीरे धीरे उसकी चीखें सिस्कारियों में बदलने लगी….
म्म्म्मम्म्म्मम्म अह्ह्ह्ह और तेज मारो प्लीस……अब्बूउ स्स्स्सस्स्स्स और तेज चोदो अपनी हिना को…..अह्ह्ह्हह्ह ,,,,,म्मम्मम्मम्म मजा आ गया……
अब ऋतू की चूत में वो मोटा लंड अपना कमाल दिखा रहा था..उसकी चूत को मोटे लंड के साइज़ ने अपने अन्दर फिट कर लिया था…
ऋतू ने मेरे हाथ की उँगलियों को अपने मुंह में डाला और लंड की तरह उन्हें चूसने लगी….
म्मम्मम्मम अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह याआआआअ म्मम्मम्म ……..
चोदो मुझे…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
रूबी भी उठ कर आगे आ गयी और अपने पति को ऋतू की चुदाई करते हुए देखकर, मेरी कमर से अपने मोटे मुम्मे रगड़ने लगी…
उसकी चूत में फिर से खुजली होने लगी थी..उसने आगे हाथ करके मेरे लंड को थाम लिया और हिलाने लगी, मेरा लंड खड़ा होकर ऋतू के पेट को छु रहा था, रूबी के द्वारा हिलाने से मेरे लंड का सुपाड़ा ऋतू के पेट को धक्के मार रहा था..
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अह्ह्हह्ह अयीईईई ऋतू चिल्लाती जा रही थी.
मैंने भी अपना एक हाथ पीछे करके रूबी की चूत में अपनी तीन उँगलियाँ एक साथ डाल दी…वो कसमसा गयी और मेरे लंड को और तेजी से हिलाने लगी….
मेरा एक हाथ ऋतू के नर्म मुंह में था और दूसरा रूबी की गर्म चूत में.
नाजिर तो जैसे पागल ही हो गया इतनी कसी हुई चूत पाकर….
उसके हर धक्के से ऋतू के अस्थि पंजर हिल रहे थे…और अंत में उस कसाई के लंड ने झाड़ना शुरू कर दिया…वो जोर से चिल्लाया..
आआआआआआह्ह्ह ले मेरी बच्ची……मेरी हिना….ले अपने अब्बा का रस….अपनी चूत में…अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….
ऋतू तो ना जाने कितनी बार झड चुकी थी पर जब अपने अन्दर लावे का तूफ़ान आते देखा तो एक और बार झडती हुई वो चिल्लाने लगी…
आआआआआह्ह्ह अब्बूऊऊऊ लऊऊऊ अपना रस अपनी हिना की चूत में……आआआआआआह्ह्ह्ह
और तभी मेरे लंड से भी पिचकारियाँ निकालनी शुरू हो गयी और वो नीचे लेटी ऋतू के चेहरे और छाती पर गिरने लगी….
आआआआआआह्ह्ह ग्र्रीईईईए ……अम्म्म्मम्म्म्म ……
मैंने अपनी उँगलियाँ रूबी की चूत में फंसा कर उसे उठा सा लिया था…उसकी क्लिट मेरी उँगलियों में दब गयी और उसने भी अपना गरमा गरम पानी मेरे हाथ पर छोड़ दिया..
नाजिर ने अपना लंड बाहर निकाला और उसके निकलते ही ऋतू की चूत में से सफ़ेद पानी लाबकर बहार की और आने लगा…पूरा बिस्तर गिला हो गया…
फिर हम सब उठे और अपने बदन को साफ़ करके वापिस बेड पर आकर लेट गए..
अपनी इतनी क्रूर चुदाई से ऋतू से चला भी नहीं जा रहा था..उसकी चूत की परतें अभी तक खुली हुई थी…वो वापिस बिस्तर पर आकर लेट गयी..मैंने देखा नाजिर का लंड फिर से अंगडाई लेने लगा है…हम दोनों उस रात वहीँ पर रहे, मैंने रूबी की 4 बार चुदाई करी और नाजिर ने तक़रीबन 6 बार ऋतू को हिना बनाकर चोदा.
सुबह तक हम सभी एक ही बिस्तर पर नंगे पड़े हुए सो रहे थे. सबसे पहले मेरी आँख खुली.
सुबह तक हम सभी एक ही बिस्तर पर नंगे पड़े हुए सो रहे थे. सबसे पहले मेरी आँख खुली.
मैंने अपने लंड पर गीलापन महसूस किया तो मैंने नीचे देखा रूबी मेरे लंड को चूस रही थी, उसकी उठी हुई गोल गांड दिल की आकृति बना रही थी, मैंने हंस कर उसके सर पर हाथ फेरा तो उसने मेरे लंड को छोड़ कर मेरी बाल्स को अपने मुंह में भर लिया..तभी साथ लेटी ऋतू के मुंह से सिसकारी की आवाज आई मैंने देखा तो पाया की नाजिर भी नीचे लेता हुआ ऋतू की चूत को चाट रहा है…हम दोनों भाई बहन बेड पर लेटे हुए अपनी खातिरदारी करवा रहे थे.
मैंने हाथ बड़ा कर ऋतू के दायें मुम्मे को दबाना शुरू कर दिया..मैंने नोट किया की पिछले तीन दिनों में उसके मुम्मे का साइज़ बड़ चूका है..या शायद ये मेरा भ्रम है खेर मैंने उसके निप्पल को अपनी उँगलियों में दबाया और उन्हें उमेठना शुरू कर दिया…वो उत्तेजना के मारे दोहरी हो कर मेरे पास खिसक आई और मेरे ऊपर आधी लेट गयी जिसकी वजह से उसके मोटे झूलते हुए मुम्मे मेरी चोडी छाती पर दब गए, उसने अपने गीले होंठो से मुझे चुसना शुरू कर दिया..अब उसकी उभरी हुई गांड नाजिर के सामने थी, उसने कोई मौका नहीं गंवाया और अपना खड़ा हुआ लंड उसके पीछे टिका दिया, गांड पर मोटे लंड का दबाव पड़ते ही उसने नाजिर को रोकने की चेष्ठा की..पर तब तक देर हो चुकी थी
“अयीईईईईईईईईईईईईईईईइ वहां नहीईईईईईईइ ” वो मेरे ऊपर झुकी हुई चिल्लाई..
नाजिर का लंड उसकी गांड के अन्दर तक जा चूका था.
उसके मुम्मे मेरे चेहरे पर झूल रहे थे, मैंने उसके निप्पल को अपने मुंह में भरा और चुसना शुरू कर दिया..
नीचे लेटी हुई रूबी भी उठ खड़ी हुई और मेरे ऊपर आकर अपनी चूत को मेरे लंड से मिलाया और बैठ गयी धम्म से..
अह्ह्हह्ह्ह्हह्हsssssssssssss एक लम्बी सिसकारी मारी रूबी ने अपनी आँखें बंद करके और ऊपर नीचे होने लगी..
मैंने एक हाथ ऊपर करके रूबी के दोनों चूचो पर फिरना शुरू कर दिया..और दुसरे हाथ से ऋतू के चुचे एक साथ दबाने शुरू कर दिए..
मैंने मन ही मन सोचा, कितना लक्की हूँ मैं, मेरे दोनों हाथों में दो दो मुम्मे हैं.
ऋतू की गांड का छेद काफी टायट था, इसलिए उसे काफी तकलीफ हो रही थी, ऋतू ने अपना एक हाथ नीचे करके अपनी चूत की क्लिट को दबाना शुरू कर दिया, और जल्दी ही उसकी चीखें सिस्कारियों में बदल गयी.
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ अयीईइ म्मम्मम्मम्म …
रूबी भी मेरे लंड पर उछलती हुई बडबडा रही थी
आआः रेहाआआआअन ….चोदो अपनी अम्मी को….अह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह
चोद बेटा अपनी अम्मी की चूत को…ये तेरी है…रोज चोदा कर इस्से….अह्ह्ह्ह
मैंने भी नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए.
ले हरामजादी….कुतिया….अपने बेटे से चुदवाना चाहती है….साली…..भेन चोद ….रंडी साली…
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह तेरी माँ की चूत….अपने रेहान का लंड लेना चाहती है अपने भोंसड़े में…हांन्न
बोल कुतिया….कब से चुदवाना चाहती है अपने रेहान से….बोल भेन की लोड़ी..तेरी माँ की चूत …बोल कमीनी..आआह्ह्ह
मेरी गालियाँ सुनकर वो और ज्यादा उत्तेजित हो गयी…और बोली
हाआआआअन्न मैं चुदवाना चाहती हूँ रेहान सेsssssssssssss….जब से मैं उसका ऑफ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ लम्बा और मोटा लंड ओह्ह्ह आआआह देखा है जब वो सो रहा था…आआआह्ह्ह तब से मैं अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …..चुदवाना चाहती हूँ….sssssssssssssssssssssss ..
चोद बेटा अपनी अम्मी को….आआआआआआआआह कर दे मेरे अरमान पुरे……आआआआआआआअह्ह्ह
मैंने उसके दोनों कबूतरों को जोर से पकड़ा और चिल्लाया..
ले फिर ….कुतिया,.,,…ले अपने रेहान का लंड अपनी चूत में…..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह आज तो मैं तेरी चूत का बेन्ड बजा दूंगा…भेन की लोड़ी…बड़ा शोंक हैं न बेटे का लंड लेने का…ले फिर आः आआः आआआआअह …..
और मैंने उसकी चूत में अपना लंड किसी पिस्टन की तरह अन्दर बाहर करना शुरू कर दिया.
अपनी बीबी की बातें सुनकर नाजिर को भी जोश आ गया और वो अपने लंड को ऋतू की गांड में तेजी से डालने लगा…अब ऋतू को भी मजा आ रहा था…वो चिल्ला पड़ी…
हाआआआआन अब्बू …..और तेज डालो अपना मोटा लंड मेरी गांड में….आआआआअह चोद दो अपनी हिना की गांड ….. ये हमेशा तुम्हारी है….रोज चोदा करो मुझे अब्बू……आआआअह बड़ा मजा आ रहा है…और तेज और तेज…ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ……
वो मेरे ऊपर अधि लेटी हुई चिल्ला रही थी और अपनी चूत के दाने को बुरी तरह से मसल भी रही थी…
नाजिर ने भी धक्के देते हुए बोलना शुरू कर दिया..
ले ईईईईईईईई मेरी बच्ची…..हिना…..क्या गांड है तेरी….जब भी तुझे देखता हूँ तो मेरा लंड खड़ा हो जाता है……आआआआआह्ह्ह तेरी गांड में अपना लंड डालना चाहता हूँ……आआआआआह्ह ले कुतिया…अपने बाप का लंड अपनी गांड में…ले……………आआआआआआआआआआआअह्ह्ह …..
उसके धक्को की वजह से और अपनी चूत को खुद ही खुजलाने की वजह से जल्दी ही ऋतू की चूत ने पानी छोड़ना शुरू कर दिया….और वो तेज आवाज करती हुई मेरे ऊपर गिर पड़ी..
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अब्बू मैं तो गयीईईईईईईईइ ……अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
और उसके पानी की गर्माहट अपनी जाँघों पर पाकर नाजिर के लंड ने भी गोले दागने शुरू कर दिए ऋतू की गांड के अन्दर…
आआआआआआआअह्ह्ह ले बेटी अपने बाप का रस ………आआआआआआह्ह्ह ….
वो दोनों निढाल होकर साइड में लुडक गए…
अब मैंने अपना ध्यान रूबी की तरफ किया और उसके दोनों चुचे स्टेरिंग की तरह पकडे और अपना ट्रक दौड़ा दिया उसके हाईवे पर…
आआआआआआआआअह्ह्ह आआआआआआअह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ
उसकी सिस्कारियां गूँज रही थी पुरे कमरे में.
उसने अचानक अपनी कमर को पीछे किया और मेरे लंड के ऊपर झड़ना शुरू कर दिया.
मेरा लंड भी उसकी चूत की गर्मी में पिघल गया और उसके अन्दर से गर्म पानी बाहर आकर उसकी चूत में बोछारें करने लगा.
वो भी मेरे सीने पर गिर पड़ी.
हम सभी खड़े हुए और एक साथ नहाने चले गए.
अन्दर जाकर भी हमने शावर के नीचे खूब मन लगा कर चुदाई करी.
अब मुझे ये तो पता चल ही गया था की नाजिर और रूबी अपने बच्चों के साथ सेक्स करना चाहते हैं, इसलिए मेरे मन में एक बिज़नस प्लान आने लगा..
रेहान और हिना को उनके पेरेंट्स से चुदवाना काफी आसान था, पर मैं इस बार ये काम मुफ्त में नहीं करना चाहता था, इसलिए मैंने प्लान बनाया और ऋतू को समझाया, वो भी मेरे प्लान को समझ कर मुस्कुराने लगी.
कपडे पहन लेने के बाद हम जब चलने लगे तो मैंने नाजिर से कहा “अंकल …आप लोगो के साथ काफी मजा आया…और रात की बातें देखकर लगता है की आप दोनों अपने बच्चों के साथ भी ये सब करने को तैयार हो…हैं न…”
रूबी बीच में ही बोल पड़ी “अरे नहीं बेटा…वो तो बस ऐसे ही…उस समय की बात कुछ और थी…हमने तुम दोनों के साथ अपनी फ़ंतासी शेयर करी है..इसका ये मतलब नहीं की हम सच में ऐसा करना चाहते हैं…”
मैंने कहा “और अगर मैं आपकी ये फ़ंतासी को सच कर दूं तो…”
“क्या सही में…तुम ऐसा कर सकते हो…” नाजिर ने अपनी गोल आँखें मेरी तरफ घुमा कर कहा.
“हाँ…मैं ऐसा कर सकता हूँ….मगर इसके लिए आपको मुझे कुछ इनाम देना होगा…” मैं बोला.
“जो तुम कहोगे वो हम देंगे…तुम जितना भी चाहो…बोलो क्या चाहिए तुम्हे….” उसने लगभग हडबडाते हुए कहा..
“एक लाख रूपए…”मैंने कुछ सोचते हुए कहा…
उसने झट से अपनी अलमारी से मुझे एक हजार के नोटों की गड्डी निकाल कर दे दी ..
मैंने उन्हें अपने काटेज का पता दिया और उन्हें एक घंटे बाद वहां आने को कहा और आगे का प्लान समझाया…
वो दोनों समझ गए और एक घंटे बाद आने का वादा करके हमें वहां से विदा किया.
मैं अब आगे की योजना बनाता हुआ अपने कमरे की तरफ जा रहा था.
मैं अपनी जेब में लाल नोटों की गर्मी पाकर फुला नहीं समां रहा था.
ऋतू और मैं वापिस अपने काटेज पहुंचे
वहां का नजारा देखकर समझते देर न लगी की रात को क्या बवाल हुआ होगा वहां पर.
आरती चाची अपनी गांड चोडी करे उलटी लेटी हुई थी, उनकी गांड के छेद से अभी तक किसी का माल रिस रहा था
मेरी माँ पूर्णिमा रेहान से ऐसे चिपक कर सो रही थी जैसे की वोही उनका सब कुछ है..
रेहान माँ को अपने सीने से दबाये गहरी नींद में सो रहा था.
नेहा अपने पापा के लंड पर अपनी गांड को दबाये हुए सो रही थी और चाचू का हाथ उसके बड़े-२ मुम्मो पर था.
हिना का तो सिर्फ चेहरा ही नजर आ रहा था, वो पापा के नीचे पूरी तरह से दबी हुई छिप सी गयी थी, नंगी पड़ी हुई.
इस हमाम में सभी नंगे थे.
मैंने जोर से सभी को गुड मोर्निंग कहा.
सभी लोग जाग तो रहे थे पर आलस के मारे अपनी जगह से हिल नहीं रहे थे.
ऋतू ने वहां का नजारा देखा तो उसकी चूत में फिर से खुजली होने लगी.
मेरा लैंड भी अकड़ने लगा और मेरे पायजामे में टेंट बना कर खड़ा हो गया.
पर अभी इन सब बातों के लिए समय नहीं था, 1 घंटे बाद नाजिर और रूबी आने वाले थे हमारे काटेज में और उनके आने से पहले मुझे रेहान और हिना को उनके लिए तैयार करना था, पेमेंट जो ले चूका था..
सभी लोग धीरे-२ उठे और अपने कपडे पहन कर सोफे पर बैठ कर बातें करने लगे.
मैं हिना और रेहान को अपने साथ लेकर अपने कमरे में चला गया.
वहां जाकर मैंने रेहान से पूछा “और कैसा लगा तुम्हे कल रात को…”
रेहान : “भाई सच में कल रात जैसा मजा तो आज तक नहीं आया, मैं तुम्हारा ये एहसान कभी नहीं भूल पाउँगा.”
मैं : “मैंने देखा तुम बड़े मजे से मेरी मम्मी के साथ लिपटे हुए सो रहे थे, कल रात कितनी बार मारी तुमने उनकी…सच बताना..”
रेहान (थोडा शर्माते हुए) : “सच बोलू तो मैंने कल रात सभी को चोदा, नेहा, उसकी माँ और हिना को भी पर जितना मजा पूर्णिमा आंटी के साथ आया, उतना किसी के साथ भी नहीं आया…उनका एक्सपेरिएंस ही ऐसा है की वो सेक्स का पूरा मजा लेना जानती है और देना भी “
हिना : “हाँ आशु, भाई जान सही कह रहे हैं, रेहान के साथ -२ मैंने भी लगभग सभी से अपनी चूत मरवाई पर जो मजा तुम्हारे पापा के साथ आया वो कहीं और नहीं..”
मैं : “मैं भी तुम लोगो को कुछ बताना चाहता हूँ, …दरअसल कल रात हम दोनों तुम्हारे अब्बू और अम्मी के साथ थे और हमने भी उनके साथ सभी मजे लिए..” मैंने उन दोनों के चेहरों की तरफ देखते हुए कहा.
हिना : “क्याआआआआअ sssssssssssssssssssssss मतलब तुमने मेरी अम्मी को चोदा और ऋतू ने मेरे अब्बा से अपनी चूत मरवाई..”
ऋतू : “हाँ ये सच है..जैसे तुमने हमारे मम्मी पापा के साथ मजे लिए , हमने तुम्हारे मम्मी पापा के साथ लिए.”
रेहान अपना मुंह फाड़े हमारी बातें सुन रहा था.
हिना ने चहकते हुए ऋतू से पूछा : “क्या सचमें तुमने मेरे अब्बू के साथ मजे लिए, बताओ न, कैसा एक्सपेरिएंस रहा तुम्हारा”
ऋतू : “हाँ…मुझे तो बहुत मजा आया, तुम्हारे अब्बू जैसा लंड तो मैंने आज तक नहीं देखा, उन्होंने मेरी चूत और गांड का बेन्ड बजा दिया कल रात को, पर मजा भी बहुत आया…मेरा तो मन वहीँ अटक कर रह गया है उनके लम्बे और मोटे लंड के ऊपर…”
उसकी बातें सुनकर हिना की टी शर्ट में कैद बिना ब्रा के उसके मोटे मुम्मो पर उसके गोल-२ दाने चमकने लगे, और वो अपनी नजरें ऊपर करके कुछ सोचने सी लगी, मैं समझ गया की ये चिड़िया तो फंस ही गयी समझो..
मैं : “और तुम्हारी अम्मी के बारे में मैं क्या कहूँ….मैं तो समझा था की वो तुम्हारी छोटी बहन है, उन्होंने अपनी जवानी बड़े संभाल कर रखी हुई है, उनके मोटे चुचे और कसी हुई चूत पाकर मैं तो निहाल सा हो गया, मैंने कितनी बार उनकी चूत और गांड मारी मुझे भी पता नहीं…”
रेहान अपनी अम्मी के नंगे जिस्म के बारे में सोचता हुआ अपने लंड को वहीँ खड़े हुए मसलने लगा.
रेहान : “तुम सही में लक्की हो, तुम लोग अपने मम्मी पापा के साथ भी सेक्स करते हो और अब हमारे अम्मी और अब्बू के साथ भी कर लिया..”
मैं : “अगर ये बात है तो तुम भी क्यों नहीं लक्की बन जाते….”
रेहान : “क्या मतलब?”
मैं : “मेरा मतलब है की अगर तुम चाहो तो तुम अपनी अम्मी की चूत मार सकते हो और हिना अपने अब्बू का लंड ले सकती है अपनी चूत में..”
रेहान , हिना की तरफ देखता है और फिर मेरी तरफ देखते हुए “क्या सच में….ये हो सकता है..”
मैं : “हाँ…अगर तुम चाहो तो ये मुमकिन है…वैसे मैंने उन्हें एक घंटे बाद यहाँ पर बुलाया है, अगर तुम तैयार हो तो मैं तुम दोनों के मन की मुराद पूरी कर सकता हूँ…पर तुम्हे वैसा ही करना होगा जैसा मैं करने को कहूँगा..बोलो मंजूर है..?”
दोनों एक साथ बोले : “हाँ हाँ…मंजूर है…”
हम सबने हाथ मिलाया और मैंने उन्हें आगे का प्लान समझाया..
मैंने अपना प्लान पूरी तरह से उन्हें बताने के बाद बाहर आकर मम्मी, पापा, नेहा, चाचू और चाची को एक साथ बिठाया और उन्हें कल रात वाली बात बताई और उन्हें मेरे काम में सहयोग करने को कहा, मैंने रूबी और नाजिर वाली बात बड़े मजे ले लेकर बताई, जिसे सुनकर सभी के मुंह में पानी आ गया, सभी फीमेल्स रेहान के लंड का स्वाद तो चख ही चुकी थी, अब उसके अब्बा के मोटे लंड का गुणगान सुनकर उनकी चूत फिर से पनियाने लगी.
और रूबी की जवानी के बारे में सुनकर तो पापा और चाचू अपने लंड को वहीँ खड़े हुए मसलने लगे, मैंने उन्हें कहा की अभी तो मैं हिना और रेहान को उनके पेरेंट्स से चुदवाने का वादा कर चूका हूँ, आप लोग उनके पेरेंट्स से बाद में मजे ले लेना.मैंने उन्हें पैसो वाली बात नहीं बताई, और उन्हें कहा की वो कुछ देर के लिए कहीं चले जाएँ और दोपहर तक ही वापिस आयें, मेरी बात सुनकर पापा ने सोनी-मोनी के काटेज में जाने का सुझाव रखा, जिसे सब ने मान लिया और वो सभी तैयार होकर बाहर निकल गए.
मैं अपने प्लान को साकार होते देखकर काफी खुश था.
मैं वापिस अपने कमरे में आया तो वहां से ऋतू की चीखों की आवाजें आ रही थी, मैं अन्दर गया तो पाया की ऋतू अपने पुरे शबाब को नंगा किये पलंग पर लेटी हुई है और हिना उसकी चूत को चाट रही है, रेहान अपने हाथ में अपना लंड पकडे अपनी बहन की मोटी गांड को मसल रहा है…
मैंने भी झट से अपने कपडे उतारे और उनके बीच कूद गया.
मैंने अपना लंड सीधा हिना की गांड के छेद पर लगाया और एक तेज धक्का मारा.
आआआआअयीईईईईईईईईईइ मर्र्र्रर्र्र्र गयी हिना चिल्लाई
और उसने ऋतू की चूत को चुसना बंद कर दिया और अपनी गांड मरवाने के मजे लेने लगी.
रेहान भी जैसे इसी इन्तजार में था, उसने ऋतू की चूत में अपना लंड टिकाया और उसके ऊपर झुक कर अपना पूरा लंड पेल दिया उसकी चूत में. ऋतू की चूत काफी देर से खुजला रही थी, रेहान का मोटा लंड पाकर वो मजे से सिस्कारियां ले लेकर अपनी चूत मरवाने लगी.
ऋतू ने अपनी मोटी टांगें उसकी कमर में लपेटी और उसके गले में बाहें डालकर उसे अपने ऊपर झुका लिया और रेहान के मोटे होंठों को चूसने लगी..
रेहान ने ऋतू को किसी खिलोने की तरह उठा लिया और पलंग पर खड़ा हो गया, ऋतू उसकी गोद में थी और रेहान का लंड उसकी चूत में, अब ऋतू अपने चुतड उछाल -२ कर अपनी चूत मरवा रही थी, और साथ ही साथ रेहान के होंठो को भी किसी कुल्फी की तरह से चूस रही थी..
मैंने थोडा आगे झुककर हिना के लटकते हुए मुम्मे पकड़ लिए और उन्हें जोर से दबा दिया..
आआआआआआआह्ह्ह्ह वो दर्द के मारे चिल्ला ही पड़ी.
मेरे आगे झुकने की वजह से मेरा लंड अब उसकी गांड के दुसरे छोर तक टक्कर मार रहा था..हिना ने अपना सर पीछे किया और अपने रस टपकाते हुए होंठो से मुझे अपना शहद पिलाने लगी, उसके नर्म होंठो को चूसते हुए, मोटे स्तनों को दबाते हुए और मखमली गांड को मारते हुए बड़ा ही मजा आ रहा था.
उसकी गांड के छेद ने मेरे मोटे लंड को किसी रबड़ की तरह से जकड़ा हुआ था, मेरा लंड उसकी गांड की गली में घस्से लगता हुआ अन्दर तक जाता और उतनी ही तेजी से बाहर निकलता..मैंने एक हाथ नीचे करके उसकी रसीली चूत पर भी हाथ फेरना शुरू कर दिया, अपनी चूत पर हुए अचानक हमले से वो एक दम से चिल्लाई और झड़ने लगी.
आआआआआआआआअह्ह्ह ऊऊऊऊऊओह्ह अशूऊऊऊउ …….म्म्मम्म्म्मम्म मजा आ गया……….आआआआअह्ह्ह
वो निढाल हो चुकी थी, पर मेरा लंड अभी भी उसकी गांड के पेंच खोलने में लगा हुआ था, थोड़ी देर बाद उसने मेरे लंड पर फिर से अपनी गांड का दबाव देना शुरू कर दिया, उसके थिरकते हुए चुतड देखकर मेरे लंड ने भी आखिरकार हार मान ली और मैंने पता नहीं कितने झटके देते हुए उसकी गांड में अपनी सिंटेक्स खाली कर दी.
आआआआआअह्ह्ह आआआआआघ्ह्ह ……..ओयीईईईईईए …
ऋतू भी हवा में चुदते हुए जोर से चिल्ला रही थी…ओह्ह्ह रेहान और तेज करो ना …..अपने अब्बू की तरह मारो मेरी चूत…..
आआआआअह्ह….अपने अब्बू का नाम सुनकर रेहान को और जोश आ गया और वो और तेजी से ऋतू को अपनी गोद में लेकर उछालने लगा.
और जल्दी ही दोनों एक साथ झड़ने लगे..
आआआआआआआआआह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फफ्फ्फ़ मर गयी रे….अह्ह्हह्ह रेहान……तुम्हारा लंड सही में मजेदार है…और वो रेहान को फिर से चूसने लगी..
हवा में लटकी ऋतू की चूत से रेहान का रस टपकते हुए नीचे गिरने लगा..और फिर रेहान का लंड भी बाहर आकर लटक गया, ऋतू ने नीचे झुककर उसके मोटे नल को अपने मुंह में भरा और चूसकर साफ़ कर दिया.
मैंने घडी में देखा, उनके मम्मी पापा के आने का समय हो चूका था, मैंने उन्हें फिर से सभी बाते समझाई, मेरा प्लान सुनकर वो थोडा घबरा रहे थे पर मैंने जब फिर से उन्हें रूबी की जवानी और नाजिर के लंड की याद दिलाई तो उनकी घबराहट थोड़ी कम हुई.
तभी बाहर से आवाज आई “अरे कोई है क्या…” ये नाजिर अंकल की आवाज थी.
मैंने जल्दी से पायजामा पहना और बाहर आया, रूबी मेरे कहे अनुसार टी शर्ट और लॉन्ग स्किर्ट में आई थी.
मैंने उन्हें सोफे पर बिठाया. नजीर अंकल बोले “कहाँ है वो दोनों…क्या तुमने हमारे बारे में उन्हें बताया है क्या…”
“वो दोनों अन्दर हैं, ऋतू के साथ, दरअसल मैं आपको एक बात बताना चाहता हूँ, वो जिन दोस्तों की बात कर रहे थे, वो हम ही हैं, हिना और रेहान हमारे फ्रेंड सर्कल मैं ही हैं, और हम सभी फ्रेंड्स सभी तरह की मस्ती करते हैं” मैंने उन्हें समझाते हुए कहा.
“मस्ती का क्या मतलब…क्या तुमने मेरी हिना के साथ….” रूबी ने मेरी तरफ घूरते हुए देखा और पूछा.
“मस्ती मतलब सब कुछ…और हाँ मैंने आपकी हिना की चूत भी मारी है, पर अब इन बातों का कोई मतलब नहीं है क्योंकि आप दोनों भी तो अपने बच्चो के साथ वही सब करने आये है, वैसे भी वो अब बच्चे नहीं रहे , दोनों जवान हो चुके हैं, और अपनी मर्जी से वो कुछ भी कर सकते हैं, मेरा तो बस यही विचार है की जब आप लोग बाहर के लोगो के साथ सेक्स कर सकते हो और वो दोनों भी बाहर के लोगो के साथ सेक्स करते हैं तो क्यों न कभी-२ आपस में भी ये सब करो, सभी को मजा आएगा…”
“वो तो ठीक है…पर क्या तुमने उन्हें हमारे बारे में बताया है…” नाजिर ने कुछ सोचते हुए कहा.
“नहीं मैंने उन्हें कुछ नहीं बताया…मैंने सिर्फ उन्हें कहा है की हमारे कुछ दोस्त आ रहे हैं थोड़ी ही देर में और हम सभी अपनी आँखों में पट्टी बांधकर सेक्स करेंगे, ताकि कोई तुम्हे न देख पाए और न ही तुम उन्हें देख पो, क्योंकि वो लोग अपनी पहचान गुप्त रखना चाहते हैं..” मेरी बात सुनकर रूबी और रेहान को थोडा सुकून मिला,
“पर अगर हमारी आँखों पर पट्टी हुई तो हम उन्हें कैसे देख पायेंगे…तुमने पैसे लेते हुए ये तो नहीं बताया था की हम लोगो को अपनी आँखें बंद करके उनके साथ सेक्स करने को मिलेगा..” नाजिर ने कहा.
“अरे अंकल..आप लोगो को कोन आँखें बंद करने को कह रहा है, वो तो वो दोनों करेंगे, आप लोग ऐसे ही अन्दर चलो, उन्हें कुछ मालुम नहीं चलेगा, वो तो यही समझेंगे की आपकी आँखों पर भी पट्टी बंधी हुई है…” मैं उन्हें समझाया.
वो पूरी बात समझ गए और मैं उन्हें लेकर अन्दर चल पड़ा.
मेरे कहे अनुसार अन्दर सभी लोग अपने कपडे पहन चुके थे, और रेहान और हिना ने अपनी आँखों पर पट्टी भी बाँध रखी थी.
ऋतू सिर्फ अपनी चड्डी पहन कर खड़ी थी, ऊपर उसने कुछ भी नहि पेहना हुआ था.
अन्दर जाते ही अपने बच्चो को देखकर उनके दिल की धड़कने तेज हो गयी.
हिना जींस और टी शर्ट में बेड के किनारे पर बैठी थी, और रेहान ऋतू के पास बैठा हुआ था.
हिना ने ब्रा नहीं पहनी हुई थी, इस वजह से उसके निप्पल्स साफ़ दिखाई दे रहे थे, कमरे में उसे अपने अब्बू के आने का आभास हो चूका था, पर मेरे कहे अनुसार वो दोनों यही दिखा रहे थे की कमरे में आने वाले कोई और हैं.
मैंने कहा “अब हमारे मेहमान आ चुके हैं, यहाँ सभी ने अपनी आँखों पर पट्टी बाँध रखी है, और मैं अब आप लोगो के जोड़े बना रहा हूँ, आप लोग बिना कोई आवाज निकाले अपने साथी के साथ मजे करोगे…ठीक है..” सभी ने सहमति से गर्दन हिलाई..
मैंने रूबी का हाथ पकड़ा और बेड पर बैठे हुए रेहान के पास जाकर उनका हाथ रेहान के हाथों में दे दिया.
रूबी ने कांपते हुए हाथों से अपने लड़के का हाथ पकड़ा..वो बिलकुल ठंडा हो चूका था..
रेहान को जैसे ही अपनी अम्मी के मादक शारीर की महक आई वो उनसे लिपट गया…और अपने कई सालो के इन्तजार का अंत करते हुए उसने अपने मोटे होंठ, अपनी अम्मी के लरजते हुए ठन्डे होंठो पर रख दिए और उन्हें चूसने लगा.
म्म्म्मम्म्म्मम्म आआआआअह्ह्ह रूबी के मुंह से हलकी हलकी सिस्कारियां फूटने लगी.
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ऋतू भी उठी और हिना को पकड़ते हुए नाजिर के पास लेजाकर छोड़ दिया..नाजिर ने एक झटके से अपनी फुल सी बच्ची को पकड़ा और सीधा उसके मोटे चुचे दबाने लगा..पिछले दो सालो से वो हिना के मोटे होते हुए मुम्मो को देखकर कई बार मुठ मार चूका था और उनके बारे में सोचकर ऑंखें बंद करके रूबी के स्तनों को चुस्त रहता था, आज जब उसके सामने अपनी आँखों पर पट्टी बांधे हिना खड़ी थी और उसके बिना ब्रा के मोटे मुम्मे ऊपर नीचे होकर उसकी भूख को और बड़ा रहे थे तो उससे सेहन नहीं हुआ और वो सीधा उनपर टूट पड़ा.
अपने चुचे पर अब्बू के हमले का सामना करते हुए हिना बुरी तरह से हिल रही थी, उसके शारीर में अजीब तरह की झुरझुरी हो रही थी, वो कांप रही थी, उसने कई बार अपने अब्बू को अपनी तरफ घूरते हुए देखा था, और उनका लटकता हुआ लंड भी उसे कई बार दिख चूका था, और रातों में अपने अब्बू के कमरे से आती चीखों ने भी उसे उनके लंड के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया था,..आज उसके अब्बू उसके दोनों खरबूजे दबाने में लगे हुए थे..थोड़ी देर तक उन्हें दबाने के बाद नाजिर ने उसकी टी शर्ट को ऊपर खिसकाया और गले से निकल कर जमीन पर गिरा दी..अब हिना सिर्फ जींस में अपनी आँखों पर काली पट्टी बांधे कड़ी थी, हिना के रसीले चूचो को देखकर नाजिर की नज़रों में एक अजीब सी चमक आ गयी, उसने अपना मुंह आगे किया और उसके एक चुचे को अपने मुंह में लेकर अपनी बेटी का दूध पीने लगा, हिना के शरीर में इतनी गुदगुदी हुई की उसका पेशाब निकल गया…
मैं बेड पर बैठ गया और ऋतू मेरे शरीर से चिपक कर वहां का खेल देखने लगी..
मैं अपने हाथों से ऋतू के मोटे चूचो को दबाने लगा और वहां चल रहा शो देखने लगा.
रेहान काफी उत्तेजित हो चूका था, उसने अपनी अम्मी रूबी को होंठो को चूस चूसकर लाल कर दिया था, रूबी भी उसकी बाँहों में मचलती हुई ऑंखें बंद किये पुरे मजे लेने में लगी हुई थी,
अचानक वो नीचे जमीन पर बैठ गयी और उसने एक झटके से रेहान का पायजामा उतार दिया, रेहान का उफनता हुआ लंड अब रूबी की आँखों के सामने था, रूबी ने रेहान के मोटे लंड को गोर से देखा, वो सही में नाजिर का बच्चा था, उसका लंड भी उतना हो मोटा, लम्बा पर रंग थोडा सफ़ेद था, जबकि नाज़िर के लंड का रंग बिलकुल काला था.
उससे और सेहन नहीं हुआ और उसने झट से अपने बेटे का लंड दाल लिया अपने मुंह में और उसे चूसने लगी.
अपनी अम्मी को अपना लंड चूसता पाकर रेहान के तो मजे हो गए, उसके पट्टी बंधे चेहरे पर आती ख़ुशी साफ़ दिखाई दे रही थी, उसने रूबी के सर के पीछे हाथ रखा और बड़ी ही तेजी से उसके मुंह के अन्दर धक्के मारने लगा…
दूसरी तरफ देखा तो नाजिर ने अब हिना की जींस के बटन भी खोल दिए थे, और उसे नीचे उतारने के बाद थोडा पीछे होकर जब नाजिर ने अपनी नंगी बेटी को गोर से देखा तो उसके लंड का बुरा हाल हो गया, उसने सपने में भी नहीं सोचा था की उसे अपनी नंगी बेटी देखने को मिलेगी, पर मेरी वजह से ये सब संभव हो पाया था, उसने मेरी तरफ मुस्कुराते हुए देखा और अपना आभार प्रकट किया, और फिर अपने पुरे कपडे उतार कर वो भी नंगा हो गया और अपनी नंगी खड़ी हुई बेटी से जाकर लिपट गया.
अपने नंगे शरीर से अपने अब्बू के जिस्म का साथ पाकर हिना के रोयें खड़े हो गए, उसकी गीली चूत, जिसमे से अभी-२ पेशाब निकला था, बुरी तरह से गीली होकर, रस बिखेर रही थी, नाजिर ने उसे बेड पर लिटाया और उसकी बिना बालों वाली चूत पर अपने होंठ टिका दिए और वहां का माल साफ़ करने लगा..अपने अब्बू को अपनी चूत चूसते हुए देखकर उसके मुंह से अब्बू निकलते-२ बचा…उसने अपने दांतों तले अपनी जीभ दबाकर अपनी आवाज को ब्रेक लगाया..
अब्बब्बब्ब…………अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम ……..
और वो अब्बू के सर को अपनी चूत पर घिसने लगी.
वहां से आती पेशाब की दुर्गन्ध और चूत के रस की सुगंध नाजिर को बड़ी मादक लग रही थी, वो अपनी मोटी और खुरदुरी जीभ से अपनी फुल सी बेटी की चूत बुरी तरह से चाटने में लगा हुआ था..
हिना भी अपने अब्बू के लंड से खेलना चाहती थी, उसने नाजिर को बेड पर लिटाया और उनके मुंह पर अपनी चूत टिका कर अपने मुंह में उनका पाइप दाल कर चूसने लगी, पहले तो उसके मुंह में सिर्फ नाजिर का सुपाडा ही आ पाया पर थोड़ी देर कोशिश करने के बाद वो पूरा उसके मुंह के अन्दर तक जाने लगा और वो उसे चूसने लगी..
रेहान ने अपनी अम्मी को उठाया और उनके कपडे एक झटके के साथ उतार डाले और रूबी के मोटे जग से दूध पीने लगा..अपने बेटे को 17 सालो बाद अपनी छाती को चूसते हुए देखकर उसके मन में बेटे के लिए लाड आ गया और वो उसे और जोर से अपना दूध पीने के लिए उकसाते हुए उसके बड़े से मुंह में अपना स्तन ठुसने लगी..
काफी देर तक स्तनपान करने के बाद वो नीचे झुका और रस से सराबोर चूत को अपने मुंह में दबाकर चूसने लगा.
मेरे कहने की वजह से सभी अपनी चीखों और आवाजों पर नियंत्रण करे बैठे थे…इसलिए वहां सिर्फ लम्बी सिस्कारियों की आवाजें ही आ रही थी.
स्स्सस्स्स्सस्स्स म्म्म्मम्म्म्मम्म ….
रेहान की लम्बी जीभ अपनी अम्मी की चूत के हर कोने में घुसकर वहां के रस को ढूंढ ढूंढकर पी रही थी, पर चूत की माया भी क्या होती है, वो जितना चूसता, उसकी चूत की दीवारों से और रस रिसने लगता और उसके मुंह में जाने लगता.
अपनी अम्मी की चूत को देखने के लालच में रेहान ने अपनी पट्टी थोड़ी सी खिसका दी और उसकी एक आँख अब थोड़ी सी बाहर की दुनिया को देख पा रही थी, इसलिए उसने अपनी माँ की खुबसूरत चूत को देखा तो उसे चाटने की स्पीड और तेज कर दी.
रूबी की आँखें तो मजे लेने के चक्कर में पहले से ही बंद थी.
अब दोनों बच्चे अपने आमी और अब्बू के लंड और चूत चूसने में लगे हुए थे..
रेहान से अब रुकना मुश्किल हो रहा था, वो उठा और अपने लंड का सुपाडा अपनी अम्मी की चूत से लगाया, अपनी चूत पर रेहान के लंड का एहसास पाकर रूबी की साँसे रुक सी गयी..उसने कुछ निर्णय किया और रेहान की आँखों की पट्टी खोल दी.
रेहान के साथ-२ हम दोनों भी हैरान रह गए.
रेहान ने जब देखा की उसकी अम्मी ने उसकी आँखों की पट्टी खोल दी है तो वो उनकी आँखों में अपने लिए उमड़ते हुए प्यार को देखकर emotional सा हो गया और उसने नीचे झुककर अपनी अम्मी की आँखों को चूम लिया.
“रेहान, मैं तुम्हारा लंड अपनी चूत में लेना चाहती हूँ और ऐसा करते हुए मैं तुम्हारी आँखों में देखना चाहती थी…” रूबी ने रेहान के कानो में धीरे से कहा.
वहां हिना भी उठ खड़ी हुई और अपने अब्बू के खड़े हुए लंड को अपनी चूत पर घिसने लगी, उसे मोटे लंड को अपनी चूत में घुसाने में काफी दिक्कत महसूस हो रही थी, उसकी आँखों पर पट्टी भी बंधी हुई थी, आखिरकार जब उसने चूत के छेद को लंड के बिलकुल ऊपर किया तभी अचानक उसके अब्बू ने उसके दोनों पैर खींच दिए, जिनपर उसने अपना पूरा भार डाला हुआ था, पैरों तले जमीन निकलते ही उसके शरीर का पूरा बोझ अब्बू के पंड के ऊपर आ गिरा, और उसकी चूत किसी ककड़ी की तरह चीरती चली गयी….वो चिल्ला पड़ी….
अब्ब्बब्ब्ब्बब्ब्बू ……आआआआआह्ह्ह मैं तो गयी…..
नाजिर समझ गया की हिना जानती है की वो अपने अब्बू से चुदवा रही है, उसने हाथ ऊपर करके हिना की आँखों से पट्टी उतार दी, पहली बार दोनों की नजरें टकराई और उन्होंने एक दुसरे को गले लगा लिया…नाजिर का मोटा लंड अपनी बेटी की चूत में फंसा हुआ था, हिना ने अपने अब्बू के होंठो को थोड़ी देर तक चूसा और फिर ऊपर उठकर अपने बाल बांधे और नए जोश के साथ अपने अब्बू के लंड पर चीखें मार मारकर कूदने लगी.
आआआआआह्ह्ह अब्बूऊउ मरो अपनी हिना की चूत….अह्ह्हह्ह्ह्ह कब से मैं आपका लंड लेना चाहती थी…..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह छोड़ो अपनी हिना को ,,,,….अह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ …..अ
उनकी बातें सुनकर रेहान और रूबी भी मुस्कुरा दिए रेहान ने एक झटके से अपनी माँ की चूत में अपना लंड उतार दिया, रूबी की आँखें बाहर की तरफ उबल आई इस तेज हमले से…पर उसे मजा भी काफी आया वो चिल्ला पड़ी..
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह रहन्न्न्न ……चोद बेटा……चोद अपनी अम्मी को…..चोद अपने मुसल जैसे लंड से ….
अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
उनकी चुदाई देखकर मेरी आँखों में भी पानी आ गया, मैंने ऋतू की तरफ देखा जो अपनी कच्ची उतार चुकी थी, मेरे देखते ही वो समझ गयी और मेरे पायजामे को नीचे करके वो किसी भूखी बिल्ली की तरह मेरे लंड पर कूद पड़ी और अपनी चूत के अन्दर मेरे लंड को लेकर जोरो से चीखें मारने लगी..
आआआआआआअह्ह्ह अशूऊउ मारो मेरी चूत…..अह्ह्ह्हह्ह फाड़ डालो …..अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
अब कमरे में इतनी चीखे गूंज रही थी की क्या बताऊँ.
सबसे पहले रेहान ने अपनी अम्मी की चूत में अपना लंड खाली किया..
आआआआआआह्ह्ह अम्मीईईईईइ मैं तो गया….ले अपने रेहान का रस….आआआआआअह्ह्ह्ह
आआआजाआअ बेटा…..आआआआजाआआआ…….और ये कहते हुए रूबी भी झड़ने लगी.
नाजिर सही में कसाई हो गया था अपनी बेटी की चूत पाकर, वो बड़ी तेजी से धक्के मार रहा था, उन धक्को में हिना दो बार झड चुकी थी…नाजिर ने हिना के उछलते हुए चुचे अपने मोटे हाथों में पकडे और नीचे से तेजी से धक्के मारने लगा..जल्दी ही उसका ज्वालामुखी भी फूटने लगा और उसने करीब आधा गिलास रस अपनी बेटी की चूत में खाली कर दिया.
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ग्रर्र्र्रर्र्र्र बड़ी तेज आवाजों के साथ वो गहरी साँसे लेने लगा.
मुझसे भी रुका नहीं गया और मैंने अपनी प्यारी बहन की चूत में अपना रस छोड दिया.
अब चरों तरफ गहरी साँसों की आवाजें आ रही थी, सभी अलग हुए और अपने पार्टनर के लंड को चूस कर साफ़ करने के बाद वहीँ लेट कर सुस्ताने लगे.
ये सब करते हुए दो घंटे हो चुके थे, हमारे मम्मी पापा के आने का टाइम हो चूका था. वो किसी भी वक़्त आ सकते थे.
रूबी ने उठ कर कहा की उसे तो बड़ी तेज भूख लगी है और वो उठकर कपडे पहनने लगी, हिना भी साथ ही उठ खड़ी हुई और उनके साथ वो भी जाने के लिए तैयार होने लगी.
नाजिर अपनी मोटी आँखों से अपनी फूल सी बेटी को कपडे पहनते हुए देख रहा था, उसका मन अभी अपनी बेटी की चूत मार कर भरा नहीं था, पर वो जानता था की उसके मोटे लंड का प्रहार उसकी बेटी ज्यादा नहीं झेल पाएगी इसलिए उसने उसे रोका नहीं और वो ये भी जानता था की अब तो उसका रास्ता खुल ही गया है, घर पर वो कभी भी उसकी चूत की चटनी बना कर पी सकता है.
उसकी नजर मेरी बगल में लेटी ऋतू की तरफ गयी जो अपनी चूत को अपनी उँगलियों से मसल कर साफ़ कर रही थी और अन्दर से मेरा गिरा हुआ माल निकाल कर अपने मुंह में ले रही थी. उसने जब नाजिर को अपनी तरफ देखते हुए पाया तो वो मुस्कुरा दी, नाज़िर वैसे तो कसाई की तरह चोदता था पर उसके मोटे लंड का एहसास वो अभी तक नहीं भूली थी, उसका तो फेवरेट लंड हो चूका था नाजिर का.
नाजिर अपनी बीबी रूबी से बोला, “तुम दोनों जा कर कुछ खा लो …मैं बाद में आता हूँ…” रूबी समझ गयी की उस कसाई का मन अभी नहीं भरा है, वो मुस्कुरा दी और अपनी बेटी के साथ बाहर निकल गयी.
नाजिर ने ऋतू को इशारे से अपने पास बुलाया, ऋतू झट से उठ कर नंगी उसकी गोद में बैठ गयी…नाजिर ने अपना मुंह सीधा उसके नर्म होंठो पर टिका दिया और उन्हें चूसने लगा, वैसे तो उसके पान वाले, मोटे और भद्दे मुंह से बड़ी ही गन्दी बदबू आ रही थी, पर उसके मोटे लंड को अपनी चूत में लेने के चक्कर में उसने उस बदबू को भी नरअंदाज कर दिया और अपनी लम्बी जीभ उसके मुंह में दाल कर और मजे देने लगी, साथ ही साथ वो अपनी फैली हुई गांड उसके बैठे हुए लंड पर घिस भी रही थी, ताकि वो जल्दी से तैयार हो जाए और उसकी चूत को बजा डाले.
रेहान भी उठ कर ऋतू के पास आ गया और उसने अपने हाथ आगे करके उसके उभारों को थाम लिया, ऋतू ने उसकी तरफ देखा और उसे भी अपने पास खींच लिया, नाजिर ने भी अपने बेटे को थोड़ी जगह दी और अब ऋतू नाजिर और रेहान के बीच बैठी हुई उनके लंड मसल रही थी.
मेरे लंड में भी तनाव आना शुरू हो गया, अपनी बहन को दो वेह्शियों के बीच देखकर, मैं अपनी जगह से उठा और ऋतू के सर के पास जाकर खड़ा हो गया, उसने मेरा लटकता हुआ लंड अपने मुंह के पास देखा तो झट से उसे अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
अब वो एक साथ तीन -२ मर्दों के बीच बैठी हुई उनका मनोरंजन कर रही थी, मैंने मन ही मन में सोचा , ऋतू की बच्ची आज तो तू गयी….
रेहान से अब रहा नहीं गया उसने नीचे झुककर ऋतू की चूत पर अपना मुंह लगा दिया और उसकी फैली हुई चूत की पलकों के बीच अपनी पेनी जीभ दाल कर कुरेदने लगा..ऋतू सिसक उठी..
आआआआआआआआअह्ह्ह्ह रेहाआआआआआआन्न म्मम्मम्मम
और वो रेहान को बड़े ही प्यार से देखते हुए उसके सर के ऊपर हाथ फेरने लगी, जैसे वो उसका पालतू कुत्ता हो….
नाजिर का मोटा लंड अपने पुरे शबाब में आने लगा था..उसने ऋतू के सर को एक झटके से अपनी गोद में खींचा और वो उसके लंड के ऊपर जा गिरी..आँखों के सामने काला नाग था, उसने आँखें बंद की और उसे मुंह में डाल कर चूसने लगी..
“हाआआन्न ऐसे ही चुसो….आआआआआआअह्ह्ह “
नाजिर ने कहा और अपना सर पीछे करके अपने लंड को चुस्वाने के मजे लेने लगा..
मैं ऋतू के ऊपर खड़ा हुआ उसे बाप बेटे के बीच पिसता हुआ देख रहा था, मेरे सामने ऋतू के झूलते हुए चुचे थे, मेरे मन में कुछ अलग करने का विचार आया, जो काफी दिनों से मैं सोच रहा था, उसके चुचे चोदने का….मैंने अपनी दोनों टाँगे उसके पेट के दोनों तरफ रखी और नीचे बैठ गया और अपना लंड उसके लटकते हुए चूचो के बीच फंसा कर उन्हें पकड़ लिया और इस तरह से उसके मखमली उभारों का दबाव मेरे तने हुए लंड पर पड़ने लगा, मैंने धीरे -२ धक्के देने शुरू कर दिए…
नीचे से रेहान ने ऋतू की क्लिट को अचानक अपने मुंह में भर लिया और दांतों से दबा दिया…
वो चिल्ला पड़ी…
“आआआआआआअह्ह्ह ओयय भोंसडीके साले मार डालेगा क्या….धीरे कर….” उसकी टाँगे कांप रही थी उसके इस प्रहार से…रेहान ने सॉरी बोला और फिर से उसकी चूत में कुछ ढूँढने लग गया..
नाजिर ने भी अपने बेटे को समझाया…”अरे बेटा…जिस चीज से तुम्हे इतने मजे मिलते हैं उसे इस तरह से तकलीफ नहीं दिया करते…समझे…”
मैंने मन ही मन में कहा…साला कसाई, अपनी चुदाई के समय इन बातों का ख्याल नहीं रहता क्या..
मैंने अपने दोनों हाथों से ऋतू के उभारों को थाम रखा था, उसके दोनों पिंक कलर के निप्पल्स मैंने अपनी उँगलियों से पकड़ रखे थे और उन्हें दबा भी रहा था, जिस वजह से ऋतू की सिस्कारियां बड़े ही मीठे स्वर में बाहर आ रही थी…
आआआआआअह्ह्ह्ह म्मम्मम औयीईईइ ……..अह्ह्ह्हह्ह ऊऊह्ह्ह …………..
ऋतू नाजिर के लंड को बड़े प्यार से चाट रही थी, उसने नीचे मुंह करके उसकी गोलियां भी अपने मुंह में भर ली और चूसने लगी…नाजिर की दोनों टाँगे हवा में उठ गयी ऋतू की इस हरकत से …आज तक उसकी गोटियाँ किसी ने अपने मुंह में नहीं ली थी….नाजिर नीचे लेट गया और ऋतू को अपनी गोटियाँ चाटने के काम में लगा दिया…और अचानक ऋतू और नीचे हुई और नाजिर की भद्दी सी बालों वाली गांड के छेद पर अपनी जीभ फिरने लगी…मुझे तो बड़ी ही घिन्न आई की ऋतू ऐसा क्यों कर रही है…पर शायद उत्तेजना के नशे में उसे कुछ भी नहीं सूझ रहा था, वो तो बस नाजिर को ज्यादा से ज्यादा मजे देने के चक्कर में गंदे से गन्दा काम करने में लगी हुई थी…नाजिर को ज्यादा मजे देगी तभी तो उसे नाजिर ज्यादा मजे देगा..
अब नाजिर ने से ज्यादा सेहन नहीं हुआ उसने ऋतू को अपने ऊपर खींच लिया और उसके होंठों को चूसने लगा…उसके विशाल से शरीर के ऊपर ऋतू किसी छोटे बच्चे जैसी लग रही थी, काले रंग पर गोरी लड़की..
ऋतू के बाल खुल चुके थे और उसके चेहरे को ढक कर उसे और भी कामुक बना रहे थे, ऋतू तो बस अपनी आँखें बंद करे नाजिर के होंठों को चूसने में ऐसी लगी हुई थी की उसे बाकी के दोनों लोगो का ध्यान ही नहीं रहा जैसे…मैंने उसे ध्यान दिलाने के लिए उसके सर के ऊपर आया और अपना लंड उसके मुंह के पास लेजाकर खड़ा हो गया..उसके बाल खींचे और उसके मुंह में अपना लंड डाल कर हिलाने लगा…
नाजिर ने अपने खड़े हुए खम्बे को नीचे से अपने हाथों से अडजस्ट किया और ऋतू को उसपर बिठा दिया..ऐसा लग रहा था की ऋतू नाजिर के लंड पर नहीं किसी कुर्सी पर बैठी हुई है..क्योंकि वो एक तरह से हवा में लटकी हुई थी और फिर नाजिर ने ऋतू के दोनों कंधो को पकड़ कर उसे नीचे की तरफ दबाया…ऋतू चिल्लाती हुई नीचे आने लगी..
आआआआआआआआअह अयीईईईईईईईईइ मरररर गयीईईईई …….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्हह्ह्ह्ह …
और अंत में उसके चुतड नाजिर के शरीर से जा टकराए और उसका पूरा लंड ऋतू की चूत में धंस सा गया…वो हिल भी नहीं पा रही थी, ये पहली बार नहीं था की वो नाजिर के लंड को अपनी नन्ही सी चूत में ले रही थी पर इस बार भी उसका लंड बड़ी ही तकलीफ दे रहा था…और यही तकलीफ ऋतू को मजा भी दे रही थी..
थोड़ी देर ऐसे ही बैठे रहने के बाद ऋतू ने हिलना शुरू किया और अब उसके मुंह से मीठी – २ सिस्कारियां निकलने लगी…
“आह्ह्ह्हह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ म्मम्म और तेज चोदो मुझे अंकल….अह्ह्ह्ह बड़ा ही मजेदार है आपका मोटा लंड…..और तेज चोदो न…..अह्ह्हह्ह्ह्ह”
वो चिल्लाने लग गयी थी..
पीछे बैठे रेहान से भी अब रहा नहीं गया और वो उठ कर ऋतू के पीछे आया और उसे अपने बाप के ऊपर लिटा दिया..ऋतू कुछ समझ पाती उससे पहले ही उसने अपना मोटा लंड उसकी गांड के छेद पर टिका दिया और एक तेज धक्का मारा…..
“आआआआआह्ह्ह ….साले मोटे गेंडे…निकाल वहां से…..मैं साथ एक दोनों का नहीं कर पाउंगी…..”
वो पहले भी डबल पेनेट्रेशन करवा चुकी थी पर इतने मोटे लंडो से नहीं….पर रेहान नहीं रुका और उसने एक दो और तेज धक्के मारकर अपना पठानी लंड उतार दिया उस बेचारी ऋतू की गांड में….
नीचे से उसके बाप नाजिर ने और तेजी से धक्के मारने शुरू कर दिए…अब उसने ऋतू को अपने बाहों में जकड रखा था और नीचे से धक्को पर धक्के मार रहा था…ऊपर से रेहान ने भी अपने धक्को की गति बड़ा दी और ऋतू की गांड के छेद को और खुला करने में लग गया…
मैं नीचे अपने पंजो के बल बैठ गया और उसके मुंह में अपना लंड दोबारा डाल दिया…
रेहान ने ऋतू के गोल चुतड पकडे और अपनी राजधानी एक्सप्रेस चला दी …उसके हर झटके से ऋतू चिल्ला पड़ती थी, नीचे लेटा उसका बाप नाजिर अपने मोटे लंड को सिर्फ उसकी कमसिन सी चूत में डाल कर लेटा हुआ था, क्योंकि बाकी का काम ऋतू खुद ही कर रही थी अपने आप आगे पीछे होकर…
मैंने ऋतू के चेहरे पर इतना संतोष पहले कभी नहीं देखा था, वो सही में चुदाई में एक्सपर्ट हो चुकी थी, लंड खाने वाली, मैं सोचने लग गया की अभी पिछले महीने तक वो सिर्फ अपनी चूत में एक डिल्डो लेकर मजे कर लेती थी और आज उसके चारों तरफ लंडो की भरमार है, वो भी नहीं जानती होगी की पिछले महीने से अब तक वो कितनी बार चुद चुकी है..
अचानक नाजिर को भी थोडा जोश आया, उसने भी नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए, ऋतू को लगा जैसे उसकी चूत का कबाड़ा बन जाएगा आज तो..
वो चिल्लाने लगी…
आआआआआह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फ़ मर्रर्रर्र गयीईईई अह्ह्हह्ह्ह्ह……..
उसने मेरे लंड को अपने हाथों में पकड़ लिया और उसपर थूक फेंककर उसे मसलने लगी, मैंने भी अपनी आँखें बंद कर ली और मजे लेने लगा, जल्दी ही मेरा ओर्गास्म अपने चरम सीमा पर पहुंचकर वीर्य के रूप में बाहर निकल पड़ा और मैंने अपनी पिचकारियों से ऋतू के चेहरे को भिगो डाला, कई बूंदे तो नीचे लेटे नाजिर के चेहरे पर भी पड़ी जिसे ऋतू ने अपनी गुलाबी जीभ से चाटकर साफ़ कर दिया…
मैं झड़ने के बाद साइड में बैठ गया, अब मैं ऋतू को उन दोनों बाप बेटे के बीच चुदता हुआ देख रहा था.
नाजिर के मन में अलग तरीके से चोदने का विचार आया उसने रेहान को अपना लंड ऋतू की गांड में से निकालने को कहा और खुद भी ऋतू को अपने लंड से सटाए हुए खड़ा हो गया, उसका लंड अभी भी ऋतू की चूत में फंसा हुआ था, ऋतू उसकी गोद में चढ़ कर अपनी टांगो को उसकी कमर में लपेटी और अपनी बाँहों को उसकी गर्दन में लपेटी गहरी साँसे ले रही थी, खड़े होने के बाद नाजिर ने रेहान को इशारा किया और रेहान ने पीछे से आकर ऋतू की गांड में फिर से अपना लंड दाल दिया और इस तरह ऋतू हवा में ही दोनों का लंड लिए चुद रही थी, ये बिलकुल वैसा ही था जैसे पापा और चाचू ने ऋतू को चोदा था, पर यहाँ लंड के साइज़ थोड़े बड़े थे.
ऋतू ने अपना मुंह पीछे किया और रेहान के मुंह को पकड़ कर उसके मोटे होंठ चूसने लगी, उसके शरीर की लचकता देखते ही बनती थी, हवा में लटक कर वो कलाबाजी दिखा रही थी, रेहान ने अपने हाथ आगे करके ऋतू के चुचे अपने हाथों में पकडे और तेजी से दबाने लगा, नाजिर और रेहान दोनों ऋतू की कमर को पकड़ कर उसे ऊपर नीचे कर रहे थे..
कमरे में सेक्स का म्यूजिक चल रहा था.
अह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ओफ्फो ओफ्फ्फ उफ ओफ्फ्फ ऑफ़ ओफ्फ्फ ऊऊऊऊआआ याआआ ऐसे ही अआः म्मम्मम्मम्म
और तेज चोदो न मुझे…..अह्ह्ह्ह रेहान…..अंकल….मजा आ गया…….अह्ह्हह्ह….
और तेज आवाजें निकलती हुई वो झड़ने लगी, उसकी चूत में से सेलाब की तरह उसका जूस निकलते हुए नीचे जमीं पर गिरने लगा….
पर रेहान और नाजिर तो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे, ऋतू झड़ने के बाद ढीली होकर हवा में लटक सी गयी पर नाजिर ने उसे अपने लंड से ऐसा जकड़ा हुआ था की वो सिर्फ हवे में उछालने के सिवाय कुछ नहीं कर पा रही थी, रेहान और नाजिर ने तो जैसे ऋतू की चूत की चटनी बनाने की कसम ही खा ली थी, ऋतू की चूत बड़ी सेंसेटिव हो चुकी थी पर उसका ख्याल कोई नहीं कर रहा था..वो दर्द के मारे चिल्लाने लगी…
अह्ह्ह्हह्ह छोड़ दो न प्लीस …..मुझसे और नहीं होगा…….अह्ह्ह्हह्ह हैईईईइ ……अह्ह्ह्हह्ह प्लीस मत करो….न…….अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओयीईए……मम्मी……..मर्रर्रर्र गयी रे……….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …
इसी बीच अपनी चूत को लगातार घिसने की वजह से उसके अन्दर एक और ओर्गास्म बनने लगा था, जिसकी वजह से उसे दर्द में भी मजा आने लगा….
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्मम्मम्मम ऐसे ही…..करो…….अह्ह्हह्ह्ह्ह
उसके बदले हुए रूप को देखकर मुझे भी हंसी आ गयी और मेरे मुंह से निकला…साली चुद्दक्कड़….
रेहान के शरीर से पसीने निकलने लगे थे, और जल्दी ही वो भी अपने चरम स्तर पर पहुँच गया और उसने पीछे से अपनी राईफल से दनादन कई गोलियां उसकी गांड की गुफा में दाग दी…और जोर से चिल्लाने लगा…
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ले साली…….ले मेरा माल अपनी गांड में…….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …….
और उसने अपने लंड वापिस खींच लिया उसकी गांड में से, लंड के पीछे -२ उसका सारा रस भी बाहर आकर नीचे गिरने लगा….
रेहान हाँफते हुए नीचे लेट गया.
अब मैच सिर्फ ऋतू और नाजिर के बीच हो रहा था….
नजर ने अपना बेट ऋतू की गीली पिच में डाल रखा था और उसकी बाल्स को अपने हाथों में लेकर चोके छक्के मार रहा था….
तकरीबन दस मिनट के बाद उसने भी अपना लंड ऋतू की चूत में खाली करना शुरू कर दिया….
अपनी चूत में आयी बाड़ को महसूस करते ही ऋतू ने भी दूसरी बार हवा में लटके हुए झड़ना शुरू किया और नाजिर के गले में अपनी पकड़ को और मजबूत बनाते हुए चिल्लाने लगी….
हन्न्न्नन्न्न्न …….म्मम्मम्मम मजा आ गया…….आआआह्ह्ह अंकल …..अह्ह्हह्ह्ह्ह ओफ्फफ्फ्फ़ …..
मैं नीचे बैठे हुए देखा की नाजिर का लंड धीरे से फिसलकर ऋतू की चूत से बाहर निकल गया और नाजिर ने ऋतू को नीचे उतार दिया, वो तो निढाल सी होकर नीचे गिले फर्श पर बैठ गयी और नाजिर के लटकते हुए लंड को अपने मुंह में भरकर उसे साफ़ करने लगी….दुसरे हाथ से वो अपनी फूली हुई चूत और गांड को मसल रही थी…
हम सभी ने अपने कपडे पहने और बाहर आकर बाकि लोगो के साथ खाना खाने लगे, ऋतू से ठीक से चला भी नहीं जा रहा था, पर खाना भी जरुरी था..
उसकी हालत देखकर रूबी और हिना मुस्कुरा दी, वो समझ गयी की रेहान और नाजिर ने आज ऋतू की काफी बजायी है.
हम सभी ने एक साथ खाना खाया और वापिस अपने काटेज में आ गए..
अगले तीन दिनों तक हम सभी ने हर तरीके से एक दुसरे को कितनी बार चोदा बता नहीं सकता..
और अंत में वो दिन भी आ गया जब हमें वापिस जाना था..
मैंने हिना और सोनी-मोनी का नंबर ले लिया ताकि कभी जरुरत पड़ने पर उनसे मिल सकूँ.
मुझे इतना मजा आज तक नहीं आया था, मैंने इस टूर पर ना जाने कितनी चुते चोदी थी, मैं गिनती भी नहीं कर पा रहा था.
वापिस जाते हुए मैं कार मैं बैठा सोच रहा था की कैसे विशाल और सन्नी को ऋतू की चूत दिलाई जाए और इसके लिए कितना चार्ज किया जाए….मैं तो ये भी सोच रहा था की मम्मी को भी इसमें शामिल कर लेना चाहिए…देखते है.
तभी मम्मी के फोन की घंटी बज उठी और उन्होंने कहा “अरे…दीपा का फोन है…” और ये कहते हुए उन्होंने फोन उठा लिया और बाते करने लगी.
दीपा मम्मी की छोटी बहन है, यानी हमारी मौसी …वो मुम्मी की तरह ही गोरी चिट्टी है, बाल कटे हुए, दुबली-पतली , पर उनके चुचे देखकर मेरे मुंह में हमेशा से पानी आ जाता था, वो इंदौर में रहती है और उनके पति सरकारी जॉब करते हैं, उनके दो बच्चे हैं अयान और सुरभि दोनों लगभग हमारी ही उम्र के हैं.
मैं गोर से उनकी बाते सुनने लगा.
बात ख़तम होने के बाद मम्मी ने खुश होते हुए कहा “अरे सुनो..दीपा आ रही है अपने परिवार के साथ, वो लोग भी छुट्टियों में घुमने के लिए शिमला गए थे और वापसी में वो लोग कुछ दिन हमारे पास रुकना चाहते हैं और दिल्ली देखना चाहते हैं….”
मुम्मी की बात सुनकर पापा बड़े खुश हुए, उनकी नजर हमेशा अपनी साली पर रहती थी, ये मैंने कई बार नोट किया था, पर दीपा मौसी बड़े नक्चाड़े सव्भाव की थी, वो पापा की हरकतों पर उन्हें डांट भी देती थी, इसलिए पापा की ज्यादा हिम्मत नहीं होती थी…पर अब बात कुछ और थी, मम्मी पापा हमारे साथ खुल चुके थे इसलिए वो खुल कर बात कर रहे थे हमारे सामने..
पापा बोले “इस बार तो मैं इस दीपा की बच्ची की चूत मार कर रहूँगा…बड़े सालों से ट्राई कर रहा हूँ…भाव ही नहीं देती साली…”
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lion444202444 has received several accoladeslion444202444 has received several accoladeslion444202444 has received several accolades
[COLOR="rgb(139, 0, 0)"]मम्मी ने कहा “अजी सुनो…तुम ऐसा कुछ मत करना…वो पहले भी कई बार मुझसे तुम्हारे बारे में बोल चुकी है और इस बार तो उसके साथ सभी होंगे, उसके बच्चे और उसका पति गिरीश भी….तुम ऐसी कोई हरकत मत करना जिससे उसे कोई परेशानी हो…समझे…”
देखेंगे…. पापा ने कहा और ड्राइव करने लगे..
जल्दी ही हम सभी घर पहुँच गए और सीधे अपने कमरे में जाकर बेसुध होकर सो गए, ऋतू मेरे साथ मेरे कमरे में ही सो रही थी, नंगी, पर हमारे में इतनी भी हिम्मत नहीं थी की चुदाई कर सके, सफ़र में काफी थक चुके थे.
मैं नंगा अपने बिस्तर पर ऋतू के साथ बेसुध सो रहा था.
सुबह करीब 9 बजे के आस पास मेरी आँख खुली, ऋतू उल्टी लेती हुई थी और उसने अपनी एक टांग मोड़ कर अपने पेट से चिपका रखी थी, जिसकी वजह से फैली हुई मोटी गांड की फेलावट काफी सुन्दर लग रही थी जिसे मेरा लंड खड़ा हो चूका था, मैंने अपने लंड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया , मैं अब सुबह-२ ऋतू की गांड मारना चाहता था.
तभी मम्मी की आवाज आई, “ऋतू… आशु …उठ जाओ …देखो कितना टाइम हो गया है…” और ये कहती हुई वो अन्दर आ गयी, वैसे तो अब उनके सामने भी मैं ऋतू की चूत मार सकता था पर ना जाने मुझमे कैसी झिझक सी आ गयी और मैंने अपनी आँखें बंद कर ली और सोने का नाटक करने लगा.
मम्मी अन्दर आई तो उन्होंने देखा की ऋतू तो बेसुध नंगी पड़ी हुई है और मैंने अपने लंड पर चादर डालकर उसे ढक सा लिया था, जिसकी वजह से उन्हें मेरा खड़ा हुआ लंड न दिखाई दे जाए…
वो बेड के पास आई और मेरे सर पर हाथ फेरकर धीरे से बोली “उठ जा मेरे राजकुमार…सुबह हो गयी है…” और उन्होंने नीचे झुककर मेरे माथे को चूम लिया, उनके झुकते ही उनकी साडी का पल्लू नीचे गिर गया और उनके गिले बाल मेरे चेहरे से आ टकराए, वो सीधा नहाकर आ रही थी, और उनमे से बड़ी ही मादक सी महक आ रही थी, मेरे चेहरे पर गीलापन आते ही मैंने उठने का नाटक किया और बोला “मम्मी…प्लीस सोने दो न…” पर तभी मैंने उनके ब्लाउस से बाहर निकलते गोरे -२ चुचों को देखा तो मेरी आँखें झट से खुल गयी, मम्मी ने भी जब मुझे अपनी छाती की तरफ घूरते हुए पाया तो उनके होंठों पर भी एक गहरी मुस्कान तेर गयी..
वो बोली “ओये बदमाश क्या देख रहा है…कल रात को ऋतू के साथ तेरा मन नहीं भरा क्या..” उन्होंने साथ लेटी नंगी ऋतू की तरफ इशारा करते हुए कहा.
“अरे नहीं मम्मी, रात को तो हम इतने थक गए थे की कुछ करने की हिम्मत ही नहीं थी, बस कपडे उतारे और सो गए…” मैंने मासूमियत से कहा.
“अच्छा जी…तभी आपको सुबह – सुबह शरारत सूझ रही है..” और ये कहते हुए उन्होंने चादर के अन्दर हाथ डालकर मेरा फनफनाता हुआ लंड पकड़कर जोर से दबा दिया..
“आआआह्ह्ह मम्मी….” मेरे मुंह से करह निकल गयी उनके ठन्डे हाथों का स्पर्श अपने गर्म लंड पर पाकर.
मैंने उनकी कमर में हाथ डाला और उनको अपने ऊपर खींच लिया…उनके ब्लाउस से आधे बाहर निकले हुए चुचे सीधे मेरे मुंह के ऊपर आ टकराए…और मैं उन्हें चाटने लगा.
“ओह्ह्ह…बेटा…..छोड़ो ना…इतनी सुबह नहीं….” वो बोल कुछ रही थी पर उनका शरीर कुछ और हरकतें कर रहा था उन्होंने अपनी आँखें बंद करी और मेरे बालों को पकड़कर अपनी छाती से मेरा सर कुचल सा दिया.
इतनी नशीली वो आज तक नहीं लगी थी, सुबह -२ वो जैसे मेरे लिए ही नहाकर तैयार हो कर आई थी, उनके मोटे मुम्मो को मैंने चाट चाटकर पूरा गिला कर दिया, और जल्दी ही मैंने उनके ब्लाउस के हूक खोल डाले और उनकी सफ़ेद रंग की ब्रा मेरे सामने थी, मैंने इनकी ब्रा के स्ट्रेप कंधो से उतार दिए और दोनों छातियाँ उछल कर बाहर आई और मैंने उनके उभरे हुए दानो को एक एक करके चुसना शुरू कर दिया…
मम्मी की हालत बड़ी अजीब हो रही थी, उन्होंने शायद सोचा भी नहीं था की मैं सुबह -२ उनके साथ ऐसी हरकत करूँगा जिसकी वजह से चुदाई के रास्ते बनते चले जायेंगे..
अब उनसे भी सहन नहीं हो रहा था.. उन्होंने अपनी साडी पेटीकोट समेत अपने घुटनों तक मोड़ी और उछल कर मेरे ऊपर बैठ गयी, उन्होंने नीचे पेंटी नहीं पहनी हुई थी, मैंने अपना लंड सीधा किया और उन्होंने आग उगलती हुई चूत सीधा मेरे लंड के ऊपर रख दी और धम्म से नीचे बैठ गयी..
“अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्म्मम्म्म्मम्मsssssssssss….” उन्होंने अपनी आँखें बंद की और आनंद के सागर में गोते लगाने लगी
चुदने की इतनी उत्सुकता मैंने आज तक किसी में नहीं देखि थी..उन्होंने अपने कपडे भी ढंग से नहीं उतारे थे.उनके ब्लाउस से बटन खुले हुए थे पर ब्रा अभी तक बंधी हुई थी, पर उनके उभार बाहर निकल कर उछल कूद मचा रहे थे, उनकी कॉटन की साडी को भी उन्होंने उतारने की जहमत नहीं उठाई थी..पिछले कई दिनों की चुदाई के बावजूद भी उनमे चुदने की कितनी आग थी वो देखते ही बनती थी.
वो जोर से चिल्ला रही थी…”ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ आः अह्ह्ह अहह अहह अह ह अह हा अह्ह्ह्ह अहहह …” और तेजी से हांफ भी रही थी.
साथ लेटी ऋतू की तरफ मैंने देखा तो पाया की वो अभी भी बेसुध होकर सो रही है, उसे बेड पर हो रही चुदाई से कुछ फर्क नहीं पड़ रहा था.
मैंने हाथ आगे करके ऋतू की चोडी गांड पर हाथ फेरना शुरू कर दिया..और दुसरे हाथ से मम्मी के उछलते हुए चुचे को पकड कर जोर से दबाने लगा.
मम्मी भी मेरे दुसरे हाथ को ऋतू की गांड के ऊपर थिरकता देखकर मुस्कुरा दी..फिर उनके मन में ना जाने क्या आया की वो एकदम से मेरे लंड से उतर गयी और घोड़ी बन कर अपनी गांड उठा कर लेट गयी, मैं उठा और उनके पीछे जाकर अपने गिले लंड को उनकी रसीली चूत में फिर से डाल कर जोर से धक्के देने लगा और उनकी गांड के गुदाज मांस को अपने हाथों से दबाने लगा.
मम्मी ने ऋतू की टांगो को खोला और उसकी चूत पर अपना मुंह लगा दिया और उसे चूसने लगी.
मैं भी उनकी इस हरकत से हैरान रह गया.
शायद उन्हें प्यास लगी थी और वो ऋतू की चूत का रस पीकर अपनी प्यास बुझाना चाहती थी..
ऋतू को जैसे ही अपनी चूत पर मम्मी के होंठो का गीला आभास हुआ वो हडबडा कर उठ गयी उसकी नजरें सीधा अपनी चूत को चाटती मम्मी पर गयी और उनके पीछे खड़े होकर चूत मारते हुए मुझपर.
उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी, उसने सोचा भी नहीं था की इतनी सुबह चुदाई का खेल शुरू हो गया है, और मैं मम्मी की चूत तो मार ही रहा हूँ, मम्मी भी उसकी चूत को चूसकर उसे अपने साथ चुदाई के इस खेल में शामिल होने को उकसा रही है..
पर उसमे भी सोचने समझने की शक्ति ख़त्म होने लगी, क्योंकि मम्मी द्वारा उसकी चूत को चाटने की वजह से उसके शरीर में भी उत्तेजना की तरंगे उठने लगी थी और उसने अपने एक निप्पल को उमेठते हुए दुसरे हाथ से मम्मी के सर को अपनी चूत पर और तेजी से दबा दिया और उन्हें और जोर से अपनी चूत को चाटने के लिए उकसाने लगी.
येस्स्स्स.ममीईईइ….चतूऊऊओ अह्ह्ह्हह्ह म्म्म्मम्म्म्मम्म …….
बड़ा ही कामुक दृश्य था, ऋतू का नंगा शरीर नीचे पड़ा हुआ मचल रहा था और मम्मी उसकी चूत में से अमृत रूपी रस को चाटने में लगी हुई थी, कमरे में सिर्फ ऋतू की सिस्कारियां और मम्मी के मुंह से निकलती सड़प – २ की आवाजें निकल रही थी.
मैंने भी अपनी स्पीड तेज कर दी और मम्मी के मोटे कूल्हों को पकड़कर अपनी गाडी दौड़ा दी उनकी चूत के हाईवे पर…
ऋतू के चेहरे को देखकर लगता था की वो जल्दी ही झड़ने वाली है, वो अपना सर ऊपर करके बैठ गयी और मम्मी के सर को अपने दोनों हाथों से पकड़कर अपनी चूत पर घिसने लगी, उसने अपने दोनों हाथ नीचे लेजाकर मम्मी के दोनों मुम्मे पकड़ लिए और उन्हें जोर से दबाने लगी, उसके अपने चुचे मम्मी के सर के ऊपर थे.
अपनी चूत में मेरे लंड की घिसाई और अपने चुचों पर अपनी बेटी के हाथों की सिकाई ने जल्दी ही रंग दिखाया और वो चिल्ला चिल्लाकर झड़ने लगी…
स्स्सस्स्स्सस्स्स अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फफ्फ्फ़ मरररर गयीईईई अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ….
उनकी चीख सुनकर ऋतू की चूत ने भी उनका साथ दिया और वो भी अपनी माँ के साथ साथ अपनी चूत से गर्म रस के फुव्वारे निकलने लगी..मैंने भी आज्ञाकारी बेटे की तरह अपनी माँ की चूत के रस की गर्मी को अपने लंड पर पाते ही अपने लंड का दूध उनकी चूत में अर्पण कर दिया.
हम सभी हाँफते हुए बेड पर लेट गेर और एक दुसरे के शरीर से खेलने लगे.
मम्मी ने टाइम देखा तो जल्दी से खड़ी हो गयी और बोली “तुम्हारे चक्कर में तो काफी देर हो गयी..आशु चलो तैयार हो जाओ, तुम्हे पापा के साथ रेलवे स्टेशन जाना है, मोसी को लेने..”
मैंने ऋतू की तरफ देखा, वो अपनी चूत में उँगलियाँ डाले ना जाने किस दुनिया में खोयी हुई थी, मम्मी ने अपने कपडे ठीक किये और बाहर निकल गयी, मैं भी उठा और सीधा बाथरूम में जाकर अपने सारे काम निपटाए और तैयार होकर नीचे चला गया, ऋतू भी अपने कमरे में जा चुकी थी नहाने के लिए.
मैंने और पापा नाश्ता करने के बाद स्टेशन की तरफ निकल गए.
मौसी लगभग ३ सालों के बाद दिल्ली आ रही थी, मेरे जहन में उनके बच्चों की तस्वीर थोड़ी धुंदली सी थी, उनका बेटा बिलकुल काला था, अपने पापा जैसा, और बेटी भी मरियल सी थी, वो दोनों देखने में अपनी मम्मी जैसे बिलकुल भी नहीं लगते थे अब उनके बच्चे भी बड़े हो चुके होंगे..ये सोचते -२ कब उनकी ट्रेन आई पता ही नहीं चला.
ट्रेन प्लेटफार्म पर आकर रुक गयी
मैं और पापा उनके डब्बे के पास जाकर उनके बाहर आने का इन्तजार करने लगे.
सबसे पहले मौसी बाहर निकली, उन्हें देखकर तो मैं दंग रह गया, उन्हें मौसी कहना गलत होगा क्योंकि वो किसी कॉलेज की लड़की जैसी लग रही थी, उतनी ही सुन्दर, पतली, टी शर्ट से उभरते उनके गोल गप्पे और टाईट जींस पहनने के कारण उनके चूतड़ों की गोलाई साफ़ देखि जा सकती थी, ऊपर से नीचे तक वो लेटेस्ट फेशन से लबालब थी. पापा भी हैरानी से अपनी प्यारी साली को देखकर पलके झपकाना भूल से गए, दीपा जब पास आई तो उन्होंने पापा की आँखों के सामने चुटकी बजायी और उन्हें निंद्रा से जगाया और हंसने लगी.
पापा ने दीपा से हाथ मिलाया और उन्हें अपने गले लगा लिया, दीपा इसके लिए बिलकुल तैयार नहीं थी, उसके एक हाथ में हेंड बेग था और दुसरे में पानी की बोतल, इसलिए उसके उभरे हुए उभार सीधा पापा के सीने से जा टकराए और पापा ने भी मौके का फायदा उठाते हुए उन्हें जोर से अपनी छाती से दबा लिया.
पीछे से मौसी के पति हरीश अंकल बाहर आये और उनके पीछे -२ उनके दोनों बच्चे भी.
दोनों काफी बदल चुके थे, खासकर उनकी बेटी सुरभि जो अपनी माँ की तरह ही फेशन में डूबी हुई सी थी, उसने भी जींस पहन राखी थी और उसके ऊपर टी शर्ट, उसके उभार नाम मात्र के थे पर उसके कुलहो की चोडाई देखकर उसकी जवानी का अंदाजा लगाया जा सकता था, नहीं तो उसकी लगभग सपाट छाती को देखकर तो येही लगता था की वो शायद 10th में ही होगी..पर वो असल में कॉलेज के दुसरे साल में थी.
उसका भाई अयान काफी बदल गया था, और मोटा भी हो गया था..उसने मुझे देखते ही “यो ब्रथर…” कहते हुए गले लगा लिया.
सुरभि ने भी मुझसे हंस कर हाथ मिलाया और मैंने हरीश अंकल के पैर छुए और मौसी की तरफ बड़ा उनके पैर छूने के लिए तो उन्होंने मुझे गले से लगा लिया..उनके नर्म मुलायम गोले मेरी गर्दन से मिल कर फुले नहीं समाये..मैंने मोसी पीछे खड़े पापा को आँख मारी और पापा मेरे साथ गहरी हंसी हंस दिए.
हम सभी ने सारा सामान उठाया और बाहर आकर कार में बैठ गए और घर की तरफ चल दिए.
घर पहुंचकर मम्मी ने दरवाजा खोला और अपनी बहन को देखते ही उस से लिपट गयी.
“अरे दीपा…तू तो बिलकुल नहीं बदली…पहले जैसी ही सुन्दर है..लगभग १ साल के बाद देख रही हूँ मैं तुझे..” मम्मी ने कहा.
और फिर मम्मी ने अपने जीजाजी और दोनों बच्चो को भी मिलकर उन्हें अन्दर लेजाकर बिठाया और चाय बनाकर ले आई.
सभी लोग बैठ कर बातें कर रहे थे, तभी ऊपर से ऋतू भी नीचे आ गयी और सबसे मिलने के बाद वो भी वहीँ बैठ गयी.
मैंने नोट किया की अयान ऋतू के मोटे चुचे देखकर बार -2 अपनी नजरें उधर ही ले जा रहा था. ऋतू भी उसे अपनी तरफ बार बार देखते पाकर समझ गयी की उसके एटम बोम्ब कुछ कमाल दिखा रहे हैं..
शाम को सभी बाहर घुमने गए और एक अच्छे से रेस्तरा में खाना खाया और अगले दिन कहाँ -२ जाना है इसका प्लान भी बनाया. हरीश अंकल ने कहा की उन्हें अपने चाचा को मिलने के लिए मेरठ जाना है इसलिए वो कल घुमने नहीं जा पायेंगे, मौसी और बच्चो ने उनके साथ जाने के लिए पहले से ही मना कर दिया था सो उन्होंने कहा की वो सुबह -२ चले जायेंगे और शाम तक वापिस आ जायेंगे.
रेस्तरां से वापिस आते – आते 11 बज चुके थे, वो लोग लम्बे सफ़र से आये थे और थक चुके थे, मम्मी ने कहा की सुरभि ऋतू के साथ और अयान मेरे साथ सो जाएगा, दीपा मौसी और हरीश अंकल गेस्ट रूम में जाकर सो गए.
रात को मुझे सोते हुए नींद नहीं आ रही थी, मैंने देखा की अयान सो चूका है तो मैं चुपके से उठा और छेद से ऋतू के कमरे में झाँका, वो दोनों सो चुकी थी, मैं सुबह से उसकी चूत मारने के चक्कर में था, पर मौका नहीं मिला था, मेरा लंड अकड़ कर डंडे जैसा हो चूका था, मैं दबे पाँव बाहर आया और ऋतू के कमरे में दाखिल हो गया.
उसके बेड के पास आकर मैंने देखा की दोनों गहरी नींद में सो रही हैं..
मैंने ऋतू को हलके से हिलाया और वो जाग गयी, उसने मेरी तरफ हैरानी से देखा और बोली “भाई…तुम यहाँ क्या कर रहे हो..किसी ने देख लिया तो..”
“कोई नहीं देखेगा…” मैंने कहा और ऋतू के ऊपर झुककर उसके होंठों को चूम लिया.
मैंने देखा की साईड में लेती हुई सुरभि गहरी नींद में सो रही है, मैंने पहली बार उसका चेहरा इतने पास से और गोर से देखा, उसके होंठ बड़े ही मोटे थे, जो उसके पतले शरीर से बिलकुल मेच नहीं करते थे, उसके चेहरे का कटाव बड़ा ही दिलकश था, उसने टी शर्ट पहन रखी थी और शायद अन्दर ब्रा नहीं पहनी हुई थी, क्योंकि उसके ना के बराबर स्तनों के ऊपर लगे छोटे – छोटे निप्पल्स टी शर्ट के अन्दर से भी साफ दिखाई दे रहे थे.
ऋतू ने मेरा चेहरा अपनी तरफ खींचा और बोली “अपनी आँखों से ही चोद डालोगे क्या इसे भाई….” और हंसने लगी.
मैंने अपना ध्यान वापिस ऋतू की तरफ किया और उसे चूसने और चाटने लगा.
ऋतू बोली “भाई..हमें ये सब अभी नहीं करना चाहिए…अगर सुरभि उठ गयी तो क्या होगा…”
“ये नहीं उठेगी, ये सब काफी थके हुए हैं, सुबह से पहले नहीं उठेंगे…मैं सुबह से तड़प रहा हूँ तुम्हारी चूत मारने के लिए…मुझे और मत तडपाओ…मुझसे और सब्र नहीं होता..” और ये कहते हुए मैंने ऋतू की टी शर्ट को ऊपर किया और उसके मोटे ताजे गुब्बारों को अपने मुंह में लेकर चूसने लगा.
ऋतू ने भी अब विरोध करना छोड दिया और मेरे सर को पकड़कर अपनी छाती से दबा लिया और दुसरे हाथ से मेरे लंड को मेरे पायजामे से बाहर निकालकर दबाने लगी. जल्दी ही हम दोनों नंगे होकर एक दुसरे के शरीर को चूस और दबा रहे थे.
वो उठ कर खड़ी हुई और 69 की पोसिशन में आकर मेरे लंड को निगल गयी और अपनी महकती हुई चूत को मेरे मुंह पर दे मारा. हम दोनों ने बड़ी मुश्किल से अपनी सिस्कारियां अपने मुंह में दबाई.
मैंने उसकी चूत के अन्दर अपनी जीभ डाली और अपनी दो उँगलियाँ उसकी गांड के छेद में डाल दी और मजे से उसका रस पीने लगा..
ऋतू भी बड़ी उत्तेजित होकर मेरे लंड को बड़ी तेजी से अपने मुंह की थूक से भिगोकर चूस रही थी..उसने थोडा और पीछे होकर मेरी गांड के छेद पर भी अपनी जीभ फेरी और अपने होंठों से उस छेद को भी चूसने लगी, ऋतू पहली बार मेरी गांड के छेद को चूस रही थी, उसके ठन्डे होंठों के स्पर्श से मेरी कंपकंपी चूत गयी और मैंने और तेजी से ऋतू की चूत को चाटना शुरू कर दिया.
अब हम दोनों हल्की हल्की सिस्कारियां भी ले रहे थे.
ऋतू उठ खड़ी हुई और घूमकर मेरे ऊपर आई और अपने होंठ मेरे होंठो से जोड़कर उन्हें चूसने लगी, उसके मुंह में काफी गीलापन था और उसके होंठों में काफी नमी थी..मैंने उसके दोनों मोटे चुचों को अपने हाथ में पकड़ा और उसके निप्पल्स को दबाते हुए उसके दोनों जग्स को मसलने लगा.
ऋतू ने एक हाथ नीचे किया और मेरे लंड को अपनी चूत से सटाया और उसपर बैठती चली गयी.
हमारे दोनों में मुंह से एक लम्बी सिसकारी निकल गयी एक दुसरे के मुंह में.
मैंने अपने दोनों हाथ उसके चूतड़ों पर रखे और नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए.
मैंने पास लेटी सुरभि की तरफ देखा और मेरे मन में एक शरारत करने की सूझी, मैंने हाथ आगे किये और सुरभि के छोटे से निप्पल्स को अपनी उँगलियों में भर लिया..अपनी हथेली उसके छोटे से उभारों पर रखी और उन्हें दबाने लगा..मैंने इतने छोटे स्तन आज तक नहीं दबाये थे, पर उनकी कठोरता महसूस करके मुझे काफी मजा आया. वो मोटे चुचों की तरह मुलायम नहीं थे, बल्कि किसी कसरती शरीर की तरह कठोर थे.
ऋतू ने जब मुझे ऐसी हरकत करते देखा तो वो घबरा गयी की कहीं सुरभि की नींद न खुल जाए पर मैंने उसे समझाया की ऐसा नहीं होगा और वो फिर से अपने काम में लग गयी.
मेरे लंड से पिचकारियाँ छुटने वाली थी..
मेरे साथ -२ ऋतू भी झड़ने के काफी करीब थी..सबसे पहले मेरे लंड ने पिचकारियाँ मारनी शुरू की..
मेरा एक हाथ ऋतू के चुचे पर था और दूसरा सुरभि के., उत्तेजना के मारे मैंने उन दोनों को काफी तेजी से दबा डाला..
मैंने इतनी तेज दबाया की ऋतू की चीख ही निकल गयी और साथ ही साथ सुरभि की भी और वो नींद से जागकर हडबडा कर बैठ गयी…
सुरभि ने कुछ देर अपनी ऑंखें मद्धम बल्ब में देखने के लायक करी और अपनी आँखें मलते हुए हमारी तरफ देखा..
मैं और ऋतू अपना मुंह फाड़े उसकी तरफ देख रहे थे.
उसने जब देखा की ऋतू नंगी मेरे ऊपर सवार है तो उसकी आँखें फटी की फटी रह गयी.
“ये…ये ..क्या कर रहे हो तुम दोनों..” उसने हकलाते हुए पूछा
हमारे मुंह से कुछ नहीं फूटा.
वो समझ चुकी थी की कमरे में हमारे बीच क्या चल रहा था..पर उसे इस बात का बड़ा ही अचम्ब्भा था की हम भाई बहन एक दुसरे की चुदाई कर रहे हैं.
“तुम दोनों ये गन्दा काम कैसे कर सकते हो ..तुम तो भाई बहन हो” उसने हम दोनों को हैरानी भरी नजरों से देखते हुए कहा.
ऋतू जो अपने चरम स्तर पर थी और झड़ने ही वाली थी उसने अपनी स्पीड कम नहीं की..और हल्की चीख मारकर वो मेरे लंड पर अपना रस छोड़ने लगी.
आआआआआआअह्ह्ह म्मम्मम ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह्ह ओ गोड…. अह्ह्ह और हांफती हुई मेरे सीने पर गिर गयी.
मैंने अपनी तेज नजरों से देखा की सुरभि अब हमारी चुदाई को देखकर हैरान नहीं बल्कि उत्तेजित हो रही है..और ये बात उसके टी शर्ट में उभरते हुए दानों के द्वारा मुझे पता चली.
झड़ने के बाद ऋतू ने अपनी आँखें खोली और सुरभि से कहा “तुम ठीक कहती हो सुरभि…ये सब भाई बहन के बीच नहीं होना चाहिए…लेकिन हम क्या करें …न तो मेरा कोई बॉय फ्रेंड है और ना ही इसकी कोई गर्लफ्रेंड .. और हमें एक दुसरे की कई बातें अच्छी लगती है जिसकी वजह से हमने एक दुसरे को ही अपना बॉय फ्रेंड और गर्लफ्रेंड मान लिया है और ये सब करते हैं…और हमारे घर पर इस तरह की कोई रोक टोक भी नहीं है, तुम ही बताओ, आज के जमाने में कोई बिना सेक्स के रह सकता है क्या…बोलो”
सुरभि कुछ समझ नहीं पा रही थी की ऋतू ऐसा तर्क क्यों दे रही है..पर जब ऋतू ने सेक्स के बारे में अपनी राय रखी तो उसे भी लगा की शायद ये कुछ गलत नहीं है..
ऋतू ने आगे कहा “क्या तुम्हारा कोई बॉय फ्रेंड है ? तुमने कभी सेक्स किया है या नहीं…” और ऋतू ये कहती हुई मेरे लंड से उतर गयी और सुरभि का हाथ पकड़ लिया.
सुरभि कुछ देर के लिए सकुचाई और फिर एक गहरी सांस लेकर बोली “तुम शायद ठीक कह रही हो दीदी..हाँ मेरा एक बॉय फ्रेंड है वो मेरे ही कालेज का लड़का है और उसका नाम रजत है पर सभी उसे राईडर के नाम से बुलाते हैं, क्योंकि उसकी बायक पर हमेशा कोई न कोई लड़की राईड करती रहती है, और मैंने पिछले 6 महीनो में उसके साथ कई बार सेक्स भी किया है..और सच कहूँ तो जब भी वो मुझे छूता है मुझे एक नशा सा हो जाता है और जब भी मैं उसका “वो” देखती हूँ तो मैं बेबस सी हो जाती हूँ और और….” ये कहते हुए उसकी आँखों में गुलाबी डोरे तेरने लगे और उसकी सांस फूलने लगी…वो पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी..उसकी चूत में से रिसते रस की खुशबु मेरे नथुनों तक आ रही थी.
उसकी हालत देखकर मेरे मुरझाये हुए लंड में फिर से कढ़कपन आने लगा, मौके का फायदा उठाकर ऋतू ने सुरभि का हाथ पकड़कर मेरे गीले लंड पर रख दिया.
सुरभि के साथ -२ मुझे भी एक झटका सा लगा, पर उसके मुलायम और पतले हाथ अपने लंड पर पाकर मुझे बड़ा ही मजा आया.
वो पिछले दस दिनों से अपने बॉय फ्रेंड से दूर थी और सेक्स की लत की वजह से उसकी हालत भी काफी पतली हो चुकी थी, मेरे और ऋतू के बीच चलती चुदाई को देखकर पहले ही उसकी चूत से पानी निकल रहा था पर ऋतू ने जब उसका हाथ मेरे लंड पर रखा तो उसकी चूत में जैसे आग सी लग गयी और उसने मेरे लंड को अपनी पतली उँगलियों के बीच कस कर दबा दिया.
“वोंव…तुम्हारा ये कितना बड़ा है…” और वो मेरे लंड पर अपने हाथ को ऊपर नीचे करने लगी.
“इसे लंड कहते हैं…” ऋतू ने उसके चेहरे के पास अपना मुंह लेजाकर कहा और उसकी चूत पर अपना हाथ रख दिया.
“म्मम्मम्म….मुझे पता है…ये लंड होता है…” और उसने अपनी चूत पर रखा ऋतू का हाथ अपने हाथों के नीचे दबा दिया और बहकती हुई आवाज में बोली “और इसे चूत कहते हैं….अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ” और वो सिस्कारियां लेने लगी.
मुझे पता नहीं था की ये चुहिया सी दिखने वाली लड़की इतनी गर्म भी हो सकती है..ये गर्म है तभी तो इतनी आसानी से हमारी बातों में आकर तड़प रही है. मजा आएगा इसकी चूत मारकर…ये सोचते हुए मैं मुस्कुरा उठा.
ऋतू ने उससे पूछा “अच्छा एक बात बताओ…क्या अपने बॉय फ्रेंड के आलावा भी तुमने किसी के साथ सेक्स किया है…या करना चाहती हो..”
सुरभि ने झट से अपनी आँखें खोली और ऋतू की तरफ देखने लगी, वो शायद कुछ सोच रही थी ..
वो धीरे से बोली “दरअसल…ये मेरा दूसरा बॉय फ्रेंड है, पर सेक्स मैंने पहली बार इसके साथ ही किया था, मेरा पहला बॉय फ्रेंड तो सिर्फ बाते करने में, मूवी दिखाने और खिलाने पिलाने में ही लगा रहता था, जबकि मेरी दूसरी सहेलियों के बॉय फ्रेंड उनके साथ सेक्स के पुरे मजे लेते थे, जिसे सुनकर मुझे कुछ होने लगता था, इसलिए मैंने उस चुतिया को छोड़ दिया और अपनी सहेली के एक पुराने बॉय फ्रेंड के साथ, जिसने मेरी सहेली की काफी चुदाई करी थी, दोस्ती कर ली..और तब से मैंने जाना की इतने समय तक मैं किस मजे से महरूम रही थी..हमने लगभग हर जगह चुदाई की है, उसके घर पर, हमारे कॉलेज में, क्लास में, कार में, और कई बार अपने घर में भी जब मम्मी पापा नहीं होते…पर मैंने कई बार अपने भाई को, जिसे मेरे बॉय फ्रेंड के बारे में सब पता है, अपनी तरफ तरसती नजरों से देखते हुए देखा है…और सच कहूँ तो मैं भी कई बार ये सोचती हूँ के उसके साथ भी…..पर वो मेरा भाई है ये सोचकर मैं कुछ कर नहीं पाती…पर तुम लोगो को देखकर लगता है की मुझे भी एक बार उसके साथ ट्राई करना ही चाहिए..” उसने लगभग अपने सारे राज हम दोनों के सामने खोल दिए.
इस पूरी बातचीत के दोरान उसने अपना हाथ मेरे लंड से नहीं हटाया.
ऋतू भी उसकी चूत की मालिश उसके पायजामे के ऊपर से करने में लगी हुई थी.
मैं समझ गया की ये चिड़िया तो अब चुदी ही समझो.
मैंने एक हाथ ऊपर करके उसके निप्पल को पकड़ लिया..उसके निप्पल के नीचे कुछ नहीं था, नाम मात्र के चुचे थे उसके, पर निप्पल बड़े – 2 थे, मैंने उन्हें अपनी उँगलियों से उमेठना शुरू कर दिया, उसने आनंद के मारे अपनी आँखें बंद कर ली और मेरे हाथ को पकड़कर अपनी छाती पर दबाने लगी.
मैंने उसके सर के पीछे हाथ रखकर अपनी तरफ खींचा, वो किसी चुम्बक की तरह मेरी तरफ खींचती चली आई और मेरे मुंह के ऊपर आकर मेरे होंठों को बड़ी ही बेदर्दी से चबाने लगी..मैंने इतने जंगलीपन की कल्पना भी नहीं की थी उससे..
उसका एक हाथ मेरे लंड पर टिका था और दूसरा मेरे सर के ऊपर..
उसके मुंह का स्वाद बड़ा ही मीठा था, उसके होंठों से निकलता रस किसी बंगाली मिठाई की याद दिला रहा था..मैं भी अपनी पूरी ताकत से उसके नर्म और गर्म होंठों को चूसने में लग गया.
पीछे बैठी ऋतू ने सुरभि की टी शर्ट को पकड़ कर ऊपर उठाया और उसके गले से निकाल दिया.
अब वो ऊपर से नंगी थी.
मैंने उसकी छाती की तरफ देखा, वो बिलकुल सपाट थी, पर उसपर उगे काले निप्पल बड़े ही दिलकश लग रहे थे..मुझसे सब्र नहीं हुआ और मैंने उसे अपनी तरफ खींचा और उसके मोटे निप्पल को अपने मुंह में डाल लेकर चूसने लगा.
उसके शरीर में जैसे एक करंट सा दौड़ गया, वो अपनी चूत को मेरी जाँघों से घिसने लगी, जिसकी वजह से मुझे उसकी चूत से निकलते पानी का एहसास हुआ.
वो लगभग लेट सी गयी थी.
ऋतू ने उसके पायजामे को नीचे से उतार दिया, उसने नीचे चड्डी भी नहीं पहनी हुई थी, मैंने नीचे देखा तो उसकी चूत की हालत देखकर मुझे उसपर तरस आ गया, वो बिलकुल भीग चुकी थी और चुदने के लिए मानो भीख मांग रही थी. उसकी चूत की बनावट बड़ी ही सुन्दर थी, हलके-२ बाल थे उसपर, बिलकुल नयी नवेली सी चूत थी, उसे देखकर मुझे सोनी की चूत की याद आ गयी, वो भी बिलकुल ऐसी ही थी…
सुरभि के मुंह से लार निकल रही थी, जो मेरे सीने पर आकर गिर रही थी, वो पूरी तरह से गर्म हो चुकी थी.
वो नीचे झुकी और मेरे लंड को अपने मुंह में डालकर चूसने लगी.
वो बीच-२ में मेरे लंड को काट भी रही थी.
ऋतू आराम से पीछे बैठकर हम दोनों की गुथम गुथा देख रही थी.
मैंने अपना एक हाथ उसकी चूत पर रखा, मुझे लगा की मेरा हाथ झुलस जाएगा, इतनी गर्मी निकल रही थी वहां से.
मैंने देर करना उचित नहीं समझा और उसे घुमा कर अपनी तरफ कर लिया, वो समझ गयी की चुदने का टाइम आ गया है, वो मुझ से ज्यादा व्याकुल थी अपनी चूत मरवाने के लिए , उसने बिना कोई वक़्त गंवाए मेरे लंड को पकड़ा और उसे अपनी चूत के दरवाजे पर रखकर एक तेज झटका मारा और मेरा आधे से ज्यादा लंड अपनी चूत में ले गयी..
अह्ह्ह्हह्ह ओह्ह्ह्हह्ह मर्र्र गयी रे….वो इतने जोर से चिल्लाई की मुझे लगा शायद नीचे तक आवाज गयी होगी..
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ऋतू ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और बोली…”धीरे बोलो…तुम तो मरवाओगी ..”
“मैं क्या करूँ…जब भी लंड मेरी चूत में जाता है तो मेरे मुंह से बड़ी तेज आवाजें निकलती हैं…ये मेरे बस में नहीं है..मैं क्या करों…अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ” वो फिर से उतनी ही जोर से चिल्लाई..सेक्स के पुरे मजे लेने वाली लोंडिया थी वो..
मुझे भी अब डर लगने लगा, मम्मी पापा की तो कोई बात नहीं , अगर मौसी ने उसकी आवाज सुन ली तो क्या होगा..
मैंने उसे अपने तरफ खींचा और उसके होंठों को अपने मुंह में दबाकर चूसने लगा, ताकि उसकी आवाज बाहर ना जाए.
मैंने नीचे से एक तेज झटका मारा और अपना पूरा लंड उतार दिया अपनी मौसेरी बहन की चूत में. उसकी आँखें बाहर की तरफ निकल आई, उसकी चूत में शायद इतनी अन्दर आज तक कोई लंड नहीं गया था.
मेरे मुंह में फंसकर भी उसकी आवाज काफी तेज निकल रही थी, पर पहले से थोडा कम थी.
वो मेरे मुंह को चूसते हुए चिल्ला रही थी.
अह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फो फ्फ्फोफ़ फ फ़ो फोफ फ ऑफ़ फ फफफफ फफफफ गग्ग ग गग्ग गम्मम्मम्म …
मैंने एक हाथ पीछे करके उसकी गांड के छेद में अपनी ऊँगली दाल दी ..
मेरा इतना करते ही जैसे उसकी चूत में रखा गर्म पानी का गुब्बारा फट गया और वो जोर जोर से चिल्लाती हुई मेरे लंड पर झड़ने लगी..
मैंने अपने हाथ से उसका मुंह दबाया और उसकी चीख दबाई.
मेरे लंड पर जैसे किसी ने पानी का डब्बा खली कर दिया हो..इतना झड़ी थी सुरभि आज.
जैसे ही मैं झड़ने के करीब आया, वो चिल्लाई..”नहीं मेरे अन्दर नहीं…” मैं समझ गया की वो प्रेग्नेंट होने के डर से ऐसा कह रही है , मैंने झट से उसे अपने लंड से उतारा और उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भरकर चुसना शुरू कर दिया..जल्दी ही मैंने एक के बाद एक कई धारे उसके मुंह में छोडनी शुरू कर दी, वो मेरा सारा माल चाट कर गयी..
पीछे बैठी ऋतू ने ताड़ी मारकर उसकी चुदाई की प्रशंसा की.
उसके बाद सुबह 5 बजे तक मैंने दो बार और ऋतू और सुरभि की चूत मारी और अंत में थक हारकर मैं वापिस अपने कमरे में आकर सो गया.
अगली सुबह मैं जल्दी ही उठ गया, मैंने देखा की अयान अभी तक खर्राटे भर रहा है, मैंने टाइम देखा तो 8 बजने वाले थे, मैं उठा और छेद में से दुसरे कमरे का हाल देखा, मुझे विश्वास नहीं हुआ जो मैंने वहां देखा, ऋतू और सुरभि 69 के पोस में लेटी हुई एक दुसरे की चूत चाट रही थी..
एक ही रात में काफी खुल गयी थी सुरभि हमारे साथ..
मैं अचरज में पड़ गया, क्योंकि मैं वहां से सुबह 5 बजे के आस पास ही वापिस आया था और मुझे लगा की वो दोनों अब तक घोड़े बेच कर सो रही होंगी..
मैं झट से दरवाजा खोल कर उनके कमरे में गया.
वहां सेक्स का आखिरी दौर चल रहा था, मेरे पहुँचते ही ऋतू के साथ साथ सुरभि ने भी अपना रस छोड़ दिया..
और इस बार भी सुरभि अपने ओर्गास्म के होते ही बड़े जोर से चिल्लाई..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फो फूऊफ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ अह्ह्हह्ह्ह्ह यीईईइ
उसकी चीख बड़ी ही तेज थी..मैं घबरा गया..
मैं झट से उसके पास पहुंचा और उसका मुंह दबा कर उसे शांत किया..
पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
उसकी आवाज सुनकर मम्मी भागकर ऊपर आ गयी.
उन्हें लगा की किसी को करंट लगा है..
कमरे में पहुँचते ही उन्होंने देखा की ऋतू बेड पर लेती हुई है और सुरभि अपनी चूत उसके मुंह पर रखे उसकी चूत को चूस रही है, और मैंने सुरभि के मुंह को दबा रखा है.
मम्मी को देखते ही सुरभि की सिट्टी पिट्टी ग़ुम हो गयी..
मम्मी सारा माजरा समझ गयी.
शुक्र है और किसी ने सुरभि की आवाज नहीं सुनी.
मम्मी अन्दर आ गयी और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.
सुरभि की हालत देखने वाली थी.
मम्मी ने मुस्कुराते हुए बेड के पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा “तो ये सब चल रहा है…और तुमने इस बेचारी सुरभि को भी अपने खेल में शामिल कर लिया..”
सुरभि अपनी मौसी के इस रवेय्ये को देखकर हैरान थी.
मैंने उसकी परेशानी दूर की..
मैंने कहा “देखो सुरभि, तुम परेशान मत हो, मैंने तुमसे कहा था न की हमारे परिवार में किसी तरह की कोई रोक टोक नहीं है, इसलिए हम सभी एक दुसरे के साथ एन्जॉय करते हैं..और ये कहते हुए मैंने मम्मी को अपनी तरफ खींचा और उनके होंठों को चूसते हुए उनके दांये मुम्मे को सूट के ऊपर से ही दबाने लगा.
मम्मी ने मेरा पूरा साथ दिया और अपनी बहन की बेटी की परवाह न करते हुए मेरा लंड पकड़कर उसे दबाने लगी.
सुरभि सब समझ गयी की हमारे घर में क्या क्या चलता है.
मैंने मम्मी के होंठो को चूसते हुए उनके कुर्ते को नीचे से पकड़कर उतारने लगा तो उन्होंने रोक दिया “अरे नहीं आशु…अभी नहीं, नीचे सब उठने ही वाले हैं..बाद में करेंगे…” पर मैंने उनकी एक न सुनी और उनका कुरता उतार दिया.
ऋतू पीछे बैठकर और सुरभि ऑंखें फाड़कर हमारा खेल देख रही थी.
मैंने मम्मी की ब्रा के हुक खोल दिए और उनके लोटे लुडक कर बाहर आ गए, मैंने झट से उनके दानो पर कब्ज़ा कर लिया.
मैंने नोट किया था की मम्मी को सुबह -२ सेक्स करने में बड़ा मजा आता है, कल भी उन्होंने मेरे कमरे में जो सेक्स किया था, मुझे अभी तक याद था उनका उतावलापन.
इसलिए उन्होंने ज्यादा विरोध नहीं किया आज भी, जबकि उनकी भांजी उनके सामने बैठी थी, पर उन्हें तो सिर्फ अपनी चूत में हो रही खुजली की चिंता थी.
मम्मी के बड़े-२ चुचे देखकर सुरभि हैरान रह गयी, उसने इतने बड़े चुचे कभी नहीं देखे थे.
मैंने उन्हें दबाना, चुसना, काटना शुरू किया और मम्मी ने मचलना, तड़पना और सिसकना.
मैंने उन्हें बिस्तर पर गिरा दिया और उनकी लास्टिक वाली पायजामी उतार डाली, और उसके बाद उनकी काली पेंटी भी..
मम्मी की महकती हुई चूत मेरे सामने थी, मैंने झट से अपना मुंह उनकी चूत में डाल दिया और सुबह का नाश्ता करने लगा.
मम्मी की आँखें बंद थी और वो धीरे-२ सिस्कारियां लेती हुई मेरे सर के बालों में अपनी उँगलियाँ घुमा रही थी.
स्सस्सस्स म्मम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह ओयीईई …….
ऐसे ही बेटा….अह्ह्ह्हह्ह और तेज चुसो…हन्न्न्न वहीँ पर……शाबाश,.,अह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म
सुरभि बिलकुल मम्मी के सर के पास बैठी हुई थी, उसने इतना कामुक दृश्य नहीं देखा था और ना ही माँ बेटे का ऐसा प्यार.
मेरे चाटने से मम्मी के मोटे मुम्मे बुरी तरह से हिल रहे थे, मेरे मुंह के हर झटके से उनके मोटे गुब्बारे ऊपर होते और फिर नीचे..
उन्हें हिलता हुआ देखकर सुरभि के मुंह में पानी आ गया और वो सम्मोहित सी होकर उनपर झुक गयी और अपनी मौसी के दांये मुम्मे को मुंह में भरकर उसे चूसने लगी..
मम्मी ने जैसे ही सुरभि के होंठों को अपनी छाती पर महसूस किया तो उनके आनंद की सीमा न रही उन्होंने अपनी ऑंखें खोली और सुरभि को अपने सीने पर और तेजी से दबा कर उसे अपना दूध पिलाने लगी.
ऋतू भी उठ खड़ी हुई और दूसरी तरफ से आकर मम्मी के बाएं मुम्मे पर अपना मुंह लगा कर उसे चूसने लगी.
अब चीखने की बारी मम्मी की थी.
हय्य्यय्य्यय्य्य्य अह्ह्हह्ह्ह्हह्हssssssssssssssssssssss स्स्स्सस्स्स्स………म्मम्मम्मम्म
उन्हें इतनी तेज चीखता पाकर मैं फिर से डर गया..पर मम्मी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने खुद पर काबू पाकर ऋतू और सुरभि के सर अपने मुम्मों पर और तेजी से दबा डाले.
मैं नीचे से उनकी चूत का रस पी रहा था और ऊपर से वो दोनों उनका दूध.
मम्मी के तो मजे हो गए सुबह-२.
मम्मी से और सब्र नहीं हुआ और वो उठी और घोड़ी बन कर अपनी गांड हवा में उठा दी और पीछे देखकर बोली…”आ जा बेटा…अब सहन नहीं होता…डाल दे अपनी माँ की चूत में अपना लंड…प्लीस…..”
वो तड़प सी रही थी..
मैंने उन्हें तडपना उचित नहीं समझा और अपना लंड उनकी चूत के पास लेजाकर रखा, बाकी काम मम्मी ने कर दिया, पीछे की तरफ धक्का लगाकर और निगल गयी एक ही बार में मेरे पुरे लंड को..
मम्मी के दोनों तरफ बैठी हुई ऋतू और सुरभि हमारी चुदाई को देख रही थी..
मेरे मन में अपनी एक और इच्छा पूरी करने की बात आई.
मैंने ऋतू और सुरभि को इशारे से मम्मी की ही तरह गांड उठा कर लेटने को कहा.
वो दोनों भी मम्मी के दोनों तरफ उनकी ही तरह घोड़ी बन कर लेट गयी.
मैंने उन दोनों की चूत के अन्दर अपनी उँगलियाँ डाल दी और तेजी से हिलाने लगा.
मेरी उँगलियाँ ऋतू और सुरभि को चोद रही थी और मेरा लंड मम्मी की चूत को.
अचानक मैंने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाल लिया.
मम्मी ने हैरानी से पीछे मूढ़ कर देखा, मैंने उनकी चूत में अपनी उँगलियाँ डाल दी और अपना लंड सुरभि की चूत में सटाया और एक तेज झटका मारा.
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम्म और उसने भी मेरा लंड निगल लिया अपनी चूत में.
अब मैं सुरभि की चूत को पीछे से मार रहा था.
15 – 20 झटकों के बाद मैंने उसकी चूत से भी लंड बाहर निकला और ऋतू के पास जाकर उसकी अधीर सी चूत में पेल दिया..
मेरे सामने तीन चूतें थी जो हवा में अपनी मोटी गांड उठाये मेरे लंड का इन्तजार कर रही थी.
मैं बारी-२ से तीनो की चूत मार रहा था.
सच में इतना मजा तो आज तक नहीं आया था मुझे.
जल्दी ही मम्मी ने आवाजें निकालनी शुरू कर दी, मैं समझ गया की वो झड़ने वाली हैं.
“अह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ऑफ अह्ह्ह बेटा ऐसे ही औउ और तेज बेटा…मार अपनी माँ की चूत हान्न्न ……हन्न्न्नन्न अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म “
और उन्होंने मेरे लंड पर अपना सफ़ेद लिसलिसा पानी छोड दिया…
मैंने अपना लंड बाहर निकला और ऋतू की चूत में तब तक घिसा जब तक उसकी चूत का जिन्न पानी बनकर बाहर नहीं आ गया..
वो भी चिल्लाती हुई मेरे लंड को भिगोने लगी..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह हह्ह्ह्ह अह्ह्ह म्मम्मम्मम मजा आ गया…भाई …….
मैंने पिछली रात 4 बार चोदा था इन दोनों को, इसलिए मेरा लंड जल्दी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.
मैंने अपना गीला लंड सुरभि की चूत में फंसाया और उसे भी उसके अंजाम तक पहुंचा दिया.
अपने ओर्गास्म के समय वो चिल्ला पड़ी, पर इस बार ऋतू तैयार थी उसके लिए, उसने सुरभि के मुंह पर अपना मुंह लगा दिया और उसकी चीख को वहीँ दबा दिया.
घ्न्नन्न्न्न नं,,,,,, म्मम्मम ग्न्न्नन्न्न्न ……म्मम्मम्म ….घ्ह्ह्हह्ह्ह्ह ….. उसकी गुर्राहट सुनाई दे रही थी ऋतू के मुंह से.
तीन चूतें एक साथ मारकर मैंने अपनी एक और फ़ंतासी पूरी कर ली थी आज.
अब मेरा लंड उन तीनो के रस में नहाया हुआ खड़ा था, वो तीनो मेरे सामने बैठ गयी और बारी-२ से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
मम्मी बीच में बैठी थी और ऋतू और सुरभि उनके दांये बांये.
मैंने अपने लंड के डंडे से उनके होंठों को मारा और उनकी आँखों पर, गालों पर, नाक पर, माथे पर उसे घिस घिसकर मजे लेने लगा.
वो तीनो भी मेरे लंड को बारी-२ से चूस रही थी और एक दुसरे से छिनकर ज्यादा से ज्यादा देर तक अपने मुंह में रखकर मुझे स्वर्ग सा एहसास दे रही थी.
जल्दी ही उन तीनो की मेहनत रंग लायी और मैंने अपना रस निकालना शुरू कर दिया.
सबसे पहली धार मैंने मम्मी के मुंह पर मारी दूसरी सुरभि के और तीसरी ऋतू के..उन तीनो ने अपना मुंह खोल रखा था और मेरे लंड से निकलती बारिश की बूंदों को अपने मुंह में इकठ्ठा कर रही थी…मैं आज तक इतना नहीं झड़ा था.
अपनी आखिरी बूँद मैंने सुरभि की थोड़ी पर निचोड़ दी.
उनके चेहरे देखने लायक थे. बर्फ की सफ़ेद चादर सी बिछ गयी थी तीनो के चेहरे पर.
ऋतू ने मम्मी के चेहरे को चाटना शुरू किया, सुरभि समझ गयी और उसने ऋतू के चेहरे को चाटकर चमका दिया, मम्मी ने भी बारी-२ से दोनों के चेहरे से अमृत इकठ्ठा किया और पी गयी और इस तरह से उन तीनो का पेट भर गया.
मम्मी ने अपने कपडे पहने और बोली “चलो अब जल्दी से नहा धो लो और नीचे आ जाओ, हमें आज घुमने जाना है..”
मैंने अपने कपडे पहने और अपने कमरे में आकर बाथरूम में चला गया और नहाकर बाहर आया.
मैंने अयान को उठाया और उसे नहाने भेज दिया.
नीचे आकर देखा तो हरीश अंकल मेरठ जाने के लिए निकल रहे थे, उनके जाने के बाद हम सभी ने इकठ्ठा नाश्ता किया और हम घुमने निकल गए.
पुरे रास्ते सुरभि मुझसे चिपकी रही , वो मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी..कल से आज तक वो करीब 5 बार मेरा लंड अपनी चूत में ले चुकी थी. और अभी भी उसकी चूत कुलबुला रही थी मेरे लंड की गर्मी पाने के लिए.
मैंने नोट किया की पापा का सारा ध्यान दीपा आंटी की तरफ था, दीपा आंटी भी पापा की नजरों को भांप चुकी थी, पर उन्हें मालुम था की उनका जीजा ऐसा ही है, उसपर हमेशा से गन्दी नजर रखता है, पर वो कर भी क्या सकती थी..
उस दिन हम लाल किला घुमे, क़ुतुब मीनार गए और कनाट प्लेस भी गए और वहां से पालिका बाजार, जहाँ से हमने काफी खरीदारी करी.
शाम को खाना खाकर हम सभी वापिस घर आ गए.
दीपा मौसी ने अपने पति को फ़ोन किया तो पता चला की हरीश अंकल रात को वहीँ रहेंगे..
थोड़ी देर बाद हम सभी सोने के लिए ऊपर की तरफ चल दिए..
मैंने किचन में खड़े पापा को मम्मी से कहते हुए सुना “आज तो मैं किसी भी हालत में दीपा की चूत मारकर रहूँगा…अगर मानेगी तो ठीक नहीं तो रेप कर दूंगा साली का…” मम्मी उन्हें समझा रही थी पर पापा कुछ समझने को तैयार नहीं थी.
मैं समझ गया की आज तो दीपा मौसी चुद कर ही रहेगी..
मैंने मम्मी पापा की बातें सुनी, सब कुछ सेट हो चूका था…पापा ने मम्मी को पूरी तरह से बोतल में उतार लिया था..
मैंने भागकर ऋतू के पास गया और उसे सारी बात बताई, मैंने सोचा की ऋतू को गुस्सा आएगा पर वो तो ख़ुशी के मारे उछल ही पड़ी और बोली “अरे वह…दीपा आंटी की चुदाई और वो भी पापा से…मजा आयेगा…”
मैंने कहा “पर दीपा आंटी पापा को घांस नहीं डालती…पापा उनके साथ जबरदस्ती करने की बात कर रहे थे..”
“यानी रेप…..तब तो और भी मजा आएगा…मैं ये सब देखना चाहती हूँ… ” उसने ख़ुशी से उछलते हुए कहा.
“और सुरभि और अयान का क्या करेंगे….” मैंने ऋतू से कहा.
“तुम्हारे पास नींद की गोलियां है न…आज उन्हें गोली दे देते हैं…” उसने कहा. “उन्हें आज जल्दी सुला देते हैं…तुम सुरभि के पास जाओ और मैं अयान के पास जा रही हूँ..”
मैंने उसे नींद की गोली दी और वो कोल्ड ड्रिंक में मिला कर हम दोनों चल दिए…
हम दोनों जल्दी से एक दुसरे के कमरे में चल दिए..
ऋतू के कमरे में पहुंचकर मैंने देखा की सुरभि अभी – २ अपने कपडे चेंज करके बिस्तर पर बैठी थी…मुझे देखते ही वो भागकर मेरे पास आई और मुझसे बेल की तरह लिपट गयी और मुझे चूमने लगी…पुरे दिन से वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती थी..पर अभी मेरे पास समय नहीं था, मैंने उसे अपने से दूर किया और कहा…”देखो सुरभि…मुझे अभी नीचे जाना है, स्टोर रूम से कुछ सामान निकलवाना है मुझे मम्मी के साथ…मैं तो बस तुम्हे ये कोल्ड ड्रिंक देने आया था, तुम मेरा इन्तजार करो मैं 1 घंटे में आ जाऊंगा..” और मैंने उसे कोल्ड ड्रिंक दे दी जिसमे मैंने नींद की गोलियां डाल रखी थी, उसने बिना कुछ कहे उसे पी लिया और बोली “मैं काफी थक गयी हूँ, पर तुम्हारा लंड लिए बिना मैं सोने वाली नहीं हूँ…तुम जाओ…और जल्दी आना…”ये कहकर वो बेड पर लेट गयी, गोली ने अपना असर दिखाना शुरू किया और उसकी आँखें बंद होने लगी..जल्दी ही वो सो गयी..
मैंने सोचा, ना जाने ऋतू ने अयान को गोली दी होगी या नहीं..मैं छेद के पास पहुंचा और वहां से अपने कमरे में झांककर वहां का नजारा देखने लगा..
दुसरे कमरे में ऋतू जब कोल्ड ड्रिंक लेकर पहुंची तो अयान अपनी मौसेरी बहन को देखकर खुश हो गया, उसने ऋतू जैसी सेक्सी लड़की आज तक नहीं देखिथि…ऋतू ने टी शर्ट और स्कर्ट पहनी हुई थी..जिसमे से उसकी गोरी टाँगे बड़ी ही दिलकश लग रही थी..वो जब से यहाँ आया था ऋतू को ही घूरे जा रहा था, ऋतू भी ये सब जानती थी, उसने सोचा चलो आज अयान से थोडा पंगा लिया जाये..
उसने अयान से उसके कालेज के बारे में बाते करनी शुरू कर दी, और अंत में बात लड़की पर आकर रुकी, ऋतू ने उससे पूछा “क्या तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है ?”
वो घबरा गया और बोला “नही…नहीं तो दीदी…”
ऋतू उसकी हालत देखकर मुस्कुरा उठी.
“यानी तुमने आज तक किसी को किस्स भी नहीं किया है…” ऋतू ने हैरानी से पूछा…
“किस्स…अम्म्म नहीं तो …मैंने नहीं किया…” वो अब हकला रहा था..
“करना चाहते हो…..” उसने आगे होकर कहा और अपनी एक टांग उठा कर अपनी दूसरी टांग के नीचे दबा ली जिसकी वजह से उसकी मोटी जांघे उजागर हो गयी, उसकी मोटी टांग देखकर अयान की साँसे रुक सी गयी…
वो बोला “हान्न्न्न …पर किसको करूँ….” उसने ऋतू से पूछा.
“मुझे…..” ऋतू ने अपना चेहरा आगे किया और अपनी आँखें बंद कर ली..
अयान ओ विश्वास नहीं हुआ की ऋतू ने उसे चूमने की इजाजत दे दी है, वो कल से अपनी इस सेक्सी बहन को देखकर पागल हुए जा रहा था और अब ऋतू खुद ही उसे चूमने का निमंत्रण दे रही है उसने बिना किसी देरी के उसके चेहरे को पकड़ा और उसके नर्म मुलायम मलाई जैसे होंठों को चूसने लगा..वो बड़े ही मीठे थे….उसने आज तक किसी को चूमा नहीं था, उसे ऐसा लगा जैसे वो स्वर्ग में हो…वो बावला सा होकर ऋतू के होंठों पर टूट सा पड़ा और उन्हें चूसने और काटने लगा…
ऋतू को भी बड़ा मजा आ रहा था अपने नौसिखिये भाई से किस्स करवाने में…पर वो जानती थी की इसके आगे और किसी बात का समय नहीं है, नीचे वाली फिल्म भी तो देखनी थी उसको…उसने अयान को पीछे धकेला और बोली…”वाह भाई…तुम तो काफी अच्छी तरह से किस्स कर लेते हो…”
अयान ने आगे बढकर उसे अपनी बाँहों में भींच लिया और अपना मुंह नीचे करके उसके उरोजों को काटने लगा..ऋतू ने उसे हटाया और बोली “अरे…रुको…अभी नहीं….मैं जरा देख कर आती हूँ की सब सो गए हैं या नहीं…तब तक तुम ये कोल्ड ड्रिंक पियो..” और अयान ने उसके हाथों से कोल्ड ड्रिंक ले कर एक घूंट में पी ली और बोला…”ठीक है…तुम जल्दी जाओ और जल्दी आओ…मैं तुम्हारा इन्तजार करूँगा…. और ये कहकर वो बेड में घुस गया , ऋतू बाहर निकल कर अपने कमरे में आई और सुरभि को सोता पाकर मेरे पास आई और मेरे कमरे में झांककर देखा, वहां अयान भी नींद के आगोश में पहुँच चूका था.
“बड़े मजे कर रही थी अयान के साथ….” मैंने उसे छेड़ते हुए कहा..
“तुम क्यों जल रहे हो….आज अगर दीपा आंटी को चुदते हुए नहीं देखना होता न तो मैं रेहान का कुंवारापन अपनी चूत में घोल कर पी जाती…” उसने मुस्कुराते हुए कहा..”पर वो फिर कभी…अभी तो जल्दी से नीचे चलो..” और हम दोनों नीचे चल दिए.
वहां गए तो पाया, मम्मी पापा , दीपा आंटी के साथ बैठे उनके कमरे में गप्पे मार रहे हैं..
मैं ऋतू के साथ कूलर के पीछे छिप गया और खिड़की से अन्दर झाँकने लगा.
दीपा : “इनको भी मेरठ जाना जरुरी था क्या…और वहां रहने की ना जाने इनको क्या सूझी….”
पापा : “अरे साली साहिबा…आप क्यों घबरा रही हैं…मैं हूँ न…आप घबराइए नहीं..”
दीपा : “आप हैं तभी तो घबराहट हो रही है…” और वो हंसने लगी..
मम्मी : “भाई आप दोनों जीजा साली बाते करो…मैं तो चली, मुझे तो बड़ी नींद आ रही है…”
और वो उठ कर अपने कमरे में चली गयी और दरवाजा बंद कर लिया.
दीपा आंटी को थोडा अजीब सा लगा अपनी बहन का बर्ताव की वो अपने पति को रात के समय अपनी बहन के कमरे में क्यों छोड़ गयी…पर वो कर भी क्या सकती थी, वो मेहमान जो थी..
वो दोनों फिर से एक दुसरे से बाते करने लगे..
दीपा : “मैं तो आज बहुत थक गयी हूँ जीजू…मेरा पूरा बदन दुःख रहा है “
पापा : “कहो तो दबा दूं….” और उन्होंने दीपा आंटी की जांघ पर अपना हाथ रख दिया और उसे दबाने लगे..
दीपा : “ये क्या कर रहे हैं आप…” वो गुस्से से चिल्लायी….”आपकी इन्ही हरकतों की वजह से मैं आपके घर आने से कतराती हूँ…अब रात काफी हो चुकी है..मुझे सोना है..आप प्लीस अपने कमरे में जाओ”
पापा :”जानेमन…क्यों नाराज होती हो…मैं तो सिर्फ तुम्हारा बदन दबा कर तुम्हारा दर्द दूर कर रहा हूँ….” और ये कहते हुए पापा ने उन्हें अपने सीने से लगाया और उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए उनकी गर्दन को चूमने लगे..
दीपा आंटी के गुस्से की सीमा न रही…वो चिल्ला पड़ी….”दिदीई दीदी ….कहाँ हो आप…दीदी…..”
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hi plz. read my tread and give me comments
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ऋतू ने उसके मुंह पर हाथ रख दिया और बोलीधीरे बोलोतुम तो मरवाओगी ..
मैं क्या करूँजब भी लंड मेरी चूत में जाता है तो मेरे मुंह से बड़ी तेज आवाजें निकलती हैंये मेरे बस में नहीं है..मैं क्या करोंअह्ह्ह्हह्ह्ह्हह्ह वो फिर से उतनी ही जोर से चिल्लाई..सेक्स के पुरे मजे लेने वाली लोंडिया थी वो..
मुझे भी अब डर लगने लगा, मम्मी पापा की तो कोई बात नहीं , अगर मौसी ने उसकी आवाज सुन ली तो क्या होगा..
मैंने उसे अपने तरफ खींचा और उसके होंठों को अपने मुंह में दबाकर चूसने लगा, ताकि उसकी आवाज बाहर ना जाए.
मैंने नीचे से एक तेज झटका मारा और अपना पूरा लंड उतार दिया अपनी मौसेरी बहन की चूत में. उसकी आँखें बाहर की तरफ निकल आई, उसकी चूत में शायद इतनी अन्दर आज तक कोई लंड नहीं गया था.
मेरे मुंह में फंसकर भी उसकी आवाज काफी तेज निकल रही थी, पर पहले से थोडा कम थी.
वो मेरे मुंह को चूसते हुए चिल्ला रही थी.
अह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फो फ्फ्फोफ़ फ फ़ो फोफ फ ऑफ़ फ फफफफ फफफफ गग्ग ग गग्ग गम्मम्मम्म
मैंने एक हाथ पीछे करके उसकी गांड के छेद में अपनी ऊँगली दाल दी ..
मेरा इतना करते ही जैसे उसकी चूत में रखा गर्म पानी का गुब्बारा फट गया और वो जोर जोर से चिल्लाती हुई मेरे लंड पर झड़ने लगी..
मैंने अपने हाथ से उसका मुंह दबाया और उसकी चीख दबाई.
मेरे लंड पर जैसे किसी ने पानी का डब्बा खली कर दिया हो..इतना झड़ी थी सुरभि आज.
जैसे ही मैं झड़ने के करीब आया, वो चिल्लाई..नहीं मेरे अन्दर नहीं मैं समझ गया की वो प्रेग्नेंट होने के डर से ऐसा कह रही है , मैंने झट से उसे अपने लंड से उतारा और उसने मेरे लंड को अपने मुंह में भरकर चुसना शुरू कर दिया..जल्दी ही मैंने एक के बाद एक कई धारे उसके मुंह में छोडनी शुरू कर दी, वो मेरा सारा माल चाट कर गयी..
पीछे बैठी ऋतू ने ताड़ी मारकर उसकी चुदाई की प्रशंसा की.
उसके बाद सुबह 5 बजे तक मैंने दो बार और ऋतू और सुरभि की चूत मारी और अंत में थक हारकर मैं वापिस अपने कमरे में आकर सो गया.
अगली सुबह मैं जल्दी ही उठ गया, मैंने देखा की अयान अभी तक खर्राटे भर रहा है, मैंने टाइम देखा तो 8 बजने वाले थे, मैं उठा और छेद में से दुसरे कमरे का हाल देखा, मुझे विश्वास नहीं हुआ जो मैंने वहां देखा, ऋतू और सुरभि 69 के पोस में लेटी हुई एक दुसरे की चूत चाट रही थी..
एक ही रात में काफी खुल गयी थी सुरभि हमारे साथ..
मैं अचरज में पड़ गया, क्योंकि मैं वहां से सुबह 5 बजे के आस पास ही वापिस आया था और मुझे लगा की वो दोनों अब तक घोड़े बेच कर सो रही होंगी..
मैं झट से दरवाजा खोल कर उनके कमरे में गया.
वहां सेक्स का आखिरी दौर चल रहा था, मेरे पहुँचते ही ऋतू के साथ साथ सुरभि ने भी अपना रस छोड़ दिया..
और इस बार भी सुरभि अपने ओर्गास्म के होते ही बड़े जोर से चिल्लाई..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फो फूऊफ ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ्फ़ अह्ह्हह्ह्ह्ह यीईईइ
उसकी चीख बड़ी ही तेज थी..मैं घबरा गया..
मैं झट से उसके पास पहुंचा और उसका मुंह दबा कर उसे शांत किया..
पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी.
उसकी आवाज सुनकर मम्मी भागकर ऊपर आ गयी.
उन्हें लगा की किसी को करंट लगा है..
कमरे में पहुँचते ही उन्होंने देखा की ऋतू बेड पर लेती हुई है और सुरभि अपनी चूत उसके मुंह पर रखे उसकी चूत को चूस रही है, और मैंने सुरभि के मुंह को दबा रखा है.
मम्मी को देखते ही सुरभि की सिट्टी पिट्टी ग़ुम हो गयी..
मम्मी सारा माजरा समझ गयी.
शुक्र है और किसी ने सुरभि की आवाज नहीं सुनी.
मम्मी अन्दर आ गयी और उन्होंने दरवाजा बंद कर दिया.
सुरभि की हालत देखने वाली थी.
मम्मी ने मुस्कुराते हुए बेड के पास आकर मेरे सर पर हाथ फेरते हुए कहा तो ये सब चल रहा हैऔर तुमने इस बेचारी सुरभि को भी अपने खेल में शामिल कर लिया..
सुरभि अपनी मौसी के इस रवेय्ये को देखकर हैरान थी.
मैंने उसकी परेशानी दूर की..
मैंने कहा देखो सुरभि, तुम परेशान मत हो, मैंने तुमसे कहा था न की हमारे परिवार में किसी तरह की कोई रोक टोक नहीं है, इसलिए हम सभी एक दुसरे के साथ एन्जॉय करते हैं..और ये कहते हुए मैंने मम्मी को अपनी तरफ खींचा और उनके होंठों को चूसते हुए उनके दांये मुम्मे को सूट के ऊपर से ही दबाने लगा.
मम्मी ने मेरा पूरा साथ दिया और अपनी बहन की बेटी की परवाह न करते हुए मेरा लंड पकड़कर उसे दबाने लगी.
सुरभि सब समझ गयी की हमारे घर में क्या क्या चलता है.
मैंने मम्मी के होंठो को चूसते हुए उनके कुर्ते को नीचे से पकड़कर उतारने लगा तो उन्होंने रोक दिया अरे नहीं आशुअभी नहीं, नीचे सब उठने ही वाले हैं..बाद में करेंगे पर मैंने उनकी एक न सुनी और उनका कुरता उतार दिया.
ऋतू पीछे बैठकर और सुरभि ऑंखें फाड़कर हमारा खेल देख रही थी.
मैंने मम्मी की ब्रा के हुक खोल दिए और उनके लोटे लुडक कर बाहर आ गए, मैंने झट से उनके दानो पर कब्ज़ा कर लिया.
मैंने नोट किया था की मम्मी को सुबह -२ सेक्स करने में बड़ा मजा आता है, कल भी उन्होंने मेरे कमरे में जो सेक्स किया था, मुझे अभी तक याद था उनका उतावलापन.
इसलिए उन्होंने ज्यादा विरोध नहीं किया आज भी, जबकि उनकी भांजी उनके सामने बैठी थी, पर उन्हें तो सिर्फ अपनी चूत में हो रही खुजली की चिंता थी.
मम्मी के बड़े-२ चुचे देखकर सुरभि हैरान रह गयी, उसने इतने बड़े चुचे कभी नहीं देखे थे.
मैंने उन्हें दबाना, चुसना, काटना शुरू किया और मम्मी ने मचलना, तड़पना और सिसकना.
मैंने उन्हें बिस्तर पर गिरा दिया और उनकी लास्टिक वाली पायजामी उतार डाली, और उसके बाद उनकी काली पेंटी भी..
मम्मी की महकती हुई चूत मेरे सामने थी, मैंने झट से अपना मुंह उनकी चूत में डाल दिया और सुबह का नाश्ता करने लगा.
मम्मी की आँखें बंद थी और वो धीरे-२ सिस्कारियां लेती हुई मेरे सर के बालों में अपनी उँगलियाँ घुमा रही थी.
स्सस्सस्स म्मम्मम्मम अह्ह्ह्हह्ह ओयीईई .
ऐसे ही बेटा.अह्ह्ह्हह्ह और तेज चुसोहन्न्न्न वहीँ परशाबाश,.,अह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म
सुरभि बिलकुल मम्मी के सर के पास बैठी हुई थी, उसने इतना कामुक दृश्य नहीं देखा था और ना ही माँ बेटे का ऐसा प्यार.
मेरे चाटने से मम्मी के मोटे मुम्मे बुरी तरह से हिल रहे थे, मेरे मुंह के हर झटके से उनके मोटे गुब्बारे ऊपर होते और फिर नीचे..
उन्हें हिलता हुआ देखकर सुरभि के मुंह में पानी आ गया और वो सम्मोहित सी होकर उनपर झुक गयी और अपनी मौसी के दांये मुम्मे को मुंह में भरकर उसे चूसने लगी..
मम्मी ने जैसे ही सुरभि के होंठों को अपनी छाती पर महसूस किया तो उनके आनंद की सीमा न रही उन्होंने अपनी ऑंखें खोली और सुरभि को अपने सीने पर और तेजी से दबा कर उसे अपना दूध पिलाने लगी.
ऋतू भी उठ खड़ी हुई और दूसरी तरफ से आकर मम्मी के बाएं मुम्मे पर अपना मुंह लगा कर उसे चूसने लगी.
अब चीखने की बारी मम्मी की थी.
हय्य्यय्य्यय्य्य्य अह्ह्हह्ह्ह्हह्हssssssssssssssssssssss स्स्स्सस्स्स्सम्मम्मम्मम्म
उन्हें इतनी तेज चीखता पाकर मैं फिर से डर गया..पर मम्मी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने खुद पर काबू पाकर ऋतू और सुरभि के सर अपने मुम्मों पर और तेजी से दबा डाले.
मैं नीचे से उनकी चूत का रस पी रहा था और ऊपर से वो दोनों उनका दूध.
मम्मी के तो मजे हो गए सुबह-२.
मम्मी से और सब्र नहीं हुआ और वो उठी और घोड़ी बन कर अपनी गांड हवा में उठा दी और पीछे देखकर बोलीआ जा बेटाअब सहन नहीं होताडाल दे अपनी माँ की चूत में अपना लंडप्लीस..
वो तड़प सी रही थी..
मैंने उन्हें तडपना उचित नहीं समझा और अपना लंड उनकी चूत के पास लेजाकर रखा, बाकी काम मम्मी ने कर दिया, पीछे की तरफ धक्का लगाकर और निगल गयी एक ही बार में मेरे पुरे लंड को..
मम्मी के दोनों तरफ बैठी हुई ऋतू और सुरभि हमारी चुदाई को देख रही थी..
मेरे मन में अपनी एक और इच्छा पूरी करने की बात आई.
मैंने ऋतू और सुरभि को इशारे से मम्मी की ही तरह गांड उठा कर लेटने को कहा.
वो दोनों भी मम्मी के दोनों तरफ उनकी ही तरह घोड़ी बन कर लेट गयी.
मैंने उन दोनों की चूत के अन्दर अपनी उँगलियाँ डाल दी और तेजी से हिलाने लगा.
मेरी उँगलियाँ ऋतू और सुरभि को चोद रही थी और मेरा लंड मम्मी की चूत को.
अचानक मैंने अपना लंड मम्मी की चूत से बाहर निकाल लिया.
मम्मी ने हैरानी से पीछे मूढ़ कर देखा, मैंने उनकी चूत में अपनी उँगलियाँ डाल दी और अपना लंड सुरभि की चूत में सटाया और एक तेज झटका मारा.
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम्म और उसने भी मेरा लंड निगल लिया अपनी चूत में.
अब मैं सुरभि की चूत को पीछे से मार रहा था.
15 20 झटकों के बाद मैंने उसकी चूत से भी लंड बाहर निकला और ऋतू के पास जाकर उसकी अधीर सी चूत में पेल दिया..
मेरे सामने तीन चूतें थी जो हवा में अपनी मोटी गांड उठाये मेरे लंड का इन्तजार कर रही थी.
मैं बारी-२ से तीनो की चूत मार रहा था.
सच में इतना मजा तो आज तक नहीं आया था मुझे.
जल्दी ही मम्मी ने आवाजें निकालनी शुरू कर दी, मैं समझ गया की वो झड़ने वाली हैं.
अह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ ऑफ अह्ह्ह बेटा ऐसे ही औउ और तेज बेटामार अपनी माँ की चूत हान्न्न हन्न्न्नन्न अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म
और उन्होंने मेरे लंड पर अपना सफ़ेद लिसलिसा पानी छोड दिया
मैंने अपना लंड बाहर निकला और ऋतू की चूत में तब तक घिसा जब तक उसकी चूत का जिन्न पानी बनकर बाहर नहीं आ गया..
वो भी चिल्लाती हुई मेरे लंड को भिगोने लगी..
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह अह्ह्हह्ह हह्ह्ह्ह अह्ह्ह म्मम्मम्मम मजा आ गयाभाई .
मैंने पिछली रात 4 बार चोदा था इन दोनों को, इसलिए मेरा लंड जल्दी झड़ने का नाम नहीं ले रहा था.
मैंने अपना गीला लंड सुरभि की चूत में फंसाया और उसे भी उसके अंजाम तक पहुंचा दिया.
अपने ओर्गास्म के समय वो चिल्ला पड़ी, पर इस बार ऋतू तैयार थी उसके लिए, उसने सुरभि के मुंह पर अपना मुंह लगा दिया और उसकी चीख को वहीँ दबा दिया.
घ्न्नन्न्न्न नं,,,,,, म्मम्मम ग्न्न्नन्न्न्न म्मम्मम्म .घ्ह्ह्हह्ह्ह्ह .. उसकी गुर्राहट सुनाई दे रही थी ऋतू के मुंह से.
तीन चूतें एक साथ मारकर मैंने अपनी एक और फ़ंतासी पूरी कर ली थी आज.
अब मेरा लंड उन तीनो के रस में नहाया हुआ खड़ा था, वो तीनो मेरे सामने बैठ गयी और बारी-२ से मेरे लंड को अपने मुंह में लेकर चूसने लगी.
मम्मी बीच में बैठी थी और ऋतू और सुरभि उनके दांये बांये.
मैंने अपने लंड के डंडे से उनके होंठों को मारा और उनकी आँखों पर, गालों पर, नाक पर, माथे पर उसे घिस घिसकर मजे लेने लगा.
वो तीनो भी मेरे लंड को बारी-२ से चूस रही थी और एक दुसरे से छिनकर ज्यादा से ज्यादा देर तक अपने मुंह में रखकर मुझे स्वर्ग सा एहसास दे रही थी.
जल्दी ही उन तीनो की मेहनत रंग लायी और मैंने अपना रस निकालना शुरू कर दिया.
सबसे पहली धार मैंने मम्मी के मुंह पर मारी दूसरी सुरभि के और तीसरी ऋतू के..उन तीनो ने अपना मुंह खोल रखा था और मेरे लंड से निकलती बारिश की बूंदों को अपने मुंह में इकठ्ठा कर रही थीमैं आज तक इतना नहीं झड़ा था.
अपनी आखिरी बूँद मैंने सुरभि की थोड़ी पर निचोड़ दी.
उनके चेहरे देखने लायक थे. बर्फ की सफ़ेद चादर सी बिछ गयी थी तीनो के चेहरे पर.
ऋतू ने मम्मी के चेहरे को चाटना शुरू किया, सुरभि समझ गयी और उसने ऋतू के चेहरे को चाटकर चमका दिया, मम्मी ने भी बारी-२ से दोनों के चेहरे से अमृत इकठ्ठा किया और पी गयी और इस तरह से उन तीनो का पेट भर गया.
मम्मी ने अपने कपडे पहने और बोली चलो अब जल्दी से नहा धो लो और नीचे आ जाओ, हमें आज घुमने जाना है..
मैंने अपने कपडे पहने और अपने कमरे में आकर बाथरूम में चला गया और नहाकर बाहर आया.
मैंने अयान को उठाया और उसे नहाने भेज दिया.
नीचे आकर देखा तो हरीश अंकल मेरठ जाने के लिए निकल रहे थे, उनके जाने के बाद हम सभी ने इकठ्ठा नाश्ता किया और हम घुमने निकल गए.
पुरे रास्ते सुरभि मुझसे चिपकी रही , वो मेरे लंड की दीवानी हो चुकी थी..कल से आज तक वो करीब 5 बार मेरा लंड अपनी चूत में ले चुकी थी. और अभी भी उसकी चूत कुलबुला रही थी मेरे लंड की गर्मी पाने के लिए.
मैंने नोट किया की पापा का सारा ध्यान दीपा आंटी की तरफ था, दीपा आंटी भी पापा की नजरों को भांप चुकी थी, पर उन्हें मालुम था की उनका जीजा ऐसा ही है, उसपर हमेशा से गन्दी नजर रखता है, पर वो कर भी क्या सकती थी..
उस दिन हम लाल किला घुमे, क़ुतुब मीनार गए और कनाट प्लेस भी गए और वहां से पालिका बाजार, जहाँ से हमने काफी खरीदारी करी.
शाम को खाना खाकर हम सभी वापिस घर आ गए.
दीपा मौसी ने अपने पति को फ़ोन किया तो पता चला की हरीश अंकल रात को वहीँ रहेंगे..
थोड़ी देर बाद हम सभी सोने के लिए ऊपर की तरफ चल दिए..
मैंने किचन में खड़े पापा को मम्मी से कहते हुए सुना आज तो मैं किसी भी हालत में दीपा की चूत मारकर रहूँगाअगर मानेगी तो ठीक नहीं तो रेप कर दूंगा साली का मम्मी उन्हें समझा रही थी पर पापा कुछ समझने को तैयार नहीं थी.
मैं समझ गया की आज तो दीपा मौसी चुद कर ही रहेगी..
मैंने मम्मी पापा की बातें सुनी, सब कुछ सेट हो चूका थापापा ने मम्मी को पूरी तरह से बोतल में उतार लिया था..
मैंने भागकर ऋतू के पास गया और उसे सारी बात बताई, मैंने सोचा की ऋतू को गुस्सा आएगा पर वो तो ख़ुशी के मारे उछल ही पड़ी और बोली अरे वहदीपा आंटी की चुदाई और वो भी पापा सेमजा आयेगा
मैंने कहा पर दीपा आंटी पापा को घांस नहीं डालतीपापा उनके साथ जबरदस्ती करने की बात कर रहे थे..
यानी रेप..तब तो और भी मजा आएगामैं ये सब देखना चाहती हूँ उसने ख़ुशी से उछलते हुए कहा.
और सुरभि और अयान का क्या करेंगे. मैंने ऋतू से कहा.
तुम्हारे पास नींद की गोलियां है नआज उन्हें गोली दे देते हैं उसने कहा. उन्हें आज जल्दी सुला देते हैंतुम सुरभि के पास जाओ और मैं अयान के पास जा रही हूँ..
मैंने उसे नींद की गोली दी और वो कोल्ड ड्रिंक में मिला कर हम दोनों चल दिए
हम दोनों जल्दी से एक दुसरे के कमरे में चल दिए..
ऋतू के कमरे में पहुंचकर मैंने देखा की सुरभि अभी २ अपने कपडे चेंज करके बिस्तर पर बैठी थीमुझे देखते ही वो भागकर मेरे पास आई और मुझसे बेल की तरह लिपट गयी और मुझे चूमने लगीपुरे दिन से वो मेरे लंड को अपनी चूत में लेना चाहती थी..पर अभी मेरे पास समय नहीं था, मैंने उसे अपने से दूर किया और कहादेखो सुरभिमुझे अभी नीचे जाना है, स्टोर रूम से कुछ सामान निकलवाना है मुझे मम्मी के साथमैं तो बस तुम्हे ये कोल्ड ड्रिंक देने आया था, तुम मेरा इन्तजार करो मैं 1 घंटे में आ जाऊंगा.. और मैंने उसे कोल्ड ड्रिंक दे दी जिसमे मैंने नींद की गोलियां डाल रखी थी, उसने बिना कुछ कहे उसे पी लिया और बोली मैं काफी थक गयी हूँ, पर तुम्हारा लंड लिए बिना मैं सोने वाली नहीं हूँतुम जाओऔर जल्दी आनाये कहकर वो बेड पर लेट गयी, गोली ने अपना असर दिखाना शुरू किया और उसकी आँखें बंद होने लगी..जल्दी ही वो सो गयी..
मैंने सोचा, ना जाने ऋतू ने अयान को गोली दी होगी या नहीं..मैं छेद के पास पहुंचा और वहां से अपने कमरे में झांककर वहां का नजारा देखने लगा..
दुसरे कमरे में ऋतू जब कोल्ड ड्रिंक लेकर पहुंची तो अयान अपनी मौसेरी बहन को देखकर खुश हो गया, उसने ऋतू जैसी सेक्सी लड़की आज तक नहीं देखिथिऋतू ने टी शर्ट और स्कर्ट पहनी हुई थी..जिसमे से उसकी गोरी टाँगे बड़ी ही दिलकश लग रही थी..वो जब से यहाँ आया था ऋतू को ही घूरे जा रहा था, ऋतू भी ये सब जानती थी, उसने सोचा चलो आज अयान से थोडा पंगा लिया जाये..
उसने अयान से उसके कालेज के बारे में बाते करनी शुरू कर दी, और अंत में बात लड़की पर आकर रुकी, ऋतू ने उससे पूछा क्या तुम्हारी कोई गर्ल फ्रेंड है ?
वो घबरा गया और बोला नहीनहीं तो दीदी
ऋतू उसकी हालत देखकर मुस्कुरा उठी.
यानी तुमने आज तक किसी को किस्स भी नहीं किया है ऋतू ने हैरानी से पूछा
किस्सअम्म्म नहीं तो मैंने नहीं किया वो अब हकला रहा था..
करना चाहते हो.. उसने आगे होकर कहा और अपनी एक टांग उठा कर अपनी दूसरी टांग के नीचे दबा ली जिसकी वजह से उसकी मोटी जांघे उजागर हो गयी, उसकी मोटी टांग देखकर अयान की साँसे रुक सी गयी
वो बोला हान्न्न्न पर किसको करूँ. उसने ऋतू से पूछा.
मुझे.. ऋतू ने अपना चेहरा आगे किया और अपनी आँखें बंद कर ली..
अयान ओ विश्वास नहीं हुआ की ऋतू ने उसे चूमने की इजाजत दे दी है, वो कल से अपनी इस सेक्सी बहन को देखकर पागल हुए जा रहा था और अब ऋतू खुद ही उसे चूमने का निमंत्रण दे रही है उसने बिना किसी देरी के उसके चेहरे को पकड़ा और उसके नर्म मुलायम मलाई जैसे होंठों को चूसने लगा..वो बड़े ही मीठे थे.उसने आज तक किसी को चूमा नहीं था, उसे ऐसा लगा जैसे वो स्वर्ग में होवो बावला सा होकर ऋतू के होंठों पर टूट सा पड़ा और उन्हें चूसने और काटने लगा
ऋतू को भी बड़ा मजा आ रहा था अपने नौसिखिये भाई से किस्स करवाने मेंपर वो जानती थी की इसके आगे और किसी बात का समय नहीं है, नीचे वाली फिल्म भी तो देखनी थी उसकोउसने अयान को पीछे धकेला और बोलीवाह भाईतुम तो काफी अच्छी तरह से किस्स कर लेते हो
अयान ने आगे बढकर उसे अपनी बाँहों में भींच लिया और अपना मुंह नीचे करके उसके उरोजों को काटने लगा..ऋतू ने उसे हटाया और बोली अरेरुकोअभी नहीं.मैं जरा देख कर आती हूँ की सब सो गए हैं या नहींतब तक तुम ये कोल्ड ड्रिंक पियो.. और अयान ने उसके हाथों से कोल्ड ड्रिंक ले कर एक घूंट में पी ली और बोलाठीक हैतुम जल्दी जाओ और जल्दी आओमैं तुम्हारा इन्तजार करूँगा. और ये कहकर वो बेड में घुस गया , ऋतू बाहर निकल कर अपने कमरे में आई और सुरभि को सोता पाकर मेरे पास आई और मेरे कमरे में झांककर देखा, वहां अयान भी नींद के आगोश में पहुँच चूका था.
बड़े मजे कर रही थी अयान के साथ. मैंने उसे छेड़ते हुए कहा..
तुम क्यों जल रहे हो.आज अगर दीपा आंटी को चुदते हुए नहीं देखना होता न तो मैं रेहान का कुंवारापन अपनी चूत में घोल कर पी जाती उसने मुस्कुराते हुए कहा..पर वो फिर कभीअभी तो जल्दी से नीचे चलो.. और हम दोनों नीचे चल दिए.
वहां गए तो पाया, मम्मी पापा , दीपा आंटी के साथ बैठे उनके कमरे में गप्पे मार रहे हैं..
मैं ऋतू के साथ कूलर के पीछे छिप गया और खिड़की से अन्दर झाँकने लगा.
दीपा : इनको भी मेरठ जाना जरुरी था क्याऔर वहां रहने की ना जाने इनको क्या सूझी.
पापा : अरे साली साहिबाआप क्यों घबरा रही हैंमैं हूँ नआप घबराइए नहीं..
दीपा : आप हैं तभी तो घबराहट हो रही है और वो हंसने लगी..
मम्मी : भाई आप दोनों जीजा साली बाते करोमैं तो चली, मुझे तो बड़ी नींद आ रही है
और वो उठ कर अपने कमरे में चली गयी और दरवाजा बंद कर लिया.
दीपा आंटी को थोडा अजीब सा लगा अपनी बहन का बर्ताव की वो अपने पति को रात के समय अपनी बहन के कमरे में क्यों छोड़ गयीपर वो कर भी क्या सकती थी, वो मेहमान जो थी..
वो दोनों फिर से एक दुसरे से बाते करने लगे..
दीपा : मैं तो आज बहुत थक गयी हूँ जीजूमेरा पूरा बदन दुःख रहा है
पापा : कहो तो दबा दूं. और उन्होंने दीपा आंटी की जांघ पर अपना हाथ रख दिया और उसे दबाने लगे..
दीपा : ये क्या कर रहे हैं आप वो गुस्से से चिल्लायी.आपकी इन्ही हरकतों की वजह से मैं आपके घर आने से कतराती हूँअब रात काफी हो चुकी है..मुझे सोना है..आप प्लीस अपने कमरे में जाओ
पापा :जानेमनक्यों नाराज होती होमैं तो सिर्फ तुम्हारा बदन दबा कर तुम्हारा दर्द दूर कर रहा हूँ. और ये कहते हुए पापा ने उन्हें अपने सीने से लगाया और उनकी कमर पर हाथ फेरते हुए उनकी गर्दन को चूमने लगे..
दीपा आंटी के गुस्से की सीमा न रहीवो चिल्ला पड़ी.दिदीई दीदी .कहाँ हो आपदीदी..
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मैं और ऋतू मम्मी के कमरे से बाहर आने का इन्तजार करने लगे…पर वो बाहर ना आई..मैं समझ गया की पापा ने उन्हें सब कुछ पहले से समझा दिया है…
पापा ने गहरी हंसी हँसते हुए कहा “तुम्हारी दीदी तो सो गयी…मान जाओ दीपा…आराम से मेरे साथ मजे लो…नहीं तो मुझे तुम्हारे साथ जबरदस्ती करनी पड़ेगी…” और उन्होंने दीपा आंटी के कंधे से उनका गाउन पकड़कर फाड़ दिया जिसकी वजह से उनकी काली ब्रा के स्ट्रेप दिखने लगे..
दीपा आंटी को विश्वास नहीं हुआ की पापा उनके साथ ऐसा भी कर सकते हैं…वो सकते में आ गयी..तब तक पापा ने उनके गले से लटकता हुआ कपडा खींचा और उसे भी फाड़ दिया..दीपा आंटी के गोरे चुचे काली ब्रा में कैद हुए उजागर हो गए, इतने कसे हुए और मोटे, गोरे चुचे मैंने आज तक नहीं देखेते…तभी तो पापा दीवाने थे अपनी इस साली के..
मैंने ऋतू की तरफ देखा , वो बड़े ही मजे से पापा के इस रूप को एन्जॉय कर रही थी.
दीपा आंटी के आंसू निकल आये , उन्होंने अपने हाथ जोड़कर पापा से कहा “प्लीस…जीजू…मुझे छोड़ दो…मैं आपसे अपनी इज्जत की भीख मांगती हूँ….प्लीस मुझे छोड़ दो…” पर पापा ने एक न सुनी और दीपा आंटी को बेड पर गिरा कर उनके ऊपर सवार हो गए और उनके दोनों हाथ दबाकर उन्हें जकड़ लिया.
दीपा आंटी बेबस सी होकर उनके नीचे मचलने लगी..
पापा ने नीचे होकर उन्हें चूमना चाह तो दीपा आंटी ने अपना मुंह दूसरी तरफ कर लिया…पापा ने जबरदस्ती उनका चेहरा अपनी तरफ घुमाया और उनके होंठों को अपने मुंह में ले जाकर चूसने लगे..
दीपा आंटी के मुंह से गूऊन्न गोऊँ की आवाजें निकल रही थी…
पापा ने अपने दुसरे हाथ से उनकी ब्रा के स्ट्रेप को खींचा और उसे भी तोड़ डाला…और अपना एक हाथ अन्दर डालकर उनके फुले हुए गुब्बारे जैसे मुम्मे को बाहर निकाल लिया…
मैं तो अपनी मौसी के उस गुब्बारे को देखकर दंग रह गया…बड़ा ही दिलकश था उनका मुम्मा..पापा ने अपना मुंह नीचे किया और उनके निप्पल को अपने मुंह में डालकर चूसने लगे..और जोर से काट लिया उनके निप्पल पर…दीपा आंटी तड़प उठी…मेरे मुंह में भी पानी आ गया , मेरा भी मन कर रहा था की भाग कर जाऊं और शामिल हो जाऊं पापा के साथ, और जम कर चुदाई करूँ दीपा आंटी की…
दीपा आंटी जोर-२ से चिल्लाने लगी…मुझे लगा की हमारे पडोसी न सुन ले उनकी आवाजें,…..
आंटी का एक हाथ पापा की गिरफ्त से छुटा तो उन्होंने एक झन्नाटेदार थप्पड़ मार दिया पापा के मुंह पर…पापा बिलबिला उठे…वो बोले…”साली…कुतिया…मैं तुझे प्यार से समझा रहा था…पर लगता है तेरे साथ जबरदस्ती करनी ही पड़ेगी…”
और फिर पापा ने दीपा आंटी की ब्रा पूरी तरह से खींच ली और उसे निकाल कर उनके मुंह में ठूस दिया…ताकि वो ज्यादा न चिल्ला सके…दीपा आंटी छटपटा रही थी….पापा ने उन्हें उल्टा किया और उनके हाथ पीछे करके बाँध दिए…
उन्हें सीधा किया और उनका गाउन एक ही झटके में फाड़कर उतार दिया…
नीचे उन्होंने चड्डी नहीं पहनी हुई थी…लम्बे-२ बाल थे उनकी चूत पर…मैंने इतना घना जंगल आज तक नहीं देखा था चूत का…आज तक सभी को बिना बालों के या थोड़े बहुत बालों के ही देखा था…
पापा ने उन्हें पीठ के बल लिटाया और खड़े होकर अपने कपडे उतारने लगे….और जल्दी ही वो नंगे खड़े थे अपनी साली के सामने..
उनका काला नाग अपने पुरे शबाब पर था…जिसे देखकर दीपा आंटी की आँखें चोडी हो गयी और उनके चेहरे पर भय साफ़ दिखाई देने लगा… लगता था उन्होंने इतना लम्बा लंड आज तक नहीं देखा था.
पापा ने फिर से नीचे झुककर दीपा आंटी के मुम्मो को चूसा और धीरे-२ नीचे आकर उनकी चूत के सामने अपना मुंह लेजाकर उसे बड़े प्यार से देखा और अपने हाथो से उनकी चूत के कपाट खोले और अपनी जीभ दाल दी उनकी चूत में…
बड़ा ही घना जंगल था वहां….पर दीपा आंटी की चूत से निकलता पानी मुझे साफ़ दिखाई दे रहा था…यानी उनकी चूत पानी छोड़ रही थी….कभी-२ शरीर अपने दिमाग की बात नहीं मानता..उनके साथ जबरदस्ती हो रही थी, पर ये बात उनकी चूत को कौन समझाए..
पापा बड़ी देर तक उनकी चूत को चूसते रहे…
आंटी के मुंह से चीखना चिल्लाना बंद हो गया था…पर वो अभी भी बीच-२ में अपना विरोध जताने के लिए उन्हें धकेल रही थी..
अंत में पापा से रहा नहीं गया और उन्होंने खड़े होकर अपने लंड को दीपा आंटी की चूत से सटा दिया…
आंटी सर हिला -२ कर उन्हें ऐसा करने से मना कर रही थी…पर पापा ने एक ना मानी और रोती हुई दीपा आंटी की चूत में अपने लंड का एक तेज झटका मारा….
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह …आंटी चिल्लाई और उनके मुंह से उनकी काली ब्रा निकल कर बाहर आ गयी…
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह छोड़ दो मुझे प्लीस…….बड़ा दर्द हो रहा है….जीजू……अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह …….
उनका चेहरा पूरा लाल हो चूका था…सच में उन्हें काफी दर्द हो रहा था….
पर पापा नहीं रुके और उन्होंने एक और झटका मारा और अपना पूरा लंड उतार दिया दीपा की चूत में…..
आंटी की आँखें बाहर की तरफ निकल आई….उनका मुंह खुला का खुला रह गया…
हाआआआआआआ………..अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओफ्फफ्फ्फ़ …..मर्र्र गयीईईइ …….अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह
उन्हें बड़ी तकलीफ हो रही थी, एक तो पापा ने उनके हाथ पीछे बाँध रखे थे और ऊपर से उनके लंड का साइज़ भी काफी बड़ा था उनकी चूत के लिए..इसलिए उन्हें काफी तकलीफ हो रही थी…
वो तड़प रही थी…..नीचे पड़ी हुई…पर वो कुछ ना कर पा रही थी…
पापा ने होंठों को अपने मुंह में रखा और चूसने लगे….और साथ ही साथ नीचे से अपने धक्को की स्पीड भी बड़ा दी….
बड़ा ही कामुक दृश्य था….पापा बड़ी ही तेजी से उनकी चूत में अपना लंड पेल रहे थे….और उनके होंठों को चूम भी रहे थे….
अह्ह्हह्ह अह्ह्हह्ह म्मम्मम्मम अह्ह्ह अह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फो फफो ओफ्फ्फ्फ़ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ म्मम्म …….
मैंने नोट किया की दीपा आंटी की सिस्कारियां निकल रही है….
मैं समझ गया की पापा के लंड के आगे उनका स्वाभिमान हार गया….
पापा ने भी जब उनकी सिस्कारियां सुनी तो अपना मुंह हटा लिया उनके मुंह से…
अब सिस्कारियां और तेज आने लगी…
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह म्म्मम्म्म्मम्म ओग्ग्ग्ग…..ओह्ह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्ह्ह ओह्हो ह ओह ओह ह हो ….. अह्ह्ह म्मम्म
दीपा आंटी अपनी नजरें नहीं मिला पा रही थी पापा से…पर अपने अन्दर से आती उत्तेजना की तरंगों पर उनका काबू नहीं था…
पापा ने मुस्कुराते हुए उनकी तरफ देखा और अपना लंड निकाल लिया उनकी चूत से..
मेरे साथ-२ दीपा आंटी भी चोंक गयी…पर कुछ ना बोली….
पापा ने अब उनके हाथ भी खोल दिए थे. ..
पापा ने झुक कर उनके दाए चुचे को अपने मुंह में भरा और चूसने लगे….
अह्ह्ह्हह्ह अह्ह्हह्ह …..हंन्न्न्न …… म्मम्म उन्होंने पापा के सर को पकड़ा और उनके बालों में उँगलियाँ फेरने लगी…
दीपा आंटी पूरी तरह से उत्तेजित हो चुकी थी..पर शर्म के मारे कुछ बोल नहीं रही थी…
वो अपनी चूत वाले हिस्से को उठा उठा कर पापा के लंड से घिस रही थी…..पर पापा उसे अनदेखा करते हुए उनका दूध पीने में बीसी थे….
अंत में दीपा आंटी से रहा नहीं गया और वो लगभग चिल्ला पड़ी…
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह जीजू…….क्या कर रहे हो…..डालो न उसे अन्दर……म्मम्मम्मम ” उसने मचलते हुए कहा..
“क्यों अब क्या हुआ….पहले तो बड़े नखरे दिखा रही थी…अब क्या चाहिए तुझे…बोल……” पापा ने भी मजे लेते हुए कहा..
“जीजू प्लीस….सताओ मत…मैं माफ़ी मांगती हूँ….प्लेअसे डालो न अपना लंड….मेरी चूत में….अह्ह्हह्ह ” दीपा आंटी ने आखिर बोल ही दिया जो पापा सुनना चाहते थे…
आंटी के मुंह से लंड निकलने की देर थी, पापा ने ठोंक दिया अपना मुसल फिर से उनकी चूत में…
आंटी चिल्ला पड़ी ,
पर इस बार आनंद के मारे
“अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म वह्ह्ह…..क्या लंड है आपका…..दीदी हमेशा आपके लम्बे लंड की तारीफ़ करती थी…इसलिए मुझे डर लगता था….अह्ह्ह्हह्ह ….मैंने सिर्फ अपने पति का लंड लिया है….जो पांच इंच का है…अह्ह्ह्ह …इसलिए डरती थी….आपसे….हमेशा से….हाआअ……….पर सही में…आज जितना मजा मुझे आज तक नहीं आया….अह्ह्हह्ह…..चोदो मुझे जीजू….चोदो अपनी साली….को…अह्ह्ह्ह और सजा दो मुझे इतने सालो से जो सलूक मैंने आपके साथ किया है…..उसके लिए सजा दो मुझे…..मेरी चूत…को…अह्ह्ह्ह…..फाड़ डालो आज मेरी चूत…ये तुम्हारी है……डाल…और तेज….और अन्दर तक….अह्ह्ह्ह…ऐईइफ़..फ फ फुक फुक फुक फु …….उनके मुंह से थूकें निकल कर उछल रही थी उत्तेजना के मारे…
मेरा लंड स्टील जैसा हो चूका था…
मैंने ऋतू के पायजामे को नीचे सरकाया और डाल दिया उसकी बहती हुई चूत में अपना लंड पीछे से…
अब दीपा आंटी पुरे मजे लेकर चुद रही थी…अह्ह्ह अह्ह्ह…..और तेज्ज……अह्ह्ह्ह जीजू….मारो अपनी दीपा की चूत आज….अह्ह्ह….चोद दो मुझे…..मैं तुम्हारी हूँ……हांन्न …….और तेज….और तेज….ओग ओग ओग ओह ….”
और अपनी प्यारी और सेक्सी साली की चुदाई देखकर पापा के लंड ने जल्दी ही जवाब दे दिया और वो झड़ने लगे अपनी साली की चूत के अन्दर ही….अपने अन्दर लावा महसूस करते ही दीपा आंटी ने अपनी टाँगे पापा की कमर में लपेट ली और अपना भी रस छोड़ दिया पापा के लंड के ऊपर….
अह्ह्हह्ह्ह्ह ओफ्फ्फ्फ़…मर्र्र गयी रे….अह्ह्ह्ह मजा आ गया………
और दोनों एक दुसरे को चूमने लगे..
मैंने भी इतना उत्तेजक नजारा देखकर अपना वीर्य अपनी बहन की चूत के अन्दर छोड़ दिया….बड़ी मुश्किल से ऋतू ने भी झड़ते हुए अपनी चीख दबाई…
तभा मम्मी के कमरे का दरवाजा खुला और वो वापिस उनके कमरे में आ गयी..
मैं चोंक गया मम्मी को वापिस पापा और मौसी के पास जाता देखकर..
कमरे का दरवाजा खुलता देखकर जैसे ही दीपा मौसी ने मम्मी को देखा वो सकपका गयी…उन्हें उम्मीद नहीं थी की मम्मी वापिस आएगी..
दीपा मन ही मन सोचने लगी, जब बुलाया था तब तो आई नहीं अब क्या करने आई है..
मम्मी ने पेटीकोट और ब्लाउस पहना हुआ था, वो शायद अपने कमरे में गयी थी और साडी उतारने के बाद दुसरे कमरे में चल रही अपनी बहन की चुदाई को कान लगा कर सुन रही थी..और उसके ख़त्म होते ही वो वापिस आ गयी.
मम्मी ने उससे पूछा : “क्यों दीपा…कैसी रही…मैं कहती थी न की इनका लंड बहुत ही लम्बा है…तेरी चूत के परखच्चे उढ़ा देगा..मजा आया के नहीं” और ये कहते हुए वो पापा की तरफ देखते हुए हंसने लगी.
दीपा मौसी समझ गयी की उनके रेप में मम्मी की रजामंदी भी शामिल है…
पर अब इस जबरदस्ती की वजह से ही दीपा जान पायी थी की पापा का लंड सही में कितना मजा देता है..जिससे वो कितने समय से वंचित थी..
दीपा : “अच्छा दीदी…तो आप भी इस साजिश में शामिल थी…पर कुछ भी हो, जीजू की जबरदस्ती की वजह से मैं आज जान पायी की आप इतने सालों से कितना मजा लेती आ रही हैं…और आज ये मजा जब मुझे मिला तब मैंने जाना की लम्बे लंड की क्या वेल्यु होती है, मैंने आज तक सिर्फ अपने पति हरीश के लंड से चुदाई करवाई है जो लगभग पांच इंच का है, मैंने पहली बार इतना बड़ा लंड देखा और चुदी भी…..”
मम्मी : “अभी तुने देखा ही क्या है…अगर तुने आशु का लंड देख लिया तो पागल ही हो जायेगी…”
ये मम्मी ने क्या बोल दिया…मैं सोचने लगा.
दीपा : “आशु का….इसका मतलब तुम आशु का लंड देख चुकी हो…”
मम्मी : (हँसते हुए) “देख ही नहीं चुकी…ले भी चुकी हूँ अपनी इस चूत में” उन्होंने अपनी चूत की तरफ इशारा करते हुए कहा.
दीपा आंटी की हैरानी की सीमा न रही…
मम्मी ने आगे कहा :”तुम इतना हैरान मत हो…तुम तो जानती हो की सेक्स के बारे में मैं हमेशा से कितनी अडवांस रही हूँ…तुम्हे जानकार ताज्जुब होगा की मैं और तेरे जीजू कई सालों से दुसरे विवाहित जोड़ो के साथ अदला बदली का खेल खेलते हैं…जिसमे हम दोनों को बहुत मजा आता है..और अब हमने अपने बच्चो को भी इसमें शामिल कर लिया है…जिसकी वजह से हमें और भी मजा आने लगा है ..”
दीपा आंटी हैरानी से खड़ी हुई मम्मी की बाते सुन रही थी, उन्हें विशवास ही नहीं हो रहा था जो मम्मी उनसे कह रही थी.
दीपा : “तुम्हारे बच्चे….यानी आशु के साथ साथ तुम लोगो ने ऋतू को भी….” और उन्होंने हैरानी से पापा की तरफ देखा..
पापा : “हाँ साली साहिबा…ऋतू को भी चोद चूका हूँ मैं…और तुम्हारी दीदी आशु का लंड ले चुकी है अपनी चूत में कई बार…”
दीपा : “मुझे तो विशवास ही नहीं हो रहा है जो तुम कह रहे हो…” उन्होंने अपना सर हिलाते हुए कहा..
मम्मी :”अगर विशवास नहीं हो रहा है तो रुको मैं अभी बताती हूँ …” और उन्होंने खिड़की की तरफ देखकर आवाज लगायी “आशु…ऋतू…अन्दर आ जाओ…मैं जानती हूँ तुम वहां खड़े हो…”
मैं और ऋतू ये सुनकर चोंक गए, मम्मी को कैसे पता चला की हम दोनों वहां खड़े है…ये सोचते हुए हम दोनों बाहर निकले और अन्दर आ गए..
दीपा आंटी हमें इतनी रात को इस हालत में देखकर चोंक गयी…वो और पापा बिलकुल नंगे थे, दीपा आंटी ने जैसे ही मुझे देखा उन्होंने चादर उठा कर अपने सीने के आगे लगा ली और अपना नंगापण छुपाने की असफल कोशिश करने लगी..
मम्मी ने उन्हें ऐसा करते देखकर कहा :”छुपाने की कोई जरुरत नहीं है दीपा…ये दोनों पिछले आधे घंटे से तुम्हारी चुदाई देख रहे हैं और इन दोनों ने तुम्हे नंगा देख ही लिया है तो अब इस चादर से अपने शरीर को ढकने का कोई फायदा नहीं है…” मम्मी ने दीपा से कहा.
पर दीपा आंटी ने चादर नहीं छोड़ी..
मैंने और ऋतू ने दीपा आंटी को देखा और धीरे से कहा “हाय…आंटी…” और नीचे की तरफ देखने लगे..
मम्मी :”तुम्हे क्या लगा….तुम दोनों छुपे हुए हो…खिड़की से बाहर निकलती रौशनी की वजह से तुम्हारी परछाई पीछे की तरफ काफी दूर तक जा रही थी, और बाहर निकलते हुए मैंने उसे देख लिया था…पर तुम दोनों भी अपनी मौसी की चुदाई देख लो…इसलिए मैंने तुम्हे परेशान नहीं किया…”
ऋतू : “ओह्ह..मम्मी….आप कितनी अच्छी हैं….” और वो जाकर अपनी मम्मी से लिपट गयी और मम्मी के होंठो को चूम लिया.
मम्मी काफी देर से दीपा और अपने पति की चुदाई को दुसरे कमरे से कान लगा कर सुन रही थी, जिसकी वजह से वो काफी गर्म हो चुकी थी…ऋतू ने जैसे ही उनके नर्म और मुलायम होंठों को चूमा, मम्मी ने उसको कस कर अपनी बाँहों में लपेटा और उसके होंठों को बुरी तरह से चूसने लगी..
साथ ही साथ उन्होंने ऋतू के चुचे भी उसकी टी शर्ट के ऊपर से ही दबाने शुरू कर दिए…
ऋतू ने भी नीचे झुककर मम्मी के ब्लाउस को खोला और उनका दांया लोटा पकड़कर बहार निकला और उसमे से जलपान करने लगी..
पापा बड़े मजे से अपनी गुंडी बेटी की हरकतें देख रहे थे और खुश हो रहे थे..
दीपा आंटी तो हैरानी से अपना मुंह फाड़े ऋतू और अपनी बहन की कामुक हरकत देख रही थी…
पापा ने उनको कहा :”देखा दीपा…हमारे परिवार में हम सभी एक दुसरे से कितने खुले हुए हैं…सेक्स के मामले में…”
मम्मी ने दीपा की तरफ देखा और हाँफते हुए बोली…” अहह मम्म …. और मैं तुम्हे कह रही थी ना आशु के लंड के बारे में..ओफ्फ्फ .देख लो तुम भी अह्ह्ह्ह उसके लंड को….अह्ह्ह और अपनी आँखों से यकीं कर लो…म्मम्मम्म ” ऋतू उनके तरबूजों का रस पी रही थी और उन्हें बड़ा ही मजा आ रहा था…
मम्मी के लटकते हुए रसीले फल देखकर और उनकी बातें सुनकर मेरा लंड मेरे पायजामे में तम्बू बना कर खड़ा हुआ था…दीपा आंटी की नजर मेरी ही तरफ थी…बल्कि मेरे लंड पर थी..टेंट को देखकर ही वो समझ गयी थी की अन्दर क्या माल भरा हुआ है…
वो किसी रोबोट की तरह चलती हुई मेरे पास आई और मेरी आँखों में देखने लगी…मैंने उनकी आँखों में वासना के बादल उमड़ते हुए देखे…बड़ी ही सुन्दर आँखें थी उनकी…बिल्ली जैसी…हरे रंग की…उनके होंठ लरज रहे थे, कुछ कहने के लिए…उनका एक हाथ चादर को थामे उनकी छाती के सामने था…दुसरे हाथ को उन्होंने अचानक मेरे लंड पर रख दिया…और उसे खींचने लगी अपनी तरफ…
स्स्स्सस्स्स्स….अह्ह्ह्हह्ह मेरे मुंह से सिसकारी सी निकल गयी…
बड़ी ही तेज पकड़ थी उनकी…जैसे ट्रेन रोकने के लिए जंजीर खींच रही हो…
मम्मी ने ऋतू के मुंह को अपने दुसरे चुचे पर रखते हुए कहा :”दीपा…ऐसे तुम्हे क्या मालुम चलेगा…बाहर तो निकालो इसके नाग को….म्मम्मम हाँ ऋतू ऐसे ही….” और फिर से ऋतू की तरफ ध्यान लगाकर उससे अपने मुम्मे चुस्वाने लगी…
दीपा आंटी ने मम्मी की बात सुनी और उन्होंने अपने दुसरे हाथ से मेरे पायजामे को पकड़ा और उसे नीचे कर दिया…
उनके ऐसा करते ही मेरा लंड उछल कर बाहर आ गया…पर इसके साथ ही उनके उस हाथ से वो चादर भी नीचे हो गयी और जमीं पर गिर गयी….जिसका शायद उनको कोई एहसास ही नहीं हुआ..वो अपनी फटी आँखों से मेरे लम्बे और मोटे लंड को घूर रही थी और मैं अपनी फैली हुई आँखों से उनके नर्म मुलायम मांस से भरे हुए मुम्मे देख रहा था…ये वोही मुम्मे थे जिनको देखकर मेरे मुंह में अक्सर पानी आ जाया करता था…आज वो मेरे सामने झूल रहे थे…
दीपा आंटी ने अपना दूसरा हाथ भी मेरे लंड पर रखा और उसे बड़े ही गौर से देखने लगी…
उन्होंने मम्मी की तरफ देखा और बोली. : “तुम सही कह रही थी दीदी…इसका लंड तो अपने पापा से भी थोडा बड़ा और मोटा है…और साथ ही साथ ये कितना गोरा भी है…” और ये कहते हुए वो मेरे सामने नीचे बैठ गयी और उसको अपने हाथो से दबा कर, मसल कर…घुमा कर अच्छी तरह से देखने लगी…
उनका मुंह सूखने सा लगा था मेरे लंड को देखकर…उनकी व्याकुलता बता रही थी की वो मेरे लंड को चुसना चाहती हैं…वो बार बार अपनी नजरें ऊपर करके मेरी तरफ देख रही थी…और फिर मम्मी की तरफ…और पलंग पर लेते हुए पापा की तरफ …वो कुछ डीसाइड करने की कोशिश कर रही थी…उनके हाथ कांप रहे थे मेरे लंड को पकडे हुए…
मैंने उनकी व्याकुलता को शांत करने के लिए खुद ही पहल करी और थोडा आगे आकर अपना लंड उनके लाल होंठों के पास ले गया…वो किसी भूखी शेरनी की तरह से झपटी मेरे लंड पर और उसे पूरा निगल गयी अपने मुंह में….
अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह ओग्ग्फफ्फ़.. धीरे आंटी…. मुझे उनके दांत चुभ रहे थे…
पर उन्होंने एक न सुनी और अपनी स्पीड को और तेज करते हुए मेरे मुसल से तेल निकालने की तेयारी करने लगी…
मैंने पीछे हुआ और सोफे पर बैठ गया…दीपा आंटी ने मेरा लंड नहीं छोड़ा…और पीछे होते हुए सोफे के सामने घुटनों के बल बैठकर मेरे लंड को चूसने लगी…
मैंने अपनी टाँगे चोडी कर ली थी…जिसकी वजह से उनके दोनों मुम्मे मेरी अंदरूनी जाँघों से टकरा रहे थे और मुझे बड़ी ही गुदगुदी का एहसास करा रहे थे…
उन्होंने मेरा लंड चूसते हुए मेरी आँखों में देखा …बड़ी ही कामुक लग रही थी वो उस समय…
तभी मैंने मम्मी की चीख सुनी…अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह म्मम्मम्म हां……ऐसी ही ……म्मम्मम…….
मैंने देखा की ऋतू ने अपने और मम्मी के सारे कपडे उतार दिए हैं और उन्हें बेड पर लिटा कर उनकी चूत को चूस रही है…पापा ये सब बड़े गोर से देख रहे थे और अपना लंड मसल कर उसे फिर से खड़ा करने की कोशिश कर रहे थे..
अचानक दीपा आंटी उठी और मेरी गोद में चढ़ गयी…उन्होंने अपनी दोनों टाँगे मोड़ कर मेरी जाँघों पर चड़ा दी और मेरे मुंह को चूसने लगी…मैंने उनके लाल होंठों को अपने दांतों से काटा, चूसा, और साथ ही साथ उनके दोनों जग्स को भी अपने दोनों हाथों से खूब रोंदा…
बड़ा मजा आ रहा था…मेरे मुंह में अपने होंठ डाले हुए ही उन्होंने अपना एक हाथ पीछे किया और मेरे लंड को अपनी चूत के मुहाने पर टिकाया …उनकी चूत से रस की नदी बह रही थी…पापा का वीर्य भी निकल रहा था अभी तक…इसलिए काफी गीली चूत थी…मेरे लंड को जैसे ही उन्होंने अपनी चूत से सटाया…मैंने नीचे से एक झटका ऊपर की तरफ दिया और उनके कंधे पकड़कर उन्हें नीचे की तरफ धकेला…
अह्ह्हह्ह्ह्हह्ह ग्न्नन्न्न्नन्न म्मम्मम्मम ओह्ह्हह्ह्ह्ह गोड…… म्मम्मम ….
घप्प की आवाज के साथ मेरा पूरा लंड उनकी कसी हुई चूत के अन्दर तक चला गया…उन्होंने अपने बाहें मेरी गर्दन में लपेटी, मैंने नीचे से धक्के मारने शुरू कर दिए..
अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अहह अह्ह्ह ऑफ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ्फो फुक्क मी फुक्क फु….अह्ह्हह्ह वो मेरे कान में सिस्कारियां लेकर बोल रही थी..
फिर उन्होंने अपना सर पीछे की तरफ कर दिया, मैंने उनकी कमर पर अपनी बाहें लपेटी हुई थी, वो हवा में झूल सी गयी और उनके लम्बे बाल नीचे मेरे पैरों को छूने लगे…पीछे झुकने की वजह से उनकी छाती उभर कर मेरे मुंह के सामने पूरी तरह से उजागर हो गयी…मैंने अपना मुंह लगा दिया उनके चुचे पर और पीने लगा सोमरस वहां से…
मैंने देखा की पापा भी अब उठ खड़े हुए हैं और बेड के किनारे पर खड़े होकर उन्होंने ऋतू की गांड को हवा में उठाया और पीछे से ही उसकी रस टपकाती हुई चूत में अपना लंड पेल दिया…
कितना अजीब इत्तेफाक था…मेरा लंड दीपा मौसी की चूत में था जिसमे से अभी तक पापा का रस निकल रहा था…और पापा का लंड ऋतू की चूत में जहाँ से भी अब तक मेरा रस निकल रहा था..
ऋतू अपनी गांड हवा में उठाये पापा से चुद रही थी और पलंग पर लेटी हुई मम्मी की चूत को चाटकर उनका रस भी पी रही थी…
दीपा आंटी मेरे लंड पर बैठे हुए उछलने लगी…जिसकी वजह से उनके दोनों बुब्बे मेरी आँखों के सामने ऊपर नीचे होने लगे…मैं आराम से अपने हाथ अपने सर के ऊपर रखकर बैठ गया और दीपा आंटी को बिना हिले चोदने का आनंद लेने लगा…
जल्दी ही दीपा आंटी की चीखे पुरे कमरे में गूंजने लगी…
“अह्ह्हह्ह्ह्ह हाण….ओफ्फफ्फ्फ़ ……आशु…..बड़ा मोटा लंड है तेरा….अह्ह्हह्ह ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ…..मार ले अपनी मासी की चूत….तेरे बाप ने भी मारी है…तू भी मार ले….अह्ह्ह्हह्ह ….तेरी माँ सही कह रही थी….बड़ा लम्बा लंड है तेरा……अह्ह्ह्हह्ह…..म्मम्मम्मम्म ….म्म्मम्म्म्मम्म अह्ह्ह्ह इ आई एम् कमिंग ….. अह्ह्हह्ह्ह्ह “
और इतना कहकर उन्होंने मेरे सर को पकड़ा और अपनी छाती में छुपा लिया मुझे किसी छोटे बच्चे की तरह और मैंने महसूस किया की मेरे लंड पर जैसे उनकी चूत ने अन्दर से गर्म पानी फैंका हो…..उनका गरमा गर्म रस मेरे लंड से होता हुआ नीचे सोफे पर गिरने लगा…..
उनका ओर्गास्म ख़त्म होने के बाद उन्होंने बड़े प्यार से मुझे देखा और मेरे माथे को चूम लिया…मैं अभी तक झडा नहीं था…
मैंने उनकी गांड पर हाथ रखा और उन्हें उठा लिया…मेरा लंड अभी तक उनकी चूत में धंसा हुआ था…वो भी मेरी ताकत देखकर हैरान रह गयी की कैसे मैंने उन्हें किसी कागज़ की तरह अपनी गोद में उठा लिया..मैं उनको लेकर बेड तक गया और उन्हें धीरे से वहां लिटा दिया..उनकी बहन के साथ….
मम्मी ने जब देखा की दीपा उनके साथ लेटी है…तो उन्होंने अपना एक हाथ उसके मुम्मे पर रख दिया और उसे दबाने लगी…दीपा आंटी ने भी अपना एक हाथ मम्मी के चुचे पर रखा और उसे दबाने लगी..मैंने अपना लंड सही तरह से सेट किया दीपा आंटी की चूत में और उनकी टाँगे उठा कर धक्के लगाने लगा…
अह्ह्ह अह्ह्ह्ह अह्ह्ह अह्ह्ह ऑफ ऑफ ओफ्फ्फ ओफ्फ्फ… ग्गग्ग्ग म्मम्मम …..
पापा भी मेरे साथ खड़े हुए ऋतू की चूत का बेंड बजा रह