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Gharelu Chudai Samaroh 181 38.76%
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  #3351  
Old 12th October 2011
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  #3352  
Old 17th October 2011
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  #3353  
Old 17th October 2011
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  #3354  
Old 24th November 2011
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  #3355  
Old 24th November 2011
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Thumbs up कम्प्यूटर लैब में तीन लौड़ों से चुदी

कम्प्यूटर लैब में तीन लौड़ों से चुदी
लेखिका : वंदना (काल्पनिक नाम)

मैं एक तेतीस साल की ज़िन्दगी को जी लेने वाली सोच की मालिक हूँ। मुझे ज़िंदगी अपने ढंग से मस्ती के साथ जीना अच्छा लगता है। मैं एक पढ़ी-लिखी, सैक्सी फिगर वाली बेहद खूबसुरत मॉडर्न महिला हूँ। तेतीस साल की ज़िंदगी में अब तक मैं बहुत से लौड़े ले चुकी हूँ।

सोलह साल की थी जब मैंने अपनी सील तुड़वाई थी और फिर उसके बाद कई लड़के कॉलेज लाइफ तक आये और मेरे साथ मजे करके गए। मैं खुद भी कभी किसी लड़के के साथ सीरियस नहीं रही थी क्योंकि मुझे तो हमेशा सिर्फ चुदाई से मतलब था।

अब मैं एक सरकारी स्कूल में कंप्यूटर की वोकेशनल स्कीम के तहत कंप्यूटर लेक्चरर हूँ, वो भी सिर्फ लड़कों के स्कूल में! वैसे तो वहाँ मेरे अपने कुछ ख़ास सहयोगियों के साथ स्कूल से बाहर अवैध संबंध हैं। मैं अपने पति से अलग रहती हूँ, मेरी दो बेटियाँ हैं जो अपने पापा के साथ दादा-दादी के घर में ही रहती हैं। मेरे पति मर्चेंट नेवी में इंजिनीयर हैं और साल में कुछ ही हफ्तों की छुट्टी पर घर आ पाते थे। मेरा कैरेक्टर तो पहले से ही ढीला था और अकेलेपन ने मुझे और बिगाड़ दिया था। मेरे पति देव ने मुझे समझाने के बजाये छोड़ ही दिया वैसे भी उनके समझाने से मैं सुधरने वाली तो थी नहीं।

पति से अलग होने के बाद तो मुझे पूरी छूट मिल गयी जिससे मैं और अय्याश हो गयी। अब मैं आत्मनिर्भर हूँ, अकेली रहती हूँ, चालीस हज़ार प्रति माह मेरी तनख्वाह है, हर सुख-सुविधा घर में मौजूद है। पति से अलग होने के बाद मैं हद से ज्यादा बिगड़ चुकी हूँ और अपने नये-नये आशिकों को रात-रात भर अपने घर रखती हूँ। सिगरेट-शराब तो रोज़ाना खुल कर पीती ही हूँ और कुछ खास मौकों पर कोकेन, एलेस्डी, एक्स्टसी जैसी रेक्रीऐशनल नशीली ड्रग्स का सेवन भी कर लेती हूँ। अपने बिगड़े चाल-चलन की वजह से स्कूल और मेरे आस-पड़ोस में काफी बदनाम हूँ लेकिन मैंने कभी अपनी बदनाम रेप्यूटेशन की परवाह नहीं की। मेरा मानना है कि बेवफ़ा ज़िंदगी का कोई भरोसा नहीं है... इसलिये मैं जवानी के सारे मज़े लूट लेना चाहती हुँ।

आज मैं आपके सामने अपनी एक सबसे अच्छी चुदाई के बारे लिखने लगी हूँ ज़रा गौर फरमाना !

सजने संवरने का भी मुझे बहुत शौक है। मुझे ऐसे कपड़े पहनना पसंद हैं जिनमें मेरे जिस्म की नुमाईश हो सके। जैसे कि चोलीनुमा छोटे-छोटे बैकलेस ब्लाउज़ के साथ नाभि-कटि-दर्शना झीनी साड़ी या गहरे-खुले गले के सूट और वो भी छातियों से कसे हुए, पीठ पर जिप, कमर से कसे, पटियाला या फिर चूड़ीदार सलवार, ऊँची ऊँची हील की सैंडल इत्यादि! दरअसल मुझे अपने जिस्म की नुमाईश करके मर्दों को तड़पाने में बहुत मज़ा आता है।

जून-जुलाई की बात है, सब जानते हैं पंजाब में कितनी गर्मी पड़ती है इन दिनों! स्कूल बंद थे लेकिन आजकल हमारे महकमे में एजुसेट एजूकेशन ऑनलाइन क्लास लगती है, उसके तहत पांच दिन का सेमीनार लगा। बाकी सारा स्कूल बंद था। साइंस ग्रुप में सिर्फ पांच लड़के हैं। गर्मी बहुत थी पहले ही जालीदार मुलायम सा सूट डाला था बाकी पसीने से मेरा सूट बदन से चिपक जाता!

पांच में से तीन लड़के सिरे के हरामी थे, उनकी नज़रें तो मेरी चूचियों पर टिकी रहती, बस मेरे जिस्म को देख-देख अन्दर ही आहें भरते होंगे!

पहला दिन ऐसे ही निकला, दूसरे दिन मैंने और पतला नेट का सूट पहना और खुल कर अपनी सुडौल चूचियों की नुमाईश लगाई। मुझे शुरु से ही इस तरीके से लड़कों को अपना जिस्म दिखाना अच्छा लगता था। इससे मुझे बहुत गर्मी मिलती थी। वो आज मुझे आँखें फाड़े देखते ही रह गए। गर्मी की वजह से मैं आज कंप्यूटर लैब में बैठ गई, ए.सी लैब थी। मैंने उनको छुट्टी कर दी और खुद लैब में चली गई और ए.सी फुल स्पीड पे चला दिया। दरवाज़ा थोड़ा बंद करा और सिगरेट सुलगा कर मैंने पॉर्न कहानियों की साईट खोल ली और साथ में ही एक और अडल्ट वेबसाइट! मुझे शुरू से ही अश्लील किताबें और गंदी ब्लू फिल्में देकने का शौक था।

पर्स में से लाइम फ्लेवर जिन का पव्वा निकाल कर उसकी चुसकियाँ लेते हुए मैं वहाँ कहानियाँ पड़ने लगी। पढ़ते-पढ़ते मेरी चूत गीली हो गई और मम्मे तन गए। देखते और पढ़ते हए मेरा हाथ मेरी सलवार में घुस गया। मैंने अपना नाड़ा थोड़ा ढीला कर लिया और पैंटी नीचे खिसका कर अपनी चूत में ऊँगली करने लगी। जिन की नीट चुस्कियों से जल्दी ही मुझ पर सुरूर छाने लगा था। दरवाज़े को कोई कुण्डी नहीं लगाई थी क्यूंकि स्कूल में सिर्फ मैं ही थी। चौंकीदार शाम को छः बजे आता था इसलिये स्कूल में आज अपना ही राज़ था।

पर्स में से पॉर्न सी.डी निकाल कर लगाई और देखने लगी। अब मैं आराम से मेज पर आधी लेट गई और सिगरेट के कश और जिन की चुसकियों का मज़ा लेते हुए अपना कमीज़ उठाकर मम्मे दबाने लगी। मुझे क्या मालूम था कि मैं तो सिर्फ कंप्यूटर पर मूवी देख रही हूँ, तो कोई और मेरी लाइव मूवी देख रहा है। तभी किसी का हाथ मेरे कंधे पर आन टिका। मैं घबरा गई, मेरा रंग उड़ने लगा।

वो तीनों हरामी लड़के मेरे पीछे खड़े थे।

“तुम यहाँ क्या कर रहे हो?”

“मैडम! आप इस वक्त यहाँ क्या कर रही हो?”

“शट- अप एंड गेट लोस्ट फ्रॉम माय लैब!”

वो बोले- “मैडम, लैब सरकारी है आपकी नहीं ! हमें तो कुछ प्रिंट्स निकालने थे। क्या पता था कि कुछ और दिख जाएगा!”

उनसे बातें करते हुए अपनी सलवार और कुर्ती वैसे ही रहने दी। तभी विवेक नाम का लड़का घूम कर मेरे सामने आया और मेरी जांघों पर हाथ फेरता हुआ बोला- “क्या जांघें हैं यार!”

उसका स्पर्श पाते ही मैं बहकने लगी, नकली डांट लगाने लगी।

राहुल ने अपना हाथ मेरी कुर्ती में डालते हुए मेरे चूचूक मसल दिए और पंकज ने मेरा हाथ पकड़ा और अपनी जिप खोल कर अपनी पैंट में अन्दर घुसा दिया। मैं तो लंड लेने के लिये हमेशा ही तैयार रहती हूँ और इस वक्त तो वैसे भी मैं चुदाई के मूड में थी और जिन का अच्छा खासा नशा मुझ पे सवार था। उसका लिंग हाथ में पकड़ कर ही मैंने अब बेशर्म होने का फैसला कर लिया। एक दम से मेरे में बदलाव देख वो थोड़ा चौंके।

“मादरचोद कमीनों, हरामियो! कुण्डी तो लगा लो!”

“भोंसड़ी वालो! एक जना जाकर स्कूल के मेन-गेट को लॉक करके आओ!” मैंने उन्हें ऑर्डर दिया और जिन की बोतल मुँह से लगा कर गटागट पूरा पव्वा पी गयी।

तीनों ने मुझे छोड़ा और मेरे बताये सारे काम करने निकल गए। मैंने अब मूवी की आवाज़ भी तेज़ कर दी और सलवार उतार कर पास में पड़ी कुर्सी पर फेंक दी, फिर कमीज़ भी उतार कर फेंक दी। पर्स में से कोल्ड क्रीम निकाली, उसको चूत और गांड में लगाया।

Last edited by sinsex : 26th November 2011 at 06:40 AM.

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Old 25th November 2011
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Thumbs up कम्प्यूटर लैब में तीन लौड़ों से चुदी

जब वो आये तो मैं सिर्फ ब्रा-पैंटी और हाई पेंसिल हील के सैंडल पहने मेज़ पर लेटी सिगरेट के कश लगा रही थी। तीनों ने मेरे इशारे पर अपनी अपनी पैंट उतार डाली और शर्ट भी। तीनों को ऊँगली के इशारे से पास बुलाया और ब्रा खोलते हुए बारी-बारी तीनों के कच्छे उतार दिए।

हरामियों के क्या लौड़े थे- सोचा नहीं था कि बारहवीं क्लास के लड़कों के इतने बड़े लौड़े होंगे। मैं एक एक कर तीनों के लौड़े चूसने लगी। राहुल और पंकज के लौड़े एक साथ मुँह में डलवाए और विवेक मेरी पैंटी उतार कर मेरी शेव्ड चूत चाटने लगा। उसके चाटने से मेरा दाना और फड़कने लगा, चूचूक तन गये! मैं अब सिर्फ हाई पेंसिल हील के सैंडल पहने बिल्कुल मादरजात नंगी थी।

पंकज ने झट से मुँह में चूचूक लेकर चूसना शुरु किया। राहुल ने भी दूसरा चूचूक मुँह में लेकर काट सा दिया- “हरामी ! ज़रा प्यार से चूस! बहुत कोमल हैं!”

वो बोला- “साली कुतिया कहीं की! मैडम, साली बहन की लौड़ी! रांड कहीं की! नखरा करती है बेवड़ी साली!”

उसने लौड़ा मेरे हलक में उतार दिया, मैं खांसने लगी। वो बोले- “चल कुत्तिया! तेरा रेप करते हैं!”

विवेक ने मेरी गांड पर थप्पड़ जड़ दिए, मेरे बाल नौच कर मेरे हलक में लौड़ा उतार दिया।

“पागल हो गए हो कुत्तों?”

“हाँ!”

बुरी तरह से मेरी छाती पर दांतों के निशान गाड़ डाले। विवेक ने मेरी चूत में अपना लौड़ा डाल दिया, पंकज और राहुल मेरा मुँह चोदने लगे, साथ में मेरे चूचूक रगड़ने लगे।

“आहऽऽऽ उहऽऽ!”

उसका मोटा लौड़ा मेरी चूत चीर रहा था- “ले साली कुतिया! बहुत सुना था तेरे बारे में तेरे मोहल्ले से! वाकई में तू बहुत प्यासी और चुदासी औरत है!”

“हाँ कमीनो! हूँ मैं रांड! क्या करूँ? मेरी चुत और गाँड में दहकती आग बुझने का नाम ही नहीं लेती! हाय और मार बेहनचोद मेरी चूत! विवेक जोर लगा दे सारा!”

उसने साथ में अपनी दो उंगलियों को मेरी गांड में घुसा दिया और कोल्ड क्रीम लगाते लगाते चार उंगलियों को घुसा दिया। फिर चूत से लौड़ा निकाला और एक पल में गांड में घुसेड़ दिया- चीरता हुआ लौड़ा घुसने लगा- मेरी गाँड फटने लगी!

उसने वैसे ही मुझे उठाया और नीचे कारपेट पर मुझे ले गया। खुद सीधा लेट गया, मैं उसकी तरफ पिछवाड़ा करके उसके लौड़े पर बैठती गई और लौड़ा गाँड में अंदर जाता रहा। वो वॉलीबाल की तरह उछल रहा था कि पंकज ने मेरी चूत पर अपने होंठ रख दिए। राहुल ने मुँह में डाल रखा था।

“हाय कमीनी अब बोल के दिखा- बहुत बकती है साली क्लास में!”

सही में मैं कुत्तिया बन चुकी थी, मैं खांसने लगती तब वो मेरे मुँह से लंड निकालता। लेकिन पंकज के होंठों की मेरी चूत पर हो रही करामात मेरी सारी तकलीफ ख़तम कर देती। विवेक गांड मारता जा रहा था कि पंकज खड़ा हुआ और आगे से आकर विवेक की जांघों पर बैठ गया और अपना आठ इंच का लौड़ा चूत पे रगड़ने लगा।

Last edited by sinsex : 25th November 2011 at 11:06 PM.

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  #3357  
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Thumbs up कम्प्यूटर लैब में तीन लौड़ों से चुदी

“हाय हाय डाल दे तू भी साले!” मस्ती और नशे में मेरी अवाज़ बहक रही थी।

उसने अपना मोटा लौड़ा चूत में घुसाना शुरु किया तब विवेक रुक गया। लेकिन जैसे ही उसका पूरा घुस गया, दोनों हवाई जहाज की स्पीड पर मेरी ठुकाई करने लगे। मुँह से सिसकियाँ फ़ूट रही थी- “हाय! चोदो मुझे!”

राहुल ने फिर से मुँह में डाल दिया और हो गया शुरु!

पंकज तेज़ होता गया, विवेक उससे भी ज्यादा तेज़ हो गया तो पंकज रुक गया। विवेक ने पंकज को हटा दिया और एकदम से मुझे पलट कर नीचे किया और तेजी से मेरी छिनाल गाँड चोदने लगा।

“आह उह” करता करता उसने अपना सारा माल मेरी गांड में छोड़ना शुरु किया- सारी खुजली ख़त्म!

अब पंकज सीधा लेट गया और मैंने उसके लौड़े पर बैठ कर उसे अपनी गांड में गचक लिया, राहुल ने पंकज की तरह अपना लौड़ा मेरी चूत में घुसा दिया। विवेक का लौड़ा मेरी गीली गांड से भर कर निकला था। मेरी गाँड के गंदे माल और उसके खुद के रस से लथपथ लौड़ा मैंने मुँह में ले कर सारा चाट लिया, एक बून्द भी बेकार नहीं जाने दी मैंने!

विवेक पास में लेट हांफने लगा। पंकज ने भी वैसे ही रफ़्तार खींची, राहुल को उतार दिया और घोड़ी बना के गांड में लौड़ा डाला और फिर चूत में डालते हुए रफ़्तार पकड़ी। राहुल ने लौड़ा मेरे मुँह में ठूंस दिया। पंकज ने दोनों हाथों से नीचे से भैंस के थनों की तरह लटक रहे कसे हुए मम्मों को पकड़ कर झटके दिए। एक भैंस की तरह मानो मेरा दूध चो रहा हो! ज़बरदस्त तरीके से पकड़ रखे थे उसने और पीछे दन दना दन झटके मारते हुए उसने एक दम से मेरे घुटनों को खिसकाते मुझे कारपेट पर गिरा दिया लेकिन लौड़ा बाहर नहीं आने दिया। मेरे मम्मे कारपेट से रगड़ खाने लगे। थोड़ी चुभन होने लगी। लौड़ा भी कस गया लेकिन वो नहीं रुका।

दोनों एक साथ झड़े। उसने सारा माल मेरी बच्चेदानी के मुँह के पास निकाल दिया। न जाने कितने वक्त के बाद मैंने किसी को बिना कंडोम चूत में छूटने का मौका दिया। एक साथ दोनों का कम जब मिला- मैंने आंखें मूँद ली और उसके साथ चिपक गई! फिर अलग हुए तो उसने मुँह में डाल कर लौड़ा साफ़ करवाया। राहुल उठा और मुझे फिर से पटक कर मेरे ऊपर सवार हो गया। सबमें से राहुल का लौड़ा सबसे लम्बा मोटा और फाड़ू था। उसने बेहतरीन तरीके से मेरी चूत मारी। झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। इतने में विवेक का फिर खड़ा हो चुका था।

लेकिन राहुल क्या चोदू था- उसने मुझे फिर से झाड़ दिया और गांड में ठेल कर सारा लावा वहीं छोड़ दिया।

विवेक का तन चुका था, पंकज तैयार था।

पूरा दिन स्कूल की लैब में ए.सी के सामने तीनों ने न जाने कितनी बार मुझे रौंदा!

घड़ी देखी तो शाम के साढ़े पांच बज चुके थे और छः बजे चौकीदार स्कूल में आता था। उसको तो सब मालूम था मेरे बारे में, क्योंकि कईं बार मेरे साथी टीचरों ने उसके कमरे में मुझे चोदा था। मैं अपनी सिगरेट शराब भी कईं बार उससे ही मंगवाती थी। लेकिन वो तीनों लौंडे ये नहीं जानते थे और नहीं चाहते थे कि चौकीदार उन्हें देखे!

जब हम निकले तो मैं काफी नशे में थी और मेरे कदम हाई हील सैंडलों में थोड़े लड़खड़ा रहे थे। मेरी जाँघें उन तिनों के वीर्य से चिपचिपा रही थी। वो तीनों लौंडे फटाफट निकल कर भाग गये लेकिन चौंकीदार ने उन्हें निकलते हुए पीछे से देख लिया था पर मुझे कोई परवाह नहीं थी। मैंने अपनी स्कूटी स्टार्ट करने की कोशिश की लेकिन वो स्टार्ट नहीं हुई, सेल्फ ख़राब था। मैंने नशे में डगमगाते हुए किक लगाने की कोशिश की तो ऊँची हील की सैंडल में मेरा पैर किक से फिसल गया और स्कूटी मेरे हाथ से छूट कर गिर पड़ी। चौंकीदार भागता हुआ आया तो मैंने उससे से कहा- “स्टार्ट कर दे किक से!”

चौकीदार स्कूटी खड़ी करते हुए बोला- “मैडम मेरे लौड़े को कब मौका दोगी आप? आज फिर से लड़कों से ठुकवा बैठी हो! मैं कौन सा कम हूँ? माना पोस्ट चौकीदार की है लेकिन कौन सा काला कलूटा हूँ? पूरा मजा दूंगा!” किक मारते मारते यह सब बोल रहा था। पहले भी उसने एक दो बार इस तरह की गुहार की थी पर मैंने प्यार से झिड़क कर टाल दिया था। आखिर था तो मामुली सा चौंकीदार ही। हालांकि मुझे तो सिर्फ चुदाई से मतलब था ना कि उसकी औकाद या जात-पात से लेकिन मैं अपने दूसरे आशिकों को नाराज़ नहीं करना चाहती थी।

उसने एक दम से अपना लौड़ा निकाला और दिखाते हुए बोला- “देखो इसको! अभी सोया हुआ है फिर भी कितना मोटा है! जब आपका हाथ लगेगा तो दहाड़ेगा यह!”

सही में उस जैसा लौड़ा आज तक नहीं देखा था। वो खुद भी छः फुट तीन इंच लम्बा-चौड़ा मर्द था, सुडौल मजबूत शरीर का मालिक था। छब्बीस -सत्ताईस साल उम्र होगी उसकी।

स्कूटी स्टार्ट हुई तो वो बोला- “मैडम, जवाब तो देती जाओ?”

मैंने गौगल्ज़ लगाते हुए कहा- “यहाँ स्कूल में नहीं.... रात ग्यारह बजे मेरे घर आ जाना लेकिन खबरदार किसी को पता न चले! इंतज़ार करुँगी!”

वो खुश हो गया और बोला, “जरूर मैडम... आप जहाँ बुलायेंगी... पहुँच जाऊँगा आपकी खिदमत में! आप भी ध्यान से घर जाना... काफी नशे में लग रही हो... ज्यादा पी ली लगती है.... ऐक्सिडन्ट ना कर बैठना!”

“चिंता मत कर.... मैं जितने नशे में होती हूँ उतनी ज्यादा नॉर्मल होती हूँ....,” मैं स्कूटी पर बैठ कर हंसते हुए बोली और जोर से एक्सीलेटर घुमाते हुए झटके से स्कूटी आगे बढ़ा दी।

रात को घर में क्या-क्या हुआ? पढ़ें अगले भाग में: “कम्प्यूटर लैब से चौकीदार तक”

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Great update
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Thumbs up कम्प्यूटर लैब से चौकीदार तक

कम्प्यूटर लैब से चौकीदार तक
लेखिका : वंदना (काल्पनिक नाम)

पिछले भाग (कम्प्यूटर लैब में तीन लौड़ों से चुदी) में आपने पढ़ा कि कैसे बारहवीं क्लास के लड़कों ने स्कूल की कम्प्यूटर लैब में पुरा दिन मुझे रौंदा। आओ ले चलती हूँ उस रात को हुई अपनी मस्त ठुकाई पर! ज़बरदस्त चुदाई जो मुझे जीवन लाल चौंकीदार ने दी!

सच में वो फौलाद था जिसने मेरी तसल्ली करवा दी !

जो कहता था वो सच करके दिखाया और मेरा पूरा-पूरा बाजा बजाया उसने!

वैसे भी मेरा बहुत साथ दिया था उसने। मेरे लिए अपनी सरकारी नौकरी खतरे में डालता था जब भी मुझे स्कूल में दूसरे मास्टरों के साथ एय्याशी करनी होती तो हमें अपना कमरा हमें देता, हमें मौके देता! जरूरत पड़ने पर मैं उससे ही शराब या सिगरेट खरीदने भेज देती थी और उसने कभी आनाकानी नहीं की। इसलिए मैंने उसको आज रात घर बुलाया था ताकि उसको अपना जिस्म सौंप सकूँ! आज फिर मेरी खुशी के लिये फिर से नौकरी खतरे में डालने वाला था क्योंकि उसका काम तो स्कूल में रह कर चौकीदारी करना था और वो मेरे कहने पर पूरी रात मेरे घर पर गुज़ारने वाला था।

घर पहुँच कर मैं ठंडे पानी से नहाई और मैं खाना भी जल्दी खा लिया। उसके बाद ग्यारह बजे का इंतज़ार करते हुए इंटरनेट पर नंगी मुवी देखते हुए मोटे से केले से जी भर कर अपनी चूत चोदते हुए कईं बार झड़ी। इसी दौरान चिल्ड पेप्सी के साथ जिन का एक और पव्वा भी पी गयी थी और नशे में बदमस्त थी। पूरे ग्यारह बजे उसने मेरे घर में दस्तक दी। तेज़ गर्मी के दिन थे लेकिन ए-सी चलने की वजह से घर में काफी सुहावना मौसम था। घर में मैं अक्सर नंग धड़ंग ही रहती थी क्योंकि मैं अकेली ही थी और कोई आता भी था तो कोई आशिक ही! इसलिए मैंने सिर्फ बिकिनी वाली छोटी सी पेंटी और काफी ऊँची पेंसिल हील के सैंडल पहने हुए थे। ऊपर से घुटनों तक की नाइटी पहनी हुई थी जो इतनी झीनी थी कि उसे पहनना या ना पहनना एक समान था।

वो अपने साथ देसी शराब की बोतल लेकर आया था। । वो खुद ही रसोई देख कर ग्लास लाया। मैंने भी दो सिगरेट जला लीं।

“मैडम, नारंगी ठर्रा है.... पियोगी या अपनी अंग्रेज़ी पियोगी?” एक ग्लास में पैग बनाते हुए उसने पूछा। वैसे तो मैं अंग्रेज़ी शराब जैसे कि जिन, रम, व्हिस्की वहैरह ही पिती थी लेकिन देसी ठर्रे से भी मुझे परहेज नहीं था। मैंने पहले भी कईं बार देसी शराब पी थी। मेरा तजुर्बे में देसी शराब स्वाद में चाहे तीखी और नागवार होती है लेकिन चाँद पे पहुँचने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। और मैं तो पहले ही नशे में बादलों में उड़ रही थी और चाँद पे जाने के लिये बिल्कुल तैयार थी। “अब तू इतने दिल से लाया है तो मैं भी ठर्रा ही पियूँगी... भर दे मेरा भी ग्लास!” मैं अपनी सिगरेट का कश लेते हुए बोली और दूसरी सिगरेट उसे थमा दी।

“बहुत प्यासा हूँ तेरी चूत का! मेरा लौड़ा खाएगी तो रोज़ ना बुलाया तो मेरा नाम बदल देना!”

“हाँ जीवन! तूने जब आज मुझे अपने लौड़े की झलक दिखलाई, उसी वक़्त जान गई थी कि तू बहुत कमीना है !”

“मैडम इस स्कूल में उन्नीस साल की उम्र से नौकरी कर रहा हूँ, इन सात-आठ सालों में कई मैडमों ने मुझसे चुदवाया था लेकिन तू सबसे अलग चीज़ है!”


“हाँ! बहुत शौक़ीन हूँ मैं चुदाई की! और तू भी आज अपनी कुत्तिया समझ कर चोद मुझे... बहुत कुत्ती चुदासी राँड हूँ मैं!”

मैं तो पहले से ही लगभग नंगी थी। पेग खींचते ही मैंने पहले उसका पजामा उतारा और ऊपर से ही सहलाया पुचकारा, बाकी का पजामा जीवन ने खुद उतार दिया और मैंने उसका कुरता उतार दिया उसकी छाती पर घंने बालों को देख मेरा सेक्स और भड़क उठा। मुझे बालों वाले मर्द बहुत पसंद हैं। मैंने जीवन की छाती पे ना जाने कितने चुम्बन लिए ! वो मेरे अनारों से खेलता रहा और मैं उसकी छाती से और एक हाथ से उसके लौड़े को मसल रही थी।

“साली पेग बना और अपने हाथों से मुझे जाम पिला!”


मैं रंडी की तरह उठी, नशे में झूमती, ऊँची हील की सैंडलों में लड़खड़ाती मैं गांड मटकाती हुई गई और कोठे वाली रंडी की तरह एक जाम उसको पिलाया, एक खुद खींचा! अब तो शराब का नशा पूरे परवान पर था और ऊपर से चुदाई का नशा, मेरा अपने ऊपर कोई नियंत्रण नहीं रह गया था... बैठे बैठे झूम रही थी... बार-बार सिगरेट हाथों से फिसल जाती... कभी खिलखिला कर हंसने लगती तो कभी गुर्राते हुए गालियाँ बकने लगती... ।

नशे में काँपते हाथों से मैंने एक पल में उसका अंडरवीयर उतार दिया- “ओह माय गॉ...; यह लौड़ा है या अजगर?” मेरी आवाज़ भी बहक रही थी।

“मैंने तभी तुझे कहा था कि यह देख, मेरा सोया हुआ लौड़ा भी दूसरों के खड़े लौड़े जैसा है।“

वास्तव में जैसे जैसे मेरा हाथ उस पे फिरने लगा वो उतना ही भयंकर होने लगा।

“साली चूस ले! जब खड़ा हो गया तुझसे चूसा नहीं जायेगा! और फिर जबड़ा तोड़ दूंगा!”

ज़बरदस्ती से मैं डर सी गई और उसके लौड़े के टोपे को चूसने लगी। सही में फिर वो मुझ से मुँह में नहीं लिया जा रहा था तो मैंने उसकी एक गोटी को चूसना शुरु कर दिया और साथ साथ जुबान से उसके लौड़े को चाट रही थी। खुश भी थी, थोड़ा डर भी था। उसको भी शराब चढ़ती जा रही थी, पूरी बोतल (खंबा) डकार चुका थे हम दोनों। मैंने लौड़ा चूसते हुए जब ऊपर देखा और एक और पेग लेने की सोची तो देखा- बोतल ख़त्म थी।

“हरामी की औलाद.... साले लाया भी तो एक ही बोतल... अब क्या अपना मूत पियूँगी!” मैंने गुस्से से कहा|

“चल कुतिया, मुझे तेरे साथ सुहाग रात मनानी है! मैं दारु लेकर आया ठेके से। तब तक बन-सवंर के घूंघट लेकर बैठ जा!”

Last edited by sinsex : 26th November 2011 at 06:40 AM.

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वो दारू लेने चला गया। मैं भी नशे में झूमती हुई उठी और किसी तरह से सैक्सी सा ब्रा-पेंटी का सेट पहना, लाल रंग की आकर्षक साड़ी पहनी... पहनी क्या, बस किसी तरह लपेट ली... नशे में चुदाई के अलावा और कुछ भी कर पाने की लियाकत तो बची नहीं थी... पेंसिल हील के जो सैंडल पहने हुए थे वही पहने हुए बिस्तर के बीच बैठ गई और पल्लू सरका कर घूंघट कर लिया। जीवन अन्दर आया, कुण्डी लगा मेरे पास आकर मेरा घूंघट उठाया और मेरे होंठ चूसने लगा। मैं भी शरमा के दुल्हन का ढोंग कर रही थी। केले के छिलके की तरह उसने मेरा एक-एक कपड़ा उतार दिया। अब मैं सिर्फ उँची ऐड़ी वाले सैंडल पहने बिल्कुल नंगी उस चौंकीदार के पहलू में थी। वो मेरे बदन पर दारु डाल कर चाटने लगा।

मुझे भी कब से तलब हो रही थी तो मैंने भी एक दो पेग लगाए और फिर जीवन मुझ पर छाने लगा। उसका लौड़ा साधारण नहीं था, हब्शी जैसा था! वो मुझे खींच के बेड के किनारे लाया, खुद खड़ा हुआ और मेरी टाँगें खोल ली और मोटा लौड़ा चूत पे टिका दिया और झटका मारा।

मेरी सांसें रुक गई! नशे में चूर होने के बावजूद जान निकल रही थी मेरी! लेकिन वो नहीं माना!

मेरी चूत फट रही थी, उसने पूरा लौड़ा घुसा दिया जो मेरी बच्चेदानी को छूने लगा!

मैं गिड़गिड़ा रही थी, वो भी नशे में था पर मुझसे कम नशे में था।

वो हर बार पूरा लौड़ा निकालता, फिर डालता!

मैं चीखती रही- चिल्लाती रही- गंदी गंदी गालियाँ बकती रही- जीवन नहीं रुका! और फिर उसने मुझे घोड़ी बना दिया और मुझे चोदने लगा!

वोही लौड़ा अब मुझे स्वर्ग की सैर करवाने लगा था और मेरी गांड खुद ही हिल-हिल कर चुदवाने लगी। लेकिन वो नहीं झड़ने वाला था, उसने मुझे अपने लौड़े पर बिठा फ़ुटबाल की तरह उछाला।

“हाय! तौबा! क्या मर्द है साले! वाह मेरे जीवन लाल शेर! फाड़ दे आज! इस कुतिया को चलने लायक मत छोड़ना!”

पूरी रात जीवन ने मेरी चूत और गाँड दोनों का भुर्ता बना दिया। सुबह होते ही वो तो चला गया लेकिन मैं उस दिन स्कूल नहीं जा पाई। ठर्रे के हैंग-ओवर से सिर तो दर्द से फटा ही जा रहा था, चूत और गाँड भी सूज गयी थी। पूरा दिन कोसे पानी से चूत और गाँड की टकोर करती रही, तब जाकर सूजन उतरी।

और उसके बाद तो हर रोज़ छुट्टी के बाद स्कूल के किसी ना किसी कमरे में चुदवाने लगी!

मैं अपने दूसरे आशिकों को नज़रअंदाज़ करने लगी और सिर्फ जीवन से चुदवाने लगी। उसका लौड़ा था ही निराला कि मुझे और किसी का पसंद ही नहीं आता। वो भी मुझ से बहुत प्यार करने लगा। वो मुझसे शादी करना चाहता था और वो अपनी बीवी को छोड़ देता पर उसके सालों ने उसकी जमकर पिटाई करवा दी। मुझे भी शादी में कोई दिलचस्पी नहीं थी - सिर्फ उसके हलब्बी लौड़े से मतलब था। वो अपनी बीवी को छोड़ मेरे साथ मेरा रखैल बन कर रहने लगा। मैं जीवन के बच्चे की माँ तक बनने वाली हो गई लेकिन मैंने समय रहते बच्चा गिरवा दिया। करीब छः-सात महीने वो मेरा रखैल बन कर मेरे घर रहा और जब भी जैसे भी मैं चाहती वो दिन रात मुझे चोदता। कभी शिकायत का मौका नहीं दिया। लेकिन मेरी खुशकिस्मती को किसी मादरचोद की बुरी नज़र लग गयी और एक दिन स्कूल जाते वक्त तेजी से आ रहे एक ट्रक की चपेत में आ कर उसकी मौत हो गयी।

दोस्तो, यह थी मेरी एक और चुदाई!

जीवन लाल चौंकीदार के चले जाने के गम से मैं किस तरह उभरी... मैं किस-किससे कैसे चुदी, यह जानने के लिए पढ़ें अगली कड़ी – “कम्प्यूटर सेन्टर”|

Last edited by sinsex : 26th November 2011 at 06:34 AM.

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